<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>देश-विदेश - Dainandini Feed</title><link>https://dainandini.in/</link><description>Dainandini Feed Description</description><item><title>सादर प्रकाशनार्थ आलेख- सेवा संकल्प अभियान : जनविश्वास ही राष्ट्र निर्माण की शक्ति</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13015</link><description>तिष्ठा में,
संपादक महोदय जी,
सादर प्रकाशनार्थ आलेख- सेवा संकल्प अभियान : जनविश्वास ही राष्ट्र निर्माण की शक्ति अप्रकाशित एवं अप्रसारित कृत्ति हैं। कृपया इसे प्रकाशित करने का कष्ट करेगें।
मैं आपका सदैव आभारी रहूंगा।



आपका कृपाकांक्षी


हेमेन्द्र क्षीरसागर,
पत्रकार, लेखक व स्तंभकार


सेवा फर्नीचर के सामने,
भटेरा चौकी, वार्ड न. 02, बालाघाट,
जिला - बालाघाट, मप्र- 481001
Mobile- 9424765570
Whatsapp- 9174660763
Email, Facebook, Twitter, Blogger: hkjarera@gmail.com


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सेवा संकल्प अभियान : जनविश्वास ही राष्ट्र निर्माण की शक्ति


 हेमेन्द्र क्षीरसागर, पत्रकार, लेखक व स्तंभकार


सेवा संकल्प अभियान भारतीय राजनीति में केवल एक संगठनात्मक अवसर नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को स्मरण करने का अवसर बन चुका है। प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक भारतीय जनता पार्टी द्वारा मनाया जाने वाला यह अभियान विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा-संकल्प के 25 वर्षों की यात्रा से भी जुड़ा है। नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में संवैधानिक दायित्व संभाला और वर्ष 2014 से देश के प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। इस दीर्घ सार्वजनिक यात्रा में गरीब, वंचित, किसान, महिला, श्रमिक, युवा और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना उनके राजनीतिक चिंतन का प्रमुख आधार रहा है।


सेवा पखवाड़ा क्यों महत्वपूर्ण?


सेवा संकल्प अभियान का मूल उद्देश्य प्रधानमंत्री के जन्मदिवस को जनसेवा से जोड़ना है। इसके अंतर्गत भाजपा कार्यकर्ता समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जाकर आशीर्वाद का दीया, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, पौधरोपण, गरीब कल्याण, जनजागरूकता और सामाजिक सहभागिता जैसी गतिविधियों में भाग लेते हैं। इसका सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि राजनीति केवल चुनाव और सत्ता प्राप्ति तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के प्रति निरंतर उत्तरदायित्व का माध्यम बने।


जनभागीदारी का अभियान


आज के समय में जब राजनीतिक दलों से जनता की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं, तब सेवा संकल्प संगठन और समाज के बीच संवाद का अवसर भी प्रदान करता है। किसी जरूरतमंद की सहायता, सार्वजनिक स्थान की स्वच्छता, रक्तदान, पौधा लगाना या स्वास्थ्य जागरूकता फैलाना। ये छोटे प्रयास मिलकर सामाजिक परिवर्तन की बड़ी ताकत बन सकते हैं। सेवा पखवाड़े की सार्थकता तभी है, जब यह केवल कार्यक्रमों और तस्वीरों तक सीमित न रहकर व्यवहार में सेवा-संस्कार का रूप ले।


25 वर्षों की यात्रा से सीख


नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की यात्रा को यदि एक शब्द में परिभाषित किया जाए तो वह है सेवा। इस अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने भी यही चुनौती है कि वे सेवा को केवल अभियान नहीं, बल्कि अपनी कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाएं। लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक संगठन की वास्तविक शक्ति उसके कार्यकर्ताओं और जनता के बीच संबंधों में निहित होती है। सेवा के माध्यम से यह संबंध अधिक आत्मीय और मजबूत बनाया जा सकता है।


संकल्प का अवसर


प्रधानमंत्री का जन जीवन यदि समाज के कमजोर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाने का माध्यम बने। कोई पौधा भविष्य की हरियाली का आधार बने। किसी मरीज को रक्त मिले। किसी जरूरतमंद को सहायता मिले और किसी युवा को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिले। तभी सेवा पखवाड़े की वास्तविक सार्थकता सिद्ध होगी। सेवा संकल्प अभियान इसलिए केवल 17 सितंबर से शुरू होने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा से राष्ट्र निर्माण की उस सोच को मजबूत करने का अवसर है, जिसमें राजनीति का अंतिम लक्ष्य समाज और राष्ट्र का कल्याण हो। 25 वर्षों के सेवा-संकल्प का संदेश स्पष्ट है। जनसेवा ही जनविश्वास का आधार और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है।
</description><guid>13015</guid><pubDate>2026-09-20 13:59:16 2:01:56 pm</pubDate></item><item><title>ट्रंप-शी जिनपिंग की बातचीत में एआई, ट्रेड और रेयर अर्थ पर रहेगा फोकस</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13011</link><description>वाशिंगटन ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते होने वाली राजकीय यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), व्यापार और रेयर अर्थ सप्लाई पर चर्चा करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि खनिज आपूर्ति के लिए एक्सपोर्ट कंट्रोल में ढील देने का कोई सौदा नहीं होगा, क्योंकि बीजिंग पहले ही सप्लाई का वादा कर चुका है। वाशिंगटन में होने वाली यह बातचीत न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप के संबोधन के बाद होगी। शुक्रवार को हुई ब्रीफिंग में अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप अपने भाषण में ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं, गाजा और अपनी सरकार के कूटनीतिक प्रयासों पर बात करेंगे।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों नेताओं के एजेंडे में एआई और मौजूदा व्यापार समझौता (जिसे 'बुसान ट्रूस' कहा जा रहा है) शामिल है। अधिकारियों ने इस मुद्दे पर किसी समझौते की घोषणा नहीं की और नतीजे को लेकर कोई अनुमान लगाने से इनकार कर दिया। रेयर अर्थ को लेकर अधिकारी ने कहा कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि चीन अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खनिजों की आपूर्ति के लिए पहले से किए गए वादों का सम्मान करेगा। अधिकारी ने कहा कि इस मामले में चीन का प्रदर्शन अमेरिकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है।

अधिकारी ने कहा, इस संबंध में चीन का प्रदर्शन हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। प्रशासन ने कुछ गैर-संवेदनशील और गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में चुनिंदा सामानों पर टैरिफ कम करने पर भी चर्चा की है। अधिकारी ने उत्पादों या संभावित कटौती का कोई विवरण नहीं दिया। चीनी कंपनियों की अमेरिकी ऑटोमोबाइल बाजार तक पहुंच के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि ट्रंप राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे। निवेशों को अभी भी लागू नियमों और कानूनों को पूरा करना होगा।

फेंटेनाइल का केमिकल भी दबाव का एक और मुद्दा होगा। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने चीन पर मैक्सिकन कार्टेल को इन केमिकल्स का मुख्य सप्लायर बने रहने का आरोप लगाया और कहा कि हाल की गिरफ्तारियां उस व्यापक कार्रवाई के बराबर नहीं हैं जो वाशिंगटन चाहता है। अधिकारी ने कहा, लेकिन हम बहुत अधिक व्यवस्थित बदलाव देखना चाहते हैं।

</description><guid>13011</guid><pubDate>2026-09-19 16:21:42 4:22:22 pm</pubDate></item><item><title>साहित्य विचारों की आजादी का मंच, पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध: प्रमिला जयपाल</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13010</link><description>सिएटल ।भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने पढ़ने की अहमियत समझाई है। उन्होंने लोगों से सेंसरशिप का विरोध करने और चुनौती दी गई किताबों को पढ़ना जारी रखने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि साहित्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने और दबाई जा रही आवाजों को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। सिएटल में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण के उद्घाटन समारोह में जयपाल ने कहा, मेरे लिए पढ़ना अहिंसक प्रतिरोध का सबसे बड़ा माध्यम है। सिएटल पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित कार्यक्रम में जयपाल ने किताबों के इस उत्सव को अमेरिका और दुनिया के दूसरे हिस्सों में अभिव्यक्ति, असहमति और लोकतांत्रिक बहस पर बढ़ती पाबंदियों के संदर्भ से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।
जयपाल ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने की भी आलोचना की।
उन्होंने अमेरिका में कुछ किताबों पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र किया। इनमें टोनी मॉरिसन की द ब्लूएस्ट आई, द काइट रनर, मिल्क एंड हनी और अरुंधति रॉय की द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स शामिल हैं।

जयपाल ने कहा कि इस तरह के कदम बुनियादी स्वतंत्रताओं के लिए खतरा हैं और उन्होंने इनका विरोध जारी रखने का संकल्प जताया।
उन्होंने कहा, हम अपने लोकतंत्र को फिर से मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे कि हमारे मौलिक अधिकारों को बंद न किया जा सके।

जयपाल ने लोगों से केवल मतदान और सामुदायिक स्तर पर सक्रिय रहने तक सीमित न रहने, बल्कि लगातार पढ़ने, अपने अनुभव साझा करने और उन लेखकों की कहानियों से जुड़ने की भी अपील की, जिनकी आवाज दबाई जा रही है। साहित्य की भूमिका बताते हुए उन्होंने कहा कि यह शक्तिशाली संस्थानों से सवाल करता है और हमारी बातचीत तथा सोच की सीमाओं को विस्तार देता है।

</description><guid>13010</guid><pubDate>2026-09-19 16:19:56 4:20:29 pm</pubDate></item><item><title>मेक्सिको-अमेरिका व्यापार वार्ता में हो रही प्रगति: राष्ट्रपति शिनबाम</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13009</link><description>मेक्सिको सिटी ।मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने कहा कि उन्होंने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की। इस बातचीत में यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (यूएसएमसीए) से जुड़ी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में हुई प्रगति पर चर्चा की गई। रिपोर्ट के अनुसार, दैनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिनबाम ने कहा कि बातचीत द्विपक्षीय संबंधों और दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए बेहतर वित्तीय निश्चितता लाने के मकसद से की गई थी। शिनबाम ने कहा, हम ट्रेड के मुद्दों पर प्रगति कर रहे हैं। मेक्सिको-अमेरिका समझौते तक पहुंचने की संभावना अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है और ट्रंप के साथ हुई बातचीत बहुत सकारात्मक थी।
शिनबाम ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कुछ समझौते हुए हैं, लेकिन अंतिम समझौता होने तक विवरण जारी नहीं किया जाएगा।
यूएसएमसीए की अगली समीक्षा बैठकें 28 और 29 सितंबर को वाशिंगटन में होनी हैं। इस महीने की शुरुआत में, राष्ट्रपति शिनबाम ने देश की संप्रभुता, सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा करने का संकल्प लिया था। नेशनल पैलेस में अपने दूसरे 'स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन के दौरान शिनबाम ने कहा था, मेक्सिको में, हम सभी देशों के साथ सहयोग, बातचीत और समझ चाहते हैं, लेकिन सहयोग का मतलब झुकना नहीं है, और दोस्ती का मतलब अपने सिद्धांतों को छोड़ना नहीं है।

उन्होंने कहा, और जब तक मुझे गणराज्य की राष्ट्रपति के रूप में सेवा करने का सम्मान प्राप्त है, मैं अपनी संप्रभुता, अपने सम्मान और अपनी स्वतंत्रता की दृढ़ता से रक्षा करती रहूंगी। शिनबाम ने मेक्सिको-अमेरिका के संबंधों में आ रही मुश्किलों को स्वीकार किया, खासकर उन मुश्किलों को जो प्रवासियों के साथ अमेरिका के खराब आचरण से पैदा हुई हैं।

उन्होंने बताया कि अमेरिकी आव्रजन हिरासत केंद्रों में 17 मेक्सिकन नागरिकों की मौत हो चुकी है और पूरे अमेरिका में आव्रजन छापों में कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मेक्सिको सरकार ने शिकायतें दर्ज कराई हैं और प्रवासियों के अधिकारों के सम्मान की मांग की है।

शिनबाम के अनुसार, वाशिंगटन द्वारा बड़े पैमाने पर लोगों को वापस भेजे जाने (डिपॉर्टेशन) के जवाब में, उनकी सरकार ने मेक्सिको ते अब्राजा (मेक्सिको आपको गले लगाता है) कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम ने वापस भेजे गए या स्वदेश लौटे 2,81,000 से अधिक मेक्सिकन नागरिकों की मदद की है; उन्हें भोजन के अलावा परिवहन, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सुविधा तथा पहचान दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं।

</description><guid>13009</guid><pubDate>2026-09-19 16:17:53 4:18:32 pm</pubDate></item><item><title>ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध बढ़ाने वाले कानून पर किए हस्ताक्षर</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13008</link><description>वॉशिंगटन ।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत रूस पर प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया गया है और रूसी तेल व गैस के बड़े खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध लगाने के अधिकार को भी पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया है। ट्रंप ने शुक्रवार को 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पर हस्ताक्षर किए।
व्हाइट हाउस ने कहा कि यह कानून रूस पर कानूनी प्रतिबंध, टैरिफ और रोक लगाने तथा उन्हें बढ़ाने का अधिकार देता है। साथ ही ईरान पर पहले से लगे प्रतिबंधों को भी बढ़ाता है। रिपब्लिकन सीनेटर केटी ब्रिट के बयान के अनुसार, यह कानून राष्ट्रपति को निर्देश देता है कि वे रूसी कच्चे तेल या गैस के पांच सबसे बड़े इंपोर्टर्स (आयातकों) पर या रूसी तेल प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाएं। न तो साइन करने की घोषणा में और न ही लॉ मेकर्स के बयानों में उन देशों का नाम बताया गया जिन पर ये टैरिफ लगाए जाएंगे। उन्होंने किसी खास देश के लिए टैरिफ दर की भी घोषणा नहीं की।

ब्रिट के ऑफिस ने कहा कि इस कानून में उन देशों के लिए छूट का प्रावधान है जो रूस से इतनी प्राकृतिक गैस इंपोर्ट करते हैं जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस एक्सपोर्ट (निर्यात) का 15 प्रतिशत से भी कम है, बशर्ते वे इस इंपोर्ट को कम करने के लिए अहम कदम उठा रहे हों।
ये प्रतिबंध सिर्फ ऊर्जा की खरीद तक ​​ही सीमित नहीं हैं। सीनेटर के बयान के अनुसार, इनका निशाना रूसी अधिकारी, अमीर कारोबारी (ओलिगार्क), उनके परिवार के सदस्य, विदेशी लोग, रूसी बैंक और वित्तीय संस्थान और साथ ही रूस का 'शैडो फ्लीट' (गुप्त रूप से काम करने वाले जहाजों का बेड़ा) हैं। इस कानून में रूस और यूक्रेन में उसके युद्ध का समर्थन करने वालों के खिलाफ प्राइमरी और सेकेंडरी, दोनों तरह के प्रतिबंधों का प्रावधान है।

</description><guid>13008</guid><pubDate>2026-09-19 16:15:59 4:16:34 pm</pubDate></item><item><title>भारत की नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई: मोदी</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13007</link><description>नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स' पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शनिवार को भारत की पर्यावरण से जुड़ी उपलब्धियों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भारत आज क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा, अभी कुछ दिन पहले भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चली है और ये दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है। ये क्लीन मोबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 12 सालों में भारत की विंड एनर्जी क्षमता में 3 गुना बढ़ोतरी हुई है। हाइड्रो-एनर्जी क्षमता में भी मजबूत वृद्धि देखी गई है। नया भारत न्यूक्लियर एनर्जी पर भी फोकस कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार इन क्षेत्रों में प्राइवेट प्लेयर्स के लिए भी रास्ते खोल रही है। इन प्रयासों से भारत की नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ई-मोबिलिटी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले भारत में हर साल केवल 3,000 ई-व्हीकल बिकते थे। पिछले साल करीब 25 लाख ईवी की बिक्री हुई, जो एक अविश्वसनीय वृद्धि है। इससे पर्यावरण को मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि फास्टैग से टोल बूथ पर इंतजार का समय और ईंधन की बर्बादी काफी कम हुई है। पीएम मोदी ने बताया कि 2014 तक देश के सिर्फ 5 शहरों में 250 किमी से कम मेट्रो नेटवर्क था। आज देश के 20 से ज्यादा शहरों में मेट्रो चल रही है और भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जिनके पास 1 हजार किमी से ज्यादा का मेट्रो नेटवर्क है।

उन्होंने कहा कि रेलवे के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण से करोड़ों लीटर डीजल की बचत हुई है, जिससे पर्यावरण को भी फायदा हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा विकास तेज भी है और सस्टेनेबल भी है। आज जल संरक्षण में भी अभूतपूर्व काम हो रहा है। 70,000 से ज्यादा अमृत सरोवर बनाए गए हैं। 'कैच द रेन' पहल के तहत देश भर में करीब 1.5 करोड़ जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं।

</description><guid>13007</guid><pubDate>2026-09-19 15:45:56 3:46:29 pm</pubDate></item><item><title>मालवा में श्रद्धालुओं से भरी कार बारिश से उफनते नाले में बही, 8 की मौत</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13006</link><description>मालवा ।मध्य प्रदेश के जनपद आगर मालवा में एक कार के नाले में बहने से तीन बच्चों समेत 8 लोगों की मौत हो गई। सभी लोग नलखेड़ा में मां बगलामुखी के दर्शन के लिए आए थे। इसी दौरान मंदिर के समीप बरसाती नाले को पार करते समय कार तेज बहाव में बह गई। यह घटना आगर मालवा जनपद के नलखेड़ा क्षेत्र में मां बगलामुखी मंदिर के समीप हुई। मिली जानकारी के अनुसार चालक को पानी के बहाव का अंदाजा नहीं था। लिहाजा उसने नाले को पार करने की कोशिश की, इसी के चलते कार पानी के बहाव के साथ नाले में जा समाई। शनिवार की सुबह जब नाले का पानी उतर गया तो राहगीरों ने नाले में कार को देखा और इसकी सूचना पुलिस को दी गई। राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, तब कार के अंदर से आठ लोगों के शव निकले। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जुट गए।
आगर मालवा के पुलिस अधीक्षक ने पुष्टि की है कि इस घटना में कुल आठ लोगों की मौत हो गई है। बताया गया कि मरने वालों में तीन बच्चे, दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। हालांकि, अभी तक मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है। प्रारंभिक तौर पर जो जानकारी मिली है उसमें बताया गया है कि कार में सवार सात लोग उड़ीसा के निवासी थे और वह नलखेड़ा में मां बगलामुखी के दर्शन करने जा रहे थे। इन लोगों ने उज्जैन से कार किराए से की थी।

इससे पहले, मध्य प्रदेश के मंडला में एक युवती नर्मदा के तेज बहाव में बहने की खबर सामने आई थी। मौके पर मौजूद मछुआरों की नजर उस पर पड़ गई और उन्होंने करीब 200 मीटर दूर बह रही युवती को पानी से बाहर निकाला और उसकी जान बचा ली। पुलिस को युवती का बैग भी मिला। बैग में रखे कागज पर मिले नंबर से उसकी पहचान टिकरिया थाना क्षेत्र की निवासी के रूप में हुई और परिजनों को सूचना दे दी गई।

</description><guid>13006</guid><pubDate>2026-09-19 15:44:33 3:45:15 pm</pubDate></item><item><title>मोदी के फैसले के साथ 5 कांग्रेसी सांसद? यूपीआई पर चिदंबरम ने राहुल को फंसाया?</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13003</link><description>नई दिल्ली । राहुल गांधी यूपीआई पर एमडीआर लागू करने को मोदी टैक्स बताकर सरकार का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, संसदीय समिति की रिपोर्ट में पी चिदंबरम सहित कांग्रेस के वरिष्ठ सांसदों ने बिना किसी असहमति के इसका समर्थन किया था। समिति ने यूपीआई के बुनियादी ढांचे और साइबर सुरक्षा को मजबूत रखने के लिए इस व्यवस्था की सिफारिश की थी।
डिजिटल इंडिया की रीड बन चुके यूपीआई को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस का डबल गेम एक्सपोज हुआ है जिसके खुलासे ने पूरे देश को हैरान परेशान कर दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सुबह से शाम तक घर से लेकर बाहर तक यह ढोल पीट रहे हैं कि मोदी सरकार यूपीआई पर 0.4% का एमडीआर थोपकर आम जनता की जेब पर डाका डाल देगी। जनता को महंगाई से और मार देगी। सरकार अमेरिका के दबाव में काम कर रही है। उसके आगे घुटने टिक रही। राहुल गांधी सोशल मीडिया पर अपनी दादी इंदिरा गांधी की दुहाई दे देकर प्रधानमंत्री मोदी की रीड की हड्डी पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन यूपीआई पर चिल्लाने वाले राहुल गांधी को किसी और ने नहीं बल्कि उनके अपने ही सांसदों ने पूरी तरह फंसा दिया है। क्या आप जानते हैं कि जिस यूपीआई एमडीआर के फैसले को राहुल गांधी मोदी टैक्स बताकर देश को गुमराह कर रहे हैं। उसी व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू करने की सिफारिश किसी और ने नहीं बल्कि खुद कांग्रेस के दिग्गज सांसदों के जरिए की गई।




मतलब जब बैठक हुई तो कांग्रेस के सांसद उस बैठक में रजामंदी दिखाते हुए नजर आए। जिसका बाहर आकर विरोध कर रहे हैं, उसका अंदर समर्थन किया गया था पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से लेकर मनीष तिवारी और गौरव गोगोई जैसे कांग्रेस के पांच दिग्गजों ने संसदीय समिति की रिपोर्ट पर सहमति बताई। बिना किसी असहमति के यूपीआई पर एमडीआर लागू करने की वकालत दी। लेकिन अब वही कांग्रेस बाहर आकर यूपीआई पर जहर उगल रहा है। सिर्फ मकसद मोदी को निशाना बनाना है। राहुल गांधी जनता को गुमराह कर शोर मचा रहे हैं। आखिर संसद समिति के उस रिपोर्ट का क्या सच है जिसने राहुल गांधी के दोहरे चरित्र की धज्जियां उड़ा कर रख दी है। कांग्रेसियों को बेनकाब कर दिया है। चलिए आज परते खोलते हैं और कांग्रेस को ही बेनकाब कर देते हैं।
क्या है पूरा मामला
कहानी की शुरुआत 12 अगस्त को देश की संसद में पेश हुए वित्त संबंधी स्थाई समिति की उस सनसनीखेज रिपोर्ट से होती है। जिसने कांग्रेस पार्टी के दोहरे रवैया की पोल खोल कर रख दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी सांसद भृतु हरी मेहताब की अध्यक्षता वाली इस उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ शब्दों में कहा था कि भारत में यूपीआई और रूप के बढ़ते इस्तेमाल को बनाए रखने के लिए अब एक स्थाई राजस्व मॉडल यानी एमडीआर की सख्त जरूरत है। समिति ने सिफारिश की थी कि यूपीआई इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए टियर आधारित एमडीआर व्यवस्था को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए। इस कहानी में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस संसदीय समिति में कांग्रेस पार्टी के पांच-पांच बड़े और कद्दावर सांसद शामिल थे। जिसमें देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोर लाल और के गोपीनाथ के नाम दर्ज हैं। जब यह रिपोर्ट मंजूर हुई तो संसद के पटल पर जब रखी गई तब इन कांग्रेसी नेताओं ने एक शब्द भी असहमति पर दर्ज नहीं कराया। यानी बंद कमरे में कांग्रेस के नेता मोदी सरकार के इस कदम को पूरी तरह जायज ठहरा रहे थे। मतलब चुप्पे साध कर बैठे थे। विरोध नहीं किया था। यह रिपोर्ट के मुताबिक साफ-साफ कहा जा रहा है क्योंकि आपत्ति होती तो विरोध भी करते, इसे आगे बढ़ने से रोकते भी, शोर भी मचाते लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जैसे ही यह फैसले लागू होने की बारी आई तो राहुल गांधी सड़क पर आकर राजनीति का ड्रामा रचने लगे। अपने सांसदों से नहीं पूछ रहे हैं कि बैठक में क्या हुआ, कैसे हुआ? विरोध क्यों नहीं किया गया? लेकिन बाहर आकर माहौल मोदी सरकार के खिलाफ बना दिया है। प्रधानमंत्री मोदी पर तीखे हमले शुरू कर दिए गए हैं।
राहुल क्यों हैं इतने हमलावर
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बिना देरी करते हुए एक वीडियो जारी कर यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को मोदी टैक्स करार दिया और इसे तुरंत वापस लेने की मांग कर डाली। राहुल गांधी ने सरकार पर अमेरिका के आगे घुटने टेकने का बचकाना आरोप लगाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अपनी दादी इंदिरा गांधी का भी किस्सा सुना दिया। राहुल गांधी ने लिखा जब उनसे पूछा गया था कि वो वामपथंत की ओर झुकती है या फिर दक्षिण पंत की ओर तो उनका जवाब था कि वो ना बाई और झुकती है और ना दाई और बल्कि सीधी खड़ी रहती है। राहुल नए-नए आरोप लगाकर मोदी सरकार के इस फैसले पर जमकर चिल्ला रहे हैं। लेकिन देश की जनता आज राहुल गांधी से पूछ रही है कि जब आपकी पार्टी के पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम खुद संसद के रिपोर्ट के समर्थन में खड़े थे, चुप्पी साथ बैठे थे, विरोध नहीं कर रहे थे तो फिर राहुल गांधी किस आधार पर इसे मोदी टैक्स बताकर चिल्ला रहे हैं?
संसदीय समिति की रिपोर्ट क्या कहती है?
रिपोर्ट के मुताबिक 2026 के बजट में मोदी सरकार ने यूपीआई और रुपए पर जीरो एमडीआर नीति से पैदा होने वाले भारी भरकम नुकसान की भरपाई के लिए 2000 करोड़ का प्रावधान किया था। रिपोर्ट के मुताबिक यूपीआई के हर महीने 150 अरब तक ट्रांजैक्शन करने और 60 करोड़ नए यूज़र्स जोड़ने का अनुमान है। इतने विशाल नेटवर्क को चलाने की जो वास्तविक लागत आती है सरकार की 2000 करोड़ की प्रोत्साहन राशि उस लागत का केवल 11% और संभावित एमडीआर संग्रह का महज 14स ही कवर कर पाती है। समिति ने इसे एक खतरनाक स्ट्रक्चर फंडिंग गैप यानी वित्तीय खाई बता दिया और इसलिए इस व्यवस्था की सिफारिश की थी ताकि सरकारी खजाने पर दबाव ना पड़े। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि अगर पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर जैसे बैंक और पेमेंट्स ऐप को सही फंड नहीं मिला तो यूपीआई की साइबर सिक्योरिटी धोखाधड़ी रोकने का इंतजाम और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में नया निवेश पूरी तरह ठप हो जाएगा। और इसी साइबर क्राइम से जनता को बचाने के लिए सरकारी खजाने को बचाने के लिए संतुलित एमडीआर व्यवस्था की सिफारिश कांग्रेस सांसदों ने भी की थी।</description><guid>13003</guid><pubDate>2026-09-19 13:28:03 1:29:01 pm</pubDate></item><item><title>अपनी पार्टी का इतिहास भी नहीं जानते राहुल गांधी,सुधांशु त्रिवेदी का तीखा तंज</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13002</link><description>नई दिल्ली । चुनाव आयोग द्वारा टीएमसी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने के फैसले पर राहुल गांधी ने भाजपा और आयोग पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया। इस पर भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी का इतिहास नहीं पता, क्योंकि टीएमसी और एनसीपी खुद कांग्रेस से अलग हुई थीं।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश की आलोचना की थी जिसमें ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया गया था। त्रिवेदी ने कहा कि रायबरेली के सांसद की बातों से पता चलता है कि उन्हें अपनी ही पार्टी के बारे में कुछ नहीं पता। राष्ट्रीय राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, त्रिवेदी ने गांधी के उस आरोप का जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर विपक्षी पार्टियों को तोड़ने का काम कर रहे हैं। नएस्थान तलाशें
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यह आरोप तब लगाया गया जब चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनावों में टीएमसी के विरोधी गुटों को पार्टी का नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया। ECI ने विवाद पर अंतिम फैसला होने तक दोनों गुटों से वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न जमा करने को कहा है। त्रिवेदी ने कहा कि लोगों की राहुल गांधी के बारे में यह धारणा है कि उन्हें देश के बारे में कुछ नहीं पता... आज उन्होंने एक अजीब ट्वीट किया है जिससे पता चलता है कि उन्हें अपनी पार्टी के बारे में भी कुछ नहीं पता। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह शिवसेना और एनसीपी के बाद टीएमसी को खत्म कर रही है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि ये पार्टियां (TMC, NCP) खुद कांग्रेस से अलग होकर बनी थीं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने आज ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और फूल और घास वाले चुनाव चिह्न को फ्रीज़ करने के चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद BJP और चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पार्टी की चोरी भी अब वोट और सरकार की चोरी की तरह भारत के लोकतांत्रिक पतन की पहचान बन गई है। गांधी ने कहा कि पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्नBJP और चुनाव आयोग मिलकर किसी पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। जब पूरी पार्टी ही चोरी की जा सकती है, तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं कि लाखों भारतीयों के वोट भी चोरी किए जा सकते हैं। वोट की चोरी। सरकार की चोरी। अब पार्टी की चोरीये सब हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।




इसे भी पढ़ें: TMC सिंबल विवाद पर Rahul Gandhi का आरोप, BJP और चुनाव आयोग मिलकर छीन रहे दलों के चिह्न
इस बीच, गुरुवार को चुनाव आयोग ने TMC के विरोधी गुटों के बीच पार्टी पर कंट्रोल को लेकर चल रहे विवाद के चलते अपना अंतरिम आदेश जारी किया। आयोग ने दोनों गुटों को आने वाले उपचुनावों के लिए ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फूल और घास वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया और उन्हें अपनी पसंद के तीन नाम और चुनाव चिह्न बताने का निर्देश दिया। यह व्यवस्था अंतरिम है और तब तक लागू रहेगी जब तक आयोग 'चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968' के तहत इस विवाद पर कोई अंतिम फैसला नहीं ले लेता।</description><guid>13002</guid><pubDate>2026-09-19 13:26:02 1:26:56 pm</pubDate></item><item><title>हम साथ हैं...ममता बनर्जी की पार्टी का सिंबल फ्रीज होते ही आया राहुल गांधी का फोन</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13001</link><description>कोलकाता । पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की है। यह निर्णय टीएमसी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे द्वारा नाम वापस लेने के बाद लिया गया। ममता बनर्जी ने कहा कि यह कदम बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता और इंडिया गठबंधन के प्रति समर्थन दर्शाने के लिए है।
विपक्षी नेताओं ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) की आलोचना की। आयोग ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके द्वारा बनाई गई पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया था। इसके बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तुरंत ममता बनर्जी से संपर्क किया और उनके प्रति एकजुटता जताई। बाद में बनर्जी ने कहा कि कांग्रेस और उनकी पार्टी केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ मिलकर काम करने को तैयार हैं। गांधी के साथ हुई बातचीत के बारे में बनर्जी ने कहा, हम इसमें साथ हैं। हम चाहते हैं कि बीजेपी को हटाया जाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगी, क्योंकि उनकी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। गांधी ने बाद में चुनाव आयोग पर अपनी पार्टी के हमले की अगुवाई की। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को अपना समर्थन देने की घोषणा की, क्योंकि उनके अपने उम्मीदवार ने मुकाबले से नाम वापस ले लिया था। उन्होंने कहा कि उनका खेमा नंदीग्राम से कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगा और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। बनर्जी ने कहा कि यह फ़ैसला 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के साथ एकजुटता दिखाने के लिए लिया गया है, क्योंकि विपक्ष बीजेपी के ख़िलाफ़ एकजुट होकर लड़ना चाहता है। बनर्जी ने कहा कि हम मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। मैं चाहती हूं कि बीजेपी भारत से चली जाए। हमारा पूरा समर्थन INDIA गठबंधन के साथ है।

</description><guid>13001</guid><pubDate>2026-09-19 13:24:10 1:24:43 pm</pubDate></item><item><title>अमित शाह ने सरकारी कामकाज में बढ़ाई हिंदी की पैठ, तकनीक और अनुवाद पर दिया जोर</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13000</link><description>नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को जोड़ने के लिए कई तकनीकी व प्रशासनिक पहल की गई हैं। शाह हिंदी को अन्य भाषाओं की प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि परस्पर संवाद की समावेशी भाषा मानते हैं। उनका यह दृष्टिकोण भाषायी विविधता का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की हिंदी सेवा एक नहीं, अनेक दृष्टियों से ध्यान देने योग्य है। मूलतः गुजरातीभाषी शाह स्वयं हिंदी में काम करते हैं, इसलिए स्वाभाविक तौर पर हिंदी में सरकारी कामकाज बढ़ा है। शाह के कारण सरकारी पत्रावलियां हिंदी में बनती हैं। शाह के मार्गदर्शन में केंद्रीय गृह मंत्रालय राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं, अनुवाद-कार्य और हिंदी-सलाहकार समितियों के माध्यम से लगातार प्रयासरत है। शाह हिंदी को प्रशासन, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, पत्रकारिता और उच्च ज्ञान-विमर्श की भाषा बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण सामग्री, आधुनिक शब्दावली और अनुवाद की मजबूत व्यवस्था की अनवरत हिमायत करते हैं।
हिंदी के प्रति अमित शाह का लगाव केवल औपचारिक राजभाषा-नीति तक सीमित नहीं दिखाई देता। वर्ष 2019 में हिंदी दिवस के अवसर पर उन्होंने हिंदी को स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना से जोड़ा था। गत वर्ष 2025 में भी शाह ने हिंदी दिवस पर आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में हिंदी के संवर्धन से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर बल दिया था।
पिछले एक वर्ष में माननीय गृह मंत्री जी के नेतृत्व में राजभाषा विभाग ने हिंदी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। जून 2025 में भारतीय भाषा अनुभाग की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाना और उन्हें तकनीक तथा प्रशासन से जोड़ना है। इस पहल से राजभाषा विभाग के काम का दायरा भी व्यापक हुआ है। विभाग ने नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों यानी नराकासों के काम को प्रोत्साहित करने के लिए नराकास प्रोत्साहन सम्मान की व्यवस्था भी शुरू की है। इससे उन नराकासों को आगे आने का अवसर मिलेगा, जो अपने क्षेत्र में राजभाषा के काम को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा रही हैं।








दयानंद सरस्वती, गांधी, नरेंद्र मोदी और अमित शाह - इन चारों की हिंदी संबंधी दृष्टियों को एक साथ देखने पर हिंदी के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण सूत्र निकलता है: हिंदी जितनी जनभाषा होगी, उतनी ही प्रभावी होगी; जितनी समावेशी होगी, उतनी ही स्वीकार्य होगी; और जितनी भारतीय भाषाओं से जुड़ेगी, उतनी ही समृद्ध होगी।








हिंदी प्रेम का सर्वोच्च रूप हिंदी को दूसरों पर थोपना नहीं, बल्कि उसे ऐसा सक्षम माध्यम बनाना है जो भारत की विविध आवाजों को एक-दूसरे तक पहुँचाए। दयानंद ने हिंदी को जनजागरण का माध्यम बनाया, गांधी ने उसे राष्ट्रीय संवाद की शक्ति दी और आज हिंदी के सामने डिजिटल युग में विश्वव्यापी संवाद की नई संभावनाएँ हैं। इन पड़ावों को जोड़कर देखा जाए तो हिंदी की यात्रा केवल एक भाषा की यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय समाज में संवाद, जागरण और आत्मविश्वास की यात्रा भी है। भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं होती, वह समाज की स्मृति, संस्कृति और सामूहिक चेतना को भी अपने भीतर संजोए रहती है। भारत जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश में भाषा का प्रश्न इसलिए और अधिक संवेदनशील हो जाता है।</description><guid>13000</guid><pubDate>2026-09-19 13:21:50 1:22:57 pm</pubDate></item><item><title>1947 में सिर्फ सियासी आजादी मिली, कल्चरल आजादी नहीं: राजनाथ सिंह का बड़ा दावा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12999</link><description>कोच्चि । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोच्चि में कहा कि भारत को 1947 में राजनीतिक आज़ादी मिली, लेकिन सांस्कृतिक आज़ादी नहीं। उन्होंने पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता और तुष्टीकरण की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि इन्हीं कारणों से राम मंदिर निर्माण में दशकों की देरी हुई। उन्होंने युवाओं से औपनिवेशिक मानसिकता छोड़कर सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 सितंबर को पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि भारत को 1947 में राजनीतिक आज़ादी तो मिली, लेकिन सांस्कृतिक आज़ादी नहीं। उन्होंने केरल के कोच्चि में तीन दिन तक चलने वाले कार्यक्रम 'रामायण- वन एपिक मेनी स्टोरीज़: राम कथा अक्रॉस भारत एंड बियॉन्ड' (रामायण - एक महाकाव्य, कई कहानियाँ: भारत और उसके बाहर राम कथा) के उद्घाटन समारोह में यह बात कही।







सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के विकास में न केवल आर्थिक तरक्की शामिल होनी चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मज़बूत करना और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलना भी ज़रूरी है। सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश का आधुनिकीकरण उसकी सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान के साथ-साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'सर्व धर्म समभाव' यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान हमेशा से हमारी सभ्यता की मूल भावना रही है। फिर भी, पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता के कारण, हमारे धर्म को सांप्रदायिकता, परंपरा को पिछड़ापन, विश्वास को कट्टरता और आस्था को अंधविश्वास के रूप में पेश किया गया।
राजनाथ सिंह ने युवा पीढ़ी के बीच भारत के इतिहास, संस्कृति और विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रीय चेतना मज़बूत होगी और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को लेकर आत्मविश्वास बढ़ेगा। उन्होंने युवाओं से भारत के आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी बदलाव में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक आत्मविश्वासी, सक्षम और सामाजिक रूप से समावेशी भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभर सकता है और दुनिया के भविष्य को आकार देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।








राम मंदिर के निर्माण में हुई देरी का ज़िक्र करते हुए सिंह ने पूछा कि आज़ादी के बाद कहा गया था कि भारत की खोई हुई संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन भगवान राम से बेहतर भारत की आत्मा का प्रतीक कौन हो सकता है? फिर आज़ादी के सात दशक बाद भी राम मंदिर बनने में इतना समय क्यों लगा? ऐसा तुष्टीकरण की नीति के कारण हुआ। यह सोच भारतीय नज़रिए के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत ने समय से पहले जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल करके, देश में मुफ़्त कोविड-19 टीके उपलब्ध कराकर और 100 देशों को 30 करोड़ से ज़्यादा टीके भेजकर दुनिया के लिए उम्मीद की किरण जगाई है।
सिंह ने भारत के एक सभ्यतागत लीडर के तौर पर उभरने पर ज़ोर दिया। उन्होंने इसके लिए इंटरनेशनल योग डे के वैश्विक आयोजन और इंटरनेशनल सोलर अलायंस व ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस जैसी पहलों में भारत की लीडरशिप का ज़िक्र किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि दया की भावना से प्रेरित होकर सरकार ने लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए काम किया है और पिछले 10 से 12 सालों में 25 करोड़ से ज़्यादा लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी डेमोक्रेसी और कल्याणकारी योजनाओं की सफलता के ज़रिए दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।</description><guid>12999</guid><pubDate>2026-09-19 13:17:48 1:19:28 pm</pubDate></item><item><title>सेमिकॉन इंडिया में बोले पीएम मोदी, ब्रिक्स समिट और मजबूत जीडीपी ग्रोथ ने बढ़ाया देश का भरोसा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12990</link><description>नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम में कहा कि ब्रिक्स देशों द्वारा नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाना भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद भारत ने 7.8 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ हासिल की और जापानी एजेंसी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में हाल ही में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों द्वारा हस्ताक्षरित 'नई दिल्ली घोषणापत्र' की सराहना की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह संयुक्त घोषणापत्र वैश्विक मंचों पर भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। 'सेमिकॉन इंडिया 2026' में बोलते हुए, पीएम मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था द्वारा हासिल की गई 7.8% जीडीपी वृद्धि का ज़िक्र किया और बताया कि यह वृद्धि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद कैसे हासिल की गई।










मोदी ने कहा कि भारत की तिमाही GDP रिपोर्ट सितंबर में ही जारी की गई थी और इस मुश्किल दौर में भी भारत ने 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल की। ​​इसी दौरान, जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को अपग्रेड किया। ऐसा लगभग तीन दशक, यानी करीब 35 साल बाद हुआ। उन्होंने कहा कि एक तरफ़ भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। दूसरी तरफ़, दुनिया का भारत पर भरोसा भी बढ़ रहा है। दोस्तों, इस भरोसे की एक और बड़ी मिसाल तीन दिन पहले हुए ब्रिक्स (BRICS) समिट में देखने को मिली। भारत ने इस समिट की सफल मेज़बानी की, और सबकी सहमति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को अपनाना, दुनिया के भारत पर भरोसे का एक और बड़ा सबूत है। सरकारीएजेंसियां









भारत ने 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) थीम के तहत 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा समेत दुनिया के कई नेता शामिल हुए।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए 1 लाख इंजीनियरिंग छात्रों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है, और हम उनमें से 70,000 से ज़्यादा को ट्रेनिंग दे भी चुके हैं... मैं युवाओं से अपील करता हूँचाहे वे भारत में रिसर्च कर रहे हों या विदेश मेंकि वे आगे आएँ और यहाँ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के विकास में हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इन चुनौतियों के बीच, दुनिया को नए और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग हब की बहुत ज़रूरत हैऔर मैं यह बात पूरी ज़िम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ। मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ कि भारत इस भूमिका के लिए लगातार खुद को तैयार कर रहा है।









उन्होंने कहा कि जब हमारे जैसा कोई देश किसी अहम इंडस्ट्री में कामयाब होता है, तो इससे ग्लोबल सप्लाई चेन मज़बूत होती हैयह बात ऐसे समय में और भी अहम हो गई है जब सप्लाई चेन का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा रहा है। हमें भारत में हो रहे इन बदलावों को इसी व्यापक नज़रिए से देखना चाहिए।


</description><guid>12990</guid><pubDate>2026-09-18 11:37:23 11:38:15 am</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी के 25 साल बेमिसाल:अमित शाह बोले-विकसित भारत के लिए देश को चाहिए ऐसा नेता</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12989</link><description>गांधीनगर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वडनगर से वाराणसी तक बाइक रैली को हरी झंडी दिखाई। सेवा संकल्प अभियान के तहत 600 बाइकर्स सात राज्यों से होकर गुजरेंगे। शाह ने कहा कि मोदी ने बिना छुट्टी लिए 25 वर्षों तक निरंतर देशसेवा की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई में 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वड़नगर से वाराणसी तक की बाइक रैली उन खास कार्यक्रमों में से एक है, जो इस मौके और मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। पीएम मोदी 76 साल के हुए; अमित शाह ने 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत वड़नगर से वाराणसी के लिए बाइक रैली को हरी झंडी दिखाई।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मस्थान, गुजरात के वड़नगर से वाराणसी तक एक बाइक रैली को हरी झंडी दिखाई। यह रैली 'सेवा संकल्प अभियान' का हिस्सा है, जिसे मोदी के जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन में उनके 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में शुरू किया गया है। इस मौके पर बोलते हुए शाह ने मोदी के राजनीतिक सफर और सार्वजनिक जीवन के वर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री की उस प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया जिसे उन्होंने सबका भला, किसी का तुष्टीकरण नहीं (benefit for all, appeasement for none) के रूप में बताया।







शाह ने कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि वे प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर में उनके जन्मदिन पर आए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने हाटकेश्वर महादेव मंदिर में मोदी की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की। शाह ने कहा कि यहां से जल्द ही एक यात्रा शुरू होने वाली है। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत, यह यात्रा वडनगर से वाराणसी तक जाएगी। शाह के अनुसार, कुल 600 बाइकर्स - 300 वडनगर से और 300 वाराणसी से - सात राज्यों और कई गांवों से होकर गुजरेंगे। इस यात्रा का मकसद मोदी की 25 साल की जनसेवा का संदेश फैलाना है। वडनगर-वाराणसी और वाराणसी-वडनगर बाइक यात्राएं 17 सितंबर से शुरू हो रही हैं और 7 अक्टूबर को खत्म होंगी; यह तारीख मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के 25 साल पूरे होने का प्रतीक है।




शाह ने कहा कि आज़ादी के बाद से किसी भी दूसरे नेता ने लगातार 25 सालों तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नेता के तौर पर काम नहीं किया है। शाह ने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' के हमारे विज़न को साकार करने के लिए हमें ऐसे बहुत से युवाओं की ज़रूरत है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलें और आने वाली तीन पीढ़ियों तक 'इंडिया फर्स्ट' (भारत सबसे पहले) के मंत्र को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाएं। उन्होंने आगे कहा कि मोदी ने लगातार 25 सालों तक खुद को देश की सेवा में समर्पित किया है और एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली है। शाह ने कहा, ऐसा एक भी दिन नहीं बीता जब उन्होंने लगातार 16 से 18 घंटे काम न किया हो।</description><guid>12989</guid><pubDate>2026-09-18 11:35:31 11:36:32 am</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी के जन्मदिवस पर केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने दी शुभकामनाएं</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12988</link><description>नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर केंद्रीय मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उन्हें बधाई दी। नेताओं ने उनके 25 वर्षों के जनसेवा कार्यकाल और सुशासन व राष्ट्र निर्माण के प्रयासों को रेखांकित किया। गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई प्रमुख हस्तियों ने उनके नेतृत्व की सराहना की।
केंद्रीय मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर उन्हें बधाई दी और निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर जनसेवा के 25 वर्ष तथा विकास, जनकल्याण व सुशासन के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया। गुजरात के वडनगर में 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी बृहस्पतिवार को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मोदी को अथक परिश्रम, त्याग और दूरदर्शिता के प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका जीवन तप, त्याग और अटूट संकल्प की गाथा है। शाह ने एक्स पर कहा, कर्म को साधना और राष्ट्रसेवा को जीवन का ध्येय बनाकर चलने वाले मोदी जी का जीवन तप, त्याग और अटूट संकल्प की गाथा है।








सेवा और समर्पण से भरी उनकी यात्रा करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणा है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने मोदी को राष्ट्रीय सेवा और समर्पण का प्रतीक तथा 140 करोड़ देशवासियों का नेता बताया। उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन में भारत विकास और आत्मनिर्भरता की नयी ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा, राष्ट्र प्रथम के संकल्प से प्रेरित मोदी की यात्रा सेवा, सुशासन और जन कल्याण की एक प्रेरक गाथा रही है।
यह यात्रा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देशवासियों के उस सामूहिक स्वप्न की भी यात्रा है, जिसे आपने अपने कर्म और साधना से दिशा दी है। नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भारत विकास और आत्मनिर्भरता के नए आयाम गढ़ रहा है और विश्व पटल पर अपनी नई पहचान और सामर्थ्य के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत बुनियादी ढांचे, डिजिटल संपर्क, जनकल्याण, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में प्रगति करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की ओर पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। सिंह ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने सुशासन और जनसेवा को राष्ट्र की विकास यात्रा के केंद्र में रखा है, जिससे प्रशासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बना है। दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी
उनके नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक चेतना और विरासत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान और प्रतिष्ठा मिली है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मोदी को ऐसा कर्मयोगी बताया, जिन्होंने अपने जीवन का हर क्षण राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के लिए समर्पित कर दिया है। गोयल ने कहा, आपके नेतृत्व में 140 करोड़ भारतीयों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं। आपकी जनकल्याणकारी नीतियों ने युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं, महिलाओं को सशक्त बनाया है, किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है, करोड़ों लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया है और वंचित वर्गों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करते हुए विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने आशा व्यक्त की कि मोदी देश को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर ले जाते रहेंगे।








उन्होंने कहा, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। आप हमें विकसित भारत 2047 की ओर ले जाते रहें। केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए सार्वजनिक सेवा, सुशासन और विकास के प्रति मोदी की प्रतिबद्धता ने भारत की प्रगति को नयी गति और व्यापक दृष्टिकोण दिया है। पाटिल ने कहा, एक आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आपके नेतृत्व में जारी प्रयास देश के प्रत्येक नागरिक के लिए उज्ज्वल भविष्य के संकल्प को मजबूत करते हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्हें एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत का शिल्पकार बताया।








चौहान ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कुछ जन्मदिन ऐसे होते हैं जो करोड़ों-करोड़ों दिलों में खुशी और उत्साह की लहरें पैदा करते हैं, और मोदी का जन्मदिन ऐसा ही एक अवसर है। उन्होंने भारत के पुनः विश्व गुरु का स्थान प्राप्त करने के स्वामी विवेकानंद के दृष्टिकोण को याद करते हुए कहा, एक नरेन्द्र ने यह कहा था, और दूसरे नरेंद्र के नेतृत्व में यह साकार हो रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने बृहस्पतिवार को आयोजित विकसित भारत ग्राम जी कार्यशाला से पहले नयी दिल्ली के पूसा में देश के विभिन्न हिस्सों से आए सरपंचों के साथ पौधारोपण अभियान में भी भाग लिया। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि मोदी ने अपना पूरा जीवन जनसेवा, राष्ट्रसेवा और प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है।
बलूनी ने एक्स पर लिखा, इस वर्ष उनके जन्मदिन के साथ ही निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर उनके 25 वर्ष भी पूरे हो रहे हैंसेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की यह यात्रा हम सभी के लिए प्रेरणा है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि एक साधारण परिवार से प्रधानमंत्री के पद तक मोदी की यात्रा संघर्ष, कड़ी मेहनत, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण की प्रेरक कहानी है। पात्रा ने कहा, आपके नेतृत्व में भारत ने आधुनिक प्रौद्योगिकी, नवाचार और विकास की ओर कदम बढ़ाते हुए अपनी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को आत्मविश्वास से अपनाया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज और वैश्विक भागीदारी को एक नई पहचान मिली है। भाजपा सांसद तरुण चुग ने बृहस्पतिवार को अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दीर्घायु के लिए प्रार्थना की।







चुग ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी का दूरदर्शी नेतृत्व, अटूट प्रयास और देश की सेवा के प्रति समर्पण करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणास्रोत है। चुग ने कहा, आपके नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयां छू रहा है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि आप हमेशा स्वस्थ रहें और दीर्घायु हों तथा आपके नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ता रहे।















</description><guid>12988</guid><pubDate>2026-09-18 11:32:03 11:33:51 am</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी के जन्मदिन पर वडनगर और वाराणसी के बीच शुरू हुई 10 राज्यों की सेवा यात्रा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12987</link><description>लखनऊ । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मस्थान वडनगर और संसदीय क्षेत्र काशी को जोड़ने वाली विशेष सेवा यात्रा का वाराणसी में शुभारंभ हुआ। इस यात्रा के दौरान 10 राज्यों और 393 जिलों से होकर गुजरने वाले प्रतिभागी गंगाजल और गुजरात की नदियों के पवित्र जल का आदान-प्रदान करेंगे। हर पड़ाव पर 15 मिनट की डॉक्यूमेंट्री दिखाने के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया जाएगा।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि वडनगर-वाराणसी सेवा यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मस्थान को उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी से जोड़ेगी और इस दौरान विभिन्न पड़ाव पर फिल्म दिखाने से लेकर कई अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मोदी के 76वें जन्मदिन पर वाराणसी में सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, चौधरी ने कहा कि यह यात्रा दोनों दिशाओं में होगी, जिसमें 500 प्रतिभागी वाराणसी से वडनगर तक गंगा जल लेकर जाएंगे और उतने ही लोग गुजरात से वाराणसी तक पवित्र जल लाएंगे। उन्होंने कहा,आज हम प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर और उनकी कर्मभूमि वाराणसी को जोड़ने वाली अभूतपूर्व वडनगर-वाराणसी सेवा यात्रा का शुभारंभ कर रहे हैं।
यह यात्रा काशी से वडनगर और वडनगर से काशी तक 10 विभिन्न मार्गों के माध्यम से दोनों दिशाओं में चलेगी। उन्होंने बताया कि 250 मोटरसाइकिलों पर सवार 500 प्रतिभागी गंगाजल लेकर काशी से वडनगर जाएंगे, जबकि 250 अन्य मोटरसाइकिलों पर सवार 500 प्रतिभागी गुजरात की नदियों का पवित्र जल लेकर वडनगर से काशी आएंगे। उन्होंने कहा, दोनों जगहों के बीच पवित्र जल का आदान-प्रदान होगा और यह भारत की सांस्कृतिक और भावनात्मक एकता का प्रतीक होगा। वाराणसी में आयोजित इस कार्यक्रम में चौधरी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी मौजूद थे। चौधरी के अनुसार, वाराणसी और वडनगर की ओर जाने वाली ये यात्राएं 10 राज्यों और 393 जिलों (जिनमें उत्तर प्रदेश के 50 जिले शामिल हैं) से होकर गुजरेंगी और 1,159 गांवों को कवर करेंगी।









उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान हर दिन 60 से 80 कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे यह बड़े पैमाने पर जमीनी स्तर तक लोगों से जुड़ सकेगी। चौधरी ने कहा, यह नया भारत इस यात्रा का स्वागत फूलों की मालाओं से नहीं, बल्कि स्वच्छता से करेगा। उन्होंने इस अभियान में सेवा-भाव के साथ लोगों की भागीदारी पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा पेड़ लगाने, पानी बचाने, नशा छोड़ने और प्लास्टिक-मुक्त भारत बनाने के लिए लोगों को प्रेरित करेगी और यात्रा के दौरान अलग-अलग पड़ावों पर लोगों को इसके लिए शपथ भी दिलाई जाएगी।









उन्होंने कहा, यात्रा के दौरान लोगों को पेड़ लगाने, पानी बचाने, नशा छोड़ने और प्लास्टिक-मुक्त भारत बनाने का संकल्प लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। चौधरी ने बताया कि हर पड़ाव पर 15 मिनट की वृत्तचित्र फिल्म दिखाई जाएगी, स्थानीय नेताओं के साथ बातचीत होगी और सफाई कर्मचारियों तथा सफाई अभियानों से जुड़ी संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा, यह यात्रा सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि युवाओं के नेतृत्व में विकसित भारत बनाने का एक संकल्प है। उन्होंने बताया कि यह यात्रा सात अक्टूबर को वडनगर के बाबा हरकेश्वर महादेव मंदिर में जल चढ़ाने और वाराणसी में बाबा विश्वनाथ को औपचारिक रूप से जल अर्पित करने के साथ संपन्न होगी। चौधरी ने कहा कि यह पहल मोदी के जन्मदिन और मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनकी लगातार जन सेवा के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। इतिहास




उन्होंने प्रधानमंत्री की एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता से देश के नेता बनने की यात्रा को जन-सेवा और राष्ट्र-सेवा का उदाहरण बताया। उन्होंने वाराणसी के साथ मोदी के जुड़ाव का भी ज़िक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री ने शहर के विकास में योगदान दिया है। चौधरी ने कहा, एक साधारण कार्यकर्ता से देश के प्रधान सेवक बनने तक का उनका सफ़र असाधारण रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व ने वैश्विक स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है।उन्होंने वाराणसी-वडनगर के जुड़ाव को एक भारत, श्रेष्ठ भारत की व्यापक भावना का हिस्सा बताया और यात्रा में शामिल होने वाले 500 सेवा यात्रियों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी।</description><guid>12987</guid><pubDate>2026-09-18 11:29:54 11:31:01 am</pubDate></item><item><title>वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी को मिलेगा श्रीकांत वर्मा शिखर सम्मान</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12981</link><description>नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए 18 सितंबर का दिन खास होने जा रहा है। बिलासपुर में जन्मे प्रख्यात कवि, लेखक और सांसद स्व. श्रीकांत वर्मा की 95वीं जयंती के अवसर पर स्थापित श्रीकांत वर्मा शिखर सम्मान 2026 का पहला संस्करण शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है। इस समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी को 'श्रीकांत वर्मा शिखर सम्मान' प्रदान किया जाएगा।

श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट की ओर से शुरू किए गए इस राष्ट्रीय सम्मान के तहत 21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा। सम्मान का पहला संस्करण ही देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार अशोक वाजपेयी को दिए जाने से इसे लेकर साहित्य जगत में विशेष चर्चा है।

मगध से आधुनिक हिंदी साहित्य को मिली नई पहचान
स्व. श्रीकांत वर्मा की साहित्यिक विरासत में मगध का विशेष स्थान माना जाता है। उनकी रचनाओं में इतिहास के माध्यम से सत्ता, भय, हिंसा, विडंबना और मानवीय असुरक्षा जैसे विषयों को अभिव्यक्ति मिली।

बिलासपुर की धरती से निकले श्रीकांत वर्मा ने साहित्य के साथ पत्रकारिता और राजनीति के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनके नाम पर शुरू किया गया यह राष्ट्रीय सम्मान उनकी साहित्यिक स्मृति को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

अशोक वाजपेयी को ही क्यों चुना गया?
अशोक वाजपेयी और श्रीकांत वर्मा एक ही साहित्यिक दौर के महत्वपूर्ण रचनाकार रहे हैं। अशोक वाजपेयी ने श्रीकांत वर्मा को 20वीं सदी के अंधेरे की शिनाख्त करने वाले पहले कवि के रूप में याद किया है।

अशोक वाजपेयी का योगदान कविता और आलोचना के साथ-साथ चित्रकला, संगीत तथा सांस्कृतिक संस्थान-निर्माण के क्षेत्र में भी रहा है। रज़ा फाउंडेशन जैसी सांस्कृतिक पहल से उनका जुड़ाव भी उनके व्यापक सांस्कृतिक योगदान का हिस्सा है।









ऐसे में श्रीकांत वर्मा के नाम पर शुरू किए गए पहले सम्मान के लिए अशोक वाजपेयी का चयन आयोजकों के अनुसार श्रीकांत वर्मा की साहित्यिक स्मृति और वर्तमान साहित्यिक परिदृश्य के बीच संवाद को रेखांकित करता है।

21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि
श्रीकांत वर्मा शिखर सम्मान 2026 के तहत ₹21 लाख की राशि के साथ औपचारिक प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा। ट्रस्ट की ओर से शुरू किया गया यह सम्मान राष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक योगदान को सम्मानित करने की पहल के रूप में सामने आया है।

बिलासपुर और छत्तीसगढ़ के साहित्य प्रेमियों के लिए यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की साहित्यिक विरासत से जुड़े एक राष्ट्रीय सम्मान की शुरुआत हो रही है।




18 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाला समारोह श्रीकांत वर्मा की स्मृति, उनकी साहित्यिक विरासत और समकालीन हिंदी साहित्य के बीच एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।</description><guid>12981</guid><pubDate>2026-09-17 17:45:11 5:46:42 pm</pubDate></item><item><title>पीएम मोगी से मिले 81 वर्षीय सहपाठी असगर वोरा,बीजेपी एमएलए ने वापस की भायंदर की विवादित ज़मीन</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12980</link><description>नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 81 वर्षीय स्कूली मित्र असगर अली वोरा को मीरा-भायंदर में अपनी विवादित जमीन वापस मिल गई है। वोरा के पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग करने के बाद बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने जमीन का कब्जा छोड़ दिया। राज्य सचिवालय में हुई बैठक में मेहता ने निर्माण अनुमति और वोरा के खिलाफ पुलिस शिकायत भी वापस ले ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 81 साल के स्कूल दोस्त असगर अली वोरा को महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर में एक BJP विधायक से अपनी ज़मीन वापस मिल गई। यह ज़मीन दशकों पुराने प्रॉपर्टी विवाद का हिस्सा थी और वोरा को यह ज़मीन प्रधानमंत्री से मिलने और इस मामले में उनके दखल की गुज़ारिश करने के कुछ ही दिनों बाद वापस मिली। मंगलवार को BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने कहा कि वह विवादित प्लॉट का कब्ज़ा छोड़ रहे हैं और उसके लिए मिली कंस्ट्रक्शन की मंज़ूरी भी वापस कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद उन्होंने वोरा के ख़िलाफ़ दर्ज पुलिस शिकायत भी वापस ले ली। वोरा, जिन्होंने गुजरात के वडनगर के BN स्कूल में PM मोदी के साथ पढ़ाई की थी, ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री से मुलाकात की और आरोप लगाया कि मेहता से जुड़े बिल्डरों ने भायंदर ईस्ट में उनकी ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है।







PM मोदी के साथ अपनी मुलाकात के दौरान, वोरा ने दावा किया कि उन्होंने 1989 में एक रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के ज़रिए नवघर, भायंदर ईस्ट में लगभग 2,810 वर्ग मीटर ज़मीन खरीदी थी और उसे कभी बेचा या ट्रांसफर नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 में नकली दस्तावेज़ तैयार किए गए और बाद में उनकी जानकारी के बिना प्रॉपर्टी को दो हिस्सों में बांट दिया गया। वोरा के अनुसार, एक हिस्से पर स्वयं बिल्डर्स का कब्ज़ा दिखाया गया था, जबकि दूसरा हिस्सा मेहता से जुड़ी कंपनी 'सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स' से जुड़ा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मीरा-भायंदर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट ने ज़मीन पर उनके मालिकाना हक के दावे के बावजूद निर्माण की मंज़ूरी दे दी। वोरा ने कथित धोखाधड़ी और बिल्डरों व सरकारी अधिकारियों की भूमिका की CBI जांच की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर पालिका, राजस्व और पुलिस विभागों के अधिकारियों ने उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि उन्होंने 2015 में कथित धोखाधड़ी को लेकर FIR दर्ज कराई थी, लेकिन दावा किया कि इस मामले में CID की रिपोर्ट इसी साल सौंपी गई। उन्होंने इस देरी पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इसमें राजनीतिक दबाव की भूमिका हो सकती है।




अधिकारियों की कार्रवाई: BJP विधायक ने विवादित ज़मीन छोड़ी
PM मोदी के साथ वोरा की मुलाक़ात के बाद, महाराष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले पर कार्रवाई शुरू की। मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में एक बैठक हुई, जिसमें वोरा, मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम की कमिश्नर राधा विनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे शामिल हुए। बैठक के दौरान, मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र सौंपा जिसमें कहा गया कि वह विवादित ज़मीन का कब्ज़ा छोड़ रहे हैं और निर्माण की अनुमति वापस कर रहे हैं। पत्र में उन्होंने बताया कि यह ज़मीन 2019 में मर्विन फर्नांडीस से खरीदी गई थी।</description><guid>12980</guid><pubDate>2026-09-17 14:37:21 2:38:32 pm</pubDate></item><item><title>अमित शाह की मौजूदगी में किशाऊ डैम पर 6 राज्यों में समझौता, मुख्यमंत्रियों ने साइन किया एमओए</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12976</link><description>नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में छह राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। टोंस नदी पर बनने वाली इस परियोजना से सिंचाई, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। यह कदम यमुना नदी के पुनरुद्धार और बेसिन राज्यों की जल सुरक्षा को मजबूत करेगा।
ऊपरी यमुना बेसिन में राज्यों के बीच सहयोग और जल संसाधनों के विकास की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में किशाऊ मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए समझौते के ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए। इन छह राज्यों और केंद्र के बीच लगभग 28 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। रेणुका जी और लखवार मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट्स से जुड़े दो समझौते पहले ही हो चुके हैं और इन प्रोजेक्ट्स का निर्माण कार्य चल रहा है। किशाऊ मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट पर हुआ समझौता, निर्माण के लिए छह राज्यों के बीच किया गया तीसरा समझौता है। लगभग एक घंटे तक चली इस बैठक में जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प विभाग के सचिव और शामिल राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद थे।
अधिकारियों ने कहा कि इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करना लंबे समय से अटके हुए 'किशाऊ मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट' को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह समझौता सहकारी संघवाद की भावना और यमुना बेसिन के जल संसाधनों के टिकाऊ विकास और बेहतर इस्तेमाल के लिए केंद्र और बेसिन राज्यों की सामूहिक प्रतिबद्धता को भी दिखाता है। किशाऊ मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना नदी की एक प्रमुख सहायक नदी, टोंस नदी पर प्रस्तावित है। इस प्रोजेक्ट में 232.6 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध का निर्माण शामिल है, जिसकी लाइव स्टोरेज क्षमता 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) होगी। इससे लगभग 0.97 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी और सालाना लगभग 1,476 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। जमा किए गए पानी से यमुना को पुनर्जीवित करने और पीने व औद्योगिक इस्तेमाल के लिए पानी की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी, खासकर राजस्थान और दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में, जिससे इस इलाके में जल सुरक्षा मजबूत होगी।








इस प्रोजेक्ट को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के जॉइंट वेंचर, किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा लागू किया जाएगा। ऊपरी यमुना बेसिन के राज्यों ने 12 मई, 1994 को ओखला बैराज तक यमुना के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बंटवारे के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इस MoU में यमुना नदी के सतही बहाव का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करने के लिए ऊपरी यमुना बेसिन में स्टोरेज प्रोजेक्ट बनाने की ज़रूरत को माना गया था। 1994 के MoU के पैरा 7(iii) के तहत, बेसिन राज्यों द्वारा तय किए गए पानी के बंटवारे के दायरे में हर पहचाने गए स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग समझौते किए जाने थे। यह समझौता ज्ञापन (MoA) केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में MHA में 16 जून को हुई ऐसी ही एक बैठक के लगभग तीन महीने बाद साइन किया गया था, जिसमें यमुना नदी के पुनरुद्धार के लिए लंबे समय से अटके किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट पर संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनी थी।</description><guid>12976</guid><pubDate>2026-09-16 12:27:52 12:28:51 pm</pubDate></item><item><title>जो भूपेश बघेल नहीं कर पाए वो सचिन पायलट ने कर दिखाया? एक मंच पर दिखे चन्नी-राजा वडिंग समेत दिग्गज</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12975</link><description>चंडीगढ । यहां पर पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन में पार्टी की एकजुटता देखने को मिली। लंबे समय बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग एक ही मंच पर साथ दिखे। वहीं, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि कांग्रेस बिना किसी एक चेहरे के मिलकर चुनाव लड़ेगी।
चंडीगढ़ के सेक्टर 15 में पंजाब कांग्रेस भवन के बाहर कांग्रेस विरोध प्रदर्शन कर रही है। पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी और राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी वहां पहुंच गए हैं। तीन महीने बाद, पूर्व सीएम और जालंधर के सांसद चरणजीत चन्नी और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग एक ही मंच पर साथ दिखे। खास बात यह है कि दोनों नेता बहुत गर्मजोशी से बातचीत करते हुए भी दिखे; उनके बीच की अच्छी केमिस्ट्री ने सबका ध्यान खींचा। इससे पहले, चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल से साफ़ कह दिया था कि वे पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में राजा वडिंग के साथ मंच साझा नहीं करेंगे। हालाँकि, अब ये सभी नेता सचिन पायलट के नेतृत्व में हो रहे इस विरोध प्रदर्शन में एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। चरणजीत सिंह चन्नी सचिन पायलट के दाईं ओर बैठे हैं और उनके बाईं ओर राजा वडिंग बैठे हैं। इस दौरान चन्नी और राजा वडिंग को बातचीत करते हुए देखा गया। जैसे ही मंच से चन्नी का नाम घोषित किया गया, पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारे लगाना शुरू कर दिया। हालाँकि, चन्नी ने अपने भाषण के दौरान एक बार भी राजा वडिंग का नाम नहीं लिया।







कांग्रेस के सभी सदस्य एक मंच पर एकजुट हुए हैं  बाजवा
इस बीच, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा देखिए, कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता एक ही मंच पर जमा हुए हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी खास चेहरे को आगे किए बिना चुनाव लड़ेंगे; इसके बजाय, वे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सचिन पायलट के नाम पर वोट मांगेंगे। बहुमत मिलने के बाद हाई कमान फैसला करेगा। जब पिता जीवित हों, तो बेटों का कोई दावा नहीं बनता। इससे पहले, जैसे ही राजा वडिंग ने माइक संभाला, NSUI कार्यकर्ताओं ने अपने झंडे लहराए। राजा वडिंग उन्हें बार-बार बैठने के लिए कहते रहे, लेकिन वे झंडे लहराते रहे। राजा वडिंग ने सबसे पहले सचिन पायलट का नाम लिया, उसके बाद बाजवा का। फिर उन्होंने चन्नी का नाम लिया और उसके बाद सुखजिंदर रंधावा का।
पायलट ने बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया
कांग्रेस हाईकमान ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया है। पंजाब का दौरा शुरू करने से पहले ही, पायलट ने कांग्रेस में और संगठनात्मक बदलावों की संभावना से इनकार नहीं किया। पायलट ने कहा कि पार्टी का अभी पूरा ध्यान पंजाब में बहुमत के साथ सरकार बनाने पर है। उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव को एक सामान्य प्रक्रिया बताया इस टिप्पणी ने निश्चित रूप से वारिंग को लेकर अटकलों को हवा दी है।
ट्रैफ़िक पुलिस ने एडवाइज़री जारी की
कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए, चंडीगढ़ ट्रैफ़िक पुलिस ने एक एडवाइज़री जारी की है। सुबह 11:30 बजे से सेक्टर 15/16 लाइट पॉइंट और GMSH सेक्टर 16 राउंडअबाउट के बीच के रास्ते पर, साथ ही GMSH सेक्टर 16 राउंडअबाउट से PGI राउंडअबाउट तक मध्य मार्ग पर ट्रैफ़िक प्रभावित रहेगा। लोगों से वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की गई है।</description><guid>12975</guid><pubDate>2026-09-16 12:25:54 12:26:44 pm</pubDate></item><item><title>राममंदिर का मुख्य निर्माण पूरा, इंटरनेशनल रामकथा म्यूजियम के लिए 10 अक्टूबर से टेंडर</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12974</link><description>लखनऊ । पत्रकारों से बात करते हुए नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि आज म्यूज़ियम के बारे में भी चर्चा होगी। म्यूज़ियम का सबसे बड़ा काम अब शुरू होने वाला है। हर गैलरी के लिए 10 अक्टूबर से टेंडर जारी किए जाएंगे। कुल 20 गैलरी हैं - गैलरी 1, गैलरी 2, वगैरह। उन्होंने आगे कहा कि हर गैलरी की थीम अलग-अलग है और इसे पहले ही तय किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि हर गैलरी के लिए थीम तय कर ली गई है और कहानी भी फाइनल हो गई है। हमारे डायरेक्टर संजीव कुमार सिंह ने पूरी कहानी तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की है।
राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने मंगलवार को कहा कि राम जन्मभूमि परिसर में राम मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूरा हो गया है और अब समिति का मुख्य ध्यान इंटरनेशनल रामकथा म्यूज़ियम बनाने पर है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए 10 अक्टूबर से टेंडर जारी किए जाएंगे। पत्रकारों से बात करते हुए नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि आज म्यूज़ियम के बारे में भी चर्चा होगी। म्यूज़ियम का सबसे बड़ा काम अब शुरू होने वाला है। हर गैलरी के लिए 10 अक्टूबर से टेंडर जारी किए जाएंगे। कुल 20 गैलरी हैं - गैलरी 1, गैलरी 2, वगैरह। उन्होंने आगे कहा कि हर गैलरी की थीम अलग-अलग है और इसे पहले ही तय किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि हर गैलरी के लिए थीम तय कर ली गई है और कहानी भी फाइनल हो गई है। हमारे डायरेक्टर संजीव कुमार सिंह ने पूरी कहानी तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की है। मिश्रा ने कहा कि अब इमर्सिव टेक्नोलॉजी, 3D टेक्नोलॉजी और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल करके वीडियो बनाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि अंतिम भुगतान प्रक्रिया के तहत हर कंपनी को मंदिर के निर्माण कार्य के संबंध बैंक गारंटी देनी होगी ताकि यह सुनिश्चत हो सके कि आने वाले वर्षों में उनके काम की गुणवत्ता बनी रहेगी। मिश्रा ने कहा कि बैठकों के दौरान बैंक गारंटी से संबंधित कटौती के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि अंतिम बिल का प्रस्तावित तृतीय-पक्ष ऑडिट भी एक अन्य प्रमुख मुद्दा था। मिश्रा ने कहा कि टाटा पहले से ही परियोजना प्रबंधन परामर्श में शामिल था लेकिन ट्रस्ट ने अतिरिक्त ऑडिट के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को शामिल करने का भी फैसला किया था। उन्होंने कहा कि इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को अंतिम बिल का कम से कम 60 से 70 प्रतिशत ऑडिट करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा इसका चयन कंपनियों के संबंधित ऑर्डर और लागू प्रतिशत गुणांकों के आधार पर किया जाएगा। मिश्रा ने कहा कि मंदिर का निर्माण पूरा होने के साथ अब ध्यान अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय और अन्य संबंधित कार्यों पर है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर के अंदर एक सभागार और परिसर के बाहर एक अन्य सुविधा निर्माणाधीन है जिसके काम में लगभग तीन से चार महीने की देरी हुई।








मिश्रा ने कहा हमें उम्मीद है कि जनवरी-फरवरी तक काम जरूर पूरा हो जाएगा। मिश्रा मंदिर परिसर और संबंधित परियोजनाओं की तीन दिवसीय समीक्षा के लिए रविवार को अयोध्या पहुंचे। पहले दिन उन्होंने एक स्मारक स्तंभ का निरीक्षण किया जिसका कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा उन्होंने निर्माण एवं अन्य संबंधित परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों, ठेकेदारों और प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करने से पहले पुराने अस्थायी मंदिर में सौंदर्यीकरण कार्य की समीक्षा की। उन्होंने सोमवार को मंदिर परिसर के अंदर निर्धारित निर्माण कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों, ठेकेदारों एवं मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं।


</description><guid>12974</guid><pubDate>2026-09-16 12:23:24 12:24:39 pm</pubDate></item><item><title>यूपीआई शुल्क पर कांग्रेस के दावों को भाजपा ने बताया फर्जी, कहा ग्राहकों पर नहीं लगेगा एमडीआर चार्ज</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12973</link><description>नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि ग्राहकों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट या कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि 96 प्रतिशत यूपीआई लेनदेन 2000 रुपये या उससे कम के होते हैं जो पूरी तरह निशुल्क हैं। इससे पहले कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर लेनदेन शुल्क लगाने की तैयारी का आरोप लगाया था।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर यूपीआई लेनदेन शुल्क के बारे में फर्जी खबर फैलाने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि सरकार ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि लोगों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क नहीं लगाया जाएगा। यह घटनाक्रम उस वक्त हुआ, जब कांग्रेस ने यूपीआई लेनदेन पर जारी अधिसूचना को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुपके से ऐसे लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की तरह ही, कम्प्रोमाइज्ड (समझौता कर चुके) प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव में समर्पण कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए विपक्षी पार्टी को झूठ की दुकान कहा।










उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, कांग्रेस एक बार फिर झूठी खबरें फैला रही है। 96 प्रतिशत यूपीआई मर्चेंट (पी2एम) लेनदेन 2,000 रुपये या उससे कम के होते हैं और उन पर कोई शुल्क नहीं लगता। रुपे डेबिट-कार्ड से भुगतान करने पर भी कोई शुल्क नहीं लगता।
ग्राहकों को लेनदेन के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता। पी2पी यूपीआई लेनदेन पूरी तरह से निशुल्क है। पी2एम लेनदेन एक तरह का डिजिटल भुगतान है और इसके तहत उपयोगकर्ता खुदरा विक्रेता या सेवा प्रदाता को रकम अदा करता है, जबकि पी2पी लेनदेन के तहत मोबाइल फोन के जरिये एक व्यक्ति के बैंक खाते से दूसरे व्यक्ति के खाते में पैसा भेजा जाता है। भंडारी ने कहा, सरकार ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि ग्राहकों से एमडीआर शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार ने बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन या रुपे डेबिट कार्ड के जरिये किए गए भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाने का निर्देश दिया है।









सरकार ने हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लागू होगा या नहीं और इसका भुगतान व्यापारियों को करना होगा या नहीं। अभी तक किसी भी राशि पर यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगता। एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, कोई भी बैंक या प्रणाली प्रदाता रुपे डेबिट कार्ड या 2,000 रुपये तक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन के जरिये भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगाएगा।









कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी यूपीआई शुल्क को लेकर सरकार पर निशाना साधा। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने यूपीआई लेनदेन पर सरकार की अधिसूचना पर सवाल उठाए हैं। खरगे ने कहा कि मोदी सरकार की लूट अब यूपीआई तक पहुंच गई है।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सरकार ने यूपीआई पर कोई शुल्क नहीं की व्यवस्था को बदलकर 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क नहीं लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खरगे ने दावा किया कि 5,000 रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10 हजार रुपये के लेनदेन पर 50 रुपये तक की संभावित वसूली की जा सकती है। कांग्रेस के दावों को पूरी तरह से झूठा बताते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि ऐसा कोई सरकारी आदेश नहीं है जिसके तहत 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये या 10,000 रुपये के भुगतान पर 50 रुपये का शुल्क लगाया जाएगा।


</description><guid>12973</guid><pubDate>2026-09-16 12:21:08 12:22:23 pm</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी के जन्मदिन पर आशीर्वाद का दीया जलाएं: भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12967</link><description>नई दिल्ली । भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर नागरिकों से घरों में दीया जलाने की अपील की है। पार्टी मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान चलाएगी। इस दौरान देशभर में रक्तदान शिविर और विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को लोगों से अपील की कि वे 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर अपने घरों में आशीर्वाद का दीया जलाएं और उनके लंबे एवं स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना करें। भाजपा ने मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान चलाने की घोषणा की है जिसके तहत जनभागीदारी, कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने और युवाओं की भागीदारी पर केंद्रित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी मोदी के जन्मदिन को सेवा दिवस के रूप में मनाएगी और इस अवसर पर देशभर में आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम एवं रक्तदान शिविर आयोजित करने की योजना है।








नवीन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा कि जनसेवा से देशसेवा प्रधानमंत्री मोदी के जीवन का मूल ध्येय रहा है और उनके नेतृत्व में भारत विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने लोगों से प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर शाम छह बजे से सात बजे के बीच अपने-अपने घरों में आशीर्वाद का दीया जलाने की अपील की। नवीन ने कहा, मैं आशीर्वाद का दीया जलाऊंगा तथा अपने देशवासियों से भी अपील करता हूं कि आप भी आशीर्वाद का दीया जलाएं और हमारे प्रधानमंत्री की दीर्घायु एवं उनकी निरंतर सफलता के लिए प्रार्थना करें। उन्होंने कहा कि देश का नेतृत्व संभालने के बाद मोदी ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया और नयी नीतियां बनाईं, नए कार्यक्रम शुरू किए तथा कई ऐसी योजनाएं लागू कीं, जिनसे आम लोगों के जीवन में बदलाव आया।
नवीन ने कोविड महामारी के दौरान मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने लोगों में यह विश्वास पैदा किया कि देश आगे बढ़ सकता है और चुनौतियों को अवसरों में बदल सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान भारत के टीकाकरण अभियान ने दुनिया को यह संदेश दिया कि देश आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नवीन ने युवाओं और महिलाओं के लिए शुरू की गई पहलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि स्टार्टअप से जुड़ी पहलों के माध्यम से देश के युवाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के प्रयास किए गए तथा स्वच्छता, शौचालय संबंधी योजनाओं और लखपति दीदी पहल के जरिये महिलाओं की गरिमा सुनिश्चित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया गया। उन्होंने कहा, हमें विश्वास है कि प्रधानमंत्री के सफल नेतृत्व में इस देश की महिलाओं को उनके अधिकार मिलेंगे और वे इसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती रहेंगी। नवीन ने देश से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने का श्रेय भी मोदी को देते हुए कहा कि इसकी जड़ें 200 से अधिक जिलों तक फैल गई थीं।








उन्होंने कहा, आज 2026 में जब हम यहां खड़े हैं तो भारत नक्सलवाद से मुक्त हो गया है। नवीन ने आतंकवाद का जिक्र करते हुए कहा कि देश लंबे समय तक आतंकवाद के साये और भय के माहौल में रहा लेकिन प्रधानमंत्री ने इस खतरे का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने कहा, आज हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं और जो भी हमें बुरी नजर से देखता है, उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाता है। नवीन ने कहा कि इन बदलावों से आम लोगों में आत्मविश्वास बढ़ा है और देश की विकास यात्रा के प्रति उनका भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री का लक्ष्य देश को विकास के मार्ग पर ले जाना रहा है और लोगों ने इस लक्ष्य पर अपना विश्वास जताया है। नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का जो सामूहिक संकल्प दिया है, उसे देश को मिलकर पूरा करना होगा।















</description><guid>12967</guid><pubDate>2026-09-15 11:31:28 11:33:01 am</pubDate></item><item><title>वाकई एक बड़ी उपलब्धि है...ब्रिक्स सम्मेलन की कपिल सिब्बल ने तारीफ की</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12966</link><description>नई दिल्ली । राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन से चीन को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। उन्होंने सदस्य देशों के मतभेदों के बीच संयुक्त घोषणापत्र पारित होने को भारत की बड़ी उपलब्धि बताया। हालांकि, उन्होंने इस घोषणापत्र के वादों के जमीनी स्तर पर वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर सवाल भी उठाए।
राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने सोमवार को कहा कि नई दिल्ली में हाल ही में हुए ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन से चीन को सबसे ज़्यादा फ़ायदा हुआ है। उन्होंने इस समूह को अलग-अलग तरह के देशों का एक मिला-जुला समूह बताया, जिससे ठोस फ़ैसले निकलना मुश्किल था। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने कहा कि अध्यक्ष के तौर पर भारत को सदस्य देशों के बीच मतभेदों को संभालते हुए एक संयुक्त घोषणा-पत्र तैयार करना पड़ा। उन्होंने कहा हमारे लिए यह होर्मुज़ (जलडमरूमध्य) से गुज़रने जैसा था। चीन और रूस इसे पश्चिमी देशों के विरोध वाले एक वैकल्पिक गुट के तौर पर बनाना चाहते हैं और RIC (रूस, भारत, चीन) अब असल में रूस, ईरान और चीन बन गया है... हम नहीं चाहेंगे कि यह (पश्चिमी देशों के विरोध वाला गुट) बने।
सिब्बल ने कहा कि नई दिल्ली घोषणापत्र में किसी वैकल्पिक मुद्रा या डी-डॉलरलाइज़ेशन की बात नहीं की गई, और इसे भारत के लिए एक उपलब्धि बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल-फ़िलिस्तीन विवाद पर समूह का रुख़ बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा लेकिन हमें, और दुनिया के अन्य देशों को भी, यह पता चल गया है कि अमेरिका ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध नहीं जीतेगा। यह हमारे प्रस्ताव में भी झलका, क्योंकि उसमें फ़िलिस्तीन और दो-राष्ट्र सिद्धांत की बात की गई थी। ब्रिक्स को देशों का एक विविध समूह बताते हुए सिब्बल ने कहा कि यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है कि सदस्यों ने बिना किसी विवाद के एक संयुक्त बयान अपनाया। इसीलिए मैंने शुरुआत में ही कहा था कि हमारी सरकार के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है कि बिना किसी विवाद के एक संयुक्त प्रस्ताव पारित हो गया। निर्दलीय राज्यसभा सांसद ने कहा, मैं यह कहना चाहता हूं कि यह कोई गैर-पश्चिमी गठबंधन नहीं हो सकता। इससे सबसे ज़्यादा फ़ायदा चीन को हुआ है।








हालांकि, सिब्बल ने सवाल उठाया कि क्या घोषणापत्र में किए गए वादे असल में लागू होंगे या नहीं; उन्होंने कहा कि ज़मीनी स्तर पर इनका कार्यान्वयन होगा या नहीं, यह तो समय ही बताएगा। रविवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ, जिसमें सदस्य देशों ने एक घोषणापत्र अपनाया। इस घोषणापत्र में वैश्विक शासन और व्यापार प्रणाली में सुधार की मांग की गई। समूह ने लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन, स्टार्टअप्स तथा संक्रामक रोगों की रोकथाम से जुड़े नतीजों की भी घोषणा की।


</description><guid>12966</guid><pubDate>2026-09-15 11:29:49 11:30:51 am</pubDate></item><item><title>जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया का दावा,एऩसीपीआई के 17 सांसद जल्द बीजेपी में होंगे शामिल</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12965</link><description>कोलकाता । कूचबिहार से लोकसभा सदस्य जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया के 20 में से 17 सांसद दुर्गा पूजा के आसपास भारतीय जनता पार्टी का दामन थामेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो-तिहाई संख्या बल होने के कारण उन पर दलबदल रोधी कानून लागू नहीं होगा। वहीं अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले तीन सांसद बाहर से राजग को समर्थन देंगे।
तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता एवं कूचबिहार से लोकसभा सदस्य जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने सोमवार को दावा किया कि एनसीपीआई के 20 में से 17 सांसद अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने वाले हैं। बसुनिया ने संवाददाताओं से कहा कि इन 17 सांसदों ने एक साथ भाजपा में शामिल होने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है और दावा किया कि सामूहिक रूप से दल बदलने पर वे दलबदल रोधी कानून के दायरे में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा, हम 17 सांसद एकसाथ भाजपा में जा रहे हैं।
चूंकि 20 सदस्यों में से दो-तिहाई से अधिक सांसद दल बदल रहे हैं, इसलिए दलबदल रोधी कानून हम पर लागू नहीं होगा। चौदह जून को तृणमूल के 20 असंतुष्ट सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय की घोषणा की थी और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन दिया था। इन 20 बागी सांसदों में से कम से कम 14 सांसदों का दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा करने के लिए साथ जाना जरूरी है, ताकि उन्हें अयोग्यता का सामना ना करना पड़े। बसुनिया ने कहा कि हालांकि, इन 20 सांसदों में से अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले तीन सांसद औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियां इसके अनुकूल नहीं हैं।








उन्होंने दावा किया कि सांसद अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान बाहर से राजग को समर्थन देंगे। बसुनिया ने कहा, वे राजग का समर्थन करेंगे और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां या विभाग दिए जा सकते हैं। बसुनिया का यह बयान उनके और उनकी पत्नी एवं तृणमूल विधायक संगीता रॉय के कूचबिहार के सिताई स्थित पैतृक घर लौटने पर विरोध प्रदर्शन का सामना किये जाने के कुछ दिन बाद आया है। बसुनिया के राजनीतिक रुख में बदलाव की आलोचना के बीच स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने दंपति के खिलाफ प्रदर्शन किया था।इस दौरान उनके आवास के पास स्थित तृणमूल के एक कार्यालय में भी कथित तौर पर आग लगा दी गई थी। बसुनिया लगातार यह कहते रहे हैं कि अब उनका तृणमूल से कोई संबंध नहीं है और वह राजग के साथ हैं।



</description><guid>12965</guid><pubDate>2026-09-15 11:24:57 11:28:40 am</pubDate></item><item><title>यशोभूमि में सेमीक़ॉन इंडिया 2026 का आगाज करेंगे पीएम मोदी, 600 से ज्यादा कंपनियां जुटेंगी</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12964</link><description>नई दिल्ली । MeitY के मुताबिक, इस कन्वेंशन में 15,000 वर्ग मीटर में 600 से ज़्यादा एग्ज़िबिटर (जिनमें 300 इंटरनेशनल फर्म शामिल हैं) और 150 से ज़्यादा स्पीकर हिस्सा लेंगे। एग्ज़िबिशन फ्लोर पर छह देशों के पवेलियन और 12 राज्य सरकारों के पवेलियन होंगे, साथ ही स्टार्टअप्स, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट के लिए खास हिस्से भी होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India 2026 के पांचवें एडिशन का उद्घाटन करेंगे। यह देश के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम पर तीन दिन तक चलने वाले नेशनल कन्वेंशन की शुरुआत होगी। 17 से 19 सितंबर तक चलने वाला यह इवेंट इंडस्ट्री की भागीदारी, पॉलिसी की दिशा और इंटरनेशनल पार्टनरशिप पर फोकस करेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, यह कॉन्फ्रेंस इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), MeitY और ग्लोबल इंडस्ट्री बॉडी SEMI द्वारा मिलकर सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम थीम के तहत आयोजित की जा रही है। MeitY के मुताबिक, इस कन्वेंशन में 15,000 वर्ग मीटर में 600 से ज़्यादा एग्ज़िबिटर (जिनमें 300 इंटरनेशनल फर्म शामिल हैं) और 150 से ज़्यादा स्पीकर हिस्सा लेंगे। एग्ज़िबिशन फ्लोर पर छह देशों के पवेलियन और 12 राज्य सरकारों के पवेलियन होंगे, साथ ही स्टार्टअप्स, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट के लिए खास हिस्से भी होंगे।







इस इवेंट में मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अहम उपलब्धियों की आधिकारिक समीक्षा भी पेश की जाएगी। 'सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम' के तहत केंद्र सरकार ने 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है, जिनमें से 'सेमिकॉन 1.0' के तहत मंज़ूर तीन यूनिट्स में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। इसके अलावा, केंद्रीय कैबिनेट ने 'सेमिकॉन 2.0' के अगले चरण को भी मंज़ूरी दी है, जो छह मुख्य स्तंभों पर आधारित है। इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन टूल्स 400 से ज़्यादा शैक्षणिक संस्थानों और 105 स्टार्टअप्स तक पहुंचाए गए हैं, जबकि 24 स्टार्टअप्स को 'डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम' के तहत मंज़ूरी मिली है। मंत्रालय ने कहा, सेमिकॉन इंडिया 2026 एक व्यापक वैल्यू-चेन अप्रोच अपनाएगा, जिसमें सेमीकंडक्टर मटीरियल और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर एडवांस्ड पैकेजिंग, डिज़ाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम तक के सफ़र को दिखाया जाएगा।




मंत्रालय ने कहा, नया 'सैंड टू सिलिकॉन टू सिस्टम्स' वैल्यू चेन एक्सपीरियंस विजिटर्स को सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की एक मिली-जुली तस्वीर दिखाएगा और वैल्यू चेन के अलग-अलग चरणों में भारत की बढ़ती क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा। स्टार्टअप पैविलियन में लगभग 40 स्टार्टअप्स को दिखाया जाएगा, जबकि वर्कफोर्स डेवलपमेंट पैविलियन माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में टैलेंट, स्किल्स और करियर के मौकों के लिए एक खास प्लेटफॉर्म देगा। यह इवेंट भारतीय और इंटरनेशनल कंपनियों के लिए पार्टनरशिप, इन्वेस्टमेंट के मौकों, टेक्नोलॉजी सहयोग और सप्लाई-चेन लिंकेज तलाशने का एक अहम मौका देगा, जिससे एक भरोसेमंद ग्लोबल सेमीकंडक्टर पार्टनर के तौर पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी।</description><guid>12964</guid><pubDate>2026-09-15 11:22:55 11:24:16 am</pubDate></item><item><title>ब्रिक्स समिट के डिनर मेन्यू पर कांग्रेस की टिप्पणी पर भड़की बीजेपी, सुधांशु त्रिवेदी ने घेरा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12963</link><description>नई दिल्ली । पत्रकारों से बात करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि भारत के लिए इतनी बड़ी डिप्लोमैटिक कामयाबी के बावजूद, कांग्रेस पार्टी का सिर्फ़ डिनर मेन्यू पर टिप्पणी करने का फ़ैसला न सिर्फ़ हंसी के लायक और अफ़सोसनाक है, बल्कि यह उन्हें किसी शादी में नाराज़ फूफ़ा जैसा भी दिखाता है। कांग्रेस की आलोचना पर तंज कसते हुए त्रिवेदी ने कहा कि पार्टी ने इंटरनेशनल मंच के डिप्लोमैटिक, रणनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करने के बजाय खाने पर टिप्पणी करना चुना।
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को हाल ही में हुए ब्रिक्स समिट के डिनर मेन्यू पर कांग्रेस पार्टी की टिप्पणियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस मंच के डिप्लोमैटिक, रणनीतिक और आर्थिक पहलुओं के बजाय खाने पर ध्यान देना यह दिखाता है कि विपक्षी पार्टी के पास कोई ठोस बात कहने की क्षमता नहीं है। पत्रकारों से बात करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि भारत के लिए इतनी बड़ी डिप्लोमैटिक कामयाबी के बावजूद, कांग्रेस पार्टी का सिर्फ़ डिनर मेन्यू पर टिप्पणी करने का फ़ैसला न सिर्फ़ हंसी के लायक और अफ़सोसनाक है, बल्कि यह उन्हें किसी शादी में नाराज़ फूफ़ा जैसा भी दिखाता है। कांग्रेस की आलोचना पर तंज कसते हुए त्रिवेदी ने कहा कि पार्टी ने इंटरनेशनल मंच के डिप्लोमैटिक, रणनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करने के बजाय खाने पर टिप्पणी करना चुना।
उन्होंने कहा कि इतने अहम इंटरनेशनल फ़ोरम के डिप्लोमैटिक, स्ट्रैटेजिक या इकोनॉमिक पहलुओं पर बात करने के बजाय, उन्होंने खाने पर टिप्पणी करना चुना। इससे साफ़ पता चलता है कि वे ब्रिक्स समिट के बारे में कोई ठोस आलोचना या टिप्पणी करने में असमर्थ हैं। उन्होंने आगे कहा इसलिए, मैं कहूंगा कि कांग्रेस की यह टिप्पणी, भले ही समिट की सफलता से उपजी निराशा का नतीजा हो, असल में उनकी अपनी अक्षमता को ही स्वीकार करती है। ब्रिक्स समिट में भारत की भूमिका पर ज़ोर देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि इस इवेंट ने दिखाया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, बदलती दुनिया में ग्लोबल मंच पर एक सकारात्मक और प्रभावशाली ताकत के तौर पर उभर रहा है। उन्होंने कहा हाल ही में संपन्न ब्रिक्स समिट ने एक शानदार उदाहरण पेश किया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, बदलती दुनिया में ग्लोबल मंच पर एक सकारात्मक और प्रभावशाली ताकत के तौर पर उभर रहा है।








त्रिवेदी ने बताया कि सऊदी अरब और ईरान जैसे लंबे समय से मतभेद रखने वाले देशों ने भी इस समिट में हिस्सा लिया और आम सहमति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को अपनाया गया। उन्होंने कहा कि इस घोषणापत्र में आतंकवाद के मुद्दे पर साफ़ तौर पर बात की गई, इस बात पर ज़ोर दिया गया कि आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, और खास तौर पर पहलगाम का ज़िक्र किया गया - और यह सब चीन के समर्थन और सहमति से हुआ। इसे भारत की कूटनीतिक क्षमता का उदाहरण बताते हुए त्रिवेदी ने आगे कहा, मेरा मानना ​​है कि यह कूटनीतिक कौशल का एक शानदार उदाहरण है, एक ऐसी उपलब्धि जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।


</description><guid>12963</guid><pubDate>2026-09-15 11:21:18 11:22:09 am</pubDate></item><item><title>केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन के बाद एसडीआरएफ ने 6500 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12962</link><description>देहरादुन । उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में चीड़वासा हेलीपैड के पास भूस्खलन के कारण केदारनाथ पैदल मार्ग अवरुद्ध होने से हजारों श्रद्धालु फंस गए थे। एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाकर 6500 से अधिक यात्रियों और 700 खच्चरों को सुरक्षित निकाला। मौसम सामान्य होने के बाद मार्ग से मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
चीड़वासा हेलीपैड के समीप भूस्खलन व केदारनाथ पैदल मार्ग के बाधित होने से फंसे 6500 से अधिक तीर्थयात्रियों को सोमवार को बचाव एवं राहत दलों की देखरेख में सुरक्षित निकाला गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) से मिली जानकारी के अनुसार, गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन से उसके आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलने के बाद एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन के समन्वय से यात्रियों को सुरक्षित रूप से रास्ता पार कराया।
एसडीआरएफ के मुताबिक, अब तक 6500 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। साथ ही करीब 600-700 घोड़े-खच्चरों को भी सुरक्षित निकाला जा चुका है। गौरीकुंड से लगभग ढाई किलोमीटर ऊपर चीड़वासा हेलीपेड के समीप रविवार को पहाड़ी से चट्टान और पत्थर गिरने के कारण मार्ग अवरूद्ध हो गया था।
भूस्खलन के दौरान चट्टानों की चपेट में आने से एक स्थानीय निवासी की मौत हो गयी थी। पुलिस के मुताबिक भूस्खलन के बाद पैदल मार्ग पर आवाजाही रोक दी गयी थी। उसने बताया कि पहाड़ी से निरंतर पत्थर गिरने के कारण मार्ग पर से मलबा हटाने में भी दिक्कतें आ रही थीं जिस कारण तीर्थयात्रियों को भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के दोनों तरफ सुरक्षा के मद्देनजर विभिन्न पड़ावों पर रोक दिया गया था।










सोमवार सुबह मौसम अनुकूल होने और चट्टानों व पत्थरों के गिरने का सिलसिला थमने के बाद केदारनाथ से लौटने वाले श्रद्धालुओं को बाधित क्षेत्र से बचाव दलों की देखरेख में चरणबद्ध ढंग से सुरक्षित निकाला गया। पुलिस ने बताया कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के बाद लोक निर्माण विभाग ने बाधित रास्ते पर से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया।


</description><guid>12962</guid><pubDate>2026-09-15 11:19:33 11:20:24 am</pubDate></item><item><title>INDIA गठबंधन के तीन साल पूरे, 14 सदस्यीय समन्वय समिति हुई निष्क्रिय</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12961</link><description>नई दिल्ली । विपक्षी दलों को एकजुट करने के मकसद से बने विपक्षी गठबंधन की शीर्ष 14 सदस्यीय समन्वय समिति अब निष्क्रिय हो चुकी है। सितंबर 2023 में हुई पहली बैठक के बाद इसकी कोई दूसरी बैठक नहीं हुई और इसके दो प्रमुख सदस्य अब राजग में शामिल हो चुके हैं। आगामी कई राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले सहयोगी दलों के बीच आपसी मतभेद भी उभर रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के मकसद से तीन साल पहले गठित इंडिया गठबंन को आगे बढ़ाने के लिए बनाई गई समन्वय समिति अब निष्क्रिय हो चुकी है, हालांकि यह गठबंधन कुछ बिखराव एवं टकराव के बावजूद अपना वजूद बनाए हुए है। गठबंधन की 14 सदस्यीय समन्वय समिति की पहली बैठक 13 सितंबर, 2023 को हुई थी। उस समय इसे गठबंधन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था के रूप में देखा गया था।
हालांकि, वह समिति की आखिरी बैठक भी साबित हुई। तीन साल बाद समन्वय समिति अस्तित्व में नहीं है और इसके मूल सदस्यों में से दो अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खेमे में हैं। इस साल राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बहाल करने का प्रयास जरूर किया गया।
बीते आठ जून को इस गठबंधन के घटक दलों के नेताओं ने दो साल से अधिक समय में पहली बड़ी औपचारिक बैठक की थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने घोषणा की थी कि अब गठबंधन के दल हर दो महीने में बैठक करेंगे। इस साल, अगस्त में हैदराबाद में बैठक का सुझाव दिया गया था, लेकिन वह बैठक नहीं हो सकी।








विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने पीटीआई-भाषा से कहा, हम कांग्रेस द्वारा बैठक की तारीख तय करने का इंतजार कर रहे हैं। हैदराबाद में प्रस्तावित बैठक क्यों नहीं हो सकी, इस बारे में उनकी ओर से कोई जानकारी नहीं है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पूछे जाने पर कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस बीच, गठबंधन बनाने वाले दलों के आपसी संबंधों में बदलाव आया है, जिससे अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
इन राज्यों में कहीं दल सहयोगी हैं, कहीं प्रतिद्वंद्वी और कहीं संभावित साझेदार। पिछले साल गठबंधन से अलग हुई आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब में कांग्रेस के साथ लड़ाई लगातार तीखी होती जा रही है। बीते रविवार को आप ने गोवा में गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस विकल्प पेश करने के लिए गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ गठबंधन किया।
पार्टी गुजरात में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। जहां राज्यवार रणनीति ने चुनावी तौर पर काम किया है, वहां भी मतभेद उभर आए हैं। झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठबंधन ने 2024 में आसानी से सत्ता बरकरार रखी, जबकि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।








झारखंड में कांग्रेस के नेता सरकार में प्रतिनिधित्व और झामुमो के साथ समन्वय को लेकर अक्सर शिकायत करते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ कांग्रेस के रिश्ते खराब हुए हैं। इस महीने दोनों दलों के मतभेद उस समय फिर खुलकर सामने आए जब कांग्रेस ने सरकार समर्थित एक कार्यक्रम में वंदे मातरम के सभी छह अंतरे गाए जाने पर आपत्ति जताई।
इसके जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने सहयोगी दल पर पलटवार किया। तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) का गठबंधन इंडिया गठबंधन के सबसे टिकाऊ राज्य स्तरीय गठबंधनों में से एक था और 2024 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन के प्रदर्शन में उसका महत्वपूर्ण योगदान रहा था। हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस द्रमुक के नेतृत्व वाले मोर्चे से अलग हो गई और सत्तारूढ़ टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई।








सितंबर 2023 में मुंबई में हुई बैठक में गठबंधन के 13 सदस्यों को 14 सदस्यीय समन्वय समिति में शामिल किया गया था। एक सीट माकपा के लिए रखी गई थी, लेकिन उसने अपना प्रतिनिधि नामित नहीं किया। समिति में कांग्रेस की ओर से के. सी. वेणुगोपाल, तत्कालीन अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से शरद पवार, द्रमुक से टी. आर. बालू, झामुमो से हेमंत सोरेन, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से संजय राउत, राजद से तेजस्वी यादव, तृणमूल कांग्रेस से अभिषेक बनर्जी, आप से राघव चड्ढा, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए, समाजवादी पार्टी से जावेद अली खान, जनता दल (यूनाइटेड) से ललन सिंह, जो 2024 में भाजपा नीत राजग में लौट गए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से डी. राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस से उमर अब्दुल्ला और पीडीपी से महबूबा मुफ्ती शामिल थे।



</description><guid>12961</guid><pubDate>2026-09-15 11:16:57 11:18:37 am</pubDate></item><item><title>हिंदी किसी की प्रतिस्पर्धी नहीं, यह भारतीय भाषाओं के बीच आत्मीय संवाद और राष्ट्रीय एकात्मता की अहम कड़ी: अमित शाह</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12960</link><description>नई दिल्ली । केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 'हिंदी दिवस' के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हिंदी किसी भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं के बीच आत्मीय संवाद और राष्ट्रीय एकात्मता की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि की अनुपम भूमि है। सभी लोग कहते हैं कि हमारी भाषाएं अलग-अलग हैं।
मैं मानता हूं कि हमारी सबसे बड़ी ताकत इतनी सारी भाषाएं होना है। अपने साथ हर भाषा एक इतिहास, लोक परंपरा और जीवन दृष्टि को लेकर चलती है, जो हमारी नई पीढ़ी के संस्कार को भी आगे बढ़ाती है। उन्होंने कहा, यही भाषाई बहुलता भारत की विविधता में एकता की भावना को सशक्त बनाती है। भाषा सिर्फ संवाद का साधन नहीं है, बल्कि किसी भी समाज की स्मृति औरप आत्मबोध होती है। हिंदी ने इस विविधता के बीच संवाद, संपर्क और समन्वय की भाषा के रूप में देश के विभिन्न वर्गों और समुदायों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हिंदी का विकास तभी सार्थक है, जब वह सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के साथ आगे बढ़े। अमित शाह ने कहा, हिंदी किसी भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं के बीच आत्मीय संवाद और राष्ट्रीय एकात्मता की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस सत्य का सबसे सुंदर प्रमाण हमारा अपना इतिहास है। शाह ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती की मातृभाषा गुजराती थी। फिर भी उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश हिंदी में लिखा। महात्मा गांधी ने 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस बांग्ला भाषी थे, पर उन्होंने आजाद हिंद फौज की संपर्क भाषा हिंदी को बनाया और देश को 'जय हिंद' का नारा दिया। गृह मंत्री ने कहा कि हिंदी को सभी लोगों ने जनसंवाद की भाषा बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उन महापुरुषों का बहुत बड़ा योगदान हम सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है, जिनकी अपनी मातृभाषा हिंदी कभी नहीं थी। मेरी अपनी मातृ भाषा भी गुजराती है, पर मैं जब देश में किसी भी कोने में जाता हूं तो जो भाषा मुझे वहां के सामान्यजन से सीधा जोड़ती है, वह हिंदी है।

</description><guid>12960</guid><pubDate>2026-09-14 17:36:31 5:37:38 pm</pubDate></item><item><title>विमल इलायची विज्ञापन मामले में दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को सुनाएगा फैसला</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12956</link><description>नई दिल्ली । महाराष्ट्र एफडीए द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय अपना फैसला सुनाएगा। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा तय करेंगी कि इस मामले की सुनवाई का अधिकार दिल्ली उच्च न्यायालय के पास है या नहीं।
दिल्ली उच्च न्यायालय सोमवार को इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगा कि क्या वह विमल इलायची बनाने वाली कंपनी की उस याचिका पर सुनवाई कर सकता है जिसमें महाराष्ट्र एफडीए द्वारा उनके ब्रांड एंबेसडर - शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ - को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को रद्द करने का अनुरोध किया गया है। महाराष्ट्र एफडीए ने ये नोटिस विज्ञापन में उत्पाद के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में जारी किए थे। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने पूर्व में इस कानूनी प्रश्न पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय को इस मामले की सुनवाई का न्यायाधिकार क्षेत्र है या नहीं।
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उन्होंने फैसला सुनाने के लिए 14 सितंबर की तारीख तय की थी। पीबी एग्रो एलएलपी ने अपनी याचिका में कहा है कि वह विमल ब्रांड के तहत इलायची उत्पादों के प्रचार के लिए लोकप्रिय अभिनेताओं की सेवाएं लेती है और उनके साथ विज्ञापन करार करती है। कंपनी का कहना है कि उसका विज्ञापन अभियान कानूनों का पूरी तरह से पालन करता है।
याचिका में कहा गया कि महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने नियामकीय नोटिस जारी किए थे। इन नोटिस में आरोप लगाया गया है कि विमल इलायची के विज्ञापन वास्तव में विमल पान मसाला का परोक्ष विज्ञापन हैं, जबकि महाराष्ट्र में ऐसे उत्पादों को प्रतिबंधित किया गया है। याचिका में कहा गया है कि महाराष्ट्र एफडीए ने विमल इलायची के विज्ञापनों में दिखने वाले अभिनेताओं को ऐसे दस्तावेज़ देने का निर्देश दिया था, जिनसे यह साबित हो सके कि विमल इलायची प्रतिबंधित पान मसाला उत्पादों से अलग उत्पाद है।










इसमें प्रचार अभियान को रोकने और डिजिटल मंचों से इससे जुड़ी सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ता का पक्ष रखने के लिए पेश हुए वकील ने दलील दी कि 11 अगस्त, 2026 का एफडीए का नोटिस केवल संबंधित पक्षों को भेजा गया था, न कि खुद कंपनी को, जबकि राज्य नियामक की किसी भी कार्रवाई से कंपनी को ही अपूरणीय क्षति होगी। वकील ने कहा था कि याचिकाकर्ता को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया।
कंपनी ने दावा किया था कि महाराष्ट्र एफडीए के पास विज्ञापन रोकने के निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं था। केंद्र और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि याचिका मुंबई उच्च न्यायालय में दायर की जानी चाहिए थी, क्योंकि कारण बताओ नोटिस महाराष्ट्र सरकार ने जारी किया है।


</description><guid>12956</guid><pubDate>2026-09-14 12:11:26 12:12:18 pm</pubDate></item><item><title>गोवा चुनाव से पहले बड़ा खेल! आप-जीएफपी ने मिलाया हाथ, कांग्रेस-बीजेपी की बढ़ी टेंशन</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12955</link><description>पणजी । आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गोवा फर्स्ट नाम से गठबंधन का ऐलान किया है। अरविंद केजरीवाल और विजय सरदेसाई द्वारा घोषित यह गठबंधन भाजपा और कांग्रेस दोनों के विकल्प के रूप में मैदान में उतरेगा। इस नए मोर्चे के बनने से गोवा में मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं।
गोवा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी और क्षेत्रीय दल गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ने का ऐलान किया है। दोनों दलों ने अपने गठबंधन का नाम गोवा फर्स्ट रखा है। इस नए गठबंधन के मैदान में आने से गोवा में चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
अरविंद केजरीवाल और विजय सरदेसाई ने किया ऐलान
रविवार को पणजी में हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने गठबंधन की औपचारिक घोषणा की। दोनों नेताओं ने साफ संकेत दिया कि गोवा फर्स्ट बीजेपी और कांग्रेस, दोनों से अलग राजनीतिक विकल्प के तौर पर चुनाव मैदान में उतरेगा।
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कांग्रेस और बीजेपी पर साधा निशाना
गठबंधन की घोषणा से पहले पूरे गोवा में आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के संयुक्त होर्डिंग्स लगाए गए थे। इन पर लिखा था, कांग्रेस और बीजेपी ने आपको दो बार धोखा दिया, तीसरी बार धोखा मत खाने दो।
इस संदेश के जरिए कांग्रेस में हुई बड़ी बगावत पर निशाना साधा गया। 2019 में कांग्रेस के 15 में से 10 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे। इसके बाद 2022 में कांग्रेस के 11 में से 8 विधायक बीजेपी में चले गए थे।
कांग्रेस से बातचीत के बाद अलग रास्ता चुना
गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने बताया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत हुई थी। हालांकि, दल-बदल के मुद्दे पर उन्हें कोई साफ जवाब नहीं मिला। इसके बाद उनकी पार्टी ने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया। सरदेसाई ने कहा कि गोवा फर्स्ट गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेस मोर्चे के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ेगा।
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2022 में कांग्रेस के साथ था GFP का गठबंधन
2022 के विधानसभा चुनाव में गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था। पार्टी ने फतोरदा सीट पर जीत हासिल की थी और विजय सरदेसाई खुद इस सीट से विधायक हैं।वहीं, आम आदमी पार्टी ने पिछला विधानसभा चुनाव अकेले लड़ा था। पार्टी ने दक्षिण गोवा की बेनौलिम और वेलिम सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन दोनों सीटों से वेंजी वीगस और क्रूज सिल्वा विधायक हैं।
2027 के चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
गोवा में विधानसभा चुनाव फरवरी 2027 से पहले होने हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नए गठबंधन के सामने आने से राज्य में चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं।

</description><guid>12955</guid><pubDate>2026-09-14 12:09:53 12:10:34 pm</pubDate></item><item><title>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में साझा घोषणापत्रपर बनी सहमति, विदेशी पत्रकारों ने बताया बड़ी उपलब्धि</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12954</link><description>नई दिल्ली । भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में साझा घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है। भारत मंडपम में मौजूद चीन, मिस्र और इंडोनेशिया के पत्रकारों ने पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक शासन पर बनी इस आम सहमति की सराहना की।
चीन के एक वैश्विक टेलीविजन नेटवर्क से लेकर इंडोनेशिया के एक समाचार पोर्टल तक, भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को कवर कर रहे कई विदेशी पत्रकारों ने नयी दिल्ली घोषणापत्र पर बनी आम सहमति का स्वागत किया। कुछ ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया, जबकि अन्य ने इसे अच्छा कदम करार दिया। भारत 12-13 सितंबर को मध्य दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।









इसमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और कई अन्य राष्ट्राध्यक्षों ने शिरकत की है। चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, कजाकिस्तान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और मिस्र समेत कई देशों के बड़ी संख्या में पत्रकार भारत मंडपम परिसर में आयोजित इस शिखर सम्मेलन को कवर करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं। अखबारों और टीवी चैनलों के लिए अपनी खबरें भेजने की व्यस्तता के बीच, इन पत्रकारों में से कुछ ने पीटीआई-भाषा से भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को कवर करने के अपने अनुभव और नयी दिल्ली घोषणापत्र पर अपने विचार साझा किए।








भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में ब्रिक्स समूह ने शनिवार को आम सहमति से एक साझा घोषणापत्र को अपनाया। यह सहमति पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर यूएई और ईरान के बीच गहरे मतभेदों को दूर करने के बाद बनी। घोषणापत्र में ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिका का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया।
पत्रकार हुआंग यूए बीजिंग मुख्यालय वाले चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क (सीजीटीएन) की 12 सदस्यीय टीम का हिस्सा हैं। उन्होंने शिखर सम्मेलन पर करीबी नजर रखी है, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शामिल हुए। शी ने इससे पहले 2019 में भारत की यात्रा की थी।








उन्होंने शिखर सम्मेलन स्थल पर बनाए गए अंतरराष्ट्रीय मीडिया केंद्र में पीटीआई-भाषा से कहा, नयी दिल्ली घोषणापत्र काफी लंबा है। मेरे नजरिए से इसके तीन प्रमुख पहलू हैं। पहला है वैश्विक शासन।
ब्रिक्स के साझेदार देश ग्लोबल साउथ की प्रमुख आवाज हैं। इसलिए ग्लोबल साउथ के देशों के लिए मिलकर काम करना और विकासशील देशों के विकास में योगदान देना महत्वपूर्ण है, खासकर मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में। चीनी पत्रकार ने कहा कि दूसरा प्रमुख पहलू शांति को बढ़ावा देना है। घोषणापत्र में ब्रिक्स नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चिंता जताई है और संबंधित पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि नेताओं ने इन संघर्षों के समाधान के लिए संवाद को बढ़ावा देने और कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल करने की बात कही है। हुआंग ने कहा कि तीसरा प्रमुख पहलू व्यावहारिक सहयोग है। उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में अशांति के बावजूद ब्रिक्स देश एनडीबी के सहयोग से विकासशील देशों को वित्त मुहैया करा रहे हैं।









शिखर सम्मेलन से इतर शनिवार शाम राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बारे में उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि नयी दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंध और अधिक मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को राष्ट्रपति शी चिनफिंग से कहा कि सीमा पर शांति और सौहार्द भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए आवश्यक आधार बना हुआ है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में लगातार हो रही प्रगति का भी स्वागत किया। मिस्र की पत्रकार अमीना जकी ने घोषणापत्र को बड़ी सफलता करार दिया और कहा कि सभी सदस्य देश आम सहमति बनाने में सफल रहे।









जकी अल दस्तूर अखबार में विदेश मामलों पर लिखती हैं। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) एक ही मेज पर थे और ऐसे में आम सहमति बनना काफी महत्वपूर्ण है। जकी ने कहा, इसके अलावा, संदेश बिल्कुल स्पष्ट थाब्रिक्स नेताओं ने बिना किसी दोहरे मापदंड के हर तरह के आतंकवाद को खारिज किया। इंडोनेशिया के पत्रकार फहारी जुल्फिकार भी एक समाचार पोर्टल के लिए शिखर सम्मेलन को कवर करने के लिए नयी दिल्ली में हैं।









जुल्फिकार ने कहा, आम सहमति से तैयार किया गया घोषणापत्र एक अच्छा कदम है। इसमें पश्चिम एशिया के संघर्ष और एकतरफा प्रतिबंधों समेत कई अहम मुद्दों का जिक्र किया गया है। हालांकि, मुझे लगता है कि इसमें कोई ठोस समाधान पेश नहीं किया गया है, लेकिन फिर भी यह एक अच्छा कदम है। योग्याकार्ता के निवासी जुल्फिकार ने जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान इस क्षेत्र के दौरे को भी याद किया।




उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में किसी समय इंडोनेशिया भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। सन मीडिया कॉरपोरेशन में कार्यरत मलेशिया की पत्रकार अजुरा अबास ने नयी दिल्ली घोषणापत्र को काफी व्यापक दस्तावेज बताया, जिसमें कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है।





























</description><guid>12954</guid><pubDate>2026-09-14 12:04:42 12:06:39 pm</pubDate></item><item><title>2029 तक एनडीए शासित 21 राज्यों में लागू होगा यूसीसी,अमित शाह ने आतंकवाद पर जीराे टालरेंस का संकल्प दोहराया</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12953</link><description>मुंबई । यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाह ने कहा हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पेश किया है। मुझे भरोसा है कि हम 2029 से पहले BJP के नेतृत्व वाले NDA की सरकार वाले सभी 21 राज्यों में UCC लागू कर देंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) - जिसका मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों के लिए धर्म से परे एक समान पर्सनल लॉ लागू करना है - उसे 2029 से पहले BJP के नेतृत्व वाले NDA की सरकार वाले सभी 21 राज्यों में लागू किया जाएगा। मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाह ने कहा हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पेश किया है। मुझे भरोसा है कि हम 2029 से पहले BJP के नेतृत्व वाले NDA की सरकार वाले सभी 21 राज्यों में UCC लागू कर देंगे। शाह ने सरकार की सुरक्षा नीति पर भी ज़ोर दिया और कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस (सख़्त रवैये) की नीति स्थापित की है, साथ ही सभी क्षेत्रों में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
2014 से 'काम-काज की राजनीति'
शाह ने कहा कि 2014 से पहले भारत भ्रष्टाचार, जातिवाद और परिवारवाद की राजनीति के दौर से गुज़र रहा था, लेकिन BJP की सरकार के तहत अब यह काम-काज पर आधारित राजनीति की ओर बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश और रक्षा नीतियों को एक मज़बूत आधार मिला है, जिसमें सरकार का नज़रिया भारत पहले (India First) की सोच से तय होता है और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जाती है।
शाह ने भारत की आर्थिक तरक्की का भी ज़िक्र किया और कहा कि देश फ़्रैजाइल फ़ाइव (कमज़ोर पाँच) अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी से निकलकर शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है। उन्होंने पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी वृद्धि की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे है। उन्होंने सरकार द्वारा अनुच्छेद 370, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की स्थिति से निपटने के तरीकों पर भी प्रकाश डाला और इन्हें ऐसी पुरानी चुनौतियाँ बताया, जिन्होंने दशकों तक भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा किया था।




जब उनसे पूछा गया कि क्या राज्य में चुनाव से पहले 1951 के आधार वर्ष का इस्तेमाल करके मणिपुर में नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) लागू किया जाएगा और क्या पूरे देश में NRC लागू करने की कोई समय-सीमा तय है, तो शाह ने कहा कि मणिपुर में सहयोगियों और राजनीतिक दलों के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा, जैसे ही कोई फ़ैसला लिया जाएगा, हम आपको बता देंगे। अवैध रूप से आकर बसने वालों के मुद्दे पर शाह ने सरकार का रुख़ दोहराया कि अवैध प्रवासियों की पहचान की जाएगी और उन्हें देश से बाहर निकाला जाएगा, लेकिन इसके लिए जिस तरीक़े पर विचार किया जा रहा है, उसका ब्योरा नहीं दिया जाएगा। भाषा को लेकर हो रही बहस पर शाह ने कहा कि मातृभाषा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और राज्य का नेतृत्व इस मुद्दे का समाधान निकालेगा। उन्होंने कुछ लोगों पर लोगों के बीच फूट डालने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।</description><guid>12953</guid><pubDate>2026-09-14 12:02:26 12:03:20 pm</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी और राष्ट्रपति टोकायेव ने रणनीतिक साझेदारी को दिया नया आयाम, द्विपक्षीय संबंधों पर जताई संतुष्टि</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12952</link><description>नई दिल्ली । विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कज़ाकिस्तान के साथ भारत के प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को याद किया और हाल के वर्षों में भारत-कज़ाकिस्तान संबंधों के लगातार विकास पर संतोष व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कज़ाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव ने रविवार को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के अपने संकल्प को दोहराया। साथ ही, उन्होंने हाल के वर्षों में भारत-कज़ाकिस्तान संबंधों के लगातार विकास पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर राष्ट्रपति टोकायेव से मुलाकात की; कज़ाख राष्ट्रपति ने आज ही भारत मंडपम में ब्रिक्स सत्रों में भाग लिया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की, जिनमें राजनीतिक संबंध, व्यापार, रक्षा और सुरक्षा, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उभरती प्रौद्योगिकियां, रचनात्मक अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच संबंध शामिल हैं। उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कज़ाकिस्तान के साथ भारत के प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को याद किया और हाल के वर्षों में भारत-कज़ाकिस्तान संबंधों के लगातार विकास पर संतोष व्यक्त किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि नेताओं ने अपने लोगों के आपसी लाभ के साथ-साथ क्षेत्र में शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि के लिए रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और कज़ाकिस्तान के बीच फरवरी 1992 से मजबूत संबंध रहे हैं, जब भारत कज़ाकिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में से एक बना था। प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई 2015 और फिर जून 2017 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए कज़ाकिस्तान का दौरा किया, जब भारत को संगठन का पूर्ण सदस्य बनाया गया था। दोनों देशों ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग विकसित किया है। भारत ने कज़ाकिस्तान को 'परम बिलिम' सुपरकंप्यूटर उपहार में दिया, जिसे अपग्रेड किया गया और 28 जून, 2025 को अक्कोल में चालू किया गया।








प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति टोकायेव के बीच यह बैठक राष्ट्रीय राजधानी में दो दिन तक चले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के बाद हुई। इससे पहले दिन में, प्रधानमंत्री मोदी ने लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, टेक्नोलॉजी, कृषि, कौशल, MSME, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक और लोगों पर केंद्रित समाधानों पर भारत के फोकस को रेखांकित किया।


</description><guid>12952</guid><pubDate>2026-09-14 12:00:05 12:01:06 pm</pubDate></item><item><title>ब्रिक्स मेहमानों की थाली बनी सियासी मुद्दा, राहुल गांधी की टिप्पणी का किरेन रिजिजू ने दिया जवाब</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12951</link><description>नई दिल्ली । ब्रिक्स रात्रिभोज में शाकाहारी खाना परोसे जाने पर विवाद हो गया है। राहुल गांधी द्वारा अस्सी प्रतिशत भारतीयों को मांसाहारी बताए जाने पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर खाने को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया।

ई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के भव्य रात्रिभोज में पूरी तरह शाकाहारी खाना परोसे जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत में 80 फीसदी लोग मांसाहारी हैं और भारतीय मांसाहारी खाना स्वादिष्ट होता है।राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर विदेशी मेहमानों को परोसे गए खाने को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा कि ब्रिक्स देशों के नेताओं ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुए भव्य रात्रिभोज में कई तरह के शाकाहारी व्यंजन परोसे गए थे। इसके अगले दिन राहुल गांधी ने भारत के मांसाहारी खाने की तारीफ की।उन्होंने सोशल मीडिया पर छोले भटूरे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि जानकारी के लिए बता दूं, 80 फीसदी भारतीय मांसाहारी हैं। उन्होंने भारतीय मांसाहारी खाने को स्वादिष्ट बताया और अपनी बहन के छोले भटूरे की भी तारीफ की।
किरेन रिजिजू ने दिया जवाब
राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेनू को भी राजनीतिक मुद्दा बना रही है।रिजिजू ने कहा कि भारत आए मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का खूब आनंद लिया। उन्होंने कहा कि ये व्यंजन स्वाद और पोषण से भरपूर होने के साथ-साथ देश की अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं को भी दिखाते हैं।
ब्रिक्स के रात्रिभोज में क्या-क्या परोसा गया?
ब्रिक्स के भव्य रात्रिभोज में शुरुआत से लेकर मिठाई तक पूरी तरह शाकाहारी व्यंजन शामिल थे। शुरुआत में खांडवी मिले और खुम्ब गलौटी परोसे गए। खांडवी मिले सरसों, नारियल और करी पत्तों के तड़के के साथ तैयार किया गया बेसन का रोल था। वहीं खुम्ब गलौटी पुदीने के दानों के साथ परोसे गए पैन पर सेंके हुए मशरूम कबाब थे।मुख्य खाने में पनीर लबाबदार, गुच्ची मार्मिक, गाजर बीन पोरियल और दूसरे व्यंजन शामिल थे। गुच्ची मार्मिक हिमालयी मोरेल मशरूम और कोमल शतावरी से तैयार किया गया खास व्यंजन था।इसके साथ थक्कली बेले सारू, बाजरा पुलाव, चुकंदर रायता और अलग-अलग तरह की भारतीय रोटियां भी परोसी गईं। मिठाई में खास मेहमानों के लिए ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम विद जलेबी और शाहतूत फिरनी रखी गई थी।
खाने को लेकर आमने-सामने कांग्रेस और सरकार
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के रात्रिभोज में परोसे गए शाकाहारी खाने को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद अब कांग्रेस और सरकार के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है। एक तरफ राहुल गांधी ने भारतीय मांसाहारी खाने की तारीफ की, तो दूसरी तरफ किरेन रिजिजू ने ब्रिक्स नेताओं के भारतीय शाकाहारी खाने का आनंद लेने की बात कही।</description><guid>12951</guid><pubDate>2026-09-14 11:54:57 11:55:32 am</pubDate></item><item><title>भाजपा नेता कलराज मिश्र की पत्नी का निधन</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12950</link><description>नई दिल्ली ।भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र की पत्नी सत्यवती मिश्रा का रविवार को निधन हो गया। कलराज मिश्र की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट साझा कर जानकारी दी गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। कलराज मिश्र ने 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, मेरी धर्मपत्नी सत्यवती मिश्रा, आज अपनी जीवन यात्रा पूर्ण कर ईश्वर के श्रीचरणों में विलीन हो गईं हैं, प्रभु उनको अपने श्री चरणों में स्थान दें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धांजलि देते हुए 'एक्स' पर लिखा, भाजपा परिवार के वरिष्ठ सदस्य, पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र की धर्मपत्नी का निधन अत्यंत दुःखद है। विनम्र श्रद्धांजलि। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति एवं शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

अंडमान निकोबार के उपराज्यपाल दिनेश शर्मा ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, अत्यंत दुखद समाचार है कि पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र की अर्धांगिनी सत्यवती मिश्रा, हम सब की चाची जी अब नहीं रहीं, निष्कपट धर्म परायण और सब की चिंता करने वाली आप एक ऐसी ग्रहणी थीं, जो घर में आने वाले हर व्यक्ति को बराबर का सम्मान देती थीं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को सद्गति प्रदान करें, यही प्रार्थना है।
यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 'एक्स' पर लिखा, भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र की धर्मपत्नी सत्यवती मिश्रा के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

</description><guid>12950</guid><pubDate>2026-09-14 11:52:01 11:52:55 am</pubDate></item><item><title>ब्रिक्स समिट में शामिल होने के बाद चीन रवाना हुए शी जिनपिंग</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12949</link><description>नई दिल्ली ।18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन रवाना हो गए। दूसरे दिन आउटरीच बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन सुनने के बाद उन्होंने फैमिली फोटो भी खिंचवाई। शनिवार को ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए वो सात साल बाद भारत आए थे।
शिखर सम्मेलन से इतर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। जिसमें उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि साझेदार हैं। इसके साथ ही दोनों देशों द्वारा सीमा विवाद को सुलझाते हुए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की। चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, पिछले दो वर्षों में शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी दो बार मुलाकात कर चुके हैं। इन बैठकों ने दोनों देशों के संबंधों को फिर से पटरी पर लाने और उन्हें सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बयान में कहा गया कि भारत और चीन के बीच संस्थागत स्तर पर संवाद धीरे-धीरे फिर शुरू हुआ है। दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है और द्विपक्षीय व्यापार भी नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और चीन की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों देश एक-दूसरे की ताकतों से सीख सकते हैं, एक-दूसरे का सहयोग कर सकते हैं और साझा सफलता हासिल करते हुए साथ आगे बढ़ सकते हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति शी ने भारत-चीन संबंधों के दीर्घकालिक और स्थिर विकास के लिए चार प्रमुख सुझाव भी दिए।</description><guid>12949</guid><pubDate>2026-09-14 11:50:14 11:50:52 am</pubDate></item><item><title>अपनी संस्कृति और स्मृतियों की रक्षा करने वाला राष्ट्र कभी पराजित नहीं होता: अमित शाह</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12948</link><description>मुंबई ।गृह मंत्री अमित शाह मुंबई दौरे के दौरान एशियाटिक सोसायटी में आयोजित गणेश ज्ञानार्थी प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। समारोह में आए लोगों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, मैं पहला गृह मंत्री हूं जो एशियाटिक सोसायटी में आया है, लेकिन मैं यहां गृह मंत्री के नाते नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को सहस्रों वर्षों तक आगे ले जाने के आंदोलन के एक आंदोलनकारी के रूप में आया हूं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि एशियाटिक सोसायटी मुंबई भारतीय ज्ञान परंपरा की वाहक बनकर इसे देशभर में पहुंचाने का कार्य करेगी। जो राष्ट्र अपनी भाषा, संस्कृति, स्मृति, इतिहास, संस्कार, अभिलेख और पंरपराओं की रक्षा नहीं कर सकता है, वह कितना भी शक्तिशाली हो, उसको समाप्त होने में देर नहीं लगती है। जो राष्ट्र अपनी भाषा, संस्कृति, स्मृति, इतिहास, संस्कार, भाषा, परंपराएं और व्यकारण की रक्षा करता है, वह चाहे जितने साल भी गुलाम रहे, उसको गुलाम नहीं बना सकता है, इसका भारत उदाहरण है।
अनेक लोगों ने पूरे विश्व का मार्दर्शन देने वाले यहां पैदा हुए ओजस्वी ज्ञान को समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन नहीं कर पाए। नालंदा का पुस्तकालय जला सकते हैं, लेकिन स्मृति और श्रुति से जो लोगों के चित में बसा है, उस ज्ञान को कोई समाप्त नहीं कर सकता। गृह मंत्री ने आगे कहा, हमारे देश का संस्कार है कि जब हम पराजित होते हैं, तब धैर्य रखकर आगे बढ़ते हैं। जब विजयी होते हैं, तो जिन पर विजय प्राप्त करते हैं, उनकी स्मृतियों को नष्ट किए बिना हमारे परंपरा में जोड़ने का प्रयास करते हैं।
अमित शाह ने एशियाटिक सोसायटी में परिवर्तन लाने पर जोर देते हुए कहा, सच्चा ज्ञान, कभी किसी विचारधारा का बंधक नहीं होता। ज्ञान अपने आप में एक विचारधारा है और इसको किसी प्रकार से बांधते हो तो ज्ञान के मायने बदल जाते हैं। ज्ञान मुक्त और उन्मुक्त होना चाहिए।
इसलिए एशियाटिक सोसायटी में जो ज्ञान, संपदा और एकत्रिकरण का उपयोग महान भारत की रचना में करना चाहिए। एशियाटिक सोसायटी के ज्ञान का इस्तेमाल अब विश्व के कल्याण के लिए होगा। अंग्रेजों ने ज्ञान और सत्ता को एक सूत्र में बांध दिया था, लेकिन अब ज्ञान और सत्ता को अलग कर ज्ञान के आधार पर सत्ता की रचना हो और देश चले, ऐसी व्यवस्था बनाने का काम एशियाटिक सोसायटी को करना चाहिए।

</description><guid>12948</guid><pubDate>2026-09-14 11:47:21 11:48:20 am</pubDate></item><item><title>मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मिले राहुल और प्रियंका गांधी</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12947</link><description>नई दिल्ली ।नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से रविवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने नाश्ते पर मुलाकात की। कांग्रेस पार्टी ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा करते हुए लिखा, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जी ने नई दिल्ली में मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम से नाश्ते पर मुलाकात की। अपने दौरे के दौरान उन्होंने शनिवार को ब्रिक्स सम्मेलन के 'समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने' विषय पर आयोजित सत्र में भाग लिया। उन्होंने ब्रिक्स देशों के अन्य नेताओं के साथ नई दिल्ली में पौधरोपण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। शनिवार शाम को वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित गाला डिनर में भी शामिल हुए।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान अनवर इब्राहिम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। प्रधानमंत्री मोदी और अनवर इब्राहिम की बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान अनवर इब्राहिम ने भारत के कोटा किनाबालू, सबाह में भारतीय वाणिज्य दूतावास स्थापित करने पर मलेशिया की सहमति भी जताई।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री इब्राहिम का भारत में गर्मजोशी से स्वागत किया और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में साझेदार देश के रूप में मलेशिया की भागीदारी की सराहना की। दोनों नेताओं ने फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया यात्रा के बाद हुए कार्यों की समीक्षा की और व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, बुनियादी ढांचा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, फिनटेक, शिक्षा, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति पर चर्चा की।

</description><guid>12947</guid><pubDate>2026-09-14 11:41:21 11:41:57 am</pubDate></item></channel></rss>