आगर नदी पर बन रहा एनिकट कई सवालों के घेरे में*करोडों का एनीकट निर्माण पूर्णता की ओर ,-पर "शुरू से ही लापता"है सूचना पटल;
कबीरधाम |
2026-05-19 15:01:01
"विकाश शुक्ला"
पंडरिया/कवर्धा--जल संसाधन विभाग के पंडरिया अनुभाग अंतर्गत छिरपानी ग्राम के पास आगर नदी पर बन रहा तीन करोड़ अट्ठावन लाख रुपये की लागत का एनिकट इन दिनों अपनी उपयोगिता से ज्यादा विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और निर्माण एजेंसी की मनमानी को लेकर चर्चा में है। निर्माण कार्य अब पूर्णता की ओर है, लेकिन नियम-कायदों को ताक पर रखकर काम को अंजाम दिया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जनता के पैसों से बन रहे इस इतने बड़े प्रोजेक्ट का विवरण देने वाला 'सूचना फलक' (साइन बोर्ड) मौके पर कार्य प्रारंभ होने की तिथि से लगा ही नहीं है।
"उधर दीवाल के पीछे पड़ा है, जाकर पढ़ लो"
शासकीय नियमों के मुताबिक किसी भी निर्माण कार्य की शुरुआत से पहले वहां लागत, ठेकेदार का नाम, कार्य पूर्ण करने की अवधि और तकनीकी विवरण का बोर्ड लगाना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ गंगा उल्टी बह रही है। गत दिवस जब हमारे संवाददाता ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी लेनी चाही, तो वहां
तैनात निर्माण एजेंसी के एक कर्मचारी (चौकीदार) से पूछा गया कि "सूचना बोर्ड कहां गड़ा है?" तो उसने बेहद सपाट और गैर-जिम्मेदाराना लहजे में कहा– "बोर्ड अभी गड़ा तो नहीं है, उधर दीवाल के पीछे पड़ा है, वहां जाकर पढ़ लीजिए।" यह जवाब साफ बयां करता है कि निर्माण एजेंसी को न तो नियमों का खौफ है और न ही जनता के प्रति कोई जवाबदेही।
धरातल के टॉप लेबल को छोड़कर बन रहा एप्रोच रोड
एनिकट के दोनों ओर 100-100 मीटर का अप्रोच सीसी रोड बनाया जाना प्रस्तावित है। लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। वर्तमान में केवल एक तरफ ही सीसी रोड का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी लंबाई 100 मीटर (लगभग 328 फीट) होनी चाहिए, लेकिन मौके पर यह महज 150 फीट के आसपास ही नजर आ रही है।
तकनीकी पहलू और खतरा:
नियमतः अप्रोच रोड को नदी से ऊपर वहां तक बनाया जाना चाहिए जहां से ढलान शुरू होती है (यानी धरातल के टॉप लेवल तक)। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि बारिश के दिनों में टॉप लेवल की मिट्टी बरसाती पानी के साथ बहकर नीचे न आए और सड़क व एनिकट को नुकसान न पहुंचे। लेकिन यहाँ इस तकनीकी पहलू को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे पहली ही बारिश में कटाव का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।,
करोड़ों के इस खेल पर जब विभाग के पंडरिया स्थित जिम्मेदार अधिकारी एसडीओ जल संसाधन श्री शर्मा से बात करने की कोशिश की गई, तो हमेशा की तरह उनका जवाब भी टालमटोल और गैर-जिम्मेदाराना रहा। पंडरिया जल संसाधन अनुविभाग में बड़े प्रोजेक्ट चल रहे ,,इन निर्माण कार्यो में अधिकारियों की मानिरिटिंग की कमी साफ झलकती है।जिसका फायदा ठेकेदार उठा रहे है।आगर नदी पर बन रहे एनीकट के कार्य स्थल पर नागरिक सूचना पटल के नहीँ लगाये जाने के संबंध में,लोकल काली रेत के उपयोग और घटिया मटेरियल के सम्बंध में महीनों पहले भी एसडीओ जल संसाधन विभाग श्री शर्मा को अवगत कराया गया था,लेकिन हमेशा की तरह उनका टालमटोल वाला जवाब दिखवाता हूं वाला ही रहा।और वे आज तक दिखवाते ही रह गए।
बड़ा सवाल
: जब योजना की शुरुआती जानकारी (सूचना पटल) को ही दीवाल के पीछे छुपा कर रख दिया गया है, तो फिर भीतर चल रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता कितनी पारदर्शी होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। उच्च अधिकारियों को इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर तुरंत जांच करनी चाहिए।
,"सूचना बोर्ड लगाने के लिए कहा गया था किंतु अगर अभी तक नहीं लगा है तो कल लगवा दिया जाएगा और रही बात एप्रोच रोड के लंबाई की तो जितना बनाया जाएगा उसी के हिसाब से मूल्यांकन किया जाएगा!*
~< श्री शर्मा अनु विभा अधि.पंडरिया