<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>देश-विदेश - Dainandini Feed</title><link>https://dainandini.in/</link><description>Dainandini Feed Description</description><item><title>अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान शुरू</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13421</link><description>वाशिंगटन ।अमेरिका में मंगलवार को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान होगा। इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने प्रतिनिधि सभा और सीनेट में अपना बहुमत बचाने की चुनौती है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी की नजर कांग्रेस के कम से कम एक सदन में बहुमत हासिल करने पर है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के कार्यकाल (चार साल) के बीच में होने वाले चुनाव को मध्यावधि चुनाव कहा जाता है।
इसमें राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता, बल्कि मतदाता कांग्रेस के सदस्यों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान हो रहा है। इसके अलावा 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव हो रहे हैं। सीटों की संख्या की बात करें तो रिपब्लिकन के पास प्रतिनिधि सभा में 218 के मुकाबले 214 सीटों का मामूली बहुमत है, जबकि सीनेट में उसकी स्थिति 53-47 की है। इस चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि ट्रंप अपने कार्यकाल के अगले दो वर्षों में कांग्रेस में कितने मजबूत रहेंगे।

मध्यावधि चुनाव को मौजूदा राष्ट्रपति के कामकाज पर जनता की पहली बड़ी राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा जाता है। महंगाई, जीवनयापन की लागत, स्वास्थ्य सेवाएं, आव्रजन और ईरान के साथ जारी संघर्ष इस बार चुनावी बहस के प्रमुख मुद्दे हैं।इससे पहले, ट्रंप ने मध्यावधि चुनावों को अपने दूसरे प्रशासन के पहले 20 महीनों पर जनमत संग्रह घोषित किया था और नागरिकों से कहा था कि वे ऐसे वोट दें जैसे कि वे स्वयं उम्मीदवार हों।

</description><guid>13421</guid><pubDate>2026-11-03 13:01:09 1:01:46 pm</pubDate></item><item><title>भारतीय बल्लेबाजों ने बनाया सिक्स का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड, टी20 में हासिल किया ऐतिहासिक मुकाम</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13417</link><description>हैमिल्टन । भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांचवां टी20 मुकाबला हैमिल्टन के सेडन पार्क में खेला जा रहा है। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 191 रन बनाए। टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने इस मुकाबले में कुल 11 छक्के लगाए। भारतीय टीम ने इसके साथ ही साल 2026 में टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 400 छक्के पूरे कर लिए हैं। टीम इंडिया यह मुकाम हासिल करने वाली दुनिया की पहली टीम बनी है।
इससे पहले, क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में अब तक कोई भी टीम एक कैलेंडर ईयर में 400 छक्के नहीं लगा सकी है। खास बात यह है कि साल 2026 में लगाए गए 400 में 142 छक्के भारतीय बल्लेबाजों ने न्यूजीलैंड के खिलाफ लगाए हैं, जो एक कैलेंडर ईयर में एक टीम के खिलाफ लगाए गए सबसे ज्यादा सिक्स भी हैं।
साल 2026 में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के मामले में भारत के बाद दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रिया की टीम है, जिसने इस साल खेले 24 मैचों में कुल 224 छक्के लगाए हैं। वहीं, भारतीय टीम ने 40 टी20 मैचों में 400 छक्के लगाए हैं। इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर वेस्टइंडीज मौजूद है, जिसने 2026 में खेले 21 मुकाबलों में अब तक 224 सिक्स लगाए हैं।
टीम इंडिया की तरफ से इस साल बतौर बल्लेबाज सर्वाधिक छक्के अभिषेक शर्मा ने लगाए हैं। वह 2026 में 86 छक्के लगा चुके हैं, जबकि ईशान किशन 60 सिक्स के साथ सूची में दूसरे नंबर पर काबिज हैं। संजू सैमसन के बल्ले से इस साल 50 छक्के आए हैं और वह तीसरे नंबर पर हैं।












पांचवें टी20 में टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और अभिषेक सिर्फ एक रन बनाकर आउट हुए, जबकि संजू सैमसन भी 4 रन ही बना सके।
हालांकि, इसके बाद ईशान किशन और कप्तान श्रेयस अय्यर ने 93 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी निभाई। ईशान ने 32 गेंदों में 61 रन बनाए, तो श्रेयस अय्यर ने 23 गेंदों में 50 रनों का योगदान दिया। नमन धीर ने 23 गेंदों में 33 रन बनाए और नीतीश कुमार रेड्डी ने 17 गेंदों में 22 रन बनाकर आउट हुए। न्यूजीलैंड की ओर से गेंदबाजी में एडम मिल्ने ने 4 ओवर में 19 रन देकर सर्वाधिक 4 विकेट चटकाए।</description><guid>13417</guid><pubDate>2026-11-02 12:23:32 12:24:29 pm</pubDate></item><item><title>रामलीला मैदान रैली को बीजेपी ने बताया सुपर फ्लाप, संबित पात्रा ने विपक्ष से पूछा- 10 लाख लोग कहां थे?</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13416</link><description>नई दिल्ली । दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की रैली को बीजेपी ने सुपर फ्लॉप बताया है। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने मैदान खाली रहने का दावा कर विपक्ष पर तंज कसा। वहीं, राहुल गांधी ने कथित वोट चोरी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और जेल भेजने की चेतावनी दी।
दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर निशाना साधा है। बीजेपी ने रैली को 'सुपर फ्लॉप' बताते हुए दावा किया कि मैदान का करीब 40 फीसदी हिस्सा खाली था। नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के दूसरे नेताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने रैली में भारी भीड़ जुटने के दावों पर तंज कसते हुए पूछा कि जिन 10 लाख लोगों के आने की उम्मीद जताई गई थी, वे आखिर कहां थे?
यह एक सुपर फ्लॉप रैली थी
रैली का वीडियो साझा करते हुए संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी भाषण दे रहे थे और उनके सामने खाली कुर्सियां दिखाई दे रही थीं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस 50 हजार लोगों की क्षमता वाले रामलीला मैदान को भी नहीं भर पाई। पात्रा ने कहा, यह एक सुपर फ्लॉप रैली है।
10 लाख लोग कहां थे, हमें दिखाएं
पत्रकारों से बातचीत में पात्रा ने कहा कि बीजेपी सुबह से इस रैली और राहुल गांधी के भाषण पर नजर रख रही थी, लेकिन आखिर में उन्हें यह समय की बर्बादी लगी। उन्होंने सवाल किया, वे 10 लाख लोग कहां थे? हमें दिखाएं। पात्रा ने कहा कि इस तरह के हथकंडों से कोई नेता या प्रधानमंत्री नहीं बन जाता।उन्होंने प्रधानमंत्री शब्द का अलग अर्थ बताते हुए कहा कि यहां 'पी' का मतलब पसीना और 'एम' का मतलब मेहनत है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री बनने के लिए पसीना बहाना और कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। पात्रा ने आगे कहा कि इतने सारे दलों और झंडों को एक साथ लाने के बावजूद विपक्ष 10 लाख लोगों को इकट्ठा नहीं कर पाया।
हिंदुस्तान आपके पूर्वजों की जागीर नहीं
संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने भीड़ को बड़ा दिखाने के लिए कैमरे के कोण का इस्तेमाल किया। उन्होंने इन तस्वीरों को 'ट्रिक फोटोग्राफी' बताया। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पात्रा ने कहा, राहुल जी, हिंदुस्तान आपके पूर्वजों की जागीर नहीं है। हिंदुस्तान हिंदुस्तानियों का है। उन्होंने आगे कहा कि देश में एक चायवाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है और यही बात राहुल गांधी को खटकती है।
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की कही बात











इंडी गठबंधन की यह रैली कथित चुनावी गड़बड़ियों और वोट चोरी के मुद्दे पर आयोजित की गई थी। रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटा दिया जाएगा और उन्हें देशद्रोह के आरोप में जेल जाना पड़ेगा। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि कथित वोट चोरी के मामले में उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।


</description><guid>13416</guid><pubDate>2026-11-02 12:21:27 12:22:04 pm</pubDate></item><item><title>2027 चुनाव से पहले पंजाब में आप को झटका, एक साथ दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13415</link><description>चंड़ीगढ़ । पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के दो विधायकों हरमीत सिंह पठानमाजरा और पूर्व मंत्री चेतन सिंह जौरामाजरा ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। दोनों विधायकों का यह कदम पार्टी द्वारा 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के ठीक एक दिन बाद सामने आया है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के दो विधायकों हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौरामाजरा ने रविवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों विधायकों के इस फैसले को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए झटका माना जा रहा है। हरमीत सिंह पठानमाजरा सनौर विधानसभा सीट से विधायक हैं, जबकि चेतन सिंह जौरामाजरा समाना सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।
हरमीत सिंह पठानमाजरा ने केजरीवाल को भेजा इस्तीफा
हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपना इस्तीफा आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा है। उन्होंने पत्र में तत्काल प्रभाव से पार्टी छोड़ने का ऐलान किया।
चेतन सिंह जौरामाजरा ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
पंजाब सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके चेतन सिंह जौरामाजरा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी छोड़ने की जानकारी दी। उन्होंने अपना इस्तीफा पंजाब में आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा को संबोधित करते हुए भेजा है।
उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होने के एक दिन बाद इस्तीफा










दोनों विधायकों का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब आम आदमी पार्टी ने एक दिन पहले ही 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। हालांकि, पार्टी ने अभी तक सनौर और समाना विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं। इन दोनों सीटों का प्रतिनिधित्व फिलहाल हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौरामाजरा कर रहे थे।


</description><guid>13415</guid><pubDate>2026-11-02 12:19:20 12:20:02 pm</pubDate></item><item><title>विपक्ष जनादेश न मिलने से हताश, भाजपा नेता नितिन नवीन ने रोहतक में साधा निशाना</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13414</link><description>चंडीगढ़, । हरियाणा के रोहतक में लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा के दौरान भाजपा नेता नितिन नवीन ने विपक्षी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनावी हार से निराश होकर कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है। नवीन ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेतृत्व से माफी मांगने की भी मांग की।
एक नवंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को दिल्ली में विपक्षी गठबंधन इंडिया की रैली को लेकर निशाना साधा और कहा कि जनता का जनादेश नहीं मिलने से हताश कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है। नवीन वोट चोरी के आरोपों को लेकर विपक्ष की रैली के जवाब में हरियाणा के रोहतक में मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा को संबोधित करते हुए नवीन ने कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के लिए प्रायश्चित करने और माफी मांगने के बजाय कांग्रेस दंगे की बरसी पर प्रदर्शन करने निकली है।












विपक्षी गठबंधन इंडिया कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में चलो दिल्ली रैली कर रहा है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, कांग्रेस पार्टी को सिख भाइयों के खिलाफ किए गए कृत्यों, नरसंहार और हत्याओं के लिए प्रायश्चित करना चाहिए था और माफी मांगनी चाहिए थी, जो 1984 में इसी दिन हुई थीं। इसके बजाय, आज वे प्रदर्शन करने निकल पड़े हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता सरकार चलाने के लिए जनादेश देती है, लेकिन कांग्रेस को ऐसा जनादेश नहीं मिला।











इसलिए वह स्पष्ट रूप से निराश और हताश है तथा इसके लिए संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहरा रही है। लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा का जिक्र करते हुए नवीन ने कहा, आज हम लोगों के जनादेश का सम्मान करते हुए पदयात्रा निकालकर लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत कर रहे हैं। लोग हमसे पूछते हैं कि दिल्ली और कई अन्य राज्यों में भाजपा की सरकार है, फिर लोकतंत्र बचाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। नवीन ने कहा कि जब विपक्ष जनता के जनादेश का अनादर करता है, तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कार्यकर्ता जनता की आवाज बनकर उसे जवाब देते हैं।











उन्होंने एक नवंबर को हरियाणा के स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं, लेकिन कहा कि इस दिन की कुछ दर्दनाक यादें भी हैं। नवीन ने कहा, मैं राहुल जी से पूछना चाहता हूं कि जब हमारे सिख भाइयों की हत्या की जा रही थी और उनका नरसंहार हो रहा था, तब आपके पिता ने टिप्पणी की थी कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है। आपको उन सिखों की मौत पर पश्चाताप करना चाहिए था और इसके लिए माफी मांगनी चाहिए थी।











लेकिन आपने आज प्रदर्शन करना चुना। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को चुनौती दी कि वे पहले राहुल गांधी के इर्द-गिर्द केंद्रित अपनी पार्टी के भीतर के राजतंत्र को समाप्त करें और वहां लोकतंत्र स्थापित करें। इस पदयात्रा में हरियाणा के लिए भाजपा की प्रभारी स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) नेता जयंत चौधरी, हरियाणा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अर्चना गुप्ता, पार्टी के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश धनखड़, सुभाष बराला, कैप्टन अभिमन्यु और मोहन लाल बड़ौली शामिल हुए।


</description><guid>13414</guid><pubDate>2026-11-02 12:17:11 12:17:59 pm</pubDate></item><item><title>कांग्रेस के पतन की वजह बनेगी महारैली, जेपी नड्डा का राहुल गांधी पर तीखा वार</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13413</link><description>नई दिल्ली । बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन की महारैली को प्रायोजित नाटक बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस रैली का मकसद शहर में अराजकता फैलाना है और साथ ही 1984 के दंगों का जिक्र किया। वहीं, विपक्ष ने कथित चुनावी गड़बड़ियों और चुनाव आयोग के विरोध में यह प्रदर्शन आयोजित किया।
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई INDIA गठबंधन की महारैली पर निशाना साधा है। उन्होंने विपक्ष की इस रैली को 'मूर्खतापूर्ण और पहले से तय नाटक' बताया। नड्डा ने कहा कि यह रैली कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी और पार्टी के राजनीतिक पतन का कारण बनेगी। नड्डा ने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन का मकसद लोकतंत्र को अराजकता और अव्यवस्था के हवाले करना है। उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा।
नड्डा बोले- दिल्ली में अराजकता फैलाने की साजिश
समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, जेपी नड्डा ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि रैली के जरिए दिल्ली में दंगे और अव्यवस्था फैलाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा, दिल्ली में दंगे और अराजकता फैलाने की साजिश के जरिये लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को हटाना, त्योहारों के मौसम में दिल्ली के दुकानदारों और व्यापारियों को नुकसान पहुंचाना तथा देश की छवि खराब करना भी इस रैली के अन्य उद्देश्य हैं। नड्डा ने कहा कि रामलीला मैदान में हो रहा प्रदर्शन लोकतंत्र का सम्मान नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश है।
इसे भी पढ़ें: कनॉट प्लेस की दुकानें जबरन बंद कराईं, Rahul Gandhi ने वीडियो जारी कर BJP पर लगाए आरोप
1984 के सिख-विरोधी दंगों का किया जिक्र

जेपी नड्डा ने 1 नवंबर की तारीख का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 1984 के सिख-विरोधी दंगों में हजारों सिख परिवारों को नुकसान उठाना पड़ा था और कई परिवार बेघर हो गए थे। उन्होंने कहा, एक नवंबर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बदसूरत और काला दिन है। इसी दिन कांग्रेस के संरक्षण में पलने वाले गुंडों ने हमारे निर्दोष सिख भाइयों का नरसंहार किया था। हजारों और लाखों सिख परिवार रातोंरात बेघर हो गए थे।
नड्डा ने आरोप लगाया कि इसी तारीख पर रैली आयोजित करके राहुल गांधी सिख समुदाय के जख्मों पर नमक छिड़कना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक मजबूत लोकतांत्रिक देश है और यहां सरकार संविधान और जनता के जनादेश से चलेगी, न कि दंगों की राजनीति से।
राहुल गांधी को लेकर क्या बोले जेपी नड्डा?
जेपी नड्डा ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें 1 नवंबर के इतिहास और दिल्ली के व्यापारियों के नुकसान से जुड़े सवालों का जवाब देना होगा। उन्होंने कहा, राहुल गांधी, ध्यान से सुनिए। आप एक नवंबर के काले इतिहास को नहीं छिपा सकते। आप दिल्ली के व्यापारियों के आंसुओं का जवाब देने से बच नहीं सकते। नड्डा ने आगे कहा, आपकी यह रैली कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी और उसके राजनीतिक पतन का कारण बनेगी।
चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ इंडिया गठबंधन की रैली
बता दें कि इंडिया गठबंधन ने कथित चुनावी गड़बड़ियों के विरोध में दिल्ली में 'चलो दिल्ली' रैली आयोजित की है। गठबंधन मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। इसी मुद्दे को लेकर रामलीला मैदान में महारैली और मार्च का आयोजन किया गया।</description><guid>13413</guid><pubDate>2026-11-02 12:15:04 12:15:43 pm</pubDate></item><item><title>राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला, सीईसी ज्ञानेश कुमार को जेल भेजेंगे</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13412</link><description>नई दिल्ली । दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव को गैरकानूनी बताया। उन्होंने ईवीएम और मतदाता सूची में धांधली का आरोप लगाया तथा लोकतंत्र बचाने का संकल्प जताया। इसके अलावा उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने की बात भी कही।
दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि देश में कई सालों से वोट चोरी हो रही है। राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव को भी गैरकानूनी बताया और आरोप लगाया कि ईवीएम के जरिए वोटों की चोरी की गई। उन्होंने हरियाणा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी वोट चोरी होने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें जेल भेजा जाएगा।
राहुल गांधी बोले- लोकतंत्र की आवाज को दबने नहीं देंगे
रामलीला मैदान में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए राहुल गांधी ने रैली में पहुंचे लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह किसी एक राजनीतिक पार्टी या नेता की आवाज नहीं है, बल्कि देश के युवाओं, किसानों और मजदूरों की आवाज है। उन्होंने कहा, लाखों लोग यहां चलकर आए, एक साथ चलकर आए। दिल से आपका धन्यवाद करता हूं। आपने देश को एक मैसेज भेजना था, नरेंद्र मोदी को, अमित शाह को, ज्ञानेश कुमार को मैसेज भेजना था, आपने मैसेज भेजा है। ये किसी एक राजनीतिक पार्टी की आवाज नहीं है। ये सिर्फ नेताओं की आवाज नहीं है। ये हिंदुस्तान के युवाओं की आवाज है, हिंदुस्तान के किसानों की आवाज है, मजदूरों की आवाज है और ये आवाज कह रही है कि हम लोकतंत्र को हिंदुस्तान में खत्म नहीं होने देंगे। हम संविधान को नष्ट नहीं होने देंगे।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि कई सालों से वोट चोरी हो रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी बंगाल का उदाहरण दिया है। राहुल ने आरोप लगाया कि ईवीएम और मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाकर वोटों की चोरी की गई है।
राहुल गांधी बोले- 2024 का लोकसभा चुनाव गैरकानूनी था
राहुल गांधी ने अपने भाषण में 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, छोटा सा उदाहरण मैं आपको देना चाहता हूं। 2024 के चुनाव के बाद साढ़े 13 करोड़ वोटर्स वोटर लिस्ट से हटाए गए। एनडीए और हमारे बीच में 3% फर्क था। उसके बाद 15% वोटर्स वोटर लिस्ट से निकाल दिए गए। इसका मतलब 2024 का चुनाव गैरकानूनी चुनाव था, चोरी का चुनाव था और ये बात मैं नहीं कह रहा हूं, ये बात इलेक्शन कमीशन कह रहा है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर भी दिया बयान
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वोट चोरी के मामले में ज्ञानेश कुमार को जेल भेजा जाएगा। रैली में राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा।

</description><guid>13412</guid><pubDate>2026-11-02 12:13:18 12:14:06 pm</pubDate></item><item><title>अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला, 1984 के दंगों और दिल्ली रैली को लेकर कांग्रेस को घेरा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13411</link><description>नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में आयोजित रैली को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों की तारीखों पर यह रैली करना पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। इसके अलावा उन्होंने मॉक पार्लियामेंट पर तंज कसा और त्योहारों में व्यापारियों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया।
दिल्ली में विपक्षी इंडिया गठबंधन की महारैली को लेकर सियासी घमासान जारी है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ से कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने जिस दिन दिल्ली में रैली आयोजित की है, वह दंगों के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।









अमित शाह ने कांग्रेस के मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम पर भी तंज कसा। उन्होंने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री बनना है तो पूरी जिंदगी मॉक पार्लियामेंट में ही बने रहें, उनका नंबर कभी नहीं आएगा।
1984 के सिख-विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस पर हमला
अमित शाह ने कहा कि 1 नवंबर 1984 को कांग्रेस से जुड़े लोगों द्वारा भड़काए गए दंगों में दिल्ली में हजारों सिखों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों को जिंदा जला दिया गया और हजारों परिवारों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
शाह ने कहा कि इन दंगों में कई बच्चे अनाथ हुए, महिलाएं विधवा हुईं और परिवारों के घर तबाह हो गए। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा, जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है। शाह ने कहा कि हजारों सिखों के नरसंहार को इस तरह बयान करना बेहद दुखद था। उनके मुताबिक, उस समय कांग्रेस के नेता ही इस तरह की बात कह सकते थे।
मोदी सरकार ने दोबारा खुलवाए दंगों के मामले
गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों की दोबारा जांच कराई गई। उन्होंने कहा कि दंगों के आरोपियों के खिलाफ मामले फिर से खोले गए और पीड़ितों को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई। शाह ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को जेल भेजा गया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश ने पहले कभी नहीं देखा कि किसी राजनीतिक पार्टी ने इस तरह दंगे भड़काए हों।
रैली दंगों के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी




अमित शाह ने राहुल गांधी की दिल्ली रैली के समय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के बाद अब उनके बेटे राहुल गांधी ने भी उसी तारीख पर बड़ी रैली आयोजित की है।
शाह ने कहा, ये रैली दंगों के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने बताया कि बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस से अपील की थी कि वह 1, 2 और 3 नवंबर को कोई कार्यक्रम न रखे। शाह के मुताबिक, इन तारीखों पर सिख-विरोधी दंगे हुए थे और ऐसे में रैली से सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती थी।उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस अपील को नजरअंदाज किया। शाह ने यह भी दावा किया कि विदेश से आदेश मिले थे कि रैली उसी दिन आयोजित की जाए, जिस दिन हजारों सिखों को जिंदा जलाया गया था। उन्होंने कहा, गुरुओं की इस धरती से, मैं इस घिनौनी कोशिश की कड़ी निंदा करता हूं। मैं इसकी निंदा करता हूं। भारत और पंजाब इसे कभी नहीं भूल पाएंगे।
मॉक पार्लियामेंट को लेकर राहुल गांधी पर तंज
अमित शाह ने कांग्रेस के मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, मैं राहुल जी को कहना चाहता हूं, आपको प्रधानमंत्री बनना है तो पूरा जीवन मॉक पार्लियामेंट में ही बने रहिए, आपका नंबर कभी नहीं लगना है।
दिल्ली के व्यापारियों के नुकसान का मुद्दा भी उठाया
अमित शाह ने दिल्ली में विपक्ष की रैली के समय को लेकर व्यापारियों की परेशानी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दीपावली के आसपास दिल्ली के थोक बाजारों में कारोबारियों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान देशभर से लोग खरीदारी करने दिल्ली आते हैं। मिठाई, पटाखों और कपड़ों समेत कई सामानों का बड़े स्तर पर कारोबार होता है।
शाह के मुताबिक, व्यापारियों ने कांग्रेस से अपील की थी कि वह दीपावली के बाद रैली आयोजित करे। इसके लिए कारोबारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पत्र लिखकर अपनी परेशानी भी बताई थी। उन्होंने दावा किया कि त्योहारों के दौरान तीन-चार दिनों में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। ऐसे में रैली की वजह से छोटे व्यापारियों को नुकसान होने की आशंका थी। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने व्यापारियों की अपील पर ध्यान नहीं दिया और उनकी परेशानियों को नजरअंदाज किया।
अगले तीन चुनाव में भी कांग्रेस का खाता नहीं खुलेगा
अमित शाह ने दिल्ली में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पिछले तीन चुनावों से कांग्रेस का खाता नहीं खुला है। शाह ने दावा किया कि आने वाले तीन चुनावों में भी कांग्रेस को दिल्ली में सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि रैली के कारण छोटे व्यापारियों को हुए नुकसान का जवाब कांग्रेस को राजनीतिक रूप से भी देना पड़ेगा।</description><guid>13411</guid><pubDate>2026-11-02 12:09:06 12:10:05 pm</pubDate></item><item><title>आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा चक्रवाती तूफान मुरासु, 3 नवंबर को तट से टकराने की आशंका</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13410</link><description>नई दिल्ली । बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान मुरासु 3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। इस खतरे को देखते हुए तटीय इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
आंध्र प्रदेश में एक बार फिर चक्रवाती तूफान का खतरा मंडरा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को बताया कि बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य हिस्से में बना गहरा दबाव चक्रवाती तूफान 'मुरासु' में बदल गया है। इसके 3 नवंबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है। कुछ दिन पहले ही आंध्र प्रदेश में चक्रवात 'अरनब' ने भारी तबाही मचाई थी। अब नए तूफान को लेकर तटीय इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।




3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है तूफान
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि चक्रवाती तूफान 3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। उन्होंने कहा कि इस दौरान 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। हवा के तेज झोंकों की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है।
क्या है 'मुरासु' नाम का मतलब?
इस तूफान का नाम 'मुरासु' रखा गया है। तमिल भाषा में मुरासु का मतलब 'ढोल' होता है। इस नाम का सुझाव भारत ने दिया था। मौसम विभाग के मुताबिक, अभी इस तूफान के और तेज होने की थोड़ी संभावना भी है। हालांकि, फिलहाल इसके चक्रवाती तूफान बने रहने का अनुमान है।
नवंबर में कम बारिश और ज्यादा गर्मी की संभावना
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नवंबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। वहीं, इस महीने तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि अक्टूबर 2026 में देश का औसत अधिकतम तापमान 1901 के बाद से सबसे ज्यादा दर्ज किया गया।
महापात्र ने कहा, फिलहाल हमें उम्मीद है कि यह चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। इसके बनने के बाद इसका नाम मुरासु होगा। इसके गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की थोड़ी संभावना है, लेकिन फिलहाल हमारा अनुमान है कि यह चक्रवाती तूफान होगा और 3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा।</description><guid>13410</guid><pubDate>2026-11-02 12:07:15 12:08:06 pm</pubDate></item><item><title>आप अंतिम उम्मीद...राहुल ने रद्द नहीं की रैली, व्यापारी पहुंचे सोनिया गांधी के पास</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13407</link><description>नई दिल्ली । यहां के व्यापारियों ने 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली दिवाली के बाद कराने के लिए सोनिया गांधी से हस्तक्षेप की अपील की है। राहुल गांधी से कोई जवाब न मिलने पर व्यापारियों ने यह कदम उठाया। उन्हें डर है कि इस रैली से 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का त्योहारी कारोबार प्रभावित हो सकता है।
व्यापारी जानते हैं कि किसके साथ कारोबार करना है। अगर एक दरवाज़ा बंद मिलता है, तो वे दूसरा खटखटाते हैं। दिल्ली के व्यापारी समुदाय को डर है कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन की 1 नवंबर की रैली से दिवाली के कारोबार में भारी खलल पड़ सकता है। इसे देखते हुए, उन्होंने शुक्रवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपील की कि वे इस विरोध मार्च को टलवा दें। क्या इस अपील के पीछे यह सोच है कि सोनिया गांधी, कांग्रेस के नई पीढ़ी के नेताओं की तुलना में कहीं अधिक उदार और लचीली हैं, जबकि नई पीढ़ी के नेताओं को अधिक सख्त और कठोर माना जाता है? राहुल गांधी को तीन पत्र लिखने के बाद भी कोई सकारात्मक जवाब न मिलने पर, 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने अब कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से संपर्क किया है और उनसे हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। व्यापारियों की मांग है कि रामलीला मैदान में होने वाली रैली को दिवाली के बाद तक टाल दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस रैली से दिल्ली के लगभग 20 प्रमुख बाजारों में 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है।







कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन का 1 नवंबर का मार्च, कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की प्रक्रिया के खिलाफ अपने अभियान को तेज करने की एक कोशिश है। इसके साथ ही, वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। सोनिया गांधी से संपर्क करना एक दिलचस्प कदम है, क्योंकि वे धीरे-धीरे पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज से दूर हो गई हैं और अब राजनीतिक व संगठनात्मक मामलों में राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। फिर भी, दिल्ली के व्यापारियों का कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष के पास जाना शायद इसलिए है क्योंकि उन्हें लगता है कि वे एक ऐसे व्यक्ति तक पहुंच रहे हैं जो किसी बड़े राजनीतिक आयोजन के आर्थिक परिणामों पर विचार कर सकती हैं। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार रशीद किदवई ने 'इंडिया टुडे डिजिटल' को बताया कि सोनिया गांधी से संपर्क करने का फैसला काफी हद तक प्रतीकात्मक था।




किदवई ने कहा राहुल एक सक्रिय खिलाड़ी हैं, जबकि सोनिया गांधी पार्टी की एक सम्मानित बुजुर्ग नेता (मैट्रियार्क) हैं। उन्होंने संकेत दिया कि व्यापारियों के इस कदम को दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें जेपी अग्रवाल भी शामिल हैं, का समर्थन या बढ़ावा मिला हो सकता है। कांग्रेस पर कई किताबें लिख चुके किदवई ने कहा कि अग्रवाल पुरानी दिल्ली के एक सम्मानित राजनेता हैं, जिनका प्रभाव पार्टी की सीमाओं से परे भी है। किदवई ने आगे कहा कि सोनिया गांधी आमतौर पर कांग्रेस के रोजमर्रा के कामकाज या राहुल के राजनीतिक फैसलों में दखल नहीं देतीं। इसके बजाय, वह पार्टी नेताओं और अन्य लोगों को राहुल से संपर्क करने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि सोनिया गांधी ने दिल्ली के व्यापारियों से मिलने का फैसला किया है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि यह बस एक सांकेतिक कदम हो। जैसे कि मुलाकात को छोटा रखना, विरोध प्रदर्शन के घंटों को कम करना, या दिन के पहले हिस्से में ही इसे खत्म कर देना। तो, क्या राहुल गांधी के नेतृत्व वाले 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के मार्च में सोनिया गांधी किसी तरह का दखल देंगी? और उनके व्यावहारिक नेतृत्व का इतिहास क्या रहा है, जिसके चलते दिल्ली के व्यापारियों ने उनसे संपर्क किया?</description><guid>13407</guid><pubDate>2026-10-31 18:20:35 6:21:37 pm</pubDate></item><item><title>सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रामलीला मैदान में इंडिया ब्लाक रैली में शामिल होंगे अखिलेश यादव</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13406</link><description>लखनऊ । समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली में शामिल होने की घोषणा की। यह प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहा है। वहीं करीब 10 लाख लोगों के जुटने से मध्य दिल्ली के व्यापारियों ने ट्रैफिक और नुकसान की चिंता जताई।
समाजवादी पार्टी ने 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की रैली को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। पार्टी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। वे मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) का विरोध करेंगे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे। 30 अक्टूबर को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि हम सभी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाली रैली में हिस्सा लेंगे।







उन्होंने MLC चुनावों में अपनी पार्टी की हालिया जीत की भी तारीफ की और नतीजों को बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति को खारिज किए जाने के रूप में बताया। उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी यह चुनाव हार गई हैयह उन लोगों की हार है जो खुद को 'दूरदर्शी' होने का दावा करते थे। हमने शिक्षकों से जुड़े कुछ वादे किए हैं, और इन सभी को हमारे घोषणापत्र (आगामी विधानसभा चुनावों के लिए) में शामिल किया जाएगा।
दक्षिणी राज्यों सहित कई राजनीतिक दलों ने 1 नवंबर की रैली को अपना समर्थन दिया है। इसमें विभिन्न राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों और कांग्रेस नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए रांची से दिल्ली रवाना हो गए हैं। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और विधायकों ने भी अपनी भागीदारी की पुष्टि की है। विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के प्रमुख थिरुमावलवन ने अपना समर्थन देते हुए कहा कि कम से कम पांच दक्षिणी राज्यों से उनकी पार्टी के कार्यकर्ता इसमें शामिल होंगे। रामलीला मैदान में होने वाली इस रैली में कम से कम 10 लाख लोगों के जुटने की संभावना है।




हालांकि, 'चलो दिल्ली रामलीला मार्च' को लेकर व्यापारियों के बीच चिंताएं बढ़ गई हैं। 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' ने चेतावनी दी है कि त्योहारों की खरीदारी के इस अहम समय में इससे भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि लगभग 10 लाख लोगों और 15,000 से 20,000 वाहनों के आने से मध्य दिल्ली के 20 ऐतिहासिक बाजारों में ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो सकता है।</description><guid>13406</guid><pubDate>2026-10-31 18:18:18 6:19:12 pm</pubDate></item><item><title>फिर बढ़ेगा प्रदूषण, पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं हुई दोगुनी, कुल आंकड़ा 1007 पहुंचा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13405</link><description>चंडीगढ़ । पंजाब में एक ही दिन में पराली जलाने के 194 नए मामले दर्ज होने से कुल संख्या 1,007 तक पहुंच गई है। सर्वाधिक 397 मामलों के साथ तरनतारन शीर्ष पर है, जहां जांच कर रहे एक अधिकारी पर हमला भी हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं की बुवाई के चलते दिवाली के आसपास ये घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
पंजाब में इस सीजन में धान की पराली जलाने की घटनाओं में एक दिन की सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसमें पूरे राज्य से 194 घटनाओं की सूचना मिली। कुल घटनाओं की संख्या 1,000 के आंकड़े को पार करते हुए 1,007 तक पहुंच गई है। जिलों की सूची में तरनतारन सबसे ऊपर है, जहां पराली जलाने की 397 घटनाएं हुईं; इसके बाद अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 घटनाएं दर्ज की गईं। एक अलग घटना में, तरनतारन जिले के कांग गांव में फसल अवशेष प्रबंधन की देखरेख करने वाले एक क्लस्टर अधिकारी पर कथित तौर पर हमला किया गया। खेत में पराली जलाने की घटनाओं का वीडियो सबूत रिकॉर्ड करते समय उन पर हमला हुआ, जिससे वे बेहोश हो गए। साल 2025 की इसी अवधि के दौरान पंजाब में पराली जलाने की 1,216 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि इस सीजन में अब तक ऐसी 1,007 घटनाएं सामने आई हैं, जो 18 प्रतिशत की कमी को दर्शाती हैं। इससे पहले, 18 अक्टूबर को पराली जलाने की घटनाओं में एक बड़ी बढ़ोतरी देखी गई थी, जब ऐसी 123 घटनाएं रिपोर्ट की गई थीं।
1 नवंबर से गेहूं की बुवाई का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना ​​है कि खेतों में आग लगाने की घटनाओं में और बढ़ोतरी होगी, और दिवाली के आसपास ये घटनाएं अपने चरम पर पहुंच सकती हैं। नवंबर के पहले 15 दिन गेहूं की बुवाई के लिए सबसे अच्छे माने जाते हैं, जिसके चलते किसानों पर धान की कटाई के बाद अपने खेतों को साफ करने का दबाव होता है। इस बीच, खादूर साहिब ब्लॉक में तैनात मिट्टी और जल संरक्षण अधिकारी, मनिंदर सिंह पर कांग गांव में खेतों के निरीक्षण के दौरान हमला किया गया। उन्होंने खेतों में आग लगने की पांच घटनाओं की पहचान की थी और 'कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट' (CAQM) को रिपोर्ट देने के लिए जरूरी वीडियो सबूत रिकॉर्ड करना शुरू किया था। गांव के लोग और सरपंच मनिंदर सिंह को तरनतारन के गुरु नानक देव अस्पताल ले गए। अधिकारियों के अनुसार, हमलावर - जो कद में लंबा और शरीर से हट्टा-कट्टा बताया गया है - ने उन पर कई बार हमला किया, जिससे वे खेतों में ही बेहोश हो गए। डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल पहुँचने पर सिंह बेहोश थे और उन्हें इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती कराया गया।










उप-विभागीय अधिकारी संजीव शर्मा ने बताया, ड्यूटी के दौरान एक अज्ञात हमलावर ने सिंह पर हमला कर दिया। उन्होंने आगे बताया कि सिंह का इलाज तरनतारन के गुरु नानक देव अस्पताल के ICU में चल रहा है, जहाँ उनकी हालत पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर राहुल ने कहा कि आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 14 अक्टूबर को, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने एक बैठक के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए ज़मीनी स्तर पर निगरानी और प्रवर्तन (enforcement) को और मज़बूत करने पर ज़ोर दिया, ख़ासकर दोपहर 3 बजे के बाद लगाई जाने वाली आग को रोकने के लिए। उन्होंने पंजाब के संगरूर, तरनतारन, अमृतसर, पटियाला और गुरदासपुर, तथा हरियाणा के कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और फतेहाबाद ज़िलों पर विशेष ध्यान देने को कहा। काफ़ी संख्या में किसान अब पराली प्रबंधन के तरीक़ों को अपना रहे हैं। इनमें 'इन-सिटू' (in-situ) प्रबंधन शामिल है, जिसमें फ़सल के अवशेषों को मिट्टी में ही मिला दिया जाता है; और 'एक्स-सिटू' (ex-situ) प्रबंधन भी शामिल है, जिसमें इन अवशेषों को इकट्ठा करके औद्योगिक इस्तेमाल या बिजली उत्पादन के काम में लाया जाता है।
पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाना, अक्टूबर और नवंबर के दौरान पूरे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण में भारी वृद्धि के कारणों में से एक माना जाता है। धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए समय बहुत कम होता है, इसलिए किसान अक्सर फसल के अवशेषों को जल्दी साफ करने के लिए अपने खेतों में आग लगा देते हैं। हाल ही में आए पश्चिमी विक्षोभ और उसके कारण हुई बारिश ने फसल की कटाई के काम में देरी कर दी है। इससे किसानों पर अगली फसल की बुआई से पहले धान के अवशेषों (पराली) को हटाने का दबाव और बढ़ सकता है। इस बीच, पंजाब के कृषि और किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने बताया कि मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान किसानों ने 16,227 'क्रॉप रेज़िड्यू मैनेजमेंट' (CRM) मशीनें खरीदी हैं।










उन्होंने कहा कि सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए 2026-27 तक के लिए 576 करोड़ रुपये की एक कार्ययोजना तैयार की है। खुडियां ने कहा फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों को अपनाने में मदद करने के लिए, पंजाब सरकार ने राज्य भर में 10,000 से अधिक CRM मशीनें खरीदने वाले किसानों को 183 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की है।</description><guid>13405</guid><pubDate>2026-10-31 18:16:05 6:17:23 pm</pubDate></item><item><title>मद्रास हाईकोर्ट का कॉजपा नेता सौरभ दास की पृष्ठभूमि जांच याचिका पर केंद्र को नोटिस</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13404</link><description>मद्रास । मद्रास उच्च न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरभ दास की पृष्ठभूमि और उनके दस्तावेजों की जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। कांचीपुरम के एक व्यवसायी ने अदालत से दास के सोशल मीडिया खातों को बंद कराने और पासपोर्ट व आधार कार्ड की वैधता जांचने का अनुरोध किया है। मुख्य न्यायाधीश एस ए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ ने संबंधित पक्षों से छह सप्ताह में जवाब मांगा है।
एक कारोबारी ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय का रुख कर केंद्रीय गृह मंत्रालय को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के राष्ट्रीय सह-संयोजक योगेश शर्मा उर्फ सौरभ दास और उनके माता-पिता की पृष्ठभूमि एवं अन्य विवरणों की तत्काल विस्तृत, गहन और निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया। गणेश कुमार ने अपनी याचिका में कहा कि दास के पूर्वज नेपाल से कथित तौर पर जुड़े हैं और इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि यह बात सही पाई जाती है तो वह हमारी सरकार और न्यायपालिका पर उपदेश नहीं दे सकते। उन्होंने दास पर न्यायपालिका का अपमान करने का आरोप भी लगाया।
याचिकाकर्ता ने दोषी पाए जाने पर दास का पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने का अनुरोध किया। मुख्य न्यायाधीश एस ए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ ने कांचीपुरम जिले के गणेश कुमार की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी और 10 अन्य को नोटिस जारी किया। पीठ ने छह सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया।
कुमार ने अपनी याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार मंत्रालय को सौरभ दास नाम से संचालित ट्विटर और इंस्टाग्राम हैंडल को बंद करने तथा उन्हें न्यायपालिका और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ आगे कोई अपमानजनक टिप्पणी करने से रोकने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया। उन्होंने अदालत से यह अनुरोध भी किया कि मौजूदा मामले के निस्तारण तक दास को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में किसी भी माध्यम से देश की न्यायपालिका के खिलाफ मानहानिकारक, धमकाने वाली, अपमानजनक और तिरस्कारपूर्ण टिप्पणियां करने से रोका जाए। कुमार ने दावा किया कि दास लगातार न्यायपालिका को अपशब्द कह रहे हैं और यह अपने आप में संविधान का दुरुपयोग है।










उन्होंने कहा कि यदि दास के नेपाली मूल का होने संबंधी जानकारी सही है, तो योगेश शर्मा नामक इस व्यक्ति ने जानबूझकर इन सभी तथ्यों को छिपाया और धोखाधड़ी करके भारत में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और पासपोर्ट हासिल किया। कुमार ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका को अपशब्द कहने का कोई अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता ने कहा कि राष्ट्रहित में इस मामले की गहन जांच की जानी चाहिए कि उन्होंने आधार कार्ड और पासपोर्ट कैसे हासिल किए, उन्हें धन कहां से और किन लोगों से मिल रहा था तथा वह न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां क्यों कर रहे थे।


</description><guid>13404</guid><pubDate>2026-10-31 18:14:27 6:15:22 pm</pubDate></item><item><title>नरेंद्र मोदी 3 बार पीएम बने और चौथी बार भी बनेंगे,लखनऊ में बोले शाह</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13403</link><description>लखनऊ । यहां पर यूपी भाजपा कार्यसमिति की बैठक का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी चौथी बार देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर जुटने की सलाह दी और समाजवादी पार्टी पर अयोध्या गोलीकांड को लेकर निशाना साधा। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी लगातार तीन बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं और वे चौथी बार भी देश की कमान संभालेंगे। वे लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि आज देश की राजनीतिक स्थिति ऐसी है कि गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक हर ओर केवल भगवा ही दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि यदि वे अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाना चाहते हैं, तो उन्हें ज़मीनी स्तर पर उतरकर जनता के बीच काम करना होगा।









केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लखनऊ में यूपी भाजपा की कार्यकारी समिति की बैठक का उद्घाटन करने पहुंचे। पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, शाह ने उन्हें भाजपा का मालिक बताया और सम्मानपूर्वक राम-राम कहकर उनका अभिवादन किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में पार्टी की चुनावी जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं को दिया और 2017 तथा 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को याद किया। समाजवादी पार्टी पर प्रहार करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अयोध्या गोलीकांड का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में कारसेवकों पर गोलीबारी हुई थी, जिससे सरयू नदी रक्त-रंजित हो गई थी। अखिलेश यादव को घेरते हुए उन्होंने प्रश्न किया कि वे किस आधार पर प्रदेश में सत्ता में वापसी का दावा कर रहे हैं।




भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का उ़दघाटन किया। शाह ने यहां डाक्टर राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक की शुरुआत की। भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य और पूर्व प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव ने को बताया कि मुख्य अतिथि अमित शाह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यसमिति की बैठक का उद़घाटन किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष व केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की अध्यक्षता में हो रही इस कार्यसमिति की बैठक में उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक समेत कई प्रमुख नेता मौजूद हैं। शाह ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस दौरान वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे गूंज रहे थे। कार्यसमिति की बैठक में भाजपा के प्रदेश प्रभारी व भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े, भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी समेत कई प्रमुख नेता शामिल हैं। कार्यसमिति की बैठक का संचालन भाजपा के विधान परिषद सदस्य व पूर्व महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अमित शाह का स्वागत किया।
</description><guid>13403</guid><pubDate>2026-10-31 18:12:15 6:13:16 pm</pubDate></item><item><title>पीएम किसान सम्मान निधि जारी कर विपक्ष पर बरसे पीएम मोदी: संकट में फैलाई जा रही अफवाहें</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13402</link><description>गांधीनगर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा में विपक्ष पर संकट के समय अफवाहें फैलाने और किसानों को MSP पर गुमराह करने का आरोप लगाया। सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने का जिक्र करते हुए उन्होंने 19,000 करोड़ रुपये की PM-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी की। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में दो बायो-सीएनजी संयंत्रों की आधारशिला भी रखी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे ईरान में चल रहे युद्ध के बीच देश में अफवाहें फैला रहे हैं और घबराहट पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता एक राष्ट्रीय संकट का फायदा उठाकर उनकी सरकार को निशाना बना रहे हैं। अपने राजनीतिक विरोधियों पर तीखा हमला करते हुए मोदी ने कहा कि ये ऐसे लोग हैं जो देश को मुसीबत में देखना चाहते हैं। जब भी देश पर कोई संकट आता है, तो ये लोग खुश होते हैं। ईरान में चल रहे संघर्ष का हालिया उदाहरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जहाँ एक ओर देश युद्ध से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुट हो रहा था, वहीं दूसरी ओर विपक्ष गलत जानकारी फैलाने में लगा हुआ था।
मोदी ने शुक्रवार को पिछली सरकारों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के मुद्दे पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा किसानों के कल्याण और उन्हें सशक्त बनाने को प्राथमिकता दी है। गुजरात के बनासकांठा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आर्थिक सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक सेवा में बिताए अपने वर्षों को याद करते हुए सभा में कहा कि मुझे आपकी सेवा करते हुए 25 साल हो गए हैं।










पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल आया था, लेकिन किसानों के कल्याण के लिए समर्पित हमारी सरकार ने इस मूल्य वृद्धि का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया। सरकार ने इस पर 16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए। उन्होंने कहा कि खेती हमारी संस्कृति है। हमने खेती और पशुपालन को तकनीक से जोड़ा है। आज किसानों को 26 करोड़ से ज़्यादा सॉइल हेल्थ कार्ड (मृदा स्वास्थ्य कार्ड) मिल चुके हैं। पशुपालन हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है। इसमें हमारी बहनों की बहुत बड़ी भागीदारी है। पिछले एक दशक में, हमने पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में भी विज्ञान और तकनीक के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया है।
मोदी ने कहा कि 7 अक्टूबर को सार्वजनिक पद पर मेरे 25 साल पूरे हो गए। लेकिन ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो, जब मैंने अक्टूबर 2001 में पहली बार पद की शपथ ली थी; तब आपने मुझ पर बहुत प्यार बरसाया था। उन्होंने PM-किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त भी जारी की, जो 19,000 करोड़ रुपये की है। इस नई किस्त के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान - जिन्हें उन्होंने देश का 'अन्नदाता' बताया - भारत के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा किसानों के सशक्तिकरण और कल्याण को अपनी नीतियों के केंद्र में रखा है।










प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज देश के किसानों के खातों में PM-KISAN की एक और किस्त पहुँच गई है। हमारे किसान, हमारे 'अन्नदाता', हमारे देश के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक हैं। हमारी सरकार ने हमेशा अपने किसानों को सशक्त बनाने को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि आज यहां दो बायो CNG प्लांट का शिलान्यास भी हुआ है। हमारा लक्ष्य साफ है, पशु स्वस्थ हों, दूध उत्पादन बढ़े और गोबर का भी पूरा उपयोग हो। हम पशुपालन को केवल परंपरा नहीं, किसान की आमदनी बढ़ाने और गांव को समृद्ध बनाने का साधन बना रहे हैं।



</description><guid>13402</guid><pubDate>2026-10-31 18:08:22 6:10:46 pm</pubDate></item><item><title>इजरायल चुनाव में किसी गुट को बहुमत नहीं, नेतन्याहू के गठबंधन को 53 और विपक्ष को 48 सीटें</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13398</link><description>यरूशलेम/नई दिल्ली । इजरायल के 2026 के आम चुनाव में किसी भी राजनीतिक गुट को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिला है। सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) की ओर से शुक्रवार सुबह जारी अंतिम नतीजों के अनुसार, 26वीं नेसेट (संसद) में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गुट को 53 सीटें, जबकि गादी आइसेनकोट की यशार पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें मिली हैं। अरब पार्टियों के खाते में कुल 19 सीटें गई हैं।

इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में किसी भी गुट के बहुमत तक नहीं पहुंचने से नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक बातचीत चुनौतीपूर्ण हो सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार गठन की प्रक्रिया में दो महीने से अधिक का समय भी लग सकता है।

कई दशकों में सबसे अधिक मतदान
इस चुनाव में कुल 77.9 प्रतिशत पात्र मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 57,16,665 वोट डाले गए। यह मतदान पिछले कई दशकों में दर्ज सबसे ऊंचे आंकड़ों में शामिल है।

ये चुनाव 27 अक्टूबर को हुए थे। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल में यह पहला आम चुनाव था। 2022 के चुनावों के बाद देश के राजनीतिक परिदृश्य और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में कई बदलाव देखने को मिले हैं।

हर्जोग ने एक और चुनाव से बचने की अपील की
इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील की है कि वे सरकार गठन के लिए बातचीत में खुले मन से शामिल हों और देश को एक और चुनाव की स्थिति में जाने से रोकने का प्रयास करें।

हर्जोग ने कहा, खासकर कल के नतीजों के बाद, हमें एक और चुनाव से बचने के लिए हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए। इसलिए, मेरी उम्मीद है कि जो भी यहां आए, वह खुले मन के साथ आए।













नेतन्याहू और आइसेनकोट ने सरकार बनाने का जताया भरोसा
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी गुट के नेता गादी आइसेनकोट, दोनों ने अगली सरकार बनाने का दावा किया है।






चुनाव से पहले यरूशलेम स्थित लिकुड पार्टी के मुख्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने की बात कही थी। उन्होंने उन राजनीतिक दलों की आलोचना भी की थी, जो अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। नेतन्याहू ने ऐसी व्यवस्था को 'शर्मनाक' बताया था।

सरकार गठन के लिए अब गठबंधन की बातचीत अहम
अंतिम नतीजों के बाद अब राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण हो गई है। 61 सीटों के बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों प्रमुख गुटों को अन्य दलों का समर्थन हासिल करना होगा। अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं, ऐसे में सरकार गठन की बातचीत में उनकी भूमिका भी चर्चा के केंद्र में रह सकती है।

इजरायल के चुनावी नतीजों ने 26वीं नेसेट की तस्वीर तो साफ कर दी है, लेकिन अगली सरकार का स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के बीच होने वाली बातचीत से ही सरकार गठन की दिशा स्पष्ट होगी।</description><guid>13398</guid><pubDate>2026-10-30 15:47:31 3:48:52 pm</pubDate></item><item><title>बारिश ने रोका कांग्रेस का सार्वजनिक महाभियोग, कल फिर होगा आयोजन</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13397</link><description>नई दिल्ली । मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'सार्वजनिक महाभियोग' का कार्यक्रम ख़राब मौसम को देखते हुए टाल दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि अब यह 'सार्वजनिक महाभियोग' 31 अक्तूबर को होने की संभावना है। यह तारीख विपक्षी गठबंधन की रामलीला मैदान में होने वाली रैली से एक दिन पहले की है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के खिलाफ आयोजित की जा रही है।

बता दें कि विपक्षी गठबंधन को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब और तालकटोरा स्टेडियम जैसी अन्य जगहें नहीं मिल पाईं, जिसके बाद इस जगह (खरगे के आवास) को चुना गया था। गुरुवार को हुई इस तैयारी बैठक में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और के.सी. वेणुगोपाल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मीरा कुमार, टीएमसी के डेरेक ओ'ब्रायन, समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक, जेएमएम की महुआ माजी और सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास समेत कई अन्य नेता शामिल हुए थे।











कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि बारिश के कारण आज होने वाला मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। अब यह कार्यक्रम शनिवार को इसी समय आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली और मार्च होगा, जिसमें राजनीतिक दलों के अलावा आम नागरिक, कारोबारी, नौकरीपेशा लोग, छात्र, पत्रकार और सिविल सोसायटी से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं। राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बारिश के कारण आयोजकों ने आज का कार्यक्रम कल तक के लिए टालने का सर्वसम्मति से फैसला किया है। उनका कहना था कि बारिश में वरिष्ठ नागरिकों को बैठने में असुविधा हो सकती थी। इसलिए कार्यक्रम अब शनिवार को उसी समय आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाले मार्च में पूरा विपक्ष शामिल होगा। यह किसी एक राजनीतिक दल का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसमें हर वह व्यक्ति शामिल हो सकता है जो विरोध करना चाहता है। राहुल गांधी ने कहा कि राजनीतिक और गैर-राजनीतिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सिविल सोसायटी, पत्रकारों और आम लोगों का इस कार्यक्रम में स्वागत है।











राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दोनों कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा उनकी टीम के जरिए भारतीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाए जाने के मुद्दे पर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री की ओर से लोगों को दिल्ली आने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना और पंजाब से आने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम लोगों को रोके जाने का प्रयास किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने कहा, ''आप रामलीला मैदान में देखिएगा कि कितने लोग आते हैं और कितने लोगों को वे रोक पाते हैं। इससे आपको समझ में आ जाएगा कि देश में क्या हो रहा है। लोगों में भारी गुस्सा और भावनात्मक पीड़ा है, क्योंकि लाखों लोगों को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। उनका वोट छीना जा रहा है।''












राहुल गांधी ने कहा कि यह कई अलग-अलग प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि एक ही विरोध प्रदर्शन है और पूरा विपक्ष एक साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि संविधान, भारत की अवधारणा और नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए सभी विपक्षी दल एकजुट हैं। उनके मुताबिक, वोट प्रत्येक भारतीय की आवाज और उसकी भागीदारी की अभिव्यक्ति है।




इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी विपक्षी एकजुटता की बात कही। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में सभी लोग साथ हैं। सिविल सोसायटी, छात्रों, युवाओं, मजदूरों और गृहिणियों सहित हर वर्ग के लोगों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, ''हम सब इस लड़ाई में साथ हैं और इसे मिलकर जीतेंगे।''
</description><guid>13397</guid><pubDate>2026-10-30 15:44:21 3:45:57 pm</pubDate></item><item><title>जोशीमठ के पास हेलीकॉप्टर क्रैश, 6 यात्री थे सवार...</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13396</link><description>देहरादून । बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्रधारा लौट रहा एक हेलीकॉप्टर क्रैश होने की सूचना है। बताया जा रहा है कि हेलीकॉप्टर में छह यात्री सवार थे। हादसे की जानकारी मिलने के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) और पुलिस की टीमें सक्रिय हो गई हैं। हेलीकॉप्टर और उसमें सवार लोगों की स्थिति का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

हादसे के बाद से पायलट से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अब तक उससे संपर्क नहीं हो पाया है। ऐसे में हेलीकॉप्टर की लोकेशन का पता लगाने के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है। खराब मौसम के बीच खोजबीन का काम शुरू किया गया है। हेलीकॉप्टर की तलाश के लिए टीमें जुटी हुई हैं।




बदरीनाथ से वापसी के दौरान हुए इस हादसे की सूचना से अफरा-तफरी का माहौल है। यूकाडा के अधिकारियों के अनुसार, बदरीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा जा रहे ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टर की लोकेशन छई गांव के ऊपर स्थित सेना कैंप के पास दिखाई दे रही है। जोशीमठ चौकी के उपनिरीक्षक मनोहर कन्याल ने बताया कि हेलीकॉप्टर में पांच यात्री और एक पायलट सवार हैं। हालांकि, अभी तक हेलीकॉप्टर के क्रैश होने या क्रैश लैंडिंग की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

सीएम धामी ने किया ट्वीट
हादसे को लेकर सीएम धामी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी की है। जिसमें उन्होंने कहा कि जोशीमठ के नजदीक छई गांव के पास हेलीकॉप्टर क्रैश होने की दुर्भाग्यपूर्ण सूचना मिली है। जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ की ओर से संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है। गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार के लिए तत्काल हायर सेंटर एयरलिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। हेलीकॉप्टर में सवार यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं।</description><guid>13396</guid><pubDate>2026-10-30 15:41:32 3:42:14 pm</pubDate></item><item><title>प्रधानमंत्री मोदी दिसंबर में करेंगे बेल्जियम का दौरा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13395</link><description>नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स का दौरा करेंगे, जहां भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह जानकारी यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने दी है। भारत और ईयू के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होने से यह लागू होने के करीब आएगा। इस समझौते से भारत और 27 सदस्यों वाले समूह के बीच आर्थिक रिश्ते और गहरे होंगे।

कनाडा में मॉन्ट्रियल काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एक समारोह में कोस्टा ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी दिसंबर में समझौते पर हस्ताक्षर करने आएंगे। मोदी का दौरा 17 दिसंबर को ब्रुसेल्स में होने वाली यूरोपीय नेताओं की बैठक से ठीक पहले हो सकता है। भारत-ईयू ने साल की शुरुआत में इस समझौते पर बातचीत पूरी की थी।









इस समझौते से 2 अरब से अधिक लोगों का बाजार एक साथ आने का अनुमान है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक चौथाई हिस्सा है। भारत और ईयू के बीच होने वाले इस समझौते का उद्देश्य व्यापार में रुकावटों को कम करना और दोनों तरफ के कारोबार के लिए बाजार की उपलब्धता को बेहतर बनाना है। समझौते से भारत को अपने 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात के लिए यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी, जिससे टेक्सटाइल, लेदर, आभूषण, रत्न जैसे सेक्टर को फायदा होगा। बदले में, ईयू को भारत भेजे जाने वाले सामान के एक बड़े हिस्से पर टैरिफ में कमी या छूट मिलेगी।









समझौते के तहत ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स जैसे सेंसिटिव सेक्टर पर टैरिफ में कटौती धीरे-धीरे की जाएगी। भारत ने घरेलू खेती और डेयरी उद्योग को समझौते से अलग रखा है। यह समझौता इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, प्रोफेशनल सर्विसेज़, बिजनेस कंसल्टिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसी सर्विसेज़ पर भी लागू होती है।




हाल के सालों में भारत और ईयू के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। 2024-25 में सामान का व्यापार 136.54 अरब डॉलर (13 लाख करोड़ से अधिक) तक पहुंच गया है।</description><guid>13395</guid><pubDate>2026-10-30 15:39:16 3:40:32 pm</pubDate></item><item><title>डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंकों को दी हिदायत</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13394</link><description>नई दिल्ली । देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि वह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा प्रस्तावित एंटी-साइबर फ्रॉड नियमों को नोटिफाई करने की अनुमति देने से पहले उनकी समीक्षा करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन नियमों में यह प्रावधान अनिवार्य रूप से होना चाहिए कि यदि किसी वित्तीय संस्थान की लापरवाही के कारण धोखाधड़ी होती है तो संस्थान पीड़ित को हुए नुकसान की पूरी भरपाई करे।
कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में बैंकों की निष्क्रियता और कर्मचारियों की भूमिका के कारण ठग आसानी से लोगों के खातों से पैसा निकाल ले जाते हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में बैंकों की जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिसमें पीड़ित के खाते से निकाली गई रकम की भरपाई सीधे बैंक करे, ताकि आम नागरिक को दर-दर भटकना न पड़े। कोर्ट ने कहा कि आरबीआई के प्रस्तावित नियमों में यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि अगर वित्तीय संस्थान द्वारा जरूरी जांच-पड़ताल और केवाईसी जैसी प्रक्रियाओं में लापरवाही बरती गई है, जिसके कारण डिजिटल अरेस्ट या साइबर ठगी हुई है, तो वह वित्तीय संस्थान पीड़ित को कम से कम ठगी गई पूरी रकम का मुआवजा दे।
अदालत की सख्ती को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल ने भरोसा दिलाया कि डिजिटल अरेस्ट से ठगी के मामले में जिस भी कर्मचारी की लापरवाही सामने आएगी, उसकी व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी और उस पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सरकार और आरबीआई मिलकर एक मजबूत फ्रेमवर्क बना रहे हैं।




सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम पहलू पर ध्यान दिलाया। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट की लगभग सभी घटनाओं में व्हाट्सएप के दुरुपयोग की बात सामने आई है। ठग व्हाट्सएप कॉल और वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई या ईडी का अफसर बताकर लोगों को डराते हैं और उन्हें डिजिटल रूप से गिरफ्तार करने का दावा करते हैं।</description><guid>13394</guid><pubDate>2026-10-30 15:34:33 3:35:22 pm</pubDate></item><item><title>उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त किए भर्ती नियम, हिंसक व्यवस्था परिवर्तन वाले नहीं पाएंगे सरकारी नौकरी</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13393</link><description>लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन नियमों में कड़ा संशोधन किया है। प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार हत्या, प्रश्नपत्र लीक और हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों को अपात्र घोषित किया जाएगा। वहीं केवल प्राथमिकी या जांच लंबित होने पर उम्मीदवारी स्वतः रद्द नहीं होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र और पिछले रिकॉर्ड के सत्यापन संबंधी नियम सख्त कर दिए हैं जिसके तहत हिंसक तरीके से समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलने का उद्देश्य रखने वाले संगठनों के सदस्यों को राज्य की सरकारी नौकरियों में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। उप्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के तहत हत्या, बलात्कार, आतंकवादी गतिविधियों, भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक करने और संगठित सॉल्वर गिरोह चलाने जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य ठहराने का प्रावधान किया गया है। प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम. देवराज ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में 28 अक्टूबर को इस संबंध में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए।
ये नियम राज्य सरकार के विभागों के अलावा उसके अधीन निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों और शहरी तथा ग्रामीण स्थानीय निकायों पर भी लागू होंगे। आदेश के मुताबिक, हिंसक तरीकों से स्थापित व्यवस्था को बदलने के उद्देश्य से काम करने वाले संगठनों के सदस्य पाए जाने पर अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी के अयोग्य माना जाएगा। हालांकि, किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा का समर्थक होना अपने आप में अयोग्यता का आधार नहीं होगा।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक आदेश के तहत नए नियमों में अपराधों की विभिन्न श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इनमें राज्य के विरुद्ध अपराध, हत्या, हत्या का प्रयास, दहेज हत्या, यौन अपराध, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, अपहरण, मानव तस्करी, लूट, डकैती, संगठित अपराध, आतंकवादी गतिविधियों और भीड़ द्वारा हिंसा जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। आदेश के अनुसार परीक्षा एवं चयन प्रक्रिया में अनुचित साधनों, फर्जी प्रमाणपत्रों, प्रश्नपत्र लीक और सॉल्वर गिरोह से जुड़े मामलों को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है।










आदेश के तहत सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धनशोधन निवारण अधिनियम, एनडीपीएस अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों की रोकथाम से संबंधित कानूनों के तहत आने वाले निर्धारित अपराधों को भी अयोग्यता के दायरे में रखा गया है। आदेश के अनुसार कुछ गंभीर अपराधों में आरोप तय होना ही अयोग्यता का आधार होगा, जबकि अन्य मामलों में दोषसिद्धि आवश्यक होगी। इस प्रकार, अयोग्यता का निर्धारण संबंधित अपराध और उसके लिए तय श्रेणी के मुताबिक किया जाएगा।










दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल प्राथमिकी दर्ज होने या पुलिस जांच लंबित रहने से किसी अभ्यर्थी को स्वत: अयोग्य नहीं माना जाएगा और इसी तरह, बरी हो चुके अभ्यर्थियों, कानूनी रूप से समझौता किए गए मामलों और किशोर न्याय अधिनियम के दायरे में आने वाले मामलों में भी स्वत: अयोग्यता लागू नहीं होगी। आदेश में सरकार ने यह भी कहा है कि 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद चरित्र सत्यापन की तारीख से पिछले तीन वर्षों के दौरान हिंसक गतिविधियों में शामिल रहने वाले अभ्यर्थी के मामले में उसकी सक्रिय संलिप्तता की आशंका पर विचार किया जा सकता है, हालांकि, उसके आचरण और सोच में वास्तविक सकारात्मक बदलाव के दस्तावेजी प्रमाणों पर भी विचार किया जाएगा। आदेश के मुताबिक नए प्रावधानों के तहत चरित्र सत्यापन लंबित होने के कारण सामान्य परिस्थितियों में नियुक्ति पत्र रोकना जरूरी नहीं होगा और नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थी से निर्धारित सत्यापन प्रपत्र और स्वघोषणा पत्र लेकर औपबंधिक (अस्थायी) नियुक्ति दे सकेंगे और बाद में जानकारी गलत पाए जाने या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने पर नियुक्ति रद्द करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकेगी।
आदेश के मुताबिक जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई को सत्यापन संबंधी अनुरोध मिलने के 30 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी होगी और गृह विभाग इस समयसीमा के पालन की निगरानी करेगा। सामान्य सत्यापन के दौरान अभ्यर्थी को पूछताछ के लिए घर बुलाने, थाने में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने या अतिरिक्त दस्तावेज देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। आदेश के अनुसार अगर पुलिस या स्थानीय अभिसूचना इकाई की रिपोर्ट प्रतिकूल होती है, तो जिलाधिकारी को अंतिम सिफारिश भेजने से पहले अभ्यर्थी को व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा।










आदेश के मुताबिक संवेदनशील पदों या सुरक्षा की दृष्टि से विशेष जांच जरूरी होने वाले मामलों में औपबंधिक नियुक्ति नहीं दी जाएगी और ऐसे मामलों में विस्तृत सत्यापन के बाद ही नियुक्ति की जा सकेगी और इसके लिए संबंधित विभाग को कारणों सहित मुख्यमंत्री का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा, हालांकि जरूरत पड़ने पर उनके पूर्व विभागों से सेवा संबंधी अभिलेख मंगाए जा सकेंगे।</description><guid>13393</guid><pubDate>2026-10-30 15:30:26 3:32:11 pm</pubDate></item><item><title>पीेएम मोदी गुजरात में 14 हजार करोड़ की योजनाओं की देंगे सौगात, किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त भी होगी जारी</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13392</link><description>नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार से गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे बनासकांठा और एकता नगर में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। साथ ही किसानों के लिए 19,000 करोड़ रुपये की सम्मान निधि जारी की जाएगी और दो नई रेल सेवाओं को हरी झंडी दिखाई जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वह 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण करेंगे। प्रधानमंत्री अपने गुजरात प्रवास के दौरान ही पीएम-किसान योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपये की 24वीं किस्त जारी करेंगे और दो ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाएंगे।
प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध एकता नगर का दौरा भी करेंगे, जहां वह सांस्कृतिक और पर्यटन महोत्सव भारत पर्व 2026 का उद्घाटन करेंगे और नर्मदा आरती में शामिल होंगे। मोदी शुक्रवार को गुजरात पहुंचने के बाद सबसे पहले बनासकांठा में एम्ब्रियो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी-इन विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रयोगशाला और भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री बनासकांठा में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे।










साथ ही वह पीएम-किसान योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपये की 24वीं किस्त जारी करेंगे और दो ट्रेन सेवाओं की शुरुआत करेंगे। मोदी का बनासकांठा में एक जनसभा को भी संबोधित करने का कार्यक्रम है। मोदी 31 अक्टूबर को एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और 400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे।










प्रधानमंत्री इसके बाद एकता नगर में वर्षा वन और वामन वृक्ष वाटिका का दौरा करेंगे और सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में शामिल होंगे। मोदी अपने गुजरात प्रवास के दौरान अहमदाबाद मेट्रो के चरण 2ए और चरण 2बी की आधारशिला रखेंगे। अमहदाबाद मेट्रो के चरण 2ए की लंबाई छह किलोमीटर से अधिक होगी, जिसमें कोटेश्वर रोड से हवाई अड्डे के बीच पांच स्टेशन होंगे, जबकि चरण 2बी की लंबाई 3.3 किलोमीटर से अधिक होगी, जिसमें गिफ्ट सिटी से शाहपुर तक के तीन स्टेशन शामिल होंगे।
वह लगभग 2,600 करोड़ रुपये की लागत से अहमदाबाद-मेहसाणा रोड (राज्य राजमार्ग संख्या-41) को चार लेन से आठ लेन में परिवर्तित करने और सुदृढ़ करने की परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना से अहमदाबाद और उत्तरी गुजरात के बीच यात्रा तेज, सुरक्षित और अधिक आरामदायक होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री गुजरात प्रवास के दौरान 4,030 नए बाल-अनुकूल आंगनवाड़ी केंद्रों की आधारशिला रखेंगे और गुजरात में 361 पूर्ण बाल-अनुकूल आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्घाटन करेंगे।










इस परियोजना पर 800 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और करीब चार लाख लोगों को लाभ होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी कृषि अवसंरचना कोष के तहत पूरी की गई 521 परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिसपर लगभग 4,950 करोड़ रुपये की लागत आई है। इन परियोजनाओं में कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं और कोल्ड स्टोरेज शृंखला,गोदाम, साइलो, पॉलीहाउस एवं ग्रीनहाउस, एकीकृत प्राथमिक एवं माध्यमिक प्रसंस्करण सुविधाएं और प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र शामिल हैं।










प्रधानमंत्री 30 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में एकता नगर में भारत पर्व 2026 का उद्घाटन करेंगे। भारत की सांस्कृतिक विरासत तथा राष्ट्रीय एकता के उत्सव के रूप में परिकल्पित और एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना के प्रतीक के रूप में यह महोत्सव राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी विशिष्ट परंपराओं, लोक प्रदर्शनों, क्षेत्रीय व्यंजनों, हस्तशिल्प और पर्यटक आकर्षणों को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। इस महोत्सव से एकता नगर और आसपास की जगहों पर पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


</description><guid>13392</guid><pubDate>2026-10-30 15:27:30 3:28:44 pm</pubDate></item><item><title>बच्चियों से शादी करने वालों को चुन चुनकर पकड़वा रहे हिमंत बिस्व सरमा, अब तक सैंकड़ों गिरफ्तार</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13391</link><description>गुवाहाटी । असम में बाल विवाह के खिलाफ सरकार की कार्रवाई अब व्यापक पुलिस अभियान का रूप ले चुकी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में अब तक 565 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 481 मामले दर्ज किए गए हैं।
असम में बाल विवाह के खिलाफ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि नाबालिग बच्चियों का विवाह कराने, उसमें सहयोग देने और उनकी जिंदगी के फैसले उनके बचपन में ही तय कर देने वालों को अब कानून का सामना करना पड़ेगा। राज्यव्यापी अभियान के तहत 565 लोगों की गिरफ्तारी और 481 मामले दर्ज होना इस कार्रवाई का बड़ा संकेत है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि जब तक असम से बाल विवाह की प्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं होती, तब तक यह अभियान जारी रहेगा। हम आपको बता दें कि राज्य सरकार की इस कार्रवाई का केंद्र केवल बाल विवाह करने वाले पुरुष ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी बनाया जा रहा है जो परिवार, रिश्तेदार या अन्य सहयोगी की भूमिका में इस गैरकानूनी प्रथा को अंजाम देने में मदद करते हैं।











बाल विवाह के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई, 565 गिरफ्तारियां और 481 मामले
असम में बाल विवाह के खिलाफ सरकार की कार्रवाई अब व्यापक पुलिस अभियान का रूप ले चुकी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में अब तक 565 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 481 मामले दर्ज किए गए हैं। इससे पहले मंगलवार शाम पांच बजे तक 524 गिरफ्तारियों और 441 मामलों की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद भी कार्रवाई जारी रही और गिरफ्तारियों का आंकड़ा बढ़कर 565 तक पहुंच गया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अभी कुछ और आरोपियों की गिरफ्तारी बाकी है। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल कुछ लोगों को गिरफ्तार करके अभियान की औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि बाल विवाह की प्रथा को जड़ से समाप्त करना है। उन्होंने बेटियों के भविष्य को लेकर कहा कि किसी को भी उनकी आकांक्षाओं और सपनों को बेड़ियों में जकड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। देखा जाये तो यह संदेश उन लोगों के लिए स्पष्ट चेतावनी है जो नाबालिग बच्चियों की उम्र, शिक्षा, स्वतंत्रता और भविष्य की अनदेखी करते हुए कम उम्र में विवाह को सामाजिक परंपरा का नाम देकर आगे बढ़ाते हैं।












श्रीभूमि में पुलिस का बड़ा एक्शन, 28 मामले दर्ज और 32 गिरफ्तार
हम आपको बता दें कि बाल विवाह के खिलाफ अभियान के तहत श्रीभूमि जिले में पुलिस ने 26 अक्टूबर की रात विशेष अभियान चलाकर 28 मामले दर्ज किए और 32 लोगों को गिरफ्तार किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रणब ज्योति कलिता के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों में 28 ऐसे आरोपी शामिल हैं जिन पर बाल विवाह में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप है, जबकि चार अन्य पर विवाह कराने या उसमें सहायता देने का आरोप है। सभी आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने अलग-अलग मामलों की जरूरत के अनुसार आरोपियों की हिरासत भी मांगी। कुछ मामलों में पुलिस रिमांड की अनुमति दी गई, जबकि अन्य मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह कार्रवाई इस बात को रेखांकित करती है कि प्रशासन अब केवल बाल विवाह कराने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उस पूरे तंत्र की जवाबदेही तय करने की दिशा में काम कर रहा है जो ऐसी शादियों को संभव बनाता है। साथ ही असम के धुबरी जिले में अभियान के दौरान सबसे अधिक गिरफ्तारियां दर्ज की गईं। जिले के नौ थाना क्षेत्रों से 63 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें बाल विवाह में कथित रूप से शामिल लोग और ऐसे मामलों में भूमिका निभाने वाले माता-पिता तथा अभिभावक भी शामिल हैं।












पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, धुबरी सदर थाना क्षेत्र से 18, गौरिपुर से आठ, गोलकगंज से 15, अगोमोनी से एक, तमरहाट से दो, बिलासीपाड़ा से नौ, चापर से पांच और फकीरगंज से पांच लोगों को हिरासत में लिया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अभियान का दायरा अलग-अलग इलाकों तक फैला हुआ है। प्रशासन का जोर उन लोगों की पहचान करने पर भी है जो नाबालिग बच्चियों के विवाह की व्यवस्था करने या उसे सामाजिक और पारिवारिक सहमति दिलाने में भूमिका निभाते हैं।












नगांव में 43 गिरफ्तार, नाबालिग लड़कियों से शादी करने के आरोपियों पर कार्रवाई
इसके अलावा, नगांव जिले में भी पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए 43 लोगों को गिरफ्तार किया और 36 मामले दर्ज किए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में 22 ऐसे पति शामिल हैं जिन पर नाबालिग लड़कियों से विवाह करने का आरोप है। बाकी 21 लोगों पर कथित तौर पर इन विवाहों में मदद करने का आरोप है। इनमें परिवार के वे सदस्य भी शामिल हैं जिन्होंने विवाह कराने में सहयोग किया। जिले में ढिंग थाना क्षेत्र से आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें चार पति और चार कथित सहयोगी शामिल हैं। नगांव थाना क्षेत्र से सात गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें छह पति और एक कथित सहयोगी बताया गया है।
हम आपको बता दें कि अधिकांश मामलों में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पीड़ित बच्चियों की काउंसलिंग कराई गई है और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार उनकी चिकित्सकीय जांच भी की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई गई है।












हिमंत बिस्व सरमा की पुरानी मुहिम और मुस्लिम समुदाय में बाल विवाह का सवाल
हम आपको याद दिला दें कि हिमंत बिस्व सरमा सरकार ने इससे पहले भी असम में बाल विवाह के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया था। उस दौरान बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई थीं और बाल विवाह के मामलों में कथित रूप से शामिल पतियों, परिवार के सदस्यों तथा अन्य सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। राज्य में मुस्लिम आबादी वाले कई इलाकों से ऐसे मामले सामने आए थे, जहां नाबालिग लड़कियों से विवाह करने के आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की।
इस पृष्ठभूमि में मौजूदा अभियान को सरकार की उसी नीति की निरंतरता के तौर पर देखा जा सकता है, जिसमें बाल विवाह को सामाजिक परंपरा या पारिवारिक सहमति की आड़ में स्वीकार करने से इंकार किया गया है। खासकर उन मामलों में, जहां कम उम्र की बच्चियों से विवाह करने के आरोप सामने आए, पुलिस कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि किसी भी समुदाय में होने के बावजूद नाबालिगों के अधिकारों का उल्लंघन कानूनी कार्रवाई का विषय है।

















</description><guid>13391</guid><pubDate>2026-10-30 15:23:25 3:26:02 pm</pubDate></item><item><title>वोट चोरी नहीं जनता का फैसला है,कांग्रेस के खराब शासन पर बोले बीजेपी नेता राजीव चंद्रशेखर</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13390</link><description>तिरुअनंतपुरम । केरल भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि कांग्रेस की लगातार चुनावी हार की वजह वोट चोरी नहीं, बल्कि उसका भ्रष्टाचार और खराब शासन रिकॉर्ड है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी वादे निभाने में विफल रही और सिर्फ अपने परिवार के हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि जनता प्रधानमंत्री मोदी के विकास कार्यों का समर्थन करती रहेगी।
केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने गुरुवार को विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की चुनावी हार का कारण 'वोट चोरी' के उनके दावे नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और उनका शासन रिकॉर्ड है। ANI से बात करते हुए, चंद्रशेखर ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कई राष्ट्रीय और विधानसभा चुनाव हार चुकी है, हालांकि हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल जैसे कुछ राज्यों में इसके अपवाद रहे हैं। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि इससे किसी को हैरानी हुई है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल के कुछ चुनावों को छोड़कर, हर चुनाव हारी है। वे हर राष्ट्रीय चुनाव और हर विधानसभा चुनाव हारे हैं - 2014, 2019, 2024। और यह सिलसिला दशकों तक जारी रहेगा, जिसकी वजह एक सीधा-सा सच है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए कांग्रेस अपने वादों को पूरा करने में विफल रही। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर 2004-2014 के अपने कार्यकाल के दौरान अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और लोगों का शोषण करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इस देश और कई राज्यों की जनता ने कांग्रेस पार्टी को शासन करने और अपने जीवन में बदलाव लाने का मौका दिया था। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने क्या किया? 2004 से 2014 का ही उदाहरण ले लीजिए। कांग्रेस पार्टी जहां भी जाती है, वहां अर्थव्यवस्था को बर्बाद करती है, भ्रष्टाचार फैलाती है और लोगों का शोषण करती है। फिर वे वापस आते हैं और झूठ बोलकर वोट मांगते हैं। जनता यह बात जानती है। यह 'वोट चोरी' का मुद्दा नहीं है, बल्कि जनता का यह फैसला है कि अब 'चोरों' को वोट नहीं देना है। और हर चुनाव में यही देखने को मिल रहा है। भाजपा नेता ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी आरोप लगाया कि वे चुनावी धांधली के आरोप लगाकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करके अपनी हताशा जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने कहा, राहुल गांधी और खड़गे की हताशा उनके झूठ, उनकी धोखाधड़ी वाली राजनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों और अपशब्दों में साफ झलकती है। चंद्रशेखर ने जोर देकर कहा कि लोग मोदी का समर्थन करना जारी रखेंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री लोगों के जीवन और देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के काम करने के तरीकों की तुलना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जनहित के बजाय अपने परिवार के सदस्यों के हितों को प्राथमिकता दी है।










इसे भी पढ़ें: Kochi Car Accident केस में चार पुलिसकर्मी सस्पेंड, Commissioner बदलने के बाद जज को राहत
उन्होंने कहा भारत का भविष्य 'विकसित भारत' है। भारत की जनता नरेंद्र मोदी जी का समर्थन करती रहेगी, क्योंकि वे हाल के इतिहास के इकलौते ऐसे नेता हैं जो लोगों के जीवन और देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। वे सिर्फ अपने दामाद, साले, बहू या पोते-पोतियों को फायदा पहुंचाने का काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस चुनाव हारती रहेगी क्योंकि वह अपनी हार के असली कारणों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, इसीलिए वे चुनाव हारेंगे, लेकिन चूंकि वे इस सच्चाई का सामना नहीं कर सकते, इसलिए वे लगातार धोखाधड़ी और झूठ की कहानियां गढ़ते रहेंगे। इस बीच, बुधवार को प्रधानमंत्री... नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में हुए MLC चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया दी। एक्स पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा कि 4 बड़े राज्यों - उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में 28 सीटों पर MLC चुनाव हुए। ये चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए गए थे। अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?


</description><guid>13390</guid><pubDate>2026-10-30 15:19:49 3:20:59 pm</pubDate></item><item><title>इजरायल में एक दल ने लगाया चुनाव चोरी का आरोप, पुलिस ने किया खारिज</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13389</link><description>तेल अवीव/नई दिल्ली। इजरायल पुलिस ने गुरुवार को लिकुड दल के अरब पार्टियों पर लगाए 'चुनाव चोरी' के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी ने धांधली का आरोप लगाते हुए पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग उठाई थी। एक बयान जारी कर पुलिस ने अपनी बात रखी। कहा, मतदान के दिन चुनावी निष्पक्षता से जुड़ी कुछ असामान्य घटनाएं हुईं, लेकिन पिछली बार के चुनावों की तुलना में इनकी संख्या काफी कम थी। इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि इन दावों के समर्थन में कोई जांच संबंधी या खुफिया सबूत नहीं हैं। बुधवार को, सेंट्रल इलेक्शन कमिटी (सीईसी) के एक अधिकारी ने भी धोखाधड़ी के इन दावों को खारिज कर दिया था।

अभी वोटों की गिनती चल रही है, लेकिन मंगलवार को हुए चुनाव में अरब पार्टियों ने 19 सीटें जीत ली हैं। इस चुनाव में अरब समुदाय की ओर से रिकॉर्ड मतदान देखने को मिला।

गुरुवार सुबह तक आधिकारिक मतगणना 91% तक पहुंच गई थी। इसमें केवल 'डबल-लिफाफे' वाले मतपत्र शामिल नहीं थे, जिनकी गिनती पूरी रात चलने वाली थी।

केंद्रीय चुनाव समिति ने बुधवार शाम को बताया था कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गुट अपनी बढ़त बनाए हुए है और अगली नेसेट (संसद) में उसे 53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि विपक्षी गुट को 48 सीटें मिलने की संभावना है।

बुधवार को ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आरोप लगाया था कि इजरायली चुनाव को अरब पार्टियों ने चुरा लिया। कड़े मुकाबले वाले इस चुनाव के बाद, न तो उनके राजनीतिक गुट को और न ही मुख्य विपक्षी दल को संसद में बहुमत हासिल करने के लिए पर्याप्त सीटें मिल पाई।

नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने एक बयान जारी कर चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने अरब-पार्टियों पर इजरायल को कमजोर करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।

लिकुड पार्टी ने कहा, इजरायल के चुनावों को अरब पार्टियों ने हथिया लिया है। ये पार्टियां आतंकवाद का समर्थन करती हैं और यहूदी राज्य को खत्म करना चाहती हैं। इन्होंने रिश्वतखोरी, धमकियों, हिंसा, धोखाधड़ी जैसे गंभीर आपराधिक कृत्य किए हैं और मतदाताओं को जुटाने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है।

</description><guid>13389</guid><pubDate>2026-10-29 16:37:30 4:41:54 pm</pubDate></item><item><title>साथ आए भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया, राजनाथ सिंह ने इस मेल का कहा जय</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13388</link><description>नई दिल्ली । फिलीपींस के सेबू में 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस के दौरान भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्रियों की मुलाकात हुई। इस मुलाकात ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तीनों देशों के बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मेल को जय (जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडिया) के रूप में पेश किया।

यहां हुई विभिन्न बैठकों में क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। गौरतलब है कि फिलीपींस सेबू में आयोजित 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। गुरुवार को बैठक का अंतिम दिन है। भारत ने यहां विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया, जापान और फिलीपींस के रक्षा नेतृत्व के साथ अलग-अलग बैठकें कर रक्षा सहयोग की समीक्षा की और भविष्य में साझेदारी बढ़ाने के रास्तों पर विचार किया। राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग की समीक्षा की। साथ ही, दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का मिलकर सामना करने पर चर्चा की। भारत और ऑस्ट्रेलिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अपने सहयोग को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। सेबू में हुई यह बैठक दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।

जापान के साथ समुद्री सुरक्षा और युद्धपोत निर्माण में सहयोग पर जोर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अगस्त में हुई पिछली बैठक के बाद द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति पर संतोष जताया। उन्होंने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के नए रास्ते तलाशने पर सहमति व्यक्त की। बैठक में समुद्री सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों पक्षों ने समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमताओं को मजबूत करने के मुद्दे पर चर्चा की।

इसके अलावा, जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता का लाभ उठाकर नौसैनिक जहाजों के डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में संयुक्त विकास की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। यह सहयोग भारत और जापान के बीच रक्षा तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी को नई दिशा दे सकता है। खास तौर पर नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करने और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने में दोनों देशों का सहयोग अहम है।

वहीं फिलीपींस के साथ समुद्री सुरक्षा और संयुक्त रक्षा उत्पादन पर चर्चा की गई। राजनाथ सिंह ने फिलीपींस के राष्ट्रीय रक्षा सचिव गिल्बर्टो सी. टेओडोरो जूनियर के साथ भी बैठक की। यह मुलाकात 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस से इतर हुई। रक्षा मंत्री ने बैठक को उपयोगी बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने जारी रक्षा सहयोग की समीक्षा की और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। इस बैठक में समुद्री सुरक्षा और संयुक्त रक्षा उत्पादन प्रमुख मुद्दे रहे। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया।

भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला और समावेशी बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। भारत और फिलीपींस के बीच रक्षा संबंधों में समुद्री सुरक्षा का विशेष महत्व है। ऐसे में रक्षा उत्पादन और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर हुई चर्चा दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम है।

सेबू में राजनाथ सिंह की इन बैठकों से स्पष्ट है कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए प्रमुख साझेदार देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऑस्ट्रेलिया के साथ सैन्य तालमेल, जापान के साथ रक्षा तकनीक और नौसैनिक जहाजों के क्षेत्र में संयुक्त विकास तथा फिलीपींस के साथ समुद्री सुरक्षा और संयुक्त रक्षा उत्पादन जैसे मुद्दे इस रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।</description><guid>13388</guid><pubDate>2026-10-29 16:34:26 4:35:53 pm</pubDate></item><item><title>दो पैन कार्ड मामले में आजम खां और उनके बेटे को हाई कोर्ट से राहत</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13387</link><description>लखनऊ । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड रखने के मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खां तथा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत दी है। अदालत ने दोनों की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी है। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी गई है। ऐसे में इस मामले में जमानत मिलने के बावजूद आजम खां और अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई अन्य मामलों में उनकी कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगी।

न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने दोनों की पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। याचिकाओं में अधीनस्थ अदालतों द्वारा दो पैन कार्ड रखने के मामले में सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी गई थी। अभियोजन पक्ष का मामला कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों का उल्लेख करने वाले दूसरे पैन कार्ड को प्राप्त करने और उसका इस्तेमाल करने से संबंधित है। आरोपों में चुनावी नामांकन पत्रों में इस पैन कार्ड के कथित इस्तेमाल का पहलू भी शामिल है। आजम खां की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने पैरवी की।

अभियोजन के अनुसार, यह मामला कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों का उल्लेख करने वाले दूसरे पैन कार्ड को बनवाने और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोपों में चुनावी नामांकन पत्रों में दूसरे पैन कार्ड के कथित इस्तेमाल का पहलू भी शामिल है। आजम खां और अब्दुल्ला आजम ने निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के फैसले को आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं के जरिए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसी क्रम में दोनों ने सजा निलंबित करने और जमानत देने की मांग की थी।

दोषसिद्धि पर रोक और सजा निलंबन में अंतर हाईकोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की है, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी है। ऐसे में दोषसिद्धि का आदेश बरकरार रहेगा। पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम फैसला अलग से होना है। वहीं, इस मामले में जमानत मिलने के बावजूद दोनों की जेल से रिहाई अन्य लंबित मामलों में उनकी कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगी। वहीं, जमानत और सजा निलंबन के बावजूद जेल से बाहर आने का रास्ता अन्य लंबित मामलों में राहत मिलने पर ही साफ हो सकेगा</description><guid>13387</guid><pubDate>2026-10-29 16:32:05 4:32:51 pm</pubDate></item><item><title>चक्रवात अर्नब को लेकर गृहमंत्री शाह ने 4 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13386</link><description>नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चक्रवात अर्नब के मद्देनजर आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बात की और आपदा के सामने लोगों की कठिनाइयों को कम करने के लिए हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है।
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, चक्रवात अर्नब के मद्देनजर आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बात की और उन्हें आपदा के सामने लोगों की कठिनाई को कम करने के लिए हर सहायता का आश्वासन दिया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें सक्रिय हो गई हैं और युद्धस्तर पर बचाव और राहत अभियान जारी रखे हुए हैं। प्रभाव का आकलन करने और आगे की सहायता के लिए आईएमसीटी को जल्द ही भेजा जाएगा। भारत सरकार दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ लोगों के साथ खड़ी है।

इससे पहले 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात की थी और उन्हें राज्य में चक्रवात अर्नब से हुए व्यापक नुकसान के बारे में जानकारी दी थी।

सीएम नायडू ने 'एक्स' पर पोस्ट किया था कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को आंध्र प्रदेश में चक्रवात के असर के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा था, मैंने उन्हें चक्रवात से हुए भारी नुकसान के बारे में बताया, खासकर कृषि और बागवानी फसलों, बिजली के बुनियादी ढांचे, सड़कों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान के बारे में।

मुख्यमंत्री ने कहा था, मैंने उन्हें चक्रवात प्रभावित जिलों में हो रही भारी बारिश, वहां के मौजूदा हालात और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्यों के बारे में भी अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि व्यापक नुकसान को देखते हुए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से अनुरोध किया है कि वे जल्द से जल्द केंद्रीय टीमों को भेजें ताकि नुकसान का आकलन किया जा सके और भारत सरकार की ओर से राहत, पुनर्वास और बहाली के प्रयासों के लिए वित्तीय सहायता मिल सके। इससे पहले भी मुख्यमंत्री नायडू ने अमित शाह को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए जल्द से जल्द एक केंद्रीय टीम भेजी जाए।

</description><guid>13386</guid><pubDate>2026-10-29 16:22:05 4:22:45 pm</pubDate></item><item><title>यूपी में सरकारी नौकरी के नियम सख्त, हिंसक गतिविधियों में शामिल उम्मीदवार हो सकते हैं अयोग्य</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13385</link><description>लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती के लिए उम्मीदवारों के चरित्र सत्यापन के नियमों में बदलाव किया है। नए दिशानिर्देशों के तहत ऐसे संगठनों से जुड़े लोगों को सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्य माना जा सकता है, जिनका घोषित उद्देश्य हिंसा के जरिए मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को बदलना है। हालांकि, केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी उम्मीदवार को नौकरी से अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।
नियुक्ति विभाग के प्रधान सचिव एम. देवराज की ओर से जारी यह आदेश राज्य सरकार के विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर लागू होगा। यह बदलाव हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर उठे विवाद के बीच आया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस कदम की आलोचना की है।

तीन साल की गतिविधियों को भी किया जाएगा ध्यान में
आदेश के अनुसार, 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद और चरित्र सत्यापन से ठीक पहले के तीन वर्षों के दौरान हिंसक गतिविधियों में शामिल होने को संबंधित व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, यदि ठोस सबूतों से यह साबित होता है कि इस अवधि में उसके व्यवहार या प्रवृत्ति में बदलाव आया है, तो इस निष्कर्ष पर दोबारा विचार किया जा सकता है।

FIR या लंबित जांच से स्वतः नहीं जाएगी नौकरी
संशोधित दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने या किसी मामले की जांच लंबित रहने से उम्मीदवार अपने आप सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं होगा।

इसी तरह, बरी हो चुके उम्मीदवारों, आपसी समझौते से निपटाए गए मामलों और किशोर न्याय कानूनों के दायरे में आने वाले मामलों में भी स्वतः अयोग्यता लागू नहीं होगी। संबंधित मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

सत्यापन पूरा होने से पहले मिल सकता है अनंतिम नियुक्ति पत्र
सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में देरी रोकने के लिए यह भी प्रावधान किया है कि चरित्र सत्यापन रिपोर्ट आने में देर होने पर नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया जरूरी नहीं कि रोक दी जाए। निर्धारित दस्तावेज और स्व-घोषणा पत्र मिलने के बाद संबंधित अधिकारी उम्मीदवार को अनंतिम नियुक्ति पत्र जारी कर सकते हैं।

हालांकि, सत्यापन में उम्मीदवार अयोग्य पाया जाता है या उसके द्वारा गलत जानकारी देने का पता चलता है, तो नियुक्ति रद्द की जा सकती है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

पुलिस को 30 दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश
नए नियमों के तहत पुलिस को चरित्र सत्यापन रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर सौंपने का निर्देश दिया गया है, ताकि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को दोबारा चरित्र सत्यापन कराने से छूट दी गई है, हालांकि जरूरत पड़ने पर उनके पूर्व विभागों से संबंधित जानकारी मांगी जा सकती है।

आदेश पर विपक्ष ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने नए दिशानिर्देशों की आलोचना की है। विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन और सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतांत्रिक अधिकारों के संदर्भ में उठाते हुए सरकार के कदम पर सवाल किए हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि संशोधित नियमों का उद्देश्य चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और भर्ती में अनावश्यक देरी रोकना है।

नए दिशानिर्देशों के तहत राजनीतिक विचारधारा और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है। भर्ती के दौरान उम्मीदवार की पात्रता का निर्णय निर्धारित नियमों और सत्यापन में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर किया जाएगा।

</description><guid>13385</guid><pubDate>2026-10-29 16:20:26 4:21:07 pm</pubDate></item><item><title>बॉम्बे हाई कोर्ट ने रद्द किया IMPPA का फैसला, निखिल द्विवेदी के बैनर को बड़ी राहत</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13384</link><description>मुंबई । न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने 3 जुलाई को इम्पा द्वारा दिए गए फैसले को रद्द कर दिया और मुकदमे का निपटारा कर दिया। इसे प्रोडक्शन बैनर के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
प्रोड्यूसर निखिल द्विवेदी और उनके प्रोडक्शन बैनर सफ्रॉन मैजिकवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दरअसल, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) की डिस्प्यूट रेज़ोल्यूशन कमेटी द्वारा कंपनी के खिलाफ दिए गए फैसले को रद्द कर दिया गया।
3 जुलाई, 2026 को प्रोडक्शन हाउस ने IMPPA अवॉर्ड को चुनौती देने के लिए कोर्ट का रुख किया था। ऐसे में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई कर फैसला सैफ्रॉन मैजिकवर्क्स के पक्ष में सुनाया। इस तरह से ऑफिशियल तौर से केस का निपटारा हो गया है, जिससे यह कानूनी कार्रवाई अब खत्म हो गई है।
यह ऑर्डर न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने 23 अक्टूबर, 2026 को पास किया। बता दें कि यह अंतिम फैसला कोर्ट के 9 सितंबर, 2026 को पास किए गए एक अंतरिम ऑर्डर के बाद आया है, जिसमें विवादित अवॉर्ड के आधार पर बैनर को डिफॉल्टर घोषित करने से IMPPA को रोककर सैफरन मैजिकवर्क्स को सुरक्षा दी गई थी।
मामले को लेकर सामने आए परिणाम पर बात करते हुए, सफ्रॉन मैजिकवर्क्स की ओर से पैरवी करने वाली आनंद एंड नाइक की मधु गडोदिया ने एक ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा है:
हमारे क्लाइंट, सफ्रॉन मैजिकवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड ने 3 जुलाई 2026 को इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) की डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन कमेटी के दिए गए फैसले को चैलेंज करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने 23 अक्टूबर को अपने आदेश में इस फैसले को रद्द करते हुए मुकदमे का निपटारा कर दिया। यह मामला इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन और डिपेंडेंट नंबर 2 के खिलाफ दायर किया गया था। सफ्रॉन मैजिकवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से रश्मिन खांडेकर, ध्रुव गांधी, मधु गडोदिया, विवेक द्विवेदी, विनीता दांडेकर और आर्यन गर्ग ने पैरवी की। इस मामले में उन्हें आनंद एंड नाइक द्वारा निर्देश दिए गए थे। हम इसे एक जरूरी डेवलपमेंट मानते हैं। नतीजा खुद सब बयां करता है।
यह रेजोल्यूशन इस विवाद का अंत है, जिससे यह साफ हो गया है कि मामला से जुड़ा संबंधित फैसला रद्द हो गया है। इस मामले में अब कोई भी कार्यवाही बाकी नहीं है।

</description><guid>13384</guid><pubDate>2026-10-29 13:50:47 1:51:47 pm</pubDate></item><item><title>कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा और जेडीएस के एनडीए गठबंधन ने सभी चार सीटें जीतीं</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13378</link><description>बेंगलुरू । कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा और जेडीएस के एनडीए गठबंधन ने सभी चार सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय प्रधानमंत्री के विकास कार्यों और गठबंधन कार्यकर्ताओं को दिया। उन्होंने इसे 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले जनता का मजबूत संदेश बताया।
27 अक्टूबर को घोषित कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों में, भाजपा-जनता दल (सेक्युलर) के NDA गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत हासिल की। ​​जीतने वाले उम्मीदवारों में वेस्ट ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से एस.वी. संकानूर, नॉर्थ-ईस्ट टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र से शशील जी. नमोशी, साउथ-ईस्ट ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से के.एम. सुरेश (सोमेश्वर) और बेंगलुरु टीचर्स निर्वाचन क्षेत्र से ए.पी. रंगनाथ शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने इस परिणाम को 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले शिक्षकों और स्नातकों की ओर से एक मजबूत संदेश बताया। उन्होंने चारों उम्मीदवारों को बधाई दी और इस बात पर जोर दिया कि NDA ने सभी निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार की आलोचना करते हुए उस पर अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन उन्हें लागू नहीं करते।
उन्होंने कहा कि विधान परिषद के चारों चुनावों में NDA के उम्मीदवार बड़े अंतर से जीते हैं। इस नतीजे के लिए मैं प्रधानमंत्री को बधाई देता हूँ और शुभकामनाएँ देता हूँ। देश के विकास के लिए प्रधानमंत्री की कड़ी मेहनत के कारण ही कर्नाटक के पढ़े-लिखे स्नातकों और शिक्षकों ने उनके द्वारा किए गए कार्यों के समर्थन में वोट दिया है। BJP और JD(S) के कार्यकर्ताओं ने भी कड़ी मेहनत की है। मतदाताओं का यह फैसला बताता है कि वे मौजूदा मुख्यमंत्री को केवल आश्वासन देने वाला और उन्हें लागू न करने वाला नहीं मानते। यह भी साफ है कि 2028 में मतदाता NDA गठबंधन को अपना आशीर्वाद देंगे।
कर्नाटक BJP के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने भी जीतने वाले उम्मीदवारों को बधाई दी और विधान परिषद चुनावों में NDA की जीत का जश्न मनाते हुए एक पोस्टर साझा किया। इस पोस्टर में लिखा था, कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में NDA उम्मीदवारों की शानदार जीत! और इसमें विजेताओं को हार्दिक बधाई दी गई थी। इससे पहले, कुमारस्वामी ने इस जीत को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि झूठ, कुशासन, धन-बल और बाहुबल की हार हुई है, और इस नतीजे को राज्य में बदलाव की शुरुआत करार दिया। पार्टी नेताओं ने इस शानदार जीत का श्रेय भाजपा और जेडी(एस) कार्यकर्ताओं के बीच बेहतरीन तालमेल और प्रभावी तरीके से वोट ट्रांसफर होने को दिया। साथ ही, उन्होंने इन नतीजों को 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले इस गठबंधन के लिए एक जनादेश के रूप में देखा।</description><guid>13378</guid><pubDate>2026-10-29 11:41:24 11:42:55 am</pubDate></item><item><title>युवा साहस के साथ नई खोज करें, दुनिया का नेतृत्व करें:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आह्वान</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13377</link><description>नई दिल्ली । प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जो देश के युवा इनोवेटर्स के आत्मविश्वास, महत्वाकांक्षा और विचारों से प्रेरित है। कार्यक्रम से पहले स्टार्टअप प्रतिनिधियों के साथ हुई अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए, पीएम मोदी ने उनकी बड़ी महत्वाकांक्षाओं और नए विचारों पर काम करने के उनके आत्मविश्वास की सराहना की।
वैज्ञानिक और तकनीकी विकास की दिशा में भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने के संकल्प को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के वैज्ञानिकों, युवाओं और इनोवेटर्स से आह्वान किया कि वे केवल पश्चिमी या अन्य देशों की तकनीकों का अंधानुकरण करने के बजाय खुद भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों का निर्माण करें। दिल्ली में आयोजित 'इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026' (ESTIC 2026) को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब भारत वैश्विक समस्याओं का समाधान करने वाली तकनीकों का नेतृत्व करे, न कि केवल उनका अनुसरण।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जो देश के युवा इनोवेटर्स के आत्मविश्वास, महत्वाकांक्षा और विचारों से प्रेरित है। कार्यक्रम से पहले स्टार्टअप प्रतिनिधियों के साथ हुई अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए, पीएम मोदी ने उनकी बड़ी महत्वाकांक्षाओं और नए विचारों पर काम करने के उनके आत्मविश्वास की सराहना की। उन्होंने कहा, भारत के युवा जिस स्तर पर सोच रहे हैं और जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वह वाकई प्रेरणादायक है।
दुनिया की बराबरी करने से लेकर भविष्य की तकनीकें बनाने तक
कॉन्क्लेव की थीम 'इमर्जिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी' (उभरते विज्ञान और तकनीक) का जिक्र करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति को लेकर भारत के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव आया है। पहले, भारत अक्सर विदेशों में विकसित तकनीकों को अपनाता था- कभी-कभी तो उनके आने के कई सालों बाद- और उनमें बस थोड़े-बहुत सुधार कर लेता था। उन्होंने कहा, दशकों पहले एक समय ऐसा था जब भारत के लिए विज्ञान और तकनीक का मतलब सिर्फ 'दूसरों की बराबरी करना' (catch up) होता था।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, जब दुनिया में कोई नई खोज होती थी, तो वह तकनीक हम तक कई सालों बाद पहुँचती थी। हम उसे अपना लेते थे या उसमें मामूली सुधार करके आगे बढ़ाते थे। उन्होंने कहा कि अब भारत एक अलग रास्ते पर चल रहा है। इसमें अब कहीं अधिक आत्मविश्वास है और एक बड़ी महत्वाकांक्षा है- ऐसी तकनीकें विकसित करना जो देश की जरूरतों के साथ-साथ वैश्विक आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, लेकिन आज, 21वीं सदी का भारत एक नई सोच और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने आगे कहा, अब हमारा लक्ष्य- भारत के लिए, दुनिया के लिए, आज के लिए और आने वाले कल के लिए-नई तकनीकें विकसित करना, उनकी दिशा तय करना और वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता तैयार करना है। दूसरों के पीछे चलने के बजाय नेतृत्व करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, भारत को भविष्य की तकनीकों को अपनाना चाहिए, साहस के साथ नवाचार (इनोवेशन) करना चाहिए और इन तकनीकों को बनाने में दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए।
अंतरिक्ष मिशन भारत की वैज्ञानिक महत्वाकांक्षाओं को दर्शाते हैं
अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने देश के मंगल मिशन और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफल लैंडिंग का उदाहरण दिया, जो भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को दिखाते हैं। उन्होंने कहा, हम अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह तक पहुंच गए। हम चंद्रमा के उस दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचे, जहां पहले कोई नहीं पहुंच पाया था। इन उदाहरणों के जरिए यह बताया गया कि भारत न केवल दूसरे देशों द्वारा विकसित तकनीकों पर निर्भर रहने के बजाय, बल्कि जटिल वैज्ञानिक मिशनों को पूरा करने और बड़ी उपलब्धियां हासिल करने में भी सक्षम है।
भारत की COVID-19 प्रतिक्रिया को आत्मनिर्भरता के उदाहरण के रूप में पेश किया गया
प्रधानमंत्री ने COVID-19 महामारी के दौरान भारत की प्रतिक्रिया को भी याद किया। उन्होंने स्वदेशी वैक्सीन के विकास, बड़े पैमाने पर चलाए गए टीकाकरण अभियान और अन्य देशों को वैक्सीन की आपूर्ति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, हमने कोरोना काल में इसका एक उदाहरण देखा। जब दुनिया के कई देश वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहे थे, तब भारत ने अपनी खुद की वैक्सीन विकसित की। भारत ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण किया और अन्य देशों को भी वैक्सीन भेजी।
प्रधानमंत्री ने महामारी के दौरान भारत की प्रतिक्रिया को इस बात के उदाहरण के तौर पर पेश किया कि भारत बड़े पैमाने पर तकनीक विकसित करने और उसे लागू करने में सक्षम है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय जरूरतों में भी योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा, यही 21वीं सदी के भारत का आत्मविश्वास है।

</description><guid>13377</guid><pubDate>2026-10-29 11:31:37 11:34:00 am</pubDate></item><item><title>आपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारत ने SCO फोरम के लिए पाकिस्तान को भेजा निमंत्रण</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13376</link><description>नई दिल्ली । आधिकारिक राजनयिक सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने नई दिल्ली में 20 से 22 नवंबर तक आयोजित होने वाले पहले 'शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम' (सभ्यता संवाद मंच) के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत और संस्कृति मंत्री, औरंगजेब खान खिची को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है।
ऑपरेशन सिंदूर' के बाद उपजे गंभीर कूटनीतिक और सैन्य तनाव के बीच भारत ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। आधिकारिक राजनयिक सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने नई दिल्ली में 20 से 22 नवंबर तक आयोजित होने वाले पहले 'शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम' (सभ्यता संवाद मंच) के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत और संस्कृति मंत्री, औरंगजेब खान खिची को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है। भारत ने SCO के बहुपक्षीय ढांचे के तहत संगठन के सभी 10 सदस्य देशों को इस ऐतिहासिक सम्मेलन के लिए न्योता भेजा है।
यह निमंत्रण ऐसे समय में आया है जब 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद मई 2025 में यह ऑपरेशन शुरू किया था। इस सैन्य अभियान के बाद से किसी वरिष्ठ पाकिस्तानी मंत्री को दिया गया यह पहला निमंत्रण है।
अगर खिची इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं, तो यह मई 2023 में गोवा में हुई SCO विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक में तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के शामिल होने के बाद, किसी वरिष्ठ पाकिस्तानी मंत्री की भारत की पहली यात्रा होगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर को ताजिकिस्तान के दुशान्बे में आयोजित SCO शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक में इस फोरम की घोषणा की और बताया कि सभी सदस्य देशों को आमंत्रित किया गया है। सिंह ने कहा, इस साल के अंत में, भारत पहले 'SCO सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम' की मेजबानी करेगा। हम SCO के सभी देशों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हैं। इस फोरम का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना और आपसी समझ को बढ़ावा देना है।
बैठक के दौरान, सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ एक सख्त और सुसंगत रुख अपनाने का आह्वान किया और जोर देकर कहा कि इसमें कोई 'दोहरा मापदंड' (double standards) नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, आतंकवाद से निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। जो लोग आतंकवादियों को आर्थिक मदद देते हैं, उनका समर्थन करते हैं या उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराते हैं, उनके लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को सख्ती से और सामूहिक रूप से खत्म किया जाना चाहिए।
इस बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी मौजूद थे। बिश्केक में हुए शिखर सम्मेलन के बाद, 1 सितंबर को पाकिस्तान ने किर्गिस्तान से कार्यभार संभालते हुए, 2026-27 के कार्यकाल के लिए SCO राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की बारी-बारी से मिलने वाली अध्यक्षता ग्रहण की। SCO में 10 सदस्य देश शामिल हैं: बेलारूस, चीन, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान। भारत 2017 में पूर्ण सदस्य बना।अफगानिस्तान और मंगोलिया के पास पर्यवेक्षक का दर्जा है, जबकि इस समूह के 15 संवाद साझेदार भी हैं।

</description><guid>13376</guid><pubDate>2026-10-29 11:24:55 11:27:18 am</pubDate></item><item><title>यूएन महासभा में क्यूबा के विदेश मंत्री ने किया हंगामा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13375</link><description>न्यूयॉर्क ।संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से जारी तनाव मंगलवार को तीखी जुबानी भिड़ंत में बदल गया। अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज और क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पारिला के बीच जबरदस्त बहस हुई, जब महासभा में क्यूबा पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों पर चर्चा चल रही थी। असेंबली अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने शांति बनाए रखने की अपील की, क्यूबाई प्रतिनिधियों से अपनी सीटों पर वापस जाने और मंगलवार को वाल्ट्ज को अपनी बात रखने देने को कहा, और कुछ देर के लिए बैठक स्थगित कर दी। जब वाल्ट्ज हवाना सरकार की आलोचना कर रहे थे, तो क्यूबाई प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मेजें थपथपाईं और शोर मचाना शुरू कर दिया।
वे अपनी सीटों से उठे और मंच की ओर बढ़ गए। वॉल्ट्ज ने अपने संबोधन में क्यूबा की सरकार पर भ्रष्टाचार और आम नागरिकों की कीमत पर सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने क्यूबा के नेतृत्व की कथित संपत्ति और विलासितापूर्ण जीवनशैली का जिक्र करते हुए सदस्य देशों से अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा करने वाले प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने की अपील की।









इस दौरान रोड्रिगेज ने वाल्ट्ज की बात में बार-बार रुकावट डाली और 'पॉइंट ऑफ ऑर्डर' पर बोलने की मांग की। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को घूरने लगे। वाल्ट्ज मंच से बोल रहे थे, जबकि रोड्रिगेज और उनके साथी मंच के नीचे सामने की तरफ मौजूद थे। रहमान ने 'पॉइंट ऑफ ऑर्डर' उठाते हुए आग्रह किया, कृपया कामकाज को सुचारू रूप से चलाने में मेरी मदद करें, और आपको यह अधिकार मिल जाएगा। वाल्ट्ज ने रोड्रिग्ज पर चिल्लाते हुए कहा, पीछे हट जाओ! यह हवाना नहीं है।

इस बीच, रहमान ने कहा, कृपया बैठ जाइए। बैठ जाइए, और फिर बैठक को स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा, मैं यहां प्रक्रिया के नियमों को निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से लागू करने के लिए हूं। कुछ ही मिनटों में जब बैठक फिर से शुरू हुई, तो रोड्रिगेज ने 'पॉइंट ऑफ ऑर्डर' उठाया। असल में यह एक जवाब था, जिसमें उन्होंने कहा कि वाल्ट्ज सरासर झूठ बोल रहे हैं और क्यूबा की जनता तथा सरकार की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं।                                 
इस दौरान क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल ने उनके संबोधन का विरोध किया और मेज थपथपाकर आपत्ति जताई। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई, जब विदेश मंत्री रोड्रिगेज वॉल्ट्ज के मंच के करीब पहुंचे और उन्हें झूठा करार दिया। इस पर अमेरिकी राजदूत ने उन्हें पीछे हटने को कहा। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर सदन में व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की।
</description><guid>13375</guid><pubDate>2026-10-28 12:35:25 12:36:37 pm</pubDate></item><item><title>भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को यूएई ने दिया ऑर्डर ऑफ जायद सम्मान</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13374</link><description>अबू धाबी ।फ्लाईदुबई फ्लाइट को हाइजैक होने से बचाने के लिए जान की बाजी लगाने को तैयार भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने मच्छार समेत विमान के अन्य चालक दल सदस्यों को प्रथम श्रेणी के 'ऑर्डर ऑफ जायद II' से सम्मानित किया है। दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने चालक दल को यह सम्मान प्रदान किया। दुबई मीडिया ऑफिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी जानकारी दी।
यूएई के नेतृत्व ने चालक दल की त्वरित कार्रवाई, जिम्मेदारी और व्यावसायिक दक्षता की सराहना करते हुए कहा, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। राष्ट्रपति ने चालक दल के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान यूएई के उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






यह सम्मान 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुई घटना के बाद दिया गया है। दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान के कॉकपिट में सह-पायलट ने कैप्टन मच्छार पर हमला कर दिया था और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की थी। यूएई के अभियोजकों की जांच के अनुसार, आरोपी की मंशा विमान को इजरायल के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त कर बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान पहुंचाने की थी।

गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद चालक दल के अन्य सदस्यों और यात्रियों ने हस्तक्षेप कर हमलावर को काबू में किया। विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे की ओर मोड़ा गया, जहां उसे सुरक्षित उतारा गया। इस घटना में विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की जान बच गई।                                                                  


घटना के बाद शेख हमदान ने अस्पताल में कैप्टन मच्छार से मुलाकात कर उनके साहस और मानव जीवन की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की थी। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उनकी बहादुरी की प्रशंसा की थी। इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भी कैप्टन मच्छर को स्वस्थ होने के बाद देश के नागरिक वीरता सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की है।
</description><guid>13374</guid><pubDate>2026-10-28 12:31:06 12:33:13 pm</pubDate></item><item><title>किरेन रिजिजू ने फर्जी एआई वीडियो पर कांग्रेस को घेरा, देश से माफी मांगने की मांग की</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13373</link><description>नई दिल्ली । भारतीय सेना ने कांग्रेस प्रवक्ता रितु चौधरी द्वारा शेयर किए गए दो वीडियो को फर्जी और भ्रामक करार दिया है, जिनमें चीनी घुसपैठ का झूठा दावा किया गया था। सेना ने स्पष्ट किया कि एक क्लिप नाथू ला व्यापारिक मार्ग की है और दूसरा डीपफेक है। इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर सेना को बदनाम करने का आरोप लगाया।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को कांग्रेस से माफी की मांग की। यह मांग तब की गई जब भारतीय सेना ने कांग्रेस प्रवक्ता द्वारा शेयर किए गए दो वीडियो को गलत साबित कर दिया। इन वीडियो में झूठा दावा किया गया था कि चीनी सेना भारतीय क्षेत्र में घुस आई है और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर उसका कब्जा हो गया है। ये वीडियो बिहार की कांग्रेस प्रवक्ता रितु चौधरी ने शेयर किए थे। एक वीडियो में कथित तौर पर चीनी वाहनों को भारतीय क्षेत्र में आते हुए दिखाया गया था, जबकि दूसरे वीडियो में एक वरिष्ठ सेना अधिकारी के नाम से झूठी बातें कही गई थीं।
इसमें दावा किया गया था कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों पर कब्जा कर लिया है और भारतीय सैनिकों को जरूरी सामान नहीं मिलने दिया जा रहा है। सेना ने दोनों वीडियो पर स्पष्टीकरण जारी किया; एक को सीमा व्यापार के अधिकृत मार्ग का भ्रामक फुटेज बताया, जबकि दूसरे को डीपफेक करार दिया। पहले वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया में, सेना ने कहा कि फुटेज में सिक्किम के नाथू ला दर्रे (जो भारत-चीन सीमा पर व्यापार का एक तय केंद्र है) पर चीनी कमर्शियल वाहन दिखाई दे रहे हैं, न कि यह किसी सैन्य घुसपैठ का सबूत है।
इसमें कहा गया है कि एक अधिकृत सीमा व्यापार मार्ग पर व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही को, चीनी सेना की घुसपैठ के सबूत के तौर पर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। दूसरे वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया (जो 'स्पीयर कॉर्प्स' के जनरल ऑफिसर कमांडिंग यानी GOC हैं) का एक छेड़छाड़ किया गया क्लिप दिखाया गया है, जिसमें वे कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर चीन के नियंत्रण के बारे में बात करते हुए सुनाई दे रहे हैं। इस फुटेज के स्रोत के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए, सेना ने बताया कि यह 27 अक्टूबर 2023 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में हुई एक प्रेस ब्रीफिंग से लिया गया है, जो 'लाइन ऑफ कंट्रोल' (LoC) के पार घुसपैठ की कोशिशों से जुड़ी थी।
किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए, लोकसभा में अरुणाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले रिजिजू ने कांग्रेस से मांग की कि वह छेड़छाड़ की गई सामग्री फैलाने के लिए माफी मांगे। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस पर सशस्त्र बलों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की छवि खराब करने के लिए फर्जी AI वीडियो फैलाने पर कांग्रेस पार्टी को देश से माफी मांगनी चाहिए। यह एक विश्वासघाती कृत्य है और हमारे दुश्मनों के घिनौने कामों के बराबर है। कांग्रेस पार्टी भारत के दुश्मनों की ओर से एक बेहद निंदनीय अभियान चला रही है।

</description><guid>13373</guid><pubDate>2026-10-28 12:30:45 12:31:37 pm</pubDate></item><item><title>खरगे ने गलती की...पीएम मोदी पर बाप वाली टिप्पणी को लेकर कांग्रेस में ही शुरू हो गया विरोध</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13372</link><description>मुबंई । कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी करके गलती की है और उन्हें माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को भाषाई मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अतीत में भाजपा नेताओं ने भी कांग्रेस नेतृत्व पर ऐसी टिप्पणियां की थीं।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था और उन्हें माफी मांगनी चाहिए। पृथ्वीराज चव्हाण ने आगे कहा कि हर राजनीतिक दल को अपनी भाषा में मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने भाजपा की तीखी और डींगें हांकने वाली बयानबाजी के मुद्दे पर भी बात की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है और अपने 'वोट बचाओ' अभियान के तहत पूरे गुजरात में जिला स्तर पर बैठकें कर रही है।
पृथ्वीराज चव्हाण का कहना है कि खड़गे ने अपनी टिप्पणी से 'गलती' की
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपनी विवादित टिप्पणी करके एक गलती की है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं को कभी भी मर्यादित भाषा का त्याग नहीं करना चाहिए।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हालांकि खड़गे की टिप्पणी अनुचित थी, लेकिन अतीत में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ बयान दिए हैं। रविवार को पटना में एक कार्यक्रम के दौरान, खड़गे ने दर्शकों में से एक व्यक्ति की बात का जवाब देते हुए मोदी का बाप भी जाएगा कहकर विवाद खड़ा कर दिया।
इसे भी पढ़ें: 1 नवंबर की Congress रैली पर बोले Shashi Tharoor, नागरिकों के अधिकारों पर पार्टी चुप नहीं रहेगी
खड़गे ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही
गौरतलब है कि खड़गे ने यह बात बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही। खड़गे ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों को जेल भेजेगी। इस पर दर्शकों में से किसी ने कहा कि जब तक कोई बगावत नहीं होती, तब तक पीएम मोदी कहीं नहीं जाने वाले। इस पर खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा, मोदी का बाप भी जाएगा।
चव्हाण का कहना है कि मर्यादित भाषा का त्याग कभी नहीं करना चाहिए
चव्हाण ने कहा, मेरा मानना ​​है कि चाहे कोई भी पार्टी हो, कभी भी मर्यादित भाषा का त्याग नहीं करना चाहिए। अगर उन्होंने (खड़गे ने) कुछ कहा है - शायद अनजाने में ही सही - तो उन्हें इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। लेकिन मैं आपसे पूछता हूं: आपके नेताओं ने भी तो राहुल गांधी के बारे में ऐसी ही टिप्पणियां की थीं। यहां दोनों पक्षों की गलती है।

</description><guid>13372</guid><pubDate>2026-10-28 12:28:16 12:29:02 pm</pubDate></item><item><title>जब तक भाजपा कार्यकर्ता जमीन पर सक्रिय हैं, पीएम को कोई हिला नहीं सकताःनितिन नवीन</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13371</link><description>पुणे । भाजपा नेता नितिन नवीन ने गोवा के चिम्बेल में पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति बैठक को संबोधित करते हुए विपक्ष और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब तक समर्पित कार्यकर्ता जमीन पर सक्रिय हैं, कोई पीएम मोदी को हिला नहीं सकता। भाजपा जल्द ही लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान चलाएगी।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने चिम्बेल में भाजपा गोवा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। नितिन नवीन ने कहा कि जब तक भाजपा का कार्यकर्ता उत्साह और ऊर्जा के साथ जमीन पर संघर्ष करेगा, तब तक कोई मोदी जी को हिला नहीं सकता। उन्होंने कहा कि आपका उत्साह और चेहरे का विश्वास मेरी ताकत को बढ़ा रहा है। मुझे आश्वस्त कर रहा है कि गोवा में 2027 में हर बूथ पर कमल खिलेगा। गोवा की टीम ने तय कर लिया है कि इस बार सिर्फ सरकार नहीं बनानी है, बल्कि एक ऐसी सरकार बनानी है, जो प्रमोद जी के नेतृत्व में भाजपा द्वारा निरंतर बनाई गई विकास की गति को बरकरार रखते हुए विकसित गोवा का मार्ग प्रशस्त करे।
नितिन नवीन ने आगे कहा कि मैं आज गोवा के मुख्यमंत्री और उनकी पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई देने आया हूं। पीएम मोदी जी आत्मनिर्भर भारत का जो सपना देख रहे हैं, आप उस सपने को गोवा के लिए भी सार्थक करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। करीब 32,000 करोड़ रुपये का बजट इस राज्य का अपना हो गया है। जहां देश में कुछ ऐसे राज्य भी हैं, जो जनता के वादों को भूल जाते हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार ने वादा पूरा नहीं किया। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने घोषणा पत्र के वादे पूरे नहीं किए। वहीं जहां-जहां हमारी सरकारें बनी हैं, हमने एक-एक संकल्प को सिद्धि की ओर पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि मैं आज भाजपा के उस वर्ग के साथ बैठा हूं, जिसने संगठन को गढ़ा है। गोवा में अगर आज हमारी सरकार है, तो आपकी मेहनत और परिश्रम के कारण है। भाजपा की खूबसूरती यही है कि अगर कोई कार्यकर्ता नीचे बैठा है, तो वह किसी भी दिन पार्टी के शीर्ष पद पर बैठ सकता है, और यह सिर्फ भाजपा में हो सकता है।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में लगातार विकास के नए आयाम जोड़े जा रहे हैं। सेवा और समर्पण के भाव से जिस प्रकार हमारी सरकारें काम कर रही हैं, उससे हम पूरी तरह आश्वस्त हैं कि हम 2027 और 2029 के मिशन को पूरा करेंगे। लेकिन पिछले कुछ दिनों से राजनीति में कुछ ऐसे लोग भी सक्रिय हैं, जो राजनीति की परिभाषा को दूषित करने का प्रयास कर रहे हैं। विपक्ष पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि देश के नेता प्रतिपक्ष के मुंह से आप कभी विकास की बात नहीं सुनते हैं। उनकी आवाज सिर्फ देश में अराजकता फैलाने के लिए निकलती है। राहुल गांधी कभी विकास पर सवाल नहीं उठाते हैं, क्योंकि पीएम मोदी ने मौका ही नहीं दिया है। मोदी जी ने विकास की इतनी बड़ी लकीर खींची है कि कांग्रेस के नेता दूर-दूर तक नजर नहीं आते हैं। उन्हें मालूम है कि अगर विकास पर सवाल करेंगे, तो खुद कठघरे में आ जाएंगे।
राहुल पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि अभी हाल में कांग्रेस के युवराज कह रहे थे कि Smash the Patriarchy, लेकिन जब जेएनयू के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद पर वहां की 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए और यूनिवर्सिटी ने जांच के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया, तो इस विषय पर राहुल गांधी की बोलती बंद रही। इनके दिल में देश की माताओं-बहनों के लिए कोई सम्मान नहीं है। सम्मान होता, तो कार्रवाई करते। पर हिम्मत नहीं है, क्योंकि जब पूरी पार्टी खुद घिरी हो, तो वह किसी पर कार्रवाई कैसे करे। उन्होंने कहा कि अभी देश में लोकतंत्र को चुनौती देने का प्रयास किया जा रहा है। जो संविधान की दुहाई दे रहे हैं, उन्हें संविधान से कोई मतलब नहीं है, इन्होंने संविधान को तार-तार किया है। इन्होंने संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को चुनाव हराने के लिए सारे हथकंडे अपनाए, ताकि उन्हें अपमानित किया जा सके। लोकतंत्र को ताक पर रखकर आपातकाल लगाने वालों के लिए कोई संविधान नहीं है, उनका संविधान सिर्फ उनका परिवार है। उनका परिवार जो निर्णय लेता है, वही वे देश पर थोपना चाहते हैं। इसलिए भाजपा 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान पूरे देश में चलाएगी और इनके चेहरों को बेनकाब करेगी।

</description><guid>13371</guid><pubDate>2026-10-28 12:26:35 12:27:21 pm</pubDate></item><item><title>एक नवंबर की कांग्रेस की रैली के लिए दिल्ली पुलिस ने तय की शर्तें</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13370</link><description>नई दिल्ली । पुलिस ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस की रैली के लिए सशर्त अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है। पुलिस ने सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक का समय तय करते हुए रात में रुकने और भड़काऊ भाषणों पर रोक लगाई है। साथ ही कार्यक्रम स्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस की रैली के लिए 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) जारी कर दिया है। कानून-व्यवस्था के नजरिए से दी गई यह मंजूरी, जमीन के मालिक प्राधिकरण (लैंड अथॉरिटी) से पूर्व अनुमति लेने और कई शर्तों का पालन करने पर निर्भर है। इन शर्तों में रैली का काम शाम 5 बजे तक खत्म करना और कार्यक्रम स्थल पर रात भर रुकने पर रोक लगाना शामिल है। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) कार्यालय से मनीष चतरथ को भेजे गए एक पत्र में यह पुष्टि की गई है कि 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक रामलीला मैदान बुक करने के अनुरोध पर विचार किया गया है।
मनीष चतरथ पार्टी मुख्यालय के प्रभारी हैं और कांग्रेस वर्किंग कमिटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। यह रैली 1 नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जानी है। आयोजकों को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। इसमें प्रवेश और निकास द्वारों, मंच, आसपास के क्षेत्रों और बैठने की जगहों जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरे लगाना शामिल है। इस व्यवस्था में रिकॉर्डिंग की सुविधा, कम से कम पांच स्क्रीन के जरिए निगरानी, ​​और एक समर्पित CCTV कंट्रोल रूम होना चाहिए। इसके अलावा, पर्याप्त पानी के टैंकर और शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें महिला प्रतिभागियों के लिए अलग सुविधाएं हों। कार्यक्रम का प्रबंधन सुचारू रूप से हो सके, इसके लिए स्वयंसेवकों की पहचान आसानी से हो जानी चाहिए; इसके लिए वे एक जैसे कपड़े पहन सकते हैं या एक समान बैज लगा सकते हैं।
रैली शाम 5 बजे तक समाप्त हो जानी चाहिए, जिसके तुरंत बाद बिना किसी अतिरिक्त समय के प्रतिभागियों को वहां से चले जाना चाहिए। कार्यक्रम से पहले या बाद में रात भर रुकने की अनुमति नहीं है। वाहनों की पार्किंग केवल उन्हीं जगहों पर की जानी चाहिए जो ट्रैफिक यूनिट द्वारा तय की गई हैं। आयोजकों की यह जिम्मेदारी है कि वे शांति बनाए रखें और रैली के दौरान किसी भी तरह के उपद्रवी या कट्टर व्यवहार को रोकें। स्थानीय कानून-व्यवस्था को देखते हुए, पुलिसकर्मियों (जिसमें असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, कमला मार्केट के स्टेशन हाउस ऑफिसर और ड्यूटी पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं) के साथ सहयोग करना अनिवार्य है।
पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि वक्ताओं को जाति, धर्म या रंग से जुड़ी ऐसी कोई भी टिप्पणी करने से बचना चाहिए, जिससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है। यदि कोई भड़काऊ भाषण दिया जाता है, तो पब्लिक एड्रेस सिस्टम को तुरंत बंद कर दिया जाएगा और वक्ता को वहां से हटा दिया जाएगा। रामलीला मैदान के अलावा किसी अन्य जगह पर मार्च निकालने की अनुमति नहीं है। इस सम्मेलन में 12 विषयगत क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैटेरियल्स, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, ऊर्जा, जलवायु और महासागर विज्ञान शामिल हैं। चर्चा का मुख्य केंद्र अनुसंधान की प्राथमिकताओं, राष्ट्रीय क्षमताओं और वैज्ञानिक प्रगति को व्यावहारिक उपयोग में बदलने पर होगा।</description><guid>13370</guid><pubDate>2026-10-28 12:24:29 12:25:09 pm</pubDate></item><item><title>साइंस कानक्लेव में बोले पीएम मोदी, नई सोच के साथ आगे बढ़ रहा भारत, करना है दुनिया का नेतृत्व</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=13369</link><description>नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आज का भारत नई सोच और आत्मविश्वास के साथ भविष्य की तकनीकों में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। स्पेस से लेकर एआई और सेमीकंडक्टर तक, भारत वैश्विक समस्याओं के समाधान की दिशा तय कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026' का उद्घाटन किया। 27 से 29 अक्टूबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में प्रमुख वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ एक साथ आए हैं। वे उभरती हुई तकनीकों और विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के क्षेत्र में भारत की प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे।
इस दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत के युवा जिस स्किल पर सोच रहे हैं, जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वह उत्साह बढ़ाने वाला है। दशकों पहले एक समय था, जब भारत के लिए साइंस और टेक्नोलॉजी का मतलब था- कैचअप। उन्होंने कहा कि आज हम प्रथम प्रयास में ही मंगल ग्रह तक पहुंचते हैं। हम चंद्रमा के उस दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचते हैं, जहां कोई नहीं पहुंच पाया। इसलिए मेरा विश्वास है कि India must embrace the technologies of the future, innovate boldly, and lead
मोदी ने कहा कि दुनिया में कुछ इनोवेटिव होता था तो कुछ सालों बाद वो तकनीक हम तक पहुंचती थी। हम उसे अपनाते थे या उसमें कुछ सुधार करके आगे बढ़ाते थे। लेकिन आज 21वीं सदी का भारत एक नई सोच और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब हमारा लक्ष्य भारत के लिए, दुनिया के लिए, आज के लिए, आने वाले कल के लिए नई टेक्नोलॉजी बनाना, उसकी दिशा तय करना और दुनिया की समस्याओं के समाधान देने की शक्ति विकसित करना है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में हमने इसका उदाहरण देखा है। जब दुनिया के अनेक देश वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहे थे, भारत ने अपनी वैक्सीन विकसित की। भारत ने बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन किया और दूसरे देशों को भी वैक्सीन भेजी। यही 21वीं सदी के भारत का आत्मविश्वास है।
उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर से स्पेस तक, AI से सेमीकंडक्टर तक... इन सभी क्षेत्रों की जरूरतें अलग-अलग हैं, लेकिन इन सबका संदेश एक ही है। भारत उभरती हुई तकनीकों में अपनी शक्ति और अपना भरोसा, दोनों बढ़ा रहा है। भारत का एक और सामर्थ्य है- सॉल्यूशन और स्किल। भारत में कोई सॉल्यूशन सफल होता है, तो उससे दुनिया के अनेक देशों की समस्याओं के समाधान का रास्ता भी बनता है। हमारा डिजिटल स्टैक इसका शानदार उदाहरण है। हमारी 5G टेक्नोलॉजी भी इसका एक बेहतरीन उदाहरण है।


</description><guid>13369</guid><pubDate>2026-10-28 12:22:46 12:23:35 pm</pubDate></item></channel></rss>