छत्तीसगढ़ / बालोद

अवैध लाल ईंट भट्ठों पर प्रशासन की चुप्पी, पर्यावरण व किसानों पर संकट

 बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में नदी किनारों और ग्रामीण इलाकों में बिना किसी वैध लाइसेंस के संचालित लाल ईंट भट्ठे खुले आम फल-फूल रहे हैं। अन्य राज्यों से आकर यहां प्रदूषण फैलाने वाले ये अवैध संचालक मोटी कमाई कर रहे हैं, जबकि शासन को भारी राजस्व हानि हो रही है। इन भट्ठों से निकलने वाले जहरीले धुएं से पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुंच रहा है और आसपास के किसानों की उपजाऊ जमीनें बंजर होती जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन पर मौन साधे रहने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों और पर्यावरण संरक्षण में कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं ने कड़ी कार्यवाही की मांग की है।


इन अवैध भट्ठों के संचालक राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति लिए बिना ही ईंट उत्पादन में जुटे हैं। बालोद जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सैकड़ों ऐसे भट्ठे चालू हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। विशेष रूप से नदी तटों पर स्थित ये इकाइयां उपजाऊ मिट्टी को खोदकर ईंट बनाने में लगी हैं, जिससे कृषि भूमि की उर्वरता नष्ट हो रही है। किसानों का कहना है कि उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं और मिट्टी की गुणवत्ता तेजी से गिर रही है।

बाहर के राज्यों से आए ये ईट भट्ठा संचालक छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा का दोहन कर रहे हैं। बिना मानक चिमनी और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के भट्ठे वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। आसपास के गांवों में धुंधला धुआं फैलने से ग्रामीणों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी और श्वास रोगों की शिकायतें बढ़ गई हैं। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ईट भट्ठे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को खराब कर रहे हैं, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।

स्थानीय निवासियों ने कई बार संबंधित विभागों को शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि भ्रष्टाचार के चलते अधिकारियों की आंखें बंद हैं। शासन के नियम स्पष्ट हैं— ईंट भट्ठा चलाने के लिए सभी स्तरों से अनुमति जरूरी है, फिर भी उल्लंघन पर कोई अंकुश नहीं।

अब समय आ गया है कि प्रशासन जागे और इन अवैध भट्ठों पर तत्काल कड़ी कार्यवाही करे। बाहर से आए संचालकों पर विशेष नजर रखी जाए, भट्ठों को सील किया जाए, जुर्माना वसूला जाए तथा दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सक्रिय होकर नियमित निरीक्षण करने चाहिए। केवल तभी छत्तीसगढ़ का पर्यावरण और किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सकेगी। जिला प्रशासन से तुरंत रिपोर्ट मांगी जाए तथा दोषी अधिकारियों पर भी कार्यवाही हो, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।

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