छत्तीसगढ़ / कबीरधाम

भोथी में चेकडेम निर्माण पर उठे सवाल: मजदूरों की जगह जेसीबी, गुणवत्ता संदिग्ध, सूचना पटल गायब

 कवर्धा --

 
बोडला जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत लूप के आश्रित ग्राम भोथी में ईसाई नदी पर बलदाउ के खेत के पास बन रहे चेकडेम निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, चेकडेम की खुदाई मजदूरों से कराने के बजाय सीधे जेसीबी मशीन से कराई गई है। जबकि मनरेगा या अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत ऐसे कार्यों में प्राथमिकता मजदूरों को दी जानी चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। जेसीबी से खुदाई किए जाने से न केवल रोजगार के अवसर छिन गए, बल्कि कार्य की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर खुदाई का गड्ढा भी मानक के अनुरूप नहीं है। गहराई नाम मात्र की दिखाई दे रही है। वहां मौजूद मिट्टी को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्खनन सतही तौर पर किया गया है। यदि निर्माण की नींव ही मजबूत नहीं होगी तो बरसात के तेज बहाव में चेकडेम के टिके रहने पर संदेह स्वाभाविक है।

निर्माण स्थल पर रेत और कुछ मात्रा में गिट्टी तो नजर आती है, लेकिन सीमेंट और अन्य आवश्यक सामग्री का संतुलित उपयोग होता नहीं दिख रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि केवल रेत और कम मात्रा में गिट्टी-रेती डालकर निर्माण को पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है। इस तरह की लापरवाही भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कार्य स्थल पर नागरिक सूचना पटल तक नहीं लगाया गया है। किसी भी शासकीय निर्माण कार्य में योजना का नाम, स्वीकृत राशि, कार्य अवधि, तकनीकी स्वीकृति और संबंधित अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है। सूचना पटल का अभाव पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी जिन तकनीकी सहायक पर है, उनकी भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। यदि तकनीकी पर्यवेक्षण सही ढंग से किया जाता तो गुणवत्ता में यह कमी साफ दिखाई नहीं देती।

अब सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग और जनपद पंचायत प्रशासन इस मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह चेकडेम भी कागजों में ही मजबूत बनकर रह जाएगा? ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच और निर्माण की तकनीकी जांच की मांग की है।

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