कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र खड़गवां - क्षेत्रीय विकास की ऐतिहासिक सौगात
एमसीबी - जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के इतिहास में सोमवार को एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब विक्रम संवत 2082 माघ मास कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि के शुभ अवसर पर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र खड़गवां के नवीन भवन का विधिवत भूमिपूजन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। लगभग 9 करोड़ 46 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाला यह आधुनिक एवं बहुउद्देशीय भवन क्षेत्र के किसानों, युवाओं एवं कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन में आदिम जाति विकास, कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी, मत्स्य पालन तथा पशुधन विकास विभाग एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री रामविचार नेताम रहे। समारोह की अध्यक्षता लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास तथा 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह कृषि महाविद्यालय क्षेत्रीय विकास, किसानों के सशक्तिकरण और कृषि आधारित शिक्षा के विस्तार में दूरगामी भूमिका निभाएगा तथा पूरे अंचल के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगा।विशेष अतिथि के रूप में जनपद पंचायत खड़गवां अध्यक्ष श्रीमती श्यामबाई मरकाम, उपाध्यक्ष श्री विरेंद्र सिंह करियाम, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रिया सिंह, जनपद सदस्य श्री युगांतर श्रीवास्तव, ग्राम पंचायत पोड़ीडीह की सरपंच सुश्री जया मरावी एवं ग्राम पंचायत खड़गवां के सरपंच श्री सुखित लाल अगरिया सहित वरिष्ठ नागरिग एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।कृषि महाविद्यालय भवन का भूमिपूजन प्रभारी मंत्री श्री रामविचार नेताम एवं मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल सहित सभी जनप्रतिनिधियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हुआ। समारोह में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, किसान, छात्र एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में उत्साह, उल्लास और विकास की नई उम्मीदें स्पष्ट रूप से देखने को मिलीं।
प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र खड़गवां की स्थापना क्षेत्र के लिए एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक निर्णय है। यह महाविद्यालय माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी की स्वीकृति से संभव हो सका, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे स्थानीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल जी के सतत प्रयास और प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान इसलिए स्थापित किया गया है ताकि क्षेत्र के बेटे-बेटियाँ कृषि, उद्यानिकी एवं संबंधित विषयों की उच्च शिक्षा अपने ही अंचल में प्राप्त कर सकें और उन्हें बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। कृषि शिक्षा के माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुखी बनाकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम है। प्रभारी मंत्री ने कहा कि जिले के लगभग 80 प्रतिशत लोग खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं। कृषि महाविद्यालय के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे वे दो या तीन फसल उगा सकेंगे और अपने जीवन स्तर को बेहतर बनाएंगे।उन्होंने बताया कि सरकार कृषि को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रखते हुए मिश्रित एवं बहु-आय आधारित कृषि मॉडल को बढ़ावा दे रही है। कम पानी में अधिक लाभ देने वाली फसलों-जैसे बाजरा, रागी, ज्वार, मक्का जैसे मोटे अनाजों के उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। साथ ही दलहन, तिलहन, सरसों, मूंग, उड़द की खेती के साथ मछली पालन, मुर्गी पालन एवं पशुपालन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। जल संरक्षण एवं सीमित सिंचाई के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पूरे प्रदेश में 18 लाख आवासों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे हर गरीब परिवार को पक्का आवास मिल सके। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री ने क्षेत्र में नवीन पशु औषधालय भवन की स्वीकृति की घोषणा भी की, जिससे पशुओं के उपचार, टीकाकरण एवं स्वास्थ्य सेवाओं में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही कृषि महाविद्यालय खड़गवां में छात्रावास एवं महाविद्यालय से संबंधित आवश्यक सेटअप की मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में क्षेत्र में और भी विकास कार्यों का शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन के अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर एवं समस्त विभागीय अधिकारियों का आभार व्यक्त किया गया।