छत्तीसगढ़ / बीजापुर
आपदा से पहले तैयारी, संकट में सुरक्षा : आवापल्ली में NDRF ने दिया आपदा प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण
बीजापुर । उसूर तहसील के आवापल्ली स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में फेमेक्स ( FEMEX-2026 ) कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा मोचन बल ( NDRF) की टीम द्वारा व्यापक आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्थानीय नागरिकों को प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान सतर्कता, त्वरित प्रतिक्रिया एवं सुरक्षित बचाव के उपायों की व्यवहारिक जानकारी प्रदान करना था।
प्रशिक्षण के दौरान NDRF के विशेषज्ञों ने भूकंप, बाढ़, आगजनी, सर्पदंश, विद्युत दुर्घटना, जल दुर्घटना तथा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों का विस्तृत प्रदर्शन किया। टीम ने मॉक ड्रिल के माध्यम से बताया कि आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय संयम रखते हुए किस प्रकार स्वयं की सुरक्षा के साथ अन्य लोगों की भी सहायता की जा सकती है।
विशेषज्ञों ने प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), सुरक्षित निकासी (इवैक्यूएशन), घायल व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की तकनीक, सीपीआर ( CPR ) तथा आपदा के समय आवश्यक सावधानियों की भी जानकारी दी। प्रशिक्षण में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विभिन्न बचाव तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास किया।
NDRF अधिकारियों ने कहा कि आपदा के समय जागरूकता, समय पर सही निर्णय और सामुदायिक सहयोग से जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक हो सकें।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन एवं उपस्थित प्रतिभागियों ने NDRF टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के व्यवहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ता है तथा वे किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो पाते हैं। FEMEX -2026 के तहत यह प्रशिक्षण आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
बीजापुर में चार दिनों की मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, 100 से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय से टूटा संपर्क
बीजापुर । जिले में पिछले चार दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार वर्षा के चलते जिले की कई नदियां और नाले उफान पर हैं, जिससे कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन ठप हो गया है। सबसे अधिक असर चेरपाल नदी के बढ़े जलस्तर से देखने को मिला है, जहां 100 से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
चेरपाल नदी उफान पर, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
लगातार बारिश के कारण चेरपाल नदी खतरे के निशान के करीब बह रही है। नदी के उफान पर आने से आसपास के गांवों का सड़क संपर्क बाधित हो गया है। ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों, इलाज और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
साप्ताहिक बाजार भी प्रभावित
बारिश का असर जिले के कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में साप्ताहिक बाजार प्रभावित हुए हैं। सड़कें और पुल-पुलिया जलमग्न होने के कारण व्यापारी बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित होने लगी है।
प्रशासन अलर्ट, बचाव दल तैनात
बिगड़ते हालात को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। संवेदनशील नदी-नालों और जलमग्न क्षेत्रों में बचाव दलों के साथ राजस्व कर्मचारियों की तैनाती की गई है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का प्रयास न करें तथा बिना आवश्यक कारण घरों से बाहर न निकलें। प्रशासन ने मौसम सामान्य होने तक पूरी सावधानी बरतने और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।
लगातार हो रही बारिश के चलते बीजापुर जिले में जनजीवन प्रभावित है और यदि वर्षा का दौर जारी रहा तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है।
रायपुर : प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से आस्था मंडावी ने लिखी सफलता की नई कहानी
3 लाख रूपए के ऋण और 75 हजार रुपए की सब्सिडी से शुरू किया ‘श्योरस कैफे’, बनीं सफल युवा उद्यमी
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम केंद्र सरकार की एक ऋण-आधारित सब्सिडी योजना है, जिसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करके रोजगार के अवसर पैदा करना है। सरकारी योजनाएं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बीजापुर की युवा उद्यमी आस्था मंडावी ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) का लाभ उठाकर अपना व्यवसाय शुरू किया और सफलता की नई मिसाल कायम की है।
आस्था मंडावी ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत भारतीय स्टेट बैंक, बीजापुर से 3 लाख रुपए का ऋण प्राप्त किया। योजना के अंतर्गत उन्हें परियोजना लागत का 25 प्रतिशत यानी 75 हजार रुपए की मार्जिन मनी सब्सिडी भी स्वीकृत हुई। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (डीआईसी), बीजापुर ने आवेदन प्रक्रिया में आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया।
आस्था ने की बीजापुर में ‘श्योरस कैफे’ की शुरुआत
योजना से मिली आर्थिक सहायता से आस्था ने बीजापुर में ‘श्योरस कैफे’ की शुरुआत की। यह कैफे केवल खान-पान तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां डेली नीड्स स्टोर की सुविधा भी उपलब्ध है। ग्राहक यहां कॉफी, बर्गर, पिज्जा, सैंडविच, फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक्स के साथ-साथ नमकीन, बिस्कुट, चॉकलेट, मिक्सचर और दैनिक उपयोग की कई जरूरी वस्तुएं भी खरीद सकते हैं।
एक ही स्थान पर कई सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास
आस्था का उद्देश्य ग्राहकों को उनकी जरूरत की अधिक से अधिक वस्तुएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। गुणवत्तापूर्ण सेवाओं, ग्राहकों की जरूरतों को समझने और विनम्र व्यवहार के कारण ‘श्योरस कैफे’ स्थानीय नागरिकों और युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। आस्था मंडावी ने कम उम्र में उद्यमिता का रास्ता चुनकर यह साबित किया है कि सही योजना, आत्मविश्वास और मेहनत से सफलता हासिल की जा सकती है। उनका यह प्रयास उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ भविष्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा।
युवाओं के सपनों को साकार कर रही है पीएमईजीपी योजना
आस्था मंडावी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम युवाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं देता, बल्कि उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान करता है। आस्था की सफलता जिले की युवतियों और अन्य युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणा बनी है।
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए और मेहनत व दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ा जाए, तो कोई भी युवा अपने सपनों को सफलता की नई उड़ान दे सकता है।
रायपुर : बकरी पालन बना आत्मनिर्भरता का आधार
देविका स्व-सहायता समूह ने बदली महिलाओं की जिंदगी
बकरी पालन आज ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत, उच्च प्रजनन क्षमता और मांस-दूध की निरंतर मांग के कारण आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत आधार बन चुका है। इसे गरीबों की कामधेनु भी कहा जाता है क्योंकि यह भूमिहीन, छोटे किसानों और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का सबसे आसान जरिया है। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम चिन्नाकोडपाल की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और शासकीय योजना के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड विकास कार्यक्रम) के अंतर्गत मिली 50,000 रुपए की चक्रीय निधि ने देविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं को नई शुरुआत का अवसर दिया। इस राशि से समूह की महिलाओं ने बकरी पालन और सब्जी उत्पादन की गतिविधियां शुरू कीं और आज अपनी आय बढ़ाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
चक्रीय निधि से मिली नई शुरुआत
समूह की अध्यक्ष सरिता तेलम और सचिव लक्ष्मी तेलम के नेतृत्व में 10 सदस्यीय देविका स्व-सहायता समूह नियमित रूप से आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रहा है। समूह की महिलाओं ने आपसी सहयोग और सामूहिक प्रयास से बकरी पालन को अपनी आय का मजबूत आधार बनाया है। इसके साथ ही वे सब्जी उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर रही हैं। शासकीय योजना से मिली चक्रीय निधि ने महिलाओं को आर्थिक गतिविधि शुरू करने के लिए आवश्यक सहयोग दिया। समूह की महिलाओं ने इस अवसर का उपयोग मेहनत और एकजुटता के साथ किया और धीरे-धीरे अपनी आजीविका को मजबूत बनाया।
मजदूरी से आत्मनिर्भरता तक का सफर
समूह से जुड़ने से पहले महिलाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण अधिकांश महिलाएं मजदूरी पर निर्भर थीं। परिवार की जरूरतें पूरी करने में कई बार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और आवश्यकता पड़ने पर ऋण लेना भी मजबूरी बन जाता था। समूह से जुड़ने और बकरी पालन शुरू करने के बाद महिलाओं की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया। अब वे नियमित रूप से बचत कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर समूह से ही कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं।
सामूहिक प्रयास से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति
बकरी पालन और सब्जी उत्पादन से होने वाली अतिरिक्त आय ने महिलाओं के परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत किया है। समूह की गतिविधियों से महिलाओं में बचत की आदत, वित्तीय अनुशासन और सामूहिक निर्णय लेने की भावना भी विकसित हुई है। अब महिलाएं केवल आय अर्जित ही नहीं कर रहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास और समाज में नई पहचान भी मिली है।
आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी मिसाल
देविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं की यह सफलता बताती है कि शासकीय योजनाओं का सही उपयोग, सामूहिक प्रयास और मेहनत मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आज देविका स्व-सहायता समूह की महिलाएं बकरी पालन और सब्जी उत्पादन के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। उनकी यह सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि एकजुट होकर किया गया प्रयास न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकता है, बल्कि पूरे समुदाय के विकास का आधार भी बन सकता है।
बीजापुर के दूरस्थ ग्राम मंडेम को मिली डिजिटल कनेक्टिविटी की सौगात
बीजापुर । जिले के भैरमगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मंडेम में नए मोबाइल नेटवर्क टॉवर का सफलतापूर्वक संचालन प्रारंभ हो गया है। लंबे समय से नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे मंडेम एवं आसपास के ग्रामीणों के लिए यह किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। टॉवर चालू होने के साथ ही अब क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं पहले की तुलना में अधिक सुचारु रूप से उपलब्ध होने लगी हैं।
जिला मुख्यालय बीजापुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत मंडेम, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 2,168 हेक्टेयर है, अब डिजिटल कनेक्टिविटी की मुख्यधारा से जुड़ गया है। मोबाइल टॉवर की स्थापना से ग्रामीणों को संचार संबंधी समस्याओं से राहत मिलेगी और आधुनिक डिजिटल सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी।
अब ग्रामीणों को मोबाइल कॉल करने, वीडियो कॉल, ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, सरकारी ऑनलाइन सेवाओं तथा आपातकालीन परिस्थितियों में संपर्क स्थापित करने में पहले जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। नेटवर्क बेहतर होने से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, किसानों एवं आम नागरिकों को विशेष लाभ मिलेगा।
मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने से शासन की विभिन्न डिजिटल योजनाओं एवं ई-गवर्नेंस सेवाओं का लाभ भी ग्रामीणों तक तेजी से पहुंचेगा। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज़, बैंकिंग सुविधाएं तथा अन्य इंटरनेट आधारित सेवाओं का उपयोग अब अधिक सुगम हो सकेगा।
स्थानीय ग्रामीणों ने नए मोबाइल टॉवर के संचालन पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से क्षेत्र में बेहतर नेटवर्क की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने से गांव के लोगों का अपने परिजनों एवं बाहरी दुनिया से संपर्क मजबूत होगा तथा शिक्षा, रोजगार और विकास के नए अवसर भी खुलेंगे।
ग्राम पंचायत मंडेम में स्थापित यह मोबाइल टॉवर केवल संचार सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच बढ़ाने की दिशा में यह पहल निश्चित रूप से ग्रामीणों के जीवन को अधिक सुविधाजनक और आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
उद्यानिकी विभाग की सहायता से बदली किसान की तस्वीर
मल्चिंग तकनीक से मिर्च की खेती में हुई छह लाख रुपये की आय
बीजापुर । जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम पुतकेल निवासी किसान एर्रागोला राजेन्द्र ने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और शासकीय योजना का लाभ लेकर अपनी खेती को लाभकारी बनाया है। पहले वे धान की खेती के अलावा शेष भूमि पर कोई अन्य फसल नहीं लेते थे। आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क कर मिर्च की खेती एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।
शुरुआत में मिर्च की खेती में लागत अधिक और लाभ कम होने से उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस दौरान उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें मल्चिंग तकनीक अपनाने की सलाह दी। विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन ( National Horticulture Mission ) योजना के अंतर्गत ₹32,000 की अनुदान राशि प्रदान की गई, जिससे उन्होंने मल्चिंग शीट का उपयोग कर मिर्च की खेती शुरू की।
मल्चिंग तकनीक अपनाने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्ष 2026 में किसान एर्रागोला राजेन्द्र को लगभग 30 क्विंटल मिर्च का उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे उन्हें करीब 6 लाख रुपये की आय हुई।
किसान ने बताया कि उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय सहायता से उनकी खेती अधिक लाभकारी बनी है। उन्होंने अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों एवं विभागीय योजनाओं का लाभ उठाकर आय बढ़ाने की अपील की।
स्वामी आत्मानंद विद्यालय नैमेड़ में पूर्व नौसेना अधिकारी रणवीर सिंह भदौरिया का जन्मदिन मनाया गया
छात्र कैबिनेट ने ली शपथ
बीजापुर । स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, नैमेड़ में भूतपूर्व भारतीय नौसेना पेटी ऑफिसर रणवीर सिंह भदौरिया के जन्मदिन के अवसर पर न्योता भोज, स्कूल कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विकासखंड शिक्षा अधिकारी नागेश्वर निषाद तथा अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य डॉ. ओमेश्वरी देवांगन ने की। इस अवसर पर उप प्राचार्य सोमेंद्र सिंह भदौरिया, ग्राम सरपंच श्रीमती ललिता ओयाम, उपसरपंच दीपक कोरसा, पालकगण, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं विद्यार्थियों की आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ। इसके बाद स्कूल कैबिनेट के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। प्राचार्य डॉ. ओमेश्वरी देवांगन एवं बीईओ नागेश्वर निषाद ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर पूर्व नौसेना अधिकारी रणवीर सिंह भदौरिया के जीवन, सैन्य सेवा और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों ने उनके प्रेरणादायी अनुभवों को गंभीरता से सुना और उनसे राष्ट्रभक्ति एवं अनुशासन का संदेश ग्रहण किया।
रणवीर सिंह भदौरिया ने वर्ष 1961 में मात्र 16 वर्ष की आयु में भारतीय नौसेना में भर्ती होकर अपनी सेवा प्रारंभ की। सेवा अवधि के दौरान उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें तीन पदोन्नतियां प्राप्त हुईं। उन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध तथा 1971 के भारत-पाक (बांग्लादेश मुक्ति) युद्ध में वीर सैनिक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय नौसेना में लगभग 11 वर्षों की सेवा के दौरान उन्हें 20 से अधिक प्रशंसा-पत्र एवं अनेक वीरता एवं सेवा पदक प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें नववर्ष दीर्घ सेवा मेडल से भी सम्मानित किया। अपने सैन्य जीवन में उन्होंने रूस, अदन की खाड़ी, इथोपिया, मताडी, डी. कांगो और बेल्जियम सहित विभिन्न देशों में सेवाएं दीं। वर्ष 1967 से 1970 तक वे रूस में नौसेना अधिकारी के रूप में पदस्थ रहे, जहां पनडुब्बी परीक्षण के दौरान उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें रक्षा मंत्रालय, रूस द्वारा प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया।
सेवानिवृत्ति के बाद वे अपने पैतृक गांव नैमेड़ लौटे और खेती-किसानी के साथ समाजसेवा में सक्रिय रहे। उन्होंने पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार आवाज उठाई तथा युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होकर राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में रणवीर सिंह भदौरिया का जन्मदिन केक काटकर मनाया गया। उनके परिजन एवं उपस्थित सभी लोगों ने उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की। साथ ही एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत 214वीं बटालियन के सहयोग से विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया गया। इसके पश्चात आयोजित न्योता भोज में सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण किया।
दरभा के जैगूर से गूंजा मन की बात प्रधानमंत्री के संदेश को सुनने उमड़ा जनसैलाब
प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने बांटे वनाधिकार पत्र, किया हर घर तिरंगा का शुभारंभ और एक पेड़ माँ के नाम अभियान में किया वृक्षारोपण
बीजापुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात के 136वें संस्करण का सामूहिक श्रवण रविवार को बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के अंदरूनी क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत दरभा के जैगूर गांव में उत्साह और गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों का जनसैलाब उमड़ा और सभी ने प्रधानमंत्री के प्रेरणादायी संदेश को तन्मयता के साथ सुना।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत कारगिल विजय दिवस पर देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान को नमन करते हुए आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, जनभागीदारी, पर्यावरण संरक्षण तथा एक पेड़ माँ के नाम अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। वहीं छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के जल संरक्षण कार्य को प्रमुखता के साथ सराहना की साथ ही युवाओं के नवाचार, वैज्ञानिक सोच और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका पर भी विशेष बल दिया।
बीजापुर के दरभा पंचायत के जैगूर गांव में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने प्रधानमंत्री के संदेशों को जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
इस अवसर पर मंत्री कश्यप ने छह हितग्राहियों को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र वितरित कर उन्हें भूमि पर वैधानिक अधिकार प्रदान किए। उन्होंने नीट-2026 में सफलता प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा हर घर तिरंगा अभियान का शुभारंभ करते हुए ग्रामीणों को तिरंगा भेंट किया। साथ ही प्रधानमंत्री के आह्वान को साकार करते हुए एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और अधिक से अधिक लोगों से पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण में सहभागी बनने की अपील की।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा, जिला पंचायत सदस्य मैथियस कुजूर, जिला एवं जनपद पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्यगण सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कलेक्टर विश्वदीप, डीएफओ डॉ. जाधव सागर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमन कुमार झा, जिला पुलिस, वन विभाग तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम राष्ट्रभक्ति, जनभागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और विकसित भारत के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।
ढाई वर्षों की यादगार सेवा को मिला सम्मान : पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव को जिला प्रशासन ने दी भावभीनी विदाई
बीजापुर । बीजापुर जिले में लगभग ढाई वर्षों के सफल, समर्पित एवं उल्लेखनीय कार्यकाल के उपरांत कबीरधाम जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में स्थानांतरित हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव को जिला प्रशासन द्वारा शुक्रवार को जिला कार्यालय के इन्द्रावती सभाकक्ष में भावभीनी एवं गरिमामयी विदाई दी गई। समारोह में कलेक्टर विश्वदीप सहित जिला प्रशासन, वन विभाग एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने डॉ. यादव के उत्कृष्ट योगदान को याद करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं सफल कार्यकाल की शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर कलेक्टर विश्वदीप ने कहा कि बीजापुर जैसे लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों से प्रभावित जिले में डॉ. जितेन्द्र यादव का कार्यकाल ऐतिहासिक और प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में पुलिस, प्रशासन एवं सुरक्षा बलों के उत्कृष्ट समन्वय से जिले ने विकास, सुरक्षा और शांति की दिशा में अभूतपूर्व उपलब्धियाँ हासिल कीं। उन्होंने कहा कि डॉ. यादव के नेतृत्व में संचालित सफल अभियानों, सुदृढ़ कानून व्यवस्था तथा जनविश्वास को मजबूत करने वाले प्रयासों ने बीजापुर को नई पहचान दिलाई है। उनका यह कार्यकाल जिले के लिए एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।
कलेक्टर ने कहा कि डॉ. यादव ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य, संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और दृढ़ नेतृत्व का परिचय देते हुए प्रशासन एवं पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया। उनके नेतृत्व में न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई, बल्कि आम नागरिकों में विश्वास का वातावरण भी विकसित हुआ। उन्होंने कबीरधाम जिले में नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और सुखमय जीवन की कामना की।
समारोह में इन्द्रावती टाइगर रिजर्व के उप संचालक संदीप बलगा, डीएफओ डॉ. जाधव सागर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नम्रता चौबे, आईपीएस रविन्द्र मीणा एवं आईपीएस अमन कुमार झा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी अधिकारियों ने डॉ. यादव के साथ कार्य करने के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उनका नेतृत्व सदैव प्रेरणादायी, सहयोगपूर्ण और टीम भावना को प्रोत्साहित करने वाला रहा। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. यादव ने शांतचित्त होकर निर्णय लिए और सभी विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर प्रशासनिक कार्यों को नई दिशा दी।
अपने विदाई उद्बोधन में डॉ. जितेन्द्र यादव भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि बीजापुर में बिताया गया समय उनके जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय अध्याय रहेगा। उन्होंने कहा कि जिले की उपलब्धियाँ किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि जिला प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बलों तथा सभी विभागों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों, कठिन चुनौतियों और लगातार आने वाली बाधाओं के बावजूद सभी ने एक टीम की तरह कार्य किया, जिसके परिणामस्वरूप जिले में शांति, विश्वास और विकास का नया वातावरण स्थापित हुआ। उन्होंने कहा कि आज बीजापुर नक्सलवाद से मुक्त होकर अमन, चौन और विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है, जो पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर भूपेन्द्र अग्रवाल एवं संयुक्त कलेक्टर जागेश्वर कौशल सीएमएचओ डॉ बीआर पुजारी ने भी डॉ. यादव के सेवा-समर्पण, कार्यशैली और प्रशासनिक योगदान को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ. यादव की कार्यनिष्ठा, अनुशासन और सकारात्मक सोच आने वाले अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
विदाई समारोह में संयुक्त कलेक्टर उत्तम पंचारी सहित सहित जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने डॉ. जितेन्द्र यादव को स्मृति-चिन्ह एवं शुभकामनाएँ भेंट कर उनके सफल एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
भावनाओं, सम्मान और आत्मीयता से परिपूर्ण इस विदाई समारोह ने एक ऐसे अधिकारी के प्रति जिले की कृतज्ञता को अभिव्यक्त किया, जिसने अपने समर्पण, साहस और उत्कृष्ट नेतृत्व से बीजापुर के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी।
ब्रिज कोर्स से तय होगी 1200 शाला त्यागी व अप्रवेशी बच्चों की कक्षाएं, शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ेंगे बच्चे
बीजापुर । जिले में शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विशेष पहल की जा रही है। कलेक्टर विश्वदीप एवं जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे के निर्देशन में नक्सल प्रभावित और अंदरूनी क्षेत्रों के 09 से 14 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1200 बालक-बालिकाओं की पहचान कर उन्हें आवासीय पोर्टा केबिनों में प्रवेश दिलाया गया है।
ये ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने गांव में स्कूल की सुविधा नहीं होने, घरेलू कार्यों या नक्सल प्रभावित परिस्थितियों के कारण बीच में पढ़ाई छोड़ दी थी अथवा कभी स्कूल ही नहीं जा सके। शिक्षकों, अधीक्षकों और अनुदेशकों के सहयोग से इन बच्चों को विद्यालयीन वातावरण के अनुरूप ढालने के लिए प्रारंभिक दिनों में टीवी, भ्रमण, खेलकूद, नृत्य, क्राफ्ट और चित्रकला जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं।
अब इन बच्चों की शैक्षणिक क्षमता का आकलन कर उनकी उपयुक्त कक्षाओं का निर्धारण करने के लिए तीन माह का ब्रिज कोर्स संचालित किया जाएगा। इस दौरान बच्चों के पूर्व ज्ञान का मूल्यांकन करते हुए बुनियादी भाषा कौशल और संख्या ज्ञान को मजबूत किया जाएगा। ब्रिज कोर्स पूर्ण होने के बाद परीक्षा लेकर बच्चों के शैक्षणिक स्तर के अनुसार उन्हें उचित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा।
इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे ने जिला शिक्षा अधिकारी, डीएमसी, सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, बीआरसी एवं संकुल समन्वयकों की बैठक लेकर निर्देश दिए हैं कि ब्रिज कोर्स से जुड़े बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन-अध्यापन तथा भोजन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे सहज रूप से शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।
जिला शिक्षा अधिकारी राजेश पांडेय ने कहा कि वर्षों बाद बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ रहे हैं। इन बच्चों को विशेष देखभाल और अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता है तथा प्रशासन की मंशा के अनुरूप उनके समग्र विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
‘‘रन फॉर इंद्रावती ’’ बाघ व वन्यजीव संरक्षण के समर्थन में दौड़िए
बीजापुर । इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी, छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 29 जुलाई 2026 दिन बुधवार को (अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस) के अवसर पर ‘‘रन फॉर इंद्रावती’’ मैराथन का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य जनसामान्य, युवाओं एवं विद्यार्थियों में बाघ एवं वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता के महत्व तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरुकता बढ़ाना है। यह दौड़ केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व और उसके समृद्ध वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सामूहिक जनसमर्थन का प्रतीक होगी।
प्रतियोगिता दो श्रेणियों में आयोजित की जाएगी जिसमें 10 किलोमीटर रन एवं 5 किलोमीटर रन दोनों श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
पुरस्कार राशि 10 किलोमीटर (पुरुष एवं महिला वर्ग) प्रथम स्थान ₹7,000 एवं प्रमाण-पत्र तथा द्वितीय स्थान 5,000 एवं प्रमाण-पत्र एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को ₹4,000 एवं प्रमाण-पत्र। प्रदान किया जाएगा। इसी तरह 5 किलोमीटर (पुरुष एवं महिला वर्ग) के लिए प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 5,000 एवं प्रमाण-पत्र। द्वितीय स्थान को 4,000 एवं प्रमाण-पत्र तथा तृतीय प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 3,000 एवं प्रमाण-पत्र प्रदाय किया जाएगा।
इच्छुक प्रतिभागी पोस्टर पर दिए गए फत् ब्वकम को स्कैन कर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि वे कार्यक्रम से पूर्व अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से पूर्ण करें। पंजीयन केवल ऑनलाइन माध्यम से होगा।
मैराथन 29 जुलाई 2026 को प्रातः 7ः00 बजे इंदिरा स्टेडियम, बीजापुर से प्रारंभ होगी वहीं चेस्ट नंबर सुबह 5ः30 से 6ः30 बजे तक वितरण होगी।
आयोजकों ने जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ के युवाओं, विद्यार्थियों, खेल प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता कर ’रन फॉर इंद्रावती‘ को सफल बनाने तथा बाघ एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करने का आह्वान किया है।
आइए, अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर एक कदम बाघों और प्रकृति के संरक्षण की ओर बढ़ाएँ।
‘‘रन फॉर इंद्रावती’’ दौड़िए प्रकृति के लिए, दौड़िए बाघों के भविष्य के लिए।
मेहनत और एकजुटता से बदली तकदीर, मछली पालन से आत्मनिर्भर बना हिमसाराज स्व-सहायता समूह
बीजापुर । ग्राम चिन्नाकोडेपाल के 10 युवाओं ने एकजुट होकर गठित हिमसाराज पुरुष स्व-सहायता समूह के माध्यम से मछली पालन को आजीविका का साधन बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद समूह ने सामूहिक प्रयास, बचत और श्रमदान के बल पर सफलता हासिल की है।
समूह के अध्यक्ष सुकल तेलम एवं सचिव प्रदीप तेलम के नेतृत्व में 10 सदस्यीय समूह ने ₹50 हजार की चक्रीय निधि के सहयोग से मछली पालन का कार्य शुरू किया। समूह गठन से पहले अधिकांश सदस्य पारंपरिक खेती एवं मजदूरी पर निर्भर थे, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा था। बेहतर आय की तलाश में सदस्यों ने सामूहिक रूप से मछली पालन अपनाने का निर्णय लिया।
शुरुआती दौर में समूह के सामने आधुनिक तकनीक की जानकारी और पर्याप्त पूंजी का अभाव था। सदस्यों ने नियमित बचत शुरू की तथा श्रमदान कर तालाब की साफ-सफाई, गहरीकरण और पानी की गुणवत्ता में सुधार किया। इसके बाद तालाब में रोहू, कतला जैसी उन्नत प्रजातियों के मत्स्य बीज डाले गए। सभी सदस्यों ने जिम्मेदारियां बांटकर तालाब की नियमित देखरेख की, जिससे मछलियों का बेहतर विकास हुआ।
लगभग आठ माह की मेहनत के बाद समूह को पहली बड़ी सफलता मिली। तालाब से अच्छी गुणवत्ता की मछलियों का उत्पादन हुआ, जिनकी बिक्री स्थानीय एवं आसपास के बाजारों में की गई। इससे समूह की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और सदस्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी।
हिमसाराज स्व-सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि सामूहिक प्रयास, अनुशासित बचत, वैज्ञानिक पद्धति और निरंतर मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वरोजगार के बेहतर अवसर विकसित किए जा सकते हैं। समूह आज क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर आत्मनिर्भरता और सामुदायिक विकास का संदेश दे रहा है।
कम अवधि में पकने वाली धान की किस्में देरी से मानसून और एल नीनो के प्रभाव से बचाव में कारगर
बीजापुर।
एल नीनो के प्रभाव से बीजापुर जिले में इस वर्ष अब तक सामान्य से 50% ही वर्षा हुई है, जिससे खरीफ की बुवाई में विलम्ब हो रही है। ऐसी परिस्थिति में किसान भाई वर्षा जल संचयन व जल संरक्षण कर कम अवधि व मध्यम अवधि धान की किस्में (90 से 110 व 110 से 130 दिन) जैसे:- MTU-1010, IR-64, MTU-1156, MTU-1153 विक्रम- TCR आदि धान की किस्मों का खुर्रा एवं सीधी बोवाई करें। सीधी बोवाई से 20% पानी बचत होती है, साथ ही कास्त लागत लगभग 5000 रूपये प्रति एकड़ कम होती है तथा फसल भी 12-15 दिन पहले पक जाती है।
मरहान-टिकरा जमीन में कृषक धान के स्थान पर कोदो, कुटकी, रागी, मूंग, उड़द, अरहर, मक्का एवं तिलहन की खेती करें। ऐसे कृषकों को सरकार द्वारा इस वर्ष कृषक उन्नति योजना अन्तर्गत प्रति एकड़ 15000 रूपये सहायता राशि प्रदाय की जाएगी।
आवश्यकतानुसार कृषक अपने फसलों में मल्चिंग/पलवार का उपयोग करें। इससे भूमि की नमी संरक्षित रहती है तथा फसलें सूखे के प्रभाव से सुरक्षित रहती है। किसान फसल विविधीकरण अपनाकर जोखिम करें तथा एक ही फसल पर निर्भरता से बचें।
किसान भाई एल-नीनो के प्रभाव से फसल नुकसान एवं क्षति से सुरक्षा हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत सभी कृषक अधिसूचित फसलों का बीमा करवाएं। अ़ऋणी किसान को बीमा कराने के लिए धान असिंचित हेतु 924 रूपये/हे. तथा धान सिंचित हेतु 1056 रूपये/हे. प्रीमीयम राशि जमा करना होगा। योजनांतर्गत बीमा करने हेतु अ़ऋणी कृषक नजदीकी लोक सेवा केन्द्र या अपने बैंक शाखा में आवेदन जमा कर या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क कर फसल बीमा करा सकते हैं।
खरीफ फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई
बीजापुर।
उप संचालक कृषि पीएस कुसरे ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले के किसान मुख्य फसल धान सिंचित, धान असिंचित, कोदो, कुटकी, रागी, मूंग, मक्का, अरहर, उड़द एवं मूंगफली का बीमा करा सकते हैं। वहीं वर्ष 2026 के लिए खरीफ फसल बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है।
किसानों के फसल को प्रतिकुल मौसम, सूखा, बाढ़, जलप्लावन, कीटव्याधि, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को होने वाले नुकसान से राहत दिलाने के लिए बीमा में शामिल किए जाने वाले किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत ऋणी एवं अऋणी किसान जो भू-धारक हो सम्मिलित हो सकते हैं। बीमा करने हेतु कृषक संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या कृषि विभाग के जिला अथवा विकासखण्ड मुख्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
वन विभाग की पहल से आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिला स्वरोजगार का सहारा
17 लाख रुपये के ऋण से चार हितग्राहियों को मिला नया जीवन, विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
बीजापुर 15 जुलाई 2026
वन प्रबंधन समितियों के खातों में जमा लाभांश एवं चक्रीय निधि की राशि का उपयोग करते हुए वनमंडल बीजापुर ने आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं वनांचल के ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल की है। विभाग द्वारा कुल 17 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराकर चार हितग्राहियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत पामेड़ एवं आवापल्ली परिक्षेत्र के चार हितग्राहियों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता दी गई। इनमें तीन हितग्राहियों को किराना दुकान संचालन हेतु क्रमशः 2 लाख, 3 लाख एवं 2 लाख रुपये तथा एक हितग्राही को ट्रैक्टर, ट्रॉली एवं डोजर खरीदने के लिए 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया।
लाभान्वित हितग्राहियों में श्री दिलीप बीराबोईन (कोतापल्ली समिति), श्री दिनेश कुमार कचलम (मुरदोंडा समिति), श्रीमती जोशिला भगत (कोतापल्ली समिति) तथा श्री नागुल सत्यनारायण (आवापल्ली समिति) शामिल हैं। इन सभी को उपलब्ध कराई गई वित्तीय सहायता से वे अपना स्वरोजगार स्थापित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
वन विभाग का उद्देश्य केवल वन संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि वनांचल के लोगों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान को भी बढ़ावा देना है। यह पहल विशेष रूप से आत्मसमर्पित नक्सलियों को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने, समाज में स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करने तथा क्षेत्र में शांति, विश्वास और समावेशी विकास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वनमंडल बीजापुर ने भविष्य में भी पात्र हितग्राहियों को विभिन्न आजीविका आधारित योजनाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने की बात कही है। यह पहल वनांचल के ग्रामीणों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास एवं आर्थिक सशक्तिकरण का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरी है।
बीजापुर को मिलेगा स्थायी पेयजल का संबल, मिंगाचल (बेरूदी नदी) पर बन रहा एनीकट
बीजापुर
जिले में पेयजल व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बीजापुर आवर्धन जल प्रदाय योजना के अंतर्गत मिंगाचल स्थित बेरूदी नदी पर एनीकट निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया है।
इस एनीकट के निर्माण से बीजापुर शहर के लिए वर्षभर पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही नदी में जल संरक्षण बढ़ेगा, जिससे भू-जल स्तर में सुधार, जल संवर्धन तथा स्थानीय लोगों और पशुओं के लिए निस्तारी की बेहतर सुविधा सुनिश्चित होगी। यह परियोजना केवल पेयजल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिले में सतत जल प्रबंधन को भी मजबूत करेगी। एनीकट बनने से वर्षा जल का बेहतर संचयन होगा और आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के पूर्ण होने के बाद बीजापुर शहर के नागरिकों को अधिक सुरक्षित, नियमित और बेहतर पेयजल सुविधा प्राप्त होगी, वहीं जल संरक्षण की दिशा में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जिले के सभी ब्लॉक में होगी पशु औषधि विक्रय केन्द्र की स्थापना
बीजापुर 06 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ शासन पशुधन विकास विभाग के निर्देशानुसार जिले के प्रत्येक ब्लॉक में पशु औषधि विक्रय केन्द्र खोला जाना है। जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री कृषि सेवा केन्द्र एवं सहकारी समितियों के माध्यम से पशुपालकों को सस्ती दरेां पर अच्छी गुणवत्ता की पशु औषधियां उपलब्ध कराना है। पशु औषधि केन्द्रों के परिपालन हेतु न्यूनतम 120 स्क्वायर फिट स्वयं की या किराये की जगह की आवश्यकता होगी तथा बी फार्मा/डी फार्मा डिग्री होल्डर एवं ड्रग्स सेल लाईसंेस का होना आवश्यक है।
उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवायें जिला बीजापुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के 4 विकासखंडों में पशु औषधि विक्रय केन्द्र का संचालन प्रधानमंत्री कृषि सेवा केन्द्र एवं सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाना प्रस्तावित है। इच्छुक समितियों अधिक जानकारी के लिए निकटतम पशु चिकित्सालय से संपर्क कर सकते है एवं आवेदनकर्ता ऑनलाईन पोर्टल www.dahd.gov. in पर आवेदन कर सकते है। पशु औषधि विक्रय केन्द्र की स्थापना से जिले के पशुपालकों को सस्ते दर पर पशु औषधियां उपलब्ध होंगी जिससे पशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तथा पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा।