छत्तीसगढ़ / महासमुंद

नेशनल लोक अदालत में पारिवारिक विवादों का समाधान

 महासमुंद। आज जिला मुख्यालय महासमुंद के जिला न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में खंडपीठ क्रमांक-02, के समक्ष दाम्पत्य जीवन निर्वहन के पुर्नस्थापन संबंधित मामला जो कि महासमुंद कुटुम्ब न्यायालय में लंबित था। जिसमें पीठासीन अधिकारी प्रफुल्ल कुमार सोनवानी द्वारा समझाईश दिया गया जिससे प्रेरित होकर दोनों दंपत्ति एक साथ रहने के लिए सहमत होते हुए अपना दाम्पत्य जीवन एक साथ निर्वाह करने हेतु तैयार हो गया। उक्त प्रकरण खल्लारी थाना अंतर्गत ग्राम खल्लारी (भीमखोंज) निवासी प्रमिला बाई निषाद उम्र-24 वर्ष (परिर्वर्तित नाम) का है, जिसका विवाह ग्राम बाना थाना खरोरा निवासी सत्यनारायण निषाद (परिर्वर्तित नाम) उम्र-27 वर्ष के साथ रिती रिवाजो के साथ 17 मार्च 2023 में हुआ था। शादी के बाद दोनों दाम्पत्य जीवन अच्छा था, बाद में उसके पति द्वारा गाली-गलौज, मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। जिसके कारण वे दोनो जून 2024 से अलग-अलग रहने लगे। जिसका प्रकरण परिवार न्यायालय में लंबित था।

जिसे आज 8 मार्च 2025 को आयोजित नेशनल लोक अदालत के खंडपीठ के माध्यम से समझाईश एवं आपसी सुलह के माध्यम से निराकरण किया गया। इसी प्रकार खंडपीठ क्रमांक-04, के पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार पाडेण्य द्वारा घेरलु हिंसा से संबंधित प्रकरण क्रमांक 49/2024 जो कि मामला बागबाहरा थाना का है। यह कि हाडाबंद निवासी हेमलता (परिवर्तित नाम) का विवाह 17 फरवरी 2016 को हिन्दू रितीरिवाज के साथ ग्राम पोड़ गोबरा नयापारा निवासी मोहन (परिवर्तित नाम) के साथ हुआ था। वर्तमान में उनके एक पुत्र और एक पुत्री है। उन दोनों के विवाह के दो-तीन वर्ष बाद उनके रिस्ते में अनबन होने लगा। उसके पति द्वारा उसके चरित्र में संदेह कर मारपीट गाली गजौज करने लगा था।

जिस पर उनके द्वारा सामाजिक बैठक भी कराई गई थी। इस प्रकार 25 सिंतबर 2024 को मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुआ जो आज अपील प्रकरण के रूप में खंडपीठ अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। जिसे समझाईश के बाद आपसी सुलह के माध्यम से पति पत्नी के साथ दाम्पत्य जीवन निर्वाह और हसी-खुशी रहने को तैयार हुए। इसके अलावा खंडपीठ क्रमांक-5 के पीठासीन अधिकारी आनंद बोरकर द्वारा घरेलु हिंसा के अंतर्गत प्रकरण 131/2022 में आज आयोजित नेशनल लोक अदालत में खंडपीठ के माध्यम से समझाईश एवं आपसी सुलह के माध्यम से प्रकरण का निराकरण किया गया।  

 

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