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केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के पिता कदम सिंह का निधन

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री एवं अलवर से सांसद भूपेंद्र यादव के पिता कदम सिंह का शनिवार को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से शोक की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि होली के दिन उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई। उन्हें गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

जब भूपेंद्र यादव को उनके पिता के निधन की जानकारी मिली, तब वह उदयपुर में एक कार्यक्रम में थे। इसके बाद वह तत्काल गुड़गांव के लिए रवाना हो गए और शाम को 4 बजे अपने पैतृक गांव जमालपुर पहुंचे, जहां उनके प‍िता का अंतिम संस्कार किया गया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मंत्री राव नरवीर सिंह, ओमप्रकाश धनखड़ और बाबा बालकनाथ जैसे कई प्रमुख नेता अंतिम संस्कार में शामिल हुए और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भूपेंद्र यादव से फोन पर बात कर उन्हें सांत्वना दी और शोकाकुल परिवार को सहनशक्ति की प्रार्थना की। भूपेंद्र यादव के पिता के निधन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई प्रमुख भाजपा नेताओं ने शोक जताया।

 

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के पिता के निधन पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुख जताया। देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, भाजपा महाराष्ट्र प्रभारी मा. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव जी के पूज्य पिताश्री के दुःखद निधन की खबर सुनकर हृदय आहत हुआ। मैं उनके पिता जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। साथ ही ईश्वर से प्रार्थना है कि आपके परिवारजनों को इस दुःख से उबरने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति

 

भूपेंद्र यादव के पिता कदम सिंह का जीवन एक प्रेरणा था। उन्होंने लंबे समय तक अजमेर में रेलवे विभाग में अपनी सेवा दी थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अजमेर में अधीक्षक के पद पर काम किया। भूपेंद्र यादव की स्कूली शिक्षा भी अजमेर से ही हुई। सेवा निवृत्त होने के बाद कदम सिंह अपने पैतृक गांव जमालपुर में रहने लगे थे और गांव के लोगों से नियमित रूप से मिलते-जुलते थे। कदम सिंह कबड्डी के भी अच्छे खिलाड़ी थे और उनकी जीवनशैली सशक्त और अनुशासित रही।

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