छत्तीसगढ़ / गरियाबंद

"जिला मुख्यालय गरियाबंद में अधिकारी-कर्मचारी किराए के मकानों में रहने को मजबूर — अल्प मानदेय कर्मचारियों की बढ़ती पीड़ा"

राधेश्याम सोनवानी, रितेश यादव

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला मुख्यालय में कार्यरत अनेक शासकीय अधिकारी और कर्मचारी आज भी अपने परिवार के साथ किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि जिला गठन के वर्षों बीत जाने के बावजूद यहां स्थायी सरकारी आवासों की भारी कमी बनी हुई है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक असुविधा का कारण बन रही है, बल्कि सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।

जिन अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला गरियाबंद जिला मुख्यालय में हुआ है, उन्हें न तो विभागीय आवास उपलब्ध हैं, न ही आवास भत्ता इतना पर्याप्त कि वे आराम से शहर में मकान किराए पर ले सकें। सबसे अधिक तकलीफ उन कर्मचारियों को हो रही है जो अल्प मानदेय में सेवा दे रहे हैं। उनकी मासिक आमदनी का एक बड़ा हिस्सा किराए में ही चला जाता है।

स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा:

यह स्थिति निश्चित रूप से चिंताजनक है। गरियाबंद जैसे छोटे शहर में जहां जीवन यापन की लागत अपेक्षाकृत कम होनी चाहिए, वहीं जब सरकारी कर्मचारी ही आर्थिक संकट में किराए के मकान तलाशने को मजबूर हों, तो यह नीति-निर्माताओं की प्राथमिकता पर सवाल उठाता है।

जिला प्रशासन एवं राज्य शासन को इस ओर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। यहां कर्मचारियों हेतु आवासीय परिसर बनाए जाएं, साथ ही जब तक आवास उपलब्ध न हो, तब तक किराया भत्ता यथासंभव बढ़ाया जाए। विशेषकर अल्प मानदेय पर कार्यरत कर्मचारियों को राहत देने की आवश्यकता है, ताकि वे मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर अपने कार्यों को कुशलता से संपादित कर सकें।

निष्कर्ष:

यह केवल कर्मचारियों की समस्या नहीं है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और जनसेवा की निरंतरता का भी प्रश्न है। यदि कर्मचारी ही बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जूझते रहेंगे, तो आम जनता को सुचारु सेवाएं कैसे मिलेंगी? अतः शासन-प्रशासन को तत्काल ठोस कदम उठाकर गरियाबंद जिला मुख्यालय में सरकारी कर्मचारियों के लिए आवासीय समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।

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