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छठ पूजा सिर्फ सूर्य उपासना नहीं, बल्कि यह ऊर्जा, श्रद्धा और जीवन संतुलन का पर्व : आचार्य पुनीत गुरु जी

 लखनऊ। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य पुनीत गुरु जी (Astro Puneet Guru Ji) ने बताया कि छठ पूजा सिर्फ सूर्य उपासना नहीं, बल्कि यह ऊर्जा, श्रद्धा और जीवन संतुलन का पर्व है।

उन्होंने कहा कि इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने से व्यक्ति के जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि और आत्मशक्ति का संचार होता है।
आचार्य पुनीत गुरु जी के अनुसार, ज्योतिषीय दृष्टि से छठ पर्व के दौरान सूर्य की स्थिति जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है और यह काल सूर्य साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सूर्योपासना और लोक आस्था के महान पर्व छठ पूजा का शुभारंभ आज नहाय-खाय के साथ हो रहा है। यह चार दिवसीय महापर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और सूर्य देव व षष्ठी माता को समर्पित होता है। आज देशभर में श्रद्धालु स्नान, पूजा और सात्विक भोजन के साथ इस पवित्र पर्व की शुरुआत कर रहे हैं।

आत्मानुशासन और श्रद्धा का अद्भुत पर्व
आचार्य पुनीत गुरु जी ने बताया कि छठ पूजा आत्मसंयम, शुद्धता और भक्ति का अद्भुत संगम है। व्रती 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखकर अस्ताचलगामी एवं उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं। भगवान भास्कर से जीवन में सुख, समृद्धि और संतान की दीर्घायु की प्रार्थना की जाती है। यह पर्व लोक जीवन में आत्मबल और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है।

छठ पूजा 2025 कैलेंडर:

????️ 25 अक्टूबर (शनिवार) — पहला दिन: नहाय-खाय
आचार्य पुनीत गुरु जी ने बताया कि नहाय-खाय के दिन व्रती पवित्र स्नान कर सेंधा नमक और घी से बने प्रसाद (कद्दू, चना दाल और चावल) का सेवन करती हैं। यही दिन छठ पर्व का आरंभ माना जाता है।

????️ 26 अक्टूबर (रविवार) — दूसरा दिन: खरना
इस दिन शाम के समय व्रती मीठी खीर, रोटी और केले का प्रसाद बनाकर ग्रहण करती हैं। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है।

????️ 27 अक्टूबर (सोमवार) — तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य
इस दिन घाटों पर श्रद्धालु अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। सूप में फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू और अन्य प्रसाद सजाकर जल में खड़े होकर अर्घ्य देने की परंपरा है।

????️ 28 अक्टूबर (मंगलवार) — चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण
उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती पारण करती हैं। इसी के साथ चार दिवसीय महापर्व का समापन होता है।

छठ पूजा का आध्यात्मिक महत्व
आचार्य पुनीत गुरु जी ने बताया कि छठ महापर्व केवल सूर्योपासना नहीं, बल्कि उषा, प्रकृति, जल, वायु और ऊर्जा तत्त्वों की आराधना का पर्व है। यह जीवन में सकारात्मकता, आत्मशुद्धि और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक है। छठी मैया की उपासना से घर में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान की रक्षा होती है।

आचार्य पुनीत गुरु जी का संदेश:

“छठ महापर्व आत्मनियंत्रण, श्रद्धा और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। भगवान सूर्य और षष्ठी माता आप सभी के जीवन में प्रकाश, प्रगति और समृद्धि लाएं। छठी मैया की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।”

???? जय श्री सूर्यनारायण जी
???? जय छठी मैया जी

आचार्य पुनीत गुरु जी (पंडित पुनीत दुबे)
संस्थापक — बाबा नीम करौरी ज्योतिष सेवा संस्थान (ट्रस्ट)
???? +91-9919500233 | ???? www.astropuneetguruji.com

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