छत्तीसगढ़ / रायपुर

महिला एफपीओ बना ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया आधार, सरगुजा में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की नई पहल

 रायपुर : महिला एफपीओ बना ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया आधार, सरगुजा में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की नई पहल

 
 
  कृषि सामग्री केंद्र, सिलाई-कपड़ा केंद्र और किराना दुकान का शुभारंभ, महिला समूहों को मिलेगा स्वरोजगार का नया मंच
रायपुर, 30 मई 2026

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रदेश में लगातार नवाचार आधारित पहलें की जा रही हैं। इसी क्रम में सरगुजा जिले के बतौली महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) द्वारा संचालित कृषि सामग्री केंद्र, सिलाई-कपड़ा केंद्र एवं किराना दुकान का शुभारंभ ग्राम बतौली में किया गया। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और आय संवर्धन के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि जिला पंचायत सरगुजा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनय अग्रवाल थे। इस अवसर पर एफपीओ की अध्यक्ष, सचिव, संचालक मंडल के सदस्य, महिला स्व-सहायता समूहों की प्रतिनिधियां तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत सीईओ श्री विनय अग्रवाल ने नवस्थापित इकाइयों का निरीक्षण किया तथा महिला समूहों द्वारा तैयार एवं प्रसंस्कृत उत्पादों जैसे चावल, दाल, साबुन एवं अन्य घरेलू उपयोग की सामग्रियों का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि महिला समूहों और एफपीओ के माध्यम से संचालित ऐसे उद्यम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कृषि सामग्री केंद्र के निरीक्षण के दौरान एफपीओ की गतिविधियों एवं आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न विभागों के समन्वय से किसानों और महिला समूहों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान, आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया।

सिलाई-कपड़ा केंद्र के अवलोकन के दौरान महिलाओं के कौशल विकास, स्वरोजगार और आजीविका संवर्धन के प्रयासों की सराहना की गई। अधिकारियों ने महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और नवाचार आधारित उद्यमों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में कृषि सखी, पशु सखी, पीआरपी एवं अन्य सामुदायिक कार्यकर्ताओं के साथ एफपीओ के संचालन, उत्पादों के विपणन, बाजार से जुड़ाव तथा महिला सदस्यों की आय वृद्धि के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने एफपीओ को अधिक सुदृढ़, प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया।

ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी से संचालित यह पहल महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में उभर रही है। राज्य सरकार की योजनाओं और प्रशासनिक सहयोग से महिला एफपीओ न केवल आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन रहे हैं, बल्कि गांवों में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के वाहक भी सिद्ध हो रहे हैं।
 

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