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दिल्ली में कई देशों के राजदूतों से मिले सीएम सरमा, बोले- असम में निवेश करो, यहां का माहौल शांतिप्रिय

नई दिल्ली। असम सरकार की तरफ से विदेशी निवेश आकर्षित करने और विदेशी पर्यटकों के बीच असम को स्थापित करने के लिए उद्देश्य से मंगलवार को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की नई दिल्ली में कई देशों के राजदूतों व उच्चायुक्तों से मुलाकात की। बाद में हिमंता ने बताया कि इस बैठक में 37 देशों के राजदूतों ने हिस्सा लिया और उन्हें असम व पूर्वोत्तर क्षेत्र की संभावनाओं के बारे में बताया।

बैठक तीन चरणों में चली
 
बैठक का आयोजन विदेश मंत्रालय की तरफ से करवाया गया था। बैठक तीन चरणों में चली। बिस्वा ने असम में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए उपलब्ध संभावनाओं के बारे में खास तौर पर बताया। असम सरकार अगले महीने एडवांटेज असम कार्यक्रम का दूसरा चरण आयोजित करने जा रही है जिसका उद्घाटन पीएम नरेन्द्र मोदी करेंगे।
 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आइटी व रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव, उद्योग व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इसमें हिस्सा लेंगे।
 
असम एक इमर्जिंग आर्थिक शक्ति के तौर पर अपनी पहचान बना रहा- सीएम
 
असम के सीएम ने बताया है कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति के तहत असम दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के लिए एक गेटवे की तरह है। यह क्षेत्र पड़ोसी देशों के साथ सहयोग करके निवेश व रोजगार के असीमित अवसर पैदा कर सकता है। असम एक इमर्जिंग आर्थिक शक्ति के तौर पर अपनी पहचान बना रहा है। आज की बैठक इस मुद्दे को आगे बढ़ाने वाला है।
 
आगे बोले कि मैंने महसूस किया है कि कई देशों की असम में काफी रुचि है व उसकी क्षमताओं को पहचानने लगे हैं। अगले महीने होने वाला सम्मेलन हमारे पास इन देशों के समक्ष असम मे उपलब्ध अवसरों को बताने का काम होगा। अभी तक भारत का प्रयास आर्थिक प्रगति के लिए फोकस दक्षिण व पश्चिमी की तरफ था और अब पूर्व की तरफ ले जाने की कोशिश हो रही है।

असम का शांतिप्रिय माहौल- सीएम सरमा
 
उन्होंने कहा कि असम का शांतिप्रिय माहौल, हाइड्रोकार्बन का भंडार और प्रोफेशनल युवाओं की शक्ति है जो विदेशी कंपनियों को पसंद आएगी। हिमंता ने भरोसा दिलाया कि जो भी कंपनी असम में आएगी उसे ग्रीन इनर्जी की आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि असम में रक्षा सेक्टर के लिए काफी संभावनाएं है। इसके लिए वह भारत सरकार से बात कर रहे हैं। बैठक में सिंगाापुर, आस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ व दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों राजदूतों ने प्रमुख तौर पर हिस्सा लिया।

 

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