<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>देश-विदेश - Dainandini Feed</title><link>https://dainandini.in/</link><description>Dainandini Feed Description</description><item><title>विक्रम-बेताल टिप्पणी पर भड़के पप्पू यादव, बोले- ललन सिंह दूसरों के सहारे राजनीति करते हैं, खुद की ताकत दिखाएं</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12439</link><description>पटना। ​बिहार की राजनीति में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हाल ही में ललन सिंह द्वारा पप्पू यादव को विक्रम-बेताल कहे जाने पर सांसद ने कड़ा पलटवार किया है। ​राजनीतिक इतिहास और निर्दलीय चुनाव की चुनौती ​फेसबुक लाइव के माध्यम से पप्पू यादव ने ललन सिंह पर निशाना साधते हुए उनके राजनीतिक सफर पर सवाल उठाए। पप्पू यादव ने कहा जब ललन सिंह राजनीति में अपनी जगह तलाश रहे थे तब मैं 1990 में विधायक और 1991 में सांसद बन चुका था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ललन सिंह हमेशा दूसरों (लालू यादव, नीतीश कुमार जॉर्ज फर्नांडिस) के सहारे आगे बढ़े हैं। उन्होंने चुनौती दी कि यदि ललन सिंह में वास्तव में दम है तो उन्हें किसी दल का सहारा लेने के बजाय एक बार निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी ताकत दिखानी चाहिए। ​विकास कार्यों और एयरपोर्ट पर तकरार ​पूर्णिया दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री के निरीक्षण पर सवाल उठाते हुए पप्पू यादव ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि ललन सिंह मेडिकल कॉलेज के रुके हुए कार्यों के लिए फंड जारी करवाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एयरपोर्ट के मुद्दे पर सांसद ने दावा किया कि इसके लिए उन्होंने सालों तक संघर्ष किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके सांसद न रहने के दौरान अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए। ​केंद्र सरकार और बुनियादी ढांचे पर निशाना ​पप्पू यादव ने केंद्र की मोदी सरकार पर सीमांचल के उपेक्षित विकास का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 12 वर्षों में केंद्र सरकार चाहती तो क्षेत्र को वंदे भारत और अमृत भारत जैसी सुविधाएं पहले ही मिल जातीं। पप्पू यादव ने दावा किया कि क्षेत्र की कई बुनियादी परियोजनाओं की शुरुआत उन्हीं के प्रयासों से हुई थी। बिहटा मुंगेर और भागलपुर का मुद्दा अंत में ललन सिंह को चुनौती देते हुए उन्होंने बिहटा एयरपोर्ट के लटके हुए काम और मुंगेर-भागलपुर में हवाई सेवा के अभाव पर घेरा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ललन सिंह को मुंगेर का सांसद होने के नाते वहां से रोजाना विमान सेवा शुरू करवानी चाहिए अन्यथा ये दावे खोखले हैं। पप्पू यादव ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं और अपने क्षेत्र के विकास के लिए आवाज उठाते रहेंगे।</description><guid>12439</guid><pubDate>2026-06-20 16:40:16 4:42:30 pm</pubDate></item><item><title>ओबामा ने ट्रंप की ईरान नीति पर उठाए सवाल</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12438</link><description>वाशिंगटन। अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील हो चुकी है। जी7 समिट से लेकर ट्रुथ सोशल से लगातार वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को निशाने पर लेते आए हैं। 'जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन' (जेसीपीओए) को 'ईरान को रिश्वत देने की कोशिश' कहते आए हैं और अपने हालिया शांति समझौते को बेहतरीन करार दे रहे हैं। अब ओबामा ने ईरान नीति की सख्त मुखालफत की है। उन्होंने कहा है कि हालात पहले से बदतर हो गए हैं।
ईरान के साथ अमेरिका के पिछले परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक साक्षात्कार में ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति की आलोचना की। शुक्रवार को प्रसारित कार्यक्रम में, ओबामा ने कहा, हमने अब एक युद्ध लड़ा है, अरबों-खरबों डॉलर खर्च किए हैं, अपनी सेना पर भारी दबाव डाला है। बहुत से लोगों की जान गई है। और ऐसा लगता है कि हम वहीं वापस आ गए हैं जहां युद्ध शुरू करने से पहले थे, बल्कि शायद स्थिति उससे भी थोड़ी खराब हो गई है।
ओबामा ने कहा कि वह संघर्ष विराम से खुश हैं और उम्मीद करते हैं कि यह कायम रहेगा। उन्होंने कहा, मैं युद्धविराम देखकर बहुत खुश हूं और आशा करता हूं कि यह बना रहेगा।
इसके साथ ही पूर्व राष्ट्रपति ने ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ अपनाई गई नीति और सैन्य कार्रवाई के औचित्य पर भी सवाल उठाया, कहा कि उनके कार्यकाल में हुए ईरान परमाणु समझौते के तहत ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने पर सहमति जताई थी।</description><guid>12438</guid><pubDate>2026-06-20 16:30:32 4:31:30 pm</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी के साथ कोलकाता के 10 लाख लोग करेंगे योग</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12436</link><description>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रविवार को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में नया रिकॉर्ड बन सकता है। कोलकाता में करीब 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम के बारे में सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल के कोलकाता में यह इवेंट हो रहा है और यहां हमारे प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए बहुत उत्साह है। उन्होंने कहा कि आज, 20 जून को एक बड़ा कार्निवल होने वाला है। एक बड़ा ड्रोन शो भी होगा। वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश में लगभग 500 नावें एक साथ आएंगी।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह भी बताया कि रविवार सुबह रधानमंत्री यहां इस इवेंट की अगुवाई करेंगे। इस जगह पर रविवार को 35 हजार लोग इकट्ठा होंगे। वहीं, पूरे कोलकाता में 10 लाख लोग प्रधानमंत्री मोदी के साथ योग करेंगे। पोर्टल पर अब तक 7 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। रात तक यह संख्या 10 लाख के करीब तक पहुंच जाएगी।
आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने कहा, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल एक नई जगह पर मनाया जाता है, खासकर इसका मुख्य कार्यक्रम। हर राज्य बढ़-चढ़कर इसे अपने-अपने तरीके से मनाता है। इस साल भी कई नई पहल की गई हैं। जैसा कि आपने देखा होगा, शुक्रवार को कोलकाता में चार जगहों पर 'रन फॉर योग' का आयोजन किया गया था। इसमें 10,000 लोगों, बच्चों, बड़ों और महिलाओं ने हिस्सा लिया और दौड़ लगाई। इसी तरह अन्य जिलों में भी 'रन फॉर योग' का आयोजन हुआ।</description><guid>12436</guid><pubDate>2026-06-20 16:04:19 4:05:35 pm</pubDate></item><item><title>पूर्वोत्तर क्षेत्र अब वैश्विक पहचान वाले स्थलों का घर : वित्त मंत्री सीतारमण</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12435</link><description>नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक स्तर के कई महत्वपूर्ण स्थलों का घर बन चुका है, जो सतत और समावेशी विकास का उदाहरण पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में वित्त मंत्री ने कहा कि अष्टलक्ष्मी (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा) अब वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से अपनी पहचान बना चुकी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के पहले 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक राज्य से लेकर दुनिया की सबसे लंबी दो-लेन सुरंग और सबसे ऊंचे गर्डर रेल पुल तक, पूर्वोत्तर क्षेत्र ने कई वैश्विक उपलब्धियां हासिल की हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी एक एक्स पोस्ट में कहा कि पूर्वोत्तर के आठ राज्य कभी विकास की मुख्यधारा से काफी दूर माने जाते थे। लेकिन आज ये राज्य भारत की विकास यात्रा के नए इंजन के रूप में उभर रहे हैं, जो समृद्धि, शक्ति और अपार संभावनाओं से भरे हुए हैं।
एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास परिदृश्य में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। यह परिवर्तन लगातार नीतिगत समर्थन, बुनियादी ढांचे के विस्तार और समावेशी विकास कार्यक्रमों के कारण संभव हुआ है। सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार ने क्षेत्र की भौगोलिक दूरी और अलगाव को कम किया है। साथ ही इससे क्षेत्रीय एकीकरण और आर्थिक पहुंच को भी मजबूती मिली है। इसी दौरान स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक लोगों की पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।</description><guid>12435</guid><pubDate>2026-06-20 15:59:23 4:01:44 pm</pubDate></item><item><title>राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने पर बवाल,बीजेपी ने कहा हिंदुओं का अपमान</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12433</link><description>नई दिल्ली। राहुल गांधी के जन्मदिन पर यूथ कांग्रेस वाराणसी द्वारा उन्हें भगवान परशुराम के रूप में दर्शाने वाले पोस्टर को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने इस चित्रण को हिंदुओं और सनातन धर्म का अपमान बताते हुए कांग्रेस की आलोचना की, जबकि कांग्रेस ने इसे अपने नेता के प्रति कार्यकर्ताओं की भावनाएं बताया। यह घटना राहुल गांधी के जन्मदिन समारोह के दौरान हुई, जिसने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
शुक्रवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी 56 साल के हो गए। कांग्रेस नेता को हर तरफ से जन्मदिन की बधाईयां मिलीं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे, जिन्होंने X पर एक पोस्ट में उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। जहां देश भर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का जन्मदिन मनाया, वहीं यूथ कांग्रेस की वाराणसी यूनिट द्वारा किए गए जश्न को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने गंगा किनारे पूजा की और राहुल गांधी का एक पोस्टर लेकर आए जिसमें उन्हें भगवान परशुराम के रूप में दिखाया गया था। पोस्टर में नेता को एक हाथ में कुल्हाड़ी और दूसरे हाथ में भारत के संविधान की एक प्रति पकड़े हुए दिखाया गया था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पोस्टर पर दूध चढ़ाया और वैदिक मंत्रों के साथ रुद्राभिषेक किया। उन्होंने 11 किलो का लड्डू केक भी काटा और राहुल गांधी के लंबे, स्वस्थ और सफल जीवन के लिए प्रार्थना की। लेकिन राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा।
पार्टी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के इस काम को अस्वीकार्य और भगवान परशुराम का अपमान बताया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की बुद्धि मारी गई है। भगवान परशुराम, भगवान विष्णु के अवतार हैं। राहुल गांधी की तुलना भगवान परशुराम से करना बिल्कुल असंभव और समझ से परे है। जो लोग सनातन धर्म का विरोध करते हैं, वे खुद की तुलना भगवान परशुराम से करने के बारे में सोच भी नहीं सकते।
बीजेपी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भगवान परशुराम का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता 364 दिन सनातन धर्म का अपमान करते हैं और एक दिन भगवान परशुराम को याद करने का दिखावा करते हैं। लोग इसे भूलेंगे नहीं। हालांकि, कांग्रेस ने इस चित्रण का बचाव किया। वाराणसी यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष विकास सिंह, जिन्होंने गंगा किनारे पूजा का आयोजन किया था, ने कहा कि ये हमारे नेता के प्रति हमारी भावनाएं हैं। जिस तरह भगवान परशुराम ने धरती को बुराई से मुक्त किया था, उसी तरह राहुल गांधी भी बुरी ताकतों से लड़ रहे हैं। पूजा का बचाव करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा ने कहा कि जिन्होंने इस कार्यक्रम का आयोजन किया, वे खुद ब्राह्मण हैं और भगवान परशुराम के वंश से आते हैं। उन्होंने बस अपनी भावनाएं जाहिर कीं।</description><guid>12433</guid><pubDate>2026-06-20 11:54:46 11:55:48 am</pubDate></item><item><title>ट्रंप के अप्रत्याशित स्वभाव का पाक ने अब चखा कड़वा सबक, सीधे ईरान-यूएस डीर कर शहबाज को चौंकाया</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12432</link><description>न्यूयार्क। अब अमेरिका के अस्थिर स्वभाव वाले राष्ट्रपति के साथ काम करने के खतरों का एहसास हो गया है, क्योंकि पाकिस्तान और उसके समर्थक तब मझधार में रह गए जब डोनाल्ड ट्रंप ने 17 जून को वर्साय में एक शानदार डिनर के दौरान अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह को रद्द कर दिया।
भारत के अंदर और बाहर मोदी सरकार के आलोचक उनकी विदेश नीति पर सवाल उठाते रहे हैं। जब अमेरिका ने ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष में पाकिस्तान को मध्यस्थ के तौर पर इस्तेमाल किया, तो इन आलोचकों को मज़ा आया। भारतीय विपक्ष भी इस बात पर मज़ाक उड़ा रहा था कि 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरुआती बातचीत करके पाकिस्तान कैसे मुख्य भूमिका में आ गया। लेकिन फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को अब अमेरिका के अस्थिर स्वभाव वाले राष्ट्रपति के साथ काम करने के खतरों का एहसास हो गया है, क्योंकि पाकिस्तान और उसके समर्थक तब मझधार में रह गए जब डोनाल्ड ट्रंप ने 17 जून को वर्साय में एक शानदार डिनर के दौरान अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह को रद्द कर दिया। यहाँ तक कि शांति समझौते (MoU) पर भी अमेरिका और ईरान के नेताओं के बीच चुपके से और डिजिटल तरीके से हस्ताक्षर किए गए, जबकि पाकिस्तान को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। असल में, प्रधानमंत्री शरीफ़ और विदेश मंत्री मुनीर स्विट्ज़रलैंड जाने के लिए अपना सामान भी पैक कर चुके थे, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने एक ऐतिहासिक महल में फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सामने समझौते पर हस्ताक्षर करके उन्हें बुरी तरह शर्मिंदा कर दिया। बात यहीं खत्म नहीं हुई।
उसी दिन, पीएम मोदी के आलोचकों और पाकिस्तान के समर्थकों को निराश करते हुए, राष्ट्रपति ट्रंप ने PM मोदी की जमकर तारीफ़ की और यहाँ तक कह दिया कि भविष्य में अगर उन पर हमला हुआ तो अमेरिका मदद के लिए आगे आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह भारत को तय करना है कि वह मध्य-पूर्व में शांति बनाए रखने में कोई भूमिका निभाना चाहता है या नहीं, क्योंकि भारत एक ग्लोबल प्लेयर है। भले ही भारत राष्ट्रपति ट्रंप की बातों को पूरी तरह गंभीरता से न ले, लेकिन 17 जून की घटनाओं ने शरीफ़ के मुँह पर ज़ोरदार तमाचा मारा; उन्हें स्विट्ज़रलैंड का अपना दौरा रद्द करना पड़ा और इस्लामाबाद में अपने ऑफ़िस में बैठकर ही उस अंतरिम शांति समझौते की तारीफ़ करनी पड़ी। अब इस अंतरिम समझौते को 'इस्लामाबाद घोषणा' के बजाय 'वर्साय समझौता' कहा जाएगा, जबकि शहबाज़ शरीफ़ और ट्रंप के पसंदीदा फ़ील्ड मार्शल मुनीर को उम्मीद थी कि इसे 'इस्लामाबाद घोषणा' कहा जाएगा। ईरान के मामले में अमेरिका के दूसरे मध्यस्थ, कतर ने समझदारी दिखाई और पाकिस्तान व उसके समर्थकों की तरह बढ़-चढ़कर बोलने के बजाय पर्दे के पीछे ही रहा।
एवियन में हुई द्विपक्षीय बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ सामान्य कामकाज जारी रखने का संकेत दिया, वहीं G-7 समिट में भारतीय प्रधानमंत्री का व्यवहार विनम्र और सम्मानजनक तो था, लेकिन समिट के बड़े नेताओं के सामने वे बिल्कुल भी चापलूसी करते हुए नहीं दिखे। असल में, अपने दोस्त इमैनुएल मैक्रों से मिले रेड-कार्पेट स्वागत के अलावा, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, EU की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन, UAE के प्रेसिडेंट एम. बी. ज़ायद, UK के PM कीर स्टारमर और इटली की PM जियोर्जिया मेलोनी ने भी PM मोदी की तारीफ़ की। PM मोदी ने G-7 के दौरान जापान की PM सनाए तकाइची से भी मुलाकात की, और उम्मीद है कि जापानी नेता जल्द ही भारत का दौरा करेंगी।
ईरान परमाणु मुद्दे और होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन की आज़ादी के मामले में भारत और अमेरिका एक ही राय रखते हैं। PM मोदी ने ईरान के साथ शांति समझौता करने और ऊर्जा संकट को पूरी तरह फैलने से रोकने के लिए ट्रंप की तारीफ़ की। भले ही भारत और अमेरिका जल्द से जल्द व्यापार समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ डील करना सीख लिया हैयानी एक बार में एक दिन के हिसाब से चलना। यह बात अब पाकिस्तानियों को भी समझ आ जाएगी।</description><guid>12432</guid><pubDate>2026-06-20 11:51:48 11:52:59 am</pubDate></item><item><title>बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ही होंगे, कलकत्ता HC से ममता बनर्जी को लगा करारा झटका, अगली सुनवाई 28 जुलाई को</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12431</link><description>ममता बनर्जी सरकार को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. 
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद को लेकर चल रहे विवाद में कोर्ट ने फिलहाल स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल विधानसभा स्पीकर का निर्णय लागू रहेगा. जस्टिस कृष्ण राव ने सभी पक्षों को विरोध में हलफनामा दाखिल करने और दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है. अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी. कोर्ट ने बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने TMC के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के करीबी शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के पक्ष में ऐसा कोई आधार नहीं बनता दिख रहा है कि जिसके चलते याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी जाए. कलकत्ता हाई कोर्ट में ऋतब्रत भट्टाचार्य को विपक्ष का नेता विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किए जाने के बाद, इस फैसले को चुनौती दी गई थी. TMC विधायक शोवनदेब चट्टोपाध्याय ने स्पीकर के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. कोर्ट ने दोनों पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही प्रतिवादियों को जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय मिला है, जिसके बाद याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए दो हफ्ते मिलेंगे. बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर... बागी ऋतब्रत बनर्जी ही होंगे नेता प्रतिपक्ष हालांकि कोर्ट ने बुधवार को स्पीकर की तरफ से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल बिलवदल भट्टाचार्य से पूछा कि स्पीकर ने 9 मई को मिले उस पत्र पर कोई फैसला क्यों नहीं लिया, जिसमें शोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की बात कही गई थी. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि उस आवेदन पर तो कोई कार्रवाई नहीं हुई जिसमें शोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की बात थी, पर बागी गुट से 3 जून को मिले एक दूसरे पत्र पर कार्रवाई करते हुए ऋतब्रत भट्टाचार्य को विपक्ष का नेता घोषित कर दिया. TMC सांसद और सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा कि याचिका स्वीकार कर ली गयी है, पर कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है.</description><guid>12431</guid><pubDate>2026-06-18 14:01:23 2:05:59 pm</pubDate></item><item><title>राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, बीजेपी में होंगी शामिल</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12425</link><description>कोलकाता ।पश्चिम बंगाल में TMCकी एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सुष्मिता देव जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकती है। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के साथ मुलाकात की थी। इसी मुलाकात के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया है। एक सप्ताह के अंदर TMC के दूसरे सांसद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सुष्मिता देव को ममता बनर्जी का करीबी बताया जाता है। वो लंबे समय से टीएमसी का प्रमुख चेहरा रही हैं और पार्टी की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। सुष्मिता देव का इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
बता दें कि पिछले हफ्ते टीएमसी नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। राज्यसभा सचिवालय की एक अधिसूचना में सीट खाली होने की घोषणा करते हुए कहा गया था कि पश्चिम बंगाल राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा में अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा के सभापति ने 8 जून, 2026 से प्रभावी उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है।

</description><guid>12425</guid><pubDate>2026-06-10 16:48:09 4:50:04 pm</pubDate></item><item><title>क्यूबा को मानवीय सहायता देता रहेगा मेक्सिको: राष्ट्रपति शीनबाम</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12424</link><description>मेक्सिको सिटी ।मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबाम ने एक बार फिर कहा है कि उनकी सरकार क्यूबा को मानवीय सहायता देना जारी रखेगी। उनका कहना है कि क्यूबा इस समय कठिन हालात का सामना कर रहा है और उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एकजुटता और सहयोग की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, अपने रोजाना के प्रेस कॉन्फ्रेंस में शीनबाम ने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग और एकजुटता के रिश्तों के तहत मेक्सिको हर तरह की मदद भेजता रहेगा। उन्होंने कहा, हम हर तरह की सहायता भेजते रहे हैं और क्यूबा की जनता के लिए आगे भी सहायता भेजते रहेंगे। शीनबाम ने कहा कि मेक्सिको अपनी पूरी क्षमता के अनुसार क्यूबा का समर्थन करता रहेगा, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका क्यूबा पर छह दशक से भी अधिक समय से लागू अपने प्रतिबंधों को और सख्त कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह एकजुटता का मामला है। मेक्सिको के लोगों ने हमेशा ऐसा किया है और हम आगे भी ऐसा करते रहेंगे, क्योंकि यह एक ऐसा देश है जिसे इसकी जरूरत है। इससे पहले मई में भी राष्ट्रपति शीनबाम ने देशों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया था और क्यूबा के पूर्व नेता राउल कास्त्रो के खिलाफ अमेरिका की ओर से आपराधिक आरोप लगाए जाने पर असहमति जताई थी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 30 साल पहले हुई किसी घटना के लिए अब किसी पर आरोप लगाने का क्या मतलब है?
हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग ने राउल कास्त्रो के खिलाफ एक अभियोग दायर किया है। आरोप है कि 1996 में क्यूबा-अमेरिकी निर्वासित संगठन 'ब्रदर्स टू द रेस्क्यू' के दो विमानों को मार गिराने की घटना में उनकी भूमिका थी। 94 वर्षीय कास्त्रो उस समय क्यूबा की क्रांतिकारी सशस्त्र सेनाओं के मंत्री थे। क्यूबा सरकार के अनुसार, उन विमानों ने कई बार क्यूबा के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था और पहले दी गई चेतावनियों को भी नजरअंदाज किया था। इसलिए क्यूबा के पास आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
शीनबाम ने यह भी कहा कि अमेरिका अक्सर मादक पदार्थों की तस्करी के मुद्दे को दूसरे देशों के मामलों में हस्तक्षेप करने के बहाने के रूप में इस्तेमाल करता रहा है, और मेक्सिको इस सोच से सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि मेक्सिको को इतिहास को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के साथ जहां संभव हो, सहयोग जारी रखना चाहिए।</description><guid>12424</guid><pubDate>2026-06-10 16:46:01 4:47:52 pm</pubDate></item><item><title>रूस के नई दिल्ली और बीजिंग दोनों के साथ मजबूत संबंध हैं,हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहींःपुतिन</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12417</link><description>मास्को।सेंट पीटर्सबर्ग में मीडिया से बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस के नई दिल्ली और बीजिंग दोनों के साथ मजबूत संबंध हैं और उन्हें इन देशों के द्विपक्षीय मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता। पुतिन ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध नाजुक और बहुआयामी हैं, और इनमें हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। बेशक, हम भारत और चीन दोनों में अपने मित्रों के साथ बातचीत करते हैं।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि मॉस्को भारत और चीन के बीच नाजुक संबंधों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद सहित आपसी हित के लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं। सेंट पीटर्सबर्ग में मीडिया से बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस के नई दिल्ली और बीजिंग दोनों के साथ मजबूत संबंध हैं और उन्हें इन देशों के द्विपक्षीय मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता। पुतिन ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध नाजुक और बहुआयामी हैं, और इनमें हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। बेशक, हम भारत और चीन दोनों में अपने मित्रों के साथ बातचीत करते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी दोनों ही सीमा संबंधों सहित आपसी हित के सभी मुद्दों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। पुतिन की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत और चीन ने 2020 के गलवान घाटी संघर्ष और चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद संबंधों में आए गंभीर तनाव को दूर करने के लिए पिछले एक साल में संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। दोनों देशों के साथ रूस के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए पुतिन ने कहा कि भारत के साथ मॉस्को के संबंध चीन के साथ उसके संबंधों को प्रभावित नहीं करते हैं, ठीक उसी तरह जैसे बीजिंग के साथ उसकी बढ़ती साझेदारी नई दिल्ली के साथ संबंधों को कमजोर नहीं करती है।
रूस के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि चीन और भारत के साथ हमारे अपने संबंध हैं... रूस और भारत के बीच संबंध चीन को प्रभावित नहीं करते, चीन के साथ हमारे संबंध भारत को प्रभावित नहीं करते। रूसी राष्ट्रपति ने रूस-भारत-चीन ढांचे की उत्पत्ति का भी जिक्र करते हुए कहा, एक समय मैंने सुझाव दिया था कि भारत और चीन के नेता यहां मिलें, इसी तरह रूस-भारत-चीन ढांचे की स्थापना हुई। पाकिस्तान से जुड़े संबंधों पर पुतिन ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि इस्लामाबाद बीजिंग के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता। सबसे पहले तो, पाकिस्तान एक बड़ा देश है, इसके विभिन्न देशों के साथ बहुआयामी संबंध हैं। पुतिन ने आगे कहा कि निश्चित रूप से, पाकिस्तान के लिए चीन गणराज्य के साथ सहयोग को ध्यान में रखना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन हर कोई चीन के साथ संबंध विकसित कर रहा है। रक्षा सहयोग पर पुतिन ने ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम पर प्रकाश डाला और कहा कि रूस ने पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू विमान प्रौद्योगिकी पर भारत के साथ सहयोग का प्रस्ताव रखा है।

</description><guid>12417</guid><pubDate>2026-06-06 12:34:43 12:36:07 pm</pubDate></item><item><title>लोग कुत्ते संभालने के लिए रख रहे हैं दाई, 2 करोड़ रुपये तक है सालाना कमाई</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12411</link><description>न्यूयार्क।कुत्ते जानवरों के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं, जिन्हें हर कोई पालना चाहता है। हालांकि, जिंदगी की भाग-दौड़ के बीच उन्हें पालना तो आसान है, लेकिन उनकी देखभाल करना मुश्किल।इस समस्या का हल अमेरिका के लोगों ने खास तरीके से निकाला है। यहां पर लोग कुत्तों के लिए दाई रख रहे हैं, जिन्हें 'डॉग नैनी' या 'डॉग गवर्नर' कहते हैं।
इस काम के जरिए लोग सालाना करोड़ों की कमाई कर रहे हैं।
क्या है यह नौकरी?
हाउसहोल्ड स्टाफिंग एक अमेरिकी घरेलू भर्ती एजेंसी है, जिसने बताया है कि पिछले एक साल में कुत्तों वाली दाई की मांग 3 गुना बढ़ गई है।हम सभी कुत्तों की देखभाल करने वालों के बारे में तो जानते ही थे, लेकिन यह नौकरी उससे थोड़ी अलग है। इसमें दाई कुत्ते को टहलाने और खिलाने के साथ-साथ हफ्ते में 40-50 घंटे उसके साथ ही बिताती है।लिहाजा, ये दाई कुत्ते से जुड़े घर के सभी काम करती हैं।
क्या होता है कुत्तों वाली दाई का काम?
कुत्तों वाली दाई कुत्तों के लिए पूरे दिन का एक रूटीन यानि दिनचर्या सेट करती हैं। उनका काम कुत्ते को नहलाना, टहलाना, खिलाना, सुलाना, उनके साथ खेलना और यहां तक कि उन्हें डॉक्टर के पास ले जाना तक होता है।उन्हें इस काम को करने के लिए सालाना 2.78 करोड़ रुपये से ज्यादा मिलते हैं।
दाई कुत्तों को प्रशिक्षित भी करती हैं, ताकि वे अच्छा व्यव्हार करना सीखें और उनके मालिक और मालकिन के साथ अच्छे से रह सकें।
कौन देता है इन दाइयों को नौकरी?
यह ट्रेंड तेजी से वायरल तो हो रहा है, लेकिन अभी यह केवल अमेरिका के अमीर लोगों के बीच प्रचिलित है।
मैनहटन, ब्रुकलिन, हैम्पटन, दक्षिण फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया के कुछ हिस्सों के अमीर लोग कुत्तों के लिए दाई को नौकरी पर रखते हैं।ये लोग कुत्तों को अपने बच्चों जितना प्यार करते हैं, बस वक्त की कमी के कारण उनकी देखभाल नहीं कर पाते। ऐसे में वो यह काम किसी पेशेवर को पैसे दे कर करवा लेते हैं।
दाई की कमाई उड़ा देगी आपके होश
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस सेवा के तहत दाई कुत्तों को नौका, हेलीकॉप्टर और निजी जेट पर सवारी करने के लिए प्रशिक्षित करती हैं।नौकरी पाने के लिए लोगों को पहले खुद प्रशिक्षण लेना पड़ता है, जिसमें कुत्तों की देखभाल करना सिखाया जाता है। पूरे दिन काम करने वाली दाई प्रति घंटे 3,860 से 4,825 रुपये प्रति घंटे कमाती हैं।वहीं, कुत्तों के साथ घर पर रहने वाली दाई वाली प्रतिदिन 48,257 से 77,212 रुपये तक कमा सकती हैं।

</description><guid>12411</guid><pubDate>2026-05-30 17:21:19 5:22:53 pm</pubDate></item><item><title>स्पेलिंग बी के चैंपियन बने भारतीय मूल के छात्र श्रेय पारिख</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12408</link><description>कैलिफोर्निया ।कैलिफोर्निया के 14 वर्षीय भारतीय मूल के छात्र श्रेय पारिख ने प्रतिष्ठित स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने न्यू जर्सी के ईशान गुप्ता को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। प्रतियोगिता के निर्णायक स्पेल-ऑफ राउंड में श्रेय और ईशान को 90 सेकंड के भीतर अधिक से अधिक शब्दों की सही स्पेलिंग बताने का मौका मिला।
श्रेय ने 90 सेकंड में 32 शब्दों की सही स्पेलिंग बताई, जबकि ईशान 25 शब्द ही सही लिख सके। इसी प्रदर्शन के दम पर श्रेय को विजेता घोषित किया गया। श्रेय पारिख इससे पहले साल 2022 स्क्रिप्स स्पेलिंग बी में पारिख 89वें स्थान पर आए थे। साल 2024 में तीसरे स्थान पर रहे थे। 2024 में भी प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंचे थे।
इस जीत के साथ उन्हें 50,000 अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि यानी लगभग 41.5 लाख रुपये अपने नाम कर ली। साथ ही एक स्मारक पदक, प्रतिष्ठित स्क्रिप्स कप, मेरियम-वेबस्टर की ओर से 2,500 डॉलर, डेल्टा एयरलाइंस की ओर से 1,000 डॉलर के फ्लाइट क्रेडिट और एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका की ओर से 400 डॉलर मूल्य की संदर्भ पुस्तकें प्रदान की जाएंगी।</description><guid>12408</guid><pubDate>2026-05-29 15:07:58 3:10:14 pm</pubDate></item><item><title>लुक्स ही नहीं, आवाज़ से भी खौफ पैदा करेंगे ऋषभ साहनी</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12407</link><description>'नागाबंधम' के लिए एक्टर ने की नेक्स्ट-लेवल तैयारी


मुंबई । बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने आ रही फिल्म 'नागाबंधम' को लेकर फैंस की बेकरारी बढ़ती ही जा रही है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है एक्टर ऋषभ साहनी का वो खूंखार ट्रांसफॉर्मेशन, जिसने इंटरनेट पर सनसनी फैला दी है। फिल्म 'फाइटर' में विलेन बनकर सबके रोंगटे खड़े करने वाले ऋषभ साहनी अब 'नागाबंधम' में क्रूर ऐतिहासिक शासक 'अहमद शाह अब्दाली' के रोल में नज़र आने वाले हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ऋषभ साहनी इस बार सिर्फ लुक्स से नहीं, बल्कि अपनी आवाज़ से भी थिएटर्स में खौफ पैदा करने की तैयारी कर चुके हैं।

फिल्म के सेट से आई ताज़ा खबरों के मुताबिक, ऋषभ साहनी ने इस किरदार में जान फूंकने के लिए खुद ही कई भाषाओं में डबिंग करने का जिम्मा उठाया है। सोर्स ने बताया, ऋषभ साहनी अब्दाली के रोल को लेकर इस कदर जुनूनी हैं कि उन्होंने हिंदी और तेलुगु दोनों भाषाओं में खुद डबिंग करना शुरू कर दिया है।

किरदार की कड़क वाइब और इमोशन्स को हर भाषा में परफेक्ट रखने के लिए उन्होंने अपनी आवाज़ के बेस, टोन और बोलने के लहजे पर महीनों मेहनत की है। अब्दाली के लुक में ऋषभ साहनी का धांसू अवतार फैंस पहले ही देख चुके हैं, और अब थिएटर्स में उनकी खुद की गरजती हुई आवाज़ सुनना दर्शकों के लिए एक नेक्स्ट-लेवल एक्सपीरियंस होने वाला है।

वैसे, ऋषभ साहनी का यह रूप हैरान नहीं करता क्योंकि इस महा-प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने पूरे एक साल तक तलवारबाजी सीखी है। इतना ही नहीं, अब्दाली के किरदार के साथ पूरा न्याय करने के लिए उन्होंने 'पश्तो' भाषा की कड़क ट्रेनिंग भी ली, ताकि उनके डायलॉग्स एकदम रियल लगें। इतनी तगड़ी फिजिकल और वोकल तैयारी से साफ है कि ऋषभ साहनी पर्दे पर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।

इस फिल्म की कहानी में एक और बड़ा सस्पेंस है, जो ऋषभ साहनी का डबल रोल है! जी हां, फिल्म में ऋषभ साहनी एक तरफ इतिहास के सबसे क्रूर आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली के रूप में दिखेंगे, तो दूसरी तरफ वे इसी किरदार के मॉडर्न-डे पुनर्जन्म वाले अवतार में भी धमाका करेंगे। दो अलग-अलग दौर, दो बिल्कुल अलग स्वभाव और उस पर कई भाषाओं में खुद डबिंग करना... चुनौती बहुत बड़ी है, लेकिन ऋषभ साहनी का यह डेडिकेशन बता रहा है कि वे बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचने आ रहे हैं।

साफ है कि 'नागाबंधम' जैसी इस एपिक एक्शन फिल्म में ऋषभ साहनी का यह धांसू समर्पण और कैरेक्टर डिटेलिंग उन्हें आने वाले समय के सबसे प्रॉमिसिंग और खतरनाक विलेन्स की लिस्ट में टॉप पर खड़ा करने वाली है।


</description><guid>12407</guid><pubDate>2026-05-28 17:25:18 5:27:39 pm</pubDate></item><item><title>भाजपा ने चार राज्यों में बदले प्रदेश अध्यक्ष</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12406</link><description>नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को संगठनात्मक फेरबदल करते हुए चार राज्यों दिल्ली, पंजाब, त्रिपुरा और हरियाणा में अपने नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा की।
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मंजूरी के बाद पार्टी के केंद्रीय कार्यालय द्वारा इस संबंध में आधिकारिक सूची जारी की गई।
इस बड़े संगठनात्मक बदलाव के तहत केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पंजाब में पार्टी को नया आधार देने के लिए वरिष्ठ नेता केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष बनाया गया है।
हरियाणा में संगठनात्मक फेरबदल करते हुए अर्चना गुप्ता को प्रदेश भाजपा इकाई के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में भी कमान बदलते हुए अभिषेक देबरॉय को त्रिपुरा भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।</description><guid>12406</guid><pubDate>2026-05-28 17:18:35 5:21:44 pm</pubDate></item><item><title>प्रधानमंत्री मोदी जून में करेंगे फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12405</link><description>नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री की यह यात्रा यूरोप में भारत के साथ संबंधों में आई तेजी को दिखाता है। अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री एवियन-लेस-बैंस में 15 से 17 जून तक आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने की भी संभावना है। मोदी फ्रांस में नीस और पेरिस का दौरा करने के साथ स्लोवाकिया की यात्रा भी करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रांस के खूबसूरत शहर में होने वाले शिखर सम्मेलन में दुनिया के औद्योगिक लोकतांत्रिक देशों के नेता शामिल होंगे। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को एक प्रमुख सहयोगी के रूप में आमंत्रित किया है। प्रधानमंत्री मोदी 2019 से लगातार इस शिखर सम्मेलन का हिस्सा बन रहे हैं। सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शासन, महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाएं, व्यापार तनाव, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्षों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप भी शामिल होंगे, लेकिन अभी मोदी और ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बातचीत की कोई खबर सामने नहीं आई है। बता दें कि फरवरी 2025 में मोदी और ट्रंप के बीच व्हाइट हाउस में अंतिम मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों नेता कई बार टेलीफोन पर बातचीत कर चुके हैं। अगर मोदी और ट्रंप की द्विपक्षीय मुलाकात होती है, तो यह भारत-पाकिस्तान तनाव और 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पहली मुलाकात होगी।
मोदी फ्रांस के बाद स्लोवाकिया की यात्रा पर जाएंगे। यहां उनकी राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से द्विपक्षीय मुलाकात होगी। राष्ट्रपति पेलेग्रिनी फरवरी में AI इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने मोदी को स्लोवाकिया आने का आमंत्रण दिया था। बता दें, 1993 में दोनों देशों के बीच संबंध स्थापित होने के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा होगी। दोनों पक्षों के बीच व्यापार 1.3 अरब यूरो (1.44 लाख करोड़ रुपये) से अधिक हुआ है।</description><guid>12405</guid><pubDate>2026-05-28 17:07:58 5:09:03 pm</pubDate></item><item><title>कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12404</link><description>नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। तमाम कयासों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपना इस्तीफा दे दिया। राज्यपाल थावरचंद गहलोत बेंगलुरु में नहीं हैं। ऐसे में सिद्धारमैया ने अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय को भेजा है। गहलोत पारिवारिक कारणों से बुधवार रात करीब 10:30 बजे अपने गृह नगर इंदौर रवाना हुए थे। उनकी वापसी की उड़ान अभी तक बुक नहीं हुई है।
ऐसे में सिद्धारमैया का इस्तीफा मंजूर होने तक वे मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
सिद्धारमैया के इस्तीफा देने से पहले उन्होंने गुरुवार सुबह बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री आवास पर कैबिनेट के सभी सदस्यों को नाश्ते पर बुलाया था, जिसमें कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी शामिल थे। इस दौरान सिद्धारमैया और शिवकुमार ने एक-दूसरे को गर्मजोशी से गले लगाया और शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर भी छुए। नाश्ते पर कांग्रेस कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला को भी आमंत्रित किया गया था। इसके बाद सिद्धारमैया ने इस्तीफा दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष शिवकुमार को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। वह संभावित 30 मई को शपथ ले सकते हैं। इस बीच, खबर आई कि सिद्धारमैया राज्यसभा सीट स्वीकार करके राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने अगले 2 वर्षों तक विधायक के रूप में ही काम करने की इच्छा जताई है। सिद्धारमैया शाम तक दिल्ली जा सकते हैं और राज्यसभा न जाने के फैसले से नेतृत्व को सूचित कर सकते हैं।</description><guid>12404</guid><pubDate>2026-05-28 17:06:03 5:22:09 pm</pubDate></item><item><title>आसाराम की आजीवन कारावास की सजा बरकरार</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12403</link><description>जोधपुर । राजस्थान उच्च न्यायालय से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में जोधपुर की जेल में बंद आसाराम की अपील पर अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को कोई बड़ी राहत न देते हुए उसकी आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा को पूरी तरह से बरकरार रखा है। हालांकि, इस मामले में आसाराम को केवल आंशिक राहत मिली है, जबकि केस से जुड़े दो अन्य सह-आरोपियों को अदालत ने बड़ी राहत दी है।

आसाराम सहित तीन आरोपियों की ओर से दायर अपीलों पर बुधवार को हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने यह अहम आदेश जारी किया। कोर्ट ने मामले के सभी पहलुओं और अपीलों पर लंबी सुनवाई पूरी करने के बाद आज यह अंतिम फैसला सुनाया। सह-आरोपियों के लिए राहत: जहां एक तरफ अदालत ने मुख्य आरोपी आसाराम की उम्रकैद की सजा को यथावत (जैसा था वैसा ही) रखने के निर्देश दिए हैं, वहीं इस मामले में सह-आरोपी रहीं शिल्पी और शरतचंद को हाई कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। डिवीजन बेंच ने निचली अदालत द्वारा इन दोनों को सुनाई गई सजा को रद्द करते हुए इन्हें बड़ी राहत प्रदान की है।
उल्लेखनीय है कि आसाराम को जोधपुर के पास मणाई स्थित अपने आश्रम में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत (पॉक्सो कोर्ट) ने साल 2018 में आसाराम को दोषी मानते हुए अंतिम सांस तक जेल में रहने यानी आजीवन कारावास की सख्त सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ आसाराम ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। आज हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के उस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।</description><guid>12403</guid><pubDate>2026-05-28 12:08:23 12:09:24 pm</pubDate></item><item><title>शांति वार्ता पर ईरान ने कहा- अमरीका का रवैया हर शांतिवार्ता को मुश्किल बना रहा है</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12401</link><description>तेहरान।मीडिया से बात करते हुए बाक़ाई ने पुष्टि की कि दोनों पक्ष कई मुद्दों पर सहमति पर पहुंच चुके हैं। बाक़ाई ने कहा कि यह सही है कि हम चर्चा के कई विषयों पर निष्कर्ष पर पहुंच चुके हैं, लेकिन यह कहना कि इसका मतलब जल्द ही किसी समझौते पर हस्ताक्षर होना है, गलत है। अमेरिकी अधिकारियों के रुख में बार-बार होने वाले बदलाव हर बातचीत को जटिल बना देते हैं।
ईरान ने सोमवार को शांति वार्ता के दौरान वाशिंगटन की ओर से बार-बार हो रहे बदलावों की कड़ी आलोचना की और कहा कि इससे बातचीत जटिल हो रही है। ये टिप्पणियां ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने सोमवार को साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कीं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने पुष्टि की कि दोनों पक्ष कई मुद्दों पर सहमति पर पहुंच चुके हैं। बाक़ाई ने कहा कि यह सही है कि हम चर्चा के कई विषयों पर निष्कर्ष पर पहुंच चुके हैं, लेकिन यह कहना कि इसका मतलब जल्द ही किसी समझौते पर हस्ताक्षर होना है, गलत है। अमेरिकी अधिकारियों के रुख में बार-बार होने वाले बदलाव हर बातचीत को जटिल बना देते हैं।
बाक़ाई ने कहा कि चल रही वार्ता फिलहाल युद्ध समाप्त करने पर केंद्रित है और परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है, जैसा कि आईएसएनए ने रिपोर्ट किया है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी आईएसएनए के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, वार्ता का मुख्य उद्देश्य युद्ध समाप्त करना है, और इस स्तर पर हम परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं कर रहे हैं। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच शांति समझौते पर पहुंचने के लिए काम चल रहा है, और उन्होंने आश्वासन दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कोई बुरा समझौता नहीं करेंगे।
ईरान पर नवीनतम घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर, रुबियो ने मीडिया से कहा कि हम अभी भी काम कर रहे हैं... मुझे लगता है कि उनके द्वारा जलडमरूमध्य को खोलने, जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु मामलों पर एक वास्तविक, महत्वपूर्ण और सीमित समय की वार्ता शुरू करने की क्षमता के संदर्भ में काफी ठोस प्रस्ताव मौजूद है। और उम्मीद है कि हम इसे पूरा कर पाएंगे।
</description><guid>12401</guid><pubDate>2026-05-27 16:05:07 4:06:33 pm</pubDate></item><item><title>शांति समझौते के करीब पहुंचे अमेरिका और ईरान</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12393</link><description>वाशिंगटन/नई दिल्ली ।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वाशिंगटन और तेहरान एक बड़े शांति समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब पहुंच चुके हैं। यह बातचीत मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के कई नेताओं के साथ हुई कॉल्स के बाद आगे बढ़ी, जिनमें पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर और खाड़ी देशों के नेता भी शामिल थे।

शनिवार को 'ट्रुथ सोशल' पर किए गए एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्र के कई देशों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है और अब सिर्फ कुछ आखिरी बातें बाकी हैं। ट्रंप ने लिखा, मैं व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हूं, जहां अभी हमारी सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद, यूएई के मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, कतर के अमीर तमीम बिन हमद बिन खलीफा अल थानी, प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम बिन जाबेर अल थानी, कतर के मंत्री अली अल-थावादी, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर अहमद शाह, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय और बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। यह बातचीत ईरान और शांति से जुड़े एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर केंद्रित थी।

ट्रंप ने कहा कि यह हाल के महीनों में ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर उनकी सबसे बड़ी कूटनीतिक पहल में से एक है। अमेरिका, ईरान और ऊपर बताए गए दूसरे देशों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है, बस अंतिम मंजूरी बाकी है। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने अलग से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात की और वह भी बहुत अच्छी रही।

ट्रंप के मुताबिक, अब बातचीत समझौते की आखिरी शर्तों और विवरणों पर चल रही है। डील के अंतिम पहलुओं और बारीकियों पर चर्चा जारी है, और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी।

ट्रंप के बयान का सबसे अहम हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर था। यह एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है।
उन्होंने लिखा, समझौते के कई दूसरे हिस्सों के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी खोला जाएगा।

इस बयान पर भारत में भी खास नजर रहेगी, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर आयात करता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव को हमेशा चिंता की नजर से देखता रहा है।

अगर ईरान से जुड़ा तनाव कम होता है, तो इससे तेल की कीमतों, शिपिंग में रुकावट और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ट्रंप ने इस प्रस्तावित समझौता ज्ञापन की पूरी जानकारी साझा नहीं की और न ही यह बताया कि इसमें कौन-सा देश क्या भूमिका निभाएगा। व्हाइट हाउस की तरफ से भी फिलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी जारी नहीं की गई है।

</description><guid>12393</guid><pubDate>2026-05-24 13:40:31 1:41:47 pm</pubDate></item><item><title>US-ईरान शांति वार्ता : होर्मुज से न्यूक्लियर डील तक क्या-क्या हो सकता है तय?</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12392</link><description>वाशिंगटन/तेहरान ।अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच चल रही बैकचैनल बातचीत और मध्यस्थ देशों की सक्रिय भूमिका के बाद संभावित शांति समझौते की चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि समझौता करीब-करीब तय है, जबकि अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान संवर्धित यूरेनियम को लेकर अपने रुख में नरमी दिखाने को तैयार हुआ है।

हालांकि ईरान ने अब तक किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सामने आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रस्तावित डील में कई बड़े और रणनीतिक बिंदु शामिल हो सकते हैं, जिनका असर वैश्विक तेल बाजार, पश्चिम एशिया की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुल सकता है
प्रस्तावित समझौते का सबसे अहम हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना माना जा रहा है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिका का दावा है कि समझौते के तहत ईरान जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगें हटाने और जहाजों की आवाजाही सामान्य करने पर सहमत हो सकता है। हालांकि ईरानी मीडिया का कहना है कि तेहरान क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा।

संवर्धित यूरेनियम पर नरमी
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को सीमित करने या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपने पर विचार कर सकता है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यूरेनियम किस देश या संस्था को सौंपा जाएगा। इस मुद्दे पर आगे अलग परमाणु वार्ता होने की संभावना जताई जा रही है।

60 दिन का युद्धविराम
संभावित समझौते में 60 दिवसीय युद्धविराम का विस्तार भी शामिल हो सकता है। माना जा रहा है कि इस अवधि में दोनों पक्ष सैन्य गतिविधियां कम करेंगे और व्यापक शांति समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ेगी।

तीन चरणों में लागू होगी शांति योजना
सूत्रों के अनुसार यह समझौता तीन चरणों में लागू हो सकता है। पहले चरण में पश्चिम एशिया संघर्ष को नियंत्रित करना, दूसरे में होर्मुज संकट का समाधान और तीसरे चरण में दीर्घकालिक राजनीतिक एवं सुरक्षा समझौते पर चर्चा शामिल होगी।

तेल प्रतिबंधों में राहत की मांग
ईरान ने अमेरिका से अपने तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाने और विदेशी खातों में फंसी संपत्तियों को जारी करने की मांग रखी है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि ठोस रियायतों के बाद इन मांगों पर विचार किया जा सकता है।

लेबनान और हिजबुल्ला मुद्दा भी शामिल
समझौते में लेबनान में हिजबुल्ला और इजरायल के बीच जारी तनाव को कम करने की कोशिश भी शामिल बताई जा रही है। अमेरिका चाहता है कि क्षेत्र में तनाव घटे, लेकिन उसने इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को भी अहम माना है।

हालांकि संभावित समझौते को लेकर अभी कई सवाल बाकी हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद अब भी गहरे और महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में यह साफ है कि अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए अभी और दौर की बातचीत जरूरी होगी। लेकिन अगर यह डील सफल होती है, तो इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी अस्थिरता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।</description><guid>12392</guid><pubDate>2026-05-24 13:39:00 1:40:14 pm</pubDate></item><item><title>पाकिस्तान के क्वेटा में आत्मघाती हमला, 10 से ज्यादा की मौत</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12391</link><description>इस्लामाबाद/नई दिल्ली ।पाकिस्तान के क्वेटा में एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ है। इस हमले में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हमलावर ने रेलवे ट्रैक के पास खुद को विस्फोट से उड़ा लिया, जिसकी चपेट में आकर कई वाहन तबाह हो गए। हमले के बाद क्वेटा के सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी लागू कर दी गई है।

ट्रेन को भी पहुंचा है नुकसान
जानकारी के अनुसार रविवार को क्वेटा के चमन फाटक के पास धमाका हुआ, जिसमें 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। धमाके में वहां से गुजर रही ट्रेन को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं रेलवे ट्रैक के पास खड़े 10 के करीब वाहनों को भी नुकसान हुआ। धमाके इतनी तेज था कि आसपास की इमारतों के शीशे और खिड़कियां भी टूट गईं।

हालात को देखते हुए क्वेटा सरकार ने आसपास के अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी है। वहीं पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को क्वेटा रेलवे स्टेशन पर ही एहतियातन रोक दिया गया। धमाके के बाद क्वेटा में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। लोगों को धमाके वाली जगह पर इकट्ठा होने से मना किया गया है।</description><guid>12391</guid><pubDate>2026-05-24 13:37:27 1:38:35 pm</pubDate></item><item><title>भारतीय शांति दूत को मिला यूएन जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर 2025 सम्मान</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12386</link><description>बेरूत ।पश्चिम एशियाई देश लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा मिशन के तहत भारतीय शांतिदूत मेजर अभिलाषा बराक को 'यूएन जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड 2025' सम्मान के लिए चुना गया है। इस पर भारतीय दूतावास ने मेजर अभिलाषा को बधाई दी है। लेबनान स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, दूतावास, संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिष्ठित 'यूएन जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड 2025' से सम्मानित होने पर मेजर अभिलाषा बराक को हार्दिक बधाई देता है।
मेजर बराक ने 'आईएनडीबीएटीटी-एक्सएक्सवीआई' की 'फीमेल एंगेजमेंट टीम' (एफईटी) कमांडर के रूप में महत्वपूर्ण सेवा प्रदान की। मेजर अभिलाषा बराक को लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ भारतीय शांतिदूत के रूप में जिम्मेदारी मिली थी। इस जिम्मेदारी के लिए उन्हें संयुक्त राष्ट्र ने 'संयुक्त राष्ट्र सैन्य लिंग अधिवक्ता पुरस्कार 2025' के लिए चुना है।
मेजर बराक वर्तमान में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल में महिला सहभागिता दल की कमांडर के रूप में भारतीय बटालियन में कार्यरत हैं। वे भारतीय सेना की पहली महिला लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट भी हैं। अभिलाषा इस पुरस्कार को पाने वाली तीसरी भारतीय हैं। उनसे पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को यूएन शांति मिशनों में सेवा के दौरान उनके सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
भारतीय सेना की मेजर राधिका सेन को '2023 संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' पुरस्कार मिला था। सेन को 2023 में भारतीय रैपिड डिप्लॉयमेंट बटालियन के साथ एंगेजमेंट प्लाटून कमांडर के रूप में एमओएनयूएससीओ में नियुक्त किया गया था। उन्होंने अप्रैल 2024 में अपना कार्यकाल पूरा किया।
इससे पहले, 2019 में दक्षिण सूडान (यूएनएमआईएसएस) में संयुक्त राष्ट्र मिशन में महिला शांतिदूत के रूप में सेवाएं प्रदान करने वाली भारतीय सेना की अधिकारी मेजर सुमन गवानी को 29 मई 2020 को प्रतिष्ठित 'यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड' से सम्मानित किया गया। मेजर सुमन को यह अवार्ड ब्राजील की नौसेना अधिकारी कमांडर कार्ला मोंटेइरो डी कास्त्रो अरुजो के साथ मिला।
मेजर सुमन ने नवंबर 2018 से दिसंबर 2019 तक यूएनएमआईएसएस में एक सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में कार्य किया। मिशन में रहते हुए, वह मिशन में सैन्य पर्यवेक्षकों के लिए महिलाओं से संबंधित मामलों के लिए संपर्क का प्रमुख केंद्र बिंदु थीं।</description><guid>12386</guid><pubDate>2026-05-23 12:13:30 12:15:33 pm</pubDate></item><item><title>चीन की कोयला खदान में विस्फोट: 80 से ज्यादा की मौत, जिनपिंग ने जांच के दिए आदेश</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12385</link><description>बीजिंग ।चीन के शांक्सी प्रांत में एक कोयला खदान में विस्फोट होने से करीब 82 लोगों की मौत हो गई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस घटना पर दुख जताते हुए लापता लोगों की तलाश करने और घायलों के इलाज को लेकर निर्देश जारी किए हैं। यह दुर्घटना 22 मई को लिउशेन्यू कोयला खदान में हुई, जिसका संचालन शांक्सी तोंगझू ग्रुप करता है। सिन्हुआ के मुताबिक, शांक्सी प्रांत के तोंगझोउ ग्रुप की लिउशेन्यू कोयला खदान में हुए गैस विस्फोट स्थल से संवाददाताओं को जानकारी मिली है कि इस दुर्घटना में 82 लोगों की मौत हो गई है।
यह विस्फोट शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम 7:29 बजे (11:29 जीएमटी) शांक्सी की एक कोयला खदान में हुआ। बताया गया है कि घटना के समय वहां 247 कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद थे। घटनास्थल पर बचाव अभियान जारी है।
राष्ट्रपति जिनपिंग (चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) केंद्रीय समिति के महासचिव और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष भी हैं) ने दुर्घटना के बाद की स्थिति को सही तरीके से संभालने और दुर्घटना के कारणों की गहन जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
शी जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि देशभर के अधिकारियों को इस दुर्घटना से सबक लेना चाहिए, कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए और संभावित जोखिमों की पहचान और उन्हें खत्म करने के प्रयास तेज करने चाहिए ताकि बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि आगामी मौसम में प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ की घटनाएं बढ़ सकती हैं, इसलिए आपातकालीन तैयारियों को मजबूत किया जाए। बाढ़ नियंत्रण और आपदा राहत के ठोस उपाय किए जाएं ताकि लोगों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी बचाव कार्यों और दुर्घटना जांच को लेकर निर्देश जारी किए। ली कियांग, जो सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य भी हैं, ने देशभर में कार्यस्थल सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने और प्रमुख क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी व्यापक जांच अभियान चलाने का आग्रह किया ताकि बड़ी दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
उप प्रधानमंत्री झांग कुओझिंग बचाव कार्यों और दुर्घटना के बाद की स्थिति की निगरानी के लिए एक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे हैं।</description><guid>12385</guid><pubDate>2026-05-23 12:11:31 12:13:08 pm</pubDate></item><item><title>बाघ के हमले में 4 महिलाओं की मौत, तेंदूपत्ता तोड़ने गईं थीं जंगल</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12384</link><description>चंद्रपुर ।महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में शुक्रवार सुबह एक बाघ ने चार महिलाओं को मार डाला। यह महिलाएं शुक्रवार की सुबह तेंदू के पत्ते इकट्ठा कर रही थी। तभी यह घटना हुई। यह जानकारी वन अधिकारी ने दी। अधिकारी ने बताया कि यह घटना जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर सिंदेवाही तहसील के गुंजेवाही गांव के पास हुई।

चार की मौत हो गई
दरअसल, महिलाओं का एक समूह तेंदू के पत्ते इकट्ठा करने के लिए जंगल में गया था, जिनका उपयोग मुख्य रूप से बीड़ी के प्राकृतिक आवरण के रूप में किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि जब वह पत्ते इकट्ठा करने में व्यस्त थीं, तभी एक बाघ ने हमला किया। इसमें चार की मौत हो गई। 

पंचनामा के बाद अधिक जानकारी सामने आएगी
मृत महिलाओं की पहचान कावादाबाई मोहुरले (45), अनीताबाई मोहुरले (40), सुनीता मोहुरले (38) और संगीता चौधरी (50) के रूप में हुई है। ये सभी गुंजेवाही की निवासी थीं। हालांकि यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि बाघ ने सभी महिलाओं को एक ही स्थान और समय पर मारा या अलग-अलग स्थानों पर मारा है। वहीं, सूचना मिलते ही वन अधिकारियों की एक टीम उस क्षेत्र में पहुंची। मुख्य वन संरक्षक (चंद्रपुर सर्कल) आरएम रामानुजन ने कहा, पंचनामा के बाद अधिक जानकारी सामने आएगी।</description><guid>12384</guid><pubDate>2026-05-22 17:10:22 5:11:51 pm</pubDate></item><item><title>रूस और चीन ने अमरीका के खिलाफ बनाया नया प्लान! पुतिन व जिनपिंग की जोड़ी ने पलट दिया दुनिया का पावर गेम</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12380</link><description>बीजिंग।बैठक के दौरान रूस और चीन ने लंबे समय से अटकी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। साइबेरिया शक्ति दो नामक इस परियोजना को लेकर रूस के सरकारी प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच सामान्य समझ बन चुकी है।
बीजिंग में आयोजित शिखर बैठक के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बार फिर अमेरिका केंद्रित वैश्विक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करते हुए कहा कि कुछ देश पूरी दुनिया पर अपना प्रभुत्व थोपने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसी नीतियां अब असफल हो चुकी हैं। रूस और चीन ने बिना नाम लिए अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया को औपनिवेशिक सोच और एकतरफा दबाव की राजनीति से खतरा पैदा हो रहा है।
हम आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के ठीक बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी चीन पहुँचे और अपने मित्र राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ लंबी चर्चा की। बीजिंग में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय रणनीति से जुड़े बीस से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए। बैठक का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि रूस और चीन अब खुलकर पश्चिमी प्रभाव के मुकाबले साझा मोर्चा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। संयुक्त घोषणा में दोनों देशों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विखंडन और जंगल के कानून जैसी स्थिति लौटने का खतरा पैदा हो रहा है। यह बयान सीधे तौर पर उस वैश्विक व्यवस्था पर हमला माना जा रहा है जिसका नेतृत्व लंबे समय से अमेरिका करता रहा है।
शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में कहा कि रूस और चीन को हर प्रकार की एकतरफा दबंगई और इतिहास को पीछे ले जाने वाली गतिविधियों का विरोध करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश रणनीतिक स्तर पर और अधिक समन्वय बनाए रखेंगे तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को तेज करेंगे। दूसरी ओर पुतिन ने कहा कि रूस और चीन अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थिरता लाने वाली ताकतें हैं और दोनों स्वतंत्र विदेश नीति के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बैठक के दौरान रूस और चीन ने लंबे समय से अटकी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। साइबेरिया शक्ति दो नामक इस परियोजना को लेकर रूस के सरकारी प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच सामान्य समझ बन चुकी है, हालांकि कीमत और समयसीमा जैसे विषयों पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। यह परियोजना रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों ने रूस के यूरोपीय ऊर्जा बाजार को काफी कमजोर कर दिया है। ऐसे में चीन अब रूस के लिए सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बनकर उभरा है।
पुतिन ने कहा कि रूस चीन को ऊर्जा आपूर्ति जारी रखने के लिए तैयार है और दोनों देशों के आर्थिक संबंध अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने बताया कि रूस और चीन के बीच अधिकांश व्यापारिक लेनदेन अब रूबल और युआन में हो रहा है। इसे भी अमेरिका के प्रभाव वाले वैश्विक वित्तीय ढांचे को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और नई तकनीकों में भी व्यापक सहयोग की बात कही।
हम आपको यह भी बता दें कि विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन की यह नजदीकी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका और पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव के खिलाफ साझा रणनीतिक गठबंधन का संकेत भी है। चीन जहां रूस के साथ खड़ा दिखना चाहता है, वहीं वह पश्चिम से पूरी तरह टकराव की स्थिति से भी बचना चाहता है। इसके बावजूद बीजिंग में हुए इस शिखर सम्मेलन ने साफ कर दिया कि दोनों देश अब वैश्विक राजनीति में अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देने के लिए अधिक संगठित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं का भव्य स्वागत किया गया। सम्मान गारद और तोपों की सलामी के बीच दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर दुनिया को अपने मजबूत रिश्तों का संदेश दिया। हालांकि किसी भी नेता ने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया, लेकिन संयुक्त बयान और समझौतों ने यह स्पष्ट कर दिया कि रूस और चीन आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में साझा मोर्चे के रूप में अपनी भूमिका और मजबूत करना चाहते हैं।</description><guid>12380</guid><pubDate>2026-05-22 16:57:56 4:58:55 pm</pubDate></item><item><title>कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम और कथक प्रस्तुति की पीएम ने की सराहना</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12379</link><description>रोम ।रोम में बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने के लिए भारतीय प्रवासी समुदाय के लोगों और कई कलाकारों ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान पर गर्व है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए कलाकारों का आभार जताया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, भारतीय नृत्य की शौकीन पांच इटालियंस, स्वामिनी आत्मानंद गिरि, मार्टिना मीनाक्षी अरगाडा, लुक्रेजिया मैनीस्कोटी, वेलेरिया वेस्पाजियानी, रोजेला फेनेली ने 'ट्रिगलबंदी' का प्रदर्शन किया, जिसमें कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम और कथक शामिल थे।
यह देखना अद्भुत है कि भारतीय नृत्य शैलियों को वैश्विक रुचि मिल रही है। पीएम ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, इटली में भारतीय संगीत काफी लोकप्रिय हो रहा है। रोम में हुए सामुदायिक स्वागत समारोह के दौरान, पांच इतालवी कलाकारों ने 'हंसध्वनि' की प्रस्तुति दी। वैलेरियो ब्रूनी (संतूर), लियो वर्तुनी (सितार), सिमोन मैटिएलो (बांसुरी), फ्रांसेस्को घेराडी (तबला) और निकोलो मेलोची (बांसुरी) को बधाई।
इटली में रह रहे कई भारतीय समुदाय के लोगों ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री से मिलकर बहुत गर्व महसूस हुआ और भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय छवि को देखकर खुशी हुई। भारतीय प्रवासी समुदाय के एक सदस्य ने कहा, आज मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने भगवान से मुलाकात की हो। यह दूसरी बार है जब मैं उनसे मिल रहा हूं और उनसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई।
इटली के हिंदू यूनियन के एक सदस्य ने भी प्रधानमंत्री के प्रभाव और मौजूदगी की तारीफ की। उन्होंने कहा, जब भी वे यहां आते हैं, उनकी मौजूदगी बहुत प्रभावशाली होती है। उन्हें देखकर भारतीयों को खुशी होती है कि भारत बहुत आगे बढ़ रहा है और इसी तरह आगे बढ़ता रहेगा। एक और कलाकार फ्रांसेस्को घेराडी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कलाकारों से बातचीत भी की।
उन्होंने कहा, उनकी मौजूदगी महसूस हो रही थी। वे हमारी प्रस्तुति के दौरान तालियां बजा रहे थे और उन्होंने हमें बहुत अच्छी ऊर्जा दी। हम उनसे हाथ मिलाकर और तस्वीरें लेकर बहुत खुश हुए। कलाकार सिमोन मैटिएलो ने इस कार्यक्रम को बहुत खुशी भरा बताया और कहा कि प्रधानमंत्री ने उनसे जुड़ाव महसूस किया।
उन्होंने कहा, हमारा प्रदर्शन बहुत खुशी वाला था और मुझे लगता है कि उन्होंने हमसे जुड़ाव महसूस किया। उन्होंने तालियां बजाईं, इसलिए लगता है कि उन्हें हमारा प्रदर्शन पसंद आया। संगीतकार निकोलो मेलोची ने कहा कि प्रधानमंत्री के सामने परफॉर्म करना और उनसे थोड़ी बातचीत करना एक 'बहुत अच्छा अवसर' था।
कलाकार वैलेरियो ब्रूनी ने कहा कि प्रधानमंत्री प्रस्तुति के दौरान बहुत उत्साहित नजर आए और उन्होंने टीम के प्रयासों की सराहना की।

</description><guid>12379</guid><pubDate>2026-05-20 15:13:56 3:15:29 pm</pubDate></item><item><title>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन पहुंचे, शी जिनपिंग से की मुलाकात</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12378</link><description>बीजिंग ।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन दौरे पर हैं। उन्होंने चीन की राजधानी बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक की। इस साल पुतिन की ये पहली विदेश यात्रा है। पुतिन का ये दौरा काफी छोटा लेकिन अहम होगा। वे एक चीनी इंजीनियर से मुलाकात करेंगे, जिससे वे बचपन में मिले थे। इसके बाद वे चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मिलेंगे। अंत में वे जिनपिंग के साथ चाय पर चर्चा करेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापार चर्चा का केंद्र होगा। रूस पर सालों से लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच, दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते और गहरे हुए हैं, जिसका अहम पहलू रूस के तेल और गैस हैं। 'पावर ऑफ साइबेरिया 2' पाइपलाइन को लेकर बात होगी, जो चीन को सालाना 50 अरब क्यूबिक मीटर रूसी गैस पहुंचाएगी।
रूस यूक्रेन में अपने सैन्य अभियान को जारी रखने के लिए चीन की दोहरे इस्तेमाल वाली चीजों और ड्रोन पुर्जों पर निर्भर है। शी और पुतिन के बीच 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में बैठक अपने तय समय से 20 मिनट पहले ही शुरू हो गई। इसे 'सीमित दायरे वाली बैठक' बताया गया है। दोनों के बीच करीब 15 मिनट तक बैठक हुई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने अपनी शुरुआती टिप्पणी में कहा कि रूस-चीन संबंध इस समय एक अभूतपूर्व स्तर पर हैं। इसके बाद दोनों नेता अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों के साथ एक बड़ी बैठक में शामिल हुए।
चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, शी ने पुतिन से कहा कि दोनों देशों को विकास और पुनरुद्धार में एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए। उन्होंने कहा, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति जटिल और अस्थिर है, जिसमें एकतरफा वर्चस्व बेरोकटोक हावी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों और महत्वपूर्ण विश्व शक्तियों के तौर पर, चीन और रूस को दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और अधिक न्यायसंगत और निष्पक्ष वैश्विक शासन प्रणाली बनाने के लिए सहयोग करना चाहिए। पुतिन ने पहले की तरह ही शी को 'प्रिय मित्र' कहकर संबोधित किया।
पुतिन ने कहा कि मॉस्को और बीजिंग के बीच संबंध 'बेमिसाल ऊंचाई' पर पहुंच गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 25 सालों में रूस और चीन के बीच व्यापार 30 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है। पुतिन ने शी को अगले साल रूस आने का न्योता भी दिया है।</description><guid>12378</guid><pubDate>2026-05-20 15:12:10 3:13:29 pm</pubDate></item><item><title>इटली पहुंचे पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को भेंट किया मेलोडी टॉफी का पैकेट</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12377</link><description>रोम ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की अपनी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट भेंट किया। इस गिफ्ट के लिए मेलोनी ने उन्हें धन्यवाद भी दिया। इतालवी पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 12 सेकंड की वीडियो क्लिप साझा की। जिसमें वो भारत के प्रधानमंत्री मोदी के साथ दिख रही हैं। इस क्लिप में वो कह रही हैं, प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए बहुत अच्छा गिफ्ट लेकर आए हैं। ये टॉफियां हैं जो बहुत स्वादिष्ट हैं। इसके बाद उनकी दाईं तरफ खड़े पीएम मोदी टॉफी का पैकेट उठाते हैं जिस पर लिखा है 'मेलोडी'। 'गिफ्ट' को कैमरे की तरफ दिखाने के बाद दोनों खिल खिलाकर हंस देते हैं।
पीएम मोदी मंगलवार को इटली की आधिकारिक यात्रा पर रोम पहुंचे। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मंगलवार रात (स्थानीय समयानुसार) रोम पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी अपने पांच देशों के दौरे के आखिरी चरण में इटली पहुंचे हैं।
मेलोनी ने भारतीय प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत रूप से स्वागत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, रोम में आपका स्वागत है, मेरे दोस्त!, जिससे दोनों नेताओं के बीच अच्छी दोस्ती साफ दिखाई देती है।
इससे पहले पीएम मोदी इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी की ओर से आयोजित डिनर में भी शामिल हुए। उन्होंने इस डिनर की तस्वीरें भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा कीं। पीएम मोदी ने कहा कि वह मेलोनी के साथ बातचीत का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें दोनों देश भारत-इटली संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने एक्स पर लिखा, रोम पहुंचने के बाद मुझे प्रधानमंत्री मेलोनी से डिनर पर मिलने का मौका मिला, इसके बाद कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। मैं आज होने वाली बातचीत का इंतजार कर रहा हूं, जिसमें हम भारत-इटली दोस्ती को और मजबूत करने पर बात करेंगे।
पीएम मोदी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से भी मुलाकात करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आगमन की जानकारी भी साझा की और बताया कि यह यात्रा भारत और इटली के रिश्तों को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आधिकारिक यात्रा पर इटली पहुंचे हैं। एयरपोर्ट पर इटली के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। भारत और इटली के बीच लंबे समय से बहुआयामी साझेदारी रही है। यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने वाली है।</description><guid>12377</guid><pubDate>2026-05-20 15:09:42 3:11:41 pm</pubDate></item><item><title>मिडिल ईस्ट में होने वाला है कुछ बड़ा? पाकिस्तान ने सऊदी अरब में भेजे फाइटर जेट्स और 8000 सैनिक</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12374</link><description>करांची।ईरान संघर्ष के दौरान तैनात सैन्य और वायु सेना कर्मियों की मुख्य भूमिका सलाहकारी और प्रशिक्षण देने की होगी, ऐसा दो सुरक्षा अधिकारियों ने बताया, जिन्होंने दोनों देशों के बीच हुए आदान-प्रदान और सैन्य संपत्तियों की तैनाती से संबंधित दस्तावेज़ देखे हैं। तीनों सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि इस तैनाती से उन हजारों पाकिस्तानी सैनिकों की संख्या में इजाफा होगा, जिनकी लड़ाकू भूमिका पहले से ही पिछले समझौतों के तहत सऊदी अरब में तैनात थी।
पाकिस्तान ने आपसी रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब में 8,000 सैनिक, लड़ाकू विमानों का एक स्क्वाड्रन और एक वायु रक्षा प्रणाली तैनात की है। पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य सूत्रों ने सोमवार को रॉयटर्स को यह जानकारी दी। इस्लामाबाद रियाद के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है, ऐसे समय में जब इस्लामाबाद अमेरिका-ईरान युद्ध में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस तैनाती की पुष्टि तीन सुरक्षा अधिकारियों और दो सरकारी सूत्रों ने की, जिन्होंने इसे एक मजबूत, युद्ध-सक्षम बल बताया, जिसका उद्देश्य सऊदी अरब की सेना को भविष्य में किसी भी हमले की स्थिति में सहायता प्रदान करना है। पाकिस्तान के सैन्य और विदेश कार्यालय तथा सऊदी अरब के सरकारी मीडिया कार्यालय ने तैनाती के संबंध में टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। पिछले वर्ष हस्ताक्षरित रक्षा समझौते की पूरी शर्तें गोपनीय हैं। दोनों पक्षों ने कहा है कि इसके तहत हमले की स्थिति में पाकिस्तान और सऊदी अरब एक-दूसरे की रक्षा के लिए बाध्य हैं। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहले संकेत दिया था कि यह समझौता सऊदी अरब को पाकिस्तान की परमाणु छत्रछाया में रखता है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने लगभग 16 विमानों का एक पूरा स्क्वाड्रन तैनात किया है, जिनमें से अधिकांश चीन के साथ संयुक्त रूप से निर्मित जेएफ-17 लड़ाकू विमान हैं, जिन्हें अप्रैल की शुरुआत में सऊदी अरब भेजा गया था। दो सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान ने ड्रोन के दो स्क्वाड्रन भी भेजे हैं। सभी पांच सूत्रों ने बताया कि तैनाती में लगभग 8,000 सैनिक शामिल हैं, और आवश्यकता पड़ने पर और अधिक सैनिक भेजने का वादा किया गया है, साथ ही एक चीनी मुख्यालय-9 वायु रक्षा प्रणाली भी शामिल है। उन्होंने आगे बताया कि इस उपकरण का संचालन पाकिस्तानी कर्मियों द्वारा किया जाता है और इसका वित्तपोषण सऊदी अरब द्वारा किया जाता है।
ईरान संघर्ष के दौरान तैनात सैन्य और वायु सेना कर्मियों की मुख्य भूमिका सलाहकारी और प्रशिक्षण देने की होगी, ऐसा दो सुरक्षा अधिकारियों ने बताया, जिन्होंने दोनों देशों के बीच हुए आदान-प्रदान और सैन्य संपत्तियों की तैनाती से संबंधित दस्तावेज़ देखे हैं। तीनों सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि इस तैनाती से उन हजारों पाकिस्तानी सैनिकों की संख्या में इजाफा होगा, जिनकी लड़ाकू भूमिका पहले से ही पिछले समझौतों के तहत सऊदी अरब में तैनात थी।
तैनाती का संभावित पैमाना
सरकारी सूत्रों में से एक, जिसने गोपनीय रक्षा समझौते का पाठ देखा है, ने बताया कि इसमें सऊदी अरब में 80,000 तक पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती की संभावना का प्रावधान है, ताकि सऊदी बलों के साथ मिलकर सऊदी अरब की सीमाओं की सुरक्षा में मदद की जा सके। दो सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि समझौते में पाकिस्तानी युद्धपोतों की तैनाती भी शामिल है, हालांकि रॉयटर्स यह पता नहीं लगा सका कि कोई युद्धपोत सऊदी अरब पहुंचा है या नहीं। सूत्रों ने कहा कि तैनाती का पैमाना और संरचना - लड़ाकू विमान, वायु रक्षा प्रणाली और हजारों सैनिक - यह दर्शाते हैं कि पाकिस्तान ने केवल एक प्रतीकात्मक या सलाहकारी मिशन से कहीं अधिक भेजा है।</description><guid>12374</guid><pubDate>2026-05-19 11:05:37 11:07:55 am</pubDate></item><item><title>स्वीडन के बाद अब नार्वे में भी पीएम मोदी का सम्मान, मिला सर्वोच्च ग्रैंड क्रॉस अवॉर्ड</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12373</link><description>ओस्लो।नॉर्वे के शाही परिवार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 'प्राप्तकर्ता की पदोन्नति या मृत्यु की स्थिति में ऑर्डर का प्रतीक चिन्ह ऑर्डर की परिषद को लौटा दिया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस से सम्मानित किया गया। यह प्रधानमंत्री को प्राप्त हुआ 32वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मान है। रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट का ग्रैंड क्रॉस नॉर्वे का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है, जिसकी स्थापना 1985 में राजा ओलाव पंचम ने की थी। यह पुरस्कार विदेशी और नॉर्वेजियन नागरिकों को नॉर्वे और मानवता के हित में उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। ऑर्डर ऑफ मेरिट को पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया है: ग्रैंड क्रॉस, ग्रैंड ऑफिसर, कमांडर, ऑफिसर और नाइट। नॉर्वे के शाही परिवार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्राप्तकर्ता की पदोन्नति या मृत्यु की स्थिति में ऑर्डर का प्रतीक चिन्ह ऑर्डर की परिषद को लौटा दिया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी को स्वीडन का रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार मिला
यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 'रॉयल ​​ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किए जाने के एक दिन बाद मिला है। यह सम्मान उन्हें द्विपक्षीय संबंधों में उनके असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के सम्मान में प्रदान किया गया है। प्रधानमंत्री ने बाद में इस पुरस्कार के लिए स्वीडन सरकार का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह भारत और स्वीडन के बीच मजबूत साझेदारी को दर्शाता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दोनों देशों के बीच संबंध और भी मजबूत होंगे। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि यह सम्मान न केवल मेरे लिए, बल्कि भारत के 140 करोड़ लोगों के लिए है। यह स्वीडन में हमारे सभी मित्रों को भी श्रद्धांजलि है जिन्होंने भारत-स्वीडन संबंधों को समृद्ध किया है और उन्हें एक मजबूत आधार प्रदान किया है।
आज सुबह प्रधानमंत्री मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के तहत नॉर्वे पहुंचे। नॉर्वे पहुंचने पर उनका स्वागत उनके समकक्ष जोनास गहर स्टोरे ने किया। यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा है। नॉर्वे पहुंचने के बाद उन्होंने स्टोरे के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की और उनके साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व संघर्ष को संवाद के माध्यम से हल करने का आह्वान किया। उन्होंने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत को समर्थन देने के लिए नॉर्वे सरकार का आभार भी व्यक्त किया, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी।</description><guid>12373</guid><pubDate>2026-05-19 11:01:22 11:04:38 am</pubDate></item><item><title>महत्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ संपन्न हुई स्वीडन यात्रा: पीएम मोदी</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12372</link><description>स्टॉकहोम/नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वीडन यात्रा संपन्न कर नॉर्वे रवाना हुए। पीएम ने इस दौरे को अत्यंत फलदायी बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वीडन में मिले सम्मान और दौरे की उपलब्धियों को दर्शाता वीडियो क्लिप भी साझा किया और स्वीडिश जनता और प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन का आभार जताया।

उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, स्वीडन की मेरी यात्रा कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ संपन्न हुई, जो भारत-स्वीडन संबंधों को नई गति प्रदान करेंगी। पीएम मोदी ने आगे कहा, हमारे संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने, संयुक्त नवाचार साझेदारी 2.0 और भारत-स्वीडन प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता कॉरिडोर की शुरुआत करने से लेकर अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक  हमारी चर्चाएं अत्यंत सकारात्मक और सार्थक रहीं।

प्रधानमंत्री ने स्वीडन की जनता, स्वीडन सरकार और प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन को उनके स्नेह, गर्मजोशी और मित्रता के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। वीडियो क्लिप में प्रधानमंत्री के विमान को एस्कॉर्ट करते स्वीडिश फाइटर जेट्स, रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस सम्मान, और गोथेनबर्ग में आयोजित 'यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' (ईआरटी) का संबोधन जैसे अहम पलों की झलकियां हैं।

यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच साझेदारी केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा मूल्यों, लोकतंत्र और विविधता द्वारा निर्देशित है। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला लेयेन, यूरोप के उद्योग जगत के शीर्ष नेतृत्व और प्रमुख यूरोपीय तथा भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों ने वोल्वो ग्रुप की ओर से आयोजित इस संवाद में भाग लिया।

इससे पहले पीएम मोदी को रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस से नवाजा गया। यह किसी भी देश के प्रधानमंत्री या सरकार प्रमुख को दिया जाने वाला स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान है।

गोथेनबर्ग रविवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी को इससे सम्मानित किया गया। इस मौके पर स्वीडन के प्रधानमंत्री समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यह पीएम मोदी को मिलने वाला 31वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।</description><guid>12372</guid><pubDate>2026-05-19 10:58:34 11:00:33 am</pubDate></item><item><title>ISIS के टॉप कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी का हुआ अंत : ट्रम्प</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12365</link><description>वाशिंगटन/नई दिल्ली ।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अबू-बिलाल अल-मिनुकी अमेरिकी और नाइजीरियाई सेनाओं के संयुक्त अभियान में मारा गया है। अबू-बिलाल अल-मिनुकी को दुनिया भर में आईएसआईएस का सेकंड-इन-कमांड बताया जाता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह मिशन उनके निर्देश पर चलाया गया था और इसमें अमेरिका तथा नाइजीरिया के सुरक्षा बलों ने मिलकर काम किया। ट्रंप ने कहा, आज रात, मेरे निर्देश पर बहादुर अमेरिकी फोर्स और नाइजीरिया की आर्म्ड फोर्स ने दुनिया के सबसे सक्रिय आतंकवादियों में से एक को लड़ाई के मैदान से खत्म करने के लिए बेहद सावधानी से तैयार किए गए और कठिन मिशन को बिना किसी गलती के पूरा किया।

उन्होंने आगे कहा, आईएसआईएस का दुनिया भर में सेकंड-इन-कमांड अबू-बिलाल अल-मिनुकी सोचता था कि वह अफ्रीका में छिप सकता है, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि हमारे पास ऐसे सोर्स हैं, जो हमें लगातार बताते रहते हैं कि वह क्या कर रहा है। वह अब अफ्रीका के लोगों को नहीं डराएगा और न ही अमेरिकियों को निशाना बनाने के लिए ऑपरेशन की योजना बनाने में मदद कर पाएगा। उसके मारे जाने से आईएसआईएस का वैश्विक नेटवर्क काफी कमजोर हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऑपरेशन के दौरान नाइजीरियाई सरकार के सहयोग और समर्थन के लिए उनका धन्यवाद भी किया। मौजूदा रिपोर्टों के मुताबिक, अबू-बिलाल अल-मिनुकी को आईएसआईएस की लीडरशिप में शीर्ष रैंक वाले लोगों में से एक माना जाता था और कहा जाता है कि वह संगठन के ग्लोबल डिप्टी कमांडर के तौर पर काम करता था। अल-मिनुकी को अबू बक्र इब्न मुहम्मद इब्न अली अल-मिनुकी के नाम से भी जाना जाता है।

आतंकी संगठन में उसकी वरिष्ठ भूमिका के कारण, वर्ष 2023 में अमेरिकी विदेश विभाग ने उसे एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 13224 के तहत प्रतिबंधित घोषित किया था। यह आदेश आतंकवाद की फंडिंग और गतिविधियों से जुड़े लोगों और संगठनों को निशाना बनाता है।

काउंटर एक्सट्रीमिज्म प्रोजेक्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अल-मिनुकी मुख्य रूप से अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में सक्रिय था, जो करीब 12 देशों में फैला हुआ है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वह इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रांत (आईएसडब्ल्यूएपी) का वरिष्ठ कमांडर था और आईएसआईएस के जनरल डायरेक्टरेट ऑफ प्रोविंसेज (जीडीपी) के तहत लेक चाड विभाग से जुड़े ऑपरेशन की निगरानी करता था</description><guid>12365</guid><pubDate>2026-05-16 16:37:33 4:38:57 pm</pubDate></item><item><title>ट्रंप की हत्या पर 50 मिलियन यूरो का इनाम!! ईरानी संसद में आ सकता है मसौदा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12364</link><description>तेहरान/नई दिल्ली ।ईरानी मीडिया में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक खबर सामने आई, जिसने सबका ध्यान खींचा है। ताजा रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि ईरानी सरकार ट्रंप की हत्या के बदले 50 मिलियन यूरो के इनाम का एक प्रस्ताव संसद में लाने की तैयारी कर रही है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के चेयरमैन इब्राहिम अजीजी ने इस्लामिक रिपब्लिक की सैन्य और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा काउंटर-एक्शन नामक योजना का मसौदा तैयार किए जाने की घोषणा की है।

इस मसौदे में डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के लिए 50 मिलियन यूरो का इनाम देने का प्रस्ताव शामिल है अजीजी ने कहा कि ट्रंप, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूएस सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) के कमांडर को काउंटर-एक्शन के लिए टारगेट किया जाना चाहिए। अजीजी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या में इनकी भूमिका की वजह से उन्हें टारगेट करने की बात कही।

सरकार के सपोर्टर अली अकबर राएफीपुर के मीडिया आउटलेट मसाफ ने पहले दावा किया था कि किल ट्रंप नाम के कैंपेन के लिए 50 मिलियन डॉलर के वित्तीय रिसोर्स सुरक्षित कर लिए गए हैं।

ईरान वायर ने बताया कि हैकिंग ग्रुप हंडाला ने एक बयान जारी कर दावा किया था कि समूह ने ट्रंप और नेतन्याहू को खत्म करने के लिए 50 मिलियन डॉलर दिए। हैकिंग ग्रुप के बयान में दावा किया गया कि यह रकम किसी भी ऐसे व्यक्ति या ग्रुप को दी जाएगी जो असल कार्रवाई करेगा। उनके कम्युनिकेशन और फाइनेंशियल चैनल एन्क्रिप्शन और एनोनिमाइजेशन टेक्नोलॉजी से सुरक्षित हैं।

ईरान इंटरनेशनल मीडिया के अनुसार, अजीजी ने सरकारी टीवी को बताया कि मार्च में युद्ध शुरू होने के बाद से सांसदों ने कई बिल तैयार किए हैं, जिनमें से एक सैन्य और सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कार्रवाई पर है।

अजीजी ने कहा, हमारा मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और सेंटकॉम कमांडर को निशाना बनाया जाना चाहिए और उन पर जवाबी कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, यह हमारा अधिकार है। जैसे हमारे इमाम शहीद हुए, वैसे ही अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ भी किसी भी मुस्लिम या आजाद इंसान को पेश आना चाहिए।

अजीजी ने कहा कि प्रस्तावित बिल में यह तय किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन इस मिशन को अंजाम देता है, तो सरकार उसे इनाम के तौर पर 50 मिलियन यूरो देने के लिए बाध्य होगी।

मार्च की शुरुआत में ईरान में मोबाइल यूजर्स को भेजे गए बड़े पैमाने के टेक्स्ट मैसेज में ट्रंप की हत्या के लिए इनाम से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय अभियान का प्रचार किया गया था। ईरान इंटरनेशनल के साथ साझा किए गए स्क्रीनशॉट्स में ऐसा दावा किया गया है</description><guid>12364</guid><pubDate>2026-05-16 16:34:49 4:36:38 pm</pubDate></item><item><title>उषा वेंस ने शुरू किया समर रीडिंग चैलेंज, बच्चों में पढ़ने की आदत बढ़ाने में जुटीं</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12363</link><description>वाशिंगटन।बच्चों में पढ़ाई-लिखाई को बढ़ावा देने की अपनी कोशिश के तहत, अमेरिका की सेकंड लेडी उषा वेंस ने फ्लोरिडा के एक चार्टर स्कूल का दौरा किया। यहां उन्होंने देशभर के स्टूडेंट्स के लिए अपने समर रीडिंग चैलेंज के बारे में बताया। फ्लोरिडा के डोरल में एकेडमिर एकेडमी चार्टर स्कूल ईस्ट के अपने दौरे के दौरान, सेकंड लेडी ने स्टूडेंट्स को एंड्रिया बीटी की लिखी किताब एडा ट्विस्ट द साइंटिस्ट पढ़कर सुनाई। उन्होंने पढ़ने की अहमियत के बारे में भी बताया और बच्चों और फैकल्टी मेंबर्स के सवालों के जवाब दिए। उषा वेंस ने कहा, मियामी में इतने सारे कमाल के बच्चों से मिलना और उनके साथ पढ़ने का हुनर ​​शेयर करना बहुत खुशी की बात थी। मुझे उन्हें अपने आने वाले समर रीडिंग चैलेंज और पिछले साल के चैलेंज के बाद से किए गए मजेदार अपडेट्स के बारे में बताना बहुत अच्छा लगा। मैं इस गर्मी में देश भर के बच्चों की कहानियों के जरिए सीखने और आगे बढ़ने के लिए उत्साहित हूं।
स्कूल अधिकारियों ने कहा कि इस दौरे में पढ़ाई-लिखाई, शिक्षा और स्टूडेंट डेवलपमेंट पर फोकस किया गया। ओलिविया बर्नल ने कहा, आज का दौरा खास तौर पर इसलिए मायने रखता है क्योंकि हम सेकंड लेडी के समर रीडिंग इनिशिएटिव के जरिए लिटरेसी, लर्निंग और शिक्षा की ट्रांसफॉर्मेटिव पावर के समर्थन में एक साथ आ रहे हैं। एकेडमिर चार्टर स्कूल्स में, हमारा मानना ​​है कि पढ़ने से इमैजिनेशन, मौके और जिंदगी भर की सफलता के दरवाजे खुलते हैं। हमें इस जरूरी पहल का समर्थन करने पर गर्व है और हम अपने स्टूडेंट्स को जिंदगी भर पढ़ने वाले, क्रिटिकल थिंकर और फ्यूचर लीडर बनने के लिए इंस्पायर करने के लिए कमिटेड हैं।
समर रीडिंग चैलेंज, वेंस के बड़े चाइल्डहुड लिटरेसी इनिशिएटिव का हिस्सा है। द सेकंड लेडी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट 'स्टोरीटाइम विद द सेकंड लेडी' लॉन्च किया है, जिसमें गेस्ट और सेलिब्रिटी बच्चों की कहानियां जोर से पढ़ते हैं।</description><guid>12363</guid><pubDate>2026-05-16 16:32:51 4:34:24 pm</pubDate></item><item><title>ट्रम्प ने वेनेजुएला को बताया अमेरिका का 51वां राज्य</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12360</link><description>वॉशिंगटन ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक मानचित्र साझा किया है जिसमें वेनेजुएला को अमेरिका के 51वें राज्य के रूप में दिखाया गया है। श्री ट्रम्प ने मजाक में वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की ओर संकेत तब दिया जब उन्होंने मार्च में विश्व बेसबॉल क्लासिक सेमीफाइनल में इटली को हराने पर वेनेजुएला की राष्ट्रीय बेसबॉल टीम को बधाई दी थी। उन्होंने इस जीत का श्रेय वेनेजुएला के अमेरिका के साथ सहयोग को दिया।
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने सोमवार को सोमवार को इस दक्षिण अमेरिकी देश के अमेरिका का 51वां राज्य बनने की कभी भी संभावना को खारिज कर दिया।
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने के लिए जनवरी की शुरुआत में वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई के बाद अमेरिका और वेनेजुएला ने राजनयिक संबंधों को बहाल करना शुरू कर दिया था। श्री ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण करने के अपने इरादे की भी घोषणा की थी।</description><guid>12360</guid><pubDate>2026-05-13 19:08:14 7:09:32 pm</pubDate></item><item><title>ट्रंप ने ईरान के जवाबी प्रस्ताव को पूरी तरह से किया खारिज</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12358</link><description>वाशिंगटन ।ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत करने के लिए ड्राफ्ट प्रस्ताव भेज दिया है। ईरान के ड्राफ्ट प्रस्ताव पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि यह बिलकुल भी मंजूर नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा है। मुझे यह पसंद नहीं आया, बिल्कुल मंजूर नहीं! इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद। ईरान ने अमेरिका को पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए अपना प्रस्ताव भेजा, जिसके कुछ ही घंटे के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति का ये बयान सामने आया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पुष्टि की है कि तेहरान ने जवाब दे दिया है। हालांकि, जवाब से संबंधित विस्तृत जानकारी को शेयर नहीं किया।
ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि तेहरान का जवाब खास तौर पर क्षेत्र में दुश्मनी खत्म करने पर केंद्रित था। वहीं, अन्य ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि तेहरान ने लड़ाई को आधिकारिक तौर पर खत्म करने, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने, अमेरिकी नौसेना के उन जहाजों को हटाने जो नाकाबंदी लागू कर रहे हैं, प्रतिबंध हटाने और बातचीत के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय देने की मांग की है।
ईरान ने कथित तौर पर यह भी प्रस्ताव दिया है कि भविष्य की बातचीत में उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम पर चर्चा अलग से की जाए। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर अमेरिका के साथ गेम खेलने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अब ईरान ज्यादा खुश नहीं रहेगा! इस बीच, अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान को यह साफ कर देना चाहिए कि वे न्यूक्लियर हथियार नहीं चाहते हैं, जिसे वाशिंगटन शांति समझौते के लिए जरूरी मानता है।
ईरान के इस जवाब से पहले ट्रंप सरकार ने पिछले हफ्ते मीडिएटर्स के जरिए 14-पॉइंट का प्रस्ताव भेजा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फ्रेमवर्क में कथित तौर पर तेहरान की न्यूक्लियर गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रतिबद्धता से जुड़ी मांगें शामिल थीं।
यह कूटनीतिक बातचीत तब हुई जब होर्मुज स्ट्रेट और उसके आस-पास सैन्य तनाव जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने गुरुवार को तीन यूएस नेवी डिस्ट्रॉयर पर हमला किया। ईरान का आरोप था कि ये जहाज उन समुद्री क्षेत्रों में घुस रहे थे, जिन पर तेहरान अपना नियंत्रण होने का दावा करता है। ईरान ने कहा कि उसने बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया और दावा किया कि हमलों से गंभीर नुकसान हुआ।
अमेरिका ने इस दावे से इनकार किया। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि डिस्ट्रॉयर जहाज बिना किसी नुकसान के निकल गए। ईरान की इस कार्रवाई से पहले अमेरिका ने दो ईरानी झंडे वाले टैंकरों पर हमला किया था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वे ओमान की खाड़ी के पास एक नेवल नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे थे।
बाद में अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तट पर केशम द्वीप और बंदर अब्बास के पास के ठिकानों पर हमला किया। क्षेत्रीय तनाव ईरान के तटों से आगे भी फैल गया। कतर के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि अबू धाबी से आ रहे एक कमर्शियल कार्गो जहाज को दोहा के तट के पास एक ड्रोन ने टक्कर मार दी, जिससे उसमें मामूली आग लग गई।</description><guid>12358</guid><pubDate>2026-05-11 12:06:17 12:08:28 pm</pubDate></item><item><title>होर्मुज में तनाव चरम पर, ईरान ने दी चेतावनी-हमारे जहाजों को छुआ तो होगा बड़ा हमला</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12357</link><description>तेहरान।ईरान के आईआरजीसी ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को सीधी चेतावनी दी है, जिसमें कहा गया है कि ईरानी जहाजों पर किसी भी हमले का जवाब भारी मिसाइल हमले से दिया जाएगा। आईआरजीसी ने दावा किया कि उसकी मिसाइलें और ड्रोन अमेरिकी संपत्तियों पर निशाना साध चुके हैं, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य तनाव चरम पर है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने शनिवार को फारस की खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी तेल टैंकरों या वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामकता क्षेत्र में अमेरिकी केंद्रों और सैन्य जहाजों पर भारी हमला को जन्म देगी। आईआरजीसी नौसेना कमान ने X पर एक पोस्ट में यह चेतावनी जारी की, जिसमें कहा गया है कि चेतावनी! ईरान के तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामकता के परिणामस्वरूप क्षेत्र में स्थित अमेरिकी केंद्रों में से एक और दुश्मन के जहाजों पर भारी हमला होगा।
इसके बाद, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स ने एक अलग पोस्ट में कहा कि उसकी मिसाइलें और ड्रोन पहले ही क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और शत्रु हमलावर जहाजों पर निशाना साध चुके हैं, और वे फायरिंग के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पोस्ट में लिखा था कि आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स की मिसाइलों और ड्रोनों ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और शत्रु हमलावर जहाजों पर निशाना साध लिया है। हम फायरिंग के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ये टिप्पणियां होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी नौसेना और ईरानी सेना के बीच हुई गोलीबारी के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच आई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा पारगमन मार्ग है।
गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों पक्षों के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी और ईरानी नौसेना बलों के बीच हुई गोलीबारी की पुष्टि की। उन्होंने दावा किया कि हमले के बावजूद तीन अमेरिकी विध्वंसक पोत रणनीतिक जलमार्ग से सफलतापूर्वक गुजर गए। ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के तीन विध्वंसक पोत होर्मुज जलडमरूमध्य से बहुत सफलतापूर्वक निकल गए, हालांकि इस दौरान ईरानी बलों ने उन पर गोलीबारी की।</description><guid>12357</guid><pubDate>2026-05-11 12:03:19 12:05:21 pm</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी ने छुए माखनलाल के पैर और स्नेह से लगाया गले</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12356</link><description>कोलकाता ।भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खासियत है कि वे कभी भी अपने कार्यकर्ताओं के योगदान को नहीं भूलते हैं। कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से ही पार्टी बनती है और संगठन में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कार्यकर्ता से सफर की शुरूआत की और पीएम बनने तक का रास्ता तय किया। कुछ ऐसा ही नजारा शनिवार को कोलकाता में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण के दौरान देखने को मिला जब भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता माखनलाल सरकार के साथ पीएम मोदी रूबरू हुए। पीएम मोदी ने उनके पैर छूए और स्नेह सहित गले लगाया। पीएम मोदी अपने कार्यकर्ताओं के योगदान को नहीं भूलते हैं।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मारे गए भाजपा कार्यकर्ता देबाशीष मंडल, सौमित्र घोषाल और आनंद पॉल के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार ने शपथ ली है तो हम सभी के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और राष्ट्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान को याद करना स्वाभाविक है। उनके विजन को पूरा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
उन्होंने लिखा कि कोलकाता में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुझे माखनलाल सरकार से मिलने का अवसर मिला। एक कट्टर राष्ट्रवादी के तौर पर उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ काम किया और उनके साथ रहते हुए जम्मू-कश्मीर में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। उन्होंने अपना पूरा जीवन हमारी पार्टी को समर्पित कर दिया; उन्होंने पूरे पश्चिम बंगाल में पार्टी का आधार बढ़ाया और जीवन के हर क्षेत्र से लोगों को पार्टी में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। भाजपा में हम इस बात पर गर्व महसूस करते हैं कि हमारे पास ऐसी प्रेरणादायक हस्तियां हैं, जिन्होंने लोगों के बीच रहकर काम किया और पार्टी को मजबूत बनाया।
वहीं, उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री के रूप में शपथ लेने पर दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदीराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक को बधाई दी। पीएम मोदी ने लिखा कि इन नेताओं ने जमीनी स्तर पर अथक परिश्रम किया है और लोगों की सेवा की है। मुझे विश्वास है कि मंत्री के रूप में ये पश्चिम बंगाल की विकास यात्रा को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।</description><guid>12356</guid><pubDate>2026-05-10 15:58:25 4:00:13 pm</pubDate></item><item><title>पुतिन ने दिए यूक्रेन युद्ध खत्म होने के संकेत</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12353</link><description>मास्को ।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध खत्म होने के संकेत दिए हैं। मॉस्को में विक्ट्री परेड समारोह के बाद एक आश्चर्यजनक बयान देते हुए पुतिन ने कहा कि यूक्रेन में संघर्ष खत्म होने के करीब है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि मामला समाप्त होने वाला है। ये अब तक का सबसे मजबूत संकेत है कि मॉस्को 4 साल से ज्यादा समय तक भीषण लड़ाई के बाद अब बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के संकेत दे रहा है।
पुतिन ने कहा, यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। पश्चिमी अभिजात वर्ग ने रूस को कुचलने का जो सपना देखा था, वो विफल हो चुका है। अब वे खुद इस दलदल में फंस चुके हैं। पुतिन के अनुसार, पश्चिमी देशों ने अपने भू-राजनीतिक हितों के लिए यूक्रेन को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि रूस के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया और यूक्रेन के हाथों हमला करवाया गया।
पुतिन ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन युद्ध की ताजा स्थिति को लेकर भारत, चीन और अमेरिका जैसे प्रमुख देशों को भरोसे में लिया है। उनके मुताबिक, इन देशों के साथ रणनीतिक जानकारी साझा की गई है।
उन्होंने कहा, पश्चिम को उम्मीद थी कि वे कुछ ही महीनों में रूस को कुचल देंगे और उसकी राज्यसत्ता को नष्ट कर देंगे, लेकिन वे इसमें पूरी तरह विफल रहे। अब वे खुद इस दलदल में फंस चुके हैं।</description><guid>12353</guid><pubDate>2026-05-10 15:15:20 3:17:19 pm</pubDate></item><item><title>ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्धविराम की घोषणा की</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12352</link><description>वाशिंगटन ।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। उन्होंने इसे लंबे समय से चल रहे युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम बताया। ट्रंप ने एक बयान में कहा, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में 9, 10 और 11 मई को तीन दिन का युद्धविराम रहेगा।
उन्होंने बताया कि यह युद्धविराम रूस के विक्ट्री डे समारोह के दौरान होगा। ट्रंप ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध में यूक्रेन की भी बड़ी भूमिका थी। उन्होंने कहा, रूस में विक्ट्री डे मनाया जाता है, लेकिन यूक्रेन का भी इसमें बड़ा योगदान रहा था, इसलिए यह उनके लिए भी महत्वपूर्ण है।
ट्रंप के अनुसार, इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सभी सैन्य कार्रवाई कुछ समय के लिए रोक दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान लड़ाई और हमले बंद रहेंगे।उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों ने कैदियों की अदला-बदली पर भी सहमति जताई है। ट्रंप ने कहा कि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के 1,000-1,000 कैदियों को रिहा करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस पहल की शुरुआत सीधे तौर पर उन्होंने ही की थी। उन्होंने कहा, यह अनुरोध सीधे मैंने ही किया था। उन्होंने इस समझौते की शर्तों पर सहमत होने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की, दोनों की सराहना की।
ट्रंप ने कहा, मैं राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की द्वारा इस समझौते पर सहमति जताने की बहुत सराहना करता हूं। उन्होंने इस घटनाक्रम को युद्ध में एक बड़ा मोड़ बताया। ट्रंप ने कहा कि उम्मीद है यह लंबे, खतरनाक और विनाशकारी युद्ध के अंत की शुरुआत साबित होगा।
ट्रंप ने कहा, इस बड़े संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा संघर्ष है और हम हर गुज़रते दिन के साथ समाधान के और करीब पहुंच रहे हैं।
अगर यह युद्धविराम पूरी तरह लागू होता है, तो यह युद्ध शुरू होने के बाद लड़ाई में सबसे बड़े विरामों में से एक माना जाएगा। इससे पहले भी कई बार अस्थायी युद्धविराम की कोशिशें हुईं, लेकिन वे ज्यादा समय तक नहीं चल सकीं।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब दोनों देशों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है, जबकि कई इलाकों में लड़ाई अभी भी जारी है। रूस में 9 मई को मनाया जाने वाला विक्ट्री डे बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिवस है। यह दिन दूसरे विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की याद में मनाया जाता है। वहीं, यूक्रेन भी इस युद्ध की विरासत को याद करता है, हालांकि हाल के वर्षों में उसने सोवियत प्रतीकों से दूरी बनाने की कोशिश की है।

</description><guid>12352</guid><pubDate>2026-05-10 11:32:23 11:42:10 am</pubDate></item></channel></rss>