जंगली सूअर के हमले में 63 वर्षीय महिला गंभीर रूप से घायल, पति भी घायल
बालोद। जिले के मुख्यालय से 19 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पीपरछेड़ी में शनिवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जब एक जंगली सूअर ने खेत में काम कर रहे एक दंपति पर हमला कर दिया। इस हमले में 63 वर्षीय समारी बाई साहू गंभीर रूप से घायल हो गईं, जबकि उनके पति संपत राम साहू (65 वर्ष) को पैर और कंधे में चोटें आईं।
मिली जानकारी के अनुसार, समारी बाई और उनके पति खेत में अपने बेटे महेश कुमार साहू और बहू सुनीति साहू के साथ काम कर रहे थे। इस दौरान पास के खेतों से एक जंगली सूअर अचानक उनके खेत में घुस आया और सीधे संपत राम साहू पर हमला कर दिया। हमले में वह गिर पड़े और सूअर ने समारी बाई को टक्कर मारकर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। परिवार के अन्य सदस्य शोर मचाने में सफल रहे, जिससे सूअर पास के अमोरा गांव की ओर भाग गया।
घटना के बाद घायल जोड़े को तुरंत निजी वाहन से जिला अस्पताल लाया गया। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद समारी बाई की स्थिति गंभीर देख उन्हें एक निजी अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, समारी बाई के पैर की हड्डी टूट गई थी और ऑपरेशन के बाद उसमें रॉड डालनी पड़ी। फिलहाल, वे आईसीयू में भर्ती हैं। वहीं, उनके पति संपत राम साहू को पैर और कंधे में चोटें आईं, लेकिन उनकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है।
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने कई बार 108 एम्बुलेंस सेवा से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका फोन नहीं उठाया गया। इसके बाद परिवार को निजी वाहन का सहारा लेना पड़ा और घायल दंपति को अस्पताल लाया गया। इस लापरवाही से स्थानीय लोग खासे नाराज हैं और 108 एम्बुलेंस सेवा की तत्काल जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम जिला अस्पताल पहुंची और घायल महिला का हालचाल लिया। वन विभाग ने महिला के इलाज के लिए महज 2 हजार रुपये की नगद सहायता प्रदान की। विभाग का कहना है कि इस राशि का उद्देश्य इलाज में मदद करना है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि वन विभाग को इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की जरूरत है।
पीपरछेड़ी गांव में जंगली सूअर के हमले की यह घटना क्षेत्र में जंगली जानवरों के हमलों की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता का विषय बन चुकी है। लोग इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए वन विभाग से उचित कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, समारी बाई की हालत अब खतरे से बाहर है, लेकिन उनका इलाज जारी है। इस घटना ने स्थानीय समुदाय को जंगली जानवरों के हमलों से सुरक्षा की जरूरत के बारे में फिर से जागरूक किया है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक करता है।