शिक्षा
सपनों से दूर करती यह कैसी पढ़ाई
सपनों से दूर करती यह कैसी पढ़ाई.......
- अतुल मलिकराम (लेखक एवं राजनीतिक रणनीतिकार)
दीक्षांत समारोह में भी ऑनलाइन एग्जाम कराने के लिए जारी रहा विरोध राज्यपाल के सामने ही कुलपति मुर्दाबाद के लगे नारे
छत्तीसगढ़ बस्तर । बस्तर में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह स्थल के बाहर NSUI के छात्रों ने जमकर हंगामा किया है ।
बच्चों ने सीएम साय को पोस्टर के माध्यम से दी ‘पालक-शिक्षक मीटिंग’ एजेंडा की जानकारी
रायपुर। मेगा पालक शिक्षक बैठक में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को स्कूली बच्चों ने पोस्टर के माध्यम से पालक शिक्षक मीटिंग के उद्देश्य और गतिविधियों की रूपरेखा और इससे छात्रों को होने वाले लाभ के बारे में विस्तार से बताया। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा विभाग द्वारा 13 बिंदु पालक शिक्षक मीटिंग के लिए निर्धारित किए गए हैं, अलग अलग बच्चों ने इन बिंदुओं के बारे में बताया।
मुख्यमंत्री साय ने सभी गतिविधियों के बारे में जानकारी ली और बच्चों से इन सभी का अच्छे से लाभ उठाने के लिए कहा। उन्होंने बच्चों से उनके करियर प्लान भी पूछे और खूब मेहनत कर अपने सपनों को पूरा करने की सीख दी। उन्होंने कहा जीवन में श्रेष्ठता हासिल करने का एक मात्र माध्यम शिक्षा है। आप करियर में जिस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते उसके लिए लगन और मेहनत से पढ़िए जिससे आप अपना उज्ज्वल भविष्य गढ़ सकें। इस दौरान मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय और स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी भी इस दौरान साथ रहे।
पालक शिक्षक संवाद में पालकों को बच्चों के लिए यथासंभव घर में पढ़ाई के लिए मेरा कोना-स्टडी कॉर्नर के रूप में एक निश्चित स्थान तय करने की बात बताई गई। इसी प्रकार छात्रों के लिए एक आदर्श दिनचर्या कैसी हो इसकी जानकारी दी गई।बच्चों ने आज क्या सीखा के तहत पालकों की सहभागिता बढ़ाने के साथ उनकी प्रोग्रेस मॉनिटर करने में सहायता मिलेगी। ‘‘बच्चा बोलेगा बेझिझक’’ से बच्चों के अंदर स्टेज में बोलने के भय को दूर करना और पब्लिक स्पीकिंग और लीडरशिप क्वालिटी बढ़ाने पर काम होगा। बच्चों की अकादमिक प्रगति एवम परीक्षा पर चर्चा का उद्देश्य पालकों और छात्रों को परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव को दूर करना और अच्छे अंक लाने के लिए प्रोत्साहित करना है। पुस्तक की उपलब्धता सुनिश्चित करना, बस्ता रहित शनिवार के अंतर्गत अन्य ज्ञानवर्धक गतिविधियों से छात्रों को जोड़ना, विद्यार्थियों के आयु/कक्षा अनुरूप स्वास्थ्य परीक्षण एवम पोषण की जानकारी देना, न्योता भोज के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना, विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से शिक्षा हेतु पालकों एवम छात्रों को अवगत कराना, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं/ छात्रवृत्ति एवम विभागीय योजनाओं की जानकारी प्रदान करने के साथ जाति/आय/निवास प्रमाण पत्र निर्माण और नई शिक्षा नीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
सीएम साय पालक-शिक्षक सम्मेलन में हुए शामिल
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार को जशपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बंदरचुआँ में संकुल स्तरीय पालक-शिक्षक सम्मेलन में शामिल हुए और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर शिक्षकों से चर्चा की।
बैठक में बंदरचुआं स्कूल के शिक्षक, बच्चे और पलकों से मुख्यमंत्री साय ने विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उनके साथ उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय भी मौजूद रही। स्कूल में बच्चों ने प्रदर्शनी लगाई थी जिसका अवलोकन मुख्यमंत्री ने किया। बच्चों ने शिक्षा डिजिटल एप्प के संदर्भ में मुख्यमंत्री साय को विस्तृत जानकारी दी।
बच्चों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने बच्चों को अच्छी पढ़ाई के साथ खेल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में भी शामिल होने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के शैक्षणिक विकास और स्कूलों के माध्यम से मिल रही शिक्षा की गतिविधियों के साथ ही ग्राम के विकास की बात करते हुए बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की।
हेमचंद यूनिवर्सिटी के सभी कॉलेजों में होगी ऑफ़लाइन परीक्षा.. कुलपति ने कहा प्रर्दशन छोड़ो परीक्षा की तैयारी करो
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग व उससे संबंद्ध 118 महाविद्यालयों में वार्षिक परीक्षाएं ऑफलाइन होगी।
परीक्षा प्रणाली में सही तरीके से सुधार करना जरुरी है
लगभग 25 वर्ष पहले आइआइटी, बंबई के निदेशक पद का कार्यकाल पूरा करने के तुरंत बाद प्रो. सुहास सुखात्मे का एक साक्षात्कार प्रकाशित हुआ था। उनसे एक प्रश्न यह पूछा गया था कि पांच साल के उनके कार्यकाल की कुछ विशेष बातें क्या रहीं। उन्होंने एक पंक्ति में जवाब दिया- ‘मुझे किसी ने अपने बच्चे का प्रवेश कराने के लिए नहीं कहा।’ इस उत्तर का गहरा महत्व है। इससे पहली बात तो यह निकलती है कि आप निदेशक को प्रभावित कर प्रवेश नहीं पा सकते। दूसरी बात, ‘तंत्र’ का कोई व्यक्ति ऐसा कहने या करने की सोच भी नहीं सकता। मंत्री, उद्योगपति, राजनेता या अभिजन, कोई भी हो, प्रवेश परीक्षा के अलावा किसी अन्य तरीके से आइआइटी में दाखिला पाने के बारे में सोच नहीं सकता था। यह एक अलिखित नियम था, जो समय के साथ एक कायदा बन गया, जिसे सभी मानते थे। यह नियम संयुक्त प्रवेश परीक्षा की पवित्रता में भरोसे के कारण बना रहा और यह पवित्रता अनुल्लंघनीय थी। इसी कारण अन्य कुछ संस्थानों ने भी इस परीक्षा के अंकों को अपने यहां प्रवेश का आधार बनाया। यह प्रणाली लगभग चार दशकों तक चलती रही, जब केवल पांच आइआइटी संस्थान थे और परीक्षार्थियों की संख्या का प्रबंधन हो सकता था। परीक्षा की पूरी प्रक्रिया का संचालन बारी-बारी से आइआइटी संस्थान करते थे। आइआइटी के प्राध्यापकों की पीढ़ियों ने यह सुनिश्चित किया कि परीक्षा की शुचिता बनी रहे।
लेकिन एक समय के बाद यह संभव नहीं रहा। आपूर्ति और मांग के बीच खाई बढ़ती गयी। आइआइटी में प्रवेश के लाभ आसमान छूने लगे। कोचिंग क्लास उद्योग मनमाने तरह से चलने लगे। ऐसे में सीट बढ़ाने की जरूरत पैदा हुई। आइआइटी संस्थानों की संख्या बढ़ी, प्रवेश अधिक होने लगे और आवेदकों की तादाद भी बहुत हो गयी। साल 2013 के आसपास यह गंभीर नीतिगत चर्चा होने लगी कि सभी इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों के लिए देशभर में एक परीक्षा की व्यवस्था हो। इसका उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को कई प्रवेश परीक्षाओं में बैठने की मुश्किलों से राहत दिलाना था। साथ ही, इससे देश में परीक्षाओं के स्तर भी समान होते। कोचिंग उद्योग द्वारा पैदा की गयी खाई और उनकी भारी कमाई से जुड़ी चिंताएं भी थीं। सो, हम ‘एक परीक्षा’ व्यवस्था में आ गये। साल 2017 में एक अलग एजेंसी गठित की गयी, जिसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) नाम दिया गया। यह एजेंसी विभिन्न परीक्षाओं के साथ चार बड़ी परीक्षाएं आयोजित करती है- मेडिकल प्रवेश के लिए नेशनल एलिजीबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (नीट), इंजीनियरिंग प्रवेश के लिए ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेइइ), यूजीसी-नेट और सेंट्रलाइज्ड यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूइटी)। बीते कुछ वर्षों से इन सभी परीक्षाओं के अनुभव गड़बड़ियों से अछूते नहीं रहे हैं। इससे छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बहुत बढ़ी हैं। इन परीक्षाओं की तैयारी में अमानवीय दबाव के कारण छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों को भी नहीं भूलना चाहिए।
इस साल नीट (अंडरग्रेजुएट) और यूजीसी-नेट परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूजीसी-नेट परीक्षा 19 जून को होने वाली थी। उसे महज एक दिन की सूचना पर रद्द कर दिया गया। इस परीक्षा में देशभर के 317 शहरों में लगभग नौ लाख छात्र बैठने वाले थे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इसलिए इस परीक्षा को रद्द किया क्योंकि उसे पर्चे लीक होने की आशंका थी। इससे पहले से ही नीट (अंडरग्रेजुएट) का मामला गर्म था, जिसके परिणाम चार जून को घोषित हुए थे। संयोग से उसी दिन लोकसभा चुनाव के नतीजे भी आये थे। इस परीक्षा में 571 शहरों और 4750 केंद्रों में 24 लाख छात्र शामिल हुए थे। लेकिन परिणामों में गड़बड़ियां लग रही थीं। जितने अंक लाकर पिछले साल 6800 के आसपास रैंक हासिल की जा सकती थी, इस बार उतने अंक में 21 हजार की रैंक मिली। इतना ही नहीं, 67 छात्रों को पूरे अंक मिले, जिनमें से छह छात्रों के क्रमांक एक ही अनुक्रम में थे और इनका परीक्षा केंद्र भी एक ही था। इससे रोष फैलना स्वाभाविक था। जब छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपने अंकों को साझा किया, तो एक अजीब-सी बात देखी गयी, जिसका खुलासा एनटीए ने नहीं किया था। वह बात यह थी कि 1563 छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिये गये थे, जिसके बारे में किसी पूर्व शर्त की घोषणा नहीं की गयी थी। ऐसे अंक दिव्यांग छात्रों को ठोस कारणों से दिये जा सकते हैं, लेकिन इस मामले में वे इसलिए दिये गये क्योंकि परीक्षा केंद्र पर प्रश्न पत्र बहुत देर से पहुंचे थे
तब तक पूरा मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंच चुका था। ग्रेस मार्क्स को रद्द किया गया और पुनः परीक्षा का आदेश दिया गया। बड़े पैमाने पर पर्चा लीक होने की आशंका तथा एनटीए के दोषपूर्ण प्रणाली से जुड़े सवाल अभी हैं। ऐसा लगता है कि नकल का बड़ा घोटाला हुआ है। इस संबंध में बिहार और गुजरात में कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। न तो यह कहानी अभी खत्म हुई है और न ही छात्रों और अभिभावकों का भारी तनाव कम हुआ है। आज बड़े बदलावों और सुधारों की आवश्यकता है। ऑप्टिक मार्क्स रिकॉग्निशन (ओएमआर) के इस्तेमाल वाली परीक्षाओं के लिए उनको छापने, ढोने और सुरक्षित केंद्रों पर ले जाने की जरूरत होती है। अब ऐसी व्यवस्था की प्रासंगिकता नहीं है। महाराष्ट्र की एक महत्वपूर्ण सरकारी परीक्षा एजेंसी लगभग 15 साल पहले ही स्क्रीन-बेस्ड सिस्टम को अपना चुकी है। अत्याधुनिक तकनीकों के इस दौर में हमें ओएमआर जैसे तरीके की जरूरत नहीं है।
कंप्यूटर से सवालों के क्रम को ऐसे बदला जा सकता है कि सवाल बनाने वाले को इसका पता पर्चा सामने आने पर ही लगे। तकनीक आधारित समाधानों को देश में कई जगहों पर अपनाया गया है। हमें एक परीक्षा और एक राष्ट्रीय एजेंसी पर भारी दबाव को कम करना चाहिए। हम दो या इससे अधिक टेस्ट की व्यवस्था कर सकते हैं, जो प्रतिस्पर्धात्मक हों। इसमें कुछ निजी कंपनियों को भी शामिल किया जा सकता है। तीसरा सुधार दीर्घकालिक है, जिसमें हमें मांग और आपूर्ति की बड़ी खाई को कम करना होगा। इसका यह भी अर्थ है कि हम शिक्षा क्षेत्र को जकड़न से मुक्त करें तथा उच्च शिक्षा के संस्थानों को पाठ्यक्रम तय करने, शिक्षक भर्ती करने और उनका वेतन तय करने, शुल्क का निर्णय लेने आदि में अधिक स्वतंत्रता एवं स्वायत्तता दें। अन्यथा हमारे लाखों युवा अपनी महत्वपूर्ण युवावस्था को मनोवैज्ञानिक बोझ के साथ परीक्षा की तैयारी और बार-बार परीक्षा देने में बर्बाद करते रहेंगे, जहां सफलता मिलना लॉटरी लगने से भी अधिक मुश्किल है। (ये लेखक के निजी विचार हैं।)
12वीं के बाद एयरफोर्स कैसे ज्वाइन करें? जानिए पूरी चयन प्रक्रिया
एयरफोर्स में जाने का है सपना, तो जान लें कि 12वीं पास करने के बाद आप एयरफोर्स कैसे ज्वॉइन कर सकते हैं, इसके लिए कौन सी परीक्षा देनी होती है और कैसे सेलेक्शन होता है.
हमारे देश में बड़ी संख्या में उम्मीदवार सेना में भर्ती होने का सपना देखते हैं. लेकिन कई स्टूडेंट्स को पता नहीं होता है कि वह सेना कैसे ज्वाइन करें. ऐसे में हम आपकी मदद के लिए बताने जा रहे हैं कि 12वीं पास करने के बाद एयरफोर्स में कैसे नौकरी पा सकते हैं. इसके लिए कितनी एज होनी चाहिए और कैसे सलेक्शन होता है.
बता दें कि स्टूडेंट्स 12वीं के बाद सीधे एयरफोर्स ज्वाइन कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें NDA यानी नेशनल डिफेंस एकेडमी परीक्षा (UPSC NDA Exam) में शामिल होना होगा. इस परीक्षा का आयोजन UPSC की ओर से हर साल कराया जाता है.
वायु सेना के लिए यूपीएससी एनडीए पात्रता: परीक्षा कौन दे सकता है
फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ के साथ 12वीं पास करने वाले छात्र इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. वहीं स्टूडेंट की एज साढ़े 16 साल से लेकर साढ़े 19 साल के बीच होनी चाहिए. एनडीए परीक्षा का फॉर्म हर साल निकलता है. निर्धारित योग्यता रखने वाले स्टूडेंट्स नोटिफिकेशन जारी होने के बाद UPSC की वेबसाइट पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं.
भारतीय वायु सेना चयन प्रक्रिया: चयन प्रक्रिया
यूपीएससी एनडीए परीक्षा के अंतर्गत उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और एसएसबी इंटरव्यू के माध्यम से किया जाता है. परीक्षा क्लियर करने वालों को एसएसबी इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है.
वायु सेना के लिए यूपीएससी एनडीए परीक्षा पैटर्न: पैटर्न
लिखित परीक्षा में 2 पेपर होते हैं मैथ्स और जनरल एबिलिटी टेस्ट. मैथ सेक्शन से 300 और जनरल एबिलिटी टेस्ट से 600 अंको के प्रश्न पूछे जाते हैं. जनरल एबिलिटी टेस्ट में फिजिक्स, केमिस्ट्री, जनरल साइंस, हिस्ट्री, ज्योग्राफी और करंट इवेंट्स से प्रश्न पूछे जाते हैं.
आईएएफ एनडीए एसएसबी साक्षात्कार: एसएसबीबी साक्षात्कार
एसएसबी इंटरव्यू की प्रक्रिया 2 चरणों में 5 दिन तक आयोजित की जाती है. इसमें कई राउंड के टेस्ट होते हैं. पूरा इंटरव्यू प्रोसेस 900 अंकों का होता है. एयरफोर्स ज्वाइन करने के लिए उम्मीदवार को कंप्यूटराइज्ड पायलट सुरक्षा सिस्टम भी क्वालीफाई करना होता है.
छत्तीसगढ़ के अब इस विश्वविद्यालय में ऑनलाइन परीक्षा को लेकर उठी मांग कुलपति को राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन....
छत्तीसगढ़ बस्तर । बस्तर विश्वविद्यालय के छात्रों ने विश्वविद्यालय का घेराव कर ऑनलाइन परीक्षा की मांग की नारे बाजे की और ऑनलाइन एग्जाम के लिए कुलपति के हाथ राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा
पं . रविशंकर शुक्ल अपडेट इस बार कॉलेजों में क्षमता से ज्यादा परीक्षा फार्म , अब प्राइवेट के सेंटर बदलेंगे, अप्रैल के पहले हफ्ते में हो सकती है परिक्षा, सोमवार तक जारी हो सकते है, समय सारिणी....
रविशंकर शुक्ल में परीक्षा के लिए इस बार बड़ी संख्या में आवेदन मिले हैं ।
प्राइवेट स्कूल फीस में कैसे करते हैं हेराफेरी? शिक्षा विभाग के फॉर्म 6 में खुली पोल
Private School Fees in Haryana: शिक्षा विभाग ने फीस बढ़ोतरी की सूचना न देने वाले निजी स्कूलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विभाग ने फॉर्म 6 जारी किया है। यह फॉर्म निजी स्कूलों को 31 मई तक भर कर शिक्षा विभाग में जमा कराना है। यदि स्कूल प्रबंधकों ने निर्धारित तिथि तक जमा नहीं कराया तो कार्यवाही की जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी अशोक बघेल ने बताया कि स्कूलों को 2021 से अब तक की फीस और अन्य जानकारी देनी होगी। Form 6 में 2021 से अब तक की स्टाफ सैलरी, प्राइवेट स्कूल फीस स्ट्रक्चर और अन्य खर्चों का पूरा विवरण देना होगा। इसकी जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारियों को सौंपी गई है।
School Fees: पहले दिखाई चालाकी, अब फंसे
विभागीय सूत्रों के मुताबिक स्कूलों का नया सत्र शुरू शुरू होने से पहले ही निजी स्कूलों को फार्म छह भरने के आदेश दिए गए थे। लेकिन स्कूलों ने जो जानकारी दी वह सही नहीं मिली। जिसके बाद विभाग ने दोबारा से MIS Portal खोल दिया। इसके लिए अब फॉर्म 6 का फॉर्मेट जारी किया गया है। नए फॉर्मेट के आधार पर ही स्कूलों को अब फीस की जानकारी देनी होगी। यही नहीं, अब स्कूल स्टाफ की सैलरी वेतन, भत्तों की भी जानकारी देनी होगी। यदि निर्धारित समय में जानकारी नहीं दी गई तो एक्शन लिया जाएगा।
Private School Fees: ऐसे होती है हेराफेरी
पलवल में प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक श्रेणी (प्राइमरी, सेकंडरी, हायर और सीनियर सेकंडरी) के 300 से अधिक स्कूल हैं। शिक्षा विभाग को सूचना मिली है कि निजी स्कूल संचालक फॉर्म 6 में दिखाया गया वेतन स्टाफ को नहीं देते हैं। वे Form 6 में टीचर की सैलरी अधिक दिखाते हैं, और वेतन उन्हें कम दिया जाता है।
ऐसे में स्टाफ के हस्ताक्षर अधिक वेतन पर करा लेते हैं। इसके अतिरिक्त चेक पर भी हस्ताक्षर करा लेते हैं। अभिभावकों से अधिक फीस लेते हैं। फॉर्म छह में कम फीस दिखाते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अशोक बघेल ने बताया कि फॉर्म छह आने के बाद सभी तथ्यों की जांच की जाएगी।
NEET: मेरिट में आने के बाद भी एडमिशन नहीं, एक गलती पड़ सकती है भारी, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे स्टूडेंट्स
NEET में सफल आठ स्टूडेंट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन स्टूडेंट्स ने यूनानी कॉलेज में प्रोविजनल दाखिला लिया था लेकिन आयुष विभाग ने इसे नियमित नहीं किया। स्टूडेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि वह आयुष विभाग को निर्देश दे कि यूनानी कॉलेज में बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (BUMS) कोर्स में उनके दाखिले को नियमित किया जाए। स्टूडेंट्स की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह एक हफ्ते बाद सुनवाई करेगा। इससे पहले स्टूडेंट्स ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से गुहार लगाई थी, जहां से राहत नहीं मिलने के बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।
स्टूडेंट्स ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने नीट क्वालिफाई किया और यूनानी कॉलेज में BUMS कोर्स में 2022-23 सेशन में प्रोविजनल दाखिला लिया। ऐसे में आयुष विभाग, भोपाल को निर्देश दिया जाए कि वह उनके एडमिशन को रेग्युलराइज करे।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनका नाम मेरिट लिस्ट में आया था लेकिन उन्हें रजिस्ट्रेशन और काउंसलिंग के लिए नहीं बुलाया गया। आयुष विभाग ने उनके नाम दाखिले की आखिरी तारीख तक एडमिशन लेटर जारी नहीं किया। इसके बाद उन्होंने यूनानी कॉलेज को अप्रोच किया ताकि उनका प्रोविजनल दाखिला हो सके। जिसके बाद प्रोविजनल एडमिशन लेटर जारी कर दिया गया। बावजूद इसके आयुष विभाग ने उनके दाखिले को रेग्युलराइज नहीं किया है।
अब हर कॉलेज में दी जाएगी CPR ट्रेनिंग, इस बड़े कारण से UGC ने दिया निर्देश
CPR Training in Universities: युवाओं समेत हर उम्र के लोगों में सडन कार्डियक अरेस्ट या अचानक मौत के बढ़ते मामले बड़ी चिंता हैं। हंसते-गाते, खेलते-कूदते और सामान्य दिखने वाला शख्स अचानक गिर जाता है और उसकी मौत हो जाती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए कुछ समय पहले सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की ट्रेनिंग देने का अभियान बड़े स्तर पर शुरू किया। मेडिकल, एजुकेशन समेत सभी संस्थानों में यह अभियान चला।
UGC ने क्या कहा?
अब UGC ने देश की सभी यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों के प्रिंसिपल्स से कहा है कि डॉक्टरों और चिकित्सा बिरादरी के सहयोग से सभी स्टूडेंट्स, फैकल्टी और स्टाफ को बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) की ट्रेनिंग दी जाए।
UGC ने आंकड़े देते हुए कहा है कि देश में केवल 0.1%% लोगों को ही बीएलएस तकनीक की जानकारी है। अब एजुकेशन सेक्टर में बड़े स्तर पर इस ट्रेनिंग को शामिल किया जाना चाहिए। जितने ज्यादा लोगों को यह ट्रेनिंग मिलेगी, उतने अधिक लोगों की जान बचाना संभव हो सकेगा।
छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के परीक्षा परिणाम जारी, हाईस्कूल और हायर सेकंडरी में लड़कियों ने मारी बाजी.. ऐसे करे चेक..
छत्तीसगढ़ राज्य ओपेन स्कूल, रायपुर ने सीजी एसओएस दसवीं और बारहवीं का रिजल्ट जारी कर दिया है. वे कैंडिडेट्स जिन्होंने छत्तीसगढ़ बोर्ड ओपेन स्कूल की 10वीं और 12वीं की परीक्षा दी हो, वे आधिकारिक वेबसाइट से रिजल्ट चेक कर सकते हैं. ऐसा करने के लिए इन दो वेबसाइट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है - sos.cg.nic.in, result.cg.nic.in छत्तीसगढ़ बोर्ड दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में इस बार करीब एक लाख छात्र शामिल हुए हैं.
रविवि सेमेस्टर एग्जाम इस बार भी हो सकता है ऑनलाइन आज कार्यपरिषद की बैठक
रायपुर 3 जून । रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षा इस बार भी ऑनलाइन मोड में हो सकती है । विश्वविद्यालय ने इसकी तैयारी कर ली है । शुक्रवार को रविवि में होने वाली कार्यपरिषद की बैठक में इसी फार्मूले पर मुहर लगने की संभावना है । उधर , दुर्ग विवि की सेमेस्टर परीक्षा ऑनलाइन मोड पर शुरू हो गई है । इसे लेकर माना जा रहा है कि रविवि में भी इसके अनुसार ही परीक्षा होगी । कोरोना संक्रमण की वजह से दो साल से रविवि की परीक्षाएं ऑनलाइन मोड पर चल रही है । पिछली बार वार्षिक परीक्षा के पेपर भी छात्रों ने घर से लिखकर जमा किए । अब सेमेस्टर के लिए भी यही फार्मूला लागू करने की तैयारी है ।
व्यापम ने जारी किए शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम
छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल द्वारा शिक्षक, सहायक शिक्षक एवं व्याख्याता के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा के परिणाम जारी कर दिए गए हैं। अभ्यर्थी व्यापम की वेबसाइट vypam.cgstate.gov.in में अपनी प्रोफाईल में लॉगिन कर परिणाम देख सकते हैं। व्यापम द्वारा ली लिखित परीक्षा में प्राप्त कुल अंकों में अतिथि शिक्षकों के बोनस अंक जोड़कर परीक्षा परिणाम घोषित किए गए हैं।
मेरिट लिस्ट और रिजल्ट देखें -
सहायक शिक्षक (ई. एवं टी. संवर्ग), भर्ती परीक्षा (SEAT23) - 2023 के
Result - vyapamonline.cgstate.gov.in/online/
Merit List - vyapam.cgstate.gov.in/sites/default/files/2023-07/MERIT_ASSISTANT_TEACHER.pdf
शिक्षक (ई. एवं टी. संवर्ग), भर्ती परीक्षा (SEAT23) - 2023 के
Result - vyapamonline.cgstate.gov.in/online/
Merit List - vyapam.cgstate.gov.in/sites/default/files/2022-12/MERIT_TEACHER.pdf
व्याख्याता (वाणिज्य) भर्ती परीक्षा (SEAT23) - 2023 के
Result - vyapamonline.cgstate.gov.in/online/
Merit List - vyapam.cgstate.gov.in/sites/default/files/2023-07/MERIT_LECTURER_COMMERCE.pdf
व्याख्याता (गणित) भर्ती परीक्षा (SEAT23) - 2023 के
Result - vyapamonline.cgstate.gov.in/online/
Merit List - vyapam.cgstate.gov.in/sites/default/files/2023-07/MERIT_LECTURER_MATH.pdf
व्याख्याता (भौतिकी) भर्ती परीक्षा (SEAT23) - 2023 के
Result - vyapamonline.cgstate.gov.in/online/
Merit List - vyapam.cgstate.gov.in/sites/default/files/2023-07/MERIT_LECTURER_PHYSICS.pdf
'जादुई पिटारा' से शिक्षा-दीक्षा
रायपुर । आगामी शिक्षण सत्र 16 जून 2024 से छत्तीसगढ़ के तीन से आठ वर्ष की आयु के सभी बच्चों अर्थात् बालबाड़ी तथा कक्षा 1 व 2 में ‘जादुई पिटारा’ के माध्यम से पढ़ाई-लिखाई कराने की कार्ययोजना और रणनीति बनायी जा रही है ।
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने राज्य के सभी बालबाड़ी शिक्षकों, प्राथमिक शाला के शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक और प्रमुख ‘जादुई पिटारा’ (खेल-आधारित शिक्षण संसाधन प्रणाली) से जुड़ने एवं संसाधनों के आधार पर नवाचार करते हुए आगामी शिक्षा सत्र से दक्षतापूर्वक क्रियान्वयन व संचालन हेतु आव्हान किया है। उन्होंने कहा है कि ‘जादुई पिटारा’ के क्षेत्र में उत्कृष्टता का प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों तथा विशेष सहयोग प्रदान करने वाले स्थानीय लोक कलाकारों, तकनीकी कार्यकर्ता को राज्य स्तर पर उनके योगदान के लिए विशेष रूप से पुरस्कृत किया जायेगा ।
इसी अनुक्रम में - राज्य के सभी प्राथमिक शालाओं के प्रधान पाठकों सहित सभी बीआरसी, सीआरसी और आँगनबाड़ी शिक्षक और कार्यकर्ताओं के प्रारंभिक तौर पर क्षमता विकास और उन्मुखीकरण हेतु राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, छत्तीसगढ़ द्वारा कल दिनांक 2 मई को प्रातः 10 बजे से ऑनलाईनदक्षता विकास हेतु राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के एनसीईआरटी के विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के सहयोग से किया जा रहा है ।
नई शिक्षा नीति-2020 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श करते हुए तथा पंचकोश तैत्तिरीय उपनिषद से प्रेरणा लेते हुए, ‘जादुई पिटारा’ की अवधारणा को शामिल किया गया है और इसमें शारीरिक विकास, सामाजिक,भावनात्मक और नैतिक विकास के लिए मूलभूत चरण के लिए पहचाने गए डोमेन और पाठ्यचर्या लक्ष्यों के साथ विभिन्न कोषों - अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय को शामिल किया गया है ।
शिक्षाशास्त्रियों के अनुसार इस पद्धति से संज्ञानात्मक विकास, भाषा और साक्षरता विकास, सौंदर्य और सांस्कृतिक विकास, और पाठ्यचर्या विकास के आधार के रूप में सकारात्मक सीखने की आदतों का विकास जैसे बुनियादी उद्देश्यों की प्राप्ति की अपेक्षा और आकलन किया गया है।
इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक जे.पी.रथ ने बताया है कि - ‘जादुई पिटारा’ 3-8 आयु समूह के मूलभूत चरण अर्थात् नन्हें विद्यार्थियों के पाठ्यपुस्तक की जगह स्वयं में पाठ्यक्रम या पाठ्यवस्तु है, जो मूलतः खेल-आधारित शिक्षण-शिक्षण की एक किट (बॉक्स)के रूप में स्वीकृत और मानकीकृत होगी । इस किट में खिलौने, पहेलियाँ, कठपुतलियाँ, पोस्टर, फ्लैश कार्ड, वर्कबुक, पोस्टर, शिक्षक की मार्गदर्शिका पुस्तिका आदि शामिल होंगी ।
इसमें प्रत्येक स्कूलों को स्थानीय आधार पर जादुई पिटारा को पाठ्यक्रम को आवश्यकता, संस्कृति, स्थानीय संसाधनों और संदर्भ के अनुसार संशोधित, और बेहत्तर बनाने का विकल्प (छूट) भी दिया जा सकेगा । परिमाण स्वरूप कक्षा शिक्षकों को जादुई पिटारा में इन सामग्रियों के निर्माण हेतु नवाचार कर अपनी उत्कृष्टता को साबित करने का अवसर मिल सकेगा, जिसका परीक्षण और मूल्याँकन कर राज्य स्तर पर भी एक समान लागू करने का प्रयास किया जायेगा । जादुई पिटारा बुनियादी तौर पर रचनात्मक प्रक्रियाओं की एक श्रृंखला को आत्मसात करने के लिए प्राथमिक शाला के शिक्षकों का प्रोत्साहन और उन्हें अवसर उपलब्ध कराना है ताकि वे बच्चे और शिक्षक को भाषा के विकास के लिए खोज-बीन करने, खुलकर बात करने, कहानियाँ पढ़ने, पहेलियाँ सुलझाने का अवसर भी प्राप्त हो सके । बच्चे आलोचनात्मक सोच के लिए परिस्थितियाँ बनाने, अपने खिलौने, कविताएँ, चित्र आदि बनाने के लिए स्वतः प्रोत्साहित हो सकें ।
‘जादुई पिटारा’ योजना की एक मुख्य विशेषता यह भी होगी कि न केवल स्कूल शिक्षा विभाग, शिक्षक, प्रशिक्षक बल्कि विद्यार्थियों के माता-पिता, स्कूल, कला, संस्कृति और तकनीक के क्षेत्र में कार्य करी स्वयंसेवी संस्थाएँ भी स्थानीय खिलौने, खेल और कठपुतलियाँ, स्थानीय स्वाद वाली गतिविधि पुस्तकें, स्थानीय कहानी की किताबें और कार्ड, स्वयं के पोस्टर बनाकर, स्थानीय कविताओं को एकत्रित करके अपना खुद का ‘जादुई पिटारा’ बना कर विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करा सकते हैं ।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, एनसीईआरटी द्वारा जादुई पिटारा को दीक्षा प्लेटफॉर्म-पोर्टल पर भी डिजिटल रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है और डिजिटल सामग्री, डाउनलोड और ऑडियो आदि के लिए इसे पूरी तरह से एक्सेस किया जा सकता है । राज्य शासन के मंशानुरूप स्थानीय एससीआरटी द्वारा ई-जादुई पिटारा निर्माण की कार्ययोजना पर कार्य किया जा रहा है ताकि बच्चे ऑनलाइन जादुई पिटारा का उपयोग कर अपनी समझ विकसित कर सकें ।
जिले के सभी 71 परीक्षा केंद्रों में शांतिपूर्वक ढंग से हुई परीक्षा
अम्बिकापुर । छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा संचालित हायर सेकेंडरी की परीक्षा शुक्रवार से शुरू हो चुकी है। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया है कि हायर सेकण्डरी स्कूल सर्टिफिकेट मुख्य परीक्षा 2024 जिले के 71 परीक्षा केंद्रों में आयोजित हुई, शुक्रवार को हिन्दी विषय की परीक्षा सम्पन्न हुई। कलेक्टर विलास भोस्कर द्वारा परीक्षा में नकल एवं अनैतिक कार्यों आदि साधनों के उपयोग में अंकुश लगाने परीक्षा केन्द्रों के निरीक्षण हेतु उड़नदस्ता दल गठित किया गया है।गठित उडनदस्ता टीम द्वारा शा.उ.मा.वि. कतकालो, बालक करजी, कन्या करजी, बालक दरिमा, खैरबार, सरगंवा, डि.हिलाक्स, सेजेस लखनपुर, कन्या लखनपुर, केदमा, डांडगांव, आदर्श जीवनदीप जजगा, गेरसा, भूसू, बालक सीतापुर, कन्या सीतापुर, क्रिश्चियन सूर्यापारा, कन्या बतौली, बा०लुण्ड्रा में निरीक्षण किया गया। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी अम्बिकापुर द्वारा गठित उड़नदस्ता टीम द्वारा शा. बहु.उ.मा.वि.अम्बिकापुर का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सभी केन्द्रों में परीक्षा शांतिपूर्वक संचालित होना पाया ।