छत्तीसगढ़ / बीजापुर
आजादी के 79 साल बाद भी विकास की राह देख रहा कोत्तापल्ली
सड़क समेत मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण
बीजापुर । जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर का आश्रित गांव कोत्तापल्ली आजादी के 79 वर्ष बाद भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का इंतजार कर रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित यह गांव सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाओं से अब भी वंचित है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान इस गांव की ओर नहीं गया, जिससे यहां के लोग अनेक समस्याओं का सामना करने को मजबूर हैं।
कोत्तापल्ली गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है। भीमाराम और रायपुरम के बीच स्थित एक बिंदु से गांव की दूरी लगभग 20 से 25 किलोमीटर है, जहां तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को पथरीले रास्तों, नदी-नालों और जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में नदी-नाले उफान पर होने से आवागमन और भी कठिन हो जाता है। ऐसे समय में ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर सरकारी कार्यों के लिए लगभग 52 किलोमीटर दूर आवापल्ली ब्लॉक मुख्यालय पहुंचने को मजबूर होते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का पहुंचना बेहद दुर्लभ रहा है। 25 मार्च 2017 को पहली बार गांव में एक प्रशासनिक शिविर आयोजित किया गया था। इसके बाद भी गांव की समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने उसूर से तेलंगाना के पुसगुप्फा तक सड़क निर्माण कराया है, लेकिन कोत्तापल्ली को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क आज तक नहीं बन सकी। जबकि क्षेत्र में नक्सल प्रभाव पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गांव तक सर्व मौसम सड़क, स्वास्थ्य सुविधा, बिजली, शिक्षा और संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि कोत्तापल्ली भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।
सेवा सेतु - जनता के द्वार, डिजिटल सरकार
छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल प्रशासन का नया अघ्याय
बीजापुर । डिजिटल युग में सुशासन को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य शासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, सुलभ और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लोक सेवा केन्द्रों का उन्नयन कर उन्हें अब ’’सेवा-सेतु केन्द्र‘‘ के रूप में संचालित किया जा रहा है।
इसे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनी है। ‘‘सेवा-सेतु पोर्टल’’ का सबसे बडा लाभ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिल रहा है।
लोक सेवा केन्द्र अब ‘‘सेवा-सेतु केन्द्र“ और ऑपरेटर सेवा सेतु प्रबंधक कहलायेंगें। जिले के सभी ब्लॉक के सचिवों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। पूर्व में लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से 73 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं अब सेवा-सेतु केन्द्रों के जरिए 442 डिजिटल सेवाएं नागरिकों को प्रदान की जा रही है।
राज्य शासन के द्वारा नागरिकों के हित के लिए डिजिटल पहल- अब नागरिकों को अलग-अलग सेवाओं के लिए राजस्व कार्यालय, जनपद पंचायत, नगर पालिका या अन्य विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगें। एक ही पोर्टल से आवेदन, दस्तावेज अपलोड, आवेदन की स्थिति देखना और निर्धारित समय-सीमा में सेवा प्राप्त करना संभव होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को छोटे-छोटे काम या प्रमाण-पत्र के लिए तहसील या जिला मुख्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें उनके घर के नजदीक ही डिजिटल सेवा मिल सकेंगी।
गांव में ही पोर्टल से आवेदन होने से ग्रामीणों के समय और आने-जाने के खर्च में भारी कमी आएगी।
इस नई व्यवस्था की खास बात यह है कि इसका विस्तार पंचायत स्तर तक किया गया है। पोर्टल एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा। नागरिक इस पोर्टल पर जाकर अपनी जरूरत की सेवा का चयन कर सकते हैं और संबंधित दस्तावेज अपलोड कर ऑनलाइन आवेदन कर पायेंगें।
तकनीक के बढते उपयोग को देखते हुए अब सेवा सेतु की सेवाओं को व्हाट्सप से भी जोडा गया है। घर बैठे नागरिक व्हाट्सएप के माध्यम से सेवाओं और आवेदन की जानकारी ले सकते हैं।
इनमें जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, विवाह प्रमाण पत्र, राजस्व प्रकरण, नाम परिवर्तन के लिए राजपत्र प्रकाशन तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी अनेक महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। नागरिक अब घर बैठे ऑनलाइन आवेदन की स्थिति भी आसानी से ट्रैक कर सकते हैं। प्रत्येक सेवा के लिए समय-सीमा निर्धारित होने से कार्यों के निराकरण में तेजी और पारदर्शिता आई है।
बीजापुर तेंदूपत्ता गोदाम अग्निकांड: डीएफओ हटे,अब बाकी जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?
बीजापुर । बीजापुर जिला मुख्यालय से लगे ग्राम ईटपाल स्थित तेंदूपत्ता गोदाम में हुए भीषण अग्निकांड मामले में अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इस अग्निकांड में लगभग 25 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता जलकर खाक हो गया, जिसकी अनुमानित लागत 8 से 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है।घटना के बाद राज्य सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए बीजापुर वनमंडलाधिकारी (DFO) रमेश जांगड़े को हटा दिया है, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि मामले के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई कब होगी?
रूपसाय सलाम पहुंचे बीजापुर,गोदाम का किया निरीक्षण
शुक्रवार को छत्तीसगढ़ राज्य लघुवनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम अचानक बीजापुर पहुंचे। उन्होंने ईटपाल तेंदूपत्ता गोदाम का निरीक्षण किया और घटना की जानकारी ली। निरीक्षण के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए सलाम ने कहा कि मामले की विभागीय और पुलिस जांच जारी है। उन्होंने कहा कि “जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह विभाग का अधिकारी-कर्मचारी हो या बाहरी व्यक्ति, उसके खिलाफ कार्रवाई अवश्य की जाएगी।”
हालांकि डीएफओ पर हुई कार्रवाई को लेकर उन्होंने कहा कि यह सरकार और विभाग का निर्णय है, लेकिन जांच के बाद अन्य दोषियों पर भी कार्रवाई संभव है।
कई सवालों के घेरे में विभागीय व्यवस्था
घटना के बाद अब विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।जिस समय गोदाम में तेंदूपत्ता की उठाई-ढुलाई का कार्य चल रहा था, उस समय जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी आखिर कहां थे?
इतनी बड़ी मात्रा में तेंदूपत्ता भंडारण से पहले क्या विभाग ने आग से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए थे? यदि किए गए थे, तो आग पर समय रहते काबू क्यों नहीं पाया जा सका?
स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि गोदाम में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था नहीं थी,जिसकी वजह से आग तेजी से फैल गई और करोड़ों का नुकसान हो गया।
साख बचाने नेताओं के चक्कर लगा रहे संलिप्त अधिकारी
सूत्रों के अनुसार,मामले में संलिप्त बताए जा रहे कुछ निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी अब अपनी नौकरी और साख बचाने के लिए बीजापुर के भाजपा नेताओं और सर्किट हाउस के चक्कर काटते नजर आ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इस मामले में केवल डीएफओ पर कार्रवाई तक ही सीमित रहेगी, या फिर रेंज अधिकारी,गोदाम प्रभारी और घटना में लापरवाही बरतने वाले अन्य कर्मचारियों पर भी कठोर कार्रवाई होगी?
फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजर टिकी हुई है और जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।
“अब कैंसर नहीं बनेगा बेटियों की राह का रोड़ा” -बीजापुर में मुफ्त HPV टीकाकरण अभियान को मिला जोरदार समर्थन
बीजापुर : “अब कैंसर नहीं बनेगा बेटियों की राह का रोड़ा” -बीजापुर में मुफ्त HPV टीकाकरण अभियान को मिला जोरदार समर्थन
मुख्य हेडलाइनः हर नागरिक को 4 प्रकार के डस्टबीन का करना होगा उपयोग
बीजापुर : मुख्य हेडलाइनः हर नागरिक को 4 प्रकार के डस्टबीन का करना होगा उपयोग
विकसित कृषि संकल्प अभियान से किसानों को मिली आधुनिक व प्राकृतिक खेती की जानकारी
बीजापुर । कृषि एवं संवर्गीय विभाग तथा कृषि विज्ञान केन्द्र के संयुक्त प्रयास से जिले में “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का सफल संचालन किया गया। अभियान का संचालन पीएस कुशरे उप संचालक कृषि, रामचन्द्र राव सहायक संचालक उद्यानिकी, राजीव शर्मा उप संचालक पशुधन विकास विभाग, मुकेश राघव सहायक संचालक मत्स्य विभाग एवं अरूण सकनी कार्यक्रम समन्वयक एवं प्रमुख वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
अभियान का उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, जलवायु अनुकूल खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं प्राकृतिक खेती की जानकारी पहुंचाना था। साथ ही केन्द्र एवं राज्य शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से किसानों को अवगत कराकर खेती को अधिक उत्पादनशील, लाभकारी और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र एवं ब्रम्हास्त्र जैसे जैविक उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन कर उनके उपयोग और लाभ की जानकारी दी गई। अभियान के तहत जिले में 4 टीमों का गठन किया गया तथा कुल 96 शिविर आयोजित किए गए। कृषि रथ के माध्यम से प्रतिदिन 8 ग्रामों में पहुंचकर किसानों को योजनाओं एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई।
शिविरों में किसानों को एग्रीस्टेक पंजीयन, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान समृद्धि योजना, सौर सुजला योजना, राष्ट्रीय ऑयलपाम मिशन, मत्स्य संपदा योजना एवं डेयरी विकास योजना सहित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
अब कैंसर नहीं बनेगा बेटियों की राह का रोड़ा” : बीजापुर में मुफ्त HPV टीकाकरण अभियान को मिला जोरदार समर्थन
बीजापुर । विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित HPV वैक्सीन अब बीजापुर जिले में 14 वर्ष पूर्ण कर चुकी बालिकाओं को पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। जिला स्वास्थ्य विभाग की इस महत्वपूर्ण पहल को अब अभिभावकों का भरपूर समर्थन मिलने लगा है। शुरुआती झिझक और भ्रम के बाद अब लोग तेजी से अपनी बेटियों को टीका लगवाने आगे आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक 26 बालिकाएं HPV वैक्सीन लगवा चुकी हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला बीजापुर ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि यह टीका गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माध्यम है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में हजारों रुपये में मिलने वाला यह टीका जिला प्रशासन की पहल पर पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है। यह न केवल बेटियों को गंभीर बीमारी से सुरक्षा देगा, बल्कि परिवारों को मानसिक शांति भी प्रदान करेगा।
HPV टीका क्यों है जरूरी- गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से 90ः तक सुरक्षा, WHO द्वारा अनुशंसित एवं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित 14 वर्ष पूर्ण कर चुकी सभी बालिकाओं के लिए निःशुल्क एक डोज में पूरा कोर्स
कहाँ लग रहा है टीका- वर्तमान में जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों ( CHCS ) में HPV वैक्सीन उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग जल्द ही अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भी इसकी सुविधा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से लगातार अभियान चलाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक अभिभावक अपनी बेटियों का टीकाकरण करवा सकें।
अब देर न करें- स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी बेटियों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए जल्द से जल्द निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क कर टीकाकरण कराएं। “स्वस्थ बेटी, समृद्ध भविष्य HPV टीका लगवाएं, चिंता मुक्त जीवन पाएं।”
जंगलों-पहाड़ों के बीच पहुंचा प्रशासन : जन चौपाल में सुनी गई हर आवाज, कलेक्टर ने युवाओं संग खेला क्रिकेट, विकास को दी नई रफ्तार
बीजापुर । बीजापुर के सुदूर और संवेदनशील ग्रामीण इलाकों में प्रशासन की सक्रिय मौजूदगी एक बार फिर देखने को मिली, जब कलेक्टर विश्वदीप, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव और जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी नम्रता चौबे ने ग्राम पंचायत सागमेटा, सण्ड्रा, एडापल्ली और पीलूर पहुंचकर जन चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। प्रशासनिक अधिकारियों के गांव पहुंचने से ग्रामीणों में उत्साह और भरोसे का माहौल दिखाई दिया।
जन चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने सड़क निर्माण, राशन वितरण में आ रही समस्याएं, पेयजल संकट, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, आवागमन की दिक्कत, शिक्षा और अन्य मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़े मुद्दे अधिकारियों के सामने रखे। ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कलेक्टर विश्वदीप ने मौके पर मौजूद विभागीय अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की प्राथमिकता अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को किसी भी सुविधा के लिए परेशान नहीं होना चाहिए।
कलेक्टर ने विशेष रूप से “बस्तर मुन्ने” कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत सैचुरेशन सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि पात्र ग्रामीणों को सभी आवश्यक दस्तावेज सरलता और सुगमता से उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
इस दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र में चल रहे जनगणना कार्य की भी जानकारी ली। ग्रामीणों को जनगणना के महत्व, उसकी उपयोगिता और शासन की योजनाओं से उसके सीधे संबंध के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया गया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे जनगणना कार्य में सक्रिय सहयोग करें, ताकि विकास योजनाओं का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए सुरक्षा व्यवस्था, सामाजिक सहभागिता और आपसी सहयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय से क्षेत्र में शांति, विश्वास और विकास का वातावरण मजबूत होगा। वहीं जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे ने पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और गति बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
जन चौपाल के दौरान कई ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं और सुझाव प्रशासन के सामने रखे। अधिकारियों ने भी गंभीरता से हर मुद्दे को सुना और कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय बाद प्रशासनिक अधिकारी स्वयं गांव पहुंचकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं, जिससे लोगों में विश्वास और उम्मीद दोनों बढ़ी हैं।
इस दौरे का सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्य ग्राम सण्ड्रा में देखने को मिला, जब कलेक्टर विश्वदीप गांव के युवाओं के साथ क्रिकेट मैदान में उतरे। कलेक्टर ने युवाओं के साथ क्रिकेट खेलकर उनका उत्साहवर्धन किया और उन्हें खेल, शिक्षा एवं सकारात्मक सोच के माध्यम से समाज और जिले के विकास में भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बीजापुर में सकारात्मक बदलाव और नई विकास यात्रा के सबसे बड़े भागीदार यहां के युवा ही होंगे।
कलेक्टर को अपने बीच सहज रूप में देखकर ग्रामीण और युवा बेहद उत्साहित नजर आए। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस संवेदनशील पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब अधिकारी गांवों तक पहुंचकर सीधे संवाद करते हैं, तब लोगों की समस्याओं का समाधान तेजी से संभव हो पाता है और शासन के प्रति भरोसा भी मजबूत होता है।
इंद्रावती पार कर स्वास्थ्य टीम पहुँची अंदरुनी क्षेत्र नूगुर
642 ग्रामीणों की जांच कर जगाई स्वास्थ्य जागरूकता की नई उम्मीद
बीजापुर । कलेक्टर विश्वदीप के मार्गदर्शन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी,बीआर पुजारी के नेतृत्व में विकासखंड भैरमगढ़ अंतर्गत अत्यंत दुर्गम एवं अंदरुनी क्षेत्र नूगुर तथा उसके आश्रित ग्रामों में यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबी दूरी तय कर ग्रामीणों तक पहुँचकर स्वास्थ्य सेवाओं की नई मिसाल पेश की।
इस विशेष स्वास्थ्य शिविर में ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर दीपक कुमार देवांगन के साथ सेक्टर सुपरवाइजर कुतरू के.पी. बीरवंश, अतुल कुशवाह (RHO मेल), राजू पुंगेठी (RHO मेल), कुमारी रीता फुलमादरी (ANM), श्रीमती दीप्ति खेस (CHO बेदरे), आकृति भगत (CHO मुरकिनार) एवं मनोरमा तोकल (ANM) ने सक्रिय भूमिका निभाई।
इंद्रावती नदी पार कर पहुँची स्वास्थ्य टीम
उप स्वास्थ्य केंद्र नूगुर विकासखंड मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए स्वास्थ्य टीम को लगभग 2 किलोमीटर चौड़ी इंद्रावती नदी पार करनी पड़ती है। लंबे समय तक यह क्षेत्र नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सरकारी योजनाओं से दूर रहा, लेकिन अब धीरे-धीरे शासन की योजनाएं गांवों तक पहुँच रही हैं और ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्राम नूगुर, हिंगमेटा एवं हुर्रागवाली में शिविर लगाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की तथा स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण एवं शासन की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी।
ग्रामीणों में बढ़ रहा स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि पहले ग्रामीण स्वास्थ्य जांच और बच्चों के टीकाकरण से कतराते थे, लेकिन अब ग्रामीण स्वयं आगे आकर स्वास्थ्य परीक्षण करा रहे हैं तथा बच्चों का नियमित टीकाकरण भी करवा रहे हैं। इससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
अंदरूनी क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीम की नियमित पहुँच से ग्रामीणों का स्वास्थ्य विभाग के प्रति विश्वास मजबूत हो रहा है और लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बन रहे हैं।
शिविर में हुआ व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण
ग्राम नूगुर में
कुल मरीज – 207
एनसीडी स्क्रीनिंग – 75
बुखार – 03
खुजली – 05
एएनसी – 01
अन्य मरीज – 123
ग्राम हिंगमेटा में
कुल मरीज – 125
एनसीडी स्क्रीनिंग – 42
बुखार – 00
खुजली – 02
अन्य मरीज – 81
ग्राम हुर्रागवाली
कुल मरीज – 310
एनसीडी स्क्रीनिंग – 115
बुखार – 05
खुजली – 03
अन्य मरीज – 187
तीनों ग्रामों में कुल 642 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविर के दौरान मरीजों को दवाइयां वितरित की गईं तथा गंभीर मरीजों को आगे उपचार हेतु सलाह दी गई।
स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास न केवल दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है,बल्कि यह ग्रामीणों में विश्वास,जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य भविष्य की उम्मीद भी जगा रहा है।
“माओवाद से मिली मुक्ति, अब अशिक्षा के अंधकार से मिलेगी आज़ादी”
बीजापुर । दशकों तक माओवादी आतंक की छाया में जीवन बिताने वाले बच्चों के सपनों को नई दिशा देने की पहल अब रंग लाने लगी है। माओवाद की धुंध छटने के बाद शिक्षा और जागरूकता के जरिए बच्चों के भविष्य को संवारने के उद्देश्य से उसूर ब्लॉक के पुजारी कांकेर, गलगम एवं मारूडबाका गांवों के बच्चों के लिए विशेष एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया।
इस दौरान बच्चों को जिले की विकास उपलब्धियों से परिचित कराने तथा उनके व्यवहार एवं सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया गया। ज्ञानगुड़ी एजुकेशन सिटी पहुंच बच्चों ने देखी बेहतर शिक्षा की दुनिया- एक्सपोजर विजिट के तहत बच्चों ने ज्ञानगुड़ी एजुकेशन सिटी का भ्रमण किया, जहां उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, एकलव्य विद्यालय एवं ‘छू लो आसमान’ जैसी संस्थाओं को करीब से देखा। स्कूलों के प्राचार्यों से मुलाकात के दौरान बच्चों को बेहतर शिक्षा, अनुशासन और उज्ज्वल भविष्य के लिए पढ़ाई के महत्व की जानकारी दी गई।बच्चों ने सेंट्रल लाइब्रेरी का भी भ्रमण कर वहां उपलब्ध संसाधनों को देखा और अध्ययन संस्कृति से परिचित हुए।
प्रशासनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को समझा- भ्रमण के दौरान बच्चों को कलेक्टर कार्यालय और जिला पंचायत ले जाया गया, जहां उन्हें जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड निर्माण तथा पंचायती राज व्यवस्था की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद बच्चों ने जिला चिकित्सालय का दौरा कर ओपीडी, ब्लड बैंक एवं एक्स-रे कक्ष की कार्यप्रणाली को समझा और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को नजदीक से जाना।
कलेक्टर से आत्मीय मुलाकात, बच्चों ने रखी स्कूल भवन की मांग- कलेक्टर कार्यालय भ्रमण के दौरान कलेक्टर विश्वदीप ने बच्चों से आत्मीय मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। गर्मी के मौसम को देखते हुए बच्चों को कोल्ड ड्रिंक भी उपलब्ध कराया गया।
संवाद के दौरान जब कलेक्टर ने पूछा कि उन्हें सबसे अच्छा क्या लगा, तो बच्चों ने कहा कि नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय जैसे स्कूल उन्हें बेहद पसंद आए। बच्चों ने बताया कि उनके गांव में अभी भी झोपड़ी में स्कूल संचालित होता है। इस पर कलेक्टर ने आश्वासन देते हुए कहा, “आपका स्कूल जल्द बनवाया जाएगा।” बच्चों ने स्कूल ड्रेस, टाई, जूते और मोजों की मांग भी रखी, जिस पर कलेक्टर ने आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
फिल्म नहीं देखी तो कलेक्टर ने कराया विशेष पहल का ऐलान- बातचीत के दौरान कलेक्टर ने बच्चों से पूछा कि क्या उन्होंने कभी फिल्म देखी है? बच्चों के “नहीं” कहने पर कलेक्टर ने उनके लिए प्रेरणादायी फिल्म का विशेष शो आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बच्चों से शिक्षा से जुड़े सवाल-जवाब भी किए तथा बेहतर भविष्य के लिए निरंतर पढ़ाई करने हेतु प्रेरित किया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी लखनलाल धनेलिया एपीसी जाकिर खान सहित संकुल समन्वयक एवं शिक्षादूत उपस्थित रहे।
इंद्रावती पार कर स्वास्थ्य टीम पहुँची अंदरुनी क्षेत्र नूगुर, 642 ग्रामीणों की जांच कर जगाई स्वास्थ्य जागरूकता की नई उम्मीद
बीजापुर । कलेक्टर विश्वदीप के मार्गदर्शन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला बीजापुर के नेतृत्व में विकासखंड भैरमगढ़ अंतर्गत अत्यंत दुर्गम एवं अंदरुनी क्षेत्र नूगुर तथा उसके आश्रित ग्रामों में यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबी दूरी तय कर ग्रामीणों तक पहुँचकर स्वास्थ्य सेवाओं की नई मिसाल पेश की।
इस विशेष स्वास्थ्य शिविर में ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर दीपक कुमार देवांगन के साथ सेक्टर सुपरवाइजर कुतरू के.पी. बीरवंश, अतुल कुशवाह ( RHO मेल), राजू पुंगेठी ( RHO मेल), कुमारी रीता फुलमादरी (ANM), दीप्ति खेस ( CHO बेदरे), आकृति भगत ( CHO मुरकिनार) एवं मनोरमा तोकल (ANM) ने सक्रिय भूमिका निभाई।
इंद्रावती नदी पार कर पहुँची स्वास्थ्य टीम- उप स्वास्थ्य केंद्र नूगुर विकासखंड मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए स्वास्थ्य टीम को लगभग 2 किलोमीटर चौड़ी इंद्रावती नदी पार करनी पड़ती है। लंबे समय तक यह क्षेत्र नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सरकारी योजनाओं से दूर रहा, लेकिन अब धीरे-धीरे शासन की योजनाएं गांवों तक पहुँच रही हैं और ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्राम नूगुर, हिंगमेटा एवं हुर्रागवाली में शिविर लगाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की तथा स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण एवं शासन की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी।
ग्रामीणों में बढ़ रहा स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा- स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि पहले ग्रामीण स्वास्थ्य जांच और बच्चों के टीकाकरण से कतराते थे, लेकिन अब ग्रामीण स्वयं आगे आकर स्वास्थ्य परीक्षण करा रहे हैं तथा बच्चों का नियमित टीकाकरण भी करवा रहे हैं। इससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अंदरूनी क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीम की नियमित पहुँच से ग्रामीणों का स्वास्थ्य विभाग के प्रति विश्वास मजबूत हो रहा है और लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बन रहे हैं।
शिविर में हुआ व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण- ग्राम नूगुर में कुल मरीज 207, एनसीडी स्क्रीनिंग 75, बुखार 03, खुजली 05, एएनसी 01, अन्य मरीज 123 इसी तरह ग्राम हिंगमेटा में कुल मरीज 125, एनसीडी स्क्रीनिंग 42, बुखार 00, खुजली 02, अन्य मरीज 81, ग्राम हुर्रागवाली, कुल मरीज 310,एनसीडी स्क्रीनिंग 115, बुखार 05, खुजली 03, अन्य मरीज 187 तीनों ग्रामों में कुल 642 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविर के दौरान मरीजों को आवश्यक दवाइयां वितरित की गईं तथा गंभीर मरीजों को आगे उपचार हेतु सलाह दी गई। स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास न केवल दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह ग्रामीणों में विश्वास, जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य भविष्य की उम्मीद भी जगा रहा है।
विकसित खेती की नई उड़ान : बीजापुर में “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का सफल समापन
बीजापुर । छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 05 मई से 20 मई 2026 तक संचालित “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का सफल समापन बीजापुर जिले के विभिन्न विकासखंडों में किया गया। अभियान के अंतिम दिन विभिन्न वैज्ञानिक दलों ने किसानों के बीच पहुंचकर आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी साझा की।
यह अभियान निदेशक विस्तार सेवाएं, इं.गां.कृ.वि. रायपुर के निर्देशानुसार कृषि विज्ञान केंद्र बीजापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख अरुण सकनी के मार्गदर्शन में संचालित किया गया। अभियान के सुचारु संचालन हेतु जिले के सभी विकासखंडों के लिए चार अलग-अलग वैज्ञानिक दलों का गठन किया गया था। उसूर विकासखंड के लिए डॉ. शमशेर आलम, भैरमगढ़ के लिए डॉ. मिथलेश कुमार एवं डॉ. राजकमल पटेल, भोपालपटनम के लिए डॉ. भूपेंद्र कुमार एवं डॉ. दिनेश मारापी तथा बीजापुर विकासखंड के लिए डॉ. सुनीता पटेल एवं अरविंद आयाम को दल प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अभियान के दौरान सभी दलों ने प्रतिदिन दो चयनित ग्रामों में पहुंचकर किसानों को केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं, नवीन कृषि तकनीकों एवं आगामी खरीफ फसलों की तैयारी संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं। किसानों को बीज उपचार, मृदा परीक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जैविक उर्वरकों के उपयोग, ग्रीष्मकालीन जुताई, रोग एवं कीटों के जैविक प्रबंधन, पौध संरक्षण, बागवानी फसलों की उन्नत खेती, आधुनिक कृषि यंत्रों एवं ड्रोन तकनीक के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मशरूम उत्पादन तथा मधुमक्खी पालन जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया गया।
अभियान में कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, पशुपालन विभाग एवं मत्स्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में किसानों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम के सफल आयोजन से जिले के किसानों में आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ी है तथा आगामी खरीफ सीजन के लिए नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार हुआ है। माओवाद की धुंध से निकलकर सपनों की उड़ानः एक्सपोजर विजिट में बच्चों ने मांगा स्कूल भवन, कलेक्टर ने दिया भरोसा
दुर्गम जंगलों के बीच पहुंची स्वास्थ्य टीमः ग्राम गमपुर में 771 ग्रामीणों का हुआ यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग सर्वे
डोडीतुमनार उप स्वास्थ्य केंद्र की टीम ने सीमित संसाधनों के बावजूद किया सफल स्वास्थ्य सर्वेक्षण, मलेरिया और टीबी के संभावित मरीजों की समय पर पहचान
बीजापुर, 19 मई 2026
दूरस्थ क्षेत्र ग्राम गमपुर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग सर्वेक्षण का सफल आयोजन किया गया। उप स्वास्थ्य केंद्र डोडीतुमनार की स्वास्थ्य टीम ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, दुर्गम रास्तों और सीमित संसाधनों के बावजूद गांव तक पहुंचकर कुल 771 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच एवं स्क्रीनिंग की।
स्वास्थ्य विभाग की इस विशेष पहल के दौरान ग्रामीणों की सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ मलेरिया, टीबी, एनीमिया, उच्च रक्तचाप तथा गर्भवती महिलाओं की विशेष स्क्रीनिंग की गई। सर्वेक्षण में 05 मलेरिया मरीजों की पहचान कर उनका तत्काल उपचार प्रारंभ किया गया। वहीं 02 संभावित टीबी मरीजों एवं 01 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी ANC HRP की पहचान कर आगे की जांच एवं उपचार हेतु उच्च स्वास्थ्य केंद्र रेफर किया गया। इसके अतिरिक्त जांच के दौरान 01 उच्च रक्तचाप (बीपी) तथा 02 एनीमिया मरीजों को चिन्हित कर आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श एवं दवाएं उपलब्ध कराई गईं। स्वास्थ्य टीम द्वारा ग्रामीणों को साफ-सफाई, पोषण, नियमित जांच तथा संक्रामक बीमारियों से बचाव संबंधी जानकारी भी दी गई।
ग्रामीणों ने बताया कि पहली बार उनके गांव के समीप इतने व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य जांच सुविधा उपलब्ध हुई है। इस अभियान से लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है तथा गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान संभव हो सकी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। टीम के सतत प्रयासों से क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। यह अभियान न केवल ग्रामीण स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य विभाग जनसेवा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
युवा आईएएस विश्वदीप बने जिले के नए कलेक्टर, संभाली जिम्मेदारी
बीजापुर । विश्वदीप ने जिले के नए कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। वर्ष 2019 बैच के आईएएस अधिकारी विश्वदीप इससे पूर्व रायपुर नगर निगम में आयुक्त तथा प्रबंध संचालक स्मार्ट सिटी रायपुर के पद पर कार्यरत थे।
जिले के 14वें कलेक्टर के रूप में पदभार संभालने के बाद उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया तथा प्रशासनिक कार्यों की जानकारी ली। प्रशासनिक अनुभव और कार्यशैली के कारण उनसे जिले के विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पदभार ग्रहण के अवसर पर अपर कलेक्टर भूपेन्द्र अग्रवाल सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी गण मौजूद थे।
नवपदस्थ कलेक्टर विश्वदीप ने संभाली कमान
बीजापुर । कलेक्टर विश्वदीप ने पदभार ग्रहण करने के बाद शनिवार को इन्द्रावती सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की परिचयात्मक बैठक लेकर जिले के प्रशासनिक कार्यों, विभागीय योजनाओं तथा वर्तमान चुनौतियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर समय-सीमा में पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया।
कलेक्टर विश्वदीप ने कहा कि बीजापुर जैसे चुनौतीपूर्ण जिले में कार्य कर रहे सभी अधिकारी एवं कर्मचारी बेहतर कार्य कर रहे हैं, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी विभाग पूरी तन्मयता और उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। सुशासन तिहार शिविरों में अधिक से अधिक हितग्राहियों को लाभ दिलाने के निर्देश- बैठक में वर्तमान में संचालित सुशासन तिहार अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविरों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि शिविरों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक नागरिक लाभान्वित हो सकें। उन्होंने मौके पर ही अधिकाधिक प्रकरणों के निराकरण के निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी पात्र हितग्राही योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए।
बस्तर मुन्ने और नियद नेल्लानार 2.0 की हुई समीक्षा- कलेक्टर विश्वदीप ने बस्तर मुन्ने एवं नियद नेल्लानार 2.0 अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि शत-प्रतिशत सैचुरेशन प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने शिविरों के दौरान पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें योजनाओं का लाभ तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
जनगणना 2026 और मूलभूत सुविधाओं पर विशेष फोकस- बैठक में जनगणना 2026 की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ जनगणना कार्य संपादित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताया। बैठक में अपर कलेक्टर भूपेन्द्र अग्रवाल, संयुक्त कलेक्टर जागेश्वर कौशल सहित जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी, सभी अनुभागों के एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, जनपद पंचायतों के सीईओ एवं नगरीय निकायों के सीएमओ उपस्थित थे
विकसित कृषि संकल्प अभियान : ग्राम लंकापल्ली में वैज्ञानिक व किसानों के साथ हुआ संगोष्ठी
बीजापुर । विकसित कृषि संकल्प अभियान जो कि छत्तीसगढ़ शासन की और से 05 मई से 20 मई तक चल रही है जिसके तहत निदेशक विस्तार सेवाएं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर, के निर्देशानुसार में कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख अरुण सकनी के मार्गदर्शन में दल प्रमुख डॉ. शमशेर आलम के द्वारा 08 मई 2026 को ब्लॉक उसूर के ग्राम लंकापल्ली में वैज्ञानिक एवं किसानों के साथ संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन कर नित नवाचार और आगामी खरीफ के फसलों में प्रयुक्त तकनीकों के विषय में चर्चा किया गया।
डॉ. आलम ने प्रमुख रूप से बीज उपचार, मृदा परिक्षण, जैविक उर्वरक, ग्रीष्म कालीन जुताई, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, रोग एवं कीटों का जैविक प्रबंधन, पौध संरक्षण, बागवानी फसलों की खेती, उन्नत यंत्रों का प्रयोग, खेती में ड्रोन का प्रयोग, संतुलित उर्वरक का प्रयोग, मशरूम उत्पादन एवं मधुमक्खी पालन का महत्व इत्यादि के बारे में विस्तार से बताया गया। इस कार्यक्रम में कृषि विभाग, उद्यानिक विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी के साथ-साथ स्थानीय जन प्रतिनिधि एवं किसान उपस्थित रहें।
सुशासन तिहार शिविर में दिखी संवेदनशील प्रशासन की झलक
गोद भराई, अन्नप्राशन और बाल विवाह मुक्त बीजापुर का सामूहिक संकल्प बना आकर्षण का केंद्र
बीजापुर । नगरपालिका परिसर में आयोजित सुशासन तिहार अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविर में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विभागीय योजनाओं की जानकारी एवं हितग्राहियों को जागरूक करने के उद्देश्य से आकर्षक स्टॉल लगाया गया। शिविर में बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिकों ने विभागीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर लाभ उठाया।
महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल में गर्भवती माताओं की पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गोद भराई की गई तथा नवजात शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार भी संपन्न कराया गया। इस दौरान माताओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। कार्यक्रम का वातावरण पारिवारिक एवं उत्साहपूर्ण बना रहा।
शिविर में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं जैसे पोषण अभियान, सुपोषण कार्यक्रम, मातृत्व सहायता योजनाएं तथा किशोरी बालिकाओं से संबंधित योजनाओं की विस्तृत जानकारी नागरिकों को प्रदान की गई। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बाल विवाह मुक्त बीजापुर अभियान रहा। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नागरिकों ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने का सामूहिक संकल्प लिया। सभी ने यह प्रण किया कि जिले में बाल विवाह रोकने के लिए जागरूकता फैलाने के साथ.साथ समाज को शिक्षित एवं संवेदनशील बनाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
अधिकारियों ने कहा कि बाल विवाह न केवल बच्चों के भविष्य को प्रभावित करता है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता से ही बीजापुर को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकता है। सुशासन तिहार शिविर के माध्यम से प्रशासन द्वारा जनसमस्याओं के निराकरण के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास सराहनीय रहा।