महाकाल मंदिर में भस्म आरती दर्शन के समय होना चाहिए क्राउड कंट्रोल
उज्जैन (Mahakaleshwar Temple)। आंध्रप्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में बुधवार को वैकुंठ द्वार दर्शन के लिए टोकन लेने की होड़ में मची भगदड़ में छह श्रद्धालुओं की मौत के बाद ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भीड़ नियंत्रण के इंतजाम की समीक्षा होने लगी है।
मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि मंदिर विस्तारीकरण के बाद सामान्य दर्शन के समय जनदबाव की स्थिति निर्मित नहीं होती है। तड़के 4 बजे भस्म आरती में आगे बैठने की होड़ तथा आरती संपन्न होने के बाद बाहर निकलने की जल्दबाजी में आपाधापी की स्थिति निर्मित होती है, जो किसी भी दिन हादसे का कारण बन सकती है।
हर दिन 1700 भक्तों को अनुमति दी जारी होती है
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के 4 बजे भगवान महाकाल की भस्म आरती की जाती है। इसके दर्शन के लिए मंदिर समिति प्रतिदिन करीब 1700 भक्तों को अनुमति जारी करती है। भक्तों को नंदी, गणेश व कार्तिकेय मंडप में बैठकर भस्म आरती दर्शन करने की व्यवस्था है।
अलग-अलग मंडपम की अनुमति होती है
मंदिर समिति भक्तों को अलग-अलग मंडपम की अनुमति जारी करती है। तड़के 3.30 बजे अनुमति पत्र की जांच के बाद कर्मचारी भक्तों को मंदिर के भीतर प्रवेश देते हैं। इसके बाद श्रद्धालु पात्रता अनुसार नंदी, गणेश व कार्तिकेय मंडप में बैठकर भस्म आरती के दर्शन करते हैं।
हादसे का डर रहता है
मंदिर समिति द्वारा नंदी, गणेश व कार्तिकेय मंडपम के नाम से अनुमति जारी की जाती है। भक्तों को केवल दर्शन की अनुमति जारी होती है, बैठने के लिए रेल अथवा बस की तरह सीट नंबर आवंटित नहीं किया जाता है।
इसलिए जब भक्तों को मंदिर में प्रवेश दिया जाता है, तो वे आगे बैठने की होड़ में धक्कामुक्की करने लगते हैं। यही स्थिति आरती खत्म होने के बाद मंदिर से बाहर निकलने की जल्दबाजी में निर्मित होती है। ऐसे में कभी भी हादसा हो सकता है।
ऑफलाइन फार्म लेने के लिए भी होड़
तिरुपति बालाजी मंदिर में बुधवार को वैकुंठ द्वार दर्शन के लिए टोकन लेने की होड़ में हादसा हुआ। महाकाल मंदिर में भी प्रतिदिन 300 लोगों को भस्म आरती दर्शन की निश्शुल्क ऑफलाइन अनुमति दी जाती है।
इसके लिए रात 8 बजे महाकाल महालोक के नंदी द्वार के समीप स्थित काउंटर से फार्म वितरित किए जाते हैं। फार्म लेने के लिए सैकड़ों भक्त कतार में लगते हैं। इनमें भी फार्म लेने की प्रतिस्पर्धा रहती है। यह स्थिति भी हादसे का कारण बन सकती है।