शिफ्टिंग के नाम रेलवे ने हरियाली पर चलाई कुल्हाड़ी
बिलासपुर। वृक्षों की शिफ्टिंग की सूचना देकर रेलवे हरियाली ही साफ कर दी। मौके पर मिले ठूंठ और लकड़ियों के टुकड़े इसका प्रमाण है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के इस मामले की शिकायत मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। उन्हें बड़ी संख्या में ठूंठ मिले। इसके अलावा कटाई के संबंध में जब मौके पर मौजूद ठेकेदार व कर्मचारियों से अनुमति के दस्तावेज मांगें तो वह नहीं उपलब्ध करा सके। हालांकि कुछ पेड़ों को नई जगह पर शिफ्ट किया गया।
विभाग ने बताया इन प्रक्रियाओं का करना होता है पालन, जो नहीं किया
किसी भी पेड़ दोबारा लगाने के लिए उखाड़ा नहीं जाता बल्कि खोदकर निकाले जाते हैं ताकि जड़ के साथ मिट्टी भी निकले।
जहां पेड़ लगने हैं, वहां की मिट्टी और जहां पहले लगे थे, उन दोनों की मिट्टी परीक्षण कराया जाता है। मिलान होने पर प्लांटेशन होता है। परीक्षण लैब में कराना है।
पुराने जगह से ज्यादा के हिस्से में प्लांटेशन करने के लिए गड्डा खोदा जाता है।
पटाव के लिए वहीं मिट्टी लानी पड़ती है। इसके बाद 15 दिन तक का गोबर डाला लाता है। तब जाकर उस जगह पेड़ लगाए जा सकते हैं।
प्लांटेशन का समय जून व जुलाई का महीना होता है।
दोबारा पेड़ लगाने के लिए उसे उखाड़ने के 90 मिनट बाद रोपण करना अनिवार्य होता है।
डंगालों की छटाई होनी चाहिए। ताकि तेज हवा या अन्य कारणाें से पेड़ की जड़ न हिले।