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यूक्रेन ही नहीं रूस को भी शांति समझौते की सख्त जरूरत, जानें पुतिन के सिर पर मंडरा रहा है क्या बड़ा खतरा?

मॉस्को: रूस के खिलाफ युद्ध में हालिया समय में यूक्रेन को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा है। यूक्रेन के हाथ से जमीन का बड़ा हिस्सा निकला है। ऐसे में उसके लिए युद्ध रुकना जरूरी माना जा रहा है। हालांकि युद्ध में संकट का सामना यूक्रेन ही नहीं रूस भी कर रहा है और उसे भी समझौते की जरूरत हो सकती है। इसकी वजह रूस के पास सैनिकों की कमी होना है। एक्सपर्ट का मानना है कि रूस को एक ऐसे शांति समझौते से फायदा हो सकता है, जो यूक्रेन के बड़े भूभाग पर उसका नियंत्रण मजबूत करे।

एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध की शुरुआत के बाद से ही रूसी सेना को नुकसान का सामना करना पड़ा है। ऐसा अनुमान हैं कि यूक्रेन युद्ध में रूस के 115,000 से 160,000 सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा पांच लाख सैनिक घायल हुए हैं। इसकी भरपाई के लिए रूस हर महीने 20,000 नए सैनिकों की भर्ती कर रहा है लेकिन इसमें कई मुश्किलें हैं। शांति के समय में भी रूस में सैनिकों की भर्ती करना आसान नहीं रहा है तो युद्ध के समय मुश्किल को समझा जा सकता है।

सेना में नहीं आना चाहते रूसी!

रूसी लोग सेना में भर्ती होने से बचने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। कुछ लोग नशीली दवाओं की लत का दिखावा करते हैं, तो कुछ मेडिकल दस्तावेजों में हेराफेरी करते हैं। हालांकि रूस ने युद्ध शुरू होने के बाद इससे जुड़े नियम सख्त किए हैं। रूसी सरकार ने देश ही नहीं विदेशों में रहने वाले रूसी नागरिकों को भी सेना में भर्ती के लिए कोशिश की है। रूस ने कैदियों को भी सेना में लेने के लिए ड्राफ्ट किया है। ये सैनिकों की कमी को दिखाता है।

यूक्रेन और अमेरिका का ये भी दावा है कि रूस ने सैनिकों की कमी को दूर करने के लिए उत्तर कोरियाई सेना पर निर्भरता बढ़ाई है। यूक्रेन का दावा है कि उत्तर कोरियाई सैनिक रूस के लिए लड़ रहे हैं। हालांकि रूस ने इस दावे को पूरी तरह से नकारा है। रूस ने हालिया समय में अपनी बढ़त बनाई है तो यूक्रेन ने भी एटीएसीएमएस मिसाइलों का इस्तेमाल करके आक्रामकता दिखाई है। 

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