MP High Court ने इंदौर से भाजपा पार्षद कमलेश कालरा सहित अधिकारियों के खिलाफ जारी किया वारंट
इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर के वार्ड 65 से भाजपा के पार्षद कमलेश कालरा के साथ प्रमुख सचिव व अन्य अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। हाई कोर्ट ने पार्षद के फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर चुनाव में भाग लेने की शिकायत पर जांच के निर्देश दिए थे।
निगम चुनाव में वार्ड 65 से कांग्रेस प्रत्याशी रहे सुनील यादव की याचिका पर कोर्ट ने छानबीन समिति को बीते साल फरवरी में जांच का आदेश दिया था। इसमें छह माह में जांच पूरी करने के निर्देश भी थे। सालभर बाद भी जांच पूरी कर रिपोर्ट नहीं देने पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट की शरण ली।
कोर्ट में लगी है अवमानना याचिका
अवमानना याचिका पर कोर्ट ने पार्षद व छानबीन समिति के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी कर दिया। याचिकाकर्ता सुनील यादव की ओर से कोर्ट में पैरवी करते हुए अधिवक्ता मनीष यादव, करण बैरागी ने तर्क रखे कि कालरा के जाति प्रमाण पत्र की जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है।
आरक्षित वार्ड में प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा
कालरा ने पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित वार्ड से इस प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा। छानबीन समिति लंबे समय से जांच कर रही है। सभी तथ्य आने के बाद भी अंतिम निष्कर्ष व रिपोर्ट नहीं दी जा रही। सत्तापक्ष के दबाव में यह देरी हो रही है।
न्यायालय के आदेश की भी अवमानना की जा रही है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में कहा कि पिछली सुनवाई में भी जिम्मेदारों को कोर्ट से नोटिस जारी हुए थे। नोटिस प्राप्त होने के बावजूद कोई उपस्थित नहीं हुआ। यह स्पष्ट तौर पर न्यायालय की अवमानना है।
5 हजार रुपये का जमानती वारंट
कोर्ट ने तर्कों से सहमत होकर प्रमुख सचिव पिछड़ा व अल्पसंख्यक विभाग अजीत केसरी, कमिश्नर पिछड़ा वर्ग आयोग सौरभ कुमार, सचिव डॉ. नीलेश देसाई के साथ छानबीन समिति के घनश्याम धनगर, सफलता दुबे समेत भाजपा पार्षद कमलेश कालरा को न्यायालय की अवमानना करने पर 5000 रुपये का जमानती वारंट जारी कर तलब किया है। इस प्रकरण में अगली सुनवाई तीन मार्च को निर्धारित की है।
हाल ही में चर्चा में आए थे पार्षद कालरा
पिछले दिनों तत्कालीन एमआइसी सदस्य जीतू यादव के साथ विवाद के बाद पार्षद कमलेश कालरा का नाम चर्चा में आया था। फोन पर हुए विवाद के बाद जीतू यादव के समर्थकों ने कालरा के घर में घुसकर उनके बेटे की पिटाई की थी।
इसके बाद मामले में राजनीति गर्म होने पर जीतू यादव ने एमआईसी से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। फोन पर नगर निगम कर्मचारी को गालियां देने के मामले में कालरा के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया था।