छत्तीसगढ़ / मनेन्द्रगढ़ – चिरिमिरी – भरतपुर
झूरा जलाशय एवं खडगवां जलाशय योजना के कार्यों के लिए 6.11 करोड़ रुपये स्वीकृत
17 अगस्त 2025
छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर जिले की दो सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 6 करोड़ 13 लाख 34 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। स्वीकृत कार्यों में विकासखण्ड-मनेन्द्रगढ़ की झुरा जलाशय के नहरों की जीर्णोद्धार कार्य हेतु 4 करोड़ 20 लाख 92 हजार रुपये स्वीकृत किये गये है। इसी तरह से विकासखण्ड-खड़गवां जलाशय योजना के नहर की जीर्णोद्धार कार्य हेतु 1 करोड़ 93 लाख 42 हजार रुपये स्वीकृत किये गये है। योजना के कार्य को कराने के लिए जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार, जल संसाधन विभाग अम्बिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति किये गये हैं।
जिले में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाने का सुनहरा अवसर- मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत टी.ओ.टी ट्रेनरों की है आवश्यकता
एमसीबी/17 अक्टूबर 2025
जिले के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। इसके तहत असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, जल वितरण संचालक, मेसन जनरल (राज मिस्त्री), डाटा एंट्री ऑपरेटर, फील्ड टेक्निशियन ए.सी., जनरल ड्यूटी असिस्टेंट, सिविंग मशीन ऑपरेटर (सिलाई) एवं डेस्कटॉप पब्लिशिंग जैसे ट्रेडों में युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल सिखाया जाएगा।
इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए अब जिले में सी.टी.आई. मान्यता प्राप्त या कौशल विकास से प्रशिक्षित टी.ओ.टी. ट्रेनरों (ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर) की आवश्यकता है। प्रशिक्षकों की यह भर्ती जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़, खडगवां एवं भरतपुर में विभिन्न ट्रेडों हेतु की जाएगी। इच्छुक और योग्य प्रशिक्षक अपने आवेदन पत्र कलेक्ट्रेट कार्यालय में अपर कलेक्टर, कक्ष क्रमांक 10 अथवा द्वितीय तल, कक्ष क्रमांक 20 में सात दिवस के भीतर स्वयं उपस्थित होकर जमा कर सकते हैं। यह पहल जिले के बेरोजगार युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल सिखाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। चयनित प्रशिक्षकों को शासन के प्रावधान अनुसार मानदेय का भुगतान प्रशिक्षण के आधार पर किया जाएगा।
इस पहल से जिले में तकनीकी दक्षता और रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी, साथ ही युवाओं को आत्मनिर्भर भारत अभियान से जोड़ते हुए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। प्रशासन ने योग्य प्रशिक्षकों से अपील की है कि वे आगे आकर इस महत्त्वपूर्ण जनहितकारी अभियान का हिस्सा बनें और जिले के युवाओं को उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करें।
तंबाकू और नशा मुक्त स्कूल-कॉलेज अभियान 3.0” का हुआ शुभारंभ, विद्यार्थियों को मिलेगा स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण
शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त पहल से बनेगा नशा मुक्त भारत, स्कूलों व कॉलेजों में लागू होंगे TOFEI दिशा निर्देश
एमसीबी, 15 अक्टूबर 2025
भारत सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्रालय, उच्च शिक्षा मंत्रालय एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से देशभर में तंबाकू और नशा मुक्त स्कूल-कॉलेज अभियान को सशक्त रूप से लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्राप्त संयुक्त पत्र के अनुसार युवाओं में तंबाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने तथा देश को तंबाकू मुक्त पीढ़ी की ओर अग्रसर करने के उद्देश्य से तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0 (TFYC 3.0) का शुभारंभ विगत 9 अक्टूबर 2025 से किया गया है। यह अभियान बच्चों और युवाओं को तंबाकू एवं नशे के सेवन से दूर रखने, उन्हें शिक्षित और सशक्त बनाने तथा जो इसका सेवन छोड़ना चाहते हैं उन्हें सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।
तंबाकू सेवन: एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट
तंबाकू सेवन आज भारत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो सिर, गर्दन, फेफड़ों और ग्रासनली के कैंसर सहित अनेक जानलेवा बीमारियों का प्रमुख कारण है। वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण 2019 के अनुसार 13 से 15 वर्ष की आयु के स्कूली बच्चों में तंबाकू सेवन की दर 8.4 पाई गई है। सर्वेक्षण से यह भी स्पष्ट हुआ कि तंबाकू सेवन प्रारंभ करने की औसत आयु सिगरेट के लिए 11.5 वर्ष, बीड़ी के लिए 10.5 वर्ष और धुआं रहित तंबाकू उत्पादों के लिए 9.9 वर्ष है। चिंताजनक तथ्य यह भी है कि लड़कियाँ लड़कों की तुलना में तंबाकू उत्पादों का सेवन पहले प्रारंभ कर रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े: युवाओं में बढ़ता जोखिम
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 2022 में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि 3.7 प्रतिशत छात्र वर्तमान में धूम्रपान करते हैं, जबकि 11 प्रतिशत छात्रों ने आत्महत्या के विचार प्रकट किए। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि युवाओं को एक स्वस्थ और नशामुक्त वातावरण प्रदान करना समय की मांग है। भारत सरकार ने तंबाकू मुक्त युवा अभियान 2.0 की सफलता के बाद अब अभियान 3.0 की शुरुआत की है, जिसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान (TOFEI) के रूप में विकसित करने पर बल दिया गया है।
TOFEI दिशा निर्देश: शिक्षण संस्थानों के लिए नई जिम्मेदारी
इसके लिए नौ प्रमुख गतिविधियों के अनुपालन हेतु दिशा निर्देश और कार्यान्वयन मैनुअल जारी किए गए हैं, जिनका उद्देश्य शैक्षणिक परिसरों के भीतर एवं आसपास तंबाकू की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करना है। जिलों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी शैक्षणिक संस्थानों को TOFEI दिशानिर्देशों को लागू करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि हेतु प्रेरित करें। अभियान के अंतर्गत शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए प्रवर्तन अभियान आयोजित करना, युवाओं के बीच तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों पर व्यापक प्रचार-प्रसार, स्कूलों एवं कॉलेजों में एनएसएस और एनसीसी स्वयंसेवकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशालाएँ, TOFEi अनुपालक संस्थानों के लिए सम्मान समारोह, विद्यालय परिसरों के चारों ओर 100 गज का तंबाकू मुक्त घेरा चिन्हित करना, छात्रों के लिए परामर्श सत्र और तंबाकू छोड़ने के लिए सहायता प्रदान करना जैसी गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी।
नवाचार और जनभागीदारी से बनेगा स्वस्थ भारत
इसके अतिरिक्त नवाचारी जागरूकता सामग्री तैयार करने हेतु प्रतियोगिताएँ, भारत सरकार की मौजूदा पहलों जैसे विश्व तंबाकू निषेध दिवस क्विज़ और MyGov प्लेटफॉर्म पर तंबाकू मुक्त पीढ़ी की ओर स्कूल चौलेंज में भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा विकसित शैक्षिक वीडियो राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के शैक्षणिक चैनलों, स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों और खेल केंद्रों में प्रसारित किए जाएँगे। अभियान की सफलता के लिए स्थानीय प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और स्वशासी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि शैक्षणिक परिसरों की चारदीवारी के बाहर 100 गज के क्षेत्र को लाल रेखा खींचकर या बोर्ड लगाकर तंबाकू मुक्त क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया जा सके।
नशामुक्त पीढ़ी का संकल्प: युवाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा
साथ ही इस परिधि में स्थित दुकानों को किसी भी प्रकार के तंबाकू या मादक पदार्थों की बिक्री से प्रतिबंधित किया जाएगा। क्षेत्रीय ऑडियो-विजुअल माध्यमों और मनोरंजन चैनलों को भी निर्देशित किया गया है कि वे 60 दिनों की अभियान अवधि में युवाओं को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों पर आधारित संदेशों और टेक्स्ट स्क्रॉल का प्रसारण करें। इस व्यापक अभियान का उद्देश्य केवल तंबाकू सेवन को हतोत्साहित करना ही नहीं बल्कि युवाओं के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण तैयार करना है। भारत सरकार का यह प्रयास तंबाकू मुक्त पीढ़ी के निर्माण और नशामुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
भरतपुर जनदर्शन में ग्रामीणों ने रखी अपनी समस्या, अपर कलेक्टर ने अधिकारियों को त्वरित निराकरण करने दिए निर्देश
जनदर्शन में प्राप्त हुए 18 आवेदन
एमसीबी/15 अक्टूबर 2025
कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर अपर कलेक्टर विनायक शर्मा ने भरतपुर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय कक्ष में जनदर्शन के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं को सुना। जिले के ग्रामीणों और नागरिकों ने अपनी छोटी-बड़ी समस्याएं सीधे अपर कलेक्टर के समक्ष रखीं। अपर कलेक्टर ने सभी प्राप्त आवेदनों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्राथमिकता के साथ शीघ्र एवं समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए।
आज के जनदर्शन में कुल 18 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें जनकपुर निवासी सुशील सिंह ने नगर पंचायत क्षेत्र में बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण कार्य के संबंध में, जबकि जनकपुर निवासी श्यामावती पति रमेश केवट ने स्थगन के संबंध में। ग्राम घटाई के सुरेश कुशवाहा ने सही नक्शा दिलाने के संबंध में, वहीं ग्राम डोंगरी टोला निवासी रामसेवक सिंह ने पंचायत चपरासी को न्याय दिलाने के संबंध में, ग्राम पंचायत जमुआ के सरपंच एवं कृषकों ने अपनी पंचायत को नवीन सहकारी समिति सिंगरौली से पृथक कर पूर्व माड़ीसरई समिति में शामिल किए जाने के संबंध में, ग्राम नौढिया के लवकेश अहिरवार ने रोजगार या सहायता राशि उपलब्ध कराने के संबंध में, जबकि ग्राम हर्रई निवासी विशेषर प्रसाद गुप्ता ने आदिम जाति सेवा सहकारी समिति धान खरीदी केंद्र सिंगरौली से समय पर ऋण जमा करने के बावजूद ऋण वसूली किए जाने के संबंध में अपना शिकायत लेकर उपस्थित हुए थे। अपर कलेक्टर विनायक शर्मा ने सभी आवेदनों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक आवेदन का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि जनदर्शन का उद्देश्य नागरिकों को न्याय दिलाना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।
जिले को मिला मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का कोटा, श्रद्धालुओं को मिलेगा मथुरा-वृंदावन दर्शन का सौभाग्य
एमसीबी/15 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था एवं सांस्कृतिक भावना को सम्मान देते हुए निरंतर रूप से संचालित मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के लिए भी एक नया अवसर प्राप्त हुआ है। इस योजना के तहत जिले के 10 पात्र तीर्थयात्रियों का चयन किया गया है जिन्हें आगामी 20 नवम्बर से 23 नवम्बर 2025 तक पवित्र स्थल मथुरा, वृंदावन और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की धार्मिक यात्रा का सौभाग्य प्राप्त होगा।
शासन द्वारा की जा रही यह पहल न केवल वरिष्ठ नागरिकों की धार्मिक आकांक्षा को पूरा करने की दिशा में एक कदम है बल्कि यह समाज के उन वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक भी है, जो आर्थिक अभाव या सामाजिक परिस्थिति के कारण तीर्थ यात्रा करने में असमर्थ रहते हैं। इस योजना का लाभ विशेष रूप से उन वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं को दिया जाएगा जो 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं तथा शारीरिक और मानसिक रूप से तीर्थ यात्रा के योग्य हैं। इच्छुक पात्र जन अपने आवेदन पत्र निर्धारित प्रपत्र में 05 नवम्बर 2025 तक अपने क्षेत्र के जनपद पंचायत या नगरीय निकाय कार्यालय में जमा कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं समानता सुनिश्चित करने हेतु शासन ने स्पष्ट प्रावधान किए हैं। योजना में 80 प्रतिशत लाभार्थी बी.पी.एल., अन्त्योदय एवं मुख्यमंत्री खाद्य योजना कार्ड धारक होंगे, जबकि 20 प्रतिशत लाभार्थी गरीबी रेखा से ऊपर के वे नागरिक होंगे जो आयकरदाता नहीं हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हितग्राहियों के संतुलित प्रतिनिधित्व हेतु यह भी निर्धारित किया गया है कि 75 प्रतिशत तीर्थयात्री ग्रामीण क्षेत्र से तथा 25 प्रतिशत तीर्थयात्री शहरी क्षेत्र से चयनित किए जाएंगे। यह प्रावधान न केवल संतुलन बनाए रखने के लिए बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी किया गया है कि राज्य के हर हिस्से से पात्र नागरिकों को इस योजना का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का मूल उद्देश्य ऐसे वरिष्ठ नागरिकों एवं पात्र लाभार्थियों को तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर देना है जो जीवन के इस पड़ाव में आर्थिक या शारीरिक सीमाओं के कारण स्वयं यह यात्रा नहीं कर सकते। इस योजना के तहत तीर्थयात्रा का पूरा खर्च - जैसे यात्रा, आवास, भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं राज्य शासन द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।
इस वर्ष तीर्थयात्रा का गंतव्य मथुरा, वृंदावन और श्रीकृष्ण जन्मभूमि तय किया गया है, जो भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण और श्रद्धेय स्थल हैं। यहां भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल, लीला एवं भक्ति की अनगिनत स्मृतियाँ आज भी लोगों की श्रद्धा का केंद्र हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नागरिकों को इस यात्रा का अवसर मिलना न केवल एक धार्मिक अनुभव होगा बल्कि यह आध्यात्मिक शांति और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी बनेगा।
इस योजना से जुड़े सभी प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी जिला समाज कल्याण विभाग मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर को सौंपी गई है। इच्छुक लाभार्थी योजना की शर्तें, आवेदन प्रक्रिया तथा आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के जनपद पंचायत, नगर पालिका या जिला समाज कल्याण कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
पोषण भी, पढ़ाई भी - शिक्षा और स्वास्थ्य का अद्भुत संगम
मनेंद्रगढ़, 13 अक्टूबर 2025
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित पोषण भी, पढ़ाई भी कार्यक्रम ने छत्तीसगढ़ में बाल विकास की दिशा में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार किया है। यह पहल शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है। इस कार्यक्रम ने न केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास की राह खोली है, बल्कि माताओं, किशोरियों और समुदाय के लोगों में भी जागरूकता की नई लहर उत्पन्न की है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस नवाचारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि “राज्य सरकार बच्चों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। स्वस्थ, शिक्षित और आत्मविश्वासी बच्चे ही छत्तीसगढ़ के उज्जवल भविष्य की नींव हैं। ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ जैसे कार्यक्रम शिक्षा और स्वास्थ्य के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में प्रेरणादायी कदम हैं।”
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के मनेन्द्रगढ़ शहरी सेक्टर में एकीकृत बाल विकास परियोजना अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम की थीम प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा रही, जिसका उद्देश्य प्रारंभिक आयु से ही बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति, खेल-कूद की समझ और स्वस्थ जीवनशैली की आदतें विकसित करना रहा। सुपरवाइजर मलिा एवं बाल विकास के नेतृत्व में यह आयोजन सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बना। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका ने समर्पण से इस कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों में रंगोली, पोस्टर और झांकी के माध्यम से पोषण और शिक्षा के महत्व को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। बच्चों ने रंग-बिरंगे चित्रों और गतिविधियों के माध्यम से ‘संतुलित आहार’, ‘साफ-सफाई’ और ‘खेल-सीख’ के संदेश दिए। माताओं और किशोरियों ने भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई।
सुपरवाइजर ने बताया कि जीवन के प्रारंभिक छह वर्ष के बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस आयु में उन्हें पौष्टिक आहार, खेल, कहानी और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना आवश्यक है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर माताओं को “सही भोजन” के महत्व के बारे में बताया और बच्चों को पौष्टिक खिचड़ी, फल एवं दाल वितरित कर व्यावहारिक सीख दी। इस कार्यक्रम में लगभग 40 से 50 हितग्राहियों - माताएँ, शिशुवजी माताएं, किशोरियाँ, स्व-सहायता समूह की महिलाएँ और वार्डवासी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि अब आंगनबाड़ी केंद्र केवल बच्चों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के सीखने और सकारात्मक बदलाव का केंद्र बन गए हैं।
रजत जयंती महोत्सव एवं हर दिन हर घर आयुर्वेद के तृतीय चरण में आरएनएस बीएड महाविद्यालय में किया गया आयुर्वेद संगोष्ठी
एमसीबी/13 अक्टूबर 2025
आर.एन.एस. बीएड महाविद्यालय में रजत जयंती महोत्सव एवं हर दिन हर घर आयुर्वेद के तृतीय चरण के अंतर्गत एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में आयुर्वेद विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. पूर्णिमा सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य में आयुर्वेद की भूमिका पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उनके व्याख्यान में छात्रों को आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ रखने के तरीके, मानसिक संतुलन बनाए रखने के उपाय और तनाव प्रबंधन के प्राकृतिक उपायों के बारे में जानकारी दी गई।
साथ ही आयुर्विधा चिकित्सक डॉ. मेघा गुप्ता ने मानस रोग जन्य स्त्री रोगों पर अपने व्याख्यान के माध्यम से छात्रों को जागरूक किया। उन्होंने मानसिक रोगों से संबंधित लक्षणों, उनकी रोकथाम और आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। महाविद्यालय के डायरेक्टर संकेत शर्मा एवं प्राचार्य नरेन्द्र श्रीवास्तव ने इस आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की और सभी छात्रों से आग्रह किया कि वे मानस रोगों से दूर रहने हेतु बताए गए उपायों को अपने जीवन में अपनाएँ। इस संगोष्ठी में कुल 215 छात्र और छात्राओं ने भाग लिया और आयुर्वेदिक ज्ञान एवं मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझकर इसका लाभ उठाया।
यह संगोष्ठी छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आयुर्वेद के माध्यम से जीवन में संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
विशेष लेख : खाद्य सुरक्षा की सशक्त परिकल्पना: जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली से साकार होता जन-कल्याण
महेन्द्र सिंह मरपच्ची
एमसीबी/13 अक्टूबर 2025

छत्तीसगढ़ राज्य सदैव अपने नागरिकों के जीवन-स्तर को उन्नत बनाने, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामाजिक न्याय की भावना को सशक्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहा है। राज्य सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा संचालित योजनाएं न केवल जनजीवन की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि गरीबी उन्मूलन, सामाजिक समानता और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी ऐतिहासिक योगदान दे रही हैं।
खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012 तथा छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 के अंतर्गत जारी राशन कार्ड राज्य के लाखों परिवारों तक खाद्यान्न एवं आवश्यक वस्तुओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। यह केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि राज्य सरकार की संवेदनशील प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक है कि छत्तीसगढ़ में कोई भी नागरिक भूखा न रहे।
खाद्य सुरक्षा के डिजिटल प्रबंधन की नई पहल
डिजिटल इंडिया अभियान की भावना को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने खाद्य वितरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और जनसुलभ बनाने के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाया है। राज्य के सभी जिलों और विकासखण्डों में राशनकार्ड वितरण एवं खाद्यान्न आपूर्ति की प्रक्रिया को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा गया है।
जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के अंतर्गत भरतपुर, खड़गवां, मनेन्द्रगढ़, जनकपुर, खोंगापानी, झगराखाण्ड, नईलेदरी और चिरमिरी जैसे क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की संपूर्ण जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध है। इससे आम नागरिक को पारदर्शी व्यवस्था के तहत अपनी पात्रता और लाभ की जानकारी सरलता से मिल रही है।
जिसमें भरतपुर विकासखण्ड में कुल 31,908 राशनकार्डधारी परिवारों में 13,376 अंत्योदय कार्ड, 39 निराश्रित कार्ड, 17,520 प्राथमिकता कार्ड, 19 निःशक्तजन कार्ड और 954 एपीएल परिवार शामिल हैं। खड़गवां विकासखण्ड में 4,354 अंत्योदय कार्ड, 21 निराश्रित कार्ड, 12,629 प्राथमिकता कार्ड, 2 निःशक्तजन कार्ड और 819 एपीएल परिवारों सहित कुल 17,825 लाभार्थी परिवार हैं।
मनेन्द्रगढ़ ब्लॉक में 5,932 अंत्योदय कार्ड, 114 निराश्रित कार्ड, 19,604 प्राथमिकता कार्ड, 10 निःशक्तजन कार्ड और 1,856 एपीएल परिवार सहित कुल 27,516 परिवार इस योजना से जुड़े हैं। सभी ब्लॉकों को मिलाकर कुल 77,249 परिवार खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि जिले की प्रतिबद्धता केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि हर थाली में अन्न के रूप में साकार है।
नगरीय निकायों में पोषण सुरक्षा का विस्तार
खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ नगरीय निकायों के नागरिकों तक भी समान रूप से पहुंच रहा है। जनकपुर नगर पंचायत में 2 अंत्योदय राशन कार्ड परिवार हैं, जबकि नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र में 9,997 लाभार्थी हैं जिनमें 1,793 अंत्योदय कार्ड, 18 निराश्रित कार्ड, 5,163 प्राथमिकता कार्ड, 10 निःशक्तजन कार्ड और 3,013 एपीएल परिवार शामिल हैं।
खोगापानी में 945 अंत्योदय कार्ड, 11 निराश्रित कार्ड, 2,442 प्राथमिकता कार्ड, 2 निःशक्तजन कार्ड और 902 एपीएल परिवार सहित कुल 4,302 परिवारों को खाद्यान्न का लाभ मिल रहा है। झगराखांड में 296 अंत्योदय कार्ड, 9 निराश्रित कार्ड, 1192 प्राथमिकता कार्ड, 0 निःशक्तजन कार्ड और 557 एपीएल परिवार सहित कुल 2054 परिवारों को खाद्यान्न का लाभ मिल रहा है।
नई लेदरी में 259 अंत्योदय कार्ड, 3 निराश्रित कार्ड, 737 प्राथमिकता कार्ड, 2 निःशक्तजन कार्ड और 438 एपीएल परिवार सहित कुल 1439 परिवारों को खाद्यान्न का लाभ मिल रहा है। तथा चिरमिरी नगर पालिका क्षेत्र में 2163 अंत्योदय कार्ड, 66 निराश्रित कार्ड, 9028 प्राथमिकता कार्ड, 23 निःशक्तजन कार्ड और 7585 एपीएल परिवार सहित कुल 18865 परिवारों को खाद्यान्न का लाभ मिल रहा है। परिवार इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत हैं। यदि सभी नगरीय निकायों का संयुक्त योग देखें तो 36,659 परिवार खाद्य सुरक्षा के दायरे में हैं, जिनमें 5,458 अंत्योदय, 107 निराश्रित, 18,562 प्राथमिकता संस्था, 37 निःशक्तजन और 12,495 एपीएल परिवार शामिल हैं। यह उपलब्धि इस तथ्य को प्रमाणित करती है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण से लेकर नगरीय स्तर तक हर वर्ग को समान रूप से खाद्य सुरक्षा प्रदान की है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही का नया युग
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सुदृढ़ता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। अब प्रत्येक लाभार्थी अपने राशन कार्ड की स्थिति, नाम और वितरण विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर देख सकता है। साथ ही किसी भी अनियमितता की शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे प्रणाली में विश्वास और ईमानदारी दोनों सुनिश्चित हुए हैं। एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र) छत्तीसगढ़ द्वारा विकसित इस पोर्टल ने राज्य के लाखों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए प्रक्रिया को न केवल सरल बल्कि पूर्णतः पारदर्शी बनाया है। अब प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिमाह निर्धारित दर पर चावल, गेहूं, शक्कर और नमक जैसी आवश्यक वस्तुएं सुचारू रूप से मिल रही हैं।
खाद्य सुरक्षा से सशक्त होता मानव विकास
खाद्य सुरक्षा केवल अनाज वितरण की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, पोषण और सम्मान की भावना को साकार करने का सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य का कोई भी नागरिक भुखमरी या कुपोषण का शिकार न हो। राज्य के पोषण स्तर को बेहतर बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग और खाद्य विभाग के बीच समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। इन योजनाओं ने विशेष रूप से आदिवासी, अनुसूचित जाति एवं वंचित वर्गों को पोषण की मुख्यधारा से जोड़ा है, जिससे मानव विकास सूचकांक में निरंतर सुधार हो रहा है।
एमसीबी जिला सशक्त, सुरक्षित और पोषित छत्तीसगढ़ की ओर
छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली आज देश के अन्य राज्यों के लिए आदर्श मॉडल बन चुकी है। यहां खाद्यान्न वितरण का दायरा विस्तृत है, तकनीकी ढांचा मजबूत है और लाभार्थियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। डिजिटलीकरण के माध्यम से हर पात्र परिवार तक खाद्य सुरक्षा पहुंचाना अब एक हकीकत बन गया है। एनआईसी छत्तीसगढ़ द्वारा विकसित पोर्टल ने इस दिशा में ऐतिहासिक परिवर्तन लाया है। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि राज्य की संवेदनशील शासन व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है, जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई भूखा न सोए, हर थाली में अन्न हो।
यह संपादकीय छत्तीसगढ़ सरकार की खाद्य सुरक्षा नीति की सफलता का जीवंत दस्तावेज है, जो दर्शाता है कि राज्य किस तरह तकनीक, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन के माध्यम से नागरिकों की बुनियादी जरूरतों की पूर्ति कर रहा है। यही है “सशक्त छत्तीसगढ़ - सुरक्षित छत्तीसगढ़ - पोषित छत्तीसगढ़” की ओर बढ़ता हुआ एक आत्मविश्वासी, संवेदनशील और जनकेंद्रित राज्य है।
अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत जागरूकता कार्यक्रम हुआ आयोजन
एमसीबी/13 अक्टूबर 2025
महिला सशक्तिकरण और बालिकाओं के उज्जवल भविष्य को समर्पित अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर मिशन शक्ति, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा संकुल भवन चनवारीडांड में “बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ” योजना के अंतर्गत एक प्रेरणादायी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देशानुसार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी राजकुमार खाती के मार्गदर्शन में श्रीमती तारा कुशवाहा, महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब) के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर बतौर विशेष अतिथि न्यायाधीश श्रीमती सरिता दास (ADJ), विधिक सेवा प्राधिकरण से श्रीमती अंजनी यादव, जेंडर विशेषज्ञ सुश्री शैलजा गुप्ता, वित्तीय साक्षरता समन्वयक अनीता कुमारी शाह, मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता अमीषा कुशवाहा एवं सुपरवाइजर कलावती उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं पोषण के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उपस्थित छात्राओं को लैंगिक समानता, आत्मविश्वास, लक्ष्य निर्धारण, और उच्च शिक्षा के महत्व के बारे में प्रेरित किया गया। बालिकाओं को बताया गया कि स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार कितना आवश्यक है और एनीमिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए आयरन युक्त आहार को अपनाना चाहिए।
इसके साथ ही मासिक धर्म स्वच्छता के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में “181 सखी वन स्टॉप सेंटर” और “चाइल्ड हेल्पलाइन 1098” की जानकारी देकर बालिकाओं को यह संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार की हिंसा, शोषण या आपात स्थिति में वे निःसंकोच सहायता प्राप्त कर सकती हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों ने बेटियों को सशक्त, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए समाज में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
“बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ” योजना के तहत आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं एवं बालिकाओं के समग्र विकास, सशक्तिकरण और पोषण संबंधी जागरूकता की दिशा में एक सराहनीय एवं प्रेरणादायी पहल साबित हुआ, जिसने समाज में बेटियों के सम्मान और समान अवसरों के संदेश को और मजबूत किया।
ग्राम पंचायत मेरो की उचित मूल्य दुकान हेतु समितियों से आवेदन आमंत्रित, अंतिम तिथि 25 अक्टूबर तक
एमसीबी/ 13 अक्टूबर 2025
कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चिरमिरी, जिला एमसीबी ब्लाक खड़गवां के आदेशानुसार ग्राम पंचायत मेरो स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान (आईडी क्रमांक 532004001) के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत मेरो के सरपंच एवं सचिव द्वारा निभाए जाने में असमर्थता व्यक्त की गई है। इस परिस्थिति को देखते हुए उक्त दुकान का संचालन किसी सक्षम समिति को सौंपे जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, ताकि क्षेत्र की जनता को खाद्यान्न वितरण की सुविधा सुचारु रूप से मिलती रहे।
इस उद्देश्य से आदिम जाति सहकारी समिति, बहुउद्देशीय सहकारी समिति, महिला स्वंय सहायता समूह, वन सुरक्षा समिति एवं अन्य पात्र समितियों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक समितियां 10 अक्टूबर 2025 से 25 अक्टूबर 2025 तक कार्यालयीन समय में आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं। आवेदन के साथ पंजीयन प्रमाण पत्र, पासबुक की छायाप्रति एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा। अंतिम तिथि के पश्चात प्राप्त होने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। अनुविभागीय अधिकारी (रा.) चिरमिरी ने स्पष्ट किया है कि उचित मूल्य दुकान का आबंटन नियमानुसार एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अंचल के पात्र हितग्राहियों को राशन वितरण में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।
मतदाता सूचियों के मुद्रण हेतु निविदा आमंत्रित, अंतिम तिथि 30 अक्टूबर तक
एमसीबी/13 अक्टूबर 2025
अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी जिला एमसीबी द्वारा विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 01 भरतपुर-सोनहत के 240 तथा विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 02 मनेन्द्रगढ़ के 181 कुल 421 मतदान केन्द्रों के लिए विशेष गहन / संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्य तथा मतदान केन्द्रवार मतदाता सूचियों के प्रारंभिक एवं अंतिम प्रकाशन हेतु मतदाता सूचियों की मूल प्रतियां, पूरक सूचियां अथवा एकीकृत मतदाता सूचियों के आवश्यक मुद्रण कार्य के लिए योग्य एवं अनुभवी फर्मों से मुहरबंद निविदाएं आमंत्रित की गई हैं।
यह निविदाएं कार्यालय कलेक्टर (सामान्य निर्वाचन शाखा) जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में आमंत्रित की गई हैं। इच्छुक फर्म 10 अक्टूबर 2025 से 30 अक्टूबर 2025 तक कार्यालयीन समय में शासकीय अवकाश को छोड़कर 100 रुपए का चालान शीर्ष 0070-अन्य प्रशासनिक सेवाएं, 02-निर्वाचन, 101-निर्वाचन फार्म बिक्री के अंतर्गत शासकीय खजाने में जमा कर चालान की मूल प्रति प्रस्तुत कर आवेदन पत्र प्राप्त कर सकते हैं। निविदा फार्म जिला की वेबसाइट https://manendragarh-chirmiri-bharatpur.cg.gov.in/en/past-notices/tenders/ से भी डाउनलोड किया जा सकता है। निविदाएं 30 अक्टूबर 2025 को दोपहर 01:00 बजे तक अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जानी हैं। इसके उपरांत प्राप्त निविदाएं स्वीकार नहीं की जाएंगी। प्राप्त निविदाओं को गठित समिति द्वारा उसी दिन सायं 03:00 बजे उपस्थित निविदाकारों के समक्ष खोला जाएगा। यह दस्तावेज अहस्तांतरणीय है तथा छत्तीसगढ़ शासन के भंडार क्रय नियमों के अधीन कार्यवाही की जाएगी।
सक्षम अधिकारी को बिना कारण बताए किसी भी समय निविदा निरस्त करने का अधिकार रहेगा। निविदा रजिस्टर्ड डाक, स्पीड पोस्ट, अधिकृत कोरियर अथवा निर्धारित टेंडर बॉक्स में ही स्वीकार की जाएगी, ऑनलाइन निविदाएं नियत समय सारणी के अनुसार प्रस्तुत की जा सकेंगी। यह कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा अनुमोदित है।
मतदान केन्द्रों के युक्तियुक्तकरण की अंतिम सूची प्रकाशित
एमसीबी/13 अक्टूबर 2025
भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली से प्राप्त अनुमोदन उपरांत जिले के मतदान केन्द्रों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूर्ण कर अंतिम सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डी. राहुल वेंकट जिला एमसीबी के आदेशानुसार नये मतदान केन्द्रों के गठन, स्थल एवं अनुभाग परिवर्तन तथा नये अनुभाग निर्माण से संबंधित प्रस्तावों को भारत निर्वाचन आयोग की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर के हैंडबुक के अध्याय 2 के पौरा 2.9.1 के निर्देशानुसार विधानसभावार मतदान केंद्रों की अंतिम सूची प्रारूप-6 में तैयार की गई है।
यह सूची जिले के संबंधित तहसील कार्यालयों, स्थानीय निकायों, पंचायत भवनों सहित अन्य विहित स्थानों के सूचना पटल पर आम नागरिकों के अवलोकन हेतु 10 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित कर दी गई है। जिले के सभी मतदाताओं एवं आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के मतदान केंद्रों की अंतिम सूची का अवलोकन कर आवश्यक जानकारी प्राप्त करें। प्रकाशन की सूचना मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, इंद्रावती भवन, पुराना मंत्रालय परिसर, रायपुर को प्रेषित कर दी गई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देशानुसार आयुष्मान व वय वंदन कार्ड निर्माण में दिखाई गई सेवा भावना
नेटवर्क विहीन क्षेत्र के हितग्राहियों को वाहन से लाकर सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ में बनाए गए सभी कार्ड
एमसीबी, 11 अक्टूबर 2025
ग्राम पंचायत चनवारीडांड में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल की गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के निर्देशानुसार उपस्वास्थ्य केंद्र चनवारीडांड के आरएचओ लाल बहादुर यादव के मार्गदर्शन में 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान कार्ड और वय वंदन कार्ड बनाए गए। इस दौरान नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में रहने वाले पात्र हितग्राहियों को विशेष वाहन की व्यवस्था कर सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ तक लाया गया, जहां समस्त कार्ड निर्माण की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। आरएचओ लाल बहादुर यादव ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र हितग्राही तकनीकी बाधाओं के कारण शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित न रह जाए। वरिष्ठ नागरिकों ने इस पहल के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार जताया और कहा कि इससे उन्हें न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा बल्कि वय वंदन योजना से सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। इस कार्य में स्वास्थ्य अमले के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ। ग्रामीणों ने इस पहल को जनहितैषी शासन की संवेदनशीलता और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता का जीवंत उदाहरण बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने की प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना एवं दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत
पीएम धन्य-धान्य योजना से कृषि उत्पादकता, फसल विविधीकरण और किसानों की आय में होगी वृद्धि
एमसीबी, 11 अक्टूबर 2025
आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना एवं दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का वर्चुअल शुभारंभ किया गया। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से देश के किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल की गई है। योजना के अंतर्गत पूरे देश में 100 कृषि जिलों का चयन किया गया है, जिनमें छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर, कोरबा और दंतेवाड़ा जिले शामिल हैं। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में 36 केंद्रीय योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन करते हुए कृषि उत्पादकता में वृद्धि, फसल विविधीकरण और सतत् कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य पंचायत एवं ब्लॉक स्तर पर कटाई उपरांत भंडारण क्षमता में वृद्धि, सिंचाई के बुनियादी ढांचे में सुधार, आधुनिक तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहन, तथा अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक कृषि ऋण सुविधाओं को सुलभ बनाना है। इसके माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के अनुकूल, बाजार उन्मुख और टिकाऊ कृषि प्रणाली को सशक्त बनाया जाएगा।
मनेंद्रगढ़ जिले में धन-धान्य कृषि योजना का हुआ वर्चुअल शुभारंभ
वर्चुअल शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन देशभर के जिलों की तरह मनेंद्रगढ़ जिले में भी उत्साहपूर्वक किया गया। जिला स्तर पर यह कार्यक्रम वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मनेंद्रगढ़ के सभागार में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य रामजीत लकड़ा, जनपद पंचायत कृषि स्थायी समिति सभापति रविशंकर वैश्य, जनपद सदस्य आनंद सिंह सहित अनेक कृषकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उप संचालक कृषि इन्द्रासन सिंह पैकरा, सहायक संचालक मत्स्य ओ.पी. मण्डावी, अनुविभागीय अधिकारी कृषि श्री धर्मेन्द्र कुमार कुर्रे, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी रवि कुमार गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने कहा कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से किसानों को नई दिशा मिलेगी तथा कृषि क्षेत्र में समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। इस योजना से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार और तकनीकी सहायता भी प्राप्त होगी।
जिले में इस योजना से आत्मनिर्भर किसान और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई शुरुआत
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई यह योजना किसानों की आय दोगुनी करने, कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। एमसीबी जिला भी इस योजना से सीधे लाभान्वित होगा। जिले में वर्तमान में लगभग 1.28 लाख से अधिक कृषक परिवार पंजीकृत हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत लघु एवं सीमांत किसान हैं। इस योजना के माध्यम से जिले में अनुमानित 45 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई विस्तार, 10 हजार टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता का निर्माण तथा 250 से अधिक किसान उत्पादक समूह ( PFO) को तकनीकी और वित्तीय सहयोग प्राप्त होगा।
दलहन उत्पादन में वृद्धि के लिए विशेष “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” के अंतर्गत जिले के भरतपुर एवं खड़गवां ब्लॉक को मॉडल क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां उच्च गुणवत्ता के बीज, प्रशिक्षण, और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इससे जिले में न केवल धान पर निर्भरता कम होगी, बल्कि फसल विविधीकरण, मिट्टी की उर्वरता संरक्षण और कृषक आय में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान है।
आत्मनिर्भर किसान से बनेगा समृद्ध भारत
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जैसे पर्वतीय और आदिवासी अंचलों में इस योजना का क्रियान्वयन ग्रामीण विकास की नई परिभाषा गढ़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल निश्चित ही छत्तीसगढ़ के किसानों को “धान के भंडार से समृद्ध भारत” की ओर अग्रसर करेगी।
ग्राम पंचायत मेरो की उचित मूल्य दुकान हेतु समितियों से आवेदन आमंत्रित, अंतिम तिथि 25 अक्टूबर तक
एमसीबी/ 10 अक्टूबर 2025
कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चिरमिरी, जिला एमसीबी ब्लाक खड़गवां के आदेशानुसार ग्राम पंचायत मेरो स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान (आईडी क्रमांक 532004001) के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत मेरो के सरपंच एवं सचिव द्वारा निभाए जाने में असमर्थता व्यक्त की गई है। इस परिस्थिति को देखते हुए उक्त दुकान का संचालन किसी सक्षम समिति को सौंपे जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, ताकि क्षेत्र की जनता को खाद्यान्न वितरण की सुविधा सुचारु रूप से मिलती रहे। इस उद्देश्य से आदिम जाति सहकारी समिति, बहुउद्देशीय सहकारी समिति, महिला स्वंय सहायता समूह, वन सुरक्षा समिति एवं अन्य पात्र समितियों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक समितियां 10 अक्टूबर 2025 से 25 अक्टूबर 2025 तक कार्यालयीन समय में आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं। आवेदन के साथ पंजीयन प्रमाण पत्र, पासबुक की छायाप्रति एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा। अंतिम तिथि के पश्चात प्राप्त होने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। अनुविभागीय अधिकारी (रा.) चिरमिरी ने स्पष्ट किया है कि उचित मूल्य दुकान का आबंटन नियमानुसार एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अंचल के पात्र हितग्राहियों को राशन वितरण में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।
बंजी हाई स्कूल में बालिकाओं की मानसिक स्वास्थ्य हेतु चलाया गया विशेष जागरूकता कार्यक्रम
एमसीबी/10 अक्टूबर 2025
भारत सरकार की लोकप्रिय योजना बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के अंतर्गत वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के अवसर पर ग्राम पंचायत बंजी की हाई स्कूल में बालिकाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मिशन सशक्तिकरण मिशन शक्ति हब के द्वारा आयोजित किया गया और इसका संचालन जिला समन्वयक श्रीमती तारा कुशवाहा ने किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ाना, उनके आत्मविश्वास और मानसिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति शिक्षित करना था।
कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच, आत्म-सम्मान और आत्म-समर्पण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देशानुसार और जिला कार्यक्रम अधिकारी राजकुमार खाती के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विभिन्न इंटरैक्टिव सत्रों, खेल गतिविधियों और संवाद सत्रों में भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों और शिक्षकों ने बालिकाओं को यह समझाया कि मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही महत्वपूर्ण है और इसे समय पर समझकर और उचित देखभाल के माध्यम से जीवन में स्थिरता, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखी जा सकती है।
कार्यक्रम ने बालिकाओं में आत्मविश्वास और सशक्तिकरण को बढ़ाने के लिए माइंडफुलनेस और ध्यान सत्रों का आयोजन भी किया। विद्यार्थियों ने इन गतिविधियों में भाग लेकर न केवल मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को अनुभव किया, बल्कि अपने भीतर सकारात्मक सोच और आत्म-विश्वास का विकास भी किया। इस पहल ने यह संदेश भी स्पष्ट किया कि स्वस्थ मानसिकता वाली बालिका न केवल स्वयं सशक्त होती है, बल्कि अपने परिवार और समाज के विकास में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकती है। सरकार और प्रशासन की यह पहल बालिकाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर बालिका शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दृष्टि से पूर्ण रूप से सशक्त बनें और अपने जीवन में सफलता और खुशहाली प्राप्त कर सके। यह कार्यक्रम न केवल जागरूकता फैलाने का माध्यम बना, बल्कि बालिकाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के प्रति समाज में सकारात्मक संदेश भी पहुंचाया।
'आदि कर्मयोगी अभियान' से जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा में जोड़ने की ऐतिहासिक पहल
‘आदि कर्मयोगी अभियान‘‘ से जिले में हो रही आदिवासी सशक्तिकरण की नई गाथा
Village Action Plan से विकसित हो रही आत्मनिर्भरता और आदिवासी समाज का नया भविष्य
एमसीबी/10 अक्टूबर 2025

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला की माटी अपने भीतर परिश्रम, परंपरा और प्रकृति के प्रति गहरी आस्था को संजोए हुए है। यहाँ की धरती ने हमेशा समाज को यह सिखाया है कि विकास केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की चेतना और सहभागिता से संभव होता है। यहाँ के जनजातीय समाज ने सदियों से इस धरती को अपनी मेहनत, संस्कृति और आत्मगौरव से जीवंत बनाए रखा है।
इन्हीं जनजातीय समाज को शासन की योजनाओं से जोड़ने, आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाने और विकास की मुख्यधारा में सहभागी बनाने के लिए भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की गई। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा “आदि कर्मयोगी अभियान” की शुरुआत किया गया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और “जनजातीय गौरव वर्ष” की प्रेरणा से प्रारंभ हुआ यह अभियान शासन की उस अवधारणा को साकार करता है जिसमें “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” को धरातल पर दिखाने के लिए अभियान को बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है जनजातीय समाज में उत्तरदायी नागरिक का निर्माण करना, शासन और सेवा के बीच सीधे संवाद को सशक्त बनाना, और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता व आत्मनिर्भरता विकसित करना मुल मकशद है ।
भारत सरकार ने इस अभियान के अंतर्गत देशभर में हजारों आदिवासी बसाहटों में “आदि सेवा केन्द्र” स्थापित करने की योजना बनाई है, जहाँ स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित “आदि साथी” और “आदि सहयोगी” समुदायों को शासन की योजनाओं से जोड़ रहे हैं। ये केन्द्र ग्राम स्तर पर सूचना, सेवाओं और सशक्तिकरण का संगम बनकर उभर रहा हैं। छत्तीसगढ़ का मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला “आदि कर्मयोगी अभियान” के क्रियान्वयन से एक मॉडल जिला बन गया है। यहाँ जिला प्रशासन ने न केवल इस अभियान को गंभीरता से लागू किया, बल्कि इसे स्थानीय समाज की संस्कृति और जरूरतों से जोड़कर एक जीवंत जनभागीदारी का स्वरूप दे दिया।
जिला प्रशासन, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायत और जनजातीय समुदाय ने मिलकर “सेवा से स्वावलंबन” की दिशा में ठोस कार्य किया है। इस जिले की संरचना और आंकड़े बताते हैं कि किस व्यापक दृष्टिकोण से यह अभियान यहाँ लागू हुआ है। विकासखंड मनेन्द्रगढ़ में कुल 54 ग्राम हैं जिनमें 8,421 परिवार निवास करते हैं और यहॉ की कुल जनसंख्या 37,093 है। वहीं विकासखंड खड़गवां में 42 ग्राम है, जिसमें 9,153 परिवार निवास करते हैं और यहां की कुल जनसंख्या 42,332 है। वहीं भरतपुर विकासखंड में 55 ग्रामों में 8,981 परिवार निवास करते है, और कुल जनसंख्या 34,453 निवासरत है। इन तीनों विकासखंडों का कुल योग 151 ग्राम में 26,555 परिवार निवास करते है, वहीं 1,13,878 की जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है। जिसे “आदि कर्मयोगी अभियान” ने विकास के केंद्र में रखा है।
आदि सेवा केन्द्र से शासन की सभी योजनाएं सीधे गाँव तक पहुँच रही
एमसीबी जिले में इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है कि हर चिन्हांकित बसाहट में “आदि सेवा केन्द्र” की स्थापना की गई है जिले की 151 ग्राम बसाहटों में 151 केन्द्र स्थापित और संचालित किए जा चुके हैं। इन केन्द्रों के माध्यम से शासन की सभी योजनाएँ सीधे गाँव तक पहुँच रही हैं। प्रत्येक केन्द्र में स्थानीय समुदाय के ही “आदि साथियों” द्वारा संचालित किया जा रहा है, जो सरकार और समाज के बीच जनभागीदारी निभा रहे हैं। इन केन्द्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक कल्याण से जुड़ी सेवाएँ उपलब्ध हैं।
नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से समुदाय के लोग न केवल योजनाओं की जानकारी पा रहे हैं, बल्कि उनमें सहभागिता भी निभा रहे हैं। जिले में कुल 2686 “आदि साथी” और 473 “आदि सहयोगी” नियुक्त किए गए हैं, जो अपने ग्रामों में विकास की धारा प्रवाहित कर रहे हैं। इनकी भूमिका सिर्फ योजनाओं को पहुँचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ये ग्राम स्तर पर नेतृत्व, प्रबंधन और संवाद की नयी संस्कृति विकसित कर रहे हैं। यह पहला अवसर है जब जनजातीय समाज के युवाओं को शासन व्यवस्था के साथ नेतृत्व करने की भूमिका में जोड़ा गया है।
Village Action Plan से तैयार होगा विकास का जमीनी खाका
“आदि कर्मयोगी अभियान” की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है कि प्रत्येक चिन्हित ग्राम के लिए Village Action Plan तैयार करना है। यह VAP प्रत्येक ग्राम की आवश्यकताओं, समस्याओं और संभावनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। एमसीबी जिले के सभी 151 चिन्हित ग्रामों के VAP तैयार किए जा चुके हैं, और उन्हें पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। यह प्रक्रिया प्रशासनिक पारदर्शिता और जन सहभागिता का अद्भुत उदाहरण है।
इन VAP में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, स्वच्छता, कृषि, महिला सशक्तिकरण, आजीविका, पोषण, वन उत्पाद मूल्यवर्धन, पषुपालन, पर्यटन और डिजिटल साक्षरता जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इन योजनाओं के माध्यम से प्रत्येक ग्राम को आत्मनिर्भर, सशक्त और स्वावलंबी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामसभा और पंचायतों की सहभागिता के साथ यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी ग्राम का विकास बाहरी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि स्थानीय जरूरतों और संस्कृति को ध्यान में रखकर किया जाए। यही कारण है कि यह अभियान “नीति से नीति तक नहीं, नीति से नीति निर्माण तक” की दिशा में बढ़ता हुआ दिखता है।
प्रशासनिक प्रतिबद्धता और विभागीय समन्वय से गढ़ी जायेगी विकास की नई परिभाषा
एमसीबी जिले में इस अभियान का प्रशासनिक संचालन अत्यंत संगठित ढंग से किया जा रहा है। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी विभाग अपने क्षेत्र की योजनाओं के अनुरूप संचालित किया जायेगा। सभी ग्रामों से प्राप्त VAP का अध्ययन कर विभागवार एक जिला स्तरीय कार्य योजना तैयार की जा रही है, इसमें प्रत्येक विभाग का दायित्व स्पष्ट किया गया है जिसमें शिक्षा विभाग को विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारनी है, स्वास्थ्य विभाग को दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाएँ पहुँचानी हैं, महिला एवं बाल विकास विभाग को पोषण मिशन को मजबूत बनाना है, कृषि विभाग को आत्मनिर्भर खेती मॉडल विकसित करना है, जबकि पंचायत विभाग को सामुदायिक संस्थाओं के प्रशिक्षण और सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करना है।
‘‘आदि कर्मयोगी अभियान‘‘ जनजातीय गौरव और नवाचार का संगम
“आदि कर्मयोगी अभियान” ने यह सिद्ध किया है कि जनजातीय समाज को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाकर नहीं, बल्कि योजनाओं का निर्माता बनाकर सशक्त किया जा सकता है। यह अभियान सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आधारशिला रख रहा है। इस अभियान ने शासन के पारंपरिक ढांचे को भी चुनौती दी है।
पहले जहाँ योजनाएं ऊपर से नीचे आती थीं, अब योजनाएँ नीचे से ऊपर बन रही हैं। हर “आदि साथी” एक प्रेरक है, हर “आदि सेवा केन्द्र” एक परिवर्तन का स्थल है, और हर ग्राम अब एक जीवंत इकाई बन चुका है जो स्वयं निर्णय ले रहा है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिलों में यह अभियान जनजातीय गौरव को पुनर्स्थापित कर रहा है। गाँवों में अब युवा डिजिटल साक्षर हो रहे हैं, महिलाएँ स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका के नए अवसर खोज रही हैं, बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा में लौट रहे हैं और समुदाय अपने पर्यावरण के साथ संतुलन बनाए रखते हुए आधुनिकता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
भविष्य में ग्राम से राष्ट्र तक होगा आदि कर्मयोगी का विस्तार
“आदि कर्मयोगी अभियान” एक दीर्घकालीन दृष्टि का प्रतीक है। यह केवल वर्तमान की योजनाओं को लागू करने तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का माध्यम भी है। जब देश “विकसित भारत 2047” की ओर बढ़ रहा है, यह अभियान उस भारत की नींव तैयार कर रहा है जो आत्मनिर्भर, उत्तरदायी और समावेशी होगा। एमसीबी जिला “आदि कर्मयोगी अभियान” का प्रतीक बन चुका है। यहाँ की बसाहटों में स्थापित “आदि सेवा केन्द्र” और तैयार Village Action Plan ने देश के अन्य जनजातीय जिलों के लिए आदर्श बन चुके हैं। आने वाले समय में यह मॉडल पूरे भारत में जनजातीय विकास का मानक बनेगा।