बालोद। जिले में अवैध रेत माफिया का कारोबार दिनोंदिन पांव पसार रहा है। डौंडी तहसील के घोटिया से लगे ग्राम पेंडरी नाले से हो रहे अनियंत्रित उत्खनन ने न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को खतरे में डाल दिया है, बल्कि जिला खनिज विभाग की निष्क्रियता ने माफियाओं के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। यह मुद्दा पर्यावरण संरक्षण के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है, जहां नदियों-नालों का दोहन नदी तटों को कटाव का शिकार बना रहा है और जैव विविधता पर संकट मंडरा रहा है। स्थानीय निवासियों की शिकायतें अनसुनी हैं, जिससे प्रशासनिक लापरवाही की आशंका गहराती जा रही है।
पेंडरी नाले से अवैध रेत उत्खनन का धंधा रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। ग्रामीण सूत्रों के अनुसार, कैलाश साहू, प्रवीण और प्रकाश जैसे स्थानीय लोग बिना किसी अनुमति के लगातार रेत की चोरी कर रहे हैं। ये माफिया दिन-रात नाले के तटों पर रोजाना ट्रेक्टर, माजदा और मेटाडोर का इस्तेमाल कर रेत निकाल रहे हैं, जिससे नाले का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है। नदी तटों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं, जो बाढ़ के दौरान जलस्तर बढ़ने पर आसपास के गांवों को खतरे में डाल सकते हैं। पर्यावरण विदों का कहना है कि यह उत्खनन मिट्टी के कटाव को बढ़ावा दे रहा है, जिससे जल संचयन की क्षमता कम हो रही है और मछलियों व अन्य जलीय जीवों का जीवन खतरे में पड़ गया है।
बालोद जिले के खनिज विभाग के अधिकारी इस मामले में पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं। न तो कोई छापेमारी हो रही है और न ही नियमित निरीक्षण। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की इस लापरवाही या संभावित मिलीभगत के कारण रेत चोर बेखौफ होकर अपना काला कारोबार चला रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि ये माफिया रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉली से रेत भरकर शहरों में बिल्डरों को बेचने ले जाते हैं, जिससे सरकारी राजस्व को भी करोड़ों का नुकसान हो रहा है। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "हमारी फसलें और मवेशी इस कटाव से प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं।"
पर्यावरण पर इसका प्रभाव बेहद विनाशकारी है। अवैध उत्खनन से नाले का जलग्रहण क्षेत्र सिकुड़ रहा है, जो भूजल स्तर को नीचे धकेल रहा है। वनों की जड़ें कमजोर हो रही हैं और मिट्टी का क्षरण तेज हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यही सिलसिला जारी रहा तो आने वाले वर्षों में सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता बढ़ेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने रेत उत्खनन पर सख्त नियम बनाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल नहीं हो रहा।
स्थानीय प्रशासन से मांग उठ रही है कि तत्काल छापेमारी कर माफियाओं पर कार्यवाही की जाए। खनिज विभाग में ईमानदार और जिम्मेदार अधिकारी की नियुक्ति की जाए ताकि पर्यावरण संकट को रोका जा सके। अन्यथा, यह छोटा सा नाला पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। बालोद जिला खनिज अधिकारी प्रवीण चंद्राकर से संपर्क करने पर उन्होंने फोन नहीं उठाया।