छत्तीसगढ़ / रायपुर
विकसित भारत-जी राम जी एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश
लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत कार्य समय-सीमा में पूरा करें, लापरवाही पर होगी कार्रवाई – संभागायुक्त श्री दुग्गा
सरगुजा संभागायुक्त श्री नरेन्द्र दुग्गा ने ली योजनाओं की समीक्षा बैठक
रायपुर, अगस्त 2026


सरगुजा संभागायुक्त श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने शुक्रवार को संभागायुक्त कार्यालय के सभाकक्ष में विकसित भारत-जी राम जी एवं प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सहित ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की संभागस्तरीय समीक्षा की। बैठक में योजनाओं की प्रगति, निर्धारित लक्ष्यों के विरुद्ध उपलब्धियां, लंबित प्रकरणों के निराकरण तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
छत्तीसगढ़ शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव एवं विकसित भारत-जी राम जी के अपर आयुक्त श्री एस. आलोक ने जिलेवार आबंटित लक्ष्यों एवं प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने विभिन्न कार्यों की विस्तारपूर्वक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
*योजनाओं का लाभ हर व्यक्ति, हर घर और हर गांव तक पहुंचाना प्राथमिकता*
संभागायुक्त श्री दुग्गा ने कहा कि सरगुजा संभाग अनुसूचित जनजाति क्षेत्र है और यहां शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी जनपद पंचायतों के सीईओ को निर्देशित किया कि शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को जनपद स्तर एवं मैदानी अमले के कार्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।
*मानव दिवस सृजन बढ़ाने और जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता*
बैठक में विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत जुलाई एवं अगस्त माह में सृजित मानव दिवस तथा पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में मानव दिवस सृजन की स्थिति की समीक्षा की गई। संभागायुक्त ने जिन क्षेत्रों में मानव दिवस सृजन अपेक्षाकृत कम है, वहां विशेष प्रयास कर निर्धारित लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विद्यालयों में आवश्यकतानुसार शौचालय निर्माण, मुक्तिधामों में प्रतीक्षालय एवं शेड निर्माण तथा जल संरक्षण एवं जल संचयन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने कहा। वर्षा जल के संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए आवश्यक कार्य समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए।
ग्राम पंचायतों में स्वीकृत कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने शेष कार्यों को शीघ्र स्वीकृत कर समय पर पूर्ण कराने कहा। बैठक में विभिन्न बोरवेल रिचार्ज कार्यों की स्वीकृति, महात्मा गांधी नरेगा के अपूर्ण कार्यों को पूर्ण कराने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के हितग्राहियों को 90 मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराने की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
*अपूर्ण आवासों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश*
अपर आयुक्त श्री एस. आलोक ने विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत अपूर्ण आवासों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने युक्तधारा में प्लान किए गए कार्यों की स्थिति की जानकारी लेते हुए कार्यों की नियमित निगरानी पर जोर दिया।
संभागायुक्त ने सिक्योर पोर्टल के माध्यम से कार्यों की स्वीकृति, प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्वीकृत कार्यों की स्थिति, एसएनए-स्पर्श के माध्यम से भुगतान, इस वर्ष स्वीकृत एवं रोपित पौधों की संख्या तथा एनएमएमएस के माध्यम से श्रमिकों की उपस्थिति की समीक्षा की। लंबित ई-केवाईसी तथा शून्य प्रविष्टि वाले मस्टर रोल के मामलों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मैदानी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने कहा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की सराहना करते हुए उन्होंने अपेक्षाकृत कम प्रगति वाले जिलों को कार्यों में तेजी लाकर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
*प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सहित अन्य आवास योजनाओं की समीक्षा*
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, विशेष परियोजना एवं पीएम जनमन योजना के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध स्वीकृत एवं पूर्ण आवासों की जिलेवार प्रगति की समीक्षा की गई। संभागायुक्त ने शेष आवासों की स्वीकृति सात दिवस के भीतर पूर्ण करने तथा अपूर्ण आवासों को शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए।
स्वीकृत आवासों के विरुद्ध प्रथम किस्त के लंबित प्रकरणों और भुगतान की स्थिति की जानकारी लेते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण करने कहा गया। आवास सॉफ्ट में अपात्र किए गए हितग्राहियों, जॉब कार्ड तथा विभिन्न योजनाओं के अभिसरण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। ए, बी एवं सी श्रेणी के प्रकरणों को आवास सॉफ्ट में चिन्हांकित कर उनके निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
*पात्र हितग्राहियों को समय पर मिले प्रशिक्षण और योजनाओं का लाभ*
संभागायुक्त श्री दुग्गा ने आर-सेटी एवं आरएमटी के अंतर्गत प्रशिक्षण की स्थिति, प्रगति एवं लंबित प्रकरणों की जानकारी ली। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को समय पर प्रशिक्षण एवं योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास से जुड़ी सभी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। इसलिए योजनाओं के क्रियान्वयन में गति, गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ मैदानी स्तर पर नियमित निगरानी जरूरी है। उन्होंने सभी जिला एवं जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को विकसित भारत-जी राम जी एवं आवास योजनाओं के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए टीम भावना के साथ समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में उपायुक्त श्री आर.के. खूंटे, सरगुजा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री रोमा श्रीवास्तव, जशपुर सीईओ श्री अभिषेक कुमार, बलरामपुर सीईओ श्री आशुतोष चतुर्वेदी, एमसीबी सीईओ श्रीमती अंकिता सोम, कोरिया सीईओ श्री योगेंद्र श्रीवास सहित सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उपस्थित रहे।
कोरिया में 174 किसानों को मिला 1020 बैग उन्नत मत्स्य बीज
रायपुर । ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों तथा महिला स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ाने की दिशा में कोरिया जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन के प्रयासों से वीबी-ग्राम-जी योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) एवं मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिले के 174 किसानों को 1020 बैग उन्नत मत्स्य बीज वितरित किए गए।
आजीविका डबरियों में मत्स्य पालन से बढ़ेगी महिलाओं की आय’
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से बिहान महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों को ‘आजीविका डबरी योजना’ से जोड़ा गया है। योजना के तहत निर्मित डबरियों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के निर्देश पर मत्स्य विभाग द्वारा हितग्राहियों को अनुदान आधारित मत्स्य बीज उपलब्ध कराया गया। कुल 174 हितग्राहियों में 68 आजीविका डबरी हितग्राही तथा 106 अन्य किसान शामिल हैं। अन्य हितग्राहियों के पास तालाब, अमृत सरोवर अथवा व्यक्तिगत डबरी उपलब्ध है। मत्स्य पालन से इन्हें कृषि के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
बैकुंठपुर और सोनहत में हुआ मत्स्य बीज वितरण’
मत्स्य बीज वितरण कार्यक्रम विकासखंड बैकुंठपुर के गेज प्रक्षेत्र तथा विकासखंड सोनहत के अमहर प्रक्षेत्र में आयोजित किया गया। योजना के तहत हितग्राहियों द्वारा मात्र 140 रुपये प्रति बैग की दर से स्वैच्छिक अंशदान राशि जमा कराई गई। जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए क्लस्टर लेवल एप्रोच तैयार की जा रही है। इसके तहत मत्स्य उत्पादक किसानों एवं महिला समूहों के क्लस्टर बनाकर उन्हें बड़े व्यापारियों और बाजारों से सीधे जोड़ा जाएगा।
इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उत्पादकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। सामूहिक रूप से मत्स्य उत्पादन एवं विपणन को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। जिला प्रशासन की इस पहल से कृषि, महिला स्व-सहायता समूहों और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती भी मिलेगी।
जशपुर में होमस्टे पर्यटन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल में जशपुर जिले में पर्यटन विकास को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों एवं प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विकसित किए जा रहे होमस्टे अब स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय का नया माध्यम बनने के साथ ही जशपुर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।
जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरे गांव में विकसित ग्रामीण होमस्टे ने विशेष पहचान बनाई है। यहां 4 फरवरी 2026 को अंतरिक्ष यात्री एवं अशोक चक्र से सम्मानित ग्रुप कैप्टन श्री शुभांशु शुक्ला तथा 4 अप्रैल 2026 को राज्यपाल श्री रमेन डेका ने होमस्टे का अवलोकन किया। दोनों विशिष्ट अतिथियों ने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार व्यंजनों का स्वाद लिया और स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन तथा आतिथ्य परंपरा का अनुभव किया। इससे ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान मिली है।.
केरे गांव को बनाया जा रहा मॉडल कम्युनिटी टूरिज्म विलेज
जशपुर में ग्रामीण एवं सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए Homestays of India टीम द्वारा जिला प्रशासन के साथ मिलकर निरंतर कार्य किया जा रहा है। 25 जनवरी 2026 को Homestays of India, छत्तीसगढ़ सरकार एवं जशपुर जिला प्रशासन के बीच हुए समझौते के तहत केरे गांव को मॉडल कम्युनिटी टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित करने की पहल की गई है।
इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को केवल पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराने तक सीमित न रखते हुए उन्हें स्थानीय ग्रामीण जीवन, खान-पान, परंपराओं, संस्कृति और प्रकृति से सीधे जोड़ना है। इससे पर्यटन का लाभ सीधे ग्रामीण समुदाय तक पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर
जिले में वर्तमान में केरे, छिछली र, दनगरी, मयाली और घोघरा (बलाझार) सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों पर होमस्टे विकसित एवं सूचीबद्ध हैं। इन होमस्टे के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आवास एवं आतिथ्य सेवाओं के साथ स्थानीय भोजन, गाइडिंग, प्रकृति भ्रमण और अन्य पर्यटन गतिविधियों से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।पर्यटकों के बढ़ते रुझान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण एवं ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को कम करने में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
प्रकृति और संस्कृति से जुड़ी पर्यटन गतिविधियां
जशपुर के होमस्टे पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा अवसर प्रदान कर रहे हैं। यहां ट्रेकिंग, नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग, कैंपिंग, रॉक क्लाइंबिंग, ग्राम भ्रमण, कृषि कार्यों में सहभागिता, पारंपरिक भोजन एवं जनजातीय संस्कृति का अनुभव जैसी गतिविधियां उपलब्ध हैं।इन गतिविधियों के माध्यम से पर्यटक जशपुर के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ यहां की लोक परंपराओं, खान-पान, रहन-सहन और सामुदायिक जीवन को करीब से जान पा रहे हैं।
जशपुर की पहचान को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर पहुंचाने की दिशा में कदम
जशपुर अपनी हरी-भरी वादियों, पहाड़ों, जलप्रपातों, नदियों, जंगलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के कारण छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। होमस्टे मॉडल ने इस पर्यटन विकास को स्थानीय आजीविका से जोड़कर इसे अधिक समावेशी और टिकाऊ स्वरूप प्रदान किया है।जिला प्रशासन की इन पहलों से जशपुर में पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक सीमित न रहकर ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय उद्यमिता और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम बन रहा है। आने वाले समय में होमस्टे एवं सामुदायिक पर्यटन के विस्तार से जशपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के और अधिक अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा से की सौजन्य भेंट
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण को लेकर हुई चर्चा
दूरस्थ और जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर
रायपुर ,अगस्त 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा से उनके स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम की जानकारी ली और उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं के विस्तार तथा केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति को लेकर सार्थक चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का विशेष फोकस इस बात पर है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को उसके निकट ही गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं तक स्वास्थ्य तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ, वनांचल एवं जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। राज्य सरकार इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, चिकित्सकीय सेवाओं की उपलब्धता और आधुनिक उपचार सुविधाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाने की दिशा में प्राथमिकता से कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा को प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, गंभीर बीमारियों के उपचार, स्वास्थ्य बीमा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में व्यापक बदलाव आया है। आयुष्मान भारत सहित केंद्र सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं से जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिली है। छत्तीसगढ़ सरकार भी केंद्र की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी तथा विशेष रूप से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के नागरिकों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य तेजी से पूरा होगा।
सिर्री में 4.66 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा नवीन शासकीय महाविद्यालय भवन
रायपुर । छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरूद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिर्री में नवीन शासकीय महाविद्यालय की स्थापना को उच्च शिक्षा की बड़ी सौगात के रूप में मंजूरी मिली है। इस कॉलेज के खुलने से स्थानीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा
नवीन शासकीय महाविद्यालय, सिर्री के भवन निर्माण हेतु 4.66 करोड़ रुपये स्वीकृतिछत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा धमतरी जिले के कुरूद विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सिर्री में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। वर्ष 2026-27 के मूल बजट में प्रावधानित नवीन शासकीय महाविद्यालय, सिर्री के भवन निर्माण हेतु लगभग 4.66 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
प्रदेश के 22 शासकीय महाविद्यालयों के भवन निर्माण को मंजूरी
राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के तहत प्रदेश के कुल 22 शासकीय महाविद्यालयों के भवन निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई है, जिसमें सिर्री का महाविद्यालय भी शामिल है। इस निर्माण कार्य से सिर्री सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए एक सुविधायुक्त और आधुनिक वातावरण उपलब्ध होगा।
ग्रामीण छात्रों के लिए सुलभ होगी उच्च शिक्षा
नवीन महाविद्यालय भवन का निर्माण मानक प्राक्कलन के आधार पर किया जाएगा। इस पहल से स्थानीय विद्यार्थियों को घर के निकट ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। दूरदराज के क्षेत्रों में जाने से होने वाली आवागमन की समस्याओं और अतिरिक्त वित्तीय बोझ से मुक्ति मिलेगी। क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता और युवाओं के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा। कुरूद विधायक श्री अजय चंद्राकर ने कहा कि क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं और शिक्षा के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है। इस निर्णय से क्षेत्र में उच्च शिक्षा का दायरा और व्यापक होगा।
निर्माण कार्य के गुणवत्तापूर्ण पर विशेष ध्यान
कलेक्टर ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए मजबूत अधोसंरचना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रशासकीय स्वीकृति से जिले के शैक्षणिक ढांचे को मजबूती मिलेगी। जिला प्रशासन शासन की मंशा के अनुसार निर्माण कार्य के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान देगा।छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल से सिर्री और समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए उज्ज्वल भविष्य और बेहतर शैक्षणिक अवसरों के नए द्वार खुलेंगे।
बाल विवाह रोककर प्रशासन ने बचाया नाबालिग का भविष्य
रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बाल अधिकारों की सुरक्षा और बाल विवाह की रोकथाम के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में सुकमा जिले के तोंगपाल क्षेत्र में प्रशासन की तत्परता से एक 16 वर्षीय बालिका का बाल विवाह रुकवाकर उसे सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया गया।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची संयुक्त टीम
सुकमा जिले के मासापारा कावराकोपा क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने दोनों पक्षों को बाल विवाह से होने वाले नुकसान और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी। समझाइश के बाद युवक पक्ष ने विवाह स्थगित करने पर सहमति जताई।
बालिका की सुरक्षा को दी सर्वाेच्च प्राथमिकता
जानकारी के अनुसार सुकमा जिले के महारापारा हमीरगढ़ निवासी 16 वर्षीय बालिका को विवाह के उद्देश्य से युवक अपने साथ लेकर आया था। प्रशासनिक टीम ने बालिका की सुरक्षा और सर्वाेत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए उसे उसके गृहग्राम पहुंचाया। वहां परिजन उपस्थित नहीं मिलने पर बालिका को सुरक्षित रूप से सुकमा लाया गया। बाल कल्याण समिति के समक्ष आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने तक उसे सखी सेंटर में सुरक्षित आश्रय दिया गया है। कार्रवाई के दौरान घोषणा-पत्र लिया गया और पंचनामा तैयार किया गया। संबंधित पक्षों को बाल विवाह करने पर होने वाली वैधानिक कार्रवाई से भी अवगत कराया गया।
बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुकमा और जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, चाइल्ड लाइन परियोजना समन्वयक सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्राम सचिव और रोजगार सहायक शामिल रहे।
प्रशासन की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई ने न केवल एक नाबालिग बालिका को बाल विवाह से बचाया, बल्कि उसके सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जिले में बाल अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह की रोकथाम और सुरक्षित बचपन के लिए प्रशासन लगातार सक्रियता से कार्य कर रहा है।
नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता के बाद बस्तर में विकास की नई गति : मुख्यमंत्री श्री साय
नई औद्योगिक नीति से निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को मिला नया विस्तार
नवा रायपुर बन रहा शिक्षा और नई तकनीक का उभरता केंद्र
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से चेन्नई के पत्रकारों के दल ने की सौजन्य भेंट
रायपुर, अगस्त 2026
लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास की दौड़ में पीछे रहे बस्तर में अब शांति, विश्वास और विकास का नया दौर शुरू हुआ है। सुरक्षा के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, रोजगार और आजीविका के क्षेत्र में तेजी से काम किया जा रहा है। बस्तर की प्राकृतिक संपदा, संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं को विकास से जोड़कर क्षेत्र के लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाना हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पत्र सूचना कार्यालय, चेन्नई के निदेशक श्री पी. अरुण कुमार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए चेन्नई के पत्रकारों के दल से चर्चा के दौरान यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पत्रकारों से छत्तीसगढ़ में विकास की बदलती तस्वीर, बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलता के बाद तेज हुई विकास गतिविधियों, राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति, निवेश एवं रोजगार की संभावनाओं तथा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे विस्तार पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद ने बस्तर के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित किया। दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय लोगों के बढ़ते विश्वास से बस्तर तेजी से शांति और विकास की ओर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी नक्सलवाद के कारण शासन की पहुंच कठिन थी, वहां आज विकास की योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। सुरक्षा कैंपों के आसपास के गांवों में ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, राशन, बैंकिंग और आजीविका की सुविधाओं में वृद्धि हुई है। सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत करना नहीं, बल्कि बस्तर में विकास और समृद्धि की ऐसी मजबूत नींव तैयार करना है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बेहतर हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों, वन संपदा, जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं की विशिष्ट पहचान है। शांति स्थापित होने के साथ पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के लिए नए अवसर बन रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि बस्तर की विशिष्टताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले तथा पर्यटन से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर सृजित हों।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पत्रकारों को राज्य में औद्योगिक विकास की संभावनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन और कृषि संपदा से समृद्ध होने के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर है। राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में रोजगार सृजन, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन और नए एवं उभरते क्षेत्रों के उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सरल प्रक्रियाओं और उद्योग अनुकूल वातावरण के कारण देश-विदेश के निवेशकों का छत्तीसगढ़ के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि राज्य अब परंपरागत उद्योगों तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, फार्मास्युटिकल, टेक्सटाइल और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। पर्याप्त विद्युत उपलब्धता, मजबूत अधोसंरचना, देश के मध्य में भौगोलिक स्थिति और बेहतर कनेक्टिविटी छत्तीसगढ़ को निवेश के लिए अनुकूल बनाती है। सरकार का विशेष जोर ऐसे निवेश पर है, जिससे प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर तैयार हों।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि रायपुर और नवा रायपुर देश के महत्वपूर्ण एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो रहे हैं। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के इन संस्थानों की उपलब्धता से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर अपने ही राज्य में मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार पर भी लगातार काम कर रही है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक कदम उठाए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति तक पहुंचे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने चेन्नई से आए पत्रकारों को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कोसा फैब के शॉल भेंट कर सम्मानित किया। पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को तमिलनाडु के प्रसिद्ध महाबलीपुरम मंदिर की प्रतिकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ में समावेशी विकास और आधुनिकता से संवर रहा युवाओं का भविष्य
रायपुर । राज्य में उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ऐतिहासिक और दूरगामी कदम उठाए जा रहे हैं। बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन तक, प्रदेश का उच्च शिक्षा क्षेत्र एक बड़े सकारात्मक बदलाव का साक्षी बन रहा है। क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने के लिए सुदूर एवं ग्रामीण अंचलों में नए महाविद्यालयों की स्थापना के साथ-साथ संचालित संस्थानों में नए संकायों और विषयों की शुरुआत की जा रही है। इसके अतिरिक्त, बढ़ती छात्र संख्या को ध्यान में रखते हुए सीटों में वृद्धि की स्वीकृति भी दी गई है।अधोसंरचना और डिजिटल क्लासरूम का विस्तार
अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण के तहत भवनविहीन महाविद्यालयों के लिए नए भवनों का निर्माण, पुरानी इमारतों का संधारण और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया जा रहा है। पठन-पाठन को तकनीक से जोड़ने के लिए कक्षाओं को स्मार्ट और ई-क्लासरूम में बदला जा रहा है, जहाँ कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और वाई-फाई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नैक मूल्यांकन पर जोर
प्रदेश के शासकीय, निजी एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों में स्नातक स्तर (BA, B.Com, B.Sc, BBA, BCA) पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) लागू की जा चुकी है। पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय (बिलासपुर) और इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय (खैरागढ़) में वर्ष 2025 से तथा सत्र 2025-26 से चार वर्षीय B.Ed, प्राच्य संस्कृत और B.P.Ed में भी इसे लागू करने का निर्णय लिया गया है।
मानसिक स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास
विद्यार्थियों के करियर मार्गदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महाविद्यालयों में करियर एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ की स्थापना और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है। साथ ही, आदर्श शिक्षक-छात्र अनुपात बनाए रखने के लिए नए पदों का सृजन किया जा रहा है। अकादमिक कैलेंडर में खेलकूद, NSS, NCC, यूथ रेडक्रॉस और योग जैसी गतिविधियों को भी अनिवार्य किया गया है।राज्य सरकार की ये बहुआयामी नीतियां केवल महाविद्यालयों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता, अधोसंरचना, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को एक साथ समृद्ध करने का भागीरथ प्रयास हैं। रूसा की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दूरदर्शी प्रावधानों से प्रदेश का उच्च शिक्षा क्षेत्र आज एक स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रहा है, जो हमारे युवाओं को वैश्विक मंच पर सफलता के नए कीर्तिमान रचने के योग्य बनाएगा।
वामनराव बलिराम लाखे की पुण्यतिथि पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने किया सादर नमन
रायपुर । छत्तीसगढ़ में सहकारिता के जनक, महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजसेवी वामनराव बलिराम लाखे जी की पुण्यतिथि पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने उन्हें सादर नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि वामनराव लाखे जी ने अपना जीवन राष्ट्रसेवा, समाज सुधार और सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए समर्पित किया। उन्होंने किसानों, श्रमिकों और आमजन को संगठित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सहकारिता की मजबूत नींव रखने में वामनराव लाखे जी का योगदान अविस्मरणीय है। उनके प्रयासों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और लोगों में सहयोग एवं सामूहिक विकास की भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में वामनराव लाखे जी का योगदान और समाज के प्रति उनकी सेवा भावना सदैव प्रेरणादायी रहेगी। उनके विचार आज भी सहकारिता के माध्यम से जनकल्याण और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।वित्त मंत्री ने वामनराव बलिराम लाखे जी की पुण्यतिथि पर उनके त्याग, संघर्ष और योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी से की नई दिल्ली में सौजन्य भेंट
रायपुर 21 अगस्त 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच विभिन्न समसामयिक विषयों पर आत्मीय चर्चा हुई।
जशपुर में होमस्टे पर्यटन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती
जिला प्रशासन की पहल रंग लाई, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन का अनुभव लेने पर्यटकों का बढ़ रहा रुझान
रायपुर, 21 अगस्त 2026




मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल में जशपुर जिले में पर्यटन विकास को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों एवं प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विकसित किए जा रहे होमस्टे अब स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय का नया माध्यम बनने के साथ ही जशपुर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।
जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरे गांव में विकसित ग्रामीण होमस्टे ने विशेष पहचान बनाई है। यहां 4 फरवरी 2026 को अंतरिक्ष यात्री एवं अशोक चक्र से सम्मानित ग्रुप कैप्टन श्री शुभांशु शुक्ला तथा 4 अप्रैल 2026 को राज्यपाल श्री रमेन डेका ने होमस्टे का अवलोकन किया। दोनों विशिष्ट अतिथियों ने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार व्यंजनों का स्वाद लिया और स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन तथा आतिथ्य परंपरा का अनुभव किया। इससे ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान मिली है।
केरे गांव को बनाया जा रहा मॉडल कम्युनिटी टूरिज्म विलेज
जशपुर में ग्रामीण एवं सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए Homestays of India टीम द्वारा जिला प्रशासन के साथ मिलकर निरंतर कार्य किया जा रहा है। 25 जनवरी 2026 को Homestays of India, छत्तीसगढ़ सरकार एवं जशपुर जिला प्रशासन के बीच हुए समझौते के तहत केरे गांव को मॉडल कम्युनिटी टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित करने की पहल की गई है।
इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को केवल पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराने तक सीमित न रखते हुए उन्हें स्थानीय ग्रामीण जीवन, खान-पान, परंपराओं, संस्कृति और प्रकृति से सीधे जोड़ना है। इससे पर्यटन का लाभ सीधे ग्रामीण समुदाय तक पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर
जिले में वर्तमान में केरे, छिछली र, दनगरी, मयाली और घोघरा (बलाझार) सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों पर होमस्टे विकसित एवं सूचीबद्ध हैं। इन होमस्टे के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आवास एवं आतिथ्य सेवाओं के साथ स्थानीय भोजन, गाइडिंग, प्रकृति भ्रमण और अन्य पर्यटन गतिविधियों से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
पर्यटकों के बढ़ते रुझान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण एवं ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को कम करने में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
प्रकृति और संस्कृति से जुड़ी पर्यटन गतिविधियां
जशपुर के होमस्टे पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा अवसर प्रदान कर रहे हैं। यहां ट्रेकिंग, नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग, कैंपिंग, रॉक क्लाइंबिंग, ग्राम भ्रमण, कृषि कार्यों में सहभागिता, पारंपरिक भोजन एवं जनजातीय संस्कृति का अनुभव जैसी गतिविधियां उपलब्ध हैं।
इन गतिविधियों के माध्यम से पर्यटक जशपुर के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ यहां की लोक परंपराओं, खान-पान, रहन-सहन और सामुदायिक जीवन को करीब से जान पा रहे हैं।
जशपुर की पहचान को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर पहुंचाने की दिशा में कदम
जशपुर अपनी हरी-भरी वादियों, पहाड़ों, जलप्रपातों, नदियों, जंगलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के कारण छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। होमस्टे मॉडल ने इस पर्यटन विकास को स्थानीय आजीविका से जोड़कर इसे अधिक समावेशी और टिकाऊ स्वरूप प्रदान किया है।
जिला प्रशासन की इन पहलों से जशपुर में पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक सीमित न रहकर ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय उद्यमिता और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम बन रहा है। आने वाले समय में होमस्टे एवं सामुदायिक पर्यटन के विस्तार से जशपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के और अधिक अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
बाल विवाह रोककर प्रशासन ने बचाया नाबालिग का भविष्य
16 वर्षीय बालिका को सुरक्षित रेस्क्यू कर रुकवाया विवाह, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल को मिल रहा जमीनी रूप
रायपुर, 21 अगस्त 2026

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बाल अधिकारों की सुरक्षा और बाल विवाह की रोकथाम के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में सुकमा जिले के तोंगपाल क्षेत्र में प्रशासन की तत्परता से एक 16 वर्षीय बालिका का बाल विवाह रुकवाकर उसे सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया गया।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची संयुक्त टीम
सुकमा जिले के मासापारा कावराकोपा क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने दोनों पक्षों को बाल विवाह से होने वाले नुकसान और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी। समझाइश के बाद युवक पक्ष ने विवाह स्थगित करने पर सहमति जताई।
बालिका की सुरक्षा को दी सर्वाेच्च प्राथमिकता
जानकारी के अनुसार सुकमा जिले के महारापारा हमीरगढ़ निवासी 16 वर्षीय बालिका को विवाह के उद्देश्य से युवक अपने साथ लेकर आया था। प्रशासनिक टीम ने बालिका की सुरक्षा और सर्वाेत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए उसे उसके गृहग्राम पहुंचाया। वहां परिजन उपस्थित नहीं मिलने पर बालिका को सुरक्षित रूप से सुकमा लाया गया। बाल कल्याण समिति के समक्ष आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने तक उसे सखी सेंटर में सुरक्षित आश्रय दिया गया है। कार्रवाई के दौरान घोषणा-पत्र लिया गया और पंचनामा तैयार किया गया। संबंधित पक्षों को बाल विवाह करने पर होने वाली वैधानिक कार्रवाई से भी अवगत कराया गया।
बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुकमा और जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, चाइल्ड लाइन परियोजना समन्वयक सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्राम सचिव और रोजगार सहायक शामिल रहे।
प्रशासन की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई ने न केवल एक नाबालिग बालिका को बाल विवाह से बचाया, बल्कि उसके सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जिले में बाल अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह की रोकथाम और सुरक्षित बचपन के लिए प्रशासन लगातार सक्रियता से कार्य कर रहा है।
राखी के धागे में विश्वास अपार : महतारी वंदन योजना से संवर रही छत्तीसगढ़ की बहनों की खुशियां
रायपुर, 21 अगस्त 2026
रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि स्नेह, सुरक्षा और आत्मीयता का पावन संकल्प है। छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए यह पर्व दोगुनी खुशियां लेकर आया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’ प्रदेश की लाखों महिलाओं के जीवन में आर्थिक संबल, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का नया सवेरा लिख रही है।
साड़ी की एक छोटी सी इच्छा और स्वावलंबन की बड़ी उड़ान
धमतरी जिले के मुजगहन गांव की रहने वाली मंजू यादव के लिए इस बार का रक्षाबंधन बेहद खास है। महतारी वंदन योजना की राशि खाते में पहुंचते ही उनके चेहरे पर एक सहज मुस्कान तैर उठी। मंजू खुशी व्यक्त करते हुए कहती हैं, कि इस बार रक्षाबंधन पर अपने लिए नई साड़ी खरीदूंगी। एक नई साड़ी की यह खरीदारी केवल कपड़ों का चयन भर नहीं है—यह मंजू के अपने स्वाभिमान, निर्णय लेने की आजादी और अपनी छोटी-छोटी खुशियों को खुद पूरा करने के सुखद एहसास का प्रतीक है। अब उन्हें अपने व्यक्तिगत खर्चों या पर्व-त्योहारों की तैयारियों के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
घर-परिवार की रीढ़ बनी आर्थिक सहायता
महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित सहायता राशि ने महिलाओं को केवल व्यक्तिगत खुशियां ही नहीं दी हैं, बल्कि उन्हें परिवार की निर्णय प्रक्रिया में भी मजबूत भागीदार बनाया है। धमतरी जिले की महिलाएं इस राशि का उपयोग वह घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने, बच्चों की शिक्षा एवं जरूरतों का ध्यान रखने,स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत देखभाल की वस्तुएं खरीदने, और तीज-त्योहारों की तैयारियों को उत्साहपूर्वक मनाने में कर रही हैं। इससे न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण व स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी एक नया सहारा मिला है।
"विष्णु भैया की सरकार, बहनों का अटूट विश्वास"
त्योहार के इस अवसर पर धमतरी की बहनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विष्णु भैया की सरकार हर कदम पर बहनों के साथ खड़ी है। रक्षाबंधन पर जहां बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा का धागा बांधती हैं, वहीं राज्य सरकार की इस संवेदनशील पहल ने बहनों को सुरक्षा, सम्मान और संबल का वास्तविक एहसास कराया है। शासन और जनता के बीच बने इस अटूट विश्वास ने यह साबित कर दिया है कि जब योजनाएं सीधे और पारदर्शी तरीके से हितग्राहियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं रहतीं, बल्कि जीवन को बदलने का माध्यम बन जाती हैं।
धमतरी की बहनों की खिलखिलाती मुस्कान आज पूरे प्रदेश के लिए एक संदेश है। जब सरकार का साथ और संबल मिलता है, तो सपनों और खुशियों को सच में नई उड़ान मिलती है।
वामनराव बलिराम लाखे की पुण्यतिथि पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने किया सादर नमन
रायपुर, 21 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ में सहकारिता के जनक, महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजसेवी वामनराव बलिराम लाखे जी की पुण्यतिथि पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने उन्हें सादर नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि वामनराव लाखे जी ने अपना जीवन राष्ट्रसेवा, समाज सुधार और सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए समर्पित किया। उन्होंने किसानों, श्रमिकों और आमजन को संगठित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सहकारिता की मजबूत नींव रखने में वामनराव लाखे जी का योगदान अविस्मरणीय है। उनके प्रयासों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और लोगों में सहयोग एवं सामूहिक विकास की भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में वामनराव लाखे जी का योगदान और समाज के प्रति उनकी सेवा भावना सदैव प्रेरणादायी रहेगी। उनके विचार आज भी सहकारिता के माध्यम से जनकल्याण और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
वित्त मंत्री ने वामनराव बलिराम लाखे जी की पुण्यतिथि पर उनके त्याग, संघर्ष और योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
सिर्री को मिली उच्च शिक्षा की बड़ी सौगात
4.66 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा नवीन शासकीय महाविद्यालय भवन
धमतरी जिले के ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेगा आधुनिक शैक्षणिक वातावरण
रायपुर, 21 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरूद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिर्री में नवीन शासकीय महाविद्यालय की स्थापना को उच्च शिक्षा की बड़ी सौगात के रूप में मंजूरी मिली है। इस कॉलेज के खुलने से स्थानीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा
नवीन शासकीय महाविद्यालय, सिर्री के भवन निर्माण हेतु 4.66 करोड़ रुपये स्वीकृति
छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा धमतरी जिले के कुरूद विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सिर्री में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। वर्ष 2026-27 के मूल बजट में प्रावधानित नवीन शासकीय महाविद्यालय, सिर्री के भवन निर्माण हेतु लगभग 4.66 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
प्रदेश के 22 शासकीय महाविद्यालयों के भवन निर्माण को मंजूरी
राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के तहत प्रदेश के कुल 22 शासकीय महाविद्यालयों के भवन निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई है, जिसमें सिर्री का महाविद्यालय भी शामिल है। इस निर्माण कार्य से सिर्री सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए एक सुविधायुक्त और आधुनिक वातावरण उपलब्ध होगा।
ग्रामीण छात्रों के लिए सुलभ होगी उच्च शिक्षा
नवीन महाविद्यालय भवन का निर्माण मानक प्राक्कलन के आधार पर किया जाएगा। इस पहल से स्थानीय विद्यार्थियों को घर के निकट ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। दूरदराज के क्षेत्रों में जाने से होने वाली आवागमन की समस्याओं और अतिरिक्त वित्तीय बोझ से मुक्ति मिलेगी। क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता और युवाओं के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा। कुरूद विधायक श्री अजय चंद्राकर ने कहा कि क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं और शिक्षा के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है। इस निर्णय से क्षेत्र में उच्च शिक्षा का दायरा और व्यापक होगा।
निर्माण कार्य के गुणवत्तापूर्ण पर विशेष ध्यान
कलेक्टर ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए मजबूत अधोसंरचना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रशासकीय स्वीकृति से जिले के शैक्षणिक ढांचे को मजबूती मिलेगी। जिला प्रशासन शासन की मंशा के अनुसार निर्माण कार्य के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान देगा।
छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल से सिर्री और समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए उज्ज्वल भविष्य और बेहतर शैक्षणिक अवसरों के नए द्वार खुलेंगे।
विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा का नया प्रभात- समावेशी विकास और आधुनिकता से संवर रहा युवाओं का भविष्य
- विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक
रायपुर, 21 अगस्त 2026
राज्य में उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ऐतिहासिक और दूरगामी कदम उठाए जा रहे हैं। बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन तक, प्रदेश का उच्च शिक्षा क्षेत्र एक बड़े सकारात्मक बदलाव का साक्षी बन रहा है। क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने के लिए सुदूर एवं ग्रामीण अंचलों में नए महाविद्यालयों की स्थापना के साथ-साथ संचालित संस्थानों में नए संकायों और विषयों की शुरुआत की जा रही है। इसके अतिरिक्त, बढ़ती छात्र संख्या को ध्यान में रखते हुए सीटों में वृद्धि की स्वीकृति भी दी गई है।
अधोसंरचना और डिजिटल क्लासरूम का विस्तार
अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण के तहत भवनविहीन महाविद्यालयों के लिए नए भवनों का निर्माण, पुरानी इमारतों का संधारण और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया जा रहा है। पठन-पाठन को तकनीक से जोड़ने के लिए कक्षाओं को स्मार्ट और ई-क्लासरूम में बदला जा रहा है, जहाँ कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट और वाई-फाई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नैक मूल्यांकन पर जोर
प्रदेश के शासकीय, निजी एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों में स्नातक स्तर (BA, B.Com, B.Sc, BBA, BCA) पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) लागू की जा चुकी है। पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय (बिलासपुर) और इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय (खैरागढ़) में वर्ष 2025 से तथा सत्र 2025-26 से चार वर्षीय B.Ed, प्राच्य संस्कृत और B.P.Ed में भी इसे लागू करने का निर्णय लिया गया है।
मानसिक स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास
विद्यार्थियों के करियर मार्गदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महाविद्यालयों में करियर एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ की स्थापना और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है। साथ ही, आदर्श शिक्षक-छात्र अनुपात बनाए रखने के लिए नए पदों का सृजन किया जा रहा है। अकादमिक कैलेंडर में खेलकूद, NSS, NCC, यूथ रेडक्रॉस और योग जैसी गतिविधियों को भी अनिवार्य किया गया है।
राज्य सरकार की ये बहुआयामी नीतियां केवल महाविद्यालयों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता, अधोसंरचना, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को एक साथ समृद्ध करने का भागीरथ प्रयास हैं। रूसा की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दूरदर्शी प्रावधानों से प्रदेश का उच्च शिक्षा क्षेत्र आज एक स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रहा है, जो हमारे युवाओं को वैश्विक मंच पर सफलता के नए कीर्तिमान रचने के योग्य बनाएगा।
नोटों की माला और डायपर लेकर NSUI का प्रदर्शन, पेपर लीक मामले में विश्वविद्यालय घेरा
रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में “Pest Management in Crop and Stored Grains-I” (Course Code: AENT221) का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले WhatsApp के माध्यम से वायरल होने और परीक्षा में वही प्रश्नपत्र आने के मामले को लेकर विद्यार्थियों में भारी आक्रोश है। मामले को लेकर NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के नेतृत्व में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय का घेराव किया।
प्रदर्शन के दौरान NSUI कार्यकर्ताओं ने नोटों की माला और डायपर लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं विद्यार्थियों के भविष्य और विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
NSUI का आरोप है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में पेपर लीक का यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2022 और 2024 में भी प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं और अब तीसरी बार परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र WhatsApp के माध्यम से वायरल होने तथा परीक्षा में वही प्रश्नपत्र आने का मामला सामने आया है। NSUI ने कहा कि बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आना परीक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
NSUI ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किस माध्यम से वायरल हुआ इसकी जांच की जाए तथा इसमें शामिल जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही विद्यार्थियों के हित में परीक्षा को लेकर उचित निर्णय लिया जाए, ताकि किसी भी विद्यार्थी के भविष्य के साथ अन्याय न हो।
प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे ने कहा कि “इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। वर्ष 2022 और 2024 के बाद अब तीसरी बार परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र WhatsApp पर वायरल होने और वही प्रश्नपत्र परीक्षा में आने की बात सामने आई है। यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और परीक्षा की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ NSUI बर्दाश्त नहीं करेगी।”
जिला अध्यक्ष प्रशांत गोस्वामी ने कहा कि “विद्यार्थी मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन यदि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र वायरल हो जाए और वही प्रश्नपत्र परीक्षा में आ जाए तो यह मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ सीधा अन्याय है। NSUI की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।”
NSUI ने चेतावनी दी कि यदि 72 घंटों में मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई और विद्यार्थियों के हित में उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, जिला अध्यक्ष रायपुर प्रशांत गोस्वामी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय अध्यक्ष हरिओम तिवारी, प्रदेश सचिव विशाल कुकरेजा, महताब हुसैन, जिला उपाध्यक्ष वैभव मुजेवार, आशीष तिवारी, अनुज सिंह, दिव्यांश श्रीवास्तव,आलोक सिंह, प्रतीक ध्रुव,सौरभ नाग , कृष सहारे, सुमित शुक्ला, प्रियांशु सिंह,लोमेश साहू ,उत्कर्ष खिलारी, एवं सैकड़ों NSUI कार्यकर्ता प्रदर्शन में मौजूद थे।