राहुल अगर महाराष्ट्र चुनाव नहीं जीतते हैं तो क्या यह उनके 20 साल के करियर में बड़ा धक्का साबित होगा?
नई दिल्ली: 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव कई लोगों के लिए बड़ा टेस्ट साबित होगा। इनमें से एक कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी हैं। राहुल गांधी ने हाल ही में महाराष्ट्र के चुनावी प्रचार के दौरान अपनी जनसभाओं में संविधान और जातिगत जनगणना का मुद्दा जोरशोर से उठाया। ये वही मुद्दा था, जिसकी वजह से लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में बीजेपी की हालत पतली हो गई थी। इस बार भी राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में वही खेल खेला है। राहुल गांधी ने झारखंड में भी यही मुद्दा उठाया था। यह जानते हैं कि क्या यह मुद्दा राहुल को बार-बार चुनावों में बढ़त दिला सकता है या उनके 20 साल के कयर में यह बड़ा झटका साबित होगा। आइए-समझते हैं कि चुनावी नतीजे आने के साथ क्या राहुल की सियासत पर भी सवालिया निशान उठेंगे?
चुनाव प्रचार के दौरान क्या कहा था राहुल ने
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र की चुनावी जनसभा में कहा, संविधान समानता, एक व्यक्ति-एक वोट, सभी के लिए और हर धर्म, जाति, राज्य तथा भाषा के लिए सम्मान की बात करता है। संविधान में सावित्रीबाई फुले और महात्मा गांधी की आवाज है। मगर बीजेपी और संघ संविधान पर हमला कर रहे हैं। उनका हमला देश की आवाज पर हमला है।
राहुल ने जाति जनगणना का मुद्दा भी उठाया
राहुल ने अपनी जनसभाओं में जातिगत जनगणना की भी बात की। एक जनसभा में उन्होंने कहा कि जाति जनगणना हुई तो पता चलेगा कि दलितों, ओबीसी और आदिवासियों के साथ किस तरह का अन्याय हो रहा है। हर किसी को पता चल जाएगा कि उनके पास कितनी ताकत है और उनकी भूमिका क्या है। उन्होंने ये भी कहा कि हम 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा की दीवार भी तोड़ देंगे।