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एक्सपर्ट्स की राय, वीकल के वजन नहीं, स्किल के आधार पर मिले ड्राइविंग लाइसेंस

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आदेश दिया है कि जिन लोगों के पास लाइट मोटर वीकल (LMV) चलाने का ड्राइविंग लाइसेंस है, ऐसे लोग प्राइवेट कारों के साथ-साथ कमर्शल टैक्सियां और 7500 किलो वजन तक के कमर्शल कैटिगरी वाले अन्य ट्रांसपोर्ट वीकल भी चला सकते हैं। इसके लिए उन्हें अलग से कमर्शल ड्राइविंग लाइसेंस लेने या कोई अतिरिक्त परमिशन लेने की जरूरत नहीं है।

हालांकि, ई-कार्ट और खतरनाक सामान ले जाने के मामले में अतिरिक्त मानकों के पालन और संबंधित अथॉरिटी की इजाजत अब भी जरूरी होगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर ट्रांसपोर्टरों और टैक्सी चालकों ने जहां खुशी का इजहार किया है वहीं रोड सेफ्टी एक्सपर्ट्स ने इसे लेकर अपनी कुछ चिंताएं भी जाहिर की हैं। इस बारे में हमने जाने-माने रोड सेफ्टी एक्सपर्ट, असम सरकार के रोड सेफ्टी सलाहकार और दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर अनिल छिकारा से बातचीत करके कुछ अहम सवालों पर उनकी राय जानीं

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से क्या बदलेगा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इंश्योरेंस कंपनियां ड्राइविंग लाइसेंस के आधार पर टैक्सी या हल्के कमर्शल वीकल के एक्सिडेंट्स के मामलों में क्लेम देने में आनाकानी नहीं कर सकेंगी।

कौन-कौन सी गाड़ी चला सकेंगे लोग?

LMV लाइसेंस के जरिए लोग थ्री वीलर, प्राइवेट कार और टैक्सियों से लेकर 7500 किलो वजन तक की मिनी बसें और छोटी साइज के ट्रांसपोर्ट वीकल जैसे टेंपो आदि चला

पहले क्या था सिस्टम?

पहले प्राइवेट कारें चलाने के लिए LMV लाइसेंस अलग बनता था और ऑटो, टैक्सी, छोटे कमर्शल वीकल चलाने के लिए कमर्शल कैटिगरी का LMV लाइसेंस अलग बनता था। मगर कुछ साल पहले दिल्ली सरकार ने सभी LMV कैटिगरी के लाइसेंस को मर्ज कर दिया, जिसके बाद लाइट मोटर वीकल के मामले में कमर्शल और प्राइवेट लाइसेंस की अलग-अलग कैटिगरी खत्म हो गई।

PSV बैज का क्या होगा?

दिल्ली में सभी प्रकार के पैसेंजर वीकल चलाने के लिए PSV बैज होना अनिवार्य है, जो दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के द्वारा जारी किया जाता है। इसके लिए पैसेंजर वीकल के ड्राइवरों को एक ट्रेनिंग लेनी पड़ती है। अगर किसी व्यक्ति के पास PSV लाइसेंस है, लेकिन वह ऑटो, टैक्सी, कैब या कोई अन्य पैसेंजर वीकल चला रहा है, तो उसके पास PSV बैज होना भी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी यह नियम बरकरार रहेगा।

किस बात को लेकर है सबसे ज्यादा चिंता?
अनिल छिकारा का मानना है कि हमारे देश का लाइसेंसिंग सिस्टम गाड़ी के वजन पर आधारित है जबकि उसे ह्यूमन ट्रेनिंग और टेस्टिंग बेस्ड होना चाहिए। लाइसेंस गाड़ियों के वजन के आधार पर नहीं, बल्कि इस आधार पर मिलना चाहिए कि लाइसेंसधारक कौन सी गाड़ी चलाना चाहता है। यह छूट तो दी जा सकती है कि अगर किसी के पास बस चलाने का लाइसेंस है तो वह कार भी चला सकता है, लेकिन अगर किसी के पास ऑटो या कार चलाने का ही लाइसेंस है तो वह बस भी अच्छी तरह से चलाता हो, यह जरूरी नहीं है। हर वाहन को चलाने के लिए अलग तरह की ड्राइविंग स्किल जरूरी है। उसी आधार पर लाइसेंस दिया जाना चाहिए। इसके लिए लाइसेंसिंग सिस्टम में बदलाव जरूरी है।

 

 

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