मुक्तिदायिनी श्री मद भागवत कथा के पंचम दिवस पर श्री कृष्ण भगवान के बाल लीला , माखन चोरी एवं गोवर्धन पूजा प्रसंग सुनाया गया
गरियाबंद |
2024-12-18 18:34:57
-राधेश्याम सोनवानी, रितेश यादव
देख दुनिया भुला है उनको राह बताना मुनासिब है , पकड़ कर हाथ मंजिल तक पहुंचाया नहीं जाता।
गरियाबंद :- व्यासपीठ से नारायण जी महराज कह रहे भगवान गोवर्धन गिरिराज जी के दर्शन मात्र से सात जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं संपूर्ण भारत में प्रत्यक्ष रूप से गोवर्धन गिरिराज ही है , चारों धाम के मध्य में गोवर्धन नाथ जी रहते है और जो भक्त भगवान गिरिराज का पैदल परिक्रमा कर लेते है उनको चारों धाम के दर्शन का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है इसलिए जब जब आप ब्रजमंडल जाएं चार जगह दर्शन करना न भूलें , सबसे पहले ब्रज रज मस्तक पर लगाए , दूसरा यमुना जी में डुबकी अवश्य लगाएं , गोकुल के नन्द भवन में 84 खंभे पर आलिंगन जरूर करें क्योंकि स्वयं विश्वकर्मा जी ने बनाए थे और मेरे प्रभु का स्पर्श है और भगवान गोवर्धन नाथ की परिक्रमा भी करना चाहिए , तब आपका बृज मण्डल जाना सार्थक होगा।
मनकुपिया परिवार द्वारा अपने पितरों के मोक्षार्थ आयोजित कथा में व्यासपीठ से नारायण जी महराज ने कृष्ण के बाल लीला का दर्शन कराते हुए बताया कि ब्रज के बलराम घाट में जाकर प्रभु ने मिट्टी का ढेला अपने मुख में डाल दिया , यशोदा मईया को जब पता चला तो डाटने लगी कन्हैया इंकार करते रहे हमने मिट्टी नहीं खाई ये सब झूठ बोल रहे मईया, अगर आपको भरोसा नहीं तो हम अपना मुख खोल देते हैं, और जैसे ही भगवान कृष्ण ने अपना मुख खोला तो मुख के अंदर ही हजारों नक्षत्र तारागण उसी में सूर्य उसी में चंद्रमा उसी में शिव उसी में विष्णु उसी में चौदह भुवन , ग्यारह रुद्र , अपार आदित्य आठ वसु उसी में नारद , उसी में ब्रज उसी में दक्ष और उसी में मां यशोदा स्वयं दिखने लगी। मां यशोदा ने हाथ जोड़ लिया तन पुलकित हो गया मुख से वाणी नहीं निकल रहे आंख बंद करके यशोदा मईया ने शीश झुका दिए कि जगत के पिता को मै अपना बेटा समझ बैठी हूं।
हजारों की संख्या में पंडाल में भरे श्रोताओं को व्यासपीठ से नारायण जी महराज ने कहा कि भगवान शिव ज्ञान के देवता हैं, जिनका दांपत्य जीवन कलह में रहता है वो मां पार्वती की पूजन करना चाहिए , किसानों को मईया अदिति का पूजन करना चाहिए , राजपद जिन्हें चाहिए मनु हः की उपासना करना चाहिए , सुंदर स्त्री के लिए उर्वशी की उपासना करना चाहिए और जिन्हें एक साथ सब कुछ चाहिए वो मेरे गोविंद की उपासना करें।
गोवर्धन पर्वत के सजीव झांकी के साथ गरियाबंद के गांधी मैदान में हजारों श्रोताओं को अपने प्रवचन में नारायण जी महराज ने बताया कि रत्नों का प्रभाव एक समय के बाद समाप्त हो जाता है लेकिन राम रत्न का प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता जीवन में* इसलिए हमें भगवान के नाम पर भरोसा रखना चाहिए और वही राम नाम की दीक्षा हमने भी लिया और वही नाम की दीक्षा सबको दे रहे हैं ।
अदालत का अगर होता फैसला तो तब्दील कर लेते , अगर तुम होते मुंसिफ तो सजा तब्दील लेते , खता थी सिर्फ चेहरे की तो आईने को क्यूं तोड़ा , अगर इतना ही शर्म था आईने पर तो आईना तब्दील कर लेते। क्यों जीवन भर हम सब उपदेश देते घूम रहे हैं बल्कि अपने ऊपर उतारने का प्रयास करें तो रामराज्य आने में वक्त नहीं लगेगा।