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महाराष्ट्र के चुनावी मैदान में बुमराह-रेड्डी साबित हुए फडणवीस और शिंदे, इस जोड़ी ने कमाल कर दिया

नई दिल्ली: पर्थ टेस्ट में नीतीश रेड्डी और जसप्रीत बुमराह के प्रदर्शन की चहुंओर चर्चा है। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले टेस्ट मैच में दोनों ने क्या जलवा बिखेरा! नए 'बैटर' और अनुभवी 'बॉलर' की एक ऐसी ही जोड़ी ने महाराष्ट्र के चुनावी मैदान में भी धुआं-धुआं कर दिया है। रेड्डी की तरह एकनाथ शिंदे ने भी पहली बार विधानसभा चुनावों में 'बल्ला चलाया' और 'रनों की बौछार' कर दी। दूसरी तरफ, बुमराह स्टाइल में देवेंद्र फडणवीस ने 'गिल्लियां बिखेरकर' विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया। शिंदे और फडणवीस की जोड़ी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में वो नतीजे लेकर आई जिसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की होगी। एग्जिट पोल्स ने भी बीजेपी की अगुवआई वाले गठबंधन महायुति को अधिकतम 200 सीटें मिलने का ही अनुमान जताया था जो धरा का धरा रह गया और महायुति इस आंकड़े को भी पार कर गई।

2019 में शिवसेना ने बदला था पाला

पिछली बार 2019 के विधानसभा चुनावों में 105 सीटें जीतकर सबसे दमदार प्रदर्शन करने वाली बीजेपी को आधी ताकत वाली शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की मांग पर बड़ा झटका दिया था। उसके बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विरोधियों से हाथ मिलाकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए और बीजेपी मुंह ताकती रह गई। उद्धव के पास सिर्फ 58 विधायक थे। लेकिन ढाई साल के सत्ता सुख के बाद उद्धव को वो दिन भी देखने पड़े, जिसकी कल्पना उन्होंने कभी नहीं की होगी। शिवसेना दो फाड़ हो गई और एकनाथ शिंदे की अगुवाई में 41 विधेयकों ने उद्धव के खिलाफ बगावत कर दी। शिंदे ने बगावत से बीजेपी के जख्मों पर मरहम लगाया तो बदले में उन्हें सीएम की कुर्सी मिली।

बीजेपी ने यूं लिया उद्धव और शरद से बदला

लेकिन बीजेपी का मिशन तब पूरा हुआ जब शरद पवार की पार्टी एनसीपी टूट गई गई। भतीजे अजित पवार ने ही बागी तेवर दिखाए और उद्धव को उकसाकर बीजेपी के खिलाफ साजिश रचने वाले शरद पवार हाथ मलते रह गए। बड़ी बात यह रही कि एकनाथ शिंदे हों या अजित पवार, दोनों ने अपने-अपने मूल दलों में इतना बड़ा घात लगाया कि अलग हुए गुटों को ही असली दल होने की मान्यता मिल गई। एकनाथ शिंदे शिवसेना तो अजित पवार एनसीपी के अध्यक्ष हो गए। दूसरी तरफ, उद्धव ठाकरे के पास शिवसेना की 'कॉपी' बची तो शरद पवार के हाथ 'नकली' एनसीपी हाथ लगी। विधानसभा चुनाव में अजित पवार की पार्टी ने भी बीजेपी-शिवसेना की तरह ही उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है।

रुझानों में प्रचंड बहुमत की ओर महायुति

दोपहर एक बजे तक के रुझानों में चुनाव आयोग की वेबसाइट ने बताया कि बीजेपी अकेले दम पर 127, शिवसेना ने 56 जबकि एनसीपी ने 39 सीटों पर बढ़त बना ली थी। इस तरह महायुति ने 222 सीटों पर जीत की तरफ कदम बढ़ा दिया था। दूसरी तरफ, कांग्रेस की 19, शिवसेना (यूबीटी) की 18 और एनसीपी (एसपी) की 12 सीटों के दम पर महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सिर्फ 49 सीटों पर ही बढ़त हासिल कर पाई। 17 सीटों पर निर्दलीय एवं अन्य दलों के प्रत्याशियों ने बढ़त हासिल की थी। फाइनल रिजल्ट्स में ये आंकड़े बहुत ज्यादा बदल जाएंगे, इसकी उम्मीद नहीं के बराबर है। ज्यादातर सीटों पर आखिरी के कुछ राउंड बचे हुए थे जबकि बाकी बची सीटों पर भी आधे से ज्यादा राउंड की काउंटिंग पूरी हो चुकी थी। इस वजह से रुझानों के ही आखिरी नतीजों में बदलने की पूरी उम्मीद है। यानी महाराष्ट्र की राजनीति के बुमराह और नीतीश ने मैदान अच्छी तरह मार ली है।

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