छत्तीसगढ़ / गरियाबंद

मनरेगा योजना बना मोहन का आय का जरिया

 डबरी निर्माण से मछली पालन, साग-सब्जी एवं कृषि कार्य कर मोहन हुए आर्थिक रूप से सशक्त

 

गरियाबंद। जिले के दूरस्थ क्षेत्र देवभोग विकासखण्ड के ग्राम पंचायत डुमरबहाल की आबादी लगभग 2 हजार 500 है। इस गांव का क्षेत्रफल 1220.25 एकड़ है। गाँव में खेती का अच्छा रकबा होते हुए भी जल की कमी के कारण किसान पर्याप्त उत्पादन नहीं ले पा रहे थे। गर्मियों में तापमान अधिक होने पर भू-जल स्तर काफी नीचे चला जाता था। ग्राम सभा में महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत डबरी निर्माण की जानकारी दी गई, जिससे वर्षा जल का संचयन कर खेतों की सिंचाई की जा सकती है। जानकारी प्राप्त करने के उपरांत  मोहन ने अपने खेत में डबरी बनाने के लिए आवेदन ग्राम पंचायत को दिया।

इसके उपरांत जिला पंचायत के माध्यम से उनके खेत में डबरी निर्माण के स्वीकृति मिलने के पश्चात हितग्राही  मोहन ने उन्होंने खेती के रकबे मे से कुछ हिस्से में महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत एक डबरी का निर्माण कराया। अब उनके पास अपनी फसलों को सूखे से बचाने के लिए खुद का जल का स्त्रोत है। अब वे बाड़ी के साथ ही साथ मछली पालन एवं साग-सब्जी, अरहर, अरबी (कोचई) लगाकर अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में कामयाब हुए है। इसमें उन्हें साग-सब्जी से लगभग 10 से 12 हजार रूपए का फायदा हुआ। इसके साथ मछली पालन से अब तक में 20 हजार तक का फायदा हुआ और लगभग 1.50 एकड़ में उन्होंने धान फसल लगाकर 50 हजार रूपये अर्जित करता। डबरी निर्माण के माध्यम से उसके आर्थिक स्थिति में सुधार आ रही है। इसके लिए उन्होंने राज्य शासन को धन्यवाद ज्ञापित किया है। वे गांव के अन्य लोगो को भी डबरी निर्माण के महत्व को बताते हुए डबरी निर्माण कराने के लिए  प्रोत्साहित करते है। उन्होंने बताया कि डबरी निर्माण कार्य से जल स्त्रोतों में भी बढ़ोतरी हुई है।

 

 

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