SC: साथ रहने के आदेश का पालन न करने पर भी पति से गुजारा भत्ता पा सकती है पत्नी, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
2025-01-12 13:37:26
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि साथ रहने के आदेश का पालन नहीं करने की सूरत में भी पत्नी अपने पति से गुजारा भत्ता पा सकती है, बशर्ते कि महिला के पास पति के साथ रहने से इन्कार करने का वैध और पर्याप्त कारण हो।
सीजेआई संजीव खन्ना की पीठ ने कानूनी विवाद का निपटारा किया
चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने इस सवाल पर कानूनी विवाद का निपटारा किया कि क्या एक पति जोकि वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए आदेश प्राप्त करता है, उस सूरत में कानून के आधार पर अपनी पत्नी को भरण-पोषण देने से मुक्त हो जाता है जब उसकी पत्नी उक्त आदेश का पालन करने और पति के घर लौटने से इनकार करती है।
पीठ ने कहा कि इस संबंध में कोई सख्त नियम नहीं हो सकता है और यह हमेशा मामले की परिस्थितियों पर निर्भर होना चाहिए। पीठ ने कहा कि यह सवाल कि क्या पत्नी द्वारा वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश का पालन न करना सीआरपीसी की धारा 125(4) के कारण उसे भरण-पोषण देने से इनकार करने के लिए पर्याप्त होगा पर कई हाई कोर्टों ने विचार किया है, लेकिन कोई एकमत राय सामने नहीं आई है क्योंकि उनके विचार अलग-अलग और विरोधाभासी थे।
आगे कहा कि हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि यह उपलब्ध तथ्यों तथा साक्ष्यों के आधार पर तय करना होगा कि क्या पत्नी के पास आदेश के बावजूद अपने पति के साथ रहने से इन्कार करने का वैध और पर्याप्त कारण है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला
पीठ ने यह आधिकारिक फैसला झारखंड के एक अलग रह रहे दंपती के मामले में दिया जिनका विवाह एक मई 2014 को हुआ था, लेकिन अगस्त 2015 में वे अलग हो गए। पति ने दाम्पत्य अधिकारों की बहाली के लिए रांची में पारिवारिक अदालत का रुख किया और दावा किया कि पत्नी ने 21 अगस्त 2015 को ससुराल छोड़ दिया और उसे वापस लाने के बार-बार प्रयासों के बावजूद वह वापस नहीं लौटी।
पत्नी ने पारिवारिक अदालत के समक्ष अपनी अर्जी में आरोप लगाया कि पति ने उसे प्रताडि़त किया और कार खरीदने के लिए पांच लाख रुपये के दहेज की मांग की। पारिवारिक अदालत ने 23 मार्च, 2022 को यह कहते हुए वैवाहिक अधिकारों की बहाली का फैसला सुनाया कि पति उसके साथ रहना चाहता है। हालांकि, पत्नी ने आदेश का पालन नहीं किया और इसके बजाय परिवार अदालत में भरण-पोषण के लिए याचिका दायर कर दी।
हाई कोर्ट के आदेश को पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
पारिवारिक अदालत ने पति को आदेश दिया कि वह अलग रह रही पत्नी को प्रति माह दस हजार रुपये का गुजारा भत्ता दें। बाद में, पति ने इस आदेश को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी। इसमें कहा गया कि पत्नी वैवाहिक अधिकारों की बहाली के आदेश के बावजूद ससुराल नहीं लौटी और उसने अपील के माध्यम से चुनौती देने का विकल्प नहीं चुना। हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं है। इसके बाद हाई कोर्ट के आदेश को पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।