सामान्य ज्ञान
घी और शहद का सेवन कभी भी एक साथ नहीं करना चाहिए
आयुर्वेद के अनुसार कई ऐसी चीजें होती हैं, जिनका सेवन व्यक्ति एक साथ नहीं कर सकता। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ जरूरी नियमों के बारे में।
घी और शहद-
क्या आप जानते हैं घी और शहद का सेवन कभी भी एक साथ नहीं करना चाहिए। इतना ही नहीं पानी में मिलाकर भी शहद और घी का सेवन नुकसानदेह हो सकता है। शहद की तासीर गर्म होने की वजह से इसका सेवन कभी भी किसी गर्म चीज के साथ नहीं करना चाहिए वरना ये हमारे पेट के लिए समस्या पैदा कर सकता है।
मीट और मछली के साथ शहद-
मीट व मछली के साथ शहद का सेवन करने से शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ जाते है। इससे दृष्टिहीनता व कानो पर भी असर हो सकता है।
शहद और मूली-
शहद के साथ मूली का सेवन करने से शरीर के टॉक्सिन्स बढ़ जाते हैं। इससे बॉडी पार्ट्स खराब होने के चान्सेस ज्यादा बढ़ जाते हैं।
शहद और दही-
शहद को दही के साथ भी नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को गैस, एलर्जी और त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
ठंडे पानी के साथ खरबूज-
ठंडे पानी के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, खीरा, जामुन और मूंगफली कभी नहीं खानी चाहिए।
बारिश के मौसम में आयुर्वेदिक डाइट प्लान अपनाकर रहें सेहतमंद और फिट, बीमारियों से रहेंगे दूर...
बरसात के मौसम में स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेद में कुछ खाद्य पदार्थों को शामिल करने की सलाह दी गई है। ये आहार आपकी पाचन क्रिया को सुधारने और आपकी शारीरिक सुरक्षा को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ आदतों को भी अवॉइड करना चाहिए। यहां कुछ आहार और आदतों की सूची है जो बरसात के मौसम में सेवन किए जाने चाहिए और जिन्हें अवॉइड करना चाहिए:
फायदेमंद आहार:
1. हल्के, सुपाच्य, ताजे, गर्म और पाचक अग्नि को बढ़ाने वाले खाद्य-पदार्थ जैसे गेहूं, जौ, चावल, मक्का, सरसों, राई, खीरा, खिचड़ी, दही, मूंग आदि का सेवन करें।
2. दालों में मूंग और अरहर की दाल खाना फायदेमंद होता है।
3. दूध, घी, शहद और चावल खाएं।
4. सौंठ और नींबू का सेवन करें।
5. पानी को उबालकर पिएं।
6. लौकी, भिंडी, तोरई, टमाटर और पुदीना की चटनी खाएं और सब्जियों का सूप पिएं।
7. सेब, केला, अनार, नाशपाती, पके जाम
8. गर्म दूध में हल्दी और काली मिर्च मिलाकर पिएं।
9. प्राकृतिक द्रव्यों से बने जूस और शरबतों का सेवन करें, जैसे नींबू पानी, कोकोनट वॉटर, आम पनी, पुदीना पनी, अदरक की चाय, अनार शरबत आदि।
10. गर्म मसालेदार चाय या कॉफ़ी की जगह प्राकृतिक औषधीय हर्बल चाय का सेवन करें।
11. हरे पत्ते वाले सलाद का सेवन करें जैसे कि पालक, मेथी, सरसों, धनिया आदि।
12. अनार और अंगूर का सेवन करें, जो आपके शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं।
13. सूखे मेवे जैसे कि बादाम, खजूर, मुनक्का, अखरोट, किशमिश, अंजीर, पिस्ता, अनारसे सेवन करें।
14. गर्म और स्वादिष्ट सूप का सेवन करें, जैसे टमाटर, पालक, गोभी, अजवाइन, लौंग, जीरा, मिर्च आदि का सूप।
अवॉइड करने योग्य आहार और आदतें:
1. ठंडी मीठी चीज़ें जैसे कि आइसक्रीम, शरबत, ठंडाई, चॉकलेट, गर्म मिठाई आदि से बचें।
2. तली हुई और अधिक मसालेदार खाद्य-पदार्थों का सेवन कम करें।
3. तला हुआ और पकाया हुआ खाना न खाएं, बल्कि स्वदेशी खाद्य-पदार्थों का सेवन करें।
4. जड़ी-बूटियों के सेवन से बचें, क्योंकि वे तापमान को बढ़ा सकती हैं।
5. गर्म और तीखी मसालेदार चीज़ें जैसे कि मिर्च, लहसुन, अदरक, धनिया पत्ती, जीरा, धनिया आदि से परहेज़ करें।
6. तेजी से तैयार होने वाली चीज़ें जैसे कि छोले भटूरे, समोसे, पकोड़े, फ्रेंच फ्राइज़ आदि को बचें।
7. बहुत ठंडे दूध और दूध से बनी चीज़ें जैसे कि कस्टर्ड, पाए, दूध की बर्फी, इस्ट्री आदि से दूर रहें।
यदि आप शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े किसी विशेष समस्या से पीड़ित हैं, तो इसे एक विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श करना सुझावित है। वे आपको संपूर्ण जांच करेंगे और आपके लिए सर्वोत्तम और उचित उपाय सुझाएंगे।
खाना खाने के बाद ये 5 काम करने से पाचन तंत्र पर हो सकता है बुरा असर
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा का वास होता है
स्वामी विवेकानंद जी का यह कथन बिलकुल सही और महत्वपूर्ण लगता है। किसी भी व्यक्ति के लिए स्वस्थ रहना बहुत जरुरी होता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई बातों का ध्यान रखना होता है जिसमे खान पान और लाइफस्टाइल की भूमिका बेहद जरुरी होती है। इसलिए आप दिन भर में किस प्रकार का भोजन करते हैं, कितना वर्कआउट करते हैं, मानसिक स्थिति कैसी है, इन सभी बातों का असर आपके शरीर पर दिखाई देता है।
आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा इस विषय में कहती हैं कि स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन करना जरुरी है। बात केवल भोजन करने तक ही सिमित नहीं है बल्कि आप भोजन से पूर्व क्या क्या करते हैं और खाना खाने के बाद क्या करते हैं, इसका प्रभाव भी आपके शरीर पर पड़ता है। यहाँ हम उन नियमों के बारे में जानेंगे जो खाना खाने से सम्बंधित है।
भोजन करने के तुरंत बाद पानी न पियें : विशेषज्ञों का मानना है कि खाने के तुरंत बाद पानी पीने से आपका पाचन धीमा हो जाता है। इसलिए खाना खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी या पेट भरकर बहुत ज्यादा मात्रा में पानी नहीं पीना चाहिए। आप खाने के बाद 2 से 3 घूंट पानी पी सकते हैं उससे आपकी आहारनली साफ़ हो जाती है।
बहुत ज्यादा एक्सरसाइज न करें : खाना खाने के तुरंत बाद जिम या हैवी एक्सरसाइज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर वैसी एक्सरसाइज जिसमे नीचे झुकना, मुड़ना आदि शामिल हो क्यूंकि ऐसी स्थिति में जो जो रक्त प्रवाह भोजन को पचाने में लगना चाहिए था वह आपके मसल्स तक जाने लगता है। इसलिए कहा जाता है कभी भी खाना खाने के 2 घंटे बाद ही हैवी एक्सरसाइज करना चाहिए।
बहुत ज्यादा एक्सरसाइज न करें : खाना खाने के तुरंत बाद जिम या हैवी एक्सरसाइज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर वैसी एक्सरसाइज जिसमे नीचे झुकना, मुड़ना आदि शामिल हो क्यूंकि ऐसी स्थिति में जो जो रक्त प्रवाह भोजन को पचाने में लगना चाहिए था वह आपके मसल्स तक जाने लगता है। इसलिए कहा जाता है कभी भी खाना खाने के 2 घंटे बाद ही हैवी एक्सरसाइज करना चाहिए।
खाने के तुरन्त बाद लेटने से बचें: खाने के बाद लेटने से पाचन प्रक्रिया की गति धीमी हो जाती है और एसिड बनने की वजह से हर्टबर्न भी हो सकता है। इसलिए कोशिश करें कि हमेशा खाने के 2 घंटे बाद ही बिस्तर पर जाएँ।
अत्यधिक फल का सेवन न करें: ये तो सभी को पता है कि फलों को खाना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है लेकिन इसको खाने का भी एक सही समय होता है। फलों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए खाने के बाद अत्यधिक मात्रा में फल खाने से मना किया जाता है क्यूंकि फल जब पेट के अंदर भोजन से मिलते हैं तो फर्मेंटेशन हो सकता है। इसलिए फलों को या आप नाश्ते में खा लिया करें या भोजन के 1-2 घंटे बाद।
चाय या कॉफी का सेवन न करें: बहुत लोगों को आदत होती है कि खाने के बाद वो चाय, कॉफी या शराब आदि का सेवन करते हैं लेकिन ऐसा करना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है इसलिए इस गलती को बार बार न दुहराएँ। क्यूंकि खाने से बाद इन पेय पदार्थों का सेवन आपके पाचन तंत्र को धीमा कर देता है
ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो खाने के बाद आपको करना पसंद भी होगा और शायद लम्बे समय से आपकी आदत में भी शामिल होगा लेकिन वह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए ऐसी आदतों से परहेज करने की कोशिश करें।
"WhatsApp में नया मजेदार फीचर, Animated Avatar से चैट में भेजें अपना खुद का एनिमेटेड अवतार"
WhatsApp में एक नया फीचर रोलआउट किया है, जिसकी मदद से यूजर्स का चैटिंग एक्सपीरियंस बेहतर होगा. लेटेस्ट फीचर का नाम Animated Avatar Pack है, जिसमें यूजर्स चैटिंग के दौरान एनिमेटेड अवतार का इस्तेमाल कर पाएंगे. इस लेटेस्ट अपडेट की जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है, जो WhatsApp के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करता है.
WhatsApp ने हाल ही में एनिमेटेड अवतार फीचर का रोलआउट शुरू कर दिया है. यह फीचर अभी भी कुछ यूजर्स के लिए ही उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध हो जाएगा.
एनिमेटेड अवतार फीचर एक मजेदार और दिलचस्प तरीका है अपने WhatsApp प्रोफाइल को कस्टमाइज करने का. आप अपने अवतार को अपनी पसंद के कपड़े, बाल और एक्सेसरीज पहना सकते हैं. आप अपने अवतार को अपने चेहरे की विशेषताओं से भी मेल खा सकते हैं. एनिमेटेड अवतार फीचर का उपयोग करने के लिए, आपको सबसे पहले WhatsApp को अपडेट करना होगा. इसके बाद आपको WhatsApp में अपना प्रोफाइल फोटो बदलना होगा. प्रोफाइल फोटो बदलते समय, आपको एनिमेटेड अवतार का विकल्प चुनना होगा.
सेल्फी से कैसे बनाएं WhatsApp Avatar?
सबसे पहले आपको WhatsApp पर जाना होगा. फिर सेटिंग्स पर जाकर Avatar सेक्शन पर जाना होगा. इसके बाद Create Avatar पर टैप करना होगा और फइर Take Selfie पर टैप करना होगा. इसके बाद WhatsApp आपकी सेल्फी लेगा. यह सेल्फी अपने आप अवतार में तबदील हो जाएगी. यूजर्स इस अवतार को एडिट कर सकते हैं और अपने हिसाब से बदलाव कर सकते हैं. एक बार अवतार क्रिएट करने के बाद इसे स्टीकर सेक्शन से एक्सेस किया जा सकता है.
यूरिक एसिड की समस्या कम करता है केला
कैसे करें सेवन
खराब खानपान के कारण यूरिक एसिड की समस्या का सामना करना पड़ता है। शरीर में यूरिक एसिड का लेवल तब बढ़ता है जब किडनी इसे फिल्टर करने में विफल रहती है। आमतौर पर किडनी का काम यूरिक एसिड को फिल्टर करके यूरीन के जरिए शरीर से बाहर निकाल देना है। जब शरीर में यूरिक एसिड काफी मात्रा में बनने लगता है और किडनी इसे फिल्टर नहीं कर पाती है तब ब्लड में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है।
हालांकि, कम जानकारी के चलते काफी लोग इसके लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं। ऐसे में बढ़ा हुआ यूरिक एसिड कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे गाउट, जोड़ों में दर्द और गठिया की समस्या का सामान करना पड़ता है। समय रहते यूरिक एसिड को कंट्रोल करना बहुत ही जरूरी हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए विभिन्न तरह के उपाय अपनाते हैं। रोजाना योग करने के साथ-साथ डाइट में केला शामिल करें। इससे आपका यूरिक एसिड आसानी से कंट्रोल हो जाएगा।
विटामिन सी से भरपूर डाइट लेने वाले पुरुषों में उम्र बढऩे के साथ गाउट होने की संभावना कम हो सकती है। एक बड़े केले में लगभग 12 मिलीग्राम विटामिन सी होता है और यह प्रति व्यक्ति की दैनिक आवश्यकता का लगभग 13 प्रतिशत और एक महिला का 16 प्रतिशत होता है। इसलिए केला का सेवन करना फायदेमंद होगा। क्योंकि यह यूरिक एसिड के स्तर को काफी कम नहीं करता है बल्कि नॉर्मल रखता है।
यूरिक एसिड के मरीज केले का सेवन विभिन्न तरीके से कर सकते हैं। रोजाना 2-3 केले आप ऐसे ही खा लें। पोषक तत्वों से भरपूर नाश्ते में आप केले को शामिल कर सकते हैं। इसे आप सादे कम वसा वाले दही के साथ मिलाएं। इसके अलावा आप कम वसा वाले दूध में मिलाकर स्मूदी बनाकर पी सकते हैं।
बढ़ गई है बालों में रूसी की समस्या तो आजमाएं ये उपाय
अगर आप अपने बालों की ग्रोथ तेजी से होते हुए देखना चाहती हैं तो आपको अमरूद की पत्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। दरअसल, इनमें विटामिन बी और सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो बालों के विकास के लिए आवश्यक हैं। जब आप इसे हेयर केयर रूटीन में शामिल करती हैं, तो ना केवल हेयर ग्रोथ तेजी से होती है, बल्कि बालों के झडऩे की समस्या भी काफी हद तक कम होती है।
अक्सर यह देखने में आता है कि ठंड के दिनों में रूसी की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में अमरूद की पत्तियों का इस्तेमाल करने से यकीनन आपको लाभ मिल सकता है। दरअसल, इसमें एंटी-माइक्रोबायल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो रूसी और स्कैल्प की अन्य समस्याओं को काफी हद तक दूर करने में मदद कर सकते हैं।
जब आप अमरूद की पत्तियों को अपने हेयर केयर रूटीन में शामिल करते हैं तो इसका सीधा असर आपके बालों के टेक्सचर पर भी पड़ता है। इसमें कुछ ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो बालों को अधिक स्मूथ और शाइनी बनाते हैं। जिसके कारण हेयर टेक्सचर बेहतर होता है।
अमरूद की पत्तियों में मौजूद नेचुरल ऑयल बालों के लिए एक कंडीशनर की तरह काम करता है। इसलिए, इसकी पत्तियों का हेयर मास्क रूखे व कर्ली हेयर के लिए काफी अच्छा माना जाता है। इससे आपको अपने बालों को मैनेज करना आसान हो जाता है। साथ ही साथ, बाल अधिक सॉफ्ट व सिल्की नजर आते हैं।
"व्हाट्सएप का नया फीचर: अब अज्ञात नंबरों से बिना संपर्क सूची में जोड़े करें चैट"
लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप ने एक नया फीचर पेश किया है जो उपयोगकर्ताओं को एड्रेस बुक में सेव किए बिना अपने फोन नंबर खोजकर अज्ञात लोगों के साथ चैट शुरू करने की अनुमति देता है।बता दें कि यह फीचर एंड्रॉइड और iOS दोनों यूजर्स के लिए उपलब्ध है। इस नए फीचर से यूजर्स के लिए अनजान नंबरों से चैट करना आसान हो जाएगा।
WABetaInfo ने इसका स्क्रीनशॉट शेयर कर यूजर्स को नए फीचर के बारे में जानकारी दी है। साझा किए गए स्क्रीनशॉट के अनुसार, जब भी आप एप्लिकेशन में कोई अपरिचित फोन नंबर दर्ज करेंगे, तो व्हाट्सएप आपके संपर्कों से परे खोज करेगा।
यह जांचने के लिए कि क्या यह सुविधा आपके व्हाट्सएप खाते के लिए उपलब्ध है, बस अपनी संपर्क सूची तक पहुंचें और एक फ़ोन नंबर ढूंढें।
WABetaInfo ने इसका स्क्रीनशॉट शेयर कर यूजर्स को नए फीचर के बारे में जानकारी दी है। साझा किए गए स्क्रीनशॉट के अनुसार, जब भी आप एप्लिकेशन में कोई अपरिचित फोन नंबर दर्ज करेंगे, तो व्हाट्सएप आपके संपर्कों से परे खोज करेगा। यह जांचने के लिए कि क्या यह सुविधा आपके व्हाट्सएप खाते के लिए उपलब्ध है, बस अपनी संपर्क सूची तक पहुंचें और एक फ़ोन नंबर ढूंढें।
iOS यूजर्स के लिए यह फीचर इस तरह काम करता है
iOS पर WhatsApp यूजर्स इन स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं. सबसे पहले, चैट सूची में, 'नई चैट प्रारंभ करें' बटन पर टैप करें, और फिर खोज बार में अज्ञात फ़ोन नंबर दर्ज करें। यदि वह व्यक्ति व्हाट्सएप पर है, तो आप उससे चैट कर सकेंगे।
प्राइवेसी फीचर के तौर पर काम करेगा
उपयोगकर्ता अक्सर अज्ञात फोन नंबरों से कॉल आने पर संपर्कों को अपनी पता सूची में सहेजते हैं, ताकि वे व्हाट्सएप प्रोफ़ाइल फोटो की जांच करके उन्हें पहचान सकें, लेकिन बाद में वे इन संपर्कों को हटाना भूल सकते हैं। इसके अतिरिक्त, किसी अज्ञात संपर्क को सहेजने का मतलब है कि वे आपकी प्रोफ़ाइल फ़ोटो देखने में सक्षम हो सकते हैं।
इसलिए किसी फ़ोन नंबर को संपर्क सूची में सहेजे बिना खोजना एक अतिरिक्त गोपनीयता उपाय माना जा सकता है और निश्चित रूप से मैसेजिंग उपयोगकर्ता अनुभव को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है।
WhatsApp में मिलेगा एनिमेटेड अवतार फीचर
मेटा मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप एक एनिमेटेड अवतार फीचर लाने की तैयारी में है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ने हाल ही में अवतारों के संबंध में आईओएस और एंड्रॉइड दोनों संस्करणों के लिए दो नए संवर्द्धन का खुलासा किया है।
पहला एन्हांसमेंट उपयोगकर्ताओं को फ़ोटो का उपयोग करके स्वचालित रूप से अपने स्वयं के अवतार बनाने की अनुमति देकर अवतार कॉन्फ़िगरेशन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है। एक अन्य सुधार में अवतारों का एक बड़ा संग्रह शामिल है। यह उन उपयोगकर्ताओं के लिए आसानी से उपलब्ध है जो सीधे ऐप सेटिंग से अपना अवतार सेट करते हैं।
मॉर्निंग वॉक से पहले रखें कुछ खास बातों का ख्याल
मॉर्निंग वॉक इसलिए भी जरूरी है कि क्योंकि इसमें शरीर में जमा खराब और एक्सट्रा कोलेस्ट्रॉल बाहर निकलता है। इसमें मांसपेशियों को खूब इस्तेमाल होता है। लंबे मॉर्निंग वॉक के दौरान शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है इसलिए शरीर में पानी की कमी महसूस न होने दें। ऐसे में सबसे जरूरी चीज यह है कि आप मॉर्निंग वॉक करने से पहले कुछ खास बात बातों का जरूर ख्याल रखें. नहीं तो ज्यादा वॉक से आपको नुकसान भी हो सकता है।
आपका पेट एकदम साफ होना चाहिए
मॉर्निंग वॉक पर जाने से पहले पेट को एकदम साफ रखें। क्योंकि अगर पेट साफ नहीं रहेगा तो कब्ज की स्थिति बनी रहेगी। शरीर की गर्मी आपके पेट में कब्ज पैदा कर सकती है।
ढेर सारा पानी पिएं
मॉर्निंग वॉक पर जाने से पहले ढेर सारा पानी पीना जरूरी है। ताकि आपका शरीर डिहाइड्रेट न रहें और मांसपेशियों में ताकत बनी रहे।
मॉर्निंग वॉक के दौरान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जरूर करें. जिससे ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है. और वॉक करने की क्षमता बढ़ती है. मॉर्निंग वॉक करने से पहले इन ऊपर दिए गए बातों का खास ख्याल रखें।
एक बैग अपने साथ रखें
बैग रखना इसलिए जरूरी है ताकि आप उसमें अपने पानी का बोतल, फोन, हेडफोन, और गर्मी लगने पर जैकेट खोलने के बाद उसमें डाल लें।
सर्दियों में भाप लेने के फायदे
भाप लेना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। भाप की गर्मी शरीर के फेफड़े को अंदर से साफ करने का काम करती है। यह फेफड़ों और सांस के रास्तों को खोलकर देती है जिससे सांस लेने में आसानी होता है। सर्दियों में भाप लेने से कई फायदे होते हैं।
सांस की समस्याओं से राहत
सर्दियों में सांस से जुड़ी कई समस्याएं ज्यादा होती हैं। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, कफ जमा होना, सांस लेने में तकलीफ जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। लेकिन भाप लेने से इन सभी से राहत मिल सकती है। भाप की गर्मी फेफड़ों तक पहुंचकर उन्हें खोल देती है।
सिरदर्द से छुटकारा
ठंड और मौसमी बदलाव के कारण अकसर लोगों को सिरदर्द की परेशानी होने लगती है।लेकिन भाप लेने से इससे तुरंत राहत मिल सकती है।
नाक बंद होने से राहत
ठंड-गर्मी और मौसम में बदलाव के कारण अकसर लोगों की नाक बंद हो जाती है। लेकिन भाप लेने से इससे तुरंत राहत मिल सकती है। भाप की गर्मी से नाक के अंदर का कफ पिघलने लगता है। नाक के रास्ते साफ होते हैं और सांस के लिए जगह बनती है।
नींद लाने में सहायक
भाप की गर्मी शरीर को अंदर से गर्म कर देती है। यह तनाव कम कर आराम पहुंचाती है। साथ ही नाक और सांसनलिका साफ होने से आरामदायक नींद आती है। भाप में हाइड्रोजन पेरॉक्साइड भी सोने में मदद करता है।
कैसे लें भाप
भाप इन्हेलर एक छोटा सा डिवाइस होता है जिसमें पानी भरकर भाप ली जा सकती है। ये बहुत ही आसान तरीका है भाप लेने का। चलिए जानते हैं भाप इन्हेलर का इस्तेमाल किस तरह करते हैं।
सबसे पहले अपने भाप इन्हेलर में पानी भर दें। पानी की मात्रा इन्हेलर की क्षमता के अनुसार ही भरनी चाहिए।
शाकाहारी लोगों में प्रोटीन की कमी पूरी करेंगी ये चीजें, आज से ही खाना कर दें शुरू
शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट्स: आपकी प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए शुरू करें आज से हीशाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन स्रोतों की महत्वपूर्णता: आहार में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थों के बारे में जानें।
प्रोटीन शरीर में अनेक महत्वपूर्ण कार्यों का संचालन करता है और यह शरीर के लिए विभिन्न तरीकों से लाभदायक होता है। शाकाहारी और वेजिटेरियन आहार पर आधारित लोगों के लिए प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए उन्हें किस तरह की आहार लेनी चाहिए, इस विषय पर एक लेख में जानकारी प्राप्त करें।
प्रोटीन शरीर में विभिन्न कोशिकाओं की मरम्मत करता है और नई कोशिकाएँ उत्पन्न करने में सहायता करता है। इसके साथ ही, सही मात्रा में प्रोटीन सेवन वजन कम करने और मसल्स निर्माण में भी सहायता करता है। शाकाहारी या वेजिटेरियन लोगों के लिए प्रोटीन की आपूर्ति करने के लिए उपयुक्त स्रोत बहुत कम होते हैं। इसलिए, आगे हम शाकाहारी प्रोटीन भोजन के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें कोई भी व्यक्ति अपने आहार में शामिल कर सकत हैं।
यहां कुछ ऐसे शाकाहारी प्रोटीन स्रोत दिए जा रहे हैं, जिन्हें आप अपने आहार में शामिल कर सकते हैं:
1. सोया उत्पाद: सोया दूध, सोया बीन्स, सोया चंक, सोया ग्रनूल्स, टोफू आदि सोया उत्पाद प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत हैं। यह आपको एसेंशियल एमिनो एसिड्स प्रदान करता है और शारीरिक मस्तिष्क के विकास में मदद करता है।
2. दाल और धानिया: मूंग दाल, चना दाल, मसूर दाल, तुअर दाल और उड़द दाल जैसी अनाजों में प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है। धानिया में भी प्रोटीन होता है और आप इसे सलाद, चटनी या व्यंजनों में शामिल कर सकते हैं।
3. द्रव्यप्रद बीज: चिया बीज, फ्लैक्ससीड, सनफ्लावर सीड्स और पंपकिन सीड्स जैसे बीज उच्च प्रोटीन स्रोत होते हैं। इन्हें अवकाशित या तले हुए रूप में खाने से प्रोटीन की आपूर्ति होगी।
4. नट्स और ड्राई फ्रूट्स: बादाम, काजू, मूंगफली, अखरोट और किशमिश जैसे वृक्षीय बीज और सूखे मेवे भी प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इन्हें सब्जी, फल, या आपकी पसंद के रूप में सीधे खाया जा सकता है।
5. दूध और दूध उत्पाद: दूध, पनीर, दही और छाछ जैसे दूध उत्पाद प्रोटीन का अच्छा स्रोत होते हैं। आप यहां वेजिटेरियन वेराइटीज़ को भी शामिल कर सकते हैं जो आपको और अधिक प्रोटीन प्रदान कर सकती हैं।
6. अनाज और अन्य पौष्टिक अनाज: गेहूँ, बाजरा, जौ, ओट्स, राजमा, चना, रागी, ब्राउन राइस, और मक्का जैसे अनाज में प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हें अपने आहार में शामिल करके प्रोटीन की आपूर्ति बढ़ा सकते हैं।
यदि आप शाकाहारी हैं, तो इन खाद्य पदार्थों को अपने आहार में नियमित रूप से शामिल करके प्रोटीन की कमी को पूरा कर सकते हैं। साथ ही, अन्य पोषक तत्वों और विटामिनों की समृद्ध शाकाहारी आहार भी लेना महत्वपूर्ण है ताकि आपका शरीर संतुलित और स्वस्थ रहे। इसके अलावा, आप शाकाहारी प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित सुझावों का पालन कर सकते हैं:
1. वेजिटेरियन प्रोटीन सप्लीमेंट्स: प्रोटीन सप्लीमेंट्स आपको अतिरिक्त प्रोटीन प्रदान कर सकते हैं। आपको विशेषज्ञ सलाह लेनी चाहिए और विश्वसनीय ब्रांड के साथ संपर्क करना चाहिए जो शाकाहारी विकल्पों को प्रदान करता है।
2. मिश्रित आहार: आप अलग-अलग प्रकार के शाकाहारी खाद्य पदार्थों को संयोजित करके प्रोटीन की आपूर्ति को बढ़ा सकते हैं। जैसे कि, दाल-चावल का संयोजन, सोया दाल और सब्जियों की सटीक मिश्रिती, अनाजी ब्रेड और पीनट बटर जैसी विकल्प।
3. नए शाकाहारी प्रोटीन खाद्य पदार्थ की खोज करें: शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नई विकल्पों की खोज करें जो प्रोटीन की अच्छी मात्रा प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, सेव, रिज़ोमील्क, ताल मखाना, ब्रॉकोली, किनोआ, और सेसेम बीज आदि।
4. शाकाहारी प्रोटीन खाद्य पदार्थों की तैयारी: आप अपने आहार में शाकाहारी प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए शाकाहारी न खाद्य पदार्थ तैयार कर सकते हैं। इसमें शाकाहारी बर्गर, तिन्दा कटलेट्स, मिसल पाव, शाकाहारी चिली, और शाकाहारी ढोकला शामिल हो सकते हैं।
5. प्रोटीन शेक और स्नैक्स: शाकाहारी प्रोटीन शेक और स्नैक्स आपको आसानी से प्रोटीन प्रदान कर सकते हैं। आप अपने पसंद के फल, सूखे मेवे, दही, नट्स और दूध के साथ प्रोटीन शेक बना सकते हैं।
6. शाकाहारी प्रोटीन रेसिपीज़ की खोज करें: इंटरनेट पर बहुत सारी शाकाहारी प्रोटीन रेसिपीज़ उपलब्ध हैं। आप वेबसाइट्स, ब्लॉग, यूट्यूब चैनल आदि से शाकाहारी प्रोटीन रेसिपीज़ खोज सकते हैं और उन्हें आपके आहार में शामिल कर सकते हैं।
इसके अलावा, आपको अपने शाकाहारी आहार में अन्य पोषक तत्वों की भी ध्यान रखना चाहिए। शाकाहारी आहार में पोषक तत्वों की समृद्धता के लिए अनाज, फल, सब्जियां, दही, नट्स, बीज, और पौष्टिक सूप जैसे आहारिक पदार्थों को शामिल करें। साथ ही, प्रोटीन की सही मात्रा को आपके शरीर की आवश्यकताओं के आधार पर निर्धारित करें। यह आपकी उम्र, लिंग, वजन, और गतिविधि स्तर पर निर्भर करेगा। स्वस्थ जीवनशैली का पालन करें और नियमित शारीरिक गतिविधि को शामिल करें। योग और व्यायाम करना भी आपके मांसपेशियों को मजबूत और स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।
आप अपने आहार में प्रोटीन संप्लीमेंट्स का भी उपयोग कर सकते हैं, लेकिन इससे पहले एक पोषण सलाहकार या डॉक्टर से सलाह लेना सुनिश्चित करें। यह आपको आपकी आवश्यकताओं के अनुसार सही प्रोटीन सप्लीमेंट चुनने में मदद करेगा।
अंत में, स्वास्थ्यपूर्ण और पूर्णता से भरपूर शाकाहारी आहार के साथ उचित प्रोटीन के स्रोतों का सेवन करने से आप प्रोटीन की कमी को पूरा कर सकते हैं। साथ ही, इससे आपका शारीर स्वस्थ रहेगा और आपको उर्जा और पुष्टि मिलेगी। नियमित शारीरिक गतिविधि और उचित पोषण के साथ, आप अपनी स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकते हैं। इन सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए, आप अपने शाकाहारी आहार में प्रोटीन की आपूर्ति को पूरा कर सकते हैं। यदि आपको इस विषय में अधिक सलाह चाहते हैं, तो आपको इस विषय में विशेषज्ञ सलाह लेना बेहतर होगा। एक पोषण सलाहकार या डायटीशियन आपको शाकाहारी प्रोटीन के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान कर सकता है और आपके व्यक्तिगत आहार योजना को तैयार करने में मदद कर सकता है।
बारिश के मौसम में इन सब्जियों और फलों से बनाएं दूरी, वरना पड़ सकते हैं बीमार
बारिश का मौसम आते ही जहां मौसम हसीन हो जाता है वहीं वातावरण में नमी और चिपचिपाहट बढ़ने से मक्खी-मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ जाता है. इतना ही नहीं मॉनसून के दौरान खाने-पीने की आदतों को भी बदलना जरूरी है, नहीं तो लेने के देने पड़ सकते हैं.
बारिश के मौसम में वातावरण में बढ़ी नमी और आर्द्रता के कारण खाने की सामग्री बहुत जल्दी खराब हो जाती है और इस मौसम में खाने के सामग्री में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस की प्रवृद्धि हो सकती है। कुछ फल और सब्जियां इस मौसम में खाने से बीमारी के बजाय नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए, कुछ फूड्स को बारिश के मौसम में खाने से बचना चाहिए।
पालक: भले ही हरी पत्तेदार सब्जियां शरीर के लिए बहुत पौष्टिक व हेल्दी होती हैं, यही वजह है कि ये सब्जियां रोजाना आहार में शामिल होनी चाहिए, लेकिन बारिश के मौसम में से सब्जियां बैक्टीरिया को पैदा करने में सबसे ज्यादा संवेदनशील होती हैं. पालक ऐसी ही सब्जी है जो फायदेमंद होने के बावजूद इस मौसम में नहीं खानी चाहिए.
मशरूम: मशरूम बहुत हेल्दी फूड है. इसमें मौजूद पोषण तत्व शरीर को ताकत देते हैं लेकिन नमी के चलते बारिश के मौसम में मशरूम में बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. चूंकि यह मिट्टी के काफी करीब उगता है और बैक्टीरिया को पैदा होने का वातावरण देता है. लिहाजा कुछ महीने तक इसे खाना छोड़ देना चाहिए.
बाहर का जूस: बारिश के मौसम में बाहर का जूस पीने से भी बचना चाहिए. आमतौर पर बाजारों में जूस निकालने के लिए पहले से फलों को काटकर या छीलकर रखा जाता है लेकिन बारिश के मौसम में नमी के चलते महज कुछ समय में ही इन फलों में बैक्टीरिया पनप जाता है. कई बार हाईजीन की कमी से भी वायरस फंगस आ जाती है. लिहाजा बीमारी से बचना है तो बाहर का जूस न पीएं, घर पर फल काटकर ताजा जूस निकालकर पी सकते हैं.
हरी पत्तेदार सब्जी: चूंकि अब हर मौसम में हर सब्जी उपलब्ध है तो बारिश के मौसम में भी हरी सब्जियां खूब आती हैं. इस मौसम में पालक, बथुआ, चौलाई सहित कई अन्य प्रकार की सब्जियां भी बाजार में मिलती हैं. हालांकि हरी पत्तेदार कोई भी सब्जी इस मौसम में जल्दी खराब होती है और बीमार कर सकती है.
पत्तागोभी: पत्तागोभी की सिर्फ सब्जी ही नहीं बनती बल्कि यह मोमोज, चाउमीन, कॉल स्लो सेंडविच जैसे फास्ट फूड या जंक फूड्स में भी इस्तेमाल होती है और बड़े-बच्चे सभी खूब चाव से खाते हैं. कई फूड्स में यह कच्ची भी इस्तेमाल होती है लेकिन इस मौसम में इसे खाना बीमारी को दावत देना है. मॉनसून में इससे दूरी बना लेना जरूरी है.
स्ट्रीट फूड: स्ट्रीट फूड खाने वाले लोगों को इस मौसम में खासतौर पर सावधानी रखनी चाहिए. बरसात में सड़न के अलावा हाईजीन का भी मामला रहता है, लिहाजा स्ट्रीट फूड को अवॉइड कर दें. गोलगप्पे का पानी आदि भी संक्रमित या गंदा हो सकता है और बीमार कर सकता है.
कची और अधपकी सब्जिया: कची और अधपकी सब्जियों के अलावा काफी देर पहले कटे फल भी इस मौसम में बैक्टीरिया का सुरक्षित स्थान होते हैं. 15 मिनट से ज्यादा देर तक कटे रखे हुए फल खाने से तौबा कर लें. कोशिश करें कि फल को तुरंत काटें और खा लें. उससे पहले फलों को पानी में डालकर अच्छे से धो लें.
सी फूड्स: सी फूड्स जैसे मछली, झींगा आदि इन्फेक्शन केसक्रिय वाहक हो सकते हैं. इन्हें बेहद साफ-सफाई से धुलने और पकाने के बाद भी इनमें बैक्टीरिया या वायरस बचे रहने की संभावना रहती है. स्वस्थ रहना चाहते हैं तो मानसून के दौरान चिकन और अन्य नॉन-वेज व्यंजनों से दूरी बना लें.
भुट्टा खाने के बाद कतई न करें ये गलती
अगर आपको भी भुट्टा खाना पसंद है, तो भुट्टा खाने के बाद आपको इस तरह की गलती नहीं करनी चाहिए। दरअसल, भुट्टा खाने के तुरंत बाद पानी पीने से मना किया जाता है। क्या आप इसके पीछे की वजह के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो आज हम आपको आपकी इस गलती की वजह से होने वाले कुछ साइड इफेक्ट्स के बारे में बताने जा रहे हैं।
भुट्टे के बाद पानी पीने की वजह से आपको पेट में दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा इस तरह की लापरवाही के कारण आपको कब्ज जैसी दिक्कत भी झेलनी पड़ सकती है।
हो सकती है गैस और एसिडिटी
भुट्टे के बाद पानी पीने से गैस और एसिडिटी की दिक्कत भी हो सकती है इसलिए आपको अपनी इस आदत को जल्द से जल्द सुधार लेना चाहिए। इसके अलावा आपको ब्लोटिंग की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक भुट्टे खाने के बाद पानी पीने की आदत आपके डाइजेस्टिस सिस्टम को बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है।
कितनी देर बाद पी सकते हैं पानी?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपको भुट्टा खाने के कम से कम एक घंटे के बाद ही पानी पीना चाहिए। अगर आप भुट्टा खाने के 50 मिनट्स पहले पानी पी लेंगे तो आपको इन सभी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। गैस और एसिडिटी से बचने के लिए आपको भुट्टे के ऊपर नींबू का रस जरूर लगाना चाहिए।
अलसी खाने के फायदे ; गंदे कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकाले
ठंड में अलसी खाने से शरीर गर्म रहता है और इम्यूनिटी मजबूत बनती है। अलसी खाने से हार्ट अटैक के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके सेवन से ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है। अलसी के फायदे इतने हैं कि गिनाना मुश्किल हो जाएगा। इसके सेवन से बाल और त्वचा संबंधी समस्याएं दूर होती है। असली के बीजों में पोषक तत्वों का भंडार है।
अलसी खाने के फायदे
गंदे कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकाले
अलसी के बीज खाने से शरीर में जमा बैड कोलेस्ट्रॉल बाहर आ जाता है। इससे नसों की ब्लॉकेज को खोलने में मदद मिलती है। अलसी का सेवन करने से ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है। इसमें पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड हार्ट को हेल्दी रखता है।
डायबिटीज में फायदेमंद
फाइबर से भरपूर अलसी में हेल्दी फैट पाए जाते हैं, जिससे बढ़े हुए ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। अलसी में भरपूर एंटी डायबिटीक तत्व होते हैं जो शरीर में इंसुलिन के लेवल को अच्छा रखते हैं। डायबिटीज के मरीज भुनी हुई अलसी खा सकते हैं।
कैंसर के खतरे को करे कम
अलसी खाने से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। असली में एंटीऑक्सीडेंटस और एस्ट्रोजन तत्व होते हैं जो शरीर में कैंसर सेल्स को बनने से रोकते है। अलसीख खाने से कैंसर के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
वजन घटाने में असरदार
अलसी के बीज खाने से वेट लॉस में भी मदद मिलती है। इन्हें खाने से काफी देर तक पेट भरा रहता है। भूख कम लगती है और आप ज्यादा खाने से बचते हैं। इस तरह फाइबर से भरपूर अलसी मोटापे और जमा चर्बी को धीरे-धीरे कम कर देती है।
डायबिटीज और हार्ट के मरीज के लिए अमृत समान है नाशपाती
विटामिन सी से भरपूर नाशपाती ऐसा फल है जो डायबिटीज और हार्ट के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। सावन में बीमारियों के खतरे से शरीर को बचाने में नाशपाती मदद करता है। इसमें विटामिन सी के अलावा पोटैशियम, फोलेट, कॉपर और मैगनीज पाया जाता है। जानिए नाशपाती खाने से क्या फायदे मिलते हैं?
डायबिटीज को करे कंट्रोल- नाशपाती को डायबिटीज के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। नाशपाती में एंथोसायनिन पाया जाता है जो एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है और डायबिटीज के खतरे को भी कम करता है। नाशपाती का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लो होने के कारण शुगर के मरीज इसे खा सकते हैं। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
हार्ट के लिए फायदेमंद- नाशपाती में जो पोषक तत्व पाए जाते हैं वो हार्ट को हेल्दी बनाने में मदद करते हैं। नाशपाती में प्रोसायनिडिन होता है, जो एक एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है। इससे हार्ट की समस्याएं कम होती हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है। छिलके समेत खाए जाने वाले नाशपाती के छिलके में क्वेरसेटिन होता है जिससे बीपी कंट्रोल रहता है।
धान की बुआई और कटाई के लिए दो शानदार कृषि यंत्र, बेस्ट और कामयाब विकल्प
रायपुर: खरीफ की फसलों की बुआई का सीजन चल रहा है. ऐसे में किसानों को खेती के लिए कृषि यंत्रों की आवश्यकता होती है. कई किसान कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण महंगे कृषि यंत्र नहीं खरीद पाते हैं. ऐसे में सरकार की ओर से किसानों को सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाता है. सरकार का उद्देश्य प्रत्येक किसान तक कृषि यंत्रों की पहुंच बनाना है. खरीफ फसल सीजन को देखते हुए राज्य सरकार किसानों को भारी सब्सिडी पर कृषि यंत्र उपलब्ध करा रही है. जो किसान सब्सिडी पर कृषि यंत्र खरीदना चाहते हैं वे आवेदन करके सरकारी सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं. ऐसे ही धान की बुआई और कटाई के लिए दो तरह के कृषि यंत्रों का बहुत ज्यादा उपयोग बढ़ा है.
पैडी (राइस) ट्रांसप्लांटर
यह धान बुआई की एक शानदार मशीन है. इस मशीन की सहायता से किसान धान की कतारबद्ध बुवाई कर सकते हैं. इससे बुआई करने पर धान की फसल से खरतपवार निकालने में भी आसानी रहती है. इस मशीन की सहायता से किसान एक दिन में 5 से 6 एकड़ क्षेत्र में धान की बुआई कर सकते हैं. इस मशीन की बुआई करने पर समय और धन दोनों की बचत होती है और मजदूरी का खर्च बचता है.
हैप्पी सीडर
हैप्पी सीडर मशीन की सहायता से धान की फसल की कटाई के बाद अवशेषों को हटाए बिना गेहूं की बुआई का कार्य किया जा सकता है. इस मशीन से बुआई करने पर सिंचाई में पानी की बचत होती है. इसमें पराली मल्च का काम करती है. इससे पराली को जलाने की जरूरत नहीं पड़ती है. यह मशीन पराली को खेत में मिला देती है जो खाद का काम करता है, इसलिए यह मशीन किसानों के लिए बहुत काम की है.
BSNL का यह प्लान देगा आपको 180 दिनों की मुफ्त अवधि और प्रति दिन 2 GB डेटा के साथ 30 दिनों के लिए वैध
अगर आप बार-बार टॉप-अप के झंझट से बचना चाहते हैं तो आज हम एक सस्ते प्लान के बारे में बात कर रहे हैं जो आपको 180 दिन की क्रेडिट अवधि प्रदान करता है. इस प्लान की दैनिक लागत लगभग 2 रुपये है. यह प्लान डेटा, कॉलिंग और एसएमएस लाभ के साथ भी आता है. कंपनी इस प्लान को 30 दिनों की अतिरिक्त क्रेडिट अवधि देती है. यह 397 रुपये वाला BSNL प्रीपेड प्लान है. टॉप अप नंबर के तौर पर BSNL का इस्तेमाल करने वालों के लिए यह प्लान एक बेहतरीन विकल्प है. कंपनी ने एक प्रमोशनल ऑफर की वजह से प्लान को 30 दिनों का अतिरिक्त क्रेडिट दिया है, जो खत्म होने वाला है. बीएसएनएल के 397 रुपये के प्लान पर उपलब्ध इस सीमित समय के ऑफर के बारे में और जानें…
397 रुपये का प्रीपेड टैरिफ 30 दिनों तक चलता है
BSNL ने पहले 397 रुपये के प्लान के लिए 180 दिन की पुनर्भुगतान अवधि की पेशकश की थी. हालाँकि, टेलीकॉम इंडस्ट्री के सामने आ रही चुनौतियों के कारण इस कंपनी ने पुनर्भुगतान अवधि को घटाकर 150 दिन कर दिया है. हालाँकि, एक अच्छी खबर है. सीमित समय के प्रमोशनल ऑफर के कारण, इस योजना की 30 दिन की अतिरिक्त समाप्ति तिथि है. दूसरे शब्दों में कहें तो इस प्लान के साथ ग्राहकों को फिर से 180 दिनों की समाप्ति तिथि मिलती है. कृपया ध्यान दें कि यह अतिरिक्त समाप्ति तिथि केवल 15 अगस्त और 13 सितंबर, 2023 के बीच टॉप-अप के लिए उपलब्ध है. इसका मतलब है कि ऑफर 13 सितंबर को समाप्त होगा. हमें आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि बीएसएनएल के 397 रुपये वाले प्लान में क्या उपलब्ध है.
BSNL के 397 रुपये वाले प्लान में आपको क्या मिलता है
बीएसएनएल के 397 रुपये के प्रीपेड प्लान में लोकल, एसटीडी और एमटीएनएल नेटवर्क पर रोमिंग के साथ अनलिमिटेड वॉयस कॉल की सुविधा मिलती है. इस प्लान में 30 दिनों के लिए प्रतिदिन 100 एसएमएस और प्रतिदिन 2 जीबी डेटा भी शामिल है. भले ही आपका दैनिक डेटा kota खत्म हो जाए, फिर भी आप 40 केबीपीएस की स्पीड से इंटरनेट सर्फ कर सकते हैं.
कॉल और डेटा का लाभ केवल कुछ दिनों के लिए
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये सभी लाभ (कॉल, डेटा, एसएमएस) केवल 30 दिनों के लिए उपलब्ध हैं. हालाँकि, योजना की वैधता अवधि 180 दिनों तक बढ़ा दी गई है (मानक ऑफ़र के लिए 150 दिन, प्रचार ऑफ़र के लिए अतिरिक्त 30 दिन). तो अगर आप अपने बीएसएनएल सिम को दूसरे नंबर के तौर पर एक्टिव रखना चाहते हैं तो यह प्लान सबसे अच्छा विकल्प है. यह प्रमोशनल ऑफर समाप्त होने से पहले प्राप्त करें!
छत्तीसगढ़ के बचेली वन क्षेत्र में प्राचीन वनस्पतियों का जीवंत संग्रह
लक्ष्मीकांत कोसरिया (डिप्टी डायरेक्टर जनसंपर्क)
छत्तीसगढ़ वन विभाग ने हाल ही में पारिस्थितिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण वन क्षेत्र की पहचान की है, जो दंतेवाड़ा वन मंडल के बचेली वन परिक्षेत्र में स्थित है और बीजापुर के गंगालूर वन परिक्षेत्र तक फैला हुआ है। इस विशेष वन क्षेत्र में कई प्राचीन वनस्पतियों की प्रजातियां पाई गयीं है, जो छत्तीसगढ़ राज्य की असाधारण जैव विविधता को प्रदर्शित करता है। इस क्षेत्र को वैज्ञानिकों और वन अधिकारियों ने जैव विविधता के लिए अत्यधिक समृद्ध और महत्वपूर्ण माना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज न केवल इस क्षेत्र के पर्यावरणीय महत्व को दर्शाती है, बल्कि भविष्य में वन अनुसंधान और संरक्षण के प्रयासों को भी नई दिशा देगी।
मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र की जैव विविधता को संरक्षित करने और वन अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इस खोज से राज्य को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलेगी। सरकार इस क्षेत्र में शोध और अध्ययन के लिए विशेष प्रोत्साहन देगी, ताकि इन दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षित रखा जा सके। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह दुर्लभ वन क्षेत्र विशेष रूप से उन पौधों की प्रजातियों का घर है, जो करोड़ों साल पहले के समय में अस्तित्व में थीं। अब यह क्षेत्र न केवल वैज्ञानिक अध्ययन के लिए बल्कि पर्यटन के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
समुद्र तल से 1,240 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित यह वन क्षेत्र सबट्रॉपिकल ब्रॉड-लीव्ड हिल फॉरेस्ट (फॉरेस्ट टाइप 8) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। खास बात ये है की यह छत्तीसगढ़ का सबसे ऊंचाई वाला वन क्षेत्र हो सकता है। जबकि राज्य में मुख्य रूप से मॉइस्ट एंड ड्राय डेसिड्युअस फॉरेस्ट्स (फॉरेस्ट टाइप 3 एंड 5) के लिए जाना जाता है, यह विशेष वन पैच ब्रॉड-लीव्ड हिल फॉरेस्ट एक नया पारिस्थितिक आयाम प्रस्तुत करता है।
यहां की वनस्पति पश्चिमी घाट की वनस्पतियों से काफी हद तक मेल खाती है। कांगेर घाटी के जंगलों की तरह, यह क्षेत्र भी विभिन्न प्रकार की प्रजातियों से समृद्ध है। इसके अलावा, मानवजनित दबाव की कमी होने कारण इन प्रजातियों को बिना किसी बाधा के पनपने में मदद मिली है। इस क्षेत्र को एक ’जीवित संग्रहालय’ माना जा रहा है, क्योंकि यहां कई प्राचीन पौधों की प्रजातियां संरक्षित हैं, जो संभवतः प्रागैतिहासिक काल, यहां तक कि डायनासोर युग से संबंधित हो सकती हैं। यहां पाई गई कुछ वनस्पतियों की प्रजातियों को छत्तीसगढ़ में पहली बार दर्ज किया गया माना जा रहा है।
इस विशेष वन का तीन दिवसीय सर्वे अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास एवं योजना) अरुण कुमार पांडे, आईएफएस के नेतृत्व में किया गया। इस सर्वे दल में पर्यावरणविदों और वन अधिकारियों के साथ-साथ आईएफएस परिवीक्षाधीन अधिकारी एस. नवीन कुमार और वेंकटेशा एम.जी. भी शामिल थे। इसके अलावा, वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के उप निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिश्रा और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के पूर्व विभागाध्यक्ष एम.एल. नायक भी सर्वे टीम का हिस्सा थे।
सर्वे के दौरान, टीम ने दुर्लभ और प्राचीन वनस्पतियों की कई प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया है, जिनमें ऐल्सोफिला स्पिनुलोसा (ट्री फर्न), ग्नेटम स्कैंडन्स, ज़िज़िफस रूगोसस, एंटाडा रहीडी, विभिन्न रुबस प्रजातियाँ, कैंथियम डाइकोकूम, ओक्ना ऑब्टुसाटा, विटेक्स ल्यूकोजाइलन, डिलेनिया पेंटागाइना, माचरेन्जा साइनेंसिस, और फिकस कॉर्डिफोलिया शामिल हैं। इनमें से माचरेन्जा साइनेंसिस प्रजाति संभवतः छत्तीसगढ़ के केवल इसी वनीय पहाड़ी क्षेत्र में पाई गई है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव ने इस विशेष वन क्षेत्र के बारे में कहा कि मुख्यमंत्री साय एवं वन मंत्री कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ वन विभाग राज्य की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत रहा है। बचेली का ये बेहद विशेष वन क्षेत्र राज्य वन विभाग की जैव विविधता के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बचेली का ये विशेष वन भविष्य के अनुसंधान एवं इको-टूरिज्म के विकास के लिए महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रस्तुत करता है। वन विभाग इस क्षेत्र की छिपी हुई जैव विविधता को और गहराई से समझने के लिए अधिक विस्तृत सर्वेक्षण करने की योजना बना रहा है।