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नेवी की कलवरी क्लास पनडुब्बियों के टॉरपीडो के लिए इटली की 'ब्लैक शार्क' भी रेस में लौटी, कभी भारत ने किया था ब्लैकलिस्ट

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना को अपनी 'कलवरी' सीरीज की पनडुब्बियों के लिए 48 हैवीवेट टॉरपीडो चाहिए हैं। इसके लिए इटली, जर्मनी और फ्रांस की कंपनियां टॉरपीडो बनाने की रेस में हैं। इटली की कंपनी 'लियोनार्डो' का 'ब्लैक शार्क' टॉरपीडो पहले भी इस रेस में शामिल था, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते इसे रोक दिया गया था। अब कंपनी को ब्लैकलिस्ट से हटा दिया गया है, जिसके बाद 'ब्लैक शार्क' एक बार फिर इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए दौड़ में शामिल हो गया है। यह डील लगभग 3,000 करोड़ रुपये की है। 

2009 में हुई थी टॉरपीडो की टेस्टिंग

जर्मनी और फ्रांस के टॉरपीडो की टेस्टिंग दो साल पहले हो चुकी है, लेकिन इतालवी टॉरपीडो का परीक्षण 2009 में यूपीए सरकार के समय हुआ था। हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि नौसेना नए सिरे से परीक्षण करेगी या पुराने आंकड़ों पर ही भरोसा करेगी।

कभी सबसे आगे थी ये डील

'ब्लैक शार्क' 2008-09 में 98 टॉरपीडो की डील में सबसे आगे थी। लेकिन 2013 में इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया और मामले को रक्षा मंत्रालय ने सीबीआई को सौंप दिया था। नौसेना पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से नए HWT हासिल करने की कोशिश कर रही है। आखिरी बार जर्मन और फ्रांसीसी टॉरपीडो के बीच प्रतिस्पर्धा हुई थी। फ्रांसीसी F21 टॉरपीडो तकनीकी रूप से बेहतर और सबसे कम कीमत वाला साबित हुआ था। हालांकि, यह डील अंतिम रूप से तय नहीं हो सकी।

रक्षा मंत्रालय ने बदल दिया था प्लान

इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने दोतरफा योजना को मंजूरी दी। पहला, तुरंत जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशी विक्रेता से 48 टॉरपीडो खरीदे जाएं। दूसरा, बड़ी संख्या में टॉरपीडो 'मेक इन इंडिया' योजना के तहत देश में ही बनाए जाएं। इसके लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) किसी निजी कंपनी के साथ मिलकर काम कर सकता है।

ये टॉरपीडो 'कलवरी' (स्कोर्पीन) सीरीज की पनडुब्बियों में लगाए जाएंगे। ये पनडुब्बियां मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड में बनाई जा रही हैं। भारत ने अब तक इस सीरीज की छह पनडुब्बियों का ऑर्डर दिया है और तीन और पनडुब्बियों के लिए बातचीत चल रही है।

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