अजित पवार ने अडानी पर खोला क्या राज कि महाराष्ट्र में घमासान, कूदे राहुल गांधी, देवेंद्र फडणवीस और शरद पवार
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग 20 नवंबर को होनी है। चुनाव से पहले अडानी को लेकर सियासत गरमा गई है। दलों के प्रमुख नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। विवाद अजित पवार के एक बयान पर उठा। उन्होंने दावा किया कि अमित शाह और शरद पवार की मुलाकात दिल्ली में एक अडाणी की मौजूदगी में हुई थी। इसके बाद महा विकास अघाड़ी ने मौके को लपक लिया और बीजेपी पर निशाना साधना शुरू कर दिया। बीजेपी को सफाई देनी पड़ी और अजित पवार अपने बयान से पलट गए।
अजित पवार ने कहा कि गौतम अडानी ने पांच साल पहले बीजेपी और अविभाजित एनसीपी के बीच राजनीतिक बातचीत करवाई थी। वह उस दौर का जिक्र कर रहे थे, जो 2019 में देवेंद्र फडणवीस को सीएम और खुद को डिप्टी सीएम बनाकर बीजेपी की अल्पकालिक सरकार बनाने से ठीक पहले हुई थीं। उन्होंने कहा, 'अमित शाह, गौतम अडानी, प्रफुल्ल पटेल, देवेंद्र फडणवीस और शरद पवार सभी वहां थे। यह बैठक दिल्ली में एक कारोबारी के घर हुई थी। मतलब अजित पवार ने दावा किया कि गौतम अडानी ने शरद पवार और अमित शाह की मुलाकात करवाकर दोनों को साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाने की डीलिंग करवाई थी। अजित ने कहा कि सब कुछ तय हो गया था, लेकिन दोष उनके ऊपर थोपा जा रहा है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर हुआ। सरकार गिराने के लिए अडानी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार गिराने के लिए बीजेपी की ओर से राजनीतिक बैठकें की गईं। इस बैठक में उद्यमी गौतम अडानी बैठे थे। वह इस बैठक में क्या कर रहे थे? अडानी धारावी में जगह चाहते थे, जिससे उन्हें एक लाख करोड़ रुपये का मुनाफा हो। उनके लिए ही महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की सरकार गिराई गई।
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि नवंबर 2019 में नई दिल्ली में बीजेपी-एनसीपी की बैठक हुई थी। इस बैठक में कारोबारी गौतम अडानी मौजूद नहीं थे, लेकिन शरद पवार मौजूद थे। उन्होंने शरद पवर पर उन्हें धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'बैठक हुई थी, लेकिन यह अडानी के आवास पर नहीं थी और न ही वह मौजूद थे। मेरे अलावा, बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल और अजीत पवार शामिल थे।' 'सरकार के गठन, विभागों के आवंटन और संरक्षक मंत्रियों की नियुक्ति पर मैराथन चर्चा हुई। योजना को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी मुझे और अजीत पवार को सौंपी गई थी। जब योजना क्रियान्वयन की प्रक्रिया में थी, तो शरद पवार चुपचाप सीन से हट गए... हमें कभी उम्मीद नहीं थी कि पवार इस तरह से पीछे हटेंगे।'