किरन्दुल एनएमडीसी अधिशासी निदेशक रविंद्र नारायण ने हरी झंडी दिखाकर प्रशिक्षण प्राप्त करने जा रहे बच्चों की बसों को किया रवाना
किरन्दुल एनएमडीसी अधिशासी निदेशक रविंद्र नारायण ने हरी झंडी दिखाकर प्रशिक्षण प्राप्त करने जा रहे बच्चों की बसों को किया रवाना
किरन्दुल।भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएमडीसी) ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के तहत छत्तीसगढ़ के बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों के 500 अनुसूचित जनजाति के युवाओं के लिए एक परिवर्तनकारी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया हैं।किरन्दुल से 80 बच्चों को प्रशिक्षण केंद्र पहुंचाने एनएमडीसी अधिशासी निदेशक रवींद्र नारायण ने रविवार शाम 04 बजे हरी झंडी दिखाकर बस को रवाना किया।साथ ही सभी बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।इस दौरान एनएमडीसी सीजीएम उत्पादन के पी सिंह,उपमहाप्रबंधक एचआर के एल नागवेणी,सीएसआर प्रबन्धक विवेक रक्षा,संजय पाटील,एस आर गावड़े,रोशन मिश्रा बीएल तारम व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
यह कार्यक्रम सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी) हैदराबाद के सहयोग से संचालित किया जा रहा हैं,जिसमें युवाओं को प्लास्टिक और पॉलिमर प्रौद्योगिकी में तकनीकी शिक्षा पूरी तरह से निःशुल्क प्रदान की जाएगी।इस पहल के तहत एनएमडीसी ट्यूशन,प्रशिक्षण,आवास,भोजन और अन्य संबंधित खर्चों को पूर्ण रूप से प्रायोजित कर रही है। कार्यक्रम में मशीन ऑपरेटर (एनएसक्यूएफ लेवल IV सर्टिफिकेशन) जैसे अल्पकालिक पाठ्यक्रम शामिल हैं, जो 8वीं कक्षा उत्तीर्ण उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध हैं।यह छह महीने का कोर्स प्लास्टिक प्रसंस्करण,इंजेक्शन मोल्डिंग और ब्लो मोल्डिंग जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करता हैं।एनएमडीसी का यह प्रयास न केवल वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देता है, बल्कि उन समुदायों की क्षमता को भी उजागर करता है जो भारत की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं।