छत्तीसगढ़ / बीजापुर
जिले के सभी ब्लॉक में होगी पशु औषधि विक्रय केन्द्र की स्थापना
बीजापुर 06 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ शासन पशुधन विकास विभाग के निर्देशानुसार जिले के प्रत्येक ब्लॉक में पशु औषधि विक्रय केन्द्र खोला जाना है। जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री कृषि सेवा केन्द्र एवं सहकारी समितियों के माध्यम से पशुपालकों को सस्ती दरेां पर अच्छी गुणवत्ता की पशु औषधियां उपलब्ध कराना है। पशु औषधि केन्द्रों के परिपालन हेतु न्यूनतम 120 स्क्वायर फिट स्वयं की या किराये की जगह की आवश्यकता होगी तथा बी फार्मा/डी फार्मा डिग्री होल्डर एवं ड्रग्स सेल लाईसंेस का होना आवश्यक है।
उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवायें जिला बीजापुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के 4 विकासखंडों में पशु औषधि विक्रय केन्द्र का संचालन प्रधानमंत्री कृषि सेवा केन्द्र एवं सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाना प्रस्तावित है। इच्छुक समितियों अधिक जानकारी के लिए निकटतम पशु चिकित्सालय से संपर्क कर सकते है एवं आवेदनकर्ता ऑनलाईन पोर्टल www.dahd.gov. in पर आवेदन कर सकते है। पशु औषधि विक्रय केन्द्र की स्थापना से जिले के पशुपालकों को सस्ते दर पर पशु औषधियां उपलब्ध होंगी जिससे पशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तथा पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा।
जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के लिए विक्रम मंडावी ने सीएम को लिखा पत्र
बीजापुर। बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने नक्सली मामलों में वर्षों से जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों को रिहा करने की मांग करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखे पत्र में विधायक विक्रम मंडावी ने कहा है कि बस्तर संभाग आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और बीजापुर जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र था। जिसके चलते बस्तर संभाग के जेलों में नक्सलियों के नाम पर कई गरीब, निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों को जेल भेजा गया है और ये लोग कई वर्षों से जेल में बंद है। आदिवासी ग्रामीण कम पढ़े-लिखे होने और आर्थिक पारेशानी के कारण न्यायालय तक नही जा पाते हैं जिससे जेलों में बंद निर्दोष आदिवासी रिहा नही हो पाते है।
विधायक मंडावी ने अपने पत्र में आगे कहा है कि वर्तमान में बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है। हथियार बंद आत्मसर्मपण नक्सलियों को भी पुनर्वास नीति के तहत् सरकार ने माफी दिया है, तो जो निर्दोष आदिवासी नक्सली मामलों में वर्षों से जेलों में बंद है उन्हें भी माफी देते हुए जेल से रिहा किया जाये।
पशुपालन विभाग की योजना से बदली किसान की तकदीर
बीजापुर शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम उल्लूर निवासी सदाशिव कुरगुड़ ने पशुधन विकास विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेकर मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू किया और आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गए हैं।
कृषि कार्य के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित करने की इच्छा रखने वाले सदाशिव कुरगुड़ को मुर्गी पालन के लिए पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता थी। इस दौरान उन्हें पशुधन विकास विभाग द्वारा संचालित किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी मिली। विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें बैंक के माध्यम से 30 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने मुर्गी पालन के लिए चूजे एवं आवश्यक आहार की व्यवस्था की। सही प्रबंधन, नियमित देखभाल और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन के चलते उनका मुर्गी पालन व्यवसाय लगातार आगे बढ़ा। वर्तमान में वे प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं, जिसमें से करीब 80 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। इस अतिरिक्त आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। सदाशिव कुरगुड़ ने बताया कि पशुधन विकास विभाग की योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया। अब उनका लक्ष्य भविष्य में एक व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित कर रोजगार का विस्तार करना है। उन्होंने पशुधन विकास विभाग एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विभागीय योजनाओं का लाभ ग्रामीण युवाओं एवं किसानों तक पहुंचना चाहिए, ताकि वे भी स्वरोजगार अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें। जिला प्रशासन एवं पशुधन विकास विभाग का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना, किसानों की आय में वृद्धि करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। विभाग की विभिन्न योजनाएं जिले में आजीविका संवर्धन और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी साबित हो रही हैं।
रात्रिकालीन चौपाल में कलेक्टर ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं
बीजापुर। जिला प्रशासन की जनसरोकार आधारित पहल के तहत कलेक्टर विश्वदीप, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मीणा ने ग्राम मट्टी मरका में रात्रिकालीन चौपाल आयोजित कर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं, उनके सुझाव लिए तथा गांव के समग्र विकास, पर्यटन संवर्धन एवं आजीविका के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।
चौपाल के दौरान कलेक्टर विश्वदीप ने ग्रामीणों की जीवनशैली, आजीविका के साधनों तथा उनकी दैनिक समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के साथ बेहतर रोजगार उपलब्ध कराना है, जिससे गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
पर्यटन विकास से खुलेगा रोजगार का नया रास्ता
कलेक्टर ने ग्राम मट्टी मरका की प्राकृतिक सुंदरता एवं सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए जाने की योजना साझा की। उन्होंने ग्रामीणों को होम स्टे, इको स्टे एवं इको टूरिज्म जैसी गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इससे स्थानीय युवाओं एवं परिवारों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, आय में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण आत्मनिर्भर बन सकेंगे। साथ ही स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए पर्यटन विकास में हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
सिंचाई, चेकडैम और पेयजल की मांग पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश चौपाल में ग्रामीणों ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, चेकडैम निर्माण, हैंडपंप स्थापना, तालाबों के गहरीकरण तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास की मांग रखी। इस पर कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक सर्वेक्षण कर शीघ्र प्राक्कलन (एस्टीमेट) तैयार करने तथा आवश्यक स्वीकृति प्राप्त कर विकास कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री आवास, स्वच्छता और पोषण पर दिया विशेष जोर
दौरे के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों के घरों का निरीक्षण कर प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को शीघ्र आवास निर्माण पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वच्छता का संदेश देते हुए प्रत्येक परिवार को शौचालय निर्माण एवं उसके नियमित उपयोग के लिए भी जागरूक किया। महिलाओं से संवाद करते हुए कलेक्टर ने आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे पोषण आहार, दलिया एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन करने की सलाह दी। साथ ही गर्भवती एवं धात्री माताओं को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने तथा मितानिन एवं स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में बने रहने की अपील की।
किसानों को दी वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह
कलेक्टर ने किसानों से कृषि गतिविधियों पर चर्चा करते हुए आगामी वर्षा को ध्यान में रखकर समय पर खेती प्रारंभ करने की सलाह दी। उन्होंने किसानों को मक्का, अरहर, उड़द सहित अन्य फसलों का फसल चक्र अपनाने तथा शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। रात्रिकालीन चौपाल के माध्यम से जिला प्रशासन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि शासन ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान, आजीविका संवर्धन तथा गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, शिक्षक-पालक मिलकर गढ़ें उज्ज्वल भविष्य : कलेक्टर विश्वदीप
नए शिक्षा सत्र के शुभारंभ को उत्सव का स्वरूप देते हुए भोपालपटनम में ब्लॉक स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव का भव्य आयोजन स्वर्गीय राजेंद्र पामभोई क्रिकेट स्टेडियम में किया गया। पूरे विकासखंड से पहुंचे शिक्षक-शिक्षिकाओं, पालकों, शाला प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने कार्यक्रम को शिक्षा, नवाचार और जनभागीदारी का प्रेरक उत्सव बना दिया।
समारोह में नवप्रवेशी बच्चों का बाजा-गाजा, फूल-मालाओं और तालियों की गूंज के बीच आत्मीय स्वागत किया गया। कक्षा पहली में प्रवेश लेने वाले 25 बच्चों को स्कूल बैग, पाठ्यपुस्तकें एवं गणवेश प्रदान कर औपचारिक रूप से विद्यालय में प्रवेश दिलाया गया। आयोजन स्थल पर आकर्षक सेल्फी जोन भी बनाया गया था, जहां बच्चों, पालकों और शिक्षकों ने इस यादगार पल को कैमरे में कैद किया।
कार्यक्रम में कलेक्टर श्री विश्वदीप, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे, जिला शिक्षा अधिकारी श्री राजेश पाण्डेय सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
अपने प्रेरक संबोधन में कलेक्टर श्री विश्वदीप ने कहा कि शिक्षक ही समाज और राष्ट्र निर्माण की वास्तविक नींव हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का आधार है और प्रत्येक शिक्षक को अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए। पालकों को संबोधित करते हुए उन्होंने आह्वान किया कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही परिवार, समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव है। शिक्षक, पालक और जनसहभागिता के माध्यम से प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़ना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए अनुशासन, नियमित अध्ययन और शिक्षा के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव ने कहा कि वर्तमान समय का शैक्षणिक वातावरण पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सकारात्मक और प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब बच्चे स्कूल जाने में संकोच करते थे, लेकिन आज उनके चेहरों पर शिक्षा के प्रति उत्साह और खुशी स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए शिक्षा विभाग एवं सभी सहयोगियों को बधाई दी। कार्यक्रम में शैक्षणिक उत्कृष्टता को भी सम्मानित किया गया। कक्षा 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा में प्रत्येक विद्यालय के टॉप-2 विद्यार्थियों सहित कुल 42 मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। वहीं कक्षा 5वीं एवं 8वीं के टॉप-10 विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
समारोह की विशेष उपलब्धि यह रही कि पहली बार पालकों एवं शाला प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। प्रत्येक संकुल से एक उत्कृष्ट शिक्षक, उत्कृष्ट पालक, उत्कृष्ट एसएमसी सदस्य, रसोइया, भृत्य तथा स्वीपर को सम्मानित कर शिक्षा व्यवस्था में उनके अमूल्य योगदान की सराहना की गई। यह पहल शिक्षा में सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी गई।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र बनाया। पूर्व माध्यमिक शाला देपाला, केजीबीवी भोपालपटनम, सेजेस संगमपल्ली एवं तारलागुड़ा के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमुदाय का मन मोह लिया। कार्यक्रम में करीब 50 नवप्रवेशी बच्चों का विशेष स्वागत किया गया। साथ ही शाला प्रबंधन समितियों के अध्यक्षों एवं विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष रिंकी कोरम, जनपद सदस्य तनुजा कुम्मर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, खंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसी, संकुल समन्वयक, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन संजय चिंतुर, मकबूल अहमद एवं श्रीनिवास एटला ने किया।
शाला प्रवेशोत्सव में नौनिहालों का भव्य स्वागत, कलेक्टर ने दिया प्रेरणा का संदेश
बीजापुर। नए शिक्षा सत्र में बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकासखंड स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन चिन्नाकोडेपाल में उत्साह एवं हर्षाेल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का फूलमाला, तिलक, गुलाल एवं लड्डू के साथ आत्मीय स्वागत किया गया तथा उन्हें गणवेश एवं पाठ्यपुस्तकें भेंट कर शिक्षा के प्रति प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम मे कलेक्टर श्री विश्वदीप ने बच्चों का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा ही जीवन में सफलता का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। आज के ये नौनिहाल कल देश और समाज के जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कलेक्टर ने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने तथा शिक्षकों से पूरी निष्ठा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने के साथ-साथ उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की दिशा प्रदान करती है। इस अवसर पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि जीवन में सम्मान, प्रतिष्ठा और बेहतर अवसर शिक्षा के माध्यम से ही प्राप्त होते हैं। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़ते हुए नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करें। शाला प्रवेशोत्सव के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला तथा पूरे विद्यालय परिसर में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण का संचार हुआ। कार्यक्रम में एसडीएम श्री जागेश्वर कौशल, वरिष्ठ नागरिक श्री घासी राम नाग, सांसद प्रतिनिधि श्री जिलाराम राणा जिला शिक्षा अधिकारी श्री राजेश कुमार पाण्डेय बीईओ श्री नागेश्वर निषाद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं, पालकगण एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
तेंदूपत्ता अग्निकांड के बीच डीएफओ रमेश जांगड़े के समर्थन में एकजुट हुआ वन अमला, वन मंत्री को सौंपा ज्ञापन
बीजापुर _ बीजापुर वनमंडल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने तेंदूपत्ता गोदाम अग्निकांड की घटना के बीच वनमंडलाधिकारी डीएफओ रमेश जांगड़े के समर्थन में एकजुटता दिखाते हुए वन मंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन में कर्मचारियों ने जांगड़े को एक कुशल प्रशासक, संवेदनशील अधिकारी एवं कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखने वाला नेतृत्वकर्ता बताते हुए उनके कार्यकाल की सराहना की है। कर्मचारियों ने कहा कि डीएफओ रमेश जांगड़े के नेतृत्व में वनमंडल में बेहतर कार्य वातावरण का निर्माण हुआ है। उनके मार्गदर्शन में विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, समन्वय एवं जवाबदेही बढ़ी है, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों को सकारात्मक माहौल में कार्य करने का अवसर मिला है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि तेंदूपत्ता गोदाम में हुई आगजनी की घटना गंभीर एवं दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन मामले की जांच में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चार आरोपियों की पहचान कर उन्हें तत्काल तलाश कर लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि जब मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ रही है, तब किसी अधिकारी को बिना तथ्यों के कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं होगा। वन विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि आगजनी जैसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन इसके साथ ही ईमानदारी से कार्य कर रहे अधिकारियों का मनोबल भी प्रभावित नहीं होना चाहिए।
PMGSY के प्रभारी कार्यपालन अभियंता नवीन टुंडी पर ठेकेदारों ने लगाए गंभीर आरोप
भुगतान रोकने और मानसिक प्रताड़ना का दावा, कार्रवाई नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
बीजापुर । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत कार्य कर रहे ठेकेदारों और ठेकेदार संगठन ने विभाग के प्रभारी कार्यपालन अभियंता नवीन टुंडी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि विभागीय कार्यों में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। निर्माण कार्य करने के बावजूद एडवांस कमीशन की मांग कर भुगतान प्रदाय नहीं किया जा रहा है।
ठेकेदार हरबीर सिंह बदेशा ने आरोप लगाया कि प्रभारी कार्यपालन अभियंता द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है तथा उनके कार्यों का भुगतान भी लंबित रखा गया है। उन्होंने कहा कि भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और वे मानसिक तनाव में हैं। घर बेचकर उन पैसों से सड़क निर्माण कार्य किया हूं। भुगतान प्रदाय करने हेतु समस्त दस्तावेज सत्यापन कर कार्यालय में जमा कर दिया हु जिसके बावजूद भी भुगतान हेतु बिल उच्च कार्यालय को प्रेषित नहीं किया गया और अन्याय की सब हदें पार हुई जब सड़क को निरस्त कर दिया गया।
हरबीर सिंह बदेशा ने कहा, "मेरे द्वारा किए गए कार्यों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। लगातार विभागीय स्तर पर परेशान किया जा रहा है, जिससे मैं आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित हूं।" उन्होंने आगे कहा कि कलेक्टर बीजापुर को भी सड़क निर्माण के बारे में भ्रामक तथ्य और गलत जानकारी दी गई। उनके द्वारा उच्च कार्यालय को भी गलत जानकारी दिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि टी02 से दमारम, भोगमगुड़ा से गुमरा, गगनपल्ली से रावतपारा सड़कों का निर्माण नवम्बर 2025 से ठेकेदार हरबीर सिंह बदेशा द्वारा अति नक्सल प्रभावित होने के कारण पुलिस बल के सहयोग से सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा है। निर्माणधीन सड़कों का प्रत्येक माह प्रोग्रेस उच्च कार्यालय को प्रेषित किया गया है, और सड़क निर्माण कार्य के दौरान उप अभियंत्रा, सहायक अभियंता, कार्यपालन अभियंता द्वारा सतत मार्गदर्शन दिया गया है, उन्हीं के अनुसार कार्य किया गया। इन सबके बावजूद भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है।
ठेकेदार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बिरेश शुक्ला ने चेतावनी दी है कि यदि शासन द्वारा प्रभारी कार्यपालन अभियंता नवीन टुंडी के विरुद्ध शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर पूरे छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े कार्य बंद कर ठेकेदारों को कार्यस्थलों से वापस बुलाने का निर्णय लिया जा सकता है।
प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, ठेकेदारों की समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे निर्माण एजेंसियों में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने शासन से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है।
उक्त संबंध में कार्यपालन अभियंता नवीन टुंडी का पक्ष जानने हेतु मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
कोंगुपल्ली में भूमि अधिग्रहण पर 6 जून को जनसुनवाई
बीजापुर : कोंगुपल्ली में भूमि अधिग्रहण पर 6 जून को जनसुनवाई
भूमि अधिग्रहण हेतु जनसुनवाई 03 को पामगल में
बीजापुर : भूमि अधिग्रहण हेतु जनसुनवाई 03 को पामगल में
कोत्तापल्ली व्यपवर्तन योजना हेतु भूमि अधिग्रहण पर 4 जून को जनसुनवाई
बीजापुर : कोत्तापल्ली व्यपवर्तन योजना हेतु भूमि अधिग्रहण पर 4 जून को जनसुनवाई
कलेक्टर श्री विश्वदीप ने सेवानिवृत्त दो प्रधान पाठकों को दी आत्मीय विदाई
बीजापुर : कलेक्टर श्री विश्वदीप ने सेवानिवृत्त दो प्रधान पाठकों को दी आत्मीय विदाई
आजादी के 79 साल बाद भी विकास की राह देख रहा कोत्तापल्ली
सड़क समेत मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण
बीजापुर । जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर का आश्रित गांव कोत्तापल्ली आजादी के 79 वर्ष बाद भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का इंतजार कर रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित यह गांव सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाओं से अब भी वंचित है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान इस गांव की ओर नहीं गया, जिससे यहां के लोग अनेक समस्याओं का सामना करने को मजबूर हैं।
कोत्तापल्ली गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है। भीमाराम और रायपुरम के बीच स्थित एक बिंदु से गांव की दूरी लगभग 20 से 25 किलोमीटर है, जहां तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को पथरीले रास्तों, नदी-नालों और जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में नदी-नाले उफान पर होने से आवागमन और भी कठिन हो जाता है। ऐसे समय में ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर सरकारी कार्यों के लिए लगभग 52 किलोमीटर दूर आवापल्ली ब्लॉक मुख्यालय पहुंचने को मजबूर होते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का पहुंचना बेहद दुर्लभ रहा है। 25 मार्च 2017 को पहली बार गांव में एक प्रशासनिक शिविर आयोजित किया गया था। इसके बाद भी गांव की समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने उसूर से तेलंगाना के पुसगुप्फा तक सड़क निर्माण कराया है, लेकिन कोत्तापल्ली को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क आज तक नहीं बन सकी। जबकि क्षेत्र में नक्सल प्रभाव पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गांव तक सर्व मौसम सड़क, स्वास्थ्य सुविधा, बिजली, शिक्षा और संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि कोत्तापल्ली भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।
सेवा सेतु - जनता के द्वार, डिजिटल सरकार
छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल प्रशासन का नया अघ्याय
बीजापुर । डिजिटल युग में सुशासन को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य शासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, सुलभ और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लोक सेवा केन्द्रों का उन्नयन कर उन्हें अब ’’सेवा-सेतु केन्द्र‘‘ के रूप में संचालित किया जा रहा है।
इसे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनी है। ‘‘सेवा-सेतु पोर्टल’’ का सबसे बडा लाभ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिल रहा है।
लोक सेवा केन्द्र अब ‘‘सेवा-सेतु केन्द्र“ और ऑपरेटर सेवा सेतु प्रबंधक कहलायेंगें। जिले के सभी ब्लॉक के सचिवों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। पूर्व में लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से 73 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं अब सेवा-सेतु केन्द्रों के जरिए 442 डिजिटल सेवाएं नागरिकों को प्रदान की जा रही है।
राज्य शासन के द्वारा नागरिकों के हित के लिए डिजिटल पहल- अब नागरिकों को अलग-अलग सेवाओं के लिए राजस्व कार्यालय, जनपद पंचायत, नगर पालिका या अन्य विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगें। एक ही पोर्टल से आवेदन, दस्तावेज अपलोड, आवेदन की स्थिति देखना और निर्धारित समय-सीमा में सेवा प्राप्त करना संभव होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को छोटे-छोटे काम या प्रमाण-पत्र के लिए तहसील या जिला मुख्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें उनके घर के नजदीक ही डिजिटल सेवा मिल सकेंगी।
गांव में ही पोर्टल से आवेदन होने से ग्रामीणों के समय और आने-जाने के खर्च में भारी कमी आएगी।
इस नई व्यवस्था की खास बात यह है कि इसका विस्तार पंचायत स्तर तक किया गया है। पोर्टल एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा। नागरिक इस पोर्टल पर जाकर अपनी जरूरत की सेवा का चयन कर सकते हैं और संबंधित दस्तावेज अपलोड कर ऑनलाइन आवेदन कर पायेंगें।
तकनीक के बढते उपयोग को देखते हुए अब सेवा सेतु की सेवाओं को व्हाट्सप से भी जोडा गया है। घर बैठे नागरिक व्हाट्सएप के माध्यम से सेवाओं और आवेदन की जानकारी ले सकते हैं।
इनमें जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, विवाह प्रमाण पत्र, राजस्व प्रकरण, नाम परिवर्तन के लिए राजपत्र प्रकाशन तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी अनेक महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। नागरिक अब घर बैठे ऑनलाइन आवेदन की स्थिति भी आसानी से ट्रैक कर सकते हैं। प्रत्येक सेवा के लिए समय-सीमा निर्धारित होने से कार्यों के निराकरण में तेजी और पारदर्शिता आई है।
बीजापुर तेंदूपत्ता गोदाम अग्निकांड: डीएफओ हटे,अब बाकी जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?
बीजापुर । बीजापुर जिला मुख्यालय से लगे ग्राम ईटपाल स्थित तेंदूपत्ता गोदाम में हुए भीषण अग्निकांड मामले में अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इस अग्निकांड में लगभग 25 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता जलकर खाक हो गया, जिसकी अनुमानित लागत 8 से 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है।घटना के बाद राज्य सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए बीजापुर वनमंडलाधिकारी (DFO) रमेश जांगड़े को हटा दिया है, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि मामले के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई कब होगी?
रूपसाय सलाम पहुंचे बीजापुर,गोदाम का किया निरीक्षण
शुक्रवार को छत्तीसगढ़ राज्य लघुवनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम अचानक बीजापुर पहुंचे। उन्होंने ईटपाल तेंदूपत्ता गोदाम का निरीक्षण किया और घटना की जानकारी ली। निरीक्षण के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए सलाम ने कहा कि मामले की विभागीय और पुलिस जांच जारी है। उन्होंने कहा कि “जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह विभाग का अधिकारी-कर्मचारी हो या बाहरी व्यक्ति, उसके खिलाफ कार्रवाई अवश्य की जाएगी।”
हालांकि डीएफओ पर हुई कार्रवाई को लेकर उन्होंने कहा कि यह सरकार और विभाग का निर्णय है, लेकिन जांच के बाद अन्य दोषियों पर भी कार्रवाई संभव है।
कई सवालों के घेरे में विभागीय व्यवस्था
घटना के बाद अब विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।जिस समय गोदाम में तेंदूपत्ता की उठाई-ढुलाई का कार्य चल रहा था, उस समय जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी आखिर कहां थे?
इतनी बड़ी मात्रा में तेंदूपत्ता भंडारण से पहले क्या विभाग ने आग से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए थे? यदि किए गए थे, तो आग पर समय रहते काबू क्यों नहीं पाया जा सका?
स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि गोदाम में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था नहीं थी,जिसकी वजह से आग तेजी से फैल गई और करोड़ों का नुकसान हो गया।
साख बचाने नेताओं के चक्कर लगा रहे संलिप्त अधिकारी
सूत्रों के अनुसार,मामले में संलिप्त बताए जा रहे कुछ निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी अब अपनी नौकरी और साख बचाने के लिए बीजापुर के भाजपा नेताओं और सर्किट हाउस के चक्कर काटते नजर आ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इस मामले में केवल डीएफओ पर कार्रवाई तक ही सीमित रहेगी, या फिर रेंज अधिकारी,गोदाम प्रभारी और घटना में लापरवाही बरतने वाले अन्य कर्मचारियों पर भी कठोर कार्रवाई होगी?
फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजर टिकी हुई है और जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।
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