बेनामी लेनदेन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय गठित
केंद्र सरकार ने गजट में किया प्रकाशन
बिलासपुर । राज्य में बेनामी संपत्ति लेनदेन की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बेनामी लेनदेन प्रतिषेध अधिनियम, 1988 (संशोधित 2016) के तहत विशेष अदालत का गठन कर दिया है। यह अदालत अब पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में दर्ज होने वाले मामलों की सुनवाई करेगी।
गजट में हुआ प्रकाशन, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिफिकेशन
केंद्र सरकार ने भारत के राजपत्र (गजट) में इसकी अधिसूचना 17 जुलाई 2025 को प्रकाशित की है। इसमें बताया गया है कि बिलासपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से रायपुर के 12वें अपर सत्र न्यायाधीश (XII ASJ) की अदालत को छत्तीसगढ़ राज्य के लिए विशेष न्यायालय नामित किया गया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी रायपुर के VII ASJ को सौंपी गई थी।
हाईकोर्ट ने इस संबंध में औपचारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। न्याय विभाग, नई दिल्ली की अधिसूचना S.O. 3268(E) के आधार पर यह बदलाव लागू किया गया है।
क्या होती है बेनामी लेनदेन?
बेनामी लेनदेन का मतलब है जब कोई व्यक्ति किसी संपत्ति की खरीद के लिए पैसा देता है, लेकिन संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति या काल्पनिक नाम पर रजिस्टर्ड होती है। यह लेन-देन अक्सर काले धन को छुपाने, टैक्स चोरी या कर्ज से बचने के लिए किया जाता है।
दोषी पाए जाने पर क्या है सजा?
बेनामी संपत्ति के मामलों में दोषी पाए जाने पर कानून के तहत यह सजा तय है:
1 से 7 साल तक का कारावास
संपत्ति के बाजार मूल्य का 25% तक जुर्माना
क्यों जरूरी था यह विशेष न्यायालय?
बेनामी संपत्तियों को लेकर बढ़ते मामलों और लंबी कानूनी प्रक्रिया को देखते हुए तेज़, पारदर्शी और केंद्रीकृत कार्रवाई के लिए इस विशेष अदालत का गठन किया गया है। अब पूरे छत्तीसगढ़ से संबंधित बेनामी मामलों की सुनवाई XII ASJ रायपुर की अदालत में होगी।
यह कदम राज्य में कालेधन और फर्जी संपत्ति सौदों के खिलाफ सरकार की सख्त नीति को दर्शाता है।