सच्चे मन से पुकारने पर भगवान जरूर आते है- राधेय महाराज
गरियाबंद |
16-Dec-2023
राधेश्याम सोनवानी, रितेश यादव-
श्री कृष्णजन्मोत्सव पर झूम उठे मजरकटा वासी।
गरियाबंद। जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। उक्त बातें ग्राम मजरकटा में शर्मा परिवार द्वारा आयोजित भागवत ज्ञान भक्ति यज्ञ में श्री कृष्णजन्मोत्सव के प्रसंग की व्याख्या करते हुये परम् पूज्य रमेश भाई ओझा के शिष्य पंडित सुशील राधेय महाराज ने कही। जन्मोत्सव के दौरान बाल श्री कृष्ण के रूप में नन्हे मुन्हे बच्चों को गोद में लेकर भक्त गणों ने जमकर आनन्द मनाया तथा पंजरी और चरणामृत का प्रसाद ग्रहण किया।
श्री कृष्णजन्मोत्सव प्रसंग का भाव बताते हुये महाराज श्री ने कहा कि कलयुग में भागवत की कथा सुनने मात्र से हर प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाराज जी ने कहा कि भागवत कथा एक ऐसी कथा है जिसे ग्रहण करने मात्र से ही मन को शांति मिलती है। भागवत कथा सुनने से अहंकार का नाश होता है। भागवत कथा के आयोजन से श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल है। भगवान श्रीकृष्ण की वेश में नन्हें बालक के दर्शन करने के लिए लोग लालायित नजर आ रहे थे। महाराज जी ने कहा कि जब धरती पर चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई, चारों ओर अत्याचार, अनाचार का साम्राज्य फैल गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के आठवें गर्भ के रूप में जन्म लेकर कंस का संहार किया। श्री कृष्ण के रूप में भगवान ने जन्म लेकर संसार को यह संदेश दिया कि जब जब भक्त सच्चे मन से उसे पुकारेगा तो वह आएंगे ही।
भागवत भक्ति ज्ञान यज्ञ का श्रवण करने के लिए दूर दूर श्रद्धालु आ रहे हैं और धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं।
श्री कृष्ण जन्म की कथा सुशील राधेय महाराज के मुखारबिंद से सुनाई गई एवं भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मनाया गया। कथा व्यास महाराज जी ने कहा कि श्रीमद भागवत सुनने का लाभ भी कई जन्मों के पुण्य से प्राप्त होता है। श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने और मरने की कला सिखाती है। मनुष्य को जीवन परमात्मा ने दिया है, लेकिन जीवन जीने की कला हमें सत्संग से प्राप्त होती है। सत्संग का मनुष्य के जीवन में बड़ा महत्व है। कथा व्यास ने कथा का वाचन करते हुए कहा कि भगवान भक्तों के वश में हैं। भगवान हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब जब धरती पर पाप एवं अनाचार बढ़ता है, तब–तब भगवान श्रीहरि धरा पर किसी न किसी रूप में अवतार लेकर भक्तों के संकट को हरते हैं। उन्होंने कहा कि जब कंस के पापों का घड़ा भर गया तब भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लेकर कंस का अंत किया और लोगों को पापी राजा से मुक्ति दिलाई। कथा के दौरान कथा व्यास ने अनेक भक्तिपूर्ण भजन प्रस्तुत किए भजनों को सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो थिरकने को मजबूर हो गए। इस दौरान कथा व्यास ने कहा कि आज व्यक्ति मोह माया के चक्कर में फंसकर अनीति पूर्ण तरीके से पैसा कमाने में जुटा है। जिसका परिणाम अंतत उसे भोगना पड़ता है। मानव मानव की तरह नहीं जी रहा है। श्रीमद् भागवत जीवन जीने और मरने की कला सिखाती है। उन्होंने बताया कि कलयुग में दुख के तीन कारण हैं, समय, कर्म और स्वभाव। उन्होंने कहा कि स्वभाव से जो दुखी है वो कभी सुखी नहीं हो सकता। जय और पराजय जीवन के दो पहलू है इसे हमे स्वीकार करना होगा क्योंकि जीवन को सफल बनाने के लिये दोनों आवश्यक है।
इस अवसर पर प्रथम पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अमितेश शुक्ल ने महाराज जी का आशीर्वाद ले कथा श्रवण किया।