मदेव मार्ग पर पुलिस निगरानी कमजोर, सुनसान इलाकों में बढ़ रही संदिग्ध आवाजाहीसरोदा-भोर
कबीरधाम |
2026-08-09 16:36:19
"विकाश शुक्ला"
कवर्धा। शहर से सरोदा रोड, सरोदा से भोरमदेव, सरोदा से भोरमदेव अभ्यारण्य के मांदाघाट क्षेत्र तथा भोरमदेव से चिल्फी-बंजारी मार्ग तक पुलिस निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह शिकायत सामने आ रही है कि इन महत्वपूर्ण और अधिकांश हिस्सों में सुनसान रहने वाले मार्गों पर पुलिस पेट्रोलिंग अथवा डायल-112 की मौजूदगी नियमित रूप से दिखाई नहीं देती। ऐसे में जंगल और सुनसान क्षेत्रों का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों तथा संदिग्ध युवाओं की आवाजाही बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कवर्धा शहर से भोरमदेव की ओर जाने वाले मार्गों पर दिन के समय तो लोगों की आवाजाही रहती है साथ ही शाम ढलने के बाद कई हिस्से अपेक्षाकृत सुनसान हो जाते हैं। सरोदा से भोरमदेव अभ्यारण्य की ओर जाने वाला मांदाघाट क्षेत्र तथा आगे चिल्फी-बंजारी मार्ग का बड़ा हिस्सा जंगल से घिरा हुआ है। ऐसे स्थानों पर पुलिस की नियमित निगरानी नहीं होने की स्थिति में किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल नजर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन मार्गों पर दूसरे जिलों के नंबर वाली बाइक और कारें भी दिखाई देती हैं। हालांकि केवल दूसरे जिले का वाहन होना किसी व्यक्ति की संदिग्ध गतिविधि का प्रमाण नहीं है, लेकिन सुनसान जंगल क्षेत्रों में लगातार बढ़ती अनजान वाहनों की आवाजाही को लेकर निगरानी व्यवस्था मजबूत किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन मार्गों पर पर्यटकों, श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों की आवाजाही होती है, वहां नियमित पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। भोरमदेव क्षेत्र धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वहीं चिल्फी-बंजारी क्षेत्र जंगल और प्राकृतिक पर्यटन के कारण भी लोगों को आकर्षित करता है। ऐसे में इन मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था केवल किसी घटना के बाद सक्रिय होने के बजाय पहले से मजबूत रहना जरूरी है।
सुनसान इलाकों में युवाओं की अनावश्यक भीड़, देर रात तक वाहनों की आवाजाही अथवा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर पुलिस को तत्काल मौके पर पहुंचने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। प्रमुख मोड़, घाट और संवेदनशील स्थानों पर समय-समय पर वाहन जांच तथा संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी भी की जा सकती है। इससे न केवल अपराध की संभावनाओं पर अंकुश लगेगा, बल्कि आम लोगों और पर्यटकों में भी सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा।
नए पुलिस कप्तान के पदभार संभालने के बाद लोगों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। क्षेत्रवासियों की मांग है कि कवर्धा-सरोदा, सरोदा-भोरमदेव, मांदाघाट और भोरमदेव-चिल्फी-बंजारी मार्गों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। आवश्यकता वाले स्थानों पर अस्थायी चेकिंग प्वाइंट स्थापित करने के साथ नियमित पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए।
विशेषकर शाम और रात के समय इन मार्गों पर पुलिस अथवा डायल-112 की प्रभावी मौजूदगी सुनिश्चित करने से संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल नजर रखी जा सकती है। प्रमुख स्थानों पर वाहन रोककर सामान्य पूछताछ, नंबर प्लेट की जांच और जरूरत पड़ने पर पहचान सत्यापन जैसी वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
फिलहाल मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष को कटघरे में खड़ा करने का नहीं, बल्कि उन सुनसान मार्गों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने का है जहां सुरक्षा की जरूरत अपेक्षाकृत अधिक है। पुलिस प्रशासन यदि इन इलाकों में नियमित पेट्रोलिंग, आकस्मिक वाहन जांच और त्वरित रिस्पांस व्यवस्था को मजबूत करता है तो संभावित अपराधों को रोकने में मदद मिल सकती है।
अब निगाहें नए पुलिस कप्तान की ओर हैं कि वे इन संवेदनशील और जंगल से लगे मार्गों की वास्तविक स्थिति का जायजा लेकर क्या ठोस व्यवस्था लागू करते हैं। लोगों को उम्मीद है कि पुलिस की गाड़ी केवल शिकायत के बाद नहीं, बल्कि घटना की संभावना वाले स्थानों पर पहले से दिखाई देगी।