वीबी-जी-राम-जी एक्ट-2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायत सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायकों का प्रशिक्षण सम्पन्न
विकसित ग्राम पंचायत योजना के 9 प्रमुख विकास क्षेत्रों, 318 कार्यों की श्रेणियों, मोर गांवकृमोर पानी अभियान एवं नए प्रावधानों की दी गई विस्तृत जानकारी
एमसीबी/15 जुलाई 2026
विकसित भारत-ग्राम (वीबी-जी-राम-जी) एक्ट-2025 के प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के उद्देश्य से मंगलवार को जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ में ग्राम पंचायत सचिवों एवं ग्राम रोजगार सहायकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य पंचायत स्तर पर योजनाओं के प्रभावी संचालन, विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) के लक्ष्यों की प्राप्ति तथा ग्रामीण विकास कार्यों में गति लाना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों द्वारा विकसित भारत-ग्राम (वीबी-जी-राम-जी) एक्ट-2025 के विभिन्न प्रावधानों, कार्यप्रणाली एवं नवीन दिशा-निर्देशों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। बताया गया कि अधिनियम के माध्यम से ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर, समृद्ध, जल सुरक्षित एवं सतत विकास के मॉडल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए पंचायत स्तर पर योजनाबद्ध कार्यों का चयन, जनभागीदारी तथा संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) के अंतर्गत निर्धारित 9 प्रमुख विकास क्षेत्रों (थीम) की विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को स्थानीय आवश्यकताओं एवं उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप इन सभी विषयों को ध्यान में रखते हुए अपनी वार्षिक कार्ययोजना तैयार करनी होगी, ताकि ग्रामीण विकास के प्रत्येक आयाम को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। प्रतिभागियों को योजना अंतर्गत कार्य योजना (वीबी-जी-राम-जी) के 60ः40 अनुपात के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया गया कि योजना के तहत स्वीकृत कार्यों का क्रियान्वयन निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाएगा। साथ ही 318 प्रकार के अनुमन्य कार्यों की श्रेणीवार सूची से भी अवगत कराया गया, जिससे ग्राम पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार उपयुक्त कार्यों का चयन कर सकें।
प्रशिक्षण में ग्रामीण विकास के चार प्रमुख कार्य क्षेत्रों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इनमें श्रेणी-1 जल सुरक्षा, श्रेणी-2 ग्रामीण आधारभूत संरचना, श्रेणी-3 ग्रामीण आजीविका तथा श्रेणी-4 आपदा प्रबंधन के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि इन श्रेणियों के माध्यम से जल संरक्षण, सड़क एवं सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण, रोजगार एवं आजीविका संवर्धन तथा प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आवश्यक आधारभूत तैयारियों को मजबूत किया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान “मोर गांव-मोर पानी अभियान“ पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण एवं जल संचयन से संबंधित कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाएगी। वर्षा जल संग्रहण, खेत तालाब, आजीविका डबरी, चेकडैम, रिचार्ज संरचनाएं, जल स्रोतों का संरक्षण एवं पुनर्जीवन तथा अन्य जल संवर्धन कार्यों को व्यापक स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भविष्य के जल संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि विकसित भारत-ग्राम (वीबी-जी-राम-जी) एक्ट-2025 के तहत ग्राम पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों की योजना बनाते समय जनभागीदारी को प्राथमिकता देनी होगी। ग्राम सभाओं के माध्यम से प्राप्त सुझावों के आधार पर कार्यों का चयन कर उन्हें समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके।
इस अवसर पर अधिनियम के नवीन प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 1 जुलाई 2026 से दैनिक मजदूरी दर 300 रुपये प्रभावी हो गई है। प्रशिक्षण में सचिवों एवं ग्राम रोजगार सहायकों को नई मजदूरी दर के अनुरूप कार्यों के संचालन, श्रमिकों के पंजीयन, मस्टर रोल संधारण तथा समयबद्ध भुगतान से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए गए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों ने ग्राम पंचायत सचिवों एवं ग्राम रोजगार सहायकों से अपेक्षा की कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का प्रभावी उपयोग करते हुए विकसित ग्राम पंचायत योजना को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू करें। साथ ही जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन, रोजगार सृजन एवं आधारभूत सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देते हुए ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने भी विभिन्न विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिनका विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा समाधान किया गया। प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों से अधिनियम के प्रावधानों का गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ पालन करते हुए विकसित, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर ग्राम पंचायतों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया गया।