<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>देश-विदेश - Dainandini Feed</title><link>https://dainandini.in/</link><description>Dainandini Feed Description</description><item><title>भारत की ऊर्जा पर आत्मनिर्भरता के लिए न्यूक्लियर पावर जरूरी</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12294</link><description>स्टैनफोर्ड ।अमेरिका के पूर्व ऊर्जा सचिव और नोबेल पुरस्कार विजेता स्टीवन चू ने कहा कि न्यूक्लियर पावर भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता का आधार बन सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि भूराजनीतिक तनाव ग्लोबल फ्यूल मार्केट की कमजोरियों को सामने ला रहे हैं। स्टीवन चू ने भारत के साथ क्लीन एनर्जी सहयोग बढ़ाने के समय अमेरिकी एनर्जी पॉलिसी का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत रहे हैं और सतत व टिकाऊ लक्ष्यों पर केंद्रित रहे हैं। उन्होंने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को एक इंटरव्यू में बताया, जब मैं ऊर्जा सचिव था, तो भारत में अपने समकक्षों के साथ मेरे बहुत करीबी और अच्छे संबंध थे। वे उन दिनों सस्टेनेबिलिटी, जलवायु परिवर्तन, इन सभी चीजों को लेकर बहुत गंभीर थे।
उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि भारत इन आदर्शों के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। शायद अमेरिका में थोड़ी रुकावट आई है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि हम इस प्रतिबद्धता पर वापस लौटेंगे। चू ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बड़ी अर्थव्यवस्था को मिलकर काम करना होगा और कहा, भविष्य में दुनिया को आगे ले जाने में भारत, चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे बड़े देशों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। ये देश मिलकर ही दुनिया की दिशा तय करेंगे।
भविष्य में सहयोग के क्षेत्र पर, उन्होंने न्यूक्लियर एनर्जी और नई रिएक्टर टेक्नोलॉजी की ओर इशारा किया और कहा, मुझे लगता है कि भारत ब्रीडर रिएक्टर डेवलप कर रहा है, जो बहुत बढ़िया है। ये फास्ट टर्म रिएक्टर हैं जो कन्वेंशनल सिजन रिएक्टर के लिए बहुत सारा फ्यूल जलाने में मदद करते हैं।
उन्होंने हाल के झगड़ों को घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई जरूरत से जोड़ा और कहा, मुझे लगता है कि हाल के युद्धों (यूक्रेन और ईरान) ने एनर्जी सिक्योरिटी, सीमाओं के अंदर एनर्जी एक्सेस को इसका बहुत जरूरी हिस्सा बना दिया है।</description><guid>12294</guid><pubDate>2026-04-19 12:47:54 12:49:12 pm</pubDate></item><item><title>लेबनान के राष्ट्रपति इजरायल के साथ स्थायी समझौते के लिए तैयार</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12293</link><description>बेरूत ।लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा कि लेबनान एक नए फेज में आ गया है, जो अपने लोगों के अधिकारों, अपने इलाके की एकता और देश की संप्रभुता की सुरक्षा के लिए स्थायी समझौते पर बातचीत करने पर फोकस कर रहा है। लेबनान के लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति आउन ने कहा कि देश सीजफायर लागू करने की कोशिशों से आगे बढ़कर लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखने के बड़े स्टेज की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि पिछले फेज की तरह, ये कोशिशें लेबनान को बचाने में मदद करेंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने सीजफायर का क्रेडिट लेबनान के लोगों की मिली-जुली कोशिशों और कुर्बानियों को दिया, जिसमें फ्रंटलाइन इलाकों में रहने वाले लोग भी शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ लगातार डिप्लोमैटिक जुड़ाव भी शामिल है।
आउन ने कहा कि बातचीत कमजोरी या पीछे हटने का संकेत नहीं है, बल्कि यह लेबनान के हितों की रक्षा करने और जानमाल के नुकसान को रोकने और विस्थापन को खत्म करने का एक संप्रभु फैसला है।
संघर्ष में हुए भारी नुकसान के बारे में बताते हुए लेबनानी राष्ट्रपति आउन ने कहा कि हजारों लेबनानी मारे गए हैं और वादा किया कि विदेशी हितों या राजनीतिक हिसाब-किताब के लिए और जान नहीं जानी चाहिए। उन्होंने कहा, मैं इन फैसलों की पूरी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं।
आउन ने आने वाले फेज के मुख्य मकसद बताए, जिसमें लेबनानी इलाके पर इजरायली हमलों को रोकना, इजरायली सेना की वापसी सुनिश्चित करना, कैदियों की वापसी सुनिश्चित करना, बेघर हुए नागरिकों की सुरक्षित वापसी मुमकिन बनाना और सभी लेबनानी इलाकों में सरकार का पूरा अधिकार वापस लाना शामिल है।</description><guid>12293</guid><pubDate>2026-04-19 12:45:56 12:47:31 pm</pubDate></item><item><title>प्रवासी भारतीयों को मेजबान देशों की सेवा करनी चाहिए : दत्तात्रेय होसबोले</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12292</link><description>स्टैनफोर्ड ।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीय प्रवासी समुदाय (डायस्पोरा) को लेकर एक स्पष्ट दृष्टिकोण सामने रखा है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों को सबसे पहले उस देश के प्रति निष्ठा रखनी चाहिए, जहां वे रह रहे हैं। हालांकि, इसके साथ ही उन्हें अपनी भारतीय सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहना चाहिए।
संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिए एक इंटरव्यू में दत्तात्रेय होसबोले ने बताया कि आरएसएस की विदेशों में गतिविधियां दो मुख्य सिद्धांतों पर आधारित हैं, जिनमें स्थानीय समाज में समरस होना और भारत से सांस्कृतिक जुड़ाव बनाए रखना शामिल हैं। उन्होंने कहा, दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले स्वयंसेवक वहां के हिंदू समाज को संगठित करने की कोशिश करते हैं। लेकिन उनका काम केवल समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि वे व्यापक समाज के लिए भी योगदान देते हैं।
दत्तात्रेय होसबोले ने स्पष्ट किया कि प्रवासियों की पहली जिम्मेदारी अपने रहने वाले देश के प्रति होनी चाहिए। उन्होंने कहा, जिस देश में वे रह रहे हैं, उसके प्रति निष्ठा, वफादारी और उस समाज और देश के विकास में योगदान देना सबसे पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह सोच इस बात को सुनिश्चित करती है कि प्रवासी भारतीय अपने अपनाए हुए देशों में जिम्मेदार नागरिक बनें, जबकि अपनी सांस्कृतिक पहचान भी बनाए रखें। सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण वे भारत से भी जुड़े रहते हैं और दूर रहकर भी भारत की सेवा करते हैं।
दत्तात्रेय होसबोले ने इस विचार को 'वसुधैव कुटुम्बकम' यानी 'पूरी दुनिया एक परिवार है' के सिद्धांत से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह विचार आरएसएस की सोच का मूल हिस्सा है। यह सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि इसे व्यवहार में भी उतारा जाता है। उनके अनुसार, यह दर्शन लोगों को पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देता है, जिससे टकराव कम होता है और सहयोग की भावना बढ़ती है।
उन्होंने भारत के हालिया वैश्विक संदेश (वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर) का भी जिक्र किया और कहा कि यह भी इसी सांस्कृतिक सोच को दर्शाता है।वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर बात करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि आज दुनिया कई गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। उन्होंने वर्चस्व की राजनीति, धर्म के नाम पर हिंसा और पर्यावरण संकट को प्रमुख समस्याएं बताया।
उन्होंने चेतावनी दी कि धार्मिक कट्टरता आज भी मानवता के लिए बड़ा खतरा है। धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा मानवता के लिए खतरा है। दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, अगर परिवार मजबूत होंगे, तो समाज मजबूत होगा और देश भी मजबूत होगा। उन्होंने 'प्रेम और स्नेह' को स्वस्थ समाज की बुनियाद बताया।
उन्होंने कहा कि ये सभी समस्याएं आपस में जुड़ी हुई हैं और इनका समाधान केवल सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के आधार पर ही संभव है। होसबोले ने कहा, विविधता है, लेकिन सार्वभौमिक एकता को व्यवहार में लाना जरूरी है। पर्यावरण के मुद्दे पर भी उन्होंने संतुलन की जरूरत बताते हुए कहा कि विज्ञान और तकनीक का विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण संतुलन की कीमत पर नहीं।
आरएसएस की भूमिका पर बात करते हुए होसबोले ने कहा कि 'संघ मानव सामाजिक पूंजी' के निर्माण पर काम करता है, जिसमें सांस्कृतिक मूल्य और संगठनात्मक अनुशासन दोनों शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'आरएसएस एक संगठन है, एक आंदोलन है और एक जीवनशैली भी है।' दत्तात्रेय होसबोले ने संकेत दिया कि इस मॉडल को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपनाया जा सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ अन्य देशों में अपने ढांचे को लागू करने की कोशिश नहीं करता, बल्कि वहां की परिस्थितियों के अनुसार सिद्धांतों को अपनाने पर जोर देता है। हम चाहते हैं कि हर देश में वहां के समाज के विकास के लिए ये मूल्य काम करें। दत्तात्रेय होसबोले ने आरएसएस की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को लेकर फैली गलतफहमियों को भी दूर करने की कोशिश की और कहा कि संघ किसी देश की राष्ट्रीय पहचान या राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित नहीं करना चाहता।

</description><guid>12292</guid><pubDate>2026-04-19 12:43:09 12:44:58 pm</pubDate></item><item><title>एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने गौतम अडानी, मुकेश अंबानी को छोड़ा पीछा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12287</link><description>नई दिल्ली।एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति के ताज को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दिग्गज कारोबारी गौतम अदाणी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब फिर से अपने नाम कर लिया है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अदाणी की संपत्ति में हुए हालिया इजाफे ने उन्हें इस सूची में शीर्ष पर पहुंचा दिया है।

आंकड़ों में संपत्ति का हाल
इस नए फेरबदल के बाद दोनों भारतीय दिग्गजों की कुल संपत्ति और वैश्विक रैंकिंग इस प्रकार है:
  गौतम अदाणी: इनकी कुल संपत्ति बढ़कर 92.6 अरब डॉलर हो गई है। इसके साथ ही वह वैश्विक स्तर पर दुनिया के 19वें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।
  मुकेश अंबानी: लंबे समय तक शीर्ष पर रहने वाले अंबानी अब 90.8 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ एशिया में दूसरे और दुनिया में 20वें स्थान पर आ गए हैं।

क्यों आया यह बदलाव?
अदाणी ग्रुप का शानदार प्रदर्शन: इस साल गौतम अदाणी की संपत्ति में 8.1 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। गुरुवार के एक हालिया कारोबारी सत्र में, जब बीएसई सेंसेक्स 123 अंक गिर गया था, तब भी अदाणी ग्रुप के शेयरों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अकेले उस दिन अदाणी की संपत्ति में लगभग 3.56 अरब डॉलर जुड़ गए।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का मिला-जुला रुख: दूसरी ओर, मुकेश अंबानी को इस साल अपनी संपत्ति में 16.9 अरब डॉलर की गिरावट का सामना करना पड़ा है, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। हालांकि, उन्हें हाल ही में 7.67 करोड़ (76.7 मिलियन) डॉलर का मामूली फायदा भी हुआ, लेकिन रिलायंस के शेयर मोटे तौर पर सपाट ही रहे, जिससे रैंकिंग में बदलाव आ गया।

वैश्विक अरबपतियों का क्या है हाल?
दुनिया के शीर्ष 20 अरबपतियों में से सात को इस साल अपनी संपत्ति में गिरावट का सामना करना पड़ा है। सबसे बड़ा नुकसान लक्जरी ब्रांड के मालिक बर्नार्ड अरनॉल्ट को हुआ है, जिनकी संपत्ति 44 अरब डॉलर घटी है। बिल गेट्स, वारेन बफे, स्टीव बाल्मर, लैरी एलिसन और मुकेश अंबानी जैसे दिग्गज भी इस साल नुकसान उठाने वाली सूची में शामिल हैं।

वहीं, दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति की बात करें तो टेस्ला के सीईओ एलन मस्क 656 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ पहले स्थान पर मजबूती से कायम हैं। उनके बाद 286 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ लैरी पेज दूसरे नंबर पर हैं।

अब आगे क्या?
अदाणी और अंबानी के बीच संपत्ति का यह अंतर दर्शाता है कि शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव कितनी तेजी से अरबपतियों की रैंकिंग को बदल सकता है। आने वाले समय में भी दुनिया के सबसे अमीर लोगों के बीच यह प्रतिस्पर्धा जारी रहने की उम्मीद है, जो सीधे तौर पर उनकी कंपनियों के बाजार प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

</description><guid>12287</guid><pubDate>2026-04-18 12:49:35 12:50:45 pm</pubDate></item><item><title>द बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के द्वारा नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में छत्तीसगढ़ से विनय दुबे एवं आशीष शुक्ला अधिवक्तागण सम्मिलित हुए.....</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12284</link><description>लीगल रिफॉर्म रोडमैप टू ए टेन ट्रिलियन भारत विषय पर विगत 11 एवं 12 अप्रैल 2026 को द बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के द्वारा इंडिया हैबिटेट सेंटर नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में अधिवक्तागण विनय दुबे एवं आशीष शुक्ला ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया, सेमिनार के प्रारंभिक सत्र के मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री सूर्यकांत, श्री आर. वेंकटरमणि, अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया, प्रो. एस. महेंद्र देव, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन, सुमन बेरी वाइस चेयरमेन नीति आयोग एवं ए. एस.चांदोक अध्यक्ष बी. ओ. आई. रहे, द्वितीय सत्र में मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस श्री अरविंद कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता कृषणनन वेणुगोपाल, डाक्टर आदित्य सोंधी, सम्राट उपाध्याय, तृतीय सत्र में श्री सी.एस.वैद्यनाथन, ए. के. गांगुली, श्याम दीवान अभ्यागत रहे, द्वितीय दिवस दिल्ली हाईकोर्ट के जज श्री सुब्रमण्यम प्रसाद, जस्टिस श्री सी. हरिशंकर, जस्टिस श्री अनीश दयाल, ए.एस.जी.विक्रमजीत बनर्जी, वरिष्ठ अधिवक्ता बॉम्बे हाई कोर्ट उदय प्रकाश वारंजीकर, नितिन ठक्कर भी की नोट स्पीकर में सम्मिलित रहे...</description><guid>12284</guid><pubDate>2026-04-18 10:49:30 10:51:30 am</pubDate></item><item><title>ट्रंप ने ईरान डील और सीजफायर पर आगे बढ़ने के संकेत दिए</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12283</link><description>वाशिंगटन ।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान अब समझौता होने के काफी करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परमाणु समझौते पर प्रगति हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो संघर्ष विराम (सीजफायर) को आगे बढ़ाया जा सकता है। ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ईरान समझौता करना चाहता है और हम उनसे बहुत अच्छे तरीके से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान अब वे कदम उठाने को तैयार है, जिनके लिए वह दो महीने पहले तैयार नहीं था। उन्होंने साफ किया कि मुख्य उद्देश्य वही है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हुआ तो दुनिया के लिए बड़ा खतरा होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी समझौते में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सके।
ट्रंप ने कहा कि बातचीत तेजी से आगे बढ़ सकती है और अगली आमने-सामने की बैठक शायद वीकेंड में हो सकती है। सीजफायर को लेकर उन्होंने कहा कि इसे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन यह तय नहीं है। उन्होंने कहा, अगर हम समझौते के करीब होंगे तो मैं इसे बढ़ा सकता हूं, लेकिन हम पहले ही काफी करीब हैं।
साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो फिर से लड़ाई शुरू हो सकती है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य और आर्थिक दबाव के कारण ही ईरान बातचीत की मेज पर आया है। उन्होंने प्रतिबंधों को बहुत प्रभावी बताया और कहा कि इनके कारण ईरान कोई खास व्यापार नहीं कर पा रहा है और उसकी ताकत भी काफी कम हो गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि बाजार और तेल की कीमतों पर इसका अच्छा असर दिख रहा है। उन्होंने कहा, शेयर बाजार अच्छा चल रहा है। तेल की कीमतें नीचे आ रही हैं... ऐसा लग रहा है कि हम ईरान के साथ एक डील करने जा रहे हैं। मध्य पूर्व के बारे में ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच चल रही अलग बातचीत को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि एक हफ्ते के लिए संघर्ष विराम का एक अच्छा प्रस्ताव बन रहा है, जिसमें हिजबुल्लाह भी शामिल हो सकता है।
ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हाल की बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, मेरी उनसे बहुत अच्छी बात हुई, वे अच्छा काम कर रहे हैं। उन्होंने इस बातचीत को सकारात्मक बताया। यूक्रेन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वहां हालात बदल रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनका ज्यादा ध्यान ईरान पर है। उन्होंने कहा, यूक्रेन में बहुत लोग मर रहे हैं, लेकिन अभी हमारा मुख्य ध्यान ईरान पर है।
ट्रंप ने ईरान पर अपने रुख को लेकर पोप की आलोचना को खारिज कर दिया और जोर देकर कहा कि उन्हें असहमत होने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, पोप जो चाहें कह सकते हैं लेकिन मैं उनसे असहमत हो सकता हूं। उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने देना वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर देगा।

</description><guid>12283</guid><pubDate>2026-04-17 18:56:59 6:58:43 pm</pubDate></item><item><title>ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के अधिकारों पर समझौते से किया इनकार</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12282</link><description>तेहरान।ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि ईरान अपने न्यूक्लियर संवर्धन अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा। सरकारी मीडिया ने गुरुवार को बताया कि न्यूक्लियर एनर्जी पर उसका अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर आधारित है। तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बाघेई ने पश्चिमी मीडिया में ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर फैल रही अटकलों को खारिज किया।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ईरान के वैध अधिकार पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु संवर्धन का अधिकार किसी बाहरी शक्ति की कृपा या रियायत नहीं है, जिसे दबाव या संघर्ष के समय वापस लिया जा सके। जब तक ईरान एनपीटी का सदस्य है, उसे इस संधि के सभी प्रावधानों का पूरा लाभ मिलना चाहिए।पाकिस्तान में हाल ही में हुई ईरान-अमेरिका वार्ता को लेकर संवर्धन से जुड़ी चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए बाघेई ने कहा कि किसी भी संभावित समझौते के लिए पहले एक व्यापक ढांचा तय होना जरूरी है। जब तक बुनियादी शर्तें तय नहीं होतीं, तब तक युद्ध और शांति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत बातचीत जल्दबाजी होगी।
लेबनान प्रतिरोध को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान ने हमेशा वैध प्रतिरोध का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि लेबनान में युद्ध समाप्त करना भी उस सीजफायर समझौते का हिस्सा था, जिस पर इस्लामाबाद वार्ता में चर्चा हुई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरा पक्ष (इजरायल) शुरू से ही सीजफायर की शर्तों का पालन नहीं कर रहा है। बाघेई ने यह भी कहा कि किसी समझौते के तहत यदि एक पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करता है, तो दूसरे पक्ष को भी अपनी जिम्मेदारियों को उसी अनुपात में समायोजित करने का अधिकार होता है।
उन्होंने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया कि ईरान ने लेबनान में प्रतिरोध मोर्चों का समर्थन कम किया है। बाघेई ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर यूरोपीय प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान और उसके क्षेत्रीय साझेदार इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम हैं।

</description><guid>12282</guid><pubDate>2026-04-17 13:10:18 1:15:32 pm</pubDate></item><item><title>परमाणु मांगों पर विवाद के बीच अमेरिका और ईरान की वार्ता ठप</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12279</link><description>वॉशिंगटन ।अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता में काफी प्रगति हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिका अपनी प्रमुख मांगों पर अड़ा रहा, जिनमें समृद्ध यूरेनियम को हटाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सत्यापन योग्य सीमाएं शामिल हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फाक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान में उच्च स्तर पर हुई वार्ताओं ने लचीलेपन और अमेरिका की रेड लाइन्स दोनों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, मैं यह नहीं कहूंगा कि चीजें गलत हुईं। मुझे लगता है कि कई चीजें सही भी हुईं। हमने काफी प्रगति की, और जोड़ा कि यह पहली बार था जब ईरानी और अमेरिकी सरकारें इतने उच्च स्तर पर मिलीं।
वेंस के अनुसार, मुख्य विवाद का मुद्दा यह रहा कि अमेरिका इस बात पर अड़ा हुआ है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता, जो उसकी सभी वार्ता स्थितियों का आधार है। उन्होंने दो गैर-समझौताकारी मांगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, हमें समृद्ध सामग्री (यूरेनियम) को ईरान से बाहर करना होगा। दूसरी मांग थी परमाणु हथियार विकसित न करने की निर्णायक प्रतिबद्धता, जिसे सत्यापन तंत्र के जरिए सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा, ईरान यह कह दे कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, यह एक बात है लेकिन इन बातों का सत्यापन भी जरूरी है। वेंस के मुताबिक, ईरानी वार्ताकार हमारी दिशा में बढ़े लेकिन पर्याप्त नहीं बढ़े जिसके कारण दोनों पक्षों ने बातचीत रोककर अपने-अपने देशों में लौटने का फैसला किया।
उन्होंने कहा, अब गेंद उनके पाले में है और संकेत दिया कि आगे की बातचीत तेहरान की अमेरिकी शर्तें मानने की इच्छा पर निर्भर करेगी। वेंस ने वार्ता की प्रगति को क्षेत्रीय मुद्दों से भी जोड़ा, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना शामिल है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा, हमें जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला देखना होगा, और ईरान पर बातचीत के दौरान लक्ष्य बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जहाजों की आवाजाही में कुछ बढ़ोतरी हुई है लेकिन पूरी तरह से खुलना अभी नहीं हुआ है।</description><guid>12279</guid><pubDate>2026-04-15 13:11:27 1:14:14 pm</pubDate></item><item><title>रूसी विदेश मंत्री लावरोव दो दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचे</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12278</link><description>बीजिंग ।पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मंगलवार को चीन की दो-दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे। इस यात्रा का उद्देश्य प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों पर चर्चा करना है। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, 14-15 अप्रैल तक चीन की अपनी यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ बातचीत करेंगे।
मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों के विदेश मंत्री द्विपक्षीय सहयोग के मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला, विभिन्न स्तरों पर संपर्कों की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा करेंगे। इसमें संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, एससीओ, जी20, एपीईसी और अन्य बहुपक्षीय तंत्रों व मंचों के भीतर संयुक्त कार्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यूक्रेन संकट और मध्य पूर्व की स्थिति सहित कई ज्वलंत विषयों और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का विस्तृत आदान-प्रदान होने की उम्मीद है।
इसी बीच, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों के विदेश मंत्री द्विपक्षीय संबंधों के विकास, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग, और आपसी चिंता के अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे और अपने-अपने रुख में समन्वय स्थापित करेंगे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने सोमवार को स्वीकार किया कि होर्मुज स्ट्रेट की अमेरिकी नाकेबंदी का अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
मॉस्को में एक नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान रूस की अग्रणी समाचार एजेंसी 'तास' ने क्रेमलिन प्रवक्ता के हवाले से कहा, बहुत हद तक संभावना है कि इस तरह की कार्रवाइयों का अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना जारी रहेगा। इस बात को काफी हद तक निश्चितता के साथ माना जा सकता है।
उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अवरुद्ध करने के अमेरिकी कदम से संबंधित विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। स्ट्रेट को अवरुद्ध करने की अमेरिकी धमकी पर टिप्पणी करते हुए पेस्कोव ने कहा, इस संबंध में कई विवरण अभी भी अस्पष्ट और समझ से परे हैं, इसलिए मैं इस समय कोई भी ठोस टिप्पणी करने से परहेज करूंगा।</description><guid>12278</guid><pubDate>2026-04-15 13:08:29 1:10:37 pm</pubDate></item><item><title>अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद चीनी टैंकर ने पार किया होर्मुज जलडमरूमध्य</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12277</link><description>तेहरान।ईरान पर अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी के बावजूद मंगलवार को एक प्रतिबंधित चीनी टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गया है।शिपिंग डेटा से पता चला कि चीनी स्वामित्व वाला और चीनी चालक दल द्वारा संचालित टैंकर रिच स्टारी मंगलवार को इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरा है।'फुल स्टार' के नाम से जाना जाने वाला यह जहाज, तेहरान को ऊर्जा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने के आरोप में 2023 में अमेरिका द्वारा काली सूची में डाला गया था।
नाकाबंदी के बाद 24 घंटे में 2 जहाज गुजरे
नाकाबंदी के बाद से अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित एक अन्य टैंकर भी मंगलवार को होर्मुज में प्रवेश कर गया है।
रिच स्टारी ने नाकाबंदी लागू होने के बाद, ईरान के क़ेशम द्वीप के पास संकरे जलमार्ग की ओर रुख किया और वापस लौटकर कुछ घंटों बाद यात्रा फिर शुरू की थी।रिच स्टारी मध्यम आकार का टैंकर है जो लगभग 2.50 लाख बैरल मेथनॉल ले जा रहा है।इसने संयुक्त अरब अमीरात के हमरियाह बंदरगाह पर अपना माल लोड किया था।
चीन ने दी है अमेरिका को सख्त चेतावनी
चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाकाबंदी संबंधी बयान के बाद बयान जारी कर अमेरिका को चेतावनी दी थी।उन्होंने कहा था कि बीजिंग तेहरान के साथ अपने व्यापार और ऊर्जा संबंधी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करेगा और चीनी जहाज अपना परिचालन जारी रखेंगे।उन्होंने अमेरिका से कहा कि उनके मामले में दखल न दें, होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण है और यह चीन के लिए खुला है।</description><guid>12277</guid><pubDate>2026-04-15 13:06:33 1:08:05 pm</pubDate></item><item><title>ईरान के पास कोई दांव नहीं बचा : ट्रंप</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12271</link><description>वाशिंगटन ।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने कहा है कि ईरान की सैन्य ताकत अब काफी कमजोर हो चुकी है और बातचीत में उसके पास अब कोई मजबूत विकल्प नहीं बचा है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान लंबे समय से अमेरिका के खिलाफ कड़ी बातें करता रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान अक्सर अमेरिका मुर्दाबाद और इजरायल मुर्दाबाद जैसे नारे लगाता रहा है और यहां तक कहता है कि वह अमेरिका को खत्म कर देगा। ट्रंप ने यह भी सवाल उठाया कि ऐसे बयानों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा प्रतिक्रिया क्यों नहीं होती। उन्होंने कहा कि यह बहुत गंभीर बात है, लेकिन दुनिया इसे उतना महत्व नहीं देती। उन्होंने दावा किया कि हाल में अमेरिका की कार्रवाई से हालात पूरी तरह बदल गए हैं। उनके अनुसार, ईरान की सेना अब लगभग खत्म हो चुकी है और उसकी ताकत पहले जैसी नहीं रही।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की नेतृत्व व्यवस्था में भी बदलाव आया है। उन्होंने कहा, यहां सत्ता परिवर्तन हुआ है क्योंकि जिन लोगों से हमने कल बात की थी, सच कहूं तो वे बहुत होशियार और तेज-तर्रार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अपना बहुत सारा पैसा हथियारों पर खर्च किया, लेकिन अमेरिका ने उन हथियारों का बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया है।
ट्रंप का कहना है कि उनकी सख्त भाषा और रुख के कारण ही ईरान बातचीत की मेज पर आया और अब तक वहां बना हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंत में अमेरिका को वह सब मिलेगा जो वह चाहता है।
उन्होंने साफ कहा कि वे किसी समझौते में थोड़ी-बहुत रियायत नहीं चाहते, बल्कि पूरी तरह अपनी शर्तें मनवाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, मैंने अपने लोगों से कहा कि मुझे सब कुछ चाहिए। मुझे 90 प्रतिशत नहीं चाहिए। मुझे 95 प्रतिशत नहीं चाहिए। मैंने उनसे कहा कि मुझे सब कुछ चाहिए।</description><guid>12271</guid><pubDate>2026-04-13 16:37:16 4:38:40 pm</pubDate></item><item><title>ईरान के अधिकारों का सम्मान करे अमेरिका : राष्ट्रपति पेजेश्कियान</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12270</link><description>तेहरान ।ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संकेत दिया है कि तेहरान अमेरिका के साथ किसी समझौते पर पहुंचने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि समाधान के लिए वाशिंगटन को अपनी तानाशाही छोड़नी होगी और ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान करना होगा। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, अगर अमेरिकी सरकार अपनी तानाशाही छोड़ दे और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते तक पहुंचने के रास्ते जरूर मिल जाएंगे। इसके साथ ही, राष्ट्रपति ने ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ की प्रशंसा की। उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, मैं बातचीत करने वाली टीम के सदस्यों, खासकर अपने भाई डॉ. गालिबाफ की सराहना करता हूं और कहता हूं कि ईश्वर आपको शक्ति दे।
ये टिप्पणी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच घंटों चली वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद आई। अमेरिका और ईरान की यह वार्ता रविवार को हुई। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरान की ओर से गालिबाफ ने डेलीगेशन की कमान संभाली। कई घंटों तक चली बातचीत बाद में बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हुई।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि विस्तृत चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के वापस लौटेगा, लेकिन यह स्थिति अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए अधिक नुकसानदेह है। वहीं, गालिबाफ ने दावा किया कि इस बेनतीजा वार्ता में अमेरिका नाकाम रहा है। गालिबाफ ने 'एक्स' पर बताया कि बातचीत शुरू होने से पहले ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि ईरान की ओर से नीयत और इच्छा दोनों मौजूद हैं, लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों की वजह से उन्हें भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा, विरोधी पक्ष इस दौर की बातचीत में ईरानी प्रतिनिधिमंडल मिनाब 168 का भरोसा जीतने में आखिरकार नाकाम रहा।</description><guid>12270</guid><pubDate>2026-04-13 16:34:58 4:36:37 pm</pubDate></item><item><title>धरती पर सुरक्षित लौटे चारों अंतरिक्ष यात्री</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12266</link><description>वाशिंगटन ।नासा का आर्टेमिस ।। मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस मिशन में शामिल सभी अंतरिक्ष यात्री 10 दिन की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करने के बाद ओरियन अंतरिक्ष यान के जरिए सुरक्षित रूप से समुद्र में उतर गए। मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री- रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल थे। यह ऐतिहासिक वापसी प्रशांत महासागर में सैन डिएगो के तट के पास हुई। कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद पैराशूट सिस्टम के माध्यम से समुद्र में सुरक्षित उतरा। इसके बाद रिकवरी टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
काफी देर चली प्रक्रिया के बाद अंतरिक्षयात्रियों को सुरक्षित कैप्सूल से बाहर निकाला गया। यहां से सेना का हेलीकॉप्टर उन्हें लेने के लिए पहुंचा। नासा ने एक्स पोस्ट पर लिखा, आर्टेमिस II मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्रियों को ओरियन अंतरिक्ष यान से सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाल लिया गया है और वे अब यूएसएस जॉन पी. मुर्था पर हैं। इसके बाद उन्हें चिकित्सा कक्ष में ले जाया जाएगा, जहां मिशन के बाद उनकी चिकित्सा जांच की जाएगी। यूएसएस जॉन पी. मुर्था के डेक पर क्रिस्टीना और विक्टर के चेहरे पर बड़ी मुस्कान थी, क्योंकि वे मिशन के बाद की नियमित चिकित्सा जांच के लिए ले जाए जाने का इंतजार कर रहे थे।
नासा के अंतरिक्ष यात्री क्रिस विलियम्स ने भी ओरियन की पृथ्वी वापसी पर सोशल मीडिया पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद हमारे दल ने नासा आर्टेमिस मिशन II के दल को चंद्रमा की यात्रा से लौटते समय पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हुए देखा! मॉड्यूल के जलने के साथ ही हमें सबसे पहले एक तेज रोशनी और एक लकीर दिखाई दी। हमने ओरियन कैप्सूल को सीधे प्रवेश करते हुए नहीं देखा, लेकिन वायुमंडल के ऊपरी भाग में उसके द्वारा छोड़ी गई धुंधली लकीर को अवश्य देखा। अपने साथियों के इस अद्भुत मिशन के बाद पृथ्वी पर सुरक्षित लौटने पर हमें अत्यंत प्रसन्नता हुई!
पृथ्वी पर लौटने से पहले नासा ने जानकारी दी थी कि लगभग 6 लाख 90 हजार मील की लंबी यात्रा पूरी करने के बाद यह दल पृथ्वी के करीब पहुंच रहा है। यह मिशन दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि पांच दशक से अधिक समय बाद इंसान ने पृथ्वी की निचली कक्षा से आगे गहरे अंतरिक्ष में कदम रखा है। नासा के अनुसार, इस यात्रा में अंतरिक्ष यात्री अब तक की सबसे अधिक दूरी तक गए, जो भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए रास्ता तैयार करेगी।

</description><guid>12266</guid><pubDate>2026-04-11 13:04:15 1:06:31 pm</pubDate></item><item><title>पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान पर भड़के पीएम नेतन्याहू</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12264</link><description>तेल अवीव ईरान के साथ अमेरिका के सीजफायर की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह पर बड़ा हमला कर दिया। इस हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई। वहीं दोनों पक्षों के बीच सीजफायर की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल के इस हमले को लेकर कुछ ऐसा कहा जिससे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भड़क उठे। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि इजरायल के विनाश की बात को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।
पीएम नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का इजरायल को खत्म करने का आह्वान बहुत बुरा है। यह ऐसा बयान नहीं है जिसे किसी भी सरकार से बर्दाश्त किया जा सके, खासकर उस सरकार से जो शांति के लिए न्यूट्रल आर्बिटर होने का दावा करती है। दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक्स पर पोस्ट में लिखा इजरायल बुरा है और इंसानियत के लिए श्राप है। इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, लेबनान में नरसंहार हो रहा है। इजरायल बेगुनाह नागरिकों को मार रहा है, पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान, खून-खराबा लगातार जारी है।
इजरायल के खिलाफ आग उगलते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा, मैं उम्मीद और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने फिलिस्तीनी धरती पर इस कैंसर जैसे राज्य का निर्माण किया है, वे यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाएं और उन्हें नरक में जलाएं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बीते दिन इजरायल के हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने बताया कि इजरायल के हमले के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से फोन पर बातचीत की।
पीएम शहबाज ने एक्स पर लिखा, मैंने आज शाम लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से बात की। मैंने लेबनान के खिलाफ इजरायल के लगातार हमले की कड़ी निंदा की और इन दुश्मनी की वजह से लेबनान में हजारों लोगों की जान जाने पर दुख जताया। मैंने इस्लामाबाद में होने वाली ईरान-अमेरिका बातचीत के जरिए बातचीत को आसान बनाने समेत शांति की कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को फिर से सुनिश्चित किया।</description><guid>12264</guid><pubDate>2026-04-10 15:34:59 3:36:43 pm</pubDate></item><item><title>आर्टेमिस-II मिशन बड़ी उपलब्धि के बाद पृथ्वी पर लौटने के करीब</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12263</link><description>वाशिंगटन ।नासा ने मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि की घोषणा की है। शुक्रवार को नासा ने बताया कि उसका आर्टेमिस-II मिशन 1 अप्रैल को सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ था और अब अपनी ऐतिहासिक यात्रा के अंतिम चरण में पहुंच गया है। नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि अंतरिक्ष यान चंद्रमा के चारों ओर घूम चुका है और अब पृथ्वी पर लौट रहा है। इसकी समुद्र में लैंडिंग (स्प्लैशडाउन) 10 अप्रैल को रात करीब 8:07 बजे (ईटी) प्रशांत महासागर में होने की उम्मीद है। नासा ने अपने संदेश में कहा कि वे अंतरिक्ष यात्रियों का फिर से पृथ्वी पर स्वागत करने का इंतजार कर रहे हैं।
यह मिशन पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह पांच दशकों से भी ज़्यादा समय के बाद, पृथ्वी की निचली कक्षा से परे गहरे अंतरिक्ष की खोज में मानवता की वापसी का प्रतीक है। नासा के अनुसार, इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने अब तक की सबसे लंबी दूरी तय की है, जो भविष्य में चंद्रमा पर जाने वाले अभियानों के लिए रास्ता तैयार करेगा।
मिशन के दौरान पहले, चार सदस्यों वाले दल ने पृथ्वी से 248,655 मील की यात्रा करके एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इस दल में रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल रहे। अपनी यात्रा के सबसे दूर के बिंदु पर वे लगभग 252,756 मील तक पहुंचे। यह उपलब्धि पहले अपोलो-13 मिशन के रिकॉर्ड से भी आगे निकल गई है।
अधिकारियों के अनुसार, यह 10 दिन का मिशन स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान की गहरे अंतरिक्ष में क्षमता को परखने के लिए बनाया गया है। इसमें चंद्रमा के पास से गुजरना भी शामिल था, जो भविष्य के मिशनों के लिए बहुत जरूरी कदम है।
नासा की अधिकारी डॉ. लोरी ग्लेज ने कहा कि यह सफलता दिखाती है कि एजेंसी लगातार नई सीमाओं को पार करने और अंतरिक्ष में नई खोज करने के लिए प्रतिबद्ध है। ओरियन अंतरिक्ष यान से जेरेमी हैनसन ने कहा कि यह उपलब्धि पुराने अंतरिक्ष यात्रियों की विरासत को सम्मान देती है और साथ ही अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए दौर की शुरुआत भी करती है।
आर्टेमिस-II मिशन को नासा के उस बड़े लक्ष्य की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जिसमें चंद्रमा पर लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी स्थापित करना शामिल है।</description><guid>12263</guid><pubDate>2026-04-10 15:32:56 3:34:38 pm</pubDate></item><item><title>अमेरिका ने ईरान की धरती से ढूंढ निकाला अपना पायलट</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12261</link><description>वाशिंगटन ।ईरान की धरती से अमेरिकी सेना ने अपने पायलट को सुरक्षित वापस निकाल लिया है। ईरान ने अमेरिका के दो फाइटर जेट एफ-15ई और ए-10 को हवा में मार गिराया। ईरान के इस हमले में एफ-15ई के दो क्रू मेंबर्स में से एक को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने सुरक्षित वापस निकाल लिया था, जबकि एक लापता था। रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि दूसरे लापता क्रू मेंबर को भी रेस्क्यू कर लिया गया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह एक ट्रूथ सोशल पर पोस्ट में कहा कि एक लापता अमेरिकी क्रू मेंबर को अमेरिकी फोर्स ने बचा लिया है। बता दें, ईरानी सेना ने लापता क्रू मेंबर को ढूंढने के लिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया था और खबर है कि उसे पकड़ने में मदद करने वाली किसी भी जानकारी के लिए 60,000 डॉलर के इनाम की घोषणा की थी। हालांकि, अमेरिकी सेना ने अपने पायलट को सुरक्षित निकालकर सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दिया।
ट्रंप ने लिखा, हमने उसे खोज लिया! मेरे साथी अमेरिकियों, पिछले कुछ घंटों में, अमेरिकी सेना ने अमेरिकी इतिहास के सबसे हिम्मत वाले सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में से एक को अंजाम दिया। ये हमारे एक शानदार क्रू मेंबर ऑफिसर के लिए था, जो एक बहुत सम्मानित कर्नल भी हैं। मुझे आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि वह अब सुरक्षित हैं!
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, यह बहादुर योद्धा ईरान के खतरनाक पहाड़ों में दुश्मन की लाइन के पीछे था, हमारे दुश्मन उसका पीछा कर रहे थे, जो हर घंटे उसके करीब आते जा रहे थे, लेकिन वह कभी भी सच में अकेला नहीं था क्योंकि उसके कमांडर इन चीफ, युद्ध सचिव, संयुक्त सेनाध्यक्षों के अध्यक्ष और साथी वॉरफाइटर 24 घंटे उसकी लोकेशन पर नजर रख रहे थे और उसे बचाने के लिए दिल से योजना बना रहे थे। मेरे कहने पर, अमेरिकी सेना ने उसे वापस लाने के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों से लैस दर्जनों एयरक्राफ्ट भेजे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि क्रू मेंबर को चोटें आई हैं, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। उन्होंने कहा, उसे चोटें आई हैं, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। यह चमत्कारी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन कल एक और बहादुर पायलट के सफल रेस्क्यू के अतिरिक्त है, जिसे हमने कन्फर्म नहीं किया, क्योंकि हम अपने दूसरे रेस्क्यू ऑपरेशन को खतरे में नहीं डालना चाहते थे। अमेरिकी सेना के इतिहास में यह पहली बार है जब दो अमेरिकी पायलटों को दुश्मन के इलाके में अलग-अलग बचाया गया है। हम कभी भी किसी अमेरिकी वॉरफाइटर को पीछे नहीं छोड़ेंगे! यह एक बार फिर साबित करता है कि हमने ईरानी आसमान पर जबरदस्त एयर डॉमिनेंस और श्रेष्ठता हासिल कर ली है।</description><guid>12261</guid><pubDate>2026-04-05 16:42:28 4:44:21 pm</pubDate></item><item><title>पाकिस्तान की बढ़ी मुसीबत, UAE ने वापस मांगा 3.5 अरब डॉलर का कर्ज</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12253</link><description>इस्लामाबाद ।ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष खत्म करने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता करने की कोशिश की। हालांकि आर्थिक मोर्चे पर खुद तंगहाली से जूझ रहे पाकिस्तान को अब संयुक्त अरब अमीरात ने बड़ा झटका दे दिया है। दुनिया से आर्थिक मदद मांगकर काम चला रहे पाकिस्तान को इस महीने के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लिया हुआ 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाना होगा।
यूएई की तरफ से कर्ज चुकाने की अवधि को बार-बार बढ़ाया जा रहा था। हालांकि, शुक्रवार को आई मीडिया रिपोर्ट्स में साफ किया गया है कि यूएई ने पाकिस्तान से इस महीने के अंत तक सारा कर्ज वापस करने के लिए कहा है। मौजूदा समय में पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार (रिजर्व) में 21 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि है। विदेशी मुद्रा भंडार की राशि से पाकिस्तान फिलहाल यूएई को कर्ज चुका सकता है, लेकिन आने वाले महीनों में देश को बाहरी वित्तीय मदद की आवश्यकता पड़ सकती है।
हालांकि, पाकिस्तान दुनिया के अन्य देशों के सामने हाथ फैलाकर ही अपनी गाड़ी को आगे खींच रहा है। 31 मार्च 2026 तक पाकिस्तान ने आईएमएफ से लगभग 729 करोड़ डॉलर का कर्ज ले रखा है। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, पाकिस्तान पर कुल विदेशी कर्ज दिसंबर 2025 की दूसरी तिमाही तक लगभग 138 अरब डॉलर पहुंच गया है।
आईएमएफ के अनुसार, पाकिस्तान वर्तमान में आईएमएफ के 7 अरब डॉलर के विस्तारित फंड सुविधा कार्यक्रम के तहत काम कर रहा है। मार्च 2026 के अंत में, आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए लगभग 1.2 अरब डॉलर की अगली किस्त जारी करने पर सहमति जताई।
चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा कर्जदाता है। चीन ने पाकिस्तान को लगभग 29 अरब डॉलर का कर्ज दिया है। इसके अलावा सऊदी अरब ने करीब 9.16 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता और जमा राशि के रूप में मदद दी है।
प्रोफिट बाई पाकिस्तान के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान को अप्रैल 2026 में 1.3 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड का भुगतान भी करना है।
पाकिस्तानी मीडिया डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने बताया कि अबू धाबी ने रकम तुरंत वापस करने की मांग की थी। अधिकारी ने कहा, यह रकम जल्द से जल्द वापस कर दी जाएगी। वित्तीय कारणों से राष्ट्रीय गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता।
डॉन के अनुसार, ये फंड 2019 में यूएई द्वारा पाकिस्तान के पेमेंट बैलेंस को स्थिर करने में मदद के लिए दिए गए बाहरी फाइनेंसिंग सपोर्ट का हिस्सा थे। अधिकारी ने कहा कि इस फैसले से अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट के जरिए जमा किए गए डिपॉजिट को लेकर अनिश्चितता खत्म हो गई है, जिसे 2019 से कई बार रोलओवर किया गया था।

</description><guid>12253</guid><pubDate>2026-04-04 17:08:16 5:11:26 pm</pubDate></item><item><title>नाटो प्रमुख मार्क रुट्टे अगले सप्ताह वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से करेंगे मुलाकात</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12252</link><description>वाशिंगटन ।उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के महासचिव मार्क रुट्टे 8 से 12 अप्रैल तक वाशिंगटन डीसी की यात्रा पर रहेंगे, जहां वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। यह जानकारी नाटो के प्रवक्ता द्वारा जारी एक बयान में दी गई है। प्रवक्ता ने बताया कि 8 अप्रैल को रुट्टे, ट्रंप, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ बातचीत करेंगे। इस यात्रा में 9 अप्रैल को एक सार्वजनिक कार्यक्रम भी शामिल है, जिसमें रुट्टे द्वारा रोनाल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल फाउंडेशन एंड इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित एक चर्चा में भाषण देने और भाग लेने की उम्मीद है।
यह यात्रा ट्रांस अटलांटिक गठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर हो रही है, क्योंकि ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच ट्रंप की हालिया आलोचना के बाद तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूरोपीय सहयोगियों के प्रति कड़ी असंतोष व्यक्त करते हुए नाटो पर अमेरिकी रणनीतिक उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए पर्याप्त कदम न उठाने का आरोप लगाया है।
ट्रंप ने तो यहां तक संकेत दिया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका 77 साल पुराने गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर पुनर्विचार कर सकता है, जिससे नाटो के भविष्य को लेकर सदस्य देशों में चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने यूरोप में सैन्य ठिकानों तक अमेरिकी सैन्य पहुंच को प्रतिबंधित करने और होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मार्गों की सुरक्षा में नेतृत्व करने में रुचि नहीं दिखाने के लिए सहयोगी देशों की आलोचना की है।
नाटो अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 8 अप्रैल को रुट्टे और ट्रंप के बीच होने वाली आगामी बैठक पर बारीकी से नजर रखी जाएगी, क्योंकि यह भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में गठबंधन की दिशा तय कर सकती है।
ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद से कई संकटों के दौरान अमेरिकी नेता के साथ रचनात्मक संबंध बनाए रखने की उनकी क्षमता के कारण, नीदरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री रुट्टे को पर्यवेक्षकों द्वारा ट्रंप का सलाहकार बताया गया है। उन्होंने लगातार तर्क दिया है कि ट्रंप के दबाव ने यूरोपीय देशों को रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है, जिससे अंततः नाटो की क्षमताएं मजबूत हुई हैं। वाशिंगटन में होने वाली चर्चाओं में तेजी से अस्थिर होते वैश्विक वातावरण में गठबंधन की एकता, रक्षा प्रतिबद्धताओं और रणनीतिक समन्वय पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।</description><guid>12252</guid><pubDate>2026-04-04 17:03:40 5:07:42 pm</pubDate></item><item><title>गृह मंत्री अमित शाह ने भरा सेल्फ-एन्यूमरेशन फॉर्म</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12246</link><description>नई दिल्ली ।देश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत के साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का फॉर्म भरकर इस अभियान में भागीदारी की। उन्होंने लोगों से भी इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग देने की अपील की है। गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर फॉर्म भरते समय का वीडियो साझा करते हुए बताया कि उन्होंने आवास गणना के तहत अपने दिल्ली स्थित आवास पर स्वयं यह प्रक्रिया पूरी की। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि जनगणना देश की विकास यात्रा को गति देने में अहम भूमिका निभाती है और इसके माध्यम से सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सही और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही जनगणना की टीमें घर-घर जाकर आंकड़े एकत्रित करेंगी, ऐसे में नागरिकों का सहयोग बेहद जरूरी है। अपने पोस्ट में उन्होंने जनगणना की आधिकारिक वेबसाइट का लिंक भी साझा किया और लोगों को स्वयं फॉर्म भरने के लिए प्रेरित किया, ताकि प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जा सके।
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसी तरह स्व-गणना फॉर्म भरने की जानकारी साझा करते हुए देशवासियों से इस अभियान में भाग लेने की अपील की है। सरकार का मानना है कि सटीक और अद्यतन जनगणना आंकड़े नीतियों के निर्माण, संसाधनों के बेहतर आवंटन और समावेशी विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में जनगणना 2027 को एक व्यापक और तकनीकी रूप से उन्नत प्रक्रिया बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
दरअसल, यह कवायद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जनगणना 2027 भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी, जो वर्षों से चली आ रही पारंपरिक कागज-आधारित प्रणाली से हटकर होगी। इसे जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत दो चरणों में संचालित किया जा रहा है। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (एचएलओ)33 अधिसूचित प्रश्नों के माध्यम से आवास की स्थितियों, संपत्तियों, सुविधाओं और घरेलू विवरणों से संबंधित डेटा एकत्र करने पर केंद्रित है।
इसकी एक खास बात 'स्व-गणना' की शुरुआत है। इसके तहत नागरिक एक खास पोर्टल के जरिए अपनी घर-परिवार की जानकारी अपनी मर्जी से ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। यह 15 दिनों की समय-सीमा हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में घर-घर जाकर की जाने वाली जनगणना से पहले आती है। इसका मकसद सटीकता बढ़ाना, गलतियां कम करना और ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।</description><guid>12246</guid><pubDate>2026-04-02 14:56:49 2:57:58 pm</pubDate></item><item><title>कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12245</link><description>भोपाल।मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा हुई है। इस खबर के बाद सियासी गलियारों में विधायक भारती को लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है। मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के द्वारा विधायक भारती को दोषी करार दिया गया था।

राजेंद्र भारती को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटाले के मामले में दोषी करार देते हुए तिहाड़ जेल भेज दिया है। कोर्ट ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत दोषी पाया। करीब 25 साल पुराने घोटाले के इस मामले में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती और बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों को बैंक के साथ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी पाया है।
यह सजा दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटाले से जुड़े मामले में सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पाए जाने के बाद यह फैसला दिया। यह मामला कई वर्षों से चर्चा में था। इस केस में कोर्ट ने बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति को भी दोषी माना है। अब दोनों धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में फंस चुके हैं।
इस घोटाले की कहानी 24 अगस्त 1998 से शुरू होती है, जब राजेंद्र भारती की मां सावित्री श्याम ने जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक, दतिया में 10 लाख रुपये की एफडी कराईं थी। यह एफडी 13.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर की गई थी। उस समय राजेंद्र भारती बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे। वहीं श्याम सुंदर श्याम जनसहयोग एवं सामुदायिक विकास संस्थान से जुड़े हुए थे, जिससे दोनों का प्रत्यक्ष लाभ जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
अभियोजन के अनुसार, उस समय राजेंद्र भारती ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए धोखाधड़ी का जाल बिछाया। इस कार्य में बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति ने भी उनका साथ दिया। एफडी और जमा पर्ची में काट-छांट कर एफडी की अवधि को पहले 10 वर्ष और फिर 15 वर्ष तक बढ़ा दिया गया। इसका मकसद स्पष्ट था कि उनकी मां और संबंधित संस्था को लंबे समय तक ब्याज का लाभ मिल सके।</description><guid>12245</guid><pubDate>2026-04-02 14:54:21 2:55:33 pm</pubDate></item><item><title>सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी का निधन; पीएम मोदी ने दुख जताया</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12235</link><description>पारामारिबो ।सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी का 67 साल की उम्र में निधन हो गया है। स्थानीय मीडिया की तरफ से मंगलवार (भारतीय समयानुसार) को इस घटना की जानकारी दी गई। हालांकि, उनकी मौत का कारण नहीं बताया गया। पूर्व राष्ट्रपति संतोखी का भारत के बिहार राज्य के साथ एक खास कनेक्शन भी रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति का सोमवार को अचानक निधन हो गया। देश की वर्तमान राष्ट्रपति जेनिफर सिमंस ने 67 वर्ष के संतोखी के निधन की पुष्टि की। संतोखी 2020 से 2025 तक राष्ट्रपति के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे। वह प्रोग्रेसिव रिफॉर्म पार्टी के नेता भी थे और इससे पहले देश में न्यायिक मंत्री का पद संभाल चुके थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर दुख जताया और उनके व्यक्तिगत संबंध और भारत और सूरीनाम के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने में संतोखी की भूमिका को याद किया।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, मेरे दोस्त और सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति, चंद्रिका प्रसाद संतोखी जी के अचानक निधन से बहुत सदमा लगा है और दुखी हूं। यह न केवल सूरीनाम के लिए बल्कि दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय के लिए भी एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।
अपनी बातचीत के बारे में बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, मुझे उनके साथ हुई कई मुलाकातें अच्छी तरह याद हैं। सूरीनाम के लिए उनकी बिना थके सेवा और भारत-सूरीनाम के संबंधों को मजबूत करने की उनकी कोशिशें हमारी बातचीत में साफ दिखती थीं। उन्हें भारतीय संस्कृति से खास लगाव था। जब उन्होंने संस्कृत में शपथ ली तो उन्होंने कई लोगों का दिल जीत लिया।
पीएम मोदी ने आगे कहा, इस दुख की घड़ी में मैं उनके परिवार और सूरीनाम के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। ओम शांति। प्रधानमंत्री ने दिवंगत नेता के साथ अपनी पिछली मुलाकातों की तस्वीरें भी शेयर कीं।
बता दें, सूरीनाम के वानिका जिले के लेलीडॉर्प में जन्मे संतोखी एक इंडो-सूरीनाम हिंदू परिवार से थे और नौ भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनके दादा-दादी 19वीं सदी में बिहार से बंधुआ मजदूर के तौर पर आए थे।
उनके पिता पारामारिबो में बंदरगाह पर काम करते थे, जबकि उनकी मां एक दुकान में सहायक के तौर पर काम करती थीं। कानून प्रवर्तन में अपने शुरुआती करियर की वजह से, उन्हें 'शेरिफ' निकनेम मिला।
संतोखी ने सूरीनाम में व्यापार, ऊर्जा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ संबंध मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। सूरीनाम में लगभग 27 फीसदी आबादी की जड़ें भारतीय बंधुआ मजदूरों से जुड़ी हैं। उन्हें प्रवासी भारतीय सम्मान दिया गया था और वे प्रवासी भारतीय दिवस में मुख्य अतिथि के तौर पर भी शामिल हुए थे।
इंडो-सूरीनाम विरासत के संदर्भ में, 2020 में संतोखी का शपथ ग्रहण भारत के साथ मजबूत सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। दरअसल, संतोखी ने संस्कृत भाषा में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। सूरीनाम के किसी राष्ट्रपति ने पहली बार संस्कृत भाषा में शपथ ली थी। इसके साथ ही यह देश में बड़ी संख्या में मौजूद भारतीय मूल की आबादी का सम्मान भी है, जो 19वीं सदी के बंधुआ मजदूरों के वंशज हैं।
पीएम मोदी ने अपने मासिक महीने के रेडियो कार्यक्रम मन की बात में पूर्व राष्ट्रपति का जिक्र किया था और भारत की जनता को भारतीय भाषा और संस्कृति के साथ उनके जुड़ाव के बारे में बताया।

</description><guid>12235</guid><pubDate>2026-03-31 16:46:49 4:47:57 pm</pubDate></item><item><title>जरूरी मिनरल्स में चीन के दबदबे ने बढ़ाई अमेरिका की चिंता</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12234</link><description>वाशिंगटन ।जरूरी मिनरल्स में चीन के दबदबे को लेकर अमेरिका की चिंता काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि अमेरिका की दिलचस्पी गहरे समुद्र में माइनिंग में फिर से बढ़ रही है। हालांकि, विशेषज्ञों ने कानून बनाने वालों को चेतावनी दी है कि लहरों के नीचे के इकोलॉजिकल रिस्क को अभी भी ठीक से समझा नहीं गया है। कांग्रेस की सुनवाई में सीनेटरों और इंडस्ट्री के नेताओं ने कोबाल्ट, निकल और कॉपर जैसे मिनरल्स के लिए सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की जरूरत पर जोर दिया, जो डिफेंस सिस्टम, क्लीन एनर्जी और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी हैं। कांग्रेस के सदस्य स्कॉट फ्रैंकलिन ने कहा कि ये संसाधन हमारे देश भर की इंडस्ट्रीज के लिए बहुत जरूरी हैं और चेतावनी दी कि चीन जैसे दुश्मन बेशक अमेरिका को कमजोर करने की कोशिश करेंगे।
इंडस्ट्री के अधिकारियों ने तर्क दिया कि अमेरिका के पास आगे बढ़ने के लिए टेक्नोलॉजी और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क दोनों हैं। द मेटल्स कंपनी के सीईओ जेरार्ड बैरन ने लॉमेकर्स से कहा कि हम रिस्क को मैनेज करने के लिए काफी कुछ जानते हैं। इस दौरान उन्होंने दशकों की रिसर्च और हाल की तरक्की की ओर इशारा किया, जो एनवायरनमेंटल डिस्टर्बेंस को कम करती हैं।
बैरन ने कहा कि समुद्र की गहराइयों में मौजूद खनिज गांठें अमेरिका की आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि इनमें ऐसे धातु पाए जाते हैं जो रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद अहम हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीकें समुद्र तल पर लगभग अदृश्य तरंगों के साथ काम करती हैं और पर्यावरण पर असर को बहुत सीमित क्षेत्र तक ही रखती हैं। हालांकि, इसे लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि माइनिंग में तेजी लाने की कोशिश शायद जल्दबाजी होगी।
डीप-सी इकोलॉजिस्ट डॉ. एस्ट्रिड लिटनर ने कहा, डीप-सी माइनिंग के जिम्मेदार विकास के लिए सबसे अच्छा उपलब्ध डेटा काफी नहीं है। बातचीत के दौरान उन्होंने बायोडायवर्सिटी, इकोसिस्टम के काम और लंबे समय के असर पर बेसलाइन डेटा में कमियों के बारे में बताया।
उन्होंने चेतावनी दी कि माइनिंग से बायोडायवर्सिटी का नुकसान और संभावित विलुप्ति हो सकती है, जिसके असर लंबे समय तक रह सकते हैं या जिन्हें ठीक नहीं किया जा सकता।
सभी पार्टियों के सांसदों ने अनिश्चितता के पैमाने को माना। रैंकिंग सदस्य गेबे एमो ने कहा कि समुद्र धरती पर सबसे कम समझे जाने वाले इकोसिस्टम में से एक है और गलत कदमों के नतीजे लंबे समय तक रह सकते हैं और कुछ मामलों में जिन्हें ठीक नहीं किया जा सकता।
सुनवाई में इस बात पर भी जोर दिया गया कि समुद्र के कितने कम हिस्से की मैपिंग या खोज की गई है। सेल्ड्रोन के ब्रायन कॉनन ने कहा कि अमेरिका ईईजेड का सिर्फ 54 फीसदी हिस्सा ही मैप किया गया है, जिससे अमेरिकी पानी के बड़े हिस्से बिना शोध के रह गए हैं।</description><guid>12234</guid><pubDate>2026-03-31 16:42:46 4:46:28 pm</pubDate></item><item><title>ईरान के खिलाफ जंग का खर्च अरब देशों से वसूलेंगे ट्रंप</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12233</link><description>वाशिंगटन ।व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अरब देशों से ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिका-इजरायल युद्ध से जुड़े खर्चों को उठाने में मदद मांगने में काफी दिलचस्पी रखेंगे। व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेविट ने कहा कि वह इस मुद्दे पर आगे बढ़कर कुछ नहीं कहेंगी, लेकिन यह एक ऐसा विचार है जिस पर ट्रंप सोच रहे हैं और आने वाले समय में वे इस पर और बात कर सकते हैं। इस महीने की शुरुआत में पेंटागन के अधिकारियों ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि ईरान के खिलाफ युद्ध के पहले छह दिनों में ट्रंप प्रशासन ने 11.3 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किए। यह जानकारी सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने दी।
हालांकि, इस रकम में युद्ध के नुकसान और उसकी भरपाई का खर्च शामिल नहीं है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अनुमान है कि युद्ध के पहले तीन हफ्तों में पेंटागन को इसकी लागत लगभग 1.4 बिलियन से 2.9 बिलियन डॉलर के बीच पड़ी होगी। यह अनुमान पेंटागन की पूर्व बजट अधिकारी एलेन मैककस्कर ने लगाया है।
व्हाइट हाउस ने कांग्रेस से कम से कम 200 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त सैन्य बजट की मांग की है। इस पैसे का इस्तेमाल ईरान में चल रहे सैन्य अभियान और पेंटागन के हथियारों के भंडार को फिर से भरने के लिए किया जाएगा।
लेविट ने यह भी कहा कि अभी ऊर्जा की कीमतों में जो बढ़ोतरी हो रही है, वह अस्थायी है और ईरान को कमजोर करने से लंबे समय में फायदा होगा।
उन्होंने कहा कि यह छोटे समय के कदम और कीमतों में थोड़े समय का उतार-चढ़ाव है, लेकिन इसका उद्देश्य अमेरिका, उसके सैनिकों और उसके सहयोगियों के लिए खतरा बने ईरान को खत्म करना है।
लेविट ने खाड़ी युद्ध का भी जिक्र किया। उस समय अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से कई देशों के साथ मिलकर इराक के खिलाफ कार्रवाई की थी। इराक के आक्रमण के बाद, इस गठबंधन ने संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से और कुवैत तथा कई अरब देशों के अनुरोध पर कार्रवाई की थी। ईरान के खिलाफ इस समय अमेरिका और इजरायल ज्यादातर अकेले ही कार्रवाई कर रहे हैं। उन्हें पहले जैसी अंतरराष्ट्रीय समर्थन या क्षेत्रीय सहयोग नहीं मिल रहा है।

</description><guid>12233</guid><pubDate>2026-03-31 16:40:26 4:42:22 pm</pubDate></item><item><title>सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो से की मुलाकात</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12229</link><description>पेरिस ।अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए फ्रांस पहुंचे। इस मौके पर रुबियो का साथ देने के लिए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर भी फ्रांस पहुंचे। फ्रांस में उन्होंने रुबियो के साथ-साथ भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी। मुलाकात की तस्वीरें साझा कर राजदूत गोर ने लिखा, फ्रांस में जी7 मंत्री स्तरीय मीटिंग के लिए के साथ जुड़कर खुशी हुई। हमारे सहयोगियों और साझेदारों के साथ अच्छी चर्चा हुई।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जी7 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ इस बैठक में कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके लक्ष्य महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में पूरे हो जाएंगे। हालांकि, ये बात अमेरिकी सरकार ने पहले भी कही है।
रुबियो ने कहा कि इस मिशन की शुरुआत से ही स्पष्ट रूपरेखा तय की गई थी। उन्होंने कहा, हम ईरान की नौसेना को नष्ट करेंगे, उनकी वायुसेना को नष्ट करेंगे। हम मूल रूप से उनकी मिसाइल और ड्रोन बनाने की क्षमता को उनकी फैक्ट्रियों में खत्म कर देंगे। उन्होंने जोड़ा कि इस अभियान का उद्देश्य मिसाइल लॉन्चरों की संख्या को काफी कम करना है, ताकि ईरान इनके पीछे छिपकर परमाणु हथियार बनाने और दुनिया को धमकाने में सक्षम न रहे।
रुबियो ने कहा कि प्रगति लगातार हो रही है। हम इस ऑपरेशन में समय-सीमा के अनुसार या उससे आगे हैं और उम्मीद है कि इसे उचित समय पर महीनों में नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों में पूरा कर लिया जाएगा। प्रगति बहुत अच्छी है।

</description><guid>12229</guid><pubDate>2026-03-28 15:15:20 3:18:09 pm</pubDate></item><item><title>वेलफेयर फ्रॉड को रोकने के लिए अमेरिकी सरकार ने बनाया टास्क फोर्स</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12228</link><description>वॉशिंगटन ।ट्रंप सरकार ने वेलफेयर प्रोग्राम में फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए एक फेडरल टास्क फोर्स शुरू की है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चेतावनी दी है कि यह समस्या बहुत बड़ी परेशानी बन गई है जिससे टैक्सपेयर का पैसा खत्म हो रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों की एक मीटिंग में उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा कि सरकार एंटी-फ्रॉड सेफगार्ड्स को फिर से लागू करेगा और फेडरल बेनिफिट प्रोग्राम्स में गलत इस्तेमाल का पता लगाने के लिए क्रॉस-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन लागू करेगा। उन्होंने कहा, हमें फ्रॉड के मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा। सालों से मौजूद प्रोटेक्शन बंद कर दिए गए थे और उन्हें फिर से लागू करने की जरूरत थी। हम उन एंटी-फ्रॉड प्रोटेक्शन को फिर से चालू करने जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस कोशिश में पूरी सरकार का नजरिया शामिल होगा, जिसमें स्वास्थ्य, हाउसिंग, कृषि और वित्त के कामों को संभालने वाली एजेंसियों को एक साथ लाया जाएगा ताकि गड़बड़ियों की पहचान की जा सके और इंटेलिजेंस शेयर की जा सके। वेंस ने कहा, यह सिर्फ अमेरिकी लोगों के पैसे की चोरी नहीं है, यह उन जरूरी सेवाओं की भी चोरी है जिन पर अमेरिकी लोग भरोसा करते हैं।
उन्होंने मिनेसोटा में मेडिकेड से जुड़ी सेवाओं का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि धोखाधड़ी की गतिविधियों के कारण ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों के लिए निर्धारित लाखों-करोड़ों डॉलर का फंड दूसरी जगह भेज दिया गया। बता दें, ऑटिज्म एक एक न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को सामाजिक बातचीत, सामान्य बातचीत और व्यवहार में चुनौतियां आती है।
उन्होंने कहा, ऐसे परिवार हैं जिन्हें इन सेवाओं की जरूरत है, जो इन्हें नहीं ले पा रहे हैं क्योंकि लोग फ्रॉड स्कीम से अमीर हो रहे हैं। टास्क फोर्स को लीड कर रहे एक अधिकारी ने कहा कि फ्रॉड ने सरकारी प्रोग्राम्स पर लोगों का भरोसा खत्म कर दिया है और अगर इसे रोका नहीं गया तो इसके बड़े नतीजे होंगे।
अधिकारी ने कहा, स्कैम उस सामाजिक भरोसे को खत्म कर देता है जिस पर ये प्रोग्राम और हमारा पूरा देश निर्भर करता है। उन्होंने इस संकट को अस्तित्व का खतरा बताया और इससे निपटने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति बनाने का वादा किया। अधिकारी ने आगे कहा कि टास्क फोर्स अपराधियों पर मुकदमा चलाने और फेडरल बेनिफिट सिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित करने में न्यायिक विभाग की मदद करेगी।
व्हाइट हाउस के सीनियर सलाहकार स्टीफन मिलर ने कहा कि कई वेलफेयर प्रोग्राम लिमिटेड वेरिफिकेशन के साथ चलते हैं, जिससे गलत इस्तेमाल बढ़ता है।</description><guid>12228</guid><pubDate>2026-03-28 15:13:06 3:14:48 pm</pubDate></item><item><title>बालेंद्र शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12224</link><description>काठमांडू ।राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेता बालेंद्र शाह ने शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। महज 35 साल की उम्र में पीएम बनने वाले बालेंद्र शाह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स अकाउंट का बायो चेंज हो गया। पीएम बालेंद्र शाह के एक्स अकाउंट के बायो में नेपाल के प्रधानमंत्री, रैपर/स्ट्रक्चरल इंजीनियर/पूर्व मेयर, काठमांडू मेट्रोपॉलिटन हमसे संपर्क करें: +977 9851279900 लिखा है।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संविधान के आर्टिकल 76(1) के तहत बालेंद्र शाह को नियुक्त करने के बाद दिन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह में देश के उपराष्ट्रपति राम सहाय प्रसाद यादव, चीफ जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत, नेशनल असेंबली के चेयरमैन नारायण प्रसाद दहल, पूर्व प्रधानमंत्री, सीनियर अधिकारी, सिक्योरिटी चीफ और डिप्लोमैटिक कम्युनिटी के सदस्य शामिल हुए।
पीएम बालेंद्र शाह का शपथग्रहण समारोह हिंदू रीति-रिवाज से पूरा हुआ। पहली बार वैदिक-सनातन परंपरा में हुए शपथ समारोह में सात शंख बजाए गए। यह पहली बार है जब मधेसी समुदाय का कोई नेता प्रधानमंत्री बना है।
बालेंद्र शाह ने पीएम पद की शपथ लेने से कुछ घंटे पहले गुरुवार को अपना नया रैप सॉन्ग रिलीज किया। यह गाना नेपाल के भविष्य को लेकर उम्मीदों से भरा है। इस गाने को रिलीज होने के कुछ ही घंटों के भीतर बीस लाख से ज्यादा बार देखा गया।
इस गाने में उनके अब तक के सफर की एक झलक है, जब वे 'अंडरग्राउंड रैप' की दुनिया में सक्रिय थे और संगीत के जरिए नेपाल में भ्रष्टाचार और दूसरी सामाजिक समस्याओं पर आवाज उठाते थे।
बालेंद्र शाह ने पूर्वी नेपाल के झापा-5 में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को 49,614 वोटों के बड़े अंतर से हराया। उन्हें 68,348 वोट मिले, जबकि ओली को 18,734 वोट मिले। यह 1991 के बाद से नेपाल के संसदीय चुनावों में किसी भी उम्मीदवार को मिले सबसे ज्यादा वोट हैं। शाह ने 2022 में राजनीति में कदम रखा, जब उन्होंने काठमांडू के मेयर का चुनाव लड़ा और एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते।
27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में एक मधेसी परिवार में जन्मे बालेंद्र शाह ने भारत में विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ली थी।
इंजीनियरिंग में उनके एकेडमिक बैकग्राउंड ने उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास और पब्लिक वर्क्स की प्रैक्टिकल समझ दी, जिससे काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के मेयर के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान उनके गवर्नेंस के तरीके को बनाने में मदद मिली।</description><guid>12224</guid><pubDate>2026-03-27 15:35:30 3:36:51 pm</pubDate></item><item><title>ट्रम्प ने ईरान के ऊर्जा संयंत्र पर हमले को 10 दिनों के लिए स्थगित किया</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12223</link><description>वाशिंगटन/नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि ईरानी सरकार के अनुरोध पर उन्होंने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की प्रक्रिया को 10 दिनों के लिए रोक दिया है। ट्रम्प ने कहा कि वे इस प्रक्रिया को छह अप्रैल को पूर्वी समयानुसार रात आठ बजे तक के लिए स्थगित कर रहे हैं।

ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, ईरानी सरकार के अनुरोध पर, मैं ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की अवधि को 10 दिनों के लिए सोमवार, छह अप्रैल को रात आठ बजे (पूर्वी समय) तक रोक रहा हूं।

उन्होंने दोहराया कि बातचीत जारी है और फर्जी मीडिया और अन्य लोगों द्वारा इसके विपरीत दिए गए गलत बयानों के बावजूद, यह बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है। हालांकि ईरान लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत चल रही है।</description><guid>12223</guid><pubDate>2026-03-27 15:34:00 3:35:07 pm</pubDate></item><item><title>बालेंद्र शाह नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री नियुक्त</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12222</link><description>काठमांडू/नई दिल्ली ।नेपाल में राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के संसदीय दल के नेता बालेंद्र शाह को नेपाल का 47वां प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। राष्ट्रपति कार्यालय से शुक्रवार को उनकी नियुक्ति की औपचारिक घोषणा के साथ ही नए मंत्रिमंडल के गठन की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

शाह को प्रतिनिधि सभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता के रूप में संविधान की धारा 76 (1) के तहत यह पद सौंपा गया है। वह काठमांडू महानगर पालिका के मेयर पद से इस्तीफा देकर राजनीति के राष्ट्रीय पटल पर उतरे और लोगों ने उन पर भरोसा जताया।

हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में जीत दर्ज करने के बाद श्री शाह पहली बार संसद सदस्य के रूप में प्रवेश करते ही देश के कार्यकारी प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे। पेशे से इंजीनियर और लोकप्रिय सांस्कृतिक पहचान रखने वाले शाह के नेतृत्व में नेपाल में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत मानी जा रही है।</description><guid>12222</guid><pubDate>2026-03-27 15:31:14 3:33:33 pm</pubDate></item><item><title>इजराइल ने किया ईरान का पनडुब्बी ठिकाना तबाह,तेहरान ने अमेरिकी युद्धपोत पर दागी मिसाइल</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12215</link><description>तेहरान।पश्चिम एशिया में भड़की जंग अब केवल क्षेत्रीय टकराव नहीं रही, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को हिला देने वाली निर्णायक भिडंत बन चुकी है। इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच चल रही यह बहुस्तरीय जंग हर गुजरते दिन के साथ और अधिक खतरनाक, जटिल और विस्फोटक होती जा रही है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि संयुक्त राष्ट्र तक ने इसे अनियंत्रित तबाही की दहलीज करार दे दिया है।
सबसे ताजा घटनाक्रम में इजरायल ने ईरान के इस्फहान स्थित पनडुब्बी अनुसंधान केंद्र पर सीधा हमला कर दिया। यह वही केंद्र है जहां ईरानी नौसेना के लिए पनडुब्बियों और मानवरहित समुद्री प्रणालियों का विकास होता है। यह हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान की समुद्री ताकत की रीढ़ तोड़ने की सोची समझी रणनीति है। इसका सीधा संदेश है कि इजरायल अब ईरान की सैन्य क्षमता को जड़ से खत्म करने के मिशन पर उतर चुका है।दूसरी ओर ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है। उसने अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन पर क्रूज मिसाइलें दागने का दावा किया है। ईरानी नौसेना ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी जहाजी बेड़ा उसकी मारक सीमा में आया तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि अब जंग सीधे अमेरिका और ईरान के बीच खुली भिडंत की ओर बढ़ रही है।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा बैठकों का सिलसिला तेज कर दिया है, जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ओर बातचीत की बात कर रहे हैं और दूसरी ओर सैन्य दबाव बनाए हुए हैं। यह दोहरी रणनीति अमेरिका की पुरानी नीति को उजागर करती है जिसमें बातचीत के नाम पर दबाव और दबाव के नाम पर युद्ध को आगे बढ़ाया जाता है।खाड़ी देशों ने भी ईरान के हमलों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अस्तित्वगत खतरा बताया है। उनका कहना है कि ईरान की आक्रामकता क्षेत्रीय स्थिरता को खत्म कर रही है। वहीं ईरान का रुख बेहद आक्रामक बना हुआ है। वहां के शीर्ष नेतृत्व ने साफ कहा है कि देश किसी भी तरह के खतरे की छाया स्वीकार नहीं करेगा और हमलावर को पछताना पड़ेगा।
स्पेन के प्रधानमंत्री ने इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह लेबनान में वही तबाही दोहराना चाहता है जो गाजा में देखी गई थी। इस बयान ने साफ कर दिया है कि यूरोप के भीतर भी इजरायल की रणनीति को लेकर गहरी चिंता है।इस बीच ईरान की संसद के स्पीकर ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है कि क्षेत्र में उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जनरल जो गलती कर चुके हैं, उसे सैनिक ठीक नहीं कर पाएंगे। यह बयान युद्ध के मनोवैज्ञानिक मोर्चे पर ईरान की आक्रामक स्थिति को दर्शाता है।
रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह संघर्ष अब कई स्तरों पर फैल चुका है। एक ओर समुद्री मार्गों विशेषकर होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा दांव पर है, तो दूसरी ओर ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि भारत की तेल कंपनियों ने भरोसा दिलाया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव इस संकट की गंभीरता को दिखाता है।अमेरिका द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम योजना, जिसमें प्रतिबंधों में ढील और परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण जैसी शर्तें शामिल हैं, फिलहाल कागजों तक सीमित दिख रही है। ईरान ने साफ इनकार किया है कि कोई बातचीत चल रही है। इसका मतलब है कि कूटनीति अभी कमजोर और युद्ध की भाषा ज्यादा प्रभावी बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि यह जंग अब प्रॉक्सी से निकलकर प्रत्यक्ष टकराव में बदल रही है। लेबनान में हिज्बुल्ला द्वारा रॉकेट हमले और इजरायल की जवाबी कार्रवाई, इराक में सैन्य ठिकानों पर हमले और अमेरिका की सक्रियता इस बात के संकेत हैं कि पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस सकता है।भारत के लिए भी यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और कूटनीतिक संतुलन सभी पर इसका असर पड़ सकता है।बहरहाल, यह स्पष्ट है कि यह जंग केवल मिसाइलों और बमों की नहीं, बल्कि रणनीतिक वर्चस्व की लड़ाई है। जो भी पक्ष इस संघर्ष में बढ़त हासिल करेगा, वही आने वाले दशकों तक पश्चिम एशिया की दिशा तय करेगा। लेकिन अगर यह आग इसी तरह भड़कती रही, तो इसका धुआं पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगा।</description><guid>12215</guid><pubDate>2026-03-26 17:39:37 5:41:36 pm</pubDate></item><item><title>ईरान जंग में अपने घर में ही हार गए ट्रंप, गिर गई लोकप्रियता, सर्वे ने उड़ाए होश!</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12214</link><description>वाशि्ंगटन। लगभग 25% लोगों ने कहा कि वे ट्रम्प द्वारा जीवन यापन की लागत को नियंत्रित करने के तरीके से संतुष्ट हैं। उनके आर्थिक नेतृत्व पर भी भरोसा कम है, केवल 29% लोगों ने ही उन्हें समर्थन दिया है। यह रेटिंग जो बाइडेन के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान देखी गई रेटिंग से भी कम है, जो इस बात को रेखांकित करती है कि मतदाताओं के लिए आर्थिक चिंताएं कितनी गंभीर हो गई हैं।
हाल ही में हुए रॉयटर्स/इप्सोस सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता में उल्लेखनीय गिरावट आई है। सर्वेक्षण से पता चलता है कि केवल 36% अमेरिकी ही उनके प्रदर्शन से संतुष्ट हैं, जबकि एक सप्ताह पहले यह आंकड़ा 40% था। सत्ता में वापसी के बाद से उनकी लोकप्रियता में यह सबसे निचले स्तरों में से एक है। इस गिरावट का एक प्रमुख कारण अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती असंतुष्टि प्रतीत होती है। ईंधन की बढ़ती कीमतें कई अमेरिकियों के लिए एक प्रमुख मुद्दा बन गई हैं। केवल लगभग 25% लोगों ने कहा कि वे ट्रम्प द्वारा जीवन यापन की लागत को नियंत्रित करने के तरीके से संतुष्ट हैं। उनके
ईरान के साथ जारी संघर्ष जनमत को प्रभावित करने वाला एक अन्य कारक है। अमेरिकी सैन्य हमलों के समर्थन में थोड़ी गिरावट आई है, अब केवल 35% लोग ही इसके पक्ष में हैं, जबकि बहुमत (61%) इसके खिलाफ है। कई अमेरिकी दीर्घकालिक परिणामों को लेकर भी चिंतित हैं। सर्वेक्षण में शामिल लगभग आधे लोगों का मानना ​​है कि यह संघर्ष भविष्य में संयुक्त राज्य अमेरिका को कम सुरक्षित बना सकता है, जबकि केवल एक छोटा हिस्सा ही मानता है कि इससे सुरक्षा में सुधार होगा।
संघर्ष की शुरुआत से ही अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लगभग एक डॉलर प्रति गैलन की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका समग्र अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा के खर्चों पर और भी अधिक प्रभाव पड़ सकता है। कुल मिलाकर गिरावट के बावजूद, ट्रंप को अपने रिपब्लिकन समर्थकों से मजबूत समर्थन मिल रहा है। हालांकि, उनकी पार्टी के भीतर भी, बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। पहले के सर्वेक्षणों की तुलना में अब अधिक संख्या में रिपब्लिकन मतदाता असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। लोकप्रियता रेटिंग में गिरावट का असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। हालांकि डेमोक्रेट इसे एक अवसर के रूप में देख रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक कोई स्पष्ट बढ़त हासिल नहीं हुई है। आर्थिक मुद्दों पर, मतदाताओं के बीच रिपब्लिकन अभी भी मामूली बढ़त बनाए हुए हैं।</description><guid>12214</guid><pubDate>2026-03-26 17:36:00 5:39:01 pm</pubDate></item><item><title>ईरान ने भारत समेत पांच मित्र देशों को होर्मुज जलमार्ग से आने-जाने की दी अनुमति</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12213</link><description>तेहरान ।पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईरान ने ऐलान किया है कि वह भारत समेत पांच मित्र देशों से संबंधित जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा, जिससे उन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल जाएगी, जबकि अन्य देशों के लिए पहुंच सीमित रहेगी। क्षेत्र में जारी संघर्ष के बावजूद भारत के साथ-साथ रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरानी सरकारी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है और कुछ ऐसे देशों को प्रतिबंधों से छूट दी गई हैm जिनके साथ ईरान के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी के अनुसार, अराघची ने कहा, शत्रु को जलडमरूमध्य से गुजरने देने का कोई कारण नहीं है। हमने कुछ ऐसे देशों को गुजरने की अनुमति दी है, जिन्हें हम मित्र मानते हैं। हमने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को आने-जाने की अनुमति दी है।
साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि जिन देशों को शत्रु माना जाता है या जो मौजूदा संघर्ष में शामिल हैं, उनसे जुड़े जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और कुछ खाड़ी देशों के जहाज, जो वर्तमान संकट में भूमिका निभा रहे हैं, उन्हें जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अराघची ने महत्वपूर्ण जलमार्ग पर ईरान के नियंत्रण पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि देश ने दशकों बाद इस क्षेत्र में अपना अधिकार प्रदर्शित किया है।
उन्होंने कहा कि जब ईरान ने शुरू में होर्मुज जलडमरूमध्य की आंशिक नाकाबंदी की घोषणा की थी तो कई पर्यवेक्षकों ने इसे एक दिखावा मानकर खारिज कर दिया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि बाद के घटनाक्रमों ने ईरान की अपनी स्थिति को लागू करने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा पारगमन मार्गों में से एक पर नियंत्रण स्थापित करने की क्षमता को रेखांकित किया है।</description><guid>12213</guid><pubDate>2026-03-26 17:29:36 5:30:55 pm</pubDate></item><item><title>अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए 15-सूत्रीय प्लान भेजा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12207</link><description>वाशिंगटन ।अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने और उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए एक व्यापक 15-सूत्रीय प्लान भेजा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान समझौता करना चाहता है। यह प्रस्ताव मध्यस्थों के माध्यम भेजा गया है। इसमें लड़ाई रोकने, ईरान की परमाणु गतिविधियों पर रोक लगाने और क्षेत्र में नया रूप देने के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार की गई है। यह जानकारी द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अधिकारियों के हवाले से दी है। प्लान में कहा गया है कि ईरान अपने तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों को बंद करे, अपने देश में यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोक दे और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी निलंबित कर दे। साथ ही, ईरान द्वारा प्रॉक्सी समूहों को दी जा रही मदद पर भी रोक लगाने और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने की बात कही गई है।
इस योजना में एक महीने के युद्धविराम का प्रस्ताव भी है। इसमें ईरान से यह वादा करने को कहा गया है कि वह कभी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा। साथ ही, उसे अपने पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री को तय समय के भीतर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को सौंपना होगा।
इसमें नतान्ज, इस्फहान और फ़ोर्डो परमाणु ठिकानों को सेवा से बाहर करने और उन्हें नष्ट करने का भी आह्वान किया गया है, साथ ही संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय को ईरान के भीतर की जानकारी तक पूरी पहुंच प्रदान करने की बात कही गई है।
क्षेत्रीय स्तर पर ईरान से कहा गया है कि वह अपने सहयोगी समूहों को समर्थन देना बंद करे और उन्हें धन या हथियार न दे। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते के रूप में खुला रखने की बात भी शामिल है।
मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बाद में चर्चा करने की बात कही गई है, जिसमें मिसाइलों की संख्या और उनकी मारक क्षमता पर सीमा तय की जा सकती है। साथ ही, ईरान की सैन्य ताकत को केवल आत्मरक्षा तक सीमित रखने का प्रस्ताव भी है।
इसके बदले में ईरान पर लगे सभी परमाणु से जुड़े प्रतिबंध हटाने की बात कही गई है। अमेरिका, बुशहर में एक नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में मदद करने को भी तैयार है, जिससे बिजली बनाई जा सकेगी, लेकिन इस पर निगरानी रखी जाएगी।
इस प्रस्ताव में स्नैपबैक सिस्टम को समाप्त करने का प्रावधान भी शामिल है, जो प्रतिबंधों को स्वचालित रूप से फिर से लागू करने की अनुमति देता है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, यह योजना काफी हद तक ट्रंप सरकार की पहले की मांगों जैसी है, जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले रखी गई थीं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना बिचौलियों के जरिए पहुंचाई गई है। इस कूटनीतिक कोशिश में पाकिस्तान एक अहम कड़ी बनकर उभरा है, साथ ही तुर्की और मिस्र भी इसमें शामिल हैं, जो अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच बातचीत करवाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, बातचीत की कोशिशों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इजरायल, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब समेत कई जगहों पर हमले जारी रखे हैं।

</description><guid>12207</guid><pubDate>2026-03-25 15:05:51 3:07:27 pm</pubDate></item><item><title>अमेरिका ने मध्य पूर्व के लिए 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों को किया तैयार</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12206</link><description>वॉशिंगटन ।पेंटागन अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को मध्य पूर्व में तैनात करने की तैयारी कर रहा है, जो ईरान संघर्ष में संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है। हालांकि वॉशिंगटन अभी भी कूटनीतिक विकल्पों की तलाश कर रहा है। कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 3,000 सैनिकों को मध्य पूर्व में तैनात करने की तैयारी की जा रही है, जिससे पहले से ही क्षेत्र की ओर जा रहे हजारों मरीन सैनिकों की संख्या में इजाफा होगा। अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों को ईरान में प्रवेश करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, सैन्य जमावड़ा इस संभावना को बढ़ाता है कि अमेरिकी बल इस संघर्ष में और गहराई तक शामिल हो सकते हैं।
सीबीएस न्यूज की एक अलग रिपोर्ट में कहा गया है कि 82वीं एयरबोर्न के कुछ हिस्सों जिसमें कमांड इकाइयां और जमीनी बल शामिल हैं, को तैनात किए जाने की उम्मीद है। एक अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिया कि शुरुआती दल 1,500 से कम सैनिकों का हो सकता है।
82वीं एयरबोर्न अमेरिकी सेना की प्रमुख त्वरित-प्रतिक्रिया इकाइयों में से एक है। यह कुछ ही घंटों में दुनियाभर में तैनात हो सकती है। द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इसकी इमीडिएट रिस्पॉन्स फोर्स 18 घंटों के भीतर मूव कर सकती है, जिससे व्हाइट हाउस को लचीले सैन्य विकल्प मिलते हैं।
यह सैनिकों की तैनाती ऐसे समय हो रही है जब युद्ध अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। अब तक अमेरिका ने मुख्य रूप से लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और ड्रोन का उपयोग करते हुए हवाई अभियान पर निर्भर किया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, फरवरी के अंत से ईरान के भीतर 9,000 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। इनमें मिसाइल लॉन्चर, नौसैनिक संसाधन और रक्षा औद्योगिक सुविधाएं शामिल हैं।
क्षेत्र में लड़ाई जारी है। ईरान ने इज़राइल और अन्य देशों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं जबकि वॉशिंगटन बातचीत के लिए खुलापन दिखा रहा है।</description><guid>12206</guid><pubDate>2026-03-25 15:03:30 3:05:10 pm</pubDate></item><item><title>मेलानिया ट्रंप के टेक अलायंस में शामिल हुए 45 देश</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12205</link><description>वाशिंगटन ।अमेरिका की 'फर्स्ट लेडी' मेलानिया ट्रंप ने 45 देशों और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को एक साथ लाने वाला एक नया वैश्विक गठबंधन किया है। इसका उद्देश्य दुनियाभर के बच्चों के लिए शिक्षा और तकनीक तक पहुंच बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करना है। अमेरिकी विदेश विभाग में आयोजित 'फोस्टरिंग द फ्यूचर टुगेदर' शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, एक इंसान के तौर पर हम सपने देखते हैं। लीडर के तौर पर हम आगे बढ़ते हैं। एक राष्ट्र के रूप में हम निर्माण करते हैं। आज से, आइए अपने नए ग्लोबल अलायंस को गति दें, ताकि हमारे बच्चों के विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़े। दो दिवसीय इस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय नेता और बड़ी टेक कंपनियां एक साथ आई हैं, ताकि डिजिटल माहौल में बच्चों के लिए शैक्षणिक संसाधनों को बढ़ाने और सुरक्षा को मजबूत करने पर मिलकर काम किया जा सके।
मेलानिया ट्रंप ने कहा, हमारे गठबंधन का मिशन बच्चों को तकनीक और शिक्षा तक ज्यादा पहुंच देकर उन्हें सशक्त बनाना है। यह एक ऐतिहासिक क्षण है। अपने भाषण में 'फर्स्ट लेडी' ने एक रोडमैप भी पेश किया, जिसमें नवाचार आधारित शिक्षण कार्यक्रम विकसित करना, शिक्षा के लिए सहायक नीतियों की वकालत करना, तकनीक आधारित कानूनों को प्रोत्साहित करना और सरकारों व निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी को मजबूत करना शामिल है।
उन्होंने कहा, हमारा साझा दृष्टिकोण बच्चों को राजनीति, भौगोलिक सीमाओं और स्थानीय पूर्वाग्रहों से ऊपर रखता है, और सभी सदस्य देशों से क्षेत्रीय बैठक आयोजित करने, शोध अध्ययन करने, नई साझेदारियां बढ़ाने और अन्य देशों के साथ सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारा कॉमन विजन बच्चों को राजनीति, भौगोलिक सीमाओं और स्थानीय पूर्वाग्रहों से ऊपर रखता है।</description><guid>12205</guid><pubDate>2026-03-25 14:59:47 3:02:59 pm</pubDate></item><item><title>ईरान ने क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव रखा, युद्ध खत्म करने के लिए दोहराई शर्तें</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12203</link><description>तेहरान ।ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पश्चिम एशिया में बिना किसी विदेशी दखल के शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र के देशों को मिलाकर एक सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही उन्होंने चल रहे युद्ध को खत्म करने की शर्तें दोहराईं। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के हवाले से न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक फोन कॉल में यह बात कही, जिसमें दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों के साथ-साथ ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद हुए नए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। रिपोर्ट में कहा गया है कि पेजेश्कियन ने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की पहली शर्त अमेरिका और इजरायल के हमलों को तुरंत रोकना और यह गारंटी देना है कि भविष्य में ऐसे हमले दोबारा नहीं होंगे।
उन्होंने ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, बड़े सैन्य कमांडरों और आम लोगों की हत्या करने और देश के पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने के लिए अमेरिका और इजरायल की कड़ी निंदा की।
बीते दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि युद्ध का मकसद देश को न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोकना है। हालांकि, पेजेश्कियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को खारिज कर और इस बात पर जोर दिया कि ईरान के पूर्व नेता परमाणु हथियार बनाने के सख्त खिलाफ थे और उन्होंने इस तरह की किसी भी कोशिश को रोकने के लिए जरूरी आदेश जारी किए थे।
वहीं इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई, इलाके के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर किसी भी हमले की कड़ी निंदा की और होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा और खाड़ी में नेविगेशन की आजादी सुनिश्चित करने की अपील की।
बता दें, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और ईरान के कई दूसरे शहरों पर मिलकर हमले किए, जिसमें अली खामेनेई के साथ-साथ वरिष्ठ ईरानी सैन्य कमांडर और आम लोग मारे गए। ईरान ने जवाब में मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी, जिनसे इजरायल और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेस और संपत्तियों को निशाना बनाया गया।</description><guid>12203</guid><pubDate>2026-03-22 13:51:58 1:53:46 pm</pubDate></item><item><title>टेक्सास से एलपीजी लेकर आ रहा जहाज भारत पहुंचा</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12199</link><description>नई दिल्ली ।दुनिया भर में सामान की सप्लाई में आ रही दिक्कतों के बीच, अमेरिका से द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर एक बड़ा जहाज़ भारत के मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंच गया है। अमेरिका के टेक्सास राज्य से एलपीजी लेकर आ रहा मालवाहक जहाज पाइक्सिस पायनियर बंदरगाह पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस से कच्चा तेल ले जा रहा एक अन्य जहाज भी मंगलुरु पहुंच गया है। यह जहाज बंदरगाह से लगभग 18 समुद्री मील दूर स्थित था। तेल को पाइपलाइन के माध्यम से एमआरपीएल तक पहुंचाने के लिए सिंगल-पॉइंट मूरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा।
रूस से आया यह कच्चा तेल अमेरिका की ओर से जारी किए गए अस्थायी सामान्य लाइसेंस के बाद पहुंचा है, जिससे 12 मार्च से समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति मिली है। मध्य पूर्व में तनाव के बीच वैश्विक ईंधन कीमतों को स्थिर करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने यह कदम उठाया गया है।
अमेरिका से मिली अनुमति के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में भारी बढ़ोतरी की है। ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के बाद आपूर्ति संबंधी चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से भारत ने कच्चे तेल की खरीद में बढ़ोत्तरी की है।
इससे पहले, 'नंदा देवी' और 'शिवालिक' जहाज भी एलपीजी लेकर भारत आए थे। नंदा देवी जहाज गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंचा था और शिवालिक मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था। दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर बेहद जोखिम भरे रास्ते से गुजरते हुए एलपीजी लेकर आए थे। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री रास्ता बाधित है।
पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में कुल 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज और 611 भारतीय नाविक मौजूद हैं और डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के समन्वय से स्थिति पर नजर रख रहा है।</description><guid>12199</guid><pubDate>2026-03-22 13:40:38 1:42:13 pm</pubDate></item><item><title> पीएम मोदी ने जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12198</link><description>नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व जल दिवस के अवसर पर देशवासियों से जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील करते हुए कहा कि पानी न सिर्फ जीवन का आधार है, बल्कि हमारे ग्रह के भविष्य को भी आकार देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, जल हमें जीवन देता है और हमारे ग्रह के भविष्य को आकार देता है। विश्व जल दिवस के अवसर पर, आइए हम जल की हर बूंद को बचाने और उसका जिम्मेदारी से उपयोग करने के अपने संकल्प को दोहराएं। आज उन लोगों की सराहना करने का भी दिन है, जो सतत उपायों को अपनाते हैं, जागरूकता फैलाते हैं और संरक्षण की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में जल प्रबंधन, संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं। आज जल संरक्षण जनभागीदारी से प्रेरित एक सशक्त राष्ट्रीय अभियान का रूप ले चुका है, जहां नीतियों के साथ-साथ समाज की सक्रिय जन भागीदारी इस दिशा में नई ऊर्जा प्रदान कर रही है।
उन्होंने आगे लिखा, स्वच्छ पेयजल की बेहतर उपलब्धता ने अनेक क्षेत्रों में महिलाओं के श्रम को कम किया है, जिससे उनके जीवन में गरिमा और सुविधा का विस्तार हुआ है। साथ ही, बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता में भी सकारात्मक सुधार परिलक्षित हो रहा है, जो एक स्वस्थ समाज की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। जल स्रोतों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन और सतत उपयोग की दिशा में देश निरंतर अग्रसर है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का आधार बन रहा है।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे जल के महत्व को समझते हुए उसके संरक्षण को अपने व्यवहार और जीवनशैली का स्वाभाविक हिस्सा बनाएं। विश्व जल दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पोस्ट किया, आइए हम जल संरक्षण, सतत विकास को बढ़ावा देने और सभ्यता की इस जीवन-रेखा की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को विश्व जल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए 'एक्स' पोस्ट में कहा, उत्तराखंड में जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और अस्तित्व का आधार है। हमारी नदियां, हमारे नौले-धारे और प्राकृतिक जल स्रोत हमारी समृद्ध परंपरा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।
उन्होंने कहा, प्रदेश सरकार की ओर से स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी के माध्यम से सूखते जल स्रोतों और नदियों के पुनर्जीवन का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और हमारे पारंपरिक जल स्रोत पुनः जीवंत हो सकें। आइए, हम सभी जल संरक्षण का संकल्प लें और जल बचाकर अपने भविष्य को सुरक्षित बनाएं।</description><guid>12198</guid><pubDate>2026-03-22 13:37:20 1:38:41 pm</pubDate></item><item><title>अजमेर के पूर्व सांसद विष्णु मोदी का निधन</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12197</link><description>जयपुर।वैश्य समाज की राजनीति के दिग्गज स्तंभ और अजमेर के पूर्व सांसद विष्णु मोदी का जयपुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे 1984 में अजमेर से लोकसभा सांसद रहे थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही वैश्य में शोक की लहर दौड़ गई है। अग्रवाल वैश्य समाज हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
बुवानीवाला ने कहा कि मोदी ने सार्वजनिक सेवा की विरासत को बखूबी आगे बढ़ाया।उन्होंने 1984 में अजमेर लोकसभा सीट से भारी बहुमत से चुनाव जीता और 8वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में दिल्ली पहुंचे। उन्होंने कहा कि मोदी दो बार राजस्थान विधानसभा के सदस्य भी रहे। उन्होंने 1993 से 1998 तक पुष्कर और 2003 से 2008 तक मसूदा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। विष्णु मोदी की जड़ें राजस्थान की मिट्टी और राजनीति में बहुत गहरी थीं।
अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के संस्थापक अध्यक्ष एवं 1971 से 1977 तक सीकर से सांसद किशन मोदी के सुपुत्र विष्णु मोदी के चाचा मोहन लाल मोदी नीमकाथाना (सीकर) से पांच बार विधायक रहे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मोदी परिवार का राजस्थान की सेवा में दशकों का योगदान रहा है। विष्णु मोदी को केवल एक नेता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक विजनरी शिक्षाविद् के रूप में भी याद किया जाएगा। उन्होंने 2001 में मोदी शिक्षण संस्थान के माध्यम से नीरजा मोदी स्कूल की स्थापना की।

</description><guid>12197</guid><pubDate>2026-03-22 13:25:28 1:26:26 pm</pubDate></item><item><title>भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण सहभागिता।</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12196</link><description>वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की भारत की महत्वाकांक्षी यात्रा में भारत की विद्युत क्षेत्र के विकास को गति देने के उद्देश्य से दिनांक 19 से 22 मार्च 2026 को नई दिल्ली में भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन किया जा रहा है।


इस सम्मेलन का आयोजन भारत के माननीय विद्युत मंत्री व केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता एवं माननीय विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक के उपस्थिती में किया जा रहा है।


सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा मुख्य भागीदार के रूप में भाग लिया जा रहा है। सम्मेलन के अंतर्गत दिनांक 20 मार्च 2026 को आयोजित किए गए मंत्री स्तरीय सत्र सम्मेलन का मुख्य आकर्षण था। जिसमें छत्तीसगढ़ से माननीय मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में राज्य कैबिनेट दर्जा प्राप्त क्रेडा के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी, ऊर्जा सचिव श्री रोहित यादव एवं क्रेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री राजेश सिंह राणा द्वारा भाग लिया गया। बिजली की मांग, कम कार्बन उत्सर्जन करने वाले तकनीक को अपनाना एवं देश की विद्युत क्षमता को बढ़ाने के विषय पर इस सत्र में रणनीतिक चर्चा की गई। सत्र में छत्तीसगढ़ द्वारा अंजोर विजन 2047 अंतर्गत निर्धारित अक्षय ऊर्जा लक्ष्य को वर्ष 2030 तक 45% एवं वर्ष 2047 तक 66% हासिल करने हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।


इस चार दिवसीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राज्य के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, बिहार एवं आंध्र प्रदेश द्वारा स्टॉल के माध्यम से अपने राज्य का विद्युत क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां को प्रदर्शित किया गया है।राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कंपनीयों द्वारा विद्युत क्षेत्र संबंधित नवाचार आधारित तकनीक एवं अक्षय ऊर्जा आधारित तकनीकीयों को प्रदर्शित किया जा रहा है।</description><guid>12196</guid><pubDate>2026-03-22 11:45:00 11:47:07 am</pubDate></item><item><title>पोलैंड ने सुरक्षा चिंताओं के बीच इराक से अपने सैनिकों को वापस बुलाया</title><link>https://dainandini.in//national.php?articleid=12192</link><description>वारसॉ ।मध्य पूर्व में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच पोलैंड ने इराक से अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है। रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक कामिश ने इसकी घोषणा की। यह निर्णय परिचालन स्थितियों और संभावित जोखिमों के आकलन के बाद लिया गया। कोसिनियाक कामिश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी। शिन्हुआ के अनुसार, पोलिश प्रेस एजेंसी के हवाले से इराक में अधिकतम 350 पोलिश सैनिक तैनात थे। इस दल को जॉर्डन, कतर और कुवैत में भी संचालन की अनुमति थी।
कोसिनियाक कामिश ने आगे बताया कि अधिकांश कर्मी पहले ही पोलैंड लौट चुके हैं या वापस आने के रास्ते में हैं जबकि कुछ को अपना मिशन जारी रखने के लिए जॉर्डन स्थानांतरित किया गया है। इस बीच, इराक में नाटो मिशन ने भी सुरक्षा चिंताओं के कारण अपने कर्मियों की अस्थायी वापसी शुरू कर दी है। एक वरिष्ठ सुरक्षा स्रोत ने शुक्रवार को इराकी न्यूज़ एजेंसी (आईएनए) को यह जानकारी दी।
सूत्र ने इस कदम को जारी संघर्ष और मिशन सदस्यों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के कारण उठाया गया अस्थायी उपाय बताया। आईएनए के अनुसार युद्ध समाप्त होने और इराक में सुरक्षा स्थिति स्थिर होने पर वे वापस लौट आएंगे। गैर-लड़ाकू सलाहकार नाटो मिशन इराक 2018 में इराकी सरकार के अनुरोध पर स्थापित किया गया था, ताकि उसके सुरक्षा क्षेत्र को मजबूत किया जा सके।
यह अस्थायी वापसी 28 फरवरी को तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किए गए संयुक्त हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच हुई, जिसमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता सहित वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने मध्य पूर्व में इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों तथा संपत्तियों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई लहरें शुरू कीं।

</description><guid>12192</guid><pubDate>2026-03-21 18:53:13 6:54:34 pm</pubDate></item></channel></rss>