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देश के पीएम बनकर भी गुजरात के सीएम ही बने रहे नरेंद्र मोदी, यकीन नहीं हो तो ये सबूत देख लीजिए

नई दिल्ली: नरेंद्र दामोदरदास मोदी के सरकार प्रमुख के तौर पर 23 साल हो गए हैं। उन्होंने पहली बार 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला था। 12 साल, 7 महीने और 23 दिन बाद मोदी देश के प्रधानमंत्री बन गए और तब से वो इस पद पर कायम हैं। पिछले दशक में मोदी सरकार ने जो कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू किए हैं, उनमें ज्यादातर मुख्यमंत्री के तौर पर गुजरात लागू की गईं मोदी सरकार की ही योजनाओं से ही प्रेरित हैं।

गुजरात मॉडल का देशभर में विस्तार

गुजरात सीएम के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान शुरू हुईं योजनाओं की सफलता ने पूरे देश में इन कार्यक्रमों को लागू करने का आधार तैयार कर दिया। अक्सर 'गुजरात मॉडल' कहे जाने वाले ये कार्यक्रम जल संरक्षण, वृक्षारोपण अभियान, संविधान का जश्न मनाने, जातीय उत्पादों और खादी को बढ़ावा देने, खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने आदि से संबंधित हैं।

गुजरात की P2G2 का सबका साथ, सबका...

मोदी ने जनभागीदारी यानी शासन में आम लोगों की भागीदारी पर जोर दिया है। उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में 'पी2जी2' मॉडल दिया, जिसका मतलब है प्रो पीपल, गुड गवर्नेंस यानी जन हितैषी, सुशासन। इसी ने मोदी के प्रधानमंत्रीत्व काल में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास का रूप ले लिया।

जल जीवन मिशन की जड़ें कहां, जानिए

इसी तरह, केंद्र की मोदी सरकार ने जो बहुचर्चित जल जीवन मिशन शुरू किया, वह 2004 में उत्तर गुजरात के जल की कमी वाले क्षेत्रों के लिए शुरू किए गए सुजलाम सुफलाम जल अभियान के अनुभव से प्रेरित है। इसमें गुजरात के लोगों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नर्मदा नदी के पानी को गुजरात में लाने, नदियों को आपस में जोड़ने और वर्षा जल संचयन पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इस योजना की स्थानीय सफलता ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) को जन्म दिया, जिसके तहत अगस्त 2024 तक 11.82 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल का पानी उपलब्ध कराया गया है। यह देश के सभी ग्रामीण घरों में से लगभग 78% को कवर करता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि जल जीवन मिशन के तहत किए गए प्रयासों से प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे की बचत होती है। इसमें अधिकांश बचत महिलाओं के लिए है। स्वच्छ जल मुहैया होने से दस्त से होने वाली बीमारियों से 4 लाख मौतों को रोका जा सकता है, जिससे 1.4 करोड़ विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष (DALY) की बचत होती है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे स्वच्छ भारत मिशन ने सालाना 60 हजार से 70 हजार शिशुओं की जान बचाने में मदद की है।

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