छत्तीसगढ़ / बिलासपुर

खराब सड़कों और आवारा मवेशियों पर हाई कोर्ट सख्त, मुख्य सचिव से मांगा जवाब

 बिलासपुर । छत्तीसगढ़ की जर्जर सड़कों और हाईवे पर आवारा मवेशियों की बढ़ती समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से दोबारा विस्तृत जानकारी मांगी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव को शपथपत्र के साथ यह बताने के निर्देश दिए हैं कि सड़क सुरक्षा और आवारा मवेशियों की समस्या के समाधान के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।


9 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट और विभिन्न विभागों द्वारा दाखिल अनुपालन शपथपत्र पर विचार किया गया था। कोर्ट ने मामले की निरंतर निगरानी जारी रखने का फैसला लिया है।

मवेशियों के लिए बनाए जा रहे शेड
राज्य सरकार की ओर से दायर शपथपत्र में बताया गया कि आवारा मवेशियों की समस्या कम करने के लिए आवश्यक पशु शेड का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को सौंपी जाएगी, ताकि हाईवे और सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी से होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

सड़क सुरक्षा पर निगरानी का दावा
सरकार ने कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पालन करते हुए संबंधित विभाग लगातार सड़क सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। प्रोजेक्ट कॉरिडोर की नियमित समीक्षा की जा रही है और फील्ड अधिकारियों को किसी भी कमी को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

शपथपत्र में मांगी विस्तृत जानकारी
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा और आवारा मवेशियों की समस्या पर केवल सामान्य जानकारी पर्याप्त नहीं होगी। मुख्य सचिव को विस्तृत शपथपत्र दाखिल कर यह बताना होगा कि अब तक कौन-कौन से प्रभावी कदम उठाए गए हैं और भविष्य की कार्ययोजना क्या है।

 

 

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