छत्तीसगढ़ / रायपुर
फुलझर मध्यम जलाशय योजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 2.42 करोड़ रुपये स्वीकृत
रायपुर, 01 सितम्बर 2026
छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा जशपुर जिले के विकासखण्ड-बगीचा की गुरगुरी-फुलझर मध्यम जलाशय योजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए दो करोड़ 42 लाख 53 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
जल संसाधन विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। इस योजना के सर्वेक्षण कार्य पूर्ण होने के बाद सिंचाई सुविधा के विस्तार को लेकर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में 1 से 15 सितम्बर 2026 तक आयोजित होगा राज्यव्यापी 'साक्षरता पखवाड़ा
रायपुर, । राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पूरे देश सहित छत्तीसगढ़ में 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर वयस्कों को शिक्षित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से 'उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' (ULLAS) संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (8 सितम्बर) के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 1 से 15 सितम्बर 2026 तक पूरे प्रदेश में 15 दिवसीय राज्यव्यापी 'साक्षरता पखवाड़ा' आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने इस संबंध में समस्त जिला कलेक्टरों एवं जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अध्यक्षों को विस्तृत कार्ययोजना भेजकर जिले में व्यापक जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
साक्षरता पखवाड़े की शुरुआत 1 सितम्बर को समस्त शासकीय कार्यालयों, स्कूलों एवं कॉलेजों में उल्लास शपथ के साथ होगी। इस अभियान के दौरान घर-घर सघन सर्वेक्षण कर 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों और स्वयंसेवी शिक्षकों का उल्लास मोबाइल ऐप के माध्यम से शत-प्रतिशत डिजिटल पंजीयन किया जाएगा। अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों द्वारा 10 असाक्षरों को साक्षर बनाने पर स्थानीय एवं बोर्ड परीक्षा में 10 बोनस अंक देने का विशेष प्रावधान किया गया है, जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। पखवाड़े के शुरुआती दिनों में 'अंगूठे से कलम की ओर' अभियान चलाकर नव-साक्षरों को हस्ताक्षर सिखाया जाएगा तथा शिक्षक दिवस (5 सितम्बर) पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों व समाजसेवियों का सम्मान किया जाएगा।
जन-जागरूकता फैलाने के लिए हाट-बाजारों में नुक्कड़ नाटक, साक्षरता चौपाल, प्रभात फेरी और मशाल रैलियों का आयोजन किया जाएगा। 7 सितम्बर को 'चिट्ठी कलेक्टर के नाम' प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें नव-साक्षर बुजुर्ग एवं महिलाएँ स्वयं हाथ से चिट्ठी लिखकर साक्षरता का संदेश देंगे। 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायत स्तर पर मुख्य समारोह होंगे और सायं 7:00 बजे पूरे राज्य में 'उल्लास साक्षरता दीप' जलाकर सामूहिक संकल्प का प्रदर्शन किया जाएगा। इसी दिन प्रातः 8:00 बजे विद्यार्थियों व नागरिकों द्वारा साक्षरता नारों के साथ विशाल मानव श्रृंखला बनाई जाएगी। इसके अगले दिन 9 सितंबर को नवाचारी शिक्षकों द्वारा उल्लास के शिक्षार्थियों को सीखने सिखाने के लिए मनोरंजन टीएलएम का प्रदर्शन किया जाएगा।
पखवाड़े के अंतिम चरण में वाचन दिवस, महिला साक्षरता पर केंद्रित संगोष्ठी, और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वसहायता समूहों की महिलाओं के लिए विशेष साक्षरता गतिविधियाँ आयोजित होंगी। बैंकों के सहयोग से नागरिकों को स्मार्टफोन चलाने, डिजिटल भुगतान, व्हाट्सऐप उपयोग और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। गणेशोत्सव पंडालों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया पर 'सेल्फी विद नव-साक्षर' के माध्यम से प्रचार किया जाएगा। 15 सितम्बर को समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं व स्वयंसेवी शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा तथा सितम्बर के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाली महापरीक्षा अभियान की अंतिम तैयारी सुनिश्चित की जाएगी।
भूपेश बघेल के पूर्व PA के घर ED की दबिश, दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच जारी
रायपुर । छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व पीए रहे केके चंद्रवंशी के पुरानी भिलाई स्थित आवास पर मंगलवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने छापेमारी की। तड़के दो वाहनों से पहुंचे ईडी अधिकारियों ने घर के अंदर जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिए जवानों की तैनाती भी की गई है।
दो गाड़ियों से पहुंची करीब 8 अधिकारियों की टीम
मिली जानकारी के अनुसार, ईडी के करीब 8 अधिकारी दो वाहनों से केके चंद्रवंशी के निवास पहुंचे। टीम के पहुंचते ही घर के भीतर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी गई। फिलहाल अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और जांच की कार्रवाई जारी है।
किस मामले से जुड़ी है कार्रवाई?
ईडी की इस कार्रवाई को लेकर फिलहाल आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि छापेमारी किस मामले या जांच के सिलसिले में की गई है। टीम द्वारा घर में मौजूद दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ने की संभावना है। हालांकि, छापेमारी की वास्तविक वजह और जांच के दायरे को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल ईडी की टीम केके चंद्रवंशी के आवास पर जांच में जुटी है। कार्रवाई के दौरान क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली है, इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
ईडी की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई किस मामले से संबंधित है और जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है।
अक्षय निधि घट की तरह आत्मा रूपी घट को भी ज्ञान से भरने का करें पुरुषार्थ : मुनि संवेगरत्न सागर
रायपुर । विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास में आत्मकल्याण की भावना से तप-साधना की श्रृंखला जारी है। 31 अगस्त से मुनि संवेगरत्न सागर आदि ठाणा की पावन निश्रा में 16 दिवसीय अक्षय निधि समवशरण विजय कषाय तप का शुभारंभ हुआ। सुबह 8.30 बजे मंगल कलश की स्थापना की गई। इसके बाद आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक- श्राविकाओं ने जिनवाणी का लाभ लिया।
धर्मसभा में मुनि संवेगरत्न सागर ने कहा कि 16 दिनों तक चलने वाले इस तप में प्रतिदिन अक्षय निधि घट को भरने के लिए श्रद्धालु आएंगे और उसमें अक्षत व उत्तम द्रव्य अर्पित करेंगे। इसी तरह मनुष्य को अपनी आत्मा रूपी घट को ज्ञान से भरने का पुरुषार्थ करना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि आत्मा को ज्ञान रूपी वर्षा से नहीं भिगोया तो तप और साधना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। ज्ञान के बिना दर्शन की शुद्धि संभव नहीं है। आत्मा को ज्ञान से रंजित किए बिना भव का सुधार नहीं हो सकता।
मुनिश्री ने कहा कि अक्षय निधि तप केवल द्रव्य और अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भावों के साथ जोड़ना जरूरी है। जब तक आत्मा रूपी घट ज्ञान से नहीं भरेगा, तब तक कषायों पर विजय प्राप्त करना कठिन है। तप को भावों से जोड़कर साधना करने पर ही यह आत्मा को अंतिम लक्ष्य मोक्ष की ओर ले जा सकती है। अपने भीतर अखंड ज्ञान का पुंज लाने का प्रयास ही वास्तविक भव सुधार का मार्ग है।
प्रपंची, प्रलापी और प्रकोपी तीन दोषों से बचें
धर्मसभा में मुनि शाश्वतरत्न सागर ने प्रपंची, प्रलापी और प्रकोपी तीन दोषों से बचने की सीख दी। मुनिश्री ने कहा कि माता-पिता को छल-कपट, झूठ और प्रपंच से दूर रहना चाहिए, क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता को देखकर ही संस्कार ग्रहण करते हैं। शुरुआत से जैसी शिक्षा और वातावरण बच्चों को मिलता है, उनका व्यक्तित्व भी उसी अनुरूप विकसित होता है।
मुनिश्री ने कहा कि अनावश्यक बोलने की आदत यानी प्रलाप संबंधों में कटुता पैदा कर सकती है। इसी प्रकार बात-बात पर क्रोध करने से व्यक्ति प्रकोपी बन जाता है। परिवार में ऐसा व्यवहार करने वाले व्यक्ति के प्रति सम्मान का भाव कम हो जाता है। इसलिए जीवन में इन तीनों दोषों का त्याग कर संयम, मधुर वाणी और शांत व्यवहार को अपनाना चाहिए।
तप में 15 दिन एकासना, 16वें दिन उपवास
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि अक्षय निधि समवशरण विजय कषाय तप के तहत तपस्वी 15 दिनों तक एकासना करेंगे और 16वें दिन उपवास रखेंगे। मंगल कलश स्थापना के साथ तप की विधिवत शुरुआत हुई।
उन्होंने बताया कि अक्षय निधि तप की पूर्णता के बाद 8 दिवसीय मोक्ष तप का शुभारंभ होगा। इसमें तपस्वी 7 दिनों तक लगातार एकासना करेंगे और आठवें दिन उपवास रखेंगे। वर्षावास के दौरान होने वाली इन तप-साधनाओं में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं सहभागी बन रहे हैं।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और खेल संस्कृति ही विकसित भारत की मजबूत नींव : बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर । रायपुर सांसद एवं शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के वरिष्ठ सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन-दीव में आयोजित संसदीय अध्ययन दौरे में शिक्षा और खेल विकास को लेकर व्यापक रणनीतिक मंथन किया।
सांसद अग्रवाल ने राष्ट्रीय पटल पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक अधोसंरचना और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के प्रभावी उपयोग का रोडमैप प्रस्तुत किया। दीव में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सांसद अग्रवाल ने भारत सरकार के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, केंद्र शासित प्रदेश के शिक्षा निदेशालय, नवोदय विद्यालय समिति तथा वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शीर्ष अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया।
CSR फंड से खेल अधोसंरचना का विस्तार
बैठक में अग्रवाल ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया समेत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर जोर देते हुए कहा कि खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए सीएसआर फंड का बड़ा हिस्सा आधुनिक खेल मैदान, सिंथेटिक ट्रैक, उपकरण और प्रशिक्षण केंद्रों के निर्माण में लगाया जाए।
'पीएम श्री' जवाहर नवोदय विद्यालय, दीव का निरीक्षण
अध्ययन प्रवास के दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने दीव स्थित 'पीएम श्री' जवाहर नवोदय विद्यालय का सघन दौरा किया। उन्होंने डिजिटल स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, खेल परिसरों और छात्रावास व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का सफल क्रियान्वयन
अग्रवाल का कहना है कि, 'पीएम श्री' योजना भावी पीढ़ी के सर्वांगीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल है, जिसे हर राज्य के अंतिम छोर तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचाया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ में 'पीएम श्री' और स्कूली शिक्षा को नई गति देने का संकल्प
बैठक के दौरान सांसद अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य को प्रमुखता से रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार की 'पीएम श्री' योजना का लाभ छत्तीसगढ़ के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण के तहत 211 स्कूलों को 'पीएम श्री' के रूप में अपग्रेड कर विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, जिससे राज्य के 2 लाख से अधिक विद्यार्थी सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।
राज्य के स्कूलों में आईसीटी लैब, वोकेशनल ट्रेनिंग और स्मार्ट क्लासरूम के जरिए विद्यार्थियों को 21वीं सदी के कौशल से जोड़ा जा रहा है।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और खेल संस्कृति का विस्तार ही सबसे मजबूत आधार स्तंभ है।
तालाब बना आत्मनिर्भरता का आधार, वैज्ञानिक मत्स्य पालन से कामिनी की आय में हुआ इजाफा
रायपुर । मत्स्य पालन शुरू करने से पहले कामिनी मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर थीं। कृषि कार्य में मेहनत अधिक होने के बावजूद अपेक्षाकृत कम आय प्राप्त होती थी। वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग की नवीन तालाब निर्माण योजना के अंतर्गत उन्हें लगभग 1 हेक्टेयर तालाब निर्माण का लाभ मिला। इसके बाद उन्होंने तालाब का बेहतर उपयोग करते हुए मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाया।विभाग द्वारा उन्हें मत्स्य पालन की वैज्ञानिक तकनीक, तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल के संबंध में आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। विभागीय मार्गदर्शन के अनुसार उन्होंने तालाब में भारतीय प्रमुख कार्प (IMC) प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया। तालाब में लगभग 5 हजार फिंगरलिंग्स का स्टॉकिंग किया गया।
वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ा उत्पादन
कामिनी तालाब में मछलियों के उचित प्रबंधन, पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और समय-समय पर आवश्यक देखभाल पर विशेष ध्यान देती हैं। मत्स्य विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण और तकनीकी सलाह के अनुसार वे तालाब प्रबंधन करती हैं। मछलियों में होने वाली संभावित बीमारियों की पहचान एवं रोकथाम के संबंध में भी उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया है।नियमित देखभाल और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने का परिणाम उनकी आय में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वर्तमान में लगभग 1 हेक्टेयर तालाब से मत्स्य पालन के माध्यम से उन्हें करीब 2 लाख रुपये का वार्षिक लाभ प्राप्त हो रहा है। मत्स्य पालन ने न केवल उनकी आय को बढ़ाया, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया है।
विभागीय मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी
कामिनी का कहना है कि मत्स्य विभाग द्वारा समय-समय पर दिए गए तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज संचयन, मछलियों की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने में काफी सहायता मिली। उनका अनुभव है कि यदि तालाब का सही प्रबंधन करते हुए वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन किया जाए तो सीमित संसाधनों में भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।वर्ष 2022 से मत्स्य पालन करते हुए उन्होंने तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया है। अब उनका लक्ष्य मत्स्य उत्पादन और आय को और बढ़ाना है। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, बेहतर तालाब प्रबंधन और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से वे भविष्य में अपने व्यवसाय को और विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं।
अन्य किसानों के लिए प्रेरक संदेश
कामिनी अन्य किसानों को संदेश देते हुए कहती हैं कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन को आय का लाभदायक साधन बनाया जा सकता है। उनका सफल अनुभव बताता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर, विशेषज्ञों की सलाह अपनाकर और नियमित मेहनत के साथ मत्स्य पालन ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।कामिनी की सफलता आज यह संदेश देती है कि सही योजना, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर मेहनत से एक साधारण तालाब भी आत्मनिर्भरता और समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है।
विष्णु भैया की योजना बनी सावित्री का सहारा, आर्थिक चिंता से मिली राहत
महतारी वंदन की 31वीं किस्त से बढ़ा आत्मविश्वास, सावित्री बोलीं- “हर महीने की मदद बनी आत्मनिर्भरता का संबल”
रायपुर, 31 अगस्त 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना प्रदेश की महिलाओं के लिए आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन रही है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहयोग करने का आत्मविश्वास दे रही है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम अमोरा निवासी श्रीमती सावित्री यादव के जीवन में भी इस योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है।
श्रीमती सावित्री यादव के लिए महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बनी है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित राशि से उनकी छोटी-बड़ी जरूरतें पूरी हो रही हैं और आर्थिक चिंता भी कम हुई है। महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त के रूप में 1,000 रुपये की राशि प्राप्त होने पर उनके चेहरे पर खुशी और संतोष साफ दिखाई दिया।
“विष्णु भैया की यह मदद हमारे जैसे परिवारों के लिए बड़ा सहारा है”
31वीं किस्त मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए श्रीमती सावित्री यादव ने कहा कि हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए बहुत उपयोगी है। उन्होंने बताया कि इस राशि से वे परिवार की जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग करती हैं और संभव होने पर थोड़ी बचत भी कर लेती हैं। इससे उन्हें जरूरत के समय आर्थिक सहारे के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
श्रीमती सावित्री यादव ने कहा, “विष्णु भैया की यह मदद हमारे जैसे परिवारों के लिए बड़ा सहारा है। हर महीने मिलने वाली राशि से घर की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है। महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त मेरे लिए सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि भरोसा और संबल है। इससे परिवार की आर्थिक चिंता कम हुई है और भविष्य को लेकर विश्वास बढ़ा है।”
महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता महिलाओं को आर्थिक निर्णयों में अधिक सक्षम बनाने के साथ उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही है। सावित्री यादव जैसी महिलाओं के लिए योजना की राशि घरेलू जरूरतों में सहयोग का माध्यम बनने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का आधार भी बन रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। महतारी वंदन योजना इसी संकल्प को धरातल पर साकार कर रही है। योजना से जुड़ी महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि नियमित आर्थिक संबल उनके जीवन में स्थायित्व, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की उम्मीद को मजबूत कर रहा है।
महतारी वंदन से महिलाओं को मिला आर्थिक संबल, पूनम धावरिया ने मुख्यमंत्री को कहा—धन्यवाद
रक्षाबंधन से पहले मिली सितंबर की किस्त, पूनम बोलीं—समय पर मिली राशि भाई के उपहार जैसी
रायपुर, 31 अगस्त 2026
महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ आर्थिक रूप से अधिक सक्षम महसूस कर रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सारबहरा निवासी श्रीमती पूनम धावरिया भी इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं। उन्हें महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि प्राप्त हो चुकी है।
राशि प्राप्त होने पर श्रीमती पूनम धावरिया ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें नियमित रूप से प्रत्येक माह आर्थिक सहायता मिल रही है। यह राशि उनके लिए बेहद उपयोगी है और घर-परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक सहारा प्रदान करती है।
समय पर मिली राशि से रक्षाबंधन की खुशी हुई दोगुनी
श्रीमती पूनम धावरिया ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए सितंबर माह की किस्त की राशि अगस्त माह में ही प्रदान की गई है। समय से पहले राशि मिलने से महिलाओं में खुशी का माहौल है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व से पहले राशि मिलना उनके लिए विशेष खुशी की बात है।
उन्होंने भावुक होकर कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर समय से मिली यह राशि उन्हें भाई की ओर से मिले उपहार जैसी महसूस हुई। इस आर्थिक सहायता से पर्व की तैयारियों और आवश्यक घरेलू खर्चों में उन्हें सहूलियत मिली है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
श्रीमती पूनम ने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नियमित रूप से मिलने वाली राशि से महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।
उन्होंने कहा कि योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग महिलाएं अपनी दैनिक जरूरतों, परिवार से जुड़े खर्चों तथा अन्य आवश्यक कार्यों में कर पा रही हैं। इससे उनमें आर्थिक आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।
श्रीमती पूनम धावरिया ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए भरोसे और संबल का माध्यम बन रही है। पूनम धावरिया की कहानी इसी बदलाव की एक झलक प्रस्तुत करती है, जहां समय पर मिली सहायता ने न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद की, बल्कि रक्षाबंधन के पर्व की खुशियों को भी बढ़ाया।
महतारी वंदन की छांव तले सुकृति के सुनहरे कल की नींव
एक छोटी सी बचत, सशक्त भविष्य की बड़ी उड़ान
रायपुर, 31 अगस्त 2026
जब इरादे नेक हों और सोच दूरदर्शी, तो सरकारी सहायता योजनाएं केवल जीवनयापन का साधन नहीं बनतीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की तकदीर बदलने का जरिया बन जाती हैं।छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी श्महतारी वंदन योजनाश् का ऐसा ही एक प्रेरणादायक और अनुकरणीय उदाहरण बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में देखने को मिल रहा है। नारायणपुर नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 8 की निवासी श्रीमती जय ललिता कश्यप ने अपनी 5 वर्षीय लाडली बेटी सुकृति कश्यप के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने की एक अनुठी और सराहनीय मिसाल कायम की है।
*योजना की राशि से बेटी का संवरता बचपन*
अप्रैल 2024 से महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली वित्तीय सहायता को दैनिक खर्चों में उड़ाने के बजाय, जय ललिता और उनके पति गजेंद्र कश्यप ने एक दूरगामी निर्णय लिया। उन्होंने इस राशि का सीधा रुख अपनी बेटी के सुखद भविष्य की ओर मोड़ दिया।
जय ललिता ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि से पोस्ट ऑफिस में बेटी सुकृति के नाम से सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाया और उसमें नियमित रूप से मासिक बचत जमा करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि बेटी के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना हर माता-पिता का सपना होता है।
महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से हमें अपनी बेटी की पढ़ाई और करियर के लिए अभी से एक मजबूत आर्थिक आधार बनाने का अवसर मिला है। आज की यह छोटी-छोटी बचत कल सुकृति के सपनों को पूरा करने में बहुत बड़ी मददगार साबित होगी।
*सुकन्या समृद्धि योजना-बेटियों के सपनों को पंख देने की पहल*
सुकन्या समृद्धि योजना भारत सरकार की एक ऐसी बचत योजना है जो बालिकाओं की शिक्षा, उच्च अध्ययन और शादी के लिए एक निश्चित और सुरक्षित फंड तैयार करती है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता का सुकन्या समृद्धि योजना में पुनर्निवेश (त्मपदअमेजउमदज) कर कश्यप परिवार ने वित्तीय प्रबंधन का एक अनुठा मॉडल पेश किया है।
जय ललिता कश्यप की यह पहल केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की उन माताओं के लिए एक पथ-प्रदर्शन है जो अपनी बेटियों को सशक्त देखना चाहती हैं। सरकारी योजनाओं के मिले इस लाभ का ऐसा रचनात्मक और दूरदर्शी उपयोग बालिकाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
सहकारी समिति की मतदाता सूची पर दावा आपत्ति 2 सितम्बर तक
रायपुर । एटमासफियर रेसिडेंशियल को आपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड लिंगियाडीह की मतदाता सूची का प्रथम प्रकाशन किया गया है। सूची के संबंध में दावा आपत्ति 2 सितम्बर 2026 तक सोसाइटी कार्यालय या कार्यालय उप पंजीयक बिलासपुर में सप्रमाण लिखित में प्रस्तुत कर सकते है। प्राप्त दावों एवं आपत्तियों का निराकरण सोसाइटी कार्यालय मंण 3 सितम्बर को दोपहर 2 बजे से किया जाएगा। सूची का अवलोकन सोसाइटी कार्यालय, कार्यालय उप पंजीयक सहकारी संस्थायें बिलासपुर, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्या. मुख्य शाखा के सूचना पटल पर किया जा सकता है।
आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती : आवेदन 16 सितम्बर तक
रायपुर । एकीकृत बाल विकास परियोजना बिलासपुर शहरी अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र क्र. 59 गणेशनगर चुचुहियापारा एवं क्र. 54 पुराना टंकी के पास तारबहार में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों के लिए 16 सितम्बर 2026 तक ऑनलाईन आवेदन किये जा सकते है। इच्छुक आवेदिका ई-भर्ती ऑनलाईन लिंकhttps://aww.e-bharti.in/ में जाकर अनिवार्य दस्तावेजों की फाइल अपलोड करते हुए आवेदन कर सकती है।
इदवारा बैराज के सर्वेक्षण कार्य के लिए 2.66 करोड़ मंजूर
रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग ने बीजापुर जिले के विकासखंड भैरमगढ़ में सिंचाई सुविधाओं को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित इदवारा बैराज के सर्वेक्षण कार्य के लिए शासन द्वारा 2 करोड़ 66 लाख 70 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस सर्वेक्षण कार्य के पूरा होने से क्षेत्र में जल भंडारण क्षमता और सिंचाई रकबे का सही आकलन हो सकेगा। इस परियोजना के आगे बढ़ने से स्थानीय किसानों को खेती-किसानी के लिए पर्याप्त जल मिलेगा, जिससे बीजापुर जिले के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जनदर्शन में दिव्यांग गौतम को मिली मोटराइज्ड ट्राई साइकिल
रायपुर । शासन की कल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंदों के जीवन में सुविधा के साथ आत्मनिर्भरता की नई राह भी तैयार कर रही हैं। सूरजपुर के संजयनगर, अजबनगर निवासी बचपन से दिव्यांग श्री गौतम सिल को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल मिलने से अब उनके दैनिक जीवन में आवागमन आसान होगा। साथ ही वे रोजगार के छोटे अवसरों से जुड़कर अपनी आजीविका को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
दैनिक आवागमन में हो रही परेशानी को लेकर श्री गौतम ने कलेक्टर श्रीमती रेना जमील से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई थी। उनकी आवश्यकता को देखते हुए कलेक्टर ने समाज कल्याण विभाग को शासन की योजना के तहत आवश्यक कार्यवाही निर्देशों के पालन में समाज कल्याण विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण की गई। इसके बाद कलेक्टर जनदर्शन के दौरान कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने श्री गौतम को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल प्रदान की।ट्राई साइकिल मिलने पर गौतम के चेहरे पर खुशी दिखाई दी। उन्होंने कहा कि अब आने-जाने में काफी सहूलियत होगी। वे छोटे-मोटे रोजगार से जुड़कर अपनी आजीविका को बेहतर बनाने का प्रयास कर सकेंगे। उन्होंने इस सहायता के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
रायपुर के नंदनवन का 50 करोड़ से होगा कायाकल्प
रायपुर । रायपुर जिले के अटारी गांव स्थित नंदनवन को अब एक नए और आकर्षक स्वरूप में पुनर्विकसित किया जाएगा। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों ने मुख्य सचिव श्री विकासशील के समक्ष नंदनवन पुनर्विकास की प्रस्तावित परियोजना का प्रस्तुतिकरण दिया।
’परियोजना की मुख्य बातें’
नंदनवन के कायाकल्प और विकास कार्य में लगभग 50 करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है। पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (च्च्च्) मॉडल के तहत यह पूरी परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (च्च्च्) मॉडल पर आधारित होगी। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बॉटनिकल गार्डन को नए सिरे से पुनर्जीवित और विकसित किया जाएगा। मुख्य सचिव ने परियोजना में पर्यटकों की सुविधा और आकर्षण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न जन-सुविधाएं विकसित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव द्वारा दिए गए समीक्षा बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, छत्क्। के सीईओ श्री चंदन कुमार समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बस्तर की ऐतिहासिक धरोहर दलपत सागर का होगा कायाकल्प
रायपुर । बस्तर की पहचान और जगदलपुर की ऐतिहासिक धरोहर दलपत सागर अब जल्द ही अपने पुराने प्राकृतिक और आकर्षक स्वरूप में लौटेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन तथा जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव और महापौर श्री संजय पाण्डे के सतत प्रयासों से दलपत सागर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसके तहत जगदलपुर नगर निगम और एनएमडीसी नगरनार इस्पात संयंत्र के बीच एमओयू संपन्न हुआ है।
एमओयू के अंतर्गत एनएमडीसी नगरनार द्वारा अपने सीएसआर मद से दलपत सागर के संरक्षण एवं सफाई कार्यों के लिए कुल 50 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से सरोवर में लंबे समय से फैली जलकुंभी को हटाने सहित आवश्यक सफाई और संरक्षण कार्य किए जाएंगे। कार्य के प्रथम चरण के लिए 20 लाख रुपए की पहली किस्त जारी कर दी गई है।
जलकुंभी से मिलेगी मुक्ति, लौटेगा प्राकृतिक स्वरूप
दलपत सागर में लंबे समय से बड़ी मात्रा में फैली जलकुंभी इसकी सुंदरता के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी चुनौती बनी हुई थी। जलकुंभी के कारण जल की सतह का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा था और नागरिकों तथा पर्यावरण प्रेमियों द्वारा इसके समाधान की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही थी। अब एनएमडीसी के सीएसआर सहयोग से नगर निगम द्वारा सुनियोजित एवं चरणबद्ध तरीके से सफाई अभियान चलाया जाएगा।
पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
दलपत सागर केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक विरासत और जगदलपुर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका संरक्षण शहर के पर्यावरण, पर्यटन और नागरिक सुविधाओं तीनों के लिए महत्वपूर्ण है। सरोवर के स्वच्छ और सुंदर होने से शहर की प्राकृतिक आभा बढ़ेगी। इस अवसर पर कलेक्टर, अपर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त तथा एनएमडीसी नगरनार की ओर से अधिशासी निदेशक श्री टीपी सिंह, मुख्य महाप्रबंधक एवं सहायक महाप्रबंधक उपस्थित रहे।
बस्तर की ‘ज्ञानगुड़ी’ से निकले चार हीरे, पहले ही राउंड में एमबीबीएस सीट हासिल कर बढ़़ाया गौरव
रायपुर । छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो केवल उन्हें सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराने की। बस्तर जिला प्रशासन द्वारा इसी सोच के साथ संचालित निःशुल्क ‘ज्ञानगुड़ी’ कोचिंग संस्थान आज प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभर रहा है। संस्थान के चार होनहार विद्यार्थियों ने नीट की काउंसलिंग के पहले ही राउंड में शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट हासिल कर बस्तर का नाम रोशन किया है।
ज्ञानगुड़ी के विद्यार्थियों की यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उपलब्धि उन युवाओं ने हासिल की है, जो बस्तर के दूरस्थ अंचलों से आते हैं और जिन्हें बेहतर उच्च शिक्षा के लिए महानगरों जैसी सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध नहीं थीं। जिला प्रशासन की पहल, शिक्षकों के समर्पित प्रयास और विद्यार्थियों की कठिन मेहनत ने इन परिस्थितियों को अवसर में बदल दिया।
चार विद्यार्थियों को मिली एमबीबीएस में प्रवेश की सफलता के तहत समीर मरकाम और गीतेश्वरी सलाम का चयन शासकीय मेडिकल कॉलेज, डिमरापाल जगदलपुर, कुमारी कृष्णा सेन का कांकेर मेडिकल कॉलेज तथा खुशबू बिस्वास का पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में हुआ है। पहले ही राउंड में शासकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिलना विद्यार्थियों की उत्कृष्ट तैयारी और ज्ञानगुड़ी की प्रभावी शैक्षणिक व्यवस्था का प्रमाण है।
90 में से 50 विद्यार्थियों ने नीट में पाई सफलता
ज्ञानगुड़ी की उपलब्धि केवल चार एमबीबीएस चयन तक सीमित नहीं है। संस्थान में अध्ययनरत 90 विद्यार्थियों में से 50 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है। इनमें से चार विद्यार्थियों ने काउंसलिंग के पहले ही चरण में सीधे एमबीबीएस की सीट हासिल की है। यह परिणाम बताता है कि यदि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, अध्ययन सामग्री और निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, तो वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी किसी से पीछे नहीं हैं।
सफल विद्यार्थियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर बस्तर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा से सौजन्य मुलाकात की। विद्यार्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय जिला प्रशासन के निरंतर सहयोग और कलेक्टर के मार्गदर्शन को दिया। कलेक्टर श्री छिकारा ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनकी उच्च शिक्षा में डिजिटल अध्ययन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी सफल विद्यार्थियों को टैबलेट भेंट किए। उन्होंने विद्यार्थियों, उनके शिक्षकों और अभिभावकों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि बस्तर की नई पीढ़ी की क्षमता और संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने विद्यार्थियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वापस बस्तर लौटें और यहां के जरूरतमंद लोगों की सेवा में अपना योगदान दें।
पिन-पॉइंट मार्गदर्शन से मिली सफलता की राह
सफल विद्यार्थियों ने बताया कि पूरे वर्ष कलेक्टर श्री छिकारा द्वारा ज्ञानगुड़ी में दिए गए अध्ययन संबंधी पिन-पॉइंट सुझावों ने उनकी तैयारी की रणनीति को मजबूत किया। उन्होंने समय प्रबंधन, विषयवार तैयारी, नियमित अभ्यास और परीक्षा के अनुरूप रणनीति बनाने पर विशेष मार्गदर्शन प्राप्त किया। स्वयं कलेक्टर एवं अन्य अधिकारी लगातार ज्ञानगुड़ी केंद्र का दौरा कर विद्यार्थियों से संवाद करते रहे हैं। वे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई तथा यूपीएससी की तैयारी के व्यावहारिक अनुभवों से भी प्रेरित करते रहे हैं।
बस्तर में अवसरों की नई इबारत लिख रही ज्ञानगुड़ी
ज्ञानगुड़ी की सफलता यह संदेश देती है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सही मार्गदर्शन को यदि जिला स्तर तक पहुंचाया जाए, तो दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी भी डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य प्रतिष्ठित पेशेवर बनने का सपना साकार कर सकते हैं। बस्तर के विद्यार्थियों को उनके ही क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना स्थानीय प्रतिभाओं को पलायन से रोकने और उन्हें अपने क्षेत्र के विकास से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
जशपुर में आधुनिक फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए 5.49 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति
रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जशपुर जिले में खेल अधोसंरचना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला मुख्यालय जशपुर में आधुनिक फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 5 करोड़ 49 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरूण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण से जशपुर जिले के खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही, स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी खेल प्रतिभा निखारने और जिला स्तर से आगे बढ़कर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए बेहतर मंच मिलेगा।
जशपुर जिले में फुटबॉल के प्रति खिलाड़ियों और युवाओं में विशेष उत्साह एवं रुचि को देखते हुए यह स्टेडियम खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे जिले में नियमित प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और खेल आयोजनों के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध होगी।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा जशपुर जिले में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और खेल सुविधाओं के विस्तार पर लगातार जोर दिया जा रहा है। फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए मिली यह स्वीकृति जिले में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।