उपमुख्यमंत्री के गढ़ में सियासी भूचाल: 25 में से 23 सदस्यों ने जनपद-उपाध्यक्ष के खिलाफ ठोका अविश्वास प्रस्ताव
कबीरधाम |
2026-04-22 19:02:27
कवर्धा ,
बोड़ला विकासखंड की जनपद पंचायत में सत्ता के शीर्ष पर बैठे नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। 25 सदस्यीय जनपद पंचायत में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को छोड़कर शेष 23 सदस्यों ने नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव के लिए आवेदन प्रस्तुत कर दिया है। यह घटनाक्रम स्थानीय सियासत से आगे बढ़कर प्रदेश स्तर तक चर्चा का विषय बन गया है।
जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष नंद श्रीवास के खिलाफ लाया गया यह प्रस्ताव सीधे तौर पर उनकी कार्यशैली, निर्णय प्रक्रिया और सदस्यों से तालमेल पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। बताया जा रहा है कि सदस्यों ने व्यवहारिक असंतोष से लेकर प्रशासनिक निर्णयों तक कई बिंदुओं को आधार बनाया है।
23 हस्ताक्षर, एकजुट असंतोष
जनपद में कुल 25 सदस्य हैं। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को छोड़कर बाकी सभी 23 सदस्यों का एक साथ हस्ताक्षर करना यह संकेत देता है कि मामला व्यक्तिगत मतभेद से कहीं आगे बढ़ चुका है। इतनी बड़ी संख्या में निर्वाचित प्रतिनिधियों का एक मंच पर आना नेतृत्व के खिलाफ व्यापक अविश्वास को दर्शाता है।
उपमुख्यमंत्री की साख पर भी सवाल
मामला इसलिए और भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि बोड़ला विकासखंड प्रदेश के गृह एवं पंचायत मंत्री व उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का निर्वाचन क्षेत्र है। सरकार की पंचायत व्यवस्था को लेकर सख्ती और पारदर्शिता के दावों के बीच उनके ही क्षेत्र की जनपद पंचायत में यह हालात राजनीतिक तौर पर असहज तस्वीर पेश करते हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि नेतृत्व संकट गहराता है, तो विपक्ष इसे सीधे तौर पर उपमुख्यमंत्री की प्रशासनिक पकड़ और संगठनात्मक नियंत्रण से जोड़कर सवाल खड़े कर सकता है। ऐसे में यह अविश्वास प्रस्ताव केवल जनपद तक सीमित मामला नहीं, बल्कि साख की परीक्षा भी बनता दिख रहा है।
संगठन पर भी दबाव
भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष राजेंद्र चंद्रवंशी भी इसी विकासखंड से आते हैं। ऐसे में स्थानीय संगठन की एकजुटता और नियंत्रण क्षमता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि 23 सदस्य अपने रुख पर कायम रहते हैं, तो यह संगठनात्मक समन्वय की बड़ी चुनौती मानी जाएगी।
आगे क्या
नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन विशेष बैठक बुलाकर मतदान कराएगा। यदि प्रस्ताव पारित होता है, तो जनपद पंचायत की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।
फिलहाल बोड़ला की राजनीति में संदेश साफ है
सत्ता के शीर्ष पर असंतोष अब दबे स्वर में नहीं, बल्कि दस्तावेजी बगावत में बदल चुका है, और इसकी गूंज प्रदेश स्तर तक सुनाई दे रही है।