छत्तीसगढ़ / राजनांदगांव

भगवान एक बार जीवन देता है, डॉक्टर बार-बार बचाता है

 1 जुलाई, डॉक्टर्स-डे पर विशेष (डॉ. सूर्यकांत मिश्रा, राजनांदगांव)

 

नब्ज टटोलकर मर्ज की तह तक पहुंचना भारतवर्ष के लिए कोई नई बात नहीं है । हमारे वैद्यराजों ने अनादिकाल से आयुर्वेद के दम पर गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज कर अपनी योग्यता सिद्ध कर दिखाई है । आज की आधुनिक जीवनशैली ने चिकित्सा जगत को बड़ी चुनौतियों में डाल रखा है! अब आयुर्वेद पर विश्वास उतना नहीं रहा जितना भारतवर्ष के सादगीपूर्ण जीवनशैली के समय था । इसका जो कारण मुझे समझ में आता हैं वह बिगड़े पर्यावरण के रूप में दिखाई पड़ रहा है । खान -  पान से लेकर मानवीय समाज में जीवनयापन कर रहे हम लोगों ने अपने ऋषि - मुनियों द्वारा बताई गई दिनचर्या को न मानकर ही अपने शरीर के अंदर बीमारियों का बीजारोपण किया है ! अब हमारे वानस्पतिक वृक्षों में भी वह ताकत नहीं रही जो सदियों पहले हुआ करती थी । यही कारण हैं कि वर्तमान युग में बीमारियों से लड़ने वैज्ञानिक शोधों का सहारा लेना पड़ रहा है । हमारा चिकित्सा विज्ञान जितना प्रगति कर रहा है , बीमारियों के नए - नए रूप भी बढ़ - चढ़कर चुनौती पेश करते दिख रहे हैं । मानवीय शरीर में रोग - प्रतिरोधक शक्ति का क्षीण होना ही वह कारण है कि हमारे चिकित्सा वैज्ञानिकों को तुरंत असर करने वाली दवाइयों का आविष्कार करना पड़ा । आज के चिकित्सकों का जीवन हमारे जाने - माने वैद्यराजों से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण बन पड़ा है । 

एक डॉक्टर का जीवन चुनौतीपूर्ण होने के साथ ही साथ अनेक मौकों पर कठिन भी हो सकता है । डॉक्टर की काबिलियत के आधार पर यह पेशा उन्हें समाज में व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से भी जोड़ जाता है । हर चिकित्सक का अनुभव अद्वितीय होता है । यही गुण उनकी विशेषता बनकर , कार्य , वातावरण और व्यक्तिगत लचीलेपन से नया आकार ग्रहण कर लेता है । चुनौतियों और पुरस्कारों के बीच संतुलन बनाना चिकित्सा क्षेत्र में स्थाई और संतोषजनक करियर की कुंजी मानी जा सकती है । इस पेशे से जुड़े ऐसे लोग जो अपनी स्कूली शिक्षा के समय मन में ठानकर डॉक्टर बने हैं और अपने काम के प्रति जुनूनी हैं , वे अपने द्वारा समाज को दी जा रही सेवा के चलते जीवन का आनंद लेते हैं । हमारे देश में डॉक्टर बनने की यात्रा काफी लंबी और उबाऊ कही जा सकती है । इस दौरान कोई सराहना या प्रोत्साहन नहीं मिलता । एक डॉक्टर से यह अपेक्षा की जाती है कि वह चौबीसों घंटे अपने मरीज के लिए उपलब्ध रहे ! यह कहने से भी हमारा समाज पीछे नहीं रहता है कि यह उसका कर्तव्य है ! एक डॉक्टर से यह भी अपेक्षा की जाती है कि उसका कोई निजी जीवन न हो ! कारण यह कि वह ऐसे पेशे से जुड़ा है , जो मनुष्य के जीवन से प्रत्यक्ष संबंध रखता है । हमारा समाज डॉक्टर से यह भी उम्मीद रखता है कि वह " सुपरमैन और स्पाइडरमैन " की तरह हमारी जान बचाता रहे ! मैने अनुभव किया है कि एक चिकित्सक अत्यधिक दबाव और कार्यभार के बीच अपना जीवनयापन करता है । उसके पास अपने और अपने परिवार के लिए अत्यंत ही सीमित समय होता है । 

 


चिकित्सकों की जीवनशैली का अनुभव करते हुए मुझे लगता है कि कोई भी अन्य पेशा जीवन के संदर्भ में इतनी गहरी समझ नहीं रखता जितना कि एक चिकित्सक । बीमारी और मौत के दुखों को इतने करीब से देखने के बाद एक चिकित्सक का जीवन के प्रति नजरिया बदल जाता है । वह एक चिकित्सक ही होता है जो मरीजों को लाइलाज बीमारियों से पीड़ित और उम्मीद से चिपके हुए देख सकता है । यह सब बहुत ही निराशाजनक और भावनात्मक रूप से थका देने वाला होता है । खास कर गंभीर चिकित्सा स्थितियों और मृत्यु के निकट स्थितियों की घोषणा करते समय । इस पेशे का एक चमत्कार पहलू भी होता है । बीमारी से ठीक हो चुके व्यक्ति के परिजनों के चेहरों पर राहत और खुशी का संगम देखकर डॉक्टर स्वयं ही पुरस्कृत महसूस करता है । एक डॉक्टर के रूप में मरीज का स्वास्थ्य और सेवा का अवसर , उनका जीवन सभी कुछ डॉक्टर के हाथ होता है । ऐसी स्थिति में एक डॉक्टर खुद को बेहद तनावपूर्ण परिस्थिति में पाता है । इससे निपटने और जिम्मेदारी लेने में सक्षम होने के लिए बहुत धैर्य की जरूरत होती है , चाहे चीजें सही हों या गलत । डॉक्टर होने का मतलब सिर्फ गोलियां बांटना या कटे - फटे शरीर को सिल देना ही नहीं है । डॉक्टर होना इंसान और भगवान के बीच मध्यस्थता होना भी है । एक अच्छे डॉक्टर को परिभाषित करना भी अत्यंत ही कठिन काम हो सकता है । 
 


हम विचार करें तो कुछ शब्दों में यह परिभाषित करना काफी आसान है कि एक अच्छा वकील , एक अच्छा वास्तुकार , एक अच्छा लेखक कौन हो सकता है ? एक अच्छा वकील वह होता है , जो कठिन मुकदमों में जीत हासिल कर लेता है । एक अच्छा वास्तुकार वह होता है जो सबसे शानदार इमारत खड़ी कर दिखाता है । एक अच्छा लेखक वह होता हैं जो एक मार्मिक उपन्यास लिख डालता है । इन सबके विपरीत एक अच्छा डॉक्टर कौन होता है ? कहना या लिखना मुश्किल होता है । एक अच्छा डॉक्टर वह नहीं जो सबसे ज्यादा इलाज करता है अथवा उस पर विश्वास करने वालों की संख्या अधिक होती है । उसे भी एक अच्छा डॉक्टर नहीं कहा जा सकता जो अच्छा निदान करता है । उसे भी अच्छा डॉक्टर नहीं कहा है सकता जो वैज्ञानिक तथ्यों को जानता है । वास्तव में एक अच्छा डॉक्टर वह होता है , जो दयालु , विनम्र और आशावादी होता है । एक अच्छा डॉक्टर वह होता है जो रोगियों में विश्वास जगाता है । मैं तो यही कह सकता हूं  - " भगवान एक बार जीवन देता है , डॉक्टर बार - बार बचाता है ।" इसलिए डॉक्टर को धरती पर भगवान की संज्ञा दी जाती हैं । 
 


डॉक्टर मसीहा का पर्याय है । अधमरे इंसान में जान फूंकने , रोगियों को स्वस्थ करने और हमारे अपनों को दूर जाने से बचाने में जो डटे रहते हैं , वहीं वास्तव में डॉक्टर हैं । वही मसीहा हैं । जब - जब लगा कि अब इस दुनिया को अलविदा कहने का समय आ गया है , तब - तब ईश्वर का प्रतिनिधि बनकर चिकित्सकों के रूप में एक इंसान ने दस्तक दी और असमय मृत्यु को खदेड़ दिया ! चिकित्सकों के समुदाय ने सदियों से यह सिद्ध कर दिखाया है कि " जिंदगी दोबारा भी मिल सकती है । " दरअसल एक डॉक्टर एक दिन में अनेकों बार जीता और मारता है । जब भी उसके हाथों कोई रोगी ठीक होता है , तब उसे लगता है कि उसका जीवन सार्थक हो गया । इसके विपरीत जब तमाम कोशिशों के बाद भी वह रोगी को नहीं बचा पाता है , तब उसे लगता है कि सब कुछ समाप्त हो गया । इस प्रकार की स्थिति से प्रतिदिन दो - चार होना आसान नहीं कहा जा सकता है । डॉक्टर की काबिलियत के चलते ही हर वह इंसान जो बीमार है और उसका परिवार डॉक्टर की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देखता है । " यदि अस्तित्व विहीन हो जाना इस जीवन की नियति है , तो अस्तित्व को बरकरार रखना डॉक्टर के जीवन का ध्येय है । " देखा जाए तो डॉक्टर का मूल लक्ष्य जीविकोपार्जन अथवा धंधा करना नहीं बल्कि जिंदगी और मौत से जूझ रहे इंसान को येन - केन प्रकारेण बचाना है । खेत में किसान , सीमा पर सैनिक , विद्यालय में शिक्षक और अस्पताल में डॉक्टर न हों तो मानवीय समाज का जीवन कठिन हो सकता है । इस पृथ्वी पर जिजीविषा को मूर्त रूप प्रदान करने में डॉक्टर्स की भूमिका अतुलनीय रही है।

 

 

 

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