कांग्रेस में महापौर पद को लेकर सियासी ड्रामा, त्रिलोक श्रीवास को कारण बताओ नोटिस
बिलासपुर । महापौर पद के उम्मीदवारी चयन से लेकर नामांकन और नाम वापसी तक कांग्रेस में जमकर राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। नाम वापसी के अंतिम दिन नाटकीय ढंग से दावेदारी पेश करने वाले त्रिलोक श्रीवास ने अपना नाम वापस ले लिया। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मीडिया के सामने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी प्रमोद नायक को ही चुनौती दे डाली।
त्रिलोक श्रीवास के इस रवैये से पार्टी के अंदर ही हलचल मच गई, लेकिन नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी करानी थी, इसलिए कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने चुप रहना ही मुनासिब समझा। लेकिन यह विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। अब त्रिलोक श्रीवास को पार्टी अनुशासन तोड़ने के आरोप में पीसीसी की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
त्रिलोक श्रीवास को तीन दिन में जवाब देने के निर्देश
प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के प्रभारी महामंत्री संगठन एवं प्रशासन गैंदू ने पीसीसी के सचिव त्रिलोक श्रीवास को जारी कारण बताओ नोटिस में लिखा है कि उन्होंने बिलासपुर नगर निगम चुनाव में वार्ड क्रमांक 68 के पार्टी अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी का समर्थन किया और प्रचार में शामिल हुए। इसकी लिखित शिकायत पार्टी प्रत्याशी और जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा की गई थी।
नोटिस में कहा गया कि श्रीवास की इस हरकत से कांग्रेस संगठन की छवि धूमिल हुई है, जो कि अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। उन्हें तीन दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देने को कहा गया है, अन्यथा उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा ने बागी नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से किया निष्कासित
इधर, भाजपा ने भी बागी नेताओं पर सख्त रुख अपनाया है। बिलासपुर नगर निगम के 12 वार्डों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले बागी नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। यही कार्रवाई नगरपालिका और नगर पंचायतों में बगावत कर चुनाव लड़ने वाले नेताओं पर भी की गई है।
बिलासपुर में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों में महापौर पद और पार्षद चुनाव को लेकर अंतर्कलह तेज हो गई है। चुनावी सरगर्मी के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।