देश-विदेश

लोकतंत्र पहले, मानवता पहले... गुयाना संसद में पीएम मोदी ने दिया दुनिया को शांति का मंत्र

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को गुयाना संसद के एक विशेष सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंध हैं। यह मिट्टी, पसीने और परिश्रम का रिश्ता है। करीब 180 साल पहले एक भारतीय गयाना की धरती पर आया था और उसके बाद से खुशी और गम दोनों ही स्थितियों में भारत और गयाना का रिश्ता आत्मीयता से भरा रहा है।

'24 साल पहले एक जिज्ञासु के रूप में आया'

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, '24 साल पहले एक जिज्ञासु के रूप में मुझे इस खूबसूरत देश में आने का अवसर मिला। आमतौर पर लोग ऐसे देशों में जाना पसंद करते हैं जहां ताम-झाम हो चकाचौंध हो... लेकिन मुझे गयाना की विरासत और इतिहास को जानना था समझना था। आज भी गयाना में कई लोग मिल जाएंगे जिन्हें मुझसे हुई मुलाकात याद होगी। मेरी तब की यात्रा से बहुत सी यादें जुड़ी हुई हैं।'

गुयाना पीएम के तीन देशों के दौरे का आखिरी पड़ाव है, जिसमें उन्होंने नाइजीरिया और फिर G20 शिखर सम्मेलन के लिए ब्राजील का दौरा किया।

मजबूत लोकतंत्र के रूप में उभर रहे दोनों देश

पीएम ने कहा कि दोनों देश पिछले 200-250 साल से समान संघर्ष साझा कर रहे हैं, बावजूद इसके वे दुनिया में मजबूत लोकतंत्र के रूप में उभर रहे हैं। आज दोनों देश दुनिया में लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं। इसलिए गुयाना की संसद में मैं भारत के 140 करोड़ लोगों की ओर से आप सभी का अभिवादन करता हूं।

डेमोक्रेसी फर्स्ट, ह्यूमैनिटी फर्स्ट का मंत्र

पीएम ने वैश्विक भलाई पर भी जोर दिया और 'लोकतंत्र पहले, मानवता पहले' का मंत्र दिया। उन्होंने कहा, 'आज विश्व के सामने आगे बढ़ने का सबसे मजबूत मंत्र है, डेमोक्रेसी फर्स्ट, ह्यूमैनिटी फर्स्ट।' डेमोक्रेसी फर्स्ट की भावना हमें सिखाती है कि सबको साथ लेकर चलो, सबको साथ लेकर सबके विकास में सहभागी बनो। ह्यूमैनिटी फर्स्ट की भावना हमारे निर्णयों की दिशा तय करती है। जब ह्यूमैनिटी फर्स्ट को निर्णयों का आधार बनाते हैं तो नतीजे भी मानवता के हित करने वाले ही होते हैं। डेमोक्रेसी फर्स्ट की भावना हमें सिखाती है कि सबको साथ लेकर चलो, सबको साथ लेकर सबके विकास में सहभागी बनो।नती है। 

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