संस्कृति
महाशिवरात्रि पर आज ओंकारेश्वर महादेव के 24 घंटे होंगे दर्शन, 151 किलो मिठाई का महाभोग
खंडवा(Omkarewswar Jyotirlinga)। महाशिवरात्रि पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के पट अल सुबह 3:30 बजे से खुलते ही दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह छह तक श्रद्धालुओं ने गर्भगृह में पहुंचकर पूजा अर्चना की। इसके बाद गर्भगृह में प्रवेश रोक दिया गया। परंपरा अनुसार साधु-संतों ने शोभायात्रा के रूप में मंदिर पहुंच कर भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए।
इसके बाद आम श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला प्रारंभ हुआ। आज मंदिर के द्वार 24 घंटे दर्शनार्थियों के लिए खुले रहेंगे। दिन चढ़ने के साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की कतार बढ़ती जा रही है। पूरा परिसर ओम नमः शिवाय और बम भोले के जयकारों से गूंज रहा है। नर्मदा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं।
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महापर्व पर एक दिन पहले मंगलवार शाम से ही श्रद्धालुओं का ओंकारेश्वर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। मंदिर परिसर और गर्भगृह का फूलों से विशेष शृंगार किया गया है। यह फूल रतलाम व इंदौर से आए हैं।
सुखदेव मुनी द्वार से करवाए जा रहे दर्शन
महाशिवरात्रि पर ओंकोरश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। नए झूला पुल से आने वाले श्रद्धालुओं को सुखदेव मुनि द्वार से दर्शन करवाए जा रहे है। महापर्व पर भीड़ को देखते हुए भगवान के मूलस्वरूप पर सीधे जल, पुष्प और बेलपत्र चढ़ाने पर प्रतिबंध लगा है। वीआईपी दर्शन और नावों का संचालन भी बंद है।
भगवान को मिष्ठान का भोग
महाशिवरात्रि पर मंदिर ट्रस्ट की ओर से भगवान का विशेष श्रृंगार और 151 किलो पेड़े का महाभोग दोपहर की भोग आरती में लगाया जाएगा। दो दिनों में दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के यहां आने की संभावना है। मंदिरों के अलावा आश्रम, मठ और सामाजिक संगठनों द्वारा भी विभिन्न आयोजन और प्रसादी वितरण किया जा रहा है। 
बैंडबाजे के साथ पहुंचे साधु, संत
मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद ओंकारेश्वर मंदिर के साथ ममलेश्वर मंदिर में भी दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचे। संत मंडल के महामंडलेश्वर, महंत, साधू और पंडित तड़के नर्मदाजी में स्नान के बाद ढोल और बैंड-बाजों के साथ नगर में शोभायात्रा के रूप में मंदिर पहुंचकर भूतभावन भगवान शिव का दर्शन और पूजन किया।
गुरुवार सुबह तक खुले रहेंगे पट
मंदिर ट्रस्ट के सहायक कार्यपालन अधिकारी अशोक महाजन ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व के लिए मंदिर के कर्मचारियों को परिसर में तैनात किया गया है। भीड़ नियंत्रण के लिए जेपी चौक पर जिगजैग बैरिकेडिंग लगाई गई है। बुधवार सुबह चार बजे से लेकर गुरुवार सुबह तक पट दर्शनार्थियों के लिए खुले रहेंगे। बीच मे कुछ समय आरती के लिए बंद होंगे।
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वाहनों का प्रवेश रोका गया
मांधाता थाना प्रभारी अनोप सिंधिया ने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए वाहनों का नगर में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। नर्मदा घाटों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। सीसीटीवी कैमरा से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
प्रयागराज महाकुंभ का अंतिम दिन, जारी है अमृत स्नान, देखिए वीडियो
प्रयागराज। प्रयागराज महाकुंभ का बुधवार को आखिरी दिन है। महाशिवरात्रि के अवसर पर आखिरी अमृत स्नान किया जा रहा है। इस दिन अब तक 66 करोड़ सनातनी प्रयागराज महाकुंभ में स्नान कर चुके हैं, जो कि एक रिकॉर्ड है।
आज के अमृत स्नान के लिए सुरक्षा के भारी बंदोबस्त किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में हैं और वहीं से कंट्रोल रूम से नजर रख रहे हैं। भारी संख्या में लोग संगम तट की ओर से बढ़ रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने नजदीकी घाटों पर जाकर गंगा में डुबकी लगाएं और पुण्य लाभ लें।
प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ के अंतिम स्नान में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा की गई।
अप्रैल से शुरू होगी चारधाम यात्रा
उत्तराखंड। चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री की यात्रा इस साल 30 अप्रैल से शुरू हो रही है।
चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण भी 11 मार्च से शुरू हो जाएंगे। इस बार यात्रा के पंजीकरण प्रक्रिया को आधार कार्ड से जोड़ने की तैयारी चल रही है।
इस सिलसिले में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन संचालित भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी आधार कार्ड को इस प्रक्रिया से जोड़ने की अनुमति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
इसकी अनुमति मिलने के बाद पंजीकरण को आधार कार्ड से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि इसमें कम से कम महीने भर का समय लगेगा। यह पहल यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाने में मददगार साबित होगी।
पिछली बार यात्रियों को हुई थी परेशानी
बता दें कि इस साल चारधाम यात्रा 30 अप्रैल को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ शुरू होगी और यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 11 मार्च से शुरू हो जाएगी। पिछले साल चारधाम यात्रा में 46 लाख से अधिक लोग पहुंचे थे। पिछली बार यात्रा के शुरुआती दौर में पंजीकरण में कई दिक्कतें भी आई थीं, जिससे यात्रियों का पूरा शेड्यूल गड़बड़ा गया था। यही नहीं, बड़ी संख्या में बिना पंजीकरण के पहुंंचे यात्रियों को बहुत कठिनाई उठानी पड़ी थी।
इस बार नहीं होगी कोई दिक्कत
पिछली बार की कमियों से सबक लेते हुए इस बार चारधाम यात्रा के लिए 60 प्रतिशत ऑनलाइन और 40 प्रतिशत ऑफलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने का निर्णय लिया गया है। ऑफलाइन पंजीकरण यात्रा शुरू होने से 10 दिन पहले होंगे तो वहीं ऑनलाइन पंजीकरण 11 मार्च से शुरू हो जाएंगे। गढ़वाल मंडलायुक्त विनय शंकर पांडेय ने बताया कि यात्रा को और अधिक व्यवस्थित करने के उद्देश्य से पंजीकरण को आधार कार्ड से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
उत्तराखंड के जिन तीन जिलों चमोली, रुद्रप्रयाग व उत्तरकाशी में चारधाम स्थित हैं, वहां की आर्थिक व्यवस्था इस यात्रा से जुड़ी है। साथ ही हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी जिलों के लोगों की रोजी रोटी लिए भी यह यात्रा महत्वपूर्ण होती है।
Maha Shivratri 2025: 60 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, इस दिन को और भी बना रहा है विशेष…
Maha Shivratri 2025 : महाशिवरात्रि का पर्व इस वर्ष 26 फरवरी 2025, बुधवार को मनाया जाएगा. इस दिन एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसे ‘बुधादित्य योग’ कहा जाता है. यह योग तब बनता है जब सूर्य और बुध एक ही राशि में स्थित होते हैं. इस वर्ष, सूर्य, बुध और शनि तीनों ग्रह कुंभ राशि में एक साथ होंगे, जिससे त्रिग्रही योग का निर्माण होगा. यह संयोग लगभग 60 वर्षों बाद बन रहा है, जो महाशिवरात्रि के दिन को और भी विशेष बना देता है.
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग, परिघ योग और शिव योग भी बन रहे हैं, जो इस पर्व की महत्ता को और बढ़ाते हैं. ऐसे शुभ संयोगों में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से आध्यात्मिक उन्नति, धन, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है.
महाशिवरात्रि के दिन चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है. यदि संभव हो, तो इस दिन रात्रि जागरण करते हुए चारों प्रहर में भगवान शिव की विधिवत पूजा करें. इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.
इन मंदिरों में शिवलिंग पर झाड़ू चढ़ाने की परंपरा, जानिए इसके पीछे का कारण…
शिवलिंग पर झाड़ू चढ़ाने की परंपरा सामान्य हिंदू रीति-रिवाजों में नहीं मिलती, लेकिन कुछ विशेष स्थानों पर लोक मान्यताओं के अनुसार ऐसा किया जाता है. मान्यता है कि इस प्रक्रिया से त्वचा संबंधी रोग और चर्म रोग दूर हो जाते हैं.
खिड़गांव, कोल्हापुर (महाराष्ट्र)
यहां स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धालु झाड़ू चढ़ाकर पूजा करते हैं. मान्यता है कि इससे चर्म रोग और अन्य बीमारियों से मुक्ति मिलती है. स्थानीय भक्त इसे आस्था और उपचार का एक माध्यम मानते हैं.
सादतबाड़ी गांव, संभल (उत्तर प्रदेश)
यहां के पातालेश्वर महादेव मंदिर में झाड़ू चढ़ाने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे त्वचा संबंधी रोग और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है. यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. इन स्थानों पर झाड़ू को शुद्धि और बीमारी निवारण का प्रतीक माना जाता है.
तांत्रिक परंपराओं में झाड़ू का महत्व
कुछ स्थानों पर विशेष तांत्रिक विधियों में झाड़ू का उपयोग शुद्धिकरण और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए किया जाता है.
महाशिवरात्रि विशेष आलेख सुर असुर के देव शिव के शस्त्र- श्रृंगार
मुख्य सचिव मनोज कुमार और डीजपी प्रशांत कुमार ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा, महाकुंभ क्षेत्र में किया निरीक्षण
Mahakumbh Mahashivratri 2025. 26 फरवरी को महाशिवरात्रि का महापर्व है. संगम में अंतिम स्नान होगा. इसे लेकर जोरशोर से तैयारियां की जा रही है. इसी कड़ी में शुक्रवार को मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. वहीं डीजीपी प्रशांत कुमार ने महाकुंभ नगर में सुरक्षा और यातायात व्यवस्थाओं का जायजा लिया.
डीजीपी ने बेहतर यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. साथ ही, यूपी पुलिस सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर बनाए हुए है और भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. डीजीपी ने यह भी सुनिश्चित किया कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और माहौल बिगाड़ने के प्रयासों में लगे तत्वों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. अब तक 50 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. मुख्य सचिव और डीजीपी ने नाव से संगम घाटों का भी निरीक्षण किया.
बता दें कि अब तक महाकुंभ में 58.03 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं. इस पावन तीर्थ में अब तक कई हस्तियां शामिल हो चुकी हैं. कुंभ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ (मंत्रिमंडल समेत) डुबकी लगा चुके हैं. इसके अलावा 73 देशों के प्रतिनिधिमंडल, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मंत्रिमंडल, सांसद, विधायक, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी, मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव, उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी, मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, श्रीपद नाइक, बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी और राज्य सभा सांसद सुधा मूर्ति भी संगम स्नान कर चुके हैं.
इन हस्तियों ने भी किया स्नान
वहीं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय, कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार, गोरखपुर के सांसद रवि किशन, हेमा मालिनी, पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’, वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद, बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री, अनुपम खेर, मिलिंद सोमण, निधिश्री, ओलम्पिक मेडलिस्ट साइना नेहवाल, कवि कुमार विश्वास, क्रिकेटर सुरेश रैना, अन्तर्राष्ट्रीय रेसलर खली, कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा, बॉलीवुड एक्ट्रेस ईशा गुप्ता, उद्योगपति मुकेश अंबानी, गौतम अदाणी समेत कई बड़ी हस्तियां महाकुंभ में डुबकी लगा चुकी हैं.
महाकुंभ 2025: संगम के सभी रास्तों पर 10 KM तक आस्था का जनसैलाब
प्रयागराज। महाकुंभ' का गुरुवार (20 फरवरी) को 39वां दिन है। आज भी कुंभ में जबरदस्त भीड़ है। संगम आने-जाने वाले सभी रास्तों पर 10 किमी तक श्रद्धालुओं की भीड़ है। प्रयागराज के बाहर की पार्किंग में वाहनों को रोक जा रहा है। भीड़ के चलते प्रयागराज आने-जाने वाली 8 ट्रेनें 28 फरवरी तक रद्द कर दी गई हैं। 20 फरवरी को 'महाराष्ट्र कैबिनेट' प्रयागराज पहुंच रही है। सीएम देवेंद्र फडणवीस सहित सभी मंत्री संगम में डुबकी लगाएंगे।
57 करोड़ श्रद्धालु लगा चुके डुबकी
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी को महाकुंभ का आगाज हुआ। अब तक 57 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। 26 फरवरी को महाकुंभ का समापन होगा। भीड़ के चलते दारागंज स्थित संगम स्टेशन को 26 फरवरी तक बंद कर दिया गया है। महाकुंभ में तैनात अफसरों की ड्यूटी 27 फरवरी तक बढ़ा दी गई है। इंटरमीडिएट तक के स्कूल 20 फरवरी तक बंद कर दिए गए हैं।
महाकुंभ में भीड़ कम नहीं हो रही है। गुरुवार को भी बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहन संगम से 10-12 किमी पहले बनाई गई पार्किंग में रोके जा रहे हैं। यहां से शटल बस की व्यवस्था की गई है। स्टेशन से लोगों को पैदल जाना पड़ रहा है। VVIP पास भी रद्द कर दिए गए हैं। प्रशासन का अनुमान है कि शुक्रवार से महाकुंभ में भीड़ और ज्यादा बढ़ेगी। क्योंकि, यह महाकुंभ का आखिरी वीकेंड है।
महाकुंभ जाने वाले श्रद्धालु सावधान हो जाएं...! महाकुंभ में महिलाओं की प्राइवेसी में खलल डाली जा रही। संगम में स्नान करते, कपड़े बदलते समय महिलाओं के चोरी-छिपे फोटो-वीडियो बनाए जा रहे हैं। इन वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया है। बुधवार को कुंभ मेला पुलिस ने एक इंस्टाग्राम अकाउंट के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। अब तक 101 सोशल मीडिया अकाउंट पर FIR हो चुकी है।
होली के दिन ही लगेगा चंद्र ग्रहण, क्या होगा इसका असर…
Holi Chandr Grahan 2025: होली का त्योहार भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. रंग खेलने से पहले होलिका दहन होता है. लेकिन इस बार होलिका दहन के दूसरे दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है. जब किसी त्योहार के दिन ग्रहण लगता है तो इसे अशुभ माना जाता है. आइए जानें कि क्या भारत में होली के रंगों से खेलना शुभ होता है.
साल 2025 का पहला चंद्र ग्रहण होली के दिन, यानी 14 मार्च 2025 को पड़ेगा. यह ग्रहण सुबह 9:29 बजे से दोपहर 3:29 बजे तक रहेगा. जानकारी के अनुसार होली के उत्सव और रंग खेलने पर कोई प्रतिबंध नहीं है और आप सामान्य रूप से होली का आनंद ले सकते हैं.
कब खेली जाएगी होली? (Holi Chandr Grahan)
होलिका दहन 13 मार्च की रात को किया जाएगा, जबकि रंगों की होली 14 मार्च की सुबह मनाई जाएगी. पूर्णिमा तिथि 13 मार्च को सुबह 10:35 बजे से शुरू होकर 14 मार्च को दोपहर 12:23 बजे तक रहेगी. इसलिए, होलिका दहन 13 मार्च की रात को और होली 14 मार्च की सुबह मनाई जाएगी.
चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए इसका धार्मिक या सांस्कृतिक प्रभाव नहीं माना जाएगा, और होली के उत्सव पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.
अखिल भारतीय संत: आज से प्रारंभ होगा सम्मेलन, देश-विदेश से आएंगे संत…
अखिल भारतीय संत: जयपुर में आज, 18 फरवरी 2025, से अखिल भारतीय संत सम्मेलन का शुभारंभ हो रहा है. यह सम्मेलन जवाहर नगर स्थित माहेश्वरी पब्लिक स्कूल के तक्षशिला ऑडिटोरियम में आयोजित किया जा रहा है.
सम्मेलन में देश-विदेश के अनेक संत महात्मा शामिल हो रहे हैं, जिनमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी कमलनयन दास महाराज (अयोध्या धाम), पद्मश्री ब्रह्मेशानंद महाराज (गोवा), स्वामी स्वायत्तानंद महाराज (कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका) और नरेंद्र नंद महाराज (स्पेन) प्रमुख हैं. सम्मेलन के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर और मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर से संबंधित विषयों पर चर्चा की जाएगी.
अखिल भारतीय संत: इसके साथ ही, गौ रक्षा और गौ सेवा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. यह सम्मेलन 18 फरवरी से 24 फरवरी तक चलेगा, जिसमें 19 फरवरी से 24 फरवरी तक के कार्यक्रम श्री पंचखंड पीठ पावन धाम आश्रम, विराटनगर में आयोजित होंगे.
छतीसगढ़ के समाजसेवी चंपालाल जैन परिवार के साथ पहुंचे महाकुंभ, संगम में लगाई आस्था की डुबकी, कहा- सात समंदर पार हो रही कुंभ की चर्चा
प्रयागराज। महाकुंभ में देश और दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। इसी बीच छतीसगढ़ के वरिष्ठ समाजसेवी चंपालाल जैन, अपनी धर्मपत्नी विमला देवी और रिश्तेदारों, मित्रों के साथ महाकुंभ पहुंचे। पहले उन्होंने पूरे मित्रों के साथ मेला क्षेत्र का भ्रमण किया। उसके बाद विधि विधान के साथ रमेश अग्रवाल, विजय अग्रवाल, गायत्री अग्रवाल, तनुजा बंसल, एस के बंसल और संजू अग्रवाल के साथ त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान उन्होंने एक स्वर में हर हर गंगे और भगवान भोलेनाथ के जय घोष के नारे लगाए।
महाकुंभ सनातन का महापर्व
त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाने के बाद वरिष्ठ समाजसेवी चंपालाल जैन ने कहा कि महाकुंभ सनातन का महापर्व है, यहां सभी को आना चाहिए। संगम नगरी पहुंचते ही हमें बहुत आनंद आया। गंगा में डुबकी लगाने के बाद हमारी सारी चिताएं एक क्षण में दूर हो गई। यहां करोड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। दिन ढलने के साथ भक्तों की संख्या में भी भारी इजाफा हो रहा हो रहा है। महाकुंभ में आस्था का जनसैलाब कम होने वाला नहीं है। महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। जिसकी चर्चा सात समंदर पार हो रही है। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ समेत देश की खुशहाली की कामना की।
ऐसा अनुभव केवल महाकुंभ
विमला देवी जैन ने कहा कि जो महाकुंभ के बारे में सुना था, उसे आज महसूस भी कर लिया। प्रयागराज पहुंचते ही अंदर से खुशी हो रही है। जिसे शब्दों में जाहिर नहीं किया जा सकता। सभी लोगों को यहां आना चाहिए, संगम में डुबकी लगाने के बाद सारी दुख तकलीफ और टेंशन दूर हो जाएगी। गंगा के पावन तट पर आकर हम खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। प्रयागराज आकर हमें बहुत अच्छा लग रहा है। संगम घाट के हवाओं की बात ही कुछ और है। ऐसा अनुभव केवल महाकुंभ में ही मिल सकता है। 144 साल बाद जो कुंभ हुआ है, वो सनातन धर्म का एक चमत्कार है। यहां आने से तन और मन को आनंद की अनुभूति होती है।
भारत के सनातन संस्कृति की अनूठी झलक
रायपुर से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि बहुत मन था कि संगम नगरी जाएं और गंगा में पावन डुबकी लगाएं। आज हमारी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हुई। गंगा मइया के गोद में बैठकर अच्छा लगा रहा है, जो लोग अभी तक नहीं आए हैं। उनके यहां जरूरी आना चाहिए, नहीं तो मन में हमेशा मलाल रहेगा कि पावन अवसर पर गंगा में डुबकी नहीं लगा पाए। भारत के सनातन संस्कृति की अनूठी झलक यहां देखने को मिलती है। भारत के लोगों के लिए गर्व का विषय है। यहां सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए है। आने जाने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। बता दें कि महाकुंभ में मंगलवार दोपहर 12 बजे तक 69.62 लाख से अधिक लोगों ने स्नान कर लिया है। अभी तक 54.31 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई है।
CPCB की रिपोर्ट ने UP सरकार की खोली पोल, महाकुंभ में संगम का पानी पीना तो दूर नहाने लायक भी नहीं, 54 करोड़ से अधिक लोगों के स्वास्थ्य से हुआ खिलवाड़
प्रयागराज. महाकुंभ में हर रोज करोड़ों श्रद्धालु पहुंचकर गंगा स्नान कर रहे हैं. अब तक 54 करोड़ से अधिक लोगों ने गंगा में स्नान किया है. इस बीच गंगा-यमुना नदी के पानी को लेकर सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट पेश कर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सूचित किया कि दोनों नदीं गंगा-यमुना का पीना तो दूर नहाने लायक भी नहीं है. जिसको लेकर एक प्रोफेसर का कहना है कि अगर ऐसे पानी में नहाया जाता है या इसे पीया जाता है तो बीमारी पैदा करेगा. ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि क्या यूपी सरकार ने करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का काम किया है?
बता दें कि महाकुंभ के दौरान गंगा-यमुना के पानी की गुणवत्ता को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने रिपोर्ट दाखिल की है. जिसमें बताया गया कि 73 अलग-अलग जगहों से गंगा और यमुना नदी के पानी के सैंपल लिए गए थे. जिनको 6 पैमानों पर जांचा गया है. जांच में पाया गया कि पानी में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा मानक से काफी अधिक मिला है.
सामान्य तौर पर एक मिलीलीटर पानी में 100 फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया होते हैं. लेकिन अमृत स्नान से एक दिन पहले यमुना नदी के सैंपल में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया 2300 पाया गया. वहीं संगम के सैंपल में 2000 फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए. जो टोटल फीकल कोलीफॉर्म 4500 है.
इतना ही नहीं कई जगहों से लिए गए सैंपल में भी फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया काफी अधिक पाए गए. रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि पानी को बिना प्यूरिफिकेशन और डिसइंफेक्ट किए नहाने के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने समग्र कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के एनजीटी के निर्देश का अनुपालन नहीं किया है.
उज्जैन में सोमवार से शुरू होगा शिवनवरात्र उत्सव, दूल्हा बनेंगे बाबा महाकाल
उज्जैन। वैसे तो तीर्थपुरी अवंतिका सदा सुहावनी है, लेकिन इन दिनों ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में चल रही शिव विवाह की तैयारी ने इसके सौंदर्य में चार चांद लगा दिए हैं। साफ सफाई के बाद मंदिर का कोना-कोना दमक रहा है, शिखर की सोनार शिखरियां मनमोह रही हैं।
भक्तों को इंतजार अब सोमवार सुबह का है जब शिव पंचमी की पूजा के साथ शिवनवरात्र का आरंभ होगा और भगवान महाकाल दूल्हा बनेंगे। बारह ज्योतिर्लिंग में महाकाल एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग हैं, जहां शिवनवरात्र के रूप में शिव पार्वती विवाह का उत्सव दस दिन तक मनाया जाता है।
नियनया शृंगार किया जाता है
नवरात्र के इन नौ दिनों में भगवान महाकाल का तिथि के अनुसार दूल्हा रूप में नितनया शृंगार किया जाता है। हालांकि इस बार 30 साल बाद तिथि (सप्तमी) वृद्धि का विशेष संयोग बना है। इसके चलते शिवनवरात्र दस दिन के रहेंगे और शिव विवाह का उत्सव 17 से 27 फरवरी तक मनाया जाएगा।

नौ दिन शिवनवरात्र उत्सव मनाने की परंपरा
इसमें पूजा अर्चना का विशेष अनुक्रम रहेगा तथा भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया जाएगा। इसलिए दस दिन मनता है उत्सव महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा अनुसार फाल्गुन कृष्ण पंचमी से त्रयोदशी तक नौ दिन शिवनवरात्र उत्सव मनाने की परंपरा है। लेकिन महाशिवरात्रि पर रातभर पूजा के बाद अगले दिन तड़के 4 बजे भगवान के शीश सवामन फल व फूलों का सेहरा सजाया जाता है।
सेहरा धारण कराने में लगता है 2 घंटे का समय
भगवान को सेहरा धारण कराने में दो घंटे का समय लगता है। इसके बाद सुबह 6 बजे सेहरा आरती होती है। सुबह 6 से 10 बजे तक सेहरा दर्शन होते हैं। इसके बाद सेहरा उतारा जाता है। पश्चात दोपहर 12 बजे भस्म आरती होती है। भस्म आरती के बाद दोपहर 2.30 बजे भोग आरती होती है।
इसके बाद मंदिर समिति पुजारियों का पारणा कराती है। फिर यह पर्व संपन्न होता है। इसलिए चतुर्दशी का यह दिन मिलाकर दस दिवसीय उत्सव की मान्यता है। यही कारण है इस बार तिथि वृद्धि होने से शिवनवरात्र दस दिन की रहेगी, लेकिन उत्सव ग्यारह दिन मनेगा।
दर्शन व्यवस्था में परिवर्तन होगा
शिवनवरात्र के दौरान सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक गर्भगृह में अभिषेक,पूजन व अनुष्ठान का विशेष अनुक्रम रहेगा। ऐसे में इस दौरान गर्भगृह के गलियारे से दर्शन की सुविधा बंद रहेगी। दोपहर 3 बजे से संध्या पूजन के समय भी प्रोटोकाल वाले दर्शनार्थियों को नंदी व गणेश मंडप के प्रथम बैरिकेड्स से निर्धारित व्यवस्था के अनुसार दर्शन कराए जाएंगे।
अधिकारी व कर्मचारी के साप्ताहिक अवकाश पर रोक
महाकाल मंदिर में 17 से 27 फरवरी तक शिवनवरात्र उत्सव मनाया जाएगा। 26 फरवरी को शिवरात्रि महापर्व रहेगा। इन ग्यारह दिनों में देशभर से हजारों श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन करने आएंगे।
मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था की दृष्टि से मंदिर के अधिकारी, शाखा प्रभारी व कर्मचारियों के साप्ताहिक अवकाश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रशासक ने आदेश जारी कर 16 फरवरी से 1 मार्च तक अवकाश स्थगित कर दिए हैं।
महाकाल के निराकार रूप को साकार करते हैं विशिष्ट दिव्य शृंगार
उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में इन दिनों शिवनवरात्र की तैयारी की जा रही है। इस बार 30 साल बाद तिथि वृद्धि के कारण यह उत्सव 17 से 27 फरवरी तक 11 दिन मनाया जाएगा।
इन 10 दिनों में पुजारी बाबा महाकाल को दूल्हा रूप में शृंगारित कर निराकार से साकार रूप प्रदान करेंगे। तिथि बढ़ोतरी के कारण पहले दो दिन चंदन का शृंगार होगा। इसके बाद क्रमश: शेषनाग, घटाटोप, छबीना, होलकर, मनमहेश, उमा महेश, शिव तांडव तथा सप्तधान्य रूप में भगवान का शृंगार होगा।
26 फरवरी के दिन नहीं होगा विशेष शृंगार
26 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन विशिष्ट मुखारविंद शृंगार नहीं किया जाएगा। नियमित पूजन-अनुष्ठान होगा और पूरे दिन भगवान महाकाल को सतत जलधारा अर्पित की जाएगी। इसी क्रम में 27 फरवरी को सप्तधान्य शृंगार के साथ शिवनवरात्र का समापन होगा।
पं. महेश पुजारी ने बताया भगवान महाकाल के यह मुखारविंद शिवसहस्त्रनामावली पर आधारित है। शिव के प्रत्येक नाम का एक विशेष महत्व है, आइए जानते हैं आखिर शिव को क्यों कहा जाता हैं महादेव।

चंदन शृंगार : यह महाकाल का दूल्हा रूप
शिवनवरात्र के पहले दो दिन भगवान महाकाल का चंदन शृंगार किया जाएगा। इस दिन से भगवान महाकाल दूल्हा बनते हैं।
शेषनाग शृंगार : विष्णु के प्रिय इसलिए धारण कराते हैं शेषनाग
भगवान महाकाल का एक नाम विष्णुवल्लभ है। इसका अर्थ है भगवान विष्णु के अतिप्रिय। इसलिए दूल्हा बने महाकाल को शेषनाग धारण कराया जाता है।
घटाटोप : काली घटाओं का समूह
भगवान महाकाल का एक रूप घटाटोप है। इसका अर्थ है आसमान में छाई काली घटाएं। शिव जब तांडव नृत्य करते हैं, तो उनकी जटा खुल जाती और ऐसा दृश्य उत्पन्न करती हैं।

छबीना : सज-धजकर तैयार दूल्हा
शिवनवरात्र में भगवान महाकाल भक्तों को छबीना रूप में दर्शन देते हैं। इसका अर्थ है सज-धजकर तैयार सुंदर दूल्हा।
होलकर : राजवंश ने बनवाया यह मुखारविंद
भगवान महाकाल का यह मुखारविंद होलकर राजवंश द्वारा बनवाया गया है, इसलिए इसे होलकर मुखारविंद कहा जाता है।
मनमहेश : जो मन को मोह ले वह मनमहेश
भगवान महाकाल के एक मुखारविंद का नाम मनमहेश है। इसका अर्थ है जिनका सुंदर रूप मन मोह लेता है, वे मनमहेश कहे गए हैं।
उमा महेश : शक्ति के बिना शिव अधूरे हैं
भगवान का उमा महेश रूप शिव व शक्ति का संयुक्त दर्शन है। ऐसा माना जाता है कि शक्ति के बिना शिव अधूरे हैं।
शिव तांडव : नृत्य मृदा में महादेव
भगवान महाकाल का शिव तांडव स्वरूप कला को समर्पित है। इस रूप में भगवान महाकाल तांडव रूप नृत्य करते दृष्टिगोचर होते हैं।
सप्तधान्य : जीव की उत्पत्ति का रहस्य
भगवान महाकाल को यह मुखारविंद धारण कराने के बाद सात प्रकार के धान्य अर्पित किए जाते हैं। मनुष्य का शरीर भी सप्त धातुओं से मिलकर बना है, इसलिए यह मुखारविंद जीव की उत्पत्ति का रहस्य बताता है।
पुजारियों ने बैठक कर लिया निर्णय
पं. महेश पुजारी ने बताया कि शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा व वंश परंपरागत पुजारियों ने बैठक कर शिवनवरात्र में भगवान महाकाल के श्रृंगार को लेकर बैठक की। इसमें निर्णय लिया गया कि इस बार नवरात्र नौ के बजाय दस दिन की है, इसलिए 17 व 18 फरवरी को पहले दो दिन चंदन का शृंगार होगा। इसके बाद पूर्वनिर्धारित क्रम अनुसार शृंगार किया जाएगा।
Mahakumbh 2025 : त्रिवेणी संगम में उमड़ा श्रद्धा का सागर, 49.11 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
प्रयागराज। महाकुंभ ( Mahakumbh 2025 ) में देश और दुनियाभर के श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। आज सुबह 8 बजे तक 20.20 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई है। महाकुंभ में अब तक कुल 49.11 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर लिया है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। संगम तट पर पुलिस बल, एनडीआरएफ टीम और चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। श्रद्धा का यह विशाल आयोजन विश्वभर के लोगों को आकर्षित कर रहा है।
महाकुंभ की चर्चा पूरी दुनिया में
महाकुंभ ( Mahakumbh 2025 ) की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। हर 12 साल बाद लगने वाले इस कुंभ में 144 साल बाद खास संयोग बन रहा है, क्योंकि अब तक 12 कुंभ पूरे हो चुके हैं। इसी वजह से इसे महाकुंभ कहा जा रहा है और इसमें आने वाला श्रद्धालुओं की संख्या पहले के किसी भी कुंभ से ज्यादा है। ऐसे में कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की गिनती के लिए यूपी सरकार ने हाईटेक उपकरणों का सहारा लिया है और इस बार AI बेस्ड कैमरे की मदद से लोगों की गिनती की जा रही है। अब तक 49.11 करोड़ लोगों ने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा ली है।
महाकुंभ ( Mahakumbh 2025 ) में अब तक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी, मणिपुर सीएम एन बीरेन सिंह, सीएम योगी और उनका पूरा मंत्रिमंडल, अखिलेश यादव, रवि किशन, कवि कुमार विश्वास, 73 देशों के प्रतिनिधिमंडल, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक समेत कई बड़ी हस्तियां संगम में स्नान कर चुकी हैं।
बांके बिहारी मंदिर में मारपीट : सेवादारों ने श्रद्धालुओं को पीटा, दो महिलाओं समेत तीन घायल
वृंदावन। उत्तर प्रदेश के वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में मारपीट का मामला सामने आया है। इस मारपीट में तीन श्रद्धालु घायल हुए हैं। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में एडमिट किया गया है। सेवादार और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद चढ़ाने को लेकर विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ा कि बात मारपीट तक आ गई और दो महिलाओं समेत तीन श्रद्धालु जख्मी हो गए। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मारपीट का वीडियो हुआ वायरल
वीडियो देखा जा सकता है कि प्रसाद चढ़ाने को लेकर सेवादार और श्रद्धालुओं की बीच बात हो रही थी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई और एक दूसरे पर लात घूंसे मारने लगे। चीखने चिल्लाने की आवाज सुनते ही कुछ सेवादार, गोस्वामी भी आए और श्रद्धालुओं को पीटना शुरू कर दिया। मारपीट कर रहे युवकों ने महिलाओं को भी नहीं छोड़ा और उन्हें भी पीट दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन में जुट गई।
मामले की जांच में जुटी पुलिस
इस घटना के बाद पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि तीन घंटे लाइन में लगने के बाद दर्शन का नंबर आया। हम लोग भगवान के दर्शन करने आए किसी से झगड़ा करने नहीं। वहां पर मौजूद कुछ लोगों को हमने, हटने के लिए कहा लेकिन वे नहीं हटे। जब हमने आगे बढ़ने का प्रयास किया तो वो लोग उल्टा-सीधा कहने लगे। इस दौरान कुछ युवकों ने हमारे साथ मारपीट की। वहीं वृंदावन कोतवाली प्रभारी रवि त्यागी ने बताया कि मंदिर के सीसीटीवी की जांच की गई है, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
महाकुंभ में उमड़ा आस्था का जनसैलाब : 38.97 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में डुबकी
प्रयागराज। महाकुंभ का आज 25वां दिन है। देश और दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। संगम में आज सुबह 10 बजे तक 48.70 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। महाकुंभ में भक्तों का तांता लगा हुआ है, और 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कल्पवास किया है। कुल मिलाकर, कल तक 38.97 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया है, जो इस धार्मिक महापर्व की भव्यता और श्रद्धा को दर्शाता है।
दो राज्यों के सीएम आज करेंगे स्नान
महाकुंभ में अब तक पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, अखिलेश यादव, रवि किशन, सीएम योगी और उनका पूरा मंत्रिमंडल, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, कवि कुमार विश्वास, 73 देशों के प्रतिनिधिमंडल, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक समेत कई बड़ी हस्तियां संगम में स्नान कर चुकी हैं। आज हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी और मणिपुर के सीएम त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे।
पूरी दुनिया में महाकुंभ की धमक
महाकुंभ की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। सात समंदर पार के लोग कुंभ की दिव्यता और भव्यता को देखने के लिए आ रहे है। भारत की प्राचीन परंपरा और यहां की सनातन संस्कृति विदेशी लोगों के मन को भा रही है। जिसके परिणामस्वरूप महाकुंभ में अब तक 38 करोड़ से भी ज्यादा श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगा ली है। बसंती पंचमी के मौके पर डेढ़ करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने त्रिवेणी संगम में शाही स्नान किया और मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं 10 लाख से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में कल्पवास कर रहे है।
महाकुंभ की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश के लिए देवताओं और असुरों के बीच 12 दिन घमासान युद्ध हुआ। अमृत को पाने की लड़ाई के बीच कलश से अमृत की कुछ बूंदें धरती के चार स्थानों पर गिरी थीं। ये जगह हैं प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार और नासिक। इन्हीं चारों जगहों पर कुंभ का मेला लगता है। जब गुरु वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं तब कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित किया जाता है। जब गुरु और सूर्य सिंह राशि में होते हैं, तब कुंभ मेला नासिक में आयोजित होता है। गुरु के सिंह राशि और सूर्य के मेष राशि में होने पर कुंभ मेला उज्जैन में आयोजित होता है। सूर्य मेष राशि और गुरु कुंभ राशि में होते हैं, तब हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।