छत्तीसगढ़ / बलरामपुर
बलरामपुर जिले में 10,320 बोरी धान व 16 वाहन जब्त
धान के अवैध भंडारण एवं परिवहन पर कार्रवाई जारी
अंतर्राज्यीय सीमाओं व ग्रामीण क्षेत्रों में रखी जा रही है सख्त निगरानी
रायपुर, 23 नवंबर 2025
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को सुचारू एवं पारदर्शी बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में धान के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर श्री राजेन्द्र कटारा के निर्देशानुसार गठित संयुक्त टीम ने अब तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 10 हजार 320 बोरी धान तथा अवैध परिवहन में प्रयुक्त 16 वाहनों को जब्त किया है।
धान के अवैध कारोबार में संलिप्त कोचियो और बिचौलियो पर कार्रवाई के लिए जांच-दल द्वारा अंतर्राज्यीय सीमाओं सहित पूरे जिले में विशेष निगरानी रखी जा रही है। खाद्य विभाग, राजस्व विभाग एवं पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा नियमित जांच-पड़ताल कर इस मामले में संलिप्त लोगों के विरूद्ध कार्रवाई कर रही है। जिला प्रशासन ने किसानों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि धान के अवैध भंडारण, परिवहन की जानकारी मिलने पर तुरंत सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्तियों का नाम एवं विवरण पूर्णतः गोपनीय रखा जाएगा।
सचिव श्री अवनीश शरण ने किया विभिन्न धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण
खरीदी व्यवस्था का बारीकी से किया अवलोकन
शासन की मंशानुरूप पारदर्शिता से धान खरीदी करने के दिए निर्देश
बलरामपुर, 17 नवम्बर 2025



आयुक्त नगर एवं ग्राम नियोजन एवं आयुक्त, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड (अतिरिक्त प्रभार) तथा जिले के प्रभारी सचिव श्री अवनीश शरण ने जिले के प्रवास पर बलरामपुर , रामानुजगंज, वाड्रफनगर अंतर्गत विभिन्न धान खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बड़कीमहरी, तातापानी, भँवरमाल, रामानुजगंज, महावीरगंज, विजयनगर, त्रिकुंडा, स्याही एवं वाड्रफनगर धान खरीदी केंद्रों में पहुंचकर खरीदी की स्थिति, सुविधाओं की उपलब्धता तथा किसानों को मिल रही व्यवस्था का प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी सचिव ने प्रत्येक केंद्र में धान के सुरक्षित रख-रखाव, बारदाने की उपलब्धता, डैनेज, काटे गए टोकन, पंजीकृत किसानों की संख्या और खरीदी किए गये धान की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने नमी मापक यंत्र, स्टैंसिल, तौल मशीनें, विद्युत व्यवस्था और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता का भी परीक्षण किया। उन्होंने स्वयं नमी मापक यंत्र से धान की नमी की जांच कर गुणवत्ता का आंकलन किया और खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता व सटीकता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
भँवरमाल केंद्र में प्रभारी सचिव ने धान बेचने पहुंचे किसानों से चर्चा कर खरीदी संबंधित जानकारी ली। किसानों ने बताया कि समिति में टोकन कटवाने और धान बेचने में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है तथा पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो रही है। प्रभारी सचिव ने समिति प्रबंधक से टोकन काटने की प्रक्रिया, पंजीकृत लघु, सीमांत और बड़े किसानों की संख्या तथा खरीदी से संबंधित विभिन्न पंजीयों की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने केंद्र में काटे गए टोकनों की समरी शीट का अवलोकन कर खरीदी की प्रगति का आकलन किया।
श्री शरण ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि खरीदी अवधि में केंद्रों की सतत निगरानी सुनिश्चित करें, किसानों को किसी भी स्तर पर असुविधा न हो तथा खरीदी प्रक्रिया निर्बाध बनी रहे। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप केवल वास्तविक पंजीकृत किसानों से ही धान खरीदी सुनिश्चित करें उन्होंने संबंधित अधिकारियों को किसी भी अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर, अपर कलेक्टर श्री आर.एस. लाल, श्री अभिषेक गुप्ता, श्री चेतन बोरघरिया सहित संबंधित एसडीएम व अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
खर्रानाला स्टापडेम निर्माण कार्य हेतु 3.74 करोड़ रूपए स्वीकृत
बलरामपुर, 14 नवम्बर 2025
छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड शंकरगढ़ की खर्रानाला स्टापडेम निर्माण कार्य हेतु 3 करोड़ 74 लाख 19 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना से निस्तारी, भूजल संवर्धन, पेयजल, आवागमन एवं कृषकों द्वारा स्वयं के साधन से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। योजना के कार्य कराने के लिए जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से मुख्य अभियंता, हसदेव गंगा कछार, जल संसाधन विभाग, अंबिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।
प्रधानमंत्री सुक्ष्म सिंचाई योजना से जिले के किसान हो रहे समृद्ध
ड्रीप और स्प्रींकलर तकनीक से बढ़ी पैदावार
बलरामपुर, 11 नवम्बर 2025

प्रधानमंत्री सुक्ष्म कृषि सिंचाई योजना के तहत व्यापक रूप से किसानों द्वारा खेती की जा रही है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के गठन के समय जहां ड्रीप एवं स्प्रींकलर विधि का उपयोग लगभग 05 हेक्टेयर था। लेकिन शासन के सतत प्रयासों और प्रधानमंत्री सुक्ष्म सिंचाई योजना के तहत ड्रीप सिंचाई का क्षेत्रफल बढ़कर 325 हेक्टेयर हो गया है। जिले में सुक्ष्म सिंचाई कृषि योजना के तहत 419 किसान लाभान्वित हुए हैं।
किसानों को 55 प्रतिशत सब्सिडी से ड्रीप प्रदाय
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड वाड्रफनगर के ग्राम पंचायत शारदापुर निवासी श्री दीपक पटवा भी प्रधानमंत्री सुक्ष्म सिंचाई योजना के तहत ड्रीप एवं स्प्रींकलर विधि से सिंचाई के आधुनिक तकनीक खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि पहले वे वर्षा ऋतु में ही धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें सिर्फ धान की फसल का ही लाभ मिल पाता था और आमदनी भी एक ही सीजन की होती थी। परन्तु उद्यान विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सुक्ष्म सिंचाई योजना के बारे में पता चलने पर उन्होंने विभाग सें संपर्क किया। उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग के सहयोग से उनके खेतों में 55 प्रतिशत सब्सिडी से ड्रीप लगा। आगे श्री दीपक पटवा बताते हैं कि ड्रीप विधि से खेती करने पर पैदावार में वृद्धि होने के साथ-साथ आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई। उन्होंने बताया कि ड्रीप विधि से खेती करने में लागत कम लगता है और पैदावार अधिक होती है।
सुक्ष्म सिंचाई के साधन होने तीन फसल लिया जा सकता
श्री दीपक पटवा बताया कि पौधों को खाद देने के लिए अलग से मजदूर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। खाद को पानी में ही घोलकर ड्रीप की सहायता से पौधों तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने बताया कि 02 एकड़ खेत में उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में ड्रीप लगवाया है। वे बताते हैं कि 01 एकड़ खेत में ड्रीप लगाने का खर्च लगभग 66 हजार रुपये का खर्च आता है, जिसमें उद्यान विभाग द्वारा 55 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि ड्रीप के माध्यम से खेती करने के लिए तैयार किये गए खेत में तीन फसल लिया जा सकता है। वे भी तीन फसल का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें हर साल लगभग प्रति एकड़ 03 लाख रुपये की आमदनी हो रही है।
फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार
प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना, जिसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत लागू किया गया है, का उद्देश्य ड्रीप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों को बढ़ावा देकर कृषि में जल उपयोग दक्षता में सुधार करना है। यह योजना किसानों को पानी और उर्वरक की बचत करने, फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करती है, और इसके लिए सरकार द्वारा सब्सिडी प्रदान की जाती है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सुक्ष्म कृषि सिंचाई योजना अंतर्गत ड्रीप स्प्रींकलर विधि खेती में किसानों के लिए पानी की समस्या का एक ऐसा समाधान है जो पानी की बचत करने के साथ-साथ पौधों की वृद्धि में भी मदद करता है।
पानी के अपव्यय को रोकने का महत्वपूर्ण माध्यम सुक्ष्म सिंचाई के साधन
ड्रीप स्प्रींकलर विधि से पानी को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है, जिससे पानी का अपव्यय और वाष्पीकरण नहीं होती है और पौधों को आवश्यकता के अनुसार पानी मिल जाता है। योजना अंतर्गत जिले के किसान भी लाभ लेकर समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
बरसात का डर हुआ दूर, अब चैन की नींद
प्रधानमंत्री आवास योजना से श्री शोभनाथ का सपना हुआ साकार
बलरामपुर, 10 नवंबर 2025
बलरामपुर जिला के ग्राम पंचायत लुरगीकला के निवासी श्री शोभनाथ का जीवन तब बदल गया, जब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत उन्हें पक्का घर मिला। कभी मिट्टी की दीवारों वाले कच्चे घर में रहने वाले परिवार के लिए हर बरसात भय का कारण थी—न दीवारों का भरोसा, न छत की सुरक्षा।मजदूरी कर परिवार चलाने वाले शोभनाथ लंबे समय से मजबूत आशियाने का सपना देख रहे थे। प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने आवेदन किया और वर्ष 2024-25 में योजना के अंतर्गत स्वीकृति प्राप्त कर पहली किश्त की राशि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मनरेगा के माध्यम से स्वयं लगन से कार्य करते हुए अपने घर का निर्माण शुरू किया। धीरे-धीरे खड़ी हुई दीवारें अब उनके सपनों का साकार रूप बन चुकी हैं।
आज शोभनाथ आत्मविश्वास के साथ कहते हैं—“पहले बारिश में नींद नहीं आती थी, अब पक्के घर की सुरक्षा में सुकून भरी नींद नसीब होती है।” अब उनके बच्चे भी खुले आँगन में निश्चिंत होकर खेलते हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के संवेदनशील नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण परिवारों के जीवन में आशा की नई किरण बनकर उभरी है। इस योजना ने न केवल कमजोर तबके को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया है, बल्कि उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया है।
पक्की सड़कों ने बदली बलरामपुर के ग्रामीण जीवन की तस्वीर
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों तक पहुँच रहा विकास
बलरामपुर, 06 नवम्बर 2025

छत्तीसगढ़ के सुदूर उत्तर में बसे बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की पहचान अब केवल हरियाली, जंगलों, पहाड़ी घाटियों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति से नहीं, बल्कि विकास की रफ्तार से दौड़ते गांवों से भी होती है। इस परिवर्तन की कहानी लिखी है प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) ने, जिसने हर गांव को पक्की सड़क से जोड़कर विकास के रास्ते खोले हैं।
कभी थे कीचड़ और दुर्गम रास्ते, अब पक्की सड़कों से रफ्तार
जब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत बलरामपुर क्षेत्र में हुई, तब कई गांव ऐसे थे जहां बरसात के दिनों में पहुंचना भी मुश्किल होता था। खेत की उपज बाजार तक नहीं पहुंच पाती थी, मरीजों को अस्पताल तक ले जाना चुनौती था और बच्चों के लिए स्कूल जाना सपना जैसा था, लेकिन वर्ष 2012 में जिला बनने के बाद इस योजना ने नई गति पकड़ी। वर्तमान में जिले के 06 विकासखण्ड बलरामपुर, रामचंद्रपुर, वाड्रफनगर, राजपुर, कुसमी और शंकरगढ़ में 1647.72 किलोमीटर की 330 सड़कों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जो अब गांवों को न सिर्फ शहरों से जोड़ती है बल्कि जीवन से जोड़ती है।
गांवों में आया बदलाव और खुशहाली की नई राह
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करती हुई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से सड़कों के जाल बिछ जाने से किसान अब अपनी उपज को समय पर बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं। स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और शाला त्यागी बच्चों की दर बहुत तेजी से कम हो गयी है। अब हर गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं भी पहुंच रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हुई हैं। सडकों के बनने से महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। युवाओं के लिए रोजगार और व्यापार के नए अवसर अब उपलब्ध हो रहे हैं। इन सड़कों ने न सिर्फ मिट्टी और धूल भरे रास्तों को बदला है, बल्कि गांवों के सपनों को भी दिशा दी है।
नई उम्मीदों की ओर बढ़ते कदम
अब योजना का चतुर्थ चरण में उन गांवों को जोड़ने का कार्य किया जाएगा। जहाँ अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति की आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रथम चरण में जिले में 58 नई सड़कों का सर्वे पूर्ण कर डीपीआर तैयार की जा चुका है। जल्द ही निर्माण कार्य किया जाएगा, जिससे आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक भी विकास की रौशनी पहुंचेगी। इससे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि के साथ ही मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना गांवों की किस्मत बदलने वाली योजना साबित हो रही है।
प्रधानपाठक सुमित्रा सिंह निलंबित
बलरामपुर । वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला कन्या आश्रम पशुपतिपुर में कुप्रबंधन, अनुशासनहीनता और छात्रों की उपेक्षा के गंभीर आरोपों के बाद शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर प्रधानपाठक एवं प्रभारी अधीक्षिका सुमित्रा सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मामला तब सामने आया जब आश्रम में कार्यरत कर्मचारियों ने सुमित्रा सिंह के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना, अमर्यादित व्यवहार और बच्चों को भोजन न देने की शिकायत की थी। शिकायत की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि सुमित्रा सिंह का रवैया अत्यंत अनुचित और शासकीय सेवक के अनुरूप नहीं था। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि प्रधानपाठक सुमित्रा सिंह आश्रम में कार्यरत कर्मचारियों से अभद्रता से पेश आती थीं और बच्चों को आवश्यक मात्रा में खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती थी। इससे आश्रम के छात्राओं को बुनियादी पोषण सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा।
भंडार कक्ष पर ताला लगाकर रखा अधिपत्य
जांच में यह भी सामने आया कि उन्हें अधीक्षिका के प्रभार से मुक्त कर दिया गया था, फिर भी उन्होंने आश्रम के भंडार कक्ष में ताला लगाकर अपने कब्जे में रखा था। इससे आश्रम के संचालन और बच्चों को भोजन एवं अन्य सुविधाएं मुहैया कराने में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई। प्रशासन ने जब उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया, तो सुमित्रा सिंह ने पत्र लेने से इंकार कर दिया। यह उनके अनुशासनहीन रवैये का स्पष्ट प्रमाण माना गया है। जांच समिति ने कहा कि उनका आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 का उल्लंघन है।
शासकीय सेवा से निलंबन, रामचंद्रपुर मुख्यालय निर्धारित
इन तथ्यों के आधार पर शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9 (1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से सुमित्रा सिंह को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय खंड शिक्षा अधिकारी, रामचंद्रपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि में सुमित्रा सिंह को नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) प्रदान किया जाएगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुमित्रा सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही नियम 14 के अंतर्गत की जाएगी।
प्रशासन का सख्त रुख
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि आश्रमों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बालिकाओं की सुरक्षा, भोजन और शिक्षा से जुड़ी लापरवाही को गंभीर अपराध की श्रेणी में लिया जाएगा। यह कार्रवाई न केवल शिक्षा विभाग में अनुशासन कायम करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि सरकारी आश्रमों में बच्चों के अधिकारों से कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।
अनिता के वर्षों पुराने पक्के मकान का हुआ सपना साकार
विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को मिल रहा सुरक्षित आवास
बलरामपुर, 28 अक्टूबर 2025
प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों को विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। पीएम जनमन आवास योजना विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के जीवन में न केवल सुधार ला रहा है, बल्कि पक्के मकान के सपनों को भी साकार कर रहा है।
अपने परिवार के साथ सुरक्षित पक्के घर में रह रही है अनिता
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखंड कुसमी के ग्राम पंचायत पुंदाग की निवासी श्रीमती अनिता ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ वर्षों से कच्चे मकान में रह रही थी। उनका परिवार रोजी-मजदूरी कर जीवन यापन करता है। उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए चुनौती था। बरसात में टपकती छत, सर्दियों की ठिठुरन और गर्मियों की तपन उनके परिवार के लिए हमेशा की मजबूरी बनी रही। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके पक्के घर का सपना साकार नहीं हो पा रहा था। लेकिन वर्ष 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत आवास की स्वीकृति मिली। समय पर राशि और सामग्री उपलब्ध होने से उनका मकान बनकर तैयार हुआ और आज वे अपने परिवार के साथ सुरक्षित पक्के घर में रह रही हैं।
स्वयं का घर बनाकर सम्मान और गरिमामय से जीवन जी रही है
श्रीमती अनिता भावुक होकर कहती हैं कि नए घर ने मुझे जीवन की सबसे बड़ी खुशी दी है। अब मेरा परिवार मौसम की मार से सुरक्षित है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की आभारी हूँ। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना का उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजातीय परिवारों को पक्का और सुरक्षित घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे अपना घर स्वयं बना सकें और गरिमामय जीवन जी सकें।
साधारण किसान से प्रगतिशील किसान की ओर बढ़ रहे महावीर पुषाम
गुणवतायुक्त बीज और संतुलित खाद के उपयोग से बढ़ी पैदावार
राष्ट्रीय खाद तेल मिशन योजना से किसान महावीर की आय हुई दोगुनी
28 अक्टूबर 2025


महावीर पुषाम अब प्रगतिशील किसान के रूप में उभर कर आ रहे हैं। वे एक साधारण किसान हैं, जिन्होंने अपने कठिन परिश्रम, लगन और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से न सिर्फ अपनी खेती को लाभकारी बनाया, बल्कि अन्य किसानों को प्रेरित कर रहे हैं। महावीर पुषाम की मेहनत और विभागीय सहयोग से उनके खेतों में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने बीज और खाद के संतुलित उपयोग पर ध्यान दिया। पहले जहाँ वे 2 एकड़ में तिल, 2 एकड़ में रामतिल और 1 एकड़ में मूंगफली उगाते थे, अब उन्होंने सही बीज, उन्नत खेती तकनीक और उचित खाद का प्रयोग किया। इस बदलाव से उत्पादन लागत में भी कमी आई, और कुल आय में वृद्धि हुई।
गुणवतायुक्त बीज और संतुलित खाद के उपयोग से बढ़ी पैदावार
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड रामचन्द्रपुर के ग्राम विमलापुर निवासी महावीर पुषाम कई वर्षों से खेती कर रहे हैं और लगभग पाँच एकड़ भूमि पर तिलहन और मूंगफली की फसल उगाते हैं। प्रारंभ में वे केवल अपनी पारंपरिक तकनीकों और अपने द्वारा संरक्षित बीजों का उपयोग करते थे। लेकिन समय के साथ उन्होंने समझा की पारंपरिक तरीके हर वर्ष बेहतर आय के साथ बढ़ोतरी नहीं ला सकते। महावीर की खेती में प्रारंभिक वर्षों में कई समस्याएँ थीं। वे बताते हैं कि उनके पास गुणवत्तायुक्त बीज नहीं थे और उन्होंने अपनी परंपरा के अनुसार बीजों का चयन किया। इससे उत्पादन सीमित था और कई बार फसल में घट-बढ़ होने लगी। तिल, मूंगफली और रामतिल की खेती में उन्हें केवल कुछ ही उत्पादन मिलता था, जिससे आय सीमित रहती थी। कृषि के आधुनिक तरीकों की जानकारी न होने के कारण लागत नियंत्रण और उत्पादन की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ता था और महावीर केवल 55 से 60 हजार रुपये की आय अर्जित कर पाते थे।
आय बढी और आर्थिक स्थिति हुई मजबूत
महावीर अपने गांव और आसपास के किसानों से बात की और जानकारी जुटाई। उसी दौरान उन्हें कृषि विभाग की राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना (एनएमईओ) के बारे में पता चला। कृषि विभाग से संपर्क करने के बाद उन्होंने योजना की विस्तार से जानकारी ली। विभाग ने उन्हें गुणवत्तायुक्त बीज, उन्नत कृषि तकनीकों और संतुलित खाद के उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया। उनकी आमदनी पहले लगभग 55-60 हजार रुपये से बढ़कर करीब 1 लाख रुपये हो गई। इस सफलता ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, साथ ही अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना दिया।
नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती को और अधिक लाभकारी बनाऊँगा
महावीर पुषाम का कहते हैं कि मैं कृषि विभाग की सभी योजनाओं का लाभ लेने के लिए इच्छुक हूं। मेरी कोशिश है कि मैं नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती को और अधिक लाभकारी बनाऊँ और अपने अनुभव के माध्यम से अन्य किसानों को भी मार्गदर्शन दूं। महावीर कहते हैं सरकारी योजनाओं का सही जानकारी मिले तो कोई भी किसान अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।
किडनी बीमारी से राजस्व दफ्तर के रीडर की मौत
रामानुजगंज । अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय में लगभग 25 वर्षों से रीडर के पद पर पदस्थ श्रवण कुमार का शुक्रवार की शाम अंबिकापुर मिशन अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले छह माह से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे।
बेहतर इलाज की सुविधा के लिए उन्होंने अपने गृह क्षेत्र लखनपुर के समीप अंबिकापुर में स्थानांतरण की मांग की थी। शासन द्वारा उनका ट्रांसफर 30 जून 2025 को अंबिकापुर कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रामानुजगंज से कार्यमुक्त नहीं किया गया। श्रवण लगातार उच्च अधिकारियों से कार्यमुक्ति के लिए गुहार लगाते रहे, किंतु विभागीय उदासीनता के कारण वे बीमारी के बावजूद रामानुजगंज में ही कार्यरत रहे।
दीपावली अवकाश से ठीक पहले तक उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई और कुछ ही दिनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अंबिकापुर लाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। श्रवण गोंड अपने क्षेत्र में मिलनसार, हंसमुख और कर्मठ कर्मचारी के रूप में जाने जाते थे। बीमारी के बावजूद वे अकेले ही बलरामपुर जिला अस्पताल जाकर डायलिसिस करवाते थे। उनके निधन से पूरे राजस्व विभाग सहित कर्मचारी जगत में गहरा शोक और नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उन्हें समय पर रामानुजगंज से कार्यमुक्त कर दिया गया होता, तो वे अपने परिवार के बीच रहकर बेहतर इलाज करा पाते और शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से ऊर्जा उत्पादक बना अरूण गुप्ता
मिली बिजली बिल के बोझ से मुक्ति घर में ही बना रहे बिजली
रायपुर, 17 अक्टूबर 2025

शासन की प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। सौर ऊर्जा न केवल पर्यावरण हितैषी है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त योजना से ऊर्जा उत्पादक बनकर प्रदूषण मुक्त बिजली स्वयं के घर पैदा कर प्राकृतिक संरक्षण भी कर रहे हैं। इस योजना के प्रति आमजन में तेजी से रूचि बढ़ रही है और लोग सोलर पैनल लगाकर बिजली बचत के साथ-साथ ऊर्जा-दाता भी बन रहे हैं।
एक लाख 8 हजार का अनुदान शासन से
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पस्ता निवासी श्री अरूण कुमार गुप्ता ने अपने घर के छत पर 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया है। सोलर पैनल लगवाने में केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपये और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि पहले हर माह उनका बिजली बिल अधिक आता था, परन्तु सौल पैनल लगने से अब उन्हें अधिक बिजली बिल की चिन्ता से मुक्ति मिलेगी। साथ ही इसके अलावा अतिरिक्त बिजली का उत्पादन होने पर वह ग्रिड में भी जमा होगी, जिसका उपयोग जरूरत पडने पर भविष्य में किया जा सकता है।
बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा-दाता बनने की दिशा में बढ़ा कदम
श्री अरूण कुमार गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना बहुत की उपयोगी एवं लाभकारी है। उन्होंने बताया कि अब छत्तीसगढ़ सरकार ने भी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत सोलर पैनल लगाने पर 15 से 30 हजार रूपए तक का अतिरिक्त अनुदान देने की घोषणा की है, जिससे उपभोक्ताओं को अब दोहरा लाभ मिलेगा। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे इस योजना का लाभ लेकर बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा-दाता बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपना योगदान दें। श्री गुप्ता ने इस महत्वपूर्ण योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
ग्रिड में दी गई बिजली से अतिरिक्त आय
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत घर की छत पर ही ऊर्जा का उत्पादन करने की यह पहल बिजली के बिल से मुक्ति दिलाने तथा ऊर्जा संरक्षण की दिशा में कारगर साबित हो रही है। प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत स्थापित प्लांट नेट मीटरिंग द्वारा विद्युत ग्रिड से संयोजित होगा, जिससे उपभोक्ता द्वारा अपनी खपत से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में सप्लाई हो जाती है। इससे न केवल उपभोक्ता के घर का बिजली बिल शून्य हो जाता है, बल्कि ग्रिड में दी गई बिजली के एवज में अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है।
शासन द्वारा प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत 30 हजार रूपए से 78 हजार रूपए तक की सब्सिडी प्रति प्लांट दिए जाने का प्रावधान है। रूफटॉप सोलर संयंत्र की क्षमता अनुसार लागत राशि एवं सब्सिडी अलग-अलग है। उपभोक्ता द्वारा सोलर प्लांट के ब्रांड चयन कर सकते है। 3 किलोवाट से अधिक क्षमता का प्लांट लगाने पर अधिकतम 78 हजार रूपए तक सब्सिडी का प्रावधान है।
योजना का लाभ कैसे लें
प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को वेबसाईट पीएमसूर्यघर डॉट जीओव्ही डॉट ईन ( https://pmsuryaghar.gov.in/ )या पीएम सूर्यघर मोबाईल एप पर पंजीयन कर लॉग इन आईडी प्राप्त करना होगा। इसके बाद वेब पोर्टल पर उपलब्ध वेंडर का चुनाव कर बिजली कर्मचारी की मदद से वेब पोर्टल पर पूर्ण आवेदन करना होगा। निर्धारित अनुबंध हस्ताक्षरित होने के पश्चात वेंडर द्वारा छत पर प्लांट की स्थापना एवं डिस्कॉम द्वारा नेट मीटर स्थापित किया जाता है। स्थापित प्लांट के सत्यापन पश्चात शासन द्वारा सब्सिडी ऑनलाईन जारी कर दी जाती है।
इस दौरान यदि उपभोक्ता इच्छुक हो तो शेष राशि का प्रकरण 7 प्रतिशत ब्याज दर पर बैंक ऋण हेतु बैंकों को जनसमर्थन पोर्टल द्वारा ऑनलाईन प्रेषित किया जाता है।
स्व-सहायता समूहों की मेहनत में रंग भर रहा है बिहान बाजार
मिट्टी के दिए सहित विभिन्न उत्पादों की बिक्री के लिए लगाया जा रहा है अलग-अलग स्टॉल
बलरामपुर , 17 अक्टूबर 2025

दीपावली का त्यौहार नजदीक आते ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं मिट्टी के दिए बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। साथ ही समूह की महिलाएं आजिविका के लिए विभिन्न उत्पादों जैसे रंगोली, बांस से निर्मित सामग्रियां सहित अन्य हस्त निर्मित उत्पाद तैयार कर आजार में बेचने ला रही हैं। प्रशासन की पहल से रजत जयंती के अवसर पर इन उत्पादों को स्थानीय बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है।
समूहों के द्वारा 5500 से अधिक मिट्टी के दिये तैयार
बलरामपुर जिले के जिगड़ी ग्राम पंचायत में सक्रिय महिला स्व-सहायता समूह ने इस बार लगभग 5500 से अधिक मिट्टी के दिए तैयार किए हैं। पहले ये महिलाएं केवल घरेलू उपयोग के लिए दिए बनाती थीं, लेकिन अब जिला प्रशासन और ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से इन्हें व्यावसायिक रूप दिया गया है। राजपुर की जय मां अम्बे स्व-सहायता समूह और बलरामपुर की ज्योति समूह की दीदियां दिन-रात लगन से दिए तैयार कर रही हैं। इन दोनों समूह में 10-10 दीदियां शामिल हैं। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सलिता गुप्ता बताती हैं कि पहले दीपावली पर बाहर से दिए खरीदते थे, अब हम खुद बना रहे हैं और बेच भी रहे हैं, ये हमारे लिए आत्मनिर्भर बनने का नया रास्ता मिला है।
रंगों और सुन्दर आकृतियों से सजाया गया दिया
समूह की महिलाएं कहती हैं कि दीयों को बनाने में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जा रहा है। समूह की महिलाओ के द्वारा सुंदर डिज़ाइनों, रंगों और आकृतियों में सजाया गया हैं। साथ ही आकर्षक तरीके से पैकेजिंग की गई है। इससे एक ओर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय हस्त कला को भी नई पहचान मिल रही है। महिला स्व-सहायता समूह में कार्यरत महिलाओ ने लगभग 5500 तैयार किए गए दिए और प्रशासन द्वारा उनके लिए बिक्री स्थल हेतु उपलब्ध कराया गया है।
बिक्री के लिए जिला प्रशासन की पहल
स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तर पर मार्केटिंग की व्यवस्था की गई है, जिसमें जिला प्रशासन द्वारा जगह-जगह 16 से 19 अक्टूबर तक बिहान बाजार लगाया जा रहा है। जहां स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों की बिक्री के लिए अलग-अलग स्टॉल लगाए गए हैं। जहां विभिन्न समूह की महिलाओं के द्वारा मिट्टी के दीपक, रंगोली, बांस से निर्मित सामग्रियां सहित अन्य हस्त निर्मित उत्पाद एवं सामाग्रियां बिक्री की जा रही हैं।
खदान धंसने से महिला की मौत, एक घायल
बलरामपुर। जिले के वाड्रफनगर पुलिस चौकी क्षेत्र अंतर्गत मदनपुर गांव में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया।
दिवाली के अवसर पर घर की पुताई के लिए छुहीमिट्टी (सफेद मिट्टी) एकत्र कर रही ग्रामीण महिलाओं पर खदान का ऊपरी हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर पड़ा।
हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। दो अन्य महिलाएं इस हादसे में बाल-बाल बच गईं। हादसे के बाद महिलाओं की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबे में दबी महिलाओं को बाहर निकाला। घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतक महिला की शिनाख्त और अन्य जानकारी जुटाई जा रही है।
पहाड़ी कोरवा जनजातियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के नए द्वार
बलरामपुर, 15 अक्टूबर 2025


विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय में आने वाले पहाड़ी कोरवा अपनी विलक्षण संस्कृति और सरल स्वाभाव के लिए प्रसिद्ध हैं। इस जनजाति के लोग पहाड़ी क्षेत्रों में ऊंचे पहाड़ों पर दूर-दूर अपने घर बनाकर निवास करते हैं। परन्तु दुर्गम ऊंचे पहाड़ों में निवासरत लोग अब शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी ले पा रहे हैं। पहाड़ी कोरवाओं को शासकीय जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले इस हेतु प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना लायी गई। पहाड़ी कोरवा जनजातियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के नए द्वार खुल गए हैं।
स्वास्थ्य सुविधा के साथ मोबाइल मेडिकल यूनिट की सुविधा
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं जन-जन तक पहुँच रही है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सुदूर पहाड़ी कोरवा गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो रही है। कोरवा परिवार अब सरकारी योजनाओं के तहत चिकित्सा सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। पहले बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर रहने वाले पहाड़ी कोरवा समुदाय अब स्वास्थ्य शिविरों और मोबाइल मेडिकल यूनिट से जुड़ रहे हैं। जहां ब्लड प्रेशर, शुगर, हीमोग्लोबिन, मलेरिया जांच जैसी सेवाएँ निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।
381 शिविर से 26 हजार 498 पहाड़ी कोरवा लाभान्वित
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पहाड़ी कोरवा की संख्या 19 हजार 744 है। पहाड़ी कोरवा क्षेत्रों में 99 शिविर आयोजित कर 2 हजार 972 महिलाओं को लाभ दिया गया। इस वित्तीय वर्ष में इन क्षेत्रों में एमएमयू के माध्यम से 381 शिविर आयोजित कर 26 हजार 498 पहाड़ी कोरवाओं को लाभान्वित किया गया। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अंतर्गत 19 हजार 179 पहाड़ी कोरवा परिवारों का आयुष्मान कार्ड बनाया जा चुका है, जो निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा का लाभ ले रहे हैं।
कुपोषण और एनीमिया को दूर करने स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन
पहाड़ी कोरवा बच्चों में कुपोषण और एनीमिया को दूर करने स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्रों में नियमित जांच की जा रही है, जिसमें बच्चों की जांच कर चिन्हांकित बच्चों को बेहतर पूरक पोषण आहार एवं उपचार उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा हेतु आपातकालीन चिकित्सा वाहन की सुगम सुविधा प्राप्त हो रही हैए जिससे सर्पदंश, आकस्मिक दुर्घटना, मातृत्व स्वास्थ्य जैसी दशाओं में तुरन्त स्वास्थ्य सुविधाएं उनके दरवाजे पर ही उपलब्ध हो रही है।
बिहान योजना से संवारी श्रीमती मीना ने अपना जीवन
लखपति दीदी बन अर्जित कर रही एक लाख रुपये से भी अधिक आय
14 अक्टूबर 2025

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर शुरू की गई लखपति दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम बनाने प्रयास की जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आजीविका की गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय को अधिक से अधिक बढ़ाने के उद्देश्य ने कई महिलाओं की जिंदगी बदली रही है, उन्ही में से एक हैं बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखंड राजपुर के ग्राम अमडीपारा की श्रीमती मीना देवी गुप्ता।
महिला स्व-सहायता समूह ने बदली जीवन
श्रीमती मीना बिहान से जुड़कर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी है। मीना, आरती स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं और आजीविका के छोटी-छोटी गतिविधियां कर आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है। वे बताती हैं कि उनके पति कृषि कार्य करते हैं। प्राप्त आमदनी से परिवार की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई के खर्च पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन कठिन परिस्थिति से उबरने के लिए मीना ने महिला स्व-सहायता समूह का सहारा ली और अपने जीवन को बदलने की ठानी। श्रीमती मीना गुजरे दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए महीनों लग जाते थे पैसे इक्कठे करने में। तब जाकर छोटी-छोटी जरूरते पूरी होती थी।
मीना की परिवार में आई खुशहाली
समूह से जुड़ने के बाद मीना ने सीआईएफ की राशि का उपयोग कर विभिन्न आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की। उन्होंने मिल, किराना दुकान संचालन का कार्य प्रारंभ किया। मीना अपनी मेहनत और लगन से अलग-अलग स्रोतों से एक लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय अर्जित कर रही है। मीना को कृषि कार्य से 70 हजार, किराना दुकान से 40 हजार और एफएलसीआरपी से 50 हजार रुपए तक की आमदनी प्राप्त हो रही है। आज इन सभी आय स्रोतों से उनकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं बेहतर हो गई है। अब उनके परिवार में खुशहाली आ गई है और परिवार का जीवन स्तर पहले से अधिक बेहतर हो गया है।
बिहान योजना से महिलाएं बनी आत्मनिर्भर
मीना देवी की सफलता साबित करती है कि जब महिलाओं को शासन की नीतियों और पहल से अवसर और संसाधन मिलते हैं, तो वे अपने जीवन को आत्मनिर्भरता और सफलता की ओर ले जा सकती हैं। मीना कहती हैं कि बिहान योजना ने मुझे और मेरे जैसी कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। अब मैं अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हूं। उन्होंने महिलाओं के जीवन को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में किये गये पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया।
शाम ढलते ही अंधेरे में डूबने वाला गांव हुआ रोशन
ग्राम पंचायत पहरी के आश्रित बरपानी गांव में पहुंची पहली बार बिजली
6 पहाड़ी कोरवा परिवार हुए लाभान्वित
रायपुर, 13 अक्टूबर 2025
किसी भी क्षेत्र के विकास को मापने के अनेक पैमाने हो सकते हैं जैसे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा या पेयजल की व्यवस्था, परंतु इनमें सबसे बुनियादी जरूरत है बिजली की उपलब्धता। रोशनी केवल घरों को नहीं, बल्कि भविष्य को भी जगमगाती है। बिजली से ही विकास के पहिए गति पाते हैं, शिक्षा में सुधार होता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। रात के सन्नाटे में अब पहाड़ी कोरवा परिवार को मिली रौशनी से जीवन में बदलाव आ गया है।
बुनियादी जरूरत है बिजली
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कई क्षेत्र दूरस्थ और पहाड़ी अंचल में पहाड़ी कोरवा परिवार बसे हुए हैं। घने जंगल, कठिन रास्ते, ऊँची पहाड़ियाँ और आवागमन की समस्या यहाँ के विकास की राह में अकसर बाधा बाधा बनी रहीं है। ऐसे क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सेवाओं तक पहुँच भी सीमित रहती है। इन चुनौतियों के बावजूद शासन प्रशासन ने पहाड़ी कोरवा आदिवासी बस्तियों तक शासन की योजनाओं को पहुँचाने का बीड़ा उठाया।
घर-घर जल रहा है बल्ब
विकासखण्ड शंकरगढ़ के ग्राम बरपानी में बसे पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए बिजली कभी एक सपना था। पहले इन ग्रामीण इलाकों में सूरज ढलते ही अंधेरा छा जाता था, वहां अब शाम ढलते ही घरों, गलियों और खेतों में रोशनी जगमगाने लगी है कभी लालटेन या मिट्टी के दीए की मद्धिम रोशनी में अपना रात बिताने को मजबूर और असुविधाओं से भरी बरपानी गांव की कहानी अब बदल रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी बस्ती अंधेरे में न रहे। इसी दिशा में पीएम जनमन योजना के अंतर्गत पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में तेजी से विद्युतीकरण का कार्य किया जा रहा है। ऐसे दूरस्थ गांव, जहां कभी बिजली के खंभे देखना भी सपना था, आज वहां घर-घर बल्ब जल रहे हैं।
पहाड़ी कोरवाओं के घर पहुॅची बिजली
शंकरगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पहरी के आश्रित ग्राम बरपानी के कोरवापारा तक आखिरकार बिजली पहुंच गई। यह वह बस्ती है जहाँ वर्षों से 06 पहाड़ी कोरवा परिवार बिना बिजली के जीवन व्यतीत कर रहे थे। जब पहली बार उनके घरों में बल्ब जले तो बच्चों की आँखों में चमक, बुजुर्गों के चेहरों पर संतोष और महिलाओं के मन में रही नई उम्मीदें। ग्रामीणों का कहना है कि पहले उन्हें शाम ढलने तक सारे काम निपटाने पड़ते थे, क्योंकि रात होते ही पूरा क्षेत्र घने अंधेरे में डूब जाता था। अब हालात बिल्कुल बदल गए हैं। रात का सन्नाटा अब रौशनी से जीवन की चहल-पहल में बदल गया है।
उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की सतत निगरानी और प्रतिबद्धता से छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल बलरामपुर द्वारा वनांचल पहाड़ी कोरवा निवास क्षेत्रों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है और हर घर तक बिजली पहुंचाने की मुहिम जारी है।
राज्यपाल श्री रमेन डेका बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रवास पर पहुंचे
घटगांव में राज्यपाल ने पहाड़ी कोरवा समुदाय से किया संवाद
05 अक्टूबर 2025



एक साधारण से पहाड़ी कोरवा ग्राम घटगांव में आज का दिन असाधारण बन गया, जब राज्यपाल श्री रमेन डेका वहां पहुंचे। ग्राम घटगांव में राज्यपाल का आगमन ग्रामीणों के लिए गर्व और उत्साह का अवसर बन गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक परिधान पहनकर कर्मा नृत्य के माध्यम से उनका आत्मीय स्वागत किया।
राज्यपाल श्री डेका ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखंड राजपुर के इस पहाड़ी कोरवा ग्राम में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया तथा स्थानीय उत्पादों बांस से बने हस्तशिल्प, वन औषधियाँ और स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार सामग्रियों की जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत संचालित आजीविका गतिविधियों, कृषि कार्यों तथा योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने आयुष्मान कार्ड, ऋण पुस्तिका, टीबी मरीजों को पोषण किट तथा महिला स्व-सहायता समूहों को स्वीकृत ऋण के चेक प्रदान किया।
राज्यपाल श्री डेका ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र एवं राज्य पीएम जनमन योजना अंतर्गत पहाड़ी कोरवा परिवारों को लाभान्वित कर रहा है। राज्यपाल श्री डेका ने पहाड़ी कोरवा परिवारों से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और शासन की योजनाओं के लाभ की जानकारी ली। समूह की स्व-सहायता समूह की दीदियों ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद वे आजीविका संवर्धन कर आय के स्रोत बढ़ा रही हैं और जीवन स्तर में सुधार हुआ है। इस दौरान राज्यपाल श्री डेका ने समूह की दीदियों को सुझाव दिया कि अपने साथ और अधिक लोगों को स्व-सहायता समूह में जोड़ें और आजीविका के अवसर बढ़ाएं।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ 25 वर्षों की विकास यात्रा में एक उभरते हुए राज्य के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य खनिज संपदा से समृद्ध है और यहाँ के लोग मेहनती, सेवा-भावी हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी कोरवा परिवारों की मेहनत और सादगी प्रदेश की पहचान है। उन्होंने बांस उत्पादन और उसके वैल्यू एडिशन को आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बताया तथा पहाड़ी कोरवाओं को बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि नशे से दूर रहकर शिक्षा और आजीविका पर ध्यान देने से जीवन में स्थिरता आएगी।
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने पहाड़ी कोरवा परिवारों को विभागीय योजना अंतर्गत सामग्री का वितरण किया। कार्यक्रम में सरगुजा के सांसद श्री चिंतामणि महाराज, विधायक श्रीमती उधेश्वरी पैकरा, पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा श्री दीपक झा, कलेक्टर सरगुजा श्री विलास भोसकर, पुलिस अधीक्षक बलरामपुर श्री वैभव बैंकर रमनलाल, पुलिस अधीक्षक सरगुजा श्री राजेश अग्रवाल, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।