छत्तीसगढ़ / रायपुर

स्वामित्व योजना के तहत राजनांदगांव जिले में 1,347 ग्रामीणों को सौंपे गए संपत्ति के वैधानिक अधिकार अभिलेख’

 ग्रामीणों को मिल रही कानूनी पहचान, शासन की इस विशेष पहल से बढ़ा जनता का भरोसा’

जिले के 626 ग्रामों में अधिकार अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर जारी’

रायपुर, 24 मई 2026

राजस्व विभाग द्वारा स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में निवासरत नागरिकों को उनकी संपत्ति का वैधानिक मालिकाना हक प्रदान करने की दिशा में निरंतर ठोस कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजनांदगांव जिले के 626 ग्रामों में मैप-02 एवं मैप-03 के तकनीकी आधार पर अधिकार अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया तेजी से प्रगति पर है। राजस्व विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के सभी लक्षित 626 ग्रामों के मैप-02 एवं मैप-03 प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 23 ग्रामों का अंतिम प्रकाशन भी सफलतापूर्वक किया जा चुका है। 

जिले में 80 हजार से अधिक अधिकार अभिलेख तैयार करने का लक्ष्य

        उपलब्ध मानचित्रों (मैप-02 एवं मैप-03) के आधार पर राजनांदगांव जिले में कुल 80,042 अधिकार अभिलेख तैयार किए जाने का अनुमान है। इस वृहद लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 1,347 अधिकार अभिलेख पूर्ण कर संबंधित पात्र हितग्राहियों को वितरित किए जा चुके हैं, जबकि शेष 78,695 अभिलेखों को तैयार करने का कार्य प्रक्रियाधीन है। तहसीलवार प्रगति की स्थिति इस प्रकार है - राजनांदगांव तहसील में 16 हजार 816 संभावित अधिकार अभिलेखों के विरुद्ध 112 अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। छुरिया तहसील में 10 हजार 667 संभावित अधिकार अभिलेखों में से 882 अभिलेख तैयार कर हितग्राहियों को वितरित किए जा चुके हैं। इसी प्रकार कुमरदा तहसील में 9 हजार 377 संभावित अधिकार अभिलेखों में से 238 अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। इसी प्रकार डोंगरगांव तहसील में 16 हजार 944 संभावित अधिकार अभिलेखों में से 115 अधिकार अभिलेख तैयार कर हितग्राहियों को प्रदान किए गए हैं। राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि कुछ तकनीकी कारणों से जिन स्थानों पर मैप-02 त्रुटिपूर्ण पाए गए हैं, वहां संशोधन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूर्ण होते ही शेष पात्र हितग्राहियों को भी त्वरित रूप से अधिकार अभिलेख वितरित कर दिए जाएंगे। 

ग्रामीणों के जीवन में वित्तीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की नई सुबह 

       स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को उनकी अचल संपत्ति के पुख्ता वैधानिक दस्तावेज प्राप्त हो रहे हैं। इस कानूनी पहचान के मिल जाने से अब ग्रामीणों को बैंकों से ऋण प्राप्त करने, विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ उठाने तथा अन्य वित्तीय व आर्थिक सुविधाओं को हासिल करने में बेहद आसानी हो रही है। शासन की यह दूरदर्शी पहल ग्रामीण अंचलों में सुरक्षा, आपसी विश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को निरंतर मजबूत कर रही है।

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