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परिवार में खटपट तो होती रहती है... बीजेपी के साथ रिश्तों पर संघ की सफाई के मायने समझ लीजिए

नई दिल्ली : महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनावों से पहले आरएसएस ने भाजपा के साथ मतभेद की धारणाओं को दूर कर दिया है। खासकर पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा की उस टिप्पणी के बाद जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा 'आत्मनिर्भर' है और उसे संघ के समर्थन की आवश्यकता नहीं है। संघ की तरफ से बयान के बाद चुनाव से पहले बीजेपी के बेहतर संकेत माना जा रहा है। आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने इस मुद्दे पर संघ का रुख साफ कर दिया।

क्या बोले संघ महासचिव

मथुरा में इस मुद्दे पर संघ महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने साफ किया कि संघ बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के इरादों को समझता है। उन्होंने कहा कि हम उनकी टिप्पणियों के पीछे की भावना को समझते हैं। यह स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के बारे में है, न कि संबंधों को तोड़ने के बारे में। अपने पारिवारिक संबंध का जिक्र करते हुए होसबोले ने कहा कि मैं उनके घर पर भोजन के लिए गया था। संघ महासचिव ने कहा कि परिवार में मतभेद स्वाभाविक हैं और इन्हें निजी तौर पर हल किए जाते हैं। संघ सार्वजनिक विवादों में शामिल नहीं होता है।

नड्डा के बयान ताकत का प्रतिबिंब'

होसबोले की टिप्पणी लोकसभा चुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद आई है। चुनाव परिणाम के बाद कुछ विश्लेषकों ने सुझाव दिया था कि आरएसएस की ओर से उत्साह की कमी ने पार्टी की कम सीटों में योगदान दिया होगा। हालांकि, होसबोले ने नड्डा के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका संदेश भाजपा के अपने पैरों पर खड़े होने के बारे में था, जो ताकत का प्रतिबिंब है, विभाजन का संकेत नहीं है।

विधानसभा चुनाव में मिलेगी मजबूती

यह स्पष्टीकरण महाराष्ट्र और झारखंड में भाजपा के अभियान को मजबूत कर सकता है, जहां आरएसएस को जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त है। रणनीतिक तालमेल चुनावों पर असर डालने के लिए तैयार है। यह बीजेपी और आरएसएस के बीच एकजुटता को दर्शाता है। इससे पहले होसबोले ने कहा कि दोनों संगठनों के बीच टकराव की मीडिया रिपोर्टों कलह फैलाने की कोशिश थी। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन की सफलता के लिए एकता सर्वोपरि है।

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