संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने जिले में सख्त व्यवस्था लागू : निजी कृषि केंद्रों में कृषि अधिकारियों की उपस्थिति में डीएपी वितरण शुरू, किसानों को जागरूक किया गया
बेमेतरा, 06 दिसम्बर 2025
जिले में अत्यधिक डीएपी उर्वरक के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। संचालनालाय नवा रायपुर पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए तथा एनपीके, एसएसपी एवं अन्य पोषक तत्वों के विकल्पों का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए। रबी वर्ष 2025–26 में जिले के जिन निजी उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों में 15 मीट्रिक टन से अधिक डीएपी उपलब्ध है, वहां उर्वरकों की उपलब्धता को नियंत्रित रखते हुए संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मैदानी कृषि विस्तार अधिकारी (कृ.वि.अधि.) एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (ग्रा.कृ.वि.अधि.) की ड्यूटी लगाई गई है।
निर्देशानुसार अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के निजी उर्वरक प्रतिष्ठानों में उपस्थित रहकर पीओएस मशीन के माध्यम से ही डीएपी का वितरण सुनिश्चित करेंगे, जिससे किसानों को आवश्यकता के अनुरूप संतुलित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित उर्वरक निरीक्षक द्वारा उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में जिले में आज निजी कृषि केंद्र से डीएपी वितरण की शुरुआत की गई |
एम.एस. वर्मा कृषि केन्द्र, थानखमरिया में कृषि अधिकारी की उपस्थिति में किसानों को कुल 38 बैग डीएपी उर्वरक का वितरण किया गया।
अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि डीएपी का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए एनपीके, एसएसपी जैसे संतुलित विकल्पों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। कृषि विभाग के इस सक्रिय कदम से जिले में उर्वरक उपयोग को वैज्ञानिक एवं संतुलित बनाने में मदद मिलेगी तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति किसानों में महत्वपूर्ण जागरूकता पैदा होगी।