छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

निस्तार की जमीन पर ‘आलीशान खेल’! नेउर के छोटू तालाब किनारे टीनशेड में खड़ा हुआ कांप्लेक्स, सरपंच पर मिलीभगत के आरोप

 पंडरिया

 विधानसभा के वनांचल क्षेत्र की ग्राम पंचायत नेउर में इन दिनों एक निर्माण कार्य ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाई स्कूल जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित “छोटू तालाब” के पार में अतिक्रमण कर टीनशेड से एक आलीशान कांप्लेक्स तैयार कर दिया गया है। यह वही तालाब है जो वर्षों से ग्रामीणों के निस्तार और जल संग्रहण का प्रमुख स्रोत रहा है। अब इसी तालाब की जमीन पर खड़े इस निर्माण को लेकर गांव में भारी आक्रोश और चर्चा है।

 निस्तार की जमीन पर ‘कब्जे’ का खेल
ग्रामीणों का कहना है कि छोटू तालाब सार्वजनिक निस्तार की भूमि है, जहां मवेशियों को पानी पिलाने, कपड़े धोने और अन्य घरेलू उपयोग के लिए लोग निर्भर रहते हैं। लेकिन अब तालाब के किनारे टीन सेट डालकर एक व्यवस्थित कांप्लेक्स खड़ा कर दिया गया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संरचना बिना प्रशासनिक अनुमति और निगरानी के कैसे खड़ी हो गई।

 सरपंच की भूमिका पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि यह निर्माण बिना पंचायत स्तर की सहमति या मौन समर्थन के संभव नहीं था। ग्रामीणों ने सरपंच की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं और मिलीभगत की संभावना जताई है। खास बात यह है कि संबंधित निर्माण स्थल सरपंच के घर से कुकदूर रोड की ओर मात्र 400 मीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या यह निर्माण उनकी नजरों से ओझल था।

 तहसील मुख्यालय से महज 10 किमी दूर, फिर भी बेखौफ निर्माण

यह मामला और भी चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि ग्राम पंचायत नेउर तहसील मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यानी राजस्व और प्रशासनिक अमला पास में ही मौजूद है, बावजूद इसके सार्वजनिक तालाब की जमीन पर निर्माण कार्य धड़ल्ले से चलता रहा। इससे राजस्व विभाग और पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

जल संरक्षण पर सीधा प्रहार

प्रदेश में जहां एक ओर जल संरक्षण और तालाबों के पुनर्जीवन की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर निस्तार की जमीन पर कब्जा कर व्यवसायिक निर्माण करना गंभीर चिंता का विषय है। छोटू तालाब जैसे जलस्रोत गांव की जीवनरेखा होते हैं। यदि इन्हें भी नहीं बख्शा गया तो आने वाले समय में जल संकट और गहराएगा।

 ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग

गांव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल राजस्व अभिलेखों की जांच कर अतिक्रमण को हटाया जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

अब देखना यह होगा कि पंचायत एवं राजस्व विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या यह मामला भी अन्य अतिक्रमणों की तरह फाइलों में दब जाएगा, या फिर सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
ग्राम नेउर का यह कथित अतिक्रमण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है—“निस्तार की तालाब को भी नहीं छोड़ा जा रहा, तो फिर सुरक्षित क्या है ।

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